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  • बारिश ने बिगाड़ा किसानों का हिसाब, अलीगढ़ में धान-बाजरा की फसल को भारी नुकसान

    बारिश ने बिगाड़ा किसानों का हिसाब, अलीगढ़ में धान-बाजरा की फसल को भारी नुकसान

    अलीगढ़
    यूपी के अलीगढ़ में शुक्रवार की रात को आसमान से गिरी हल्की बौछार आधी रात के बाद रिमझिम बारिश में बदल गई। इस दौरान तेज ठंडी हवाओं ने जहां एक तरफ गर्मी से राहत दी तो वहीं ये हवाएं किसानों पर आफत बनकर टूटी। कई ग्रामीण इलाकों में किसानों की पकी फसल जमींदोज हो गई। धान, बाजरा और ज्वार की फसल में नुकसान बताया गया है।

    रिमझिम बारिश गर्मी से राहत प्रदान करने वाली तो रहीं लेकिन इस बारिश ने किसान का हिसाब बिगाड़ दिया। इस समय अधिकतर खेतों में धान की फसल खड़ी है। कुछ की फसल पक चुकी है तो कुछ पर बालियां आ रही हैं। ऐसे में तेज हवा ने फसल को जमीन पर बिछा दिया। इस प्राकृतिक आपदा में किसान कुछ न कर सके। सिर पर हाथ रखे किसान अपने नुकसान का आंकलन कर रहे हैं। जिले में धान का रकबा 1 लाख 64 हजार हेक्टेयर है। लगभग सभी जगहों से नुकसान की सूचनाएं आ रही हैं। कृषि विभाग की टीम भी बारिश के दौरान विभिन्न ब्लॉक में भ्रमणशील रही। इस दौरान अकराबाद, गोंडा, गभाना, हरदुआगंज, गंगीरी में फसल नुकसान की बात कही जा रही है।

    वहीं धनीपुर में भी खेतों में धान जमीन पर आ गया है। धान पानी में डूबने से गुणवत्ता प्रभावित होती है। बाबूपुर के किसान चौ. नवाब सिंह ने बताया कि उनकी पांच एकड़ में लगी धन की फसल जमीन पर बिछ गई है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार रविवार को भी इसी तरह बारिश की स्थिति रह सकती है। ऐसे में किसानों को आशंका सता रही है कि बचा हुआ धान भी न गिर जाए। धान के अलावा किसानों की बाजरा और ज्वार की फसल में भी नुकसान बताया गया है। जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि टीम जगह-जगह जाकर खेतों की स्थिति देख रही है। खेतों की स्थिति को सूचीबद्ध किया जा रहा है।

    तेज हवा व बारिश से फसल को नुकसान
    गभाना में शनिवार को सुबह से तेज हवा के साथ पड़ी बारिश धान की फसल के लिए नुकसानदायक रही। धान के साथ ही बाज़रा की फसल खेतों में गिर गई। तहसील क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ धान की फसल जमीन पर लेट गई है। किसानों को इस बात की आशंका सता रही है कि, कही फिर इसी तरह तेज बारिश हो गई तो खेत में पानी लग जायेगा और गिरी फसलों की बालियां अंकुरित होने लगेंगी। किसान लालपुर निवासी ललित, पनिहावर निवासी वीरपाल, भरतरी निवासी हीरेश कुमार मलिकपुरा निवासी शेरपाल सिंह का कहना है कि यह बारिश नुकसानदायक है। किसानों ने प्रशासन से जांच कर कर मुआवजे की मांग की है।

    किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
    चंडौस में शनिवार सुबह से रही लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी भरने से जहां धान की फसल जलमग्न हो गई है, वहीं तेज बारिश के चलते कई खेतों में खड़ी फसल गिर गई। इससे किसानों को नुकसान की आशंका है। ताजपुर के किसान रुकनपाल् सिंह तोमर पुत्र जोगिंदर सिंह तोमर की करीब 10 बीघा धान की फसल बारिश के कारण खेत में गिर गई। किसान के अनुसार फसल गिरने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

    मंडी में धान की बंपर आवक बारिश से भाव धड़ाम
    खैर में कृषि उत्पादन मंडी समिति में धान की बंपर आवक के बीच शनिवार को हुई बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी। बारिश से मंडी में खुले में पड़ा धान भीग गया। वहीं धान के भाव में भी अचानक गिरावट आ गई। शुक्रवार तक करीब चार हजार रुपये क्विंटल तक बिक रहा धान शनिवार को घटकर 3000 से 3500 रुपये क्विंटल तक पहुंच गया। भाव गिरने से किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है। वहीं मंडी में धान की खरीद भी प्रभावित हुई।

  • पालीगंज में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर एसडीएम ने फसल क्षति का सर्वे करने के दिए निर्देश

    पालीगंज में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर एसडीएम ने फसल क्षति का सर्वे करने के दिए निर्देश

    पालीगंज
    पुनपुन नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है। इससे बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों ने राहत की सांस ली है। दहिया पंचायत के रूपापुर, बाला बिगहा, हेल्हा तथा कटका पैगम्बरपुर पंचायत के कौरी गांव से बाढ़ का पानी निकल गया है और सूख गया है। लेकिन पानी उतरने के बाद बर्बादी की जो तस्वीर सामने आई है, उसने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। करीब सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।

    बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह पुनपुन नदी के उफान पर आने से पालीगंज प्रखंड के नदी किनारे बसे करीब एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था।

    दहिया और कटका पैगम्बरपुर पंचायत के निचले इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। तीन से चार दिनों तक खेतों में चार से पांच फीट तक पानी भरा रहा। जिससे खेतों में रोपा गया धान पूरी तरह डूब गया और सड़ गया।

    खेतों में सिर्फ सड़ी हुई फसल और मिट्टी की मोटी परत
    अब जब पानी सूखा है तो खेतों में सिर्फ सड़ी हुई फसल और मिट्टी की मोटी परत दिख रही है। किसान हाथ पर हाथ धरे खेत के किनारे खड़े हैं। किसानों का कहना है कि इस साल उन्होंने कर्ज लेकर महंगे दर पर धान की रोपनी कराई, पटवन किया और यूरिया, डीएपी खाद डाला। उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी तो कर्ज चुकाकर कुछ बचत होगी। लेकिन बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया।

    रूपापुर के किसान सुरेश प्रसाद ने बताया कि पांच बीघा में धान लगाया था, सब खत्म हो गया। बाला बिगहा के किसान राजू कुमार ने कहा कि केसीसी से लोन लेकर खेती की थी, अब बैंक का कर्ज कैसे चुकाएंगे। दोबारा रोपनी का समय भी निकल चुका है, इसलिए इस साल खेत खाली रहने की आशंका है।

    प्रभावित गांवों का दौरा कर पीड़ित किसानों से मुलाकात
    वहीं किसानों की समस्या को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी चन्दन कुमार ने प्रभावित गांवों का दौरा कर पीड़ित किसानों से मुलाकात की थी। उन्होंने किसानों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। एसडीएम ने कृषि विभाग को निर्देश दिया है कि बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसलों का जल्द से जल्द सर्वे कर आंकलन रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि प्रभावित किसानों को फसल क्षति मुआवजा और सरकारी सहायता का लाभ मिल सके।

    कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार दहिया और पैगम्बरपुर इलाके में सैकड़ों एकड़ से अधिक धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट तैयार कर जिला कृषि पदाधिकारी को भेजी जाएगी।