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  • लखनऊ की हवा सबसे साफ, बिहारशरीफ सबसे प्रदूषित; जानें पटना समेत शहरों की रैंकिंग

    लखनऊ की हवा सबसे साफ, बिहारशरीफ सबसे प्रदूषित; जानें पटना समेत शहरों की रैंकिंग

    पटना
    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सोमवार को स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणाम घोषित कर दिए। लखनऊ की हवा देश में सबसे स्वच्छ पाई गई। लखनऊ ने 200 में 198 अंक प्राप्त किए हैं। वहीं, इंदौर को 197 अंक मिले। जबलपुर 195 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है। सर्वे में अलग-अलग श्रेणियों में बिहार के तीन शहरों ने जगह बनाई है। इनमें पटना ने 178 अंक प्राप्त कर 16वां स्थान प्राप्त किया जबकि मुजफ्फरपुर को 28वीं और गया जी को 35वीं रैक हासिल हुई है। वहीं, बिहारशरीफ देश में सबसे प्रदूषित शहर बना।

    वहीं, राजधानी दिल्ली 21वें और मुंबई 28वें स्थान पर रही। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी (कैटेगरी-1) में दिल्ली को 172, मुंबई को 160.8 अंक मिले। झारखंड की राजधानी रांची 162.5 अंकों के साथ 27वें क्रम पर रही। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 की अगल-अलग श्रेणी में यूपी के 16 शहरों ने जगह बनाई है। सर्वे के अनुसार, पटना की हवा दिल्ली, रांची, बेंगलुरु और कोलकाता से अच्छी है। पिछले सर्वे के मुकाबले इस बार पटना की स्थिति में नौ अंकों का सुधार भी हुआ है।

    पटना के वार्ड को मिला पुरस्कार
    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में पहली बार देशभर में वार्ड स्तर पर भी मूल्यांकन किया गया। इसमें पटना के वार्ड 9 और 43 को राज्य स्तर पर पहला पुरस्कार मिला है।मालूम हो कि दोनों वार्डों को पुरस्कार के रूप में कुल 40 लाख रुपये मिले हैं। इस राशि का उपयोग संबंधित वार्डों में वायु प्रदूषण नियंत्रण, हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण सुधार से जुड़े कार्यों पर किया जाएगा।

    तीन श्रेणियों में हुआ वार्डों का मूल्यांकन
    वार्ड स्तर पर मूल्यांकन के लिए 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वार्डों को आबादी के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया था। श्रेणी-1 में 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों का मूल्यांकन किया गया। इस श्रेणी में पटना नगर निगम के वार्ड संख्या-43 ने राज्य स्तर पर पहला स्थान हासिल किया। इसके लिए निगम को 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिली है। इस राशि का उपयोग राजेंद्र नगर, महमूदी चक, मैला टंकी रोड, आर्य कुमार रोड और पाटलिपुत्र पथ सहित अन्य इलाकों में वायु प्रदूषण कम करने से जुड़े कार्यों पर किया जाएगा।

    वहीं, 10 हजार से 30 हजार की आबादी वाले वार्डों को श्रेणी-2 में रखा गया था। इस श्रेणी में पाटलिपुत्र अंचल के वार्ड संख्या-9 ने राष्ट्रीय स्तर के शीर्ष नौ वार्डों में स्थान बनाया और राज्य स्तर पर पहला स्थान हासिल किया।

    वार्ड संख्या-9 के लिए निगम को 15 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिली है। इस राशि का उपयोग एयरपोर्ट, राजवंशी नगर, हार्डिंग रोड और कौशल नगर सहित अन्य इलाकों में वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कार्यों पर किया जाएगा।

    वार्ड 9 के क्षेत्र
    लोक भवन,मुख्यमंत्री आवास, चिड़ियाघर,राजधानी वाटिका, सचिवालय,विधानसभा क्षेत्र आदि

    वार्ड 43 के क्षेत्र
    राजेंद्र नगर का पूरा इलाका,मोइनुल हक स्टेडियम,बहादुरपुर आदि

    पिछले वर्ष पटना 27वें स्थान पर था
    पटना नगर निगम ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में देशभर के 48 शहरों में 16वां स्थान हासिल किया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 11 पायदान का सुधार है। पिछले वर्ष पटना इस सर्वेक्षण में 27वें स्थान पर था।

    ये रहे टॉप-5 शहर
    लखनऊ (उत्तर प्रदेश) 198 अंक (रैंक-1)

    इंदौर (मध्य प्रदेश) 197 अंक (रैंक-2)

    जबलपुर (मध्य प्रदेश) 195 अंक (रैंक-3)

    भोपाल (एमपी)/आगरा (यूपी) 192 अंक (संयुक्त रूप से रैंक-4)

    सूरत (गुजरात) 191 अंक (रैंक-5)

    पुरस्कार राशि
    लखनऊ – 1.5 करोड़

    इंदौर – 1.0 करोड़

    जबलपुर – 50 लाख

  • 1100 ई-वाहन से 97 स्वीपिंग मशीन तक, इन प्रयासों से लखनऊ बना देश का सबसे स्वच्छ वायु वाला शहर

    1100 ई-वाहन से 97 स्वीपिंग मशीन तक, इन प्रयासों से लखनऊ बना देश का सबसे स्वच्छ वायु वाला शहर

    लखनऊ
    स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में लखनऊ ने देशभर में पहला स्थान हासिल कर राजधानी का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर दिया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में सोमवार को आयोजित स्वच्छ वायु दिवस कार्यक्रम में लखनऊ को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत नेशनल बेस्ट परफॉर्मिंग सिटी रैंक-1 का सम्मान प्रदान किया गया। इसके साथ ही नगर निगम के जोन-4 स्थित वार्ड संख्या-70 (पेपर मिल) को 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में देश का सर्वश्रेष्ठ वार्ड चुना गया।

    सम्मान समारोह में महापौर सुषमा खर्कवाल, नगर आयुक्त गौरव कुमार, अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव और पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान ने पुरस्कार प्राप्त किया। लखनऊ को प्रथम स्थान के साथ 1.50 करोड़ रुपये और वार्ड-70 को 50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।

    दिल्ली में मिला राष्ट्रीय सम्मान
    राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा तथा पर्यावरण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह सम्मान प्रदान किया। स्वच्छ वायु के क्षेत्र में किए गए कार्यों के मूल्यांकन के बाद लखनऊ को देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला शहर घोषित किया गया।

    प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों का मिला पुरस्कार
    नगर निगम ने पिछले वर्षों में वायु प्रदूषण कम करने के लिए कई स्तरों पर काम किया। डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण के लिए करीब 1100 इलेक्ट्रिक वाहनों को सड़क पर उतारा गया। इनके संचालन की निगरानी जीपीएस आधारित कंट्रोल कमांड सेंटर से की जा रही है। शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग ढांचे का भी विस्तार किया गया।

    धूल कम करने के लिए मशीनों का सहारा
    सड़कों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए 97 इलेक्ट्रिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें लगाई गईं। प्रमुख मार्गों पर नियमित सफाई और पानी का छिड़काव किया गया। वहीं 559.85 किलोमीटर सड़कों को पूरी तरह पक्का कर धूल प्रदूषण को कम करने की दिशा में काम किया गया।

    कचरा प्रबंधन बना सफलता की बड़ी वजह
    शहर में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे के शत-प्रतिशत वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था विकसित की गई। ताजा कचरे की डंपिंग बंद कर दी गई है। निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के निस्तारण के लिए अलग व्यवस्था और 300 टीपीडी क्षमता का संयंत्र भी संचालित किया जा रहा है। इससे प्रदूषण नियंत्रण में उल्लेखनीय मदद मिली।

    हरियाली और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा
    शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने, वर्टिकल गार्डन विकसित करने, इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बढ़ाने और यातायात सुधार के लिए भी व्यापक काम किया गया। वर्तमान में शहर में 140 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं। इसके साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक पर कार्रवाई, नालों की सफाई और नदियों में कचरा जाने से रोकने जैसे कदम भी उठाए गए।

    महापौर बोलीं- यह पूरे लखनऊ की उपलब्धि
    महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान मिलना पूरे शहर के लिए गर्व की बात है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व, नगर विकास मंत्री के मार्गदर्शन, नगर निगम की टीम की मेहनत और शहरवासियों के सहयोग को दिया।

    इन पांच कारणों से नंबर-1 बना लखनऊ
    — 1100 इलेक्ट्रिक कूड़ा वाहन सड़क पर उतारकर डीजल वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी लाई गई।

    — 97 मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों से सड़क की धूल नियंत्रित की गई और नियमित पानी का छिड़काव कराया गया।

    — 100 प्रतिशत वैज्ञानिक कचरा निस्तारण की व्यवस्था लागू कर ताजा कचरे की डंपिंग बंद की गई।

    — 559.85 किलोमीटर सड़कों का पक्कीकरण कर उड़ती धूल और प्रदूषण को कम किया गया।

    —हरियाली, इलेक्ट्रिक बसों और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देकर शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने पर लगातार काम किया गया।

  • स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में रांची 27वें पायदान पर, धनबाद ने बेहतर प्रदर्शन किया

    स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में रांची 27वें पायदान पर, धनबाद ने बेहतर प्रदर्शन किया

    रांची
     National Clean Air Survey-2026 केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में झारखंड की राजधानी रांची 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में 27वें स्थान पर रही। रांची का स्कोर 162.5 रहा। वहीं रांची से बहुत बेहतर प्रदर्शन धनबाद का रहा। धनबाद 17वें स्थान पर रहकर 174.5 अंक के साथ रांची से आगे रहा।

    झारखंड की औद्योगिक नगरी जमशेदपुर को 37वां स्थान मिला, जिसका स्कोर 147.3 रहा। सर्वेक्षण में शहरों में वायु प्रदूषण कम करने के प्रयास, उनकी प्रभावशीलता और परिणामों का आकलन किया गया। रांची नगर निगम के वार्ड 26, 29 और 15 को सबसे स्वच्छ वार्डों में शामिल किया गया। सर्वेक्षण में सीपीसीबी की भी भूमिका रही।

    48 शहरों की श्रेणी में 27वीं रैंक
    इस बार 10 लाख से अधिक आबादी वाले 48 शहरों को एक श्रेणी में शामिल किया गया है। रैंकिंग तय करने में तालिका में दिए गए क्रमांक के बजाय अलग से दर्ज ‘रैंक’ को आधार बनाया गया है। इसी आधार पर रांची की रैंक 27 है। उसका अंतिम प्राप्तांक 162.5 दर्ज किया गया है।

    रांची से आगे रहने वाले पटना को 178 अंक मिले हैं और वह 16वें स्थान पर है। धनबाद को 174.5 अंक मिले और वह 18वें स्थान पर रहा। दोनों शहरों के प्राप्तांक रांची के मुकाबले अधिक हैं।

    लखनऊ शीर्ष पर, मदुरै 39वें स्थान पर
    सर्वेक्षण की सूची में लखनऊ 198 अंक के साथ पहले स्थान पर रहा। इंदौर 197 अंक के साथ दूसरे और जबलपुर 195 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भोपाल और आगरा दोनों को 192-192 अंक मिले और दोनों चौथे स्थान पर रहे।
    सूची के निचले हिस्से में मदुरै 39वें स्थान पर है। उसका अंतिम प्राप्तांक 132.1 रहा। हालांकि सूची में 48 शहर शामिल हैं, उपलब्ध तालिका के ‘रैंक’ खाने में मदुरै के लिए 39 दर्ज है। इसलिए उसे 48वें स्थान पर बताना सही नहीं होगा। उपलब्ध रैंक और प्राप्तांक के आधार पर मदुरै की स्थिति 39वें स्थान की ही मानी गई है।

    शहर की रैंकिंग के बीच वार्डों से राहत
    पूरे शहर की रैंकिंग में रांची भले ही पीछे रही हो, लेकिन वार्ड स्तर पर शहर के दो हिस्सों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य स्तरीय वार्ड रैंकिंग में 30 हजार से अधिक आबादी वाली श्रेणी में रांची नगर निगम का वार्ड-29 शामिल हुआ है। वहीं 10 हजार से 30 हजार आबादी वाली श्रेणी में वार्ड-26 ने जगह बनाई है।

    वार्ड स्तर पर इन दोनों की मौजूदगी रांची के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे यह भी पता चलता है कि शहर के कुछ हिस्सों में स्वच्छ वायु और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रयासों का असर दिखाई दे रहा है।

    हालांकि पूरे शहर की रैंकिंग 27वें स्थान पर रहना यह सवाल भी खड़ा करता है कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले वार्डों में अपनाए जा रहे उपायों को नगर निगम के दूसरे क्षेत्रों में कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।