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  • अवैध वेतन निकासी केस में बड़ा अपडेट, शुभम कुमार पर 14 सितंबर से पहले चार्जशीट दाखिल करेगी CID

    अवैध वेतन निकासी केस में बड़ा अपडेट, शुभम कुमार पर 14 सितंबर से पहले चार्जशीट दाखिल करेगी CID

    रांची
    खूंटी के स्पेशलाइज्ड इंडिया रिजर्व बटालियन-2 (एसआईआरबी-2) के खाते से 22.46 लाख रुपये की अवैध निकासी मामले में सीआइडी अपनी पहली चार्जशीट करने की तैयारी में है। इस मामले में एक लेखापाल सह सिपाही शुभम कुमार की गिरफ्तारी हुई थी।

    आने वाले 14 सितंबर को शुभम कुमार की गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में सीआईडी दो दिनों के भीतर चार्जशीट कर देगी। सीआइडी ने अब तक की जांच में पाया है कि सिपाही शुभम कुमार ने वर्ष 2019 से 2021 के बीच करीब 28 बार में कुल 22.46 लाख रुपये स्थानांतरित की थी। खूंटी पुलिस ने ही उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था

    उसका दूसरा सहयोगी सिपाही अजित कुमार अब भी फरार है। आरोपित शुभम कुमार ने अस्थाई आइडी बनाकर अवैध वेतन की राशि को विभिन्न खातों में स्थानांतरित की है। अवैध निकासी के मामले में सबसे पहले खूंटी थाने में 21 मई 2026 को कांड संख्या 72/26 में खूंटी के कोषागार पदाधिकारी शिव कुमार सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

    तब वहां के अनुसंधान पदाधिकारी खूंटी के थानेदार अशोक कुमार सिंह ने ही मुख्य आरोपित सह लेखापाल सिपाही शुभम कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सीआइडी ने इस केस को 13 जुलाई को टेकओवर करते हुए कांड संख्या 15/2026 में केस री-रजिस्टर्ड की थी।

    इसके बाद से ही आरोपित शुभम कुमार के विरुद्ध सीआईडी ने साक्ष्य संकलित किया, ताकि उसके विरुद्ध निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल की जा सके।

    सात जिलों में अवैध वेतन निकासी मामले की जांच कर रही है CID
    सीआईडी झारखंड के सात जिलों में अवैध वेतन निकासी मामले की जांच कर रही है। सबसे पहला मामला बोकारो में आया था। इसके बाद एक-एक कर छह और जिलों में अवैध वेतन निकासी का मामला सामने आया।

    इन जिलों में हजारीबाग, पश्चिमी सिंहभूम, रांची, रामगढ़, देवघर व खूंटी में मामला सामने आया है। बोकारो में जिला कोषागार से 11 करोड़, हजारीबाग में 31 करोड़, पश्चिमी सिंहभूम में 27 लाख की अवैध निकासी का मामला उजागर हो चुका है।

    वहीं, रांची में 2.94 करोड़, रामगढ़ में 35 लाख व देवघर में 99.06 लाख रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आ चुका है। इन जिलों से गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। सीआईडी इन सभी जिलों से जुड़े मामले की जांच कर रही है।

  • JSSC CGL केस में ICN पर शिकंजा, बिहार से दिल्ली तक दर्ज मामलों की जांच में जुटी CID

    JSSC CGL केस में ICN पर शिकंजा, बिहार से दिल्ली तक दर्ज मामलों की जांच में जुटी CID

     रांची
    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की सीजीएल परीक्षा संचालन में शामिल एजेंसी आईसीएन को लेकर भी सीआईडी की एसआईटी को कई अहम जानकारियां मिलीं हैं।

    आईसीएन एजेंसी पहले से ही केंद्रीय एजेंसियों व राज्य बोर्ड के माध्यम से ब्लैकलिस्ट थी। अब सीआईडी यह पता लगा रही है कि जब एजेंसी ब्लैकलिस्ट थी तब उसे जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के संचालन का काम कैसे मिला।

    सीआईडी ने रिमांड पर लिए गए आईसीएन के दो कर्मियों सोमांश प्रकाश व राहुल कुमार से तीसरे दिन भी पूछताछ में इसपर सवाल किया है। दिल्ली से गिरफ्तार दोनों ही आरोपित सीआईडी की पांच दिनों की रिमांड पर हैं।

    सीआईडी उनकी एजेंसी आईसीएन की जेएसएससी सीजीएल परीक्षा संचालन में भूमिका की भी जानकारी जुटा रही है। सीआईडी यह जानना चाह रही है कि परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स वेबेल टेक्नोलॉजी का आईसीएन के साथ किस तरह का करार था।

    आईसीएन के विरुद्ध बिहार के शास्त्रीनगर थाने में भी दर्ज है प्राथमिकी
    परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी आईसीएन के विरुद्ध पटना के शास्त्रीनगर थाने में भी वर्ष 2019 में प्राथमिकी दर्ज है। बिहार पुलिस सिपाही भर्ती (सीएसबीसी पटना, विज्ञापन सं. 02/2018) के दौरान आईसीएन ने अभ्यर्थियों से फार्म फीस के तौर पर वसूले गए 14,06,39,674 रुपये बोर्ड के खाते में जमा नहीं किया था।

    इस मामले में शास्त्री नगर थाने में 2019 में 409 व 420 भादवि के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बोर्ड ने कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था।

    पटना हाईकोर्ट ने भी 2021 में कंपनी के खिलाफ पारित ब्लैकलिस्टिंग के फैसले को सही ठहराया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय के पुलिस फाइनेंस-V विंग ने भी 13 फरवरी 2024 को जारी आदेश के तहत आईसीएन कंपनी को मंत्रालय और उसके सभी अधीनस्थ विभागों से एक साल के लिए काली सूची में डाल दिया था।

     

  • राष्ट्रीय सुरक्षा मामला: मुश्ताक से पूछताछ तेज, BSF गतिविधियों की जानकारी भेजने के आरोप में जांच जारी

    राष्ट्रीय सुरक्षा मामला: मुश्ताक से पूछताछ तेज, BSF गतिविधियों की जानकारी भेजने के आरोप में जांच जारी

    जयपुर
    पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोपी मुश्ताक को आज 5 दिन की रिमांड पूरी होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट में सीआईडी इंटेलिजेंस ने 3 दिन की रिमांड मांगी. कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए तीन की रिमांड दी है. स्पेशल पीपी सुदेश सतवान ने बताया कि कोर्ट से 3 दिन की और रिमांड मांगी है, ज‍िससे आरोपी की कॉल डिटेल, रिकॉर्ड और बैंक खातों के बारे में विस्तृत पूछताछ की जा सके. आरोपी 2 साल से पाक हैंडलर्स के संपर्क में था, ऐसे में हर एंगल से पूछताछ की जा रही है.

    5 दिन के रिमांड पर पूछताछ
    उन्होंने बताया कि सीआईडी ने 5 दिन की रिमांड पर आरोपी से जैसलमेर में जहां रहा. जहां के फोटो और वीडियो उसने शेयर किए हैं.  जांच एजेंसी ने वहां ले जाकर, उससे पूछताछ की है. उन सभी जगहों पर ले जाकर तफ्तीश की गई है.

    सीआईडी हर एंगल से जांच कर रही  
    सीआईडी हर एंगल से मामले की जांच कर रही है. एजेंसी को शक है कि शायद कोई अन्य स्थानीय लोग भी इस पूरे मामले में उसका सहयोग कर रहे थे. साथ ही, ऑपरेशन सिंदूर के वक्त भी कोई जानकारी उसने साझा की है क्या, इस मामले में भी जांच हो रही है.  

    पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था
    अभी तक कि जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले दो साल से पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था, और उनके निर्देश पर उसने एक चाय की दुकान खोली थी, जहां लाइव फीड कैमरे लगाने की तैयारी भी की जा रही थी.  

    BSF की गतिविधियों पर नजर रखता था
    मुश्ताक सेना और बीएसएफ की गतिविधियों पर नजर रखता था, और गूगल मैप कैम के जरिए सटीक लोकेशन के साथ फोटो और वीडियो साझा करता था. उसके फोन में खालिद और नजीर अहमद नाम से सेव दो मोबाइल नंबर मिले हैं, जो पाकिस्तान में रहकर एजेंट ट्रेनिंग का काम करते हैं.  

    सीआईडी इंटेलिजेंस जांच कर रही
    देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मामले में सीआईडी इंटेलिजेंस लगातार जांच कर रही है. बड़े सवाल यही है कि वह क्या कुछ अभी तक पाक हैंडल्स को भेज चुका है? क्या और स्थानीय लोग भी इस पूरे मामले में उसके साथ शामिल थे? आखिर किस तरह पाक हैंडलर्स लगातार स्थानीय नागरिक से संपर्क कर उन्हें फंसा रहे हैं?