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  • गोशालाओं को अब संरक्षण के साथ बनाया जाएगा आत्मनिर्भरता का मॉडल

    गोशालाओं को अब संरक्षण के साथ बनाया जाएगा आत्मनिर्भरता का मॉडल

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण को अधिक प्रभावी, व्यवस्थित और आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी तेज हो गई है। इसी क्रम में गोशालाओं को प्राकृतिक कृषि, जैविक उर्वरक, बायोगैस, पंचगव्य आधारित उत्पादों और ग्रामीण रोजगार से जोड़ने की दिशा में उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (UPCAR) के संयुक्त सहयोग से कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में 25 सूत्रीय एजेंडे पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    पिकअप भवन में आयोजित बैठक में गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने गोवंश संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना में वर्तमान में एक से चार गोवंश सुपुर्द किए जाने की सीमा बढ़ाकर अधिकतम 10 गोवंश किए जाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे अधिक संख्या में इच्छुक कृषक और पशुपालक गोवंश संरक्षण से जुड़ सकेंगे तथा योजना की पहुंच और प्रभाव बढ़ेगा।

    आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल ने विभिन्न मंडलों और जनपदों में गोवंशों की देखभाल और गोशाला प्रबंधन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को गंभीरता व जिम्मेदारी के साथ काम करने की अपेक्षा की।

    आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय ने सड़क दुर्घटनाओं अथवा अन्य कारणों से घायल गोवंशों को तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए 24×7 समर्पित एंबुलेंस सेवा शुरू करने का सुझाव दिया। इसके जरिए घायल गोवंशों को तत्काल निकटतम पशु चिकित्सालय या उपयुक्त चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाया जा सकेगा। सदस्य दीपक गोयल ने गोशालाओं में मृत होने वाले गोवंशों के सम्मानजनक और व्यवस्थित निस्तारण के लिए स्थानीय परिस्थितियों व निर्धारित मानकों के अनुरूप समर्पित स्थल विकसित करने का सुझाव दिया। सदस्य राजेश सिंह सेंगर ने गोशालाओं  के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की अपेक्षा की।

    कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार ने आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के सुझावों पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता गोशालाओं को अधिक व्यवस्थित और आत्मनिर्भर बनाना है। 

    किसानों के यहां वीबीजी-रामजी योजना के तहत पक्के कैटल शेड, यूरिन टैंक और नाद के निर्माण, बड़े गो संरक्षण केंद्रों और अस्थायी गो आश्रय स्थलों में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना तथा गोबर-गोमूत्र से जीवामृत, घन जीवामृत, बीजामृत और अन्य कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार कर उनके विपणन की व्यवस्था पर विचार हुआ। कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार ने संबंधित विभागों को आयोग द्वारा प्रस्तुत विषयों पर आवश्यक समन्वय के साथ आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस दौरान उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च के डीजी डॉ. संजय सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

  • गोसेवा पर हरियाणा का बड़ा फोकस, 12 साल में तीन गुना हुईं गोशालाएं, बजट 300 गुना बढ़ा

    गोसेवा पर हरियाणा का बड़ा फोकस, 12 साल में तीन गुना हुईं गोशालाएं, बजट 300 गुना बढ़ा

    चंडीगढ़.

    हरियाणा में वर्ष 2014 से पहले केवल 200 गोशालाएं थीं और उनका वार्षिक बजट मात्र दो करोड़ रुपये था। वर्तमान सरकार की प्राथमिकताओं के फलस्वरूप आज प्रदेश में गोशालाओं की संख्या बढ़कर 650 हो चुकी है, जबकि इनका बजट बढ़ाकर रिकॉर्ड 600 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

    इन गोशालाओं में वर्तमान में चार लाख से अधिक बेसहारा गोवंश की देखभाल की जा रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को पंजाब के जिला पटियाला स्थित समाना में आयोजित गोकथा में यह जानकारी दी। हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि प्रदेश की 350 गोशालाओं में विशाल शेड और सौर ऊर्जा (सोलर) प्लांट स्थापित किए गए हैं। नई गोशालाओं की स्थापना हेतु जमीन की रजिस्ट्री पर लगने वाली एक प्रतिशत स्टांप ड्यूटी को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ने युवाओं को नशे की सामाजिक बुराई से बचाने के लिए बड़ा अभियान चला रखा है। नशे के सौदागरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है। पंजाब सरकार की अनदेखी के कारण यहां का युवा नशे की गिरफ्त में फंसता जा रहा है, जबकि हरियाणा में युवाओं को मैदानों से जोड़ने के लिए 2000 खेल नर्सरियां स्थापित की गई हैं। इनमें प्रतिदिन लगभग 40 लाख युवा अभ्यास करते हैं। खेल नीति का परिणाम है कि हाल ही में कामनवेल्थ गेम्स में भारत द्वारा जीते गए कुल 39 मेडल (13 गोल्ड) में से अकेले हरियाणा के खिलाड़ियों ने सात गोल्ड मेडल हासिल किए। गर्व की बात यह है कि पांच स्वर्ण पदक हरियाणा की बेटियों ने अपने नाम कर देश और प्रदेश का नाम विश्व पटल पर रोशन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने अभूतपूर्व प्रगति की है। सड़क और रेल कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं तथा रिकॉर्ड संख्या में नए मेडिकल कॉलेज , यूनिवर्सिटी, आइआइटी और आइआइएम खोले गए हैं। राज्य के 22 में से 17 जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। वर्ष 2014 से पूर्व हरियाणा को प्रतिवर्ष केवल 500 डाक्टर मिलते थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 3000 प्रतिवर्ष हो गई है। इसके साथ ही हरियाणा में युवाओं को बिना किसी खर्ची-पर्ची के पूर्ण पारदर्शिता से सरकारी नौकरियां दी जा रही हैं, जबकि पड़ोसी राज्य पंजाब में युवाओं के साथ नौकरियों के वितरण में लगातार भेदभाव किया जा रहा है।