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  • धनराशि वापस दिलाने की प्रक्रिया होगी अधिक किफायती, पीड़ितों को मिलेगी आर्थिक राहत

    धनराशि वापस दिलाने की प्रक्रिया होगी अधिक किफायती, पीड़ितों को मिलेगी आर्थिक राहत

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर साइबर अपराधों के पीड़ितों को आर्थिक राहत प्रदान करने और उनकी ठगी गई धनराशि वापस दिलाने की प्रक्रिया को अधिक किफायती बनाने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा रहा है। इसके तहत मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से धनराशि की वापसी की प्रक्रिया पर देय स्टाम्प शुल्क 1 हजार रूपए से घटाकर 100 रूपए किया जाएगा। इस निर्णय से संबंधित प्रक्रिया में पीड़ितों पर पड़ने वाला आर्थिक भार कम होगा और उन्हें अपनी धनराशि वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया में राहत मिलेगी। राज्य शासन की इस पहल से साइबर अपराध पीड़ितों के हितों की रक्षा और उन्हें आर्थिक राहत प्रदान करने के प्रयासों को बल मिलेगा। साइबर ठगी के मामलों में धनराशि वापस दिलाने की प्रक्रिया को कम खर्चीला बनाना पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    राज्य शासन साइबर अपराधों की रोकथाम, नागरिकों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और साइबर अपराध से प्रभावित व्यक्तियों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। नागरिकों से अपील है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें और आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं, जिससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

  • साइबर एक्सपर्ट बनने का मौका, CNLU में 60 घंटे का कोर्स; छात्र-पुलिसकर्मी समेत सभी कर सकेंगे आवेदन

    साइबर एक्सपर्ट बनने का मौका, CNLU में 60 घंटे का कोर्स; छात्र-पुलिसकर्मी समेत सभी कर सकेंगे आवेदन

    पटना
     बढ़ते साइबर अपराध, ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल हमलों के बीच चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (CNLU), पटना और केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के उपक्रम C-DAC ने मिलकर एडवांस्ड सर्टिफिकेट प्रोग्राम इन साइबर सिक्योरिटी एंड डिजिटल फोरेंसिक्स शुरू करने की पहल की है।

    बिहार पुलिस की साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट (CCSU) इसमें लॉ एनफोर्समेंट पार्टनर है। पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा के साथ कानूनी पहलुओं और डिजिटल जांच की जानकारी दी जाएगी। इच्छुक अभ्यर्थी 17 नवंबर तक CNLU की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    60 घंटे में साइबर सिक्योरिटी से डिजिटल फोरेंसिक्स तक
    CNLU के कुलसचिव प्रो. एसपी सिंह के अनुसार, पाठ्यक्रम में कुल आठ मॉड्यूल रखे गए हैं। इसमें साइबर सिक्योरिटी की बुनियादी जानकारी, नेटवर्किंग और नेटवर्क सिक्योरिटी, एथिकल हैकिंग और पेनिट्रेशन टेस्टिंग शामिल हैं।

    इसके अलावा रिवर्स इंजीनियरिंग के जरिए मालवेयर एनालिसिस, इंसिडेंट रिस्पांस, डिजिटल फोरेंसिक्स, साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट-2023 समेत साइबर कानून, प्राइवेसी और गवर्नेंस की पढ़ाई कराई जाएगी।

    डीपफेक और असली-नकली फोटो पहचानना भी सीखेंगे
    पाठ्यक्रम में साइबर फ्रॉड से निपटने के व्यावहारिक तरीके भी बताए जाएंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में बढ़ते डीपफेक के बीच प्रतिभागियों को असली और नकली फोटो की पहचान करने के तरीकों की जानकारी भी दी जाएगी।

    यह पूरा सर्टिफिकेट प्रोग्राम 30 दिन यानी कुल 60 घंटे का होगा। कक्षाएं 21 नवंबर से 20 दिसंबर 2026 तक शनिवार और रविवार को आयोजित की जाएंगी। हर दिन छह घंटे की कक्षा होगी।

    ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में होगा कोर्स
    कामकाजी लोगों और छात्रों की सुविधा को देखते हुए कोर्स को हाइब्रिड मोड में संचालित किया जाएगा। इसमें ऑनलाइन लाइव और ऑफलाइन दोनों माध्यम से प्रवेश मिलेगा

    ऑफलाइन प्रैक्टिकल कक्षाएं CNLU परिसर स्थित साइबर सेंटर में होंगी। कुल 45 सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा।

    ऑफलाइन के लिए 24 हजार, ऑनलाइन की फीस 18 हजार
    ऑफलाइन मोड में दाखिला लेने वाले प्रतिभागियों को 24 हजार रुपये फीस देनी होगी, जबकि ऑनलाइन लाइव मोड की फीस 18 हजार रुपये निर्धारित की गई है।

    फीस में ट्यूशन, डिजिटल स्टडी मैटेरियल, प्रैक्टिकल सेशन और परीक्षा शामिल हैं। मूल्यांकन में 50 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करने वाले प्रतिभागियों को CNLU और C-DAC की ओर से संयुक्त प्रमाणपत्र दिया जाएगा।

    C-DAC वैज्ञानिक और साइबर एक्सपर्ट देंगे ट्रेनिंग
    पाठ्यक्रम में C-DAC के वैज्ञानिक, बिहार पुलिस की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई के अधिकारी, राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा स्कॉलर और डिजिटल फोरेंसिक एक्सपर्ट विषयों की जानकारी देंगे।

    इससे प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा और डिजिटल जांच के तकनीकी पहलुओं के साथ-साथ वास्तविक मामलों से जुड़े व्यावहारिक अनुभव भी मिलेंगे।

    छात्र से लेकर पुलिसकर्मी तक कर सकते हैं आवेदन
    किसी भी संकाय के स्नातक और अंडरग्रेजुएट छात्र इस पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं। इसके अलावा लॉ और इंजीनियरिंग के विद्यार्थी, IT प्रोफेशनल्स, पुलिसकर्मी, न्यायिक अधिकारी और शिक्षक भी आवेदन कर सकते हैं।

    खास बात यह है कि आवेदन के लिए पहले से कोडिंग या प्रोग्रामिंग का अनुभव जरूरी नहीं है। कंप्यूटर की सामान्य जानकारी होना पर्याप्त है।

    पाठ्यक्रम में नेटवर्क सिक्योरिटी, एथिकल हैकिंग, मालवेयर एनालिसिस, डिजिटल फोरेंसिक्स, साइबर इन्वेस्टिगेशन और DPDP एक्ट जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।