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  • मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को नई उड़ान, कूनो में 41 भारतीय चीते; अब दो और अभयारण्यों में दिखेगा कुनबा

    मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को नई उड़ान, कूनो में 41 भारतीय चीते; अब दो और अभयारण्यों में दिखेगा कुनबा

    श्योपुर 
     कूनो नेशनल पार्क जन्मे यानी भारतीय चीतों की बढ़ती संख्या ने चीता पुनर्स्थापना परियोजना के भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगाई हैं। कम उम्र के देसी चीतों की अच्छी उपस्थिति इस लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि वे आगामी वर्षों में कुनबे के विस्तार में योगदान कर सकेंगे।

    परियोजना की सफलता अब केवल देश में चीतों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उनके स्वस्थ रहने, प्राकृतिक वातावरण में ढलने और उनमें अगली पीढ़ी तैयार करने की क्षमता भी निर्भर करेगी।
    कूनो में विदेशी से अधिक हुई भारत में जन्मे चीतों की संख्या

    उल्लेखनीय है कि ढाई वर्ष की उम्र के बाद चीता वयस्क माना जाता है। वर्तमान में कूनो में 54 चीते हैं, उनमें 38 भारत में जन्मे हैं। इनमें एक साल से कम उम्र के 28 शावक सबसे बड़ा समूह हैं। वहीं, एक से ढाई वर्ष के 10 और तीन से छह वर्ष के 16 चीते शामिल हैं। वयस्क समूह में विदेशी चीतों में नामीबिया के दो, दक्षिण अफ्रीका के पांच और बोत्सवाना के सात चीते शामिल हैं। इस तरह कूनो में अब भारत में जन्मे चीतों की संख्या विदेशी मूल के चीतों से अधिक है।

    सर्वाइवल रेट में कूनो का प्रदर्शन उच्च स्तर पर
    केंद्र सरकार की मार्च 2026 में जारी जानकारी के अनुसार, शावकों की सर्वाइवल रेट 73.33 प्रतिशत रही। सरकार ने इसे दुनिया में चीतों के पुनर्स्थापन की परियोजनाओं के मुकाबले ऊंचे स्तरों में शामिल बताया था। हालांकि, अलग-अलग देशों के आंकड़ों की तुलना करते समय अवधि, उम्र और निगरानी की परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

     

    439 हेक्टेयर में तैयार किया गया सुरक्षित क्षेत्र
    चीतों के लिए वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र तैयार किया गया है। यहां विशेष बाड़े यानी बोमा के साथ निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था की गई है। चीतों को नए वातावरण में ढलने तक वन विभाग की निगरानी में रखा जाएगा। क्षेत्र में पहले से बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू जैसे वन्यजीव मौजूद हैं। ऐसे में चीतों की मौजूदगी के साथ पूरे क्षेत्र के वन्यजीव प्रबंधन और पर्यटन को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी है। 

    प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बनेगा तीसरा चीता ठिकाना
    वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसे प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बताया जाता है। नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य और आसपास के क्षेत्र को मिलाकर 20 सितंबर 2023 को इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था। अब इसी क्षेत्र में चीते आने से बुंदेलखंड का यह वन क्षेत्र देश के चीता संरक्षण अभियान के नक्शे पर भी प्रमुखता से आएगा। यानी कूनो तक सीमित रहा चीता संरक्षण अभियान अब मध्यप्रदेश के दूसरे बड़े वन क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। 

    देश में 60 हुए चीते, 41 भारत में जन्मे
    चीता पुनर्स्थापना अभियान के तहत भारत में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 5 अक्टूबर को कूनो में मादा चीता KJP21 ने पांच शावकों को जन्म दिया। इसके बाद देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं। 7 अक्टूबर को कूनो से नर चीता थोलो और मादा CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। इनके स्थानांतरण के बाद कूनो में 54 चीते रह जाएंगे। गांधीसागर में दक्षिण अफ्रीकी मूल के प्रभास, पावक और धीरा के अलावा बोत्सवाना से लाई गई मादा राधा मौजूद है।

    बुंदेलखंड के लिए क्यों अहम है चीता
    बुंदेलखंड लंबे समय से पानी, पलायन और रोजगार जैसी चुनौतियों से जूझता रहा है। ऐसे में वन्यजीव पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। चीतों के आने के बाद केवल पर्यटक ही नहीं, बल्कि उनके आसपास सेवाएं देने वाले स्थानीय लोगों के लिए भी काम के नए अवसर बन सकते हैं। सरकार की योजना वन्यजीव पर्यटन को स्थानीय रोजगार से जोड़ने की है। आने वाले समय में गाइड, वाहन चालक, होम-स्टे और स्थानीय उत्पादों से जुड़े कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। 

    कूनो से शुरू हुआ सफर अब तीन इलाकों तक
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते लाए गए। मध्यप्रदेश में अब कूनो के साथ गांधीसागर और वीरांगना दुर्गावती तीन प्रमुख चीता आवास बन रहे हैं। इस तरह 7 अक्टूबर को होने वाली विमुक्ति सिर्फ दो चीतों को नए जंगल में छोड़ने की घटना नहीं होगी, बल्कि मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण के भौगोलिक विस्तार का अगला चरण भी होगी। 

    नामीबियाई और दक्षिण अफ्रीकी चीतों के आंकड़े
        कूनो में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों में से दो जीवित हैं। दक्षिण अफ्रीका से आए 12 चीतों में से आठ चीते जिंदा हैं। इस लिहाज से शुरुआती समूहों में नामीबियाई चीतों की जीवित रहने की दर 25 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीकी चीतों की 66.7 प्रतिशत रही।

    बोत्सवाना से आए नौ चीते अपेक्षाकृत हाल में यहां पहुंचे हैं, इसलिए उनके लिए इतनी कम अवधि में सर्वाइवल रेट की तुलना करना उचित नहीं होगा। ये आंकड़े अलग-अलग मूल समूहों की स्थिति बताते हैं, न कि उन देशों के प्राकृतिक आवास में चीतों की सर्वाइवल रेट।

    फैक्ट फाइल

        कुल चीतों की संख्या 60 है।
        41 भारत में जन्मे चीता हैं। 19 चीते विदेशी हैं। इनमें 2 नामीबिया, 8 साउथ अफ्रीका, 9 बोत्सवाना के हैं।
        28 शावक एक साल से कम उम्र के हैं।
        7 शावक 1 से 2 साल के बीच की उम्र के हैं।
        54 चीते कूनो नेशनल पार्क में।
        04 गांधीसागर में।
        2 नौरादेही में रह रहे।

    विदेश से लाए चीतों से ज्यादा भारत में जन्मे चीतों की संख्या
    भारत में जन्मे शावक-चीतों की संख्या अब विदेश से लाए चीतों से ज्यादा हो गई है। यह देश के लिए बड़ी खुशखबरी है, पूरी उम्मीद है कि भारतीय चीते आने वाले समय में अपनी संख्या को और बढ़ाएंगे। अब कूनो के अलावा गांधीसागर और नौरादेही में भी चीते रह रहे हैं। उत्तम शर्मा, सीसीएफ, कूनो नेशनल पार्क, श्योपुर।

  • चीतों के लिए खुशखबरी! कूनो में KJP21 ने दिए 5 शावक, देश में बढ़कर 60 हुई चीतों की संख्या

    चीतों के लिए खुशखबरी! कूनो में KJP21 ने दिए 5 शावक, देश में बढ़कर 60 हुई चीतों की संख्या

    श्योपुर

    कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी है। यहां मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते ऐसे हैं, जिनका जन्म भारत की धरती पर हुआ है। खास बात यह है कि KJP21 भारतीय धरती पर जन्म लेने के बाद शावकों को जन्म देने वाली तीसरी मादा चीता बन गई है। इससे पहले मुखी और KGP12 भी भारत में शावकों को जन्म दे चुकी हैं।  
      श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से प्रोजेक्ट चीता को लेकर एक और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। सोमवार को यहां मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इसके साथ ही देश में अब चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है, जिनमें 41 चीते भारत की धरती पर जन्मे हैं।

    केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इंटरनेट मीडिया 'एक्स' पर नवजात शावकों की तस्वीरें और वीडियो साझा कर इस उपलब्धि की जानकारी दी। उन्होंने इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए एक और ऐतिहासिक और खुशी का पल बताया।

    Kuno National Park में तीसरी भारतीय जन्मी मादा चीता बनी मां
    KJP21 भारत में जन्मी उन मादा चीतों की सूची में शामिल हो गई है, जिन्होंने भारतीय धरती पर शावकों को जन्म दिया है। वह मुखी और KGP12 के बाद तीसरी ऐसी मादा चीता है। इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि भारत में चीता पुनर्स्थापना का लक्ष्य केवल दूसरे देशों से चीतों को लाकर उनकी संख्या बढ़ाना नहीं है। असली सफलता तब मानी जाएगी, जब यहां पैदा हुई नई पीढ़ी आगे प्रजनन करे और एक स्थिर चीता आबादी विकसित हो। KJP21 का पांच शावकों को जन्म देना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    Botswana से आए नर चीते से पैदा हुए पांच शावक
    इन पांच शावकों का जन्म अपने साथ एक और बड़ी उपलब्धि लेकर आया है। इनके पिता बोत्सवाना से भारत लाया गया नर चीता है। यानी इन शावकों के जन्म के साथ भारत में Botswanan lineage यानी बोत्सवाना वंशावली की शुरुआत हुई है। यह प्रोजेक्ट चीता के लिए आनुवंशिक विविधता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

    भारत में जन्मी तीसरी मादा चीता ने बढ़ाया कुनबा
    केंद्रीय मंत्री यादव ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा- प्रोजेक्ट चीता के लिए एक और ऐतिहासिक व आल्हादित कर देने वाला पल! भारत में जन्मी 32 माह की चीता KJP21 ने आज (सोमवार) को कूनो नेशनल पार्क में पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। वह भारत में जन्म लेने वाली तीसरी ऐसी मादा चीता है, जिसने यहां शावकों को जन्म दिया है। इससे पहले मुखी और KGP12 भी भारत में शावकों को जन्म दे चुकी हैं।

    वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए अहम पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि इससे देश में चीतों की अगली पीढ़ी तैयार होने की प्रक्रिया और मजबूत हो रही है।

    बोत्सवाना की नई जेनेटिक लाइन की शुरुआत
    इन पांच शावकों के जन्म की एक और खासियत है। इनके पिता बोत्सवाना से भारत लाए गए नर चीता हैं। ऐसे में इन शावकों के साथ भारत में बोत्सवाना की जेनेटिक लाइन की भी शुरुआत हुई है। इससे देश में विकसित हो रहे चीता कुनबे में नई आनुवंशिक विविधता जुड़ने की उम्मीद है।

    भारत में जन्मे चीतों का आंकड़ा 40 के पार
    पांच नए शावकों के जन्म के बाद अब भारत में चीतों की कुल संख्या अब 60 हो गई है। खास बात यह है कि इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं। कूनो में लगातार हो रहे प्रजनन को प्रोजेक्ट चीता की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि के लिए प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पशु चिकित्सकों, फील्ड स्टाफ, प्रबंधन टीम और अन्य कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की धरती पर जन्मी चीतों की यह नई पीढ़ी देश में चीता पुनर्स्थापना की कहानी में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ रही है।

    चीता पुनर्स्थापना अभियान में एक और गौरवपूर्ण अध्याय
    भारतीय धरती पर चीतों की एक और पीढ़ी का जन्म प्रोजेक्ट चीता की उल्लेखनीय यात्रा में एक और गौरवपूर्ण अध्याय है। यह उपलब्धि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता संरक्षण के लिए निरंतर किए जा रहे वैज्ञानिक प्रबंधन, निगरानी और संरक्षण प्रयासों को भी रेखांकित करती है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों, मैदानी अमले, प्रबंधन टीम तथा सभी सहयोगियों को बधाई दी गई है। उनके समर्पण, प्रतिबद्धता और अथक प्रयासों से भारत में चीता पुनर्स्थापना की यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है। नन्हे मेहमानों के आगमन से कूनो की धरती पर एक बार फिर प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण की नई उम्मीद ने जन्म लिया है।

  • कूनो में फिर बढ़ेगा चीतों का कुनबा! दो चीतों की विदाई से पहले नए शावकों के जन्म की उम्मीद

    कूनो में फिर बढ़ेगा चीतों का कुनबा! दो चीतों की विदाई से पहले नए शावकों के जन्म की उम्मीद

     श्योपुर
     मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से दो चीतों को नौरादेही अभयारण्य में बसाने की तैयारी चल रही है, लेकिन इससे पहले कूनो में चीतों का कुनबा बढ़ने की उम्मीद जगी है। एक मादा चीता के प्रसव का समय पूरा हो चुका है और वन विभाग को अगले एक से तीन दिनों में शावकों के जन्म की संभावना है।

    ऐसे में 7 अक्टूबर को दो चीतों को नौरादेही भेजे जाने से पहले ही कूनो में नए मेहमानों की दस्तक हो सकती है। मादा चीता पूरी तरह स्वस्थ बताई जा रही है और वन विभाग की टीमें लगातार उसकी निगरानी कर रही हैं।

    24 घंटे निगरानी, लेकिन प्रसव के दौरान दूरी
    मादा चीता की गतिविधियों पर वन विभाग की टीमें 24 घंटे नजर बनाए हुए हैं। हालांकि प्रसव के समय उसे किसी तरह का तनाव न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। यही वजह है कि निगरानी के बावजूद टीम उससे पर्याप्त दूरी बनाए हुए है। वन विभाग की प्राथमिकता फिलहाल मादा चीता को शांत और सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना है, ताकि प्रसव प्राकृतिक तरीके से हो सके।

    दो चीते जाएंगे नौरादेही 
    कूनो से चीतों को प्रदेश के दूसरे सुरक्षित ठिकानों पर बसाने की योजना के तहत 7 अक्टूबर को दो चीतों को नौरादेही अभयारण्य भेजने की तैयारी है। यह कदम प्रदेश में चीता आबादी को अलग-अलग क्षेत्रों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    यदि अगले कुछ दिनों में शावकों का जन्म हो जाता है, तो दो चीतों के कूनो से बाहर जाने के बावजूद यहां चीतों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण और विस्तार की योजना को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    लखनपुरा में नजर आई मादा चीता निर्वा
    इधर, ग्वालियर के पास लखनपुरा क्षेत्र में मादा चीता निर्वा की मौजूदगी भी सामने आई है। कूनो में संभावित शावकों के जन्म और चीतों को दूसरे अभयारण्यों में बसाने की तैयारियों के बीच आने वाले कुछ दिन मध्य प्रदेश के चीता प्रोजेक्ट के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं।

     

  • नौरादेही में 7 अक्टूबर को आएंगे कूनो के 2 चीते, अब एक ही अभयारण्य में दिखेंगी तीन ‘बड़ी बिल्लियां’

    नौरादेही में 7 अक्टूबर को आएंगे कूनो के 2 चीते, अब एक ही अभयारण्य में दिखेंगी तीन ‘बड़ी बिल्लियां’

    सागर
     रानी दुर्गावती बाघ अभयारण्य नौरादेही अब प्रदेश में वन्यजीवों की नई पहचान बनने जा रहा है। यह दुनिया की अनोखी बसाहट होगी, जहां बड़ी बिल्लियों के परिवार (बिग कैट फैमिली) के तीन प्रमुख शिकारी बाघ, तेंदुआ और चीता एक साथ रहेंगे। सात अक्टूबर को कूनो राष्ट्रीय उद्यान से दो चीते, नर थोलो और मादा सीसीबी-तीन नौरादेही लाए जाएंगे। इसके साथ ही नौरादेही, कूनो और गांधीसागर के बाद मध्य प्रदेश में चीतों का 'तीसरा घर' बन जाएगा।

    चीतों के स्वागत की तैयारियां पूरी
    चीतों की सुरक्षित बसाहट के लिए मुहाली रेंज में आवश्यक तैयारियां कर ली गई हैं। यहां दो प्रकार के बोमा (डोम) बनाए गए हैं। पहले चरण में चीतों को क्वारेंटाइन बोमा में रखा जाएगा। यह अपेक्षाकृत आकार में छोटे हैं, ताकि चीतों के स्वास्थ्य, व्यवहार, संभावित बीमारियों और नए स्थान में सर्वाइवल का आंकलन किया जा सके।

    12 से 15 दिन तक क्वारेंटाइन में रखने के बाद चीतों को सॉफ्ट रिलीज बोमा में शिफ्ट किया जाएगा, जिसका क्षेत्रफल लगभग 80 से 100 हेक्टेयर होगा। चीतों की निगरानी और प्रबंधन के लिए करीब 100 वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

    यहां एशिया की सबसे छोटी बिल्ली भी
    नौरादेही की विशेषता केवल बाघ, तेंदुए और आने वाले चीतों तक सीमित नहीं है। यहां रस्टी-स्पॉटेड कैट, जिसे एशिया की सबसे छोटी बिल्ली माना जाता है, की भी मौजूदगी दर्ज की गई है। मध्यप्रदेश वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के सालाना बाघ निगरानी अभियान के तहत किए गए कैमरा ट्रैप सर्वे में इस बिल्ली की तस्वीर रिकॉर्ड हुई थी।

    एक नजर में नौरादेही की कैट फैमिली
    बाघ : जंगल का सबसे बड़ा शिकारी – संख्या 30 से अधिक
    तेंदुआ : घने जंगल और जंगल के पथरीले क्षेत्र में मौजूद – संख्या 15 से अधिक
    चीता : सात अक्टूबर को कूनो से आएंगे – संख्या दो
    रस्टी-स्पॉटेड कैट: एशिया की सबसे छोटी बिल्ली – संख्या एक (कैमरा ट्रैप में दर्ज)

        रानी दुर्गावती बाघ अभयारण्य में चीतों के आगमन के बाद बाघ, तेंदुए और रस्टी-स्पाटेड कैट जैसी प्रजातियां एक ही परिदृश्य में मौजूद होंगी। इससे नौरादेही की जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ेगा।
        -रजनीश सिंह, उप संचालक, रानी दुर्गावती बाघ अभयारण्य

     

  • मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा घर तैयार, नौरादेही में 7 अक्टूबर को छोड़े जाएंगे 2 चीते

    मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा घर तैयार, नौरादेही में 7 अक्टूबर को छोड़े जाएंगे 2 चीते

    नौरादेही 

    मध्यप्रदेश में चीतों का कुनबा अब बुंदेलखंड तक बढ़ने जा रहा है। चीता स्टीयरिंग कमेटी ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) में 4 चीतों को बसाने की मंजूरी दे दी है। शुरुआत 7 अक्टूबर को 2 चीतों से होगी। कूनो नेशनल पार्क से नर थोलो और मादा CCB-3 को नौरादेही लाया जाएगा। CCB-3 गांधी सागर में छोड़ी गई राधा की बहन है। सीएम डॉ. मोहन यादव दोनों को रिलीज करेंगे। इसी दिन नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में लगातार 25 साल पूरे हो रहे हैं। नौरादेही के साथ प्रदेश में चीतों के 3 ठिकाने-कूनो, गांधी सागर और नौरादेही हो जाएंगे।

    पहले गुजरात में बसाने की तैयारी थी, अब नौरादेही पर राजी Q. नौरादेही ही क्यों चुना, कितना बड़ा इलाका है? – वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व 2,340 वर्ग किमी में फैला मप्र का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। यहां खुले जंगल और लंबे घास के मैदान हैं। यह नर्मदा, बेतवा और केन नदी प्रणालियों का कैचमेंट भी है। Q. चीते कहां रहेंगे, सुरक्षा की क्या तैयारी है? – पहले 439 हेक्टेयर के सॉफ्ट रिलीज बोमा में रखेंगे। यह भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क जितना बड़ा है। 5 हिस्सों वाले बोमा में पावर फेंसिंग और 24 घंटे ट्रैकिंग की व्यवस्था है। Q. पहले गुजरात के बन्नी भेजने का प्लान था? – गुजरात के बन्नी ग्रासलैंड में भी चीते बसाने की तैयारी चल रही है, लेकिन वहां रिलीज की तारीख तय नहीं है। 7 अक्टूबर को नौरादेही में पहला जोड़ा पहुंच जाएगा।

    गुजरात के बन्नी से पहले नौरादेही चुना
    गुजरात के बन्नी ग्रासलैंड में भी चीतों को बसाने की तैयारी चल रही है। हालांकि बन्नी ग्रासलैंड में चीतों को रिलीज करने की तारीख अभी तय नहीं हुई है। इस बीच मध्यप्रदेश के नौरादेही में 7 अक्तूबर को यहां पहला जोड़ा पहुंच जाएगा। पहले चार चीतों की मंजूरी में से शुरुआती दो चीतों के आने के बाद नौरादेही चीतों का नया प्राकृतिक घर बन जाएगा। वन विभाग ने इसके लिए सभी जरूरी मैदानी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

    वन्यजीव संरक्षण को नई गति
    मध्यप्रदेश में कूनो और गांधी सागर के बाद नौरादेही में चीतों की पुनर्स्थापना से वन्यजीव संरक्षण को नई गति मिलेगी। विशाल घास के मैदानों और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र से युक्त यह क्षेत्र चीतों के अनुकूल पाया गया है। चीता स्टीयरिंग कमेटी की मंजूरी मिलने के बाद अब 7 अक्तूबर का दिन प्रदेश के वन्यजीव इतिहास में नया अध्याय जोड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा चीतों को सॉफ्ट रिलीज बोमा में छोड़े जाने के साथ ही बुंदेलखंड की धरती पर चीतों की चहल-पहल शुरू हो जाएगी।

    नौरादेही और गुजरात भी बनेगा नया ठिकाना
    गांधीसागर के अलावा चीतों को गुजरात के बन्नी सेंचुरी ओर रानी दुर्गावर्ती टाइगर रिजर्व नौरादेही भी भेजे जाने की तैयारी है. इन दोनों ही स्थानों पर चीतों को रखे जाने की प्रारंभिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. बन्नी सेंचुरी में सवाना जैसी परिस्थितियों वाला सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर तैयार किया गया है. यहां के घास के मैदान चीतों को खासे पसंद आ सकते हैं. कच्छ जिले में मौजूद बन्नी ग्रासलैंड एशिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक घास का मैदान है. यहां 600 हेक्टेयर में बाड़ा तैयार किया गया है और चीतल, सांभर जैसे शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ाई गई है. उधर, नौरादेही में 35 किलोमीटर चैनलिंग फैसिंग का काम भी अंतिम चरण में है। 

  • भारत में जन्मी मादा चीता बनी मां, कूनो में 4 नए शावकों की दस्तक; देश में 56 हुए चीते

    भारत में जन्मी मादा चीता बनी मां, कूनो में 4 नए शावकों की दस्तक; देश में 56 हुए चीते

    श्योपुर

    प्रोजेक्ट चीता के 4 साल पूरे होने के एक दिन बाद 18 सितंबर को कूनो नेशनल पार्क में जन्मी मादा चीता KGP12 ने 4 शावकों को जन्म दिया। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी। भारत की धरती पर जन्मी मादा चीता KGP12 ने खुले जंगल में चार शावकों को जन्म दिया है। इस नए जन्म के साथ ही देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 56 हो गई है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि चीते अब भारतीय जलवायु और जंगलों में पूरी तरह से रच-बस गए हैं।

    केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने साझा की खुशखबरी
    शावकों के जन्म की आधिकारिक जानकारी केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की। उन्होंने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए लिखा, "4 साल, 4 नई जिंदगियां – प्रोजेक्ट चीता के लिए यह उम्मीद और सफलता का प्रतीक है।"

    भारत में दूसरी पीढ़ी की शुरुआत
    मादा चीता KGP12 का खुले जंगल में मां बनना इस प्रोजेक्ट की एक बहुत बड़ी कामयाबी है। KGP12 दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता 'गामिनी' की बेटी है। गामिनी भारत में शावकों को जन्म देने वाली पहली चीता थी। अब उसकी बेटी द्वारा शावकों को जन्म देना यह साबित करता है कि यह प्रोजेक्ट अब विदेशों से चीते 'लाने' के शुरुआती चरण से आगे बढ़कर भारत में उनके 'बसने और बढ़ने' के प्राकृतिक दौर में सफलतापूर्वक प्रवेश कर चुका है।

    कूनो में चीतों की संख्या में वृद्धि की उम्मीद
    KGP12 का भारत में जन्म लेना और अब उसके
    शावकों को जन्म देना प्रोजेक्ट चीता के लिए खास महत्व रखता है। इससे भारत में जन्मे चीतों के प्राकृतिक प्रजनन की प्रक्रिया बढ़ने का संकेत मिला है। कूनो में चीतों की संख्या बढ़ाने और उनके लिए अनुकूल माहौल बनाने के प्रयासों के बीच चार नए शावकों का जन्म वन्यजीव प्रेमियों के लिए भी अच्छी खबर है।

    पर्यावरण मंत्री ने इस मौके पर कूनो और प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पूरे परिवार को बधाई दी। चार नए शावकों के जन्म के बाद कूनो में चीता संरक्षण अभियान की उपलब्धियों में एक और खास अध्याय जुड़ गया है। सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने इसकी जानकारी दी है।

    कूनो में चीता प्रोजेक्ट के 4 साल

    चार साल पहले 17 सितंबर 2022 को मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की वापसी हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो में छोड़ा था। अब इस परियोजना के चार साल पूरे होने पर 17 सितंबर को कूनो के टिकटोली गेट पर हजारों दीप जलाए । यह आयोजन सेवा संकल्प अभियान के तहत हुआ । चीतों की वापसी के चार साल बाद कूनो में उनकी संख्या बढ़ी है और यहां भारत में भी शावकों का जन्म हुआ है। परियोजना ने श्योपुर को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई है।

    4 साल में क्या बदला?
    चीता परियोजना के चार वर्ष पूरे होने पर देश में 52 चीते हैं। इनमें 49 कूनो नेशनल पार्क और 3 मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य में हैं। कुल 52 चीतों में से 32 का जन्म भारत में हुआ है। कूनो का प्राकृतिक वातावरण चीतों के प्रजनन के लिए अनुकूल साबित हुआ है। भारत में जन्मे शावकों ने परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    17 सितंबर को कूनो में क्या होगा?
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और चीता परियोजना के चार साल पूरे होने के मौके पर टिकटोली गेट पर हजारों दीप जलाए । दीपों के जरिए चीता संरक्षण और भारत में चीतों की वापसी के प्रति आभार व्यक्त किया ।  

     

  • गांधीसागर में बढ़ेगा चीतों का कुनबा! कूनो से 17 सितंबर को भेजी जा सकती है निर्वा या वीरा

    गांधीसागर में बढ़ेगा चीतों का कुनबा! कूनो से 17 सितंबर को भेजी जा सकती है निर्वा या वीरा

    श्योपुर
     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन और भारत में चीता पुनर्वास परियोजना के चार वर्ष पूरे होने के मौके पर मध्य प्रदेश में चीतों को लेकर एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। 17 सितंबर को कूनो नेशनल पार्क से एक मादा चीता को गांधीसागर राष्ट्रीय अभयारण्य में शिफ्ट किए जाने की योजना पर विचार चल रहा है। हालांकि, शिफ्टिंग का अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अनुमति के बाद ही लिया जाएगा।

    अभी यह भी तय नहीं हुआ है कि कूनो से किस मादा चीता को गांधीसागर भेजा जाएगा। सूत्रों के अनुसार, निर्वा और वीरा में से किसी एक को गांधीसागर भेजने पर विचार किया जा रहा है। चीता परियोजना से जुड़े अधिकारी चाहते हैं कि कूनो की तर्ज पर गांधीसागर में भी चीतों की संख्या बढ़े और वहां सफलतापूर्वक वंशवृद्धि का सिलसिला आगे बढ़े।

    चार साल पहले कूनो में हुई थी चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत
    17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने जन्मदिन के अवसर पर नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। इसके बाद चीता पुनर्वास परियोजना के दूसरे चरण में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते भारत लाए गए। कूनो में चीतों की संख्या बढ़ने के साथ उनके लिए दूसरे सुरक्षित रहवास की जरूरत महसूस हुई, जिसके बाद गांधीसागर राष्ट्रीय अभयारण्य को दूसरे घर के रूप में विकसित किया गया।

    पहले दो नर, फिर धीरा को भेजा गया गांधीसागर
    गांधीसागर में चीतों की आबादी बसाने की दिशा में 20 अप्रैल 2025 को कूनो से दो नर चीतों को यहां शिफ्ट किया गया था। इसके बाद वंशवृद्धि की संभावनाओं को मजबूत करने के लिए 17 सितंबर 2025 को मादा चीता धीरा को गांधीसागर लाया गया।

    अब परियोजना के तहत एक और मादा चीता को गांधीसागर भेजने की तैयारी है। इससे यहां नर और मादा चीतों का संतुलित समूह तैयार करने तथा भविष्य में वंशवृद्धि को बढ़ावा देने की उम्मीद है।

    अनुमति का इंतजार
    वन्यजीव विभाग की पीसीसीएफ डॉ. समीता राजौरा ने बताया कि मादा चीता की शिफ्टिंग को लेकर योजना है। मुख्यमंत्री की अनुमति मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई और किस मादा चीता को गांधीसागर भेजा जाना है, इसका अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

     

  • कॉलर ने बंद किया सिग्नल, 21 दिन तक लापता रही चीता निर्वात; आखिरकार जंगल में मिली

    कॉलर ने बंद किया सिग्नल, 21 दिन तक लापता रही चीता निर्वात; आखिरकार जंगल में मिली

    श्योपुर 
    श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क से करीब 21 दिन पहले लापता हुई दक्षिण अफ्रीकी से लाई गई मादा चीता निर्वा आखिरकार सुरक्षित मिल गई। उसका सैटेलाइट कॉलर काम नहीं कर रहा था, जिस कारण सिग्नल मिलना बंद हो गया था। कूनो नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने चीता प्रोजेक्ट की उपलब्धियों को एक्स पर साझा करते हुए निर्वा की तलाश को बड़ी सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि कॉलर से सिग्नल नहीं मिलने के बावजूद टीम ने लगातार प्रयास जारी रखे। करीब 21 दिन तक उसकी लोकेशन की पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी थी।

    कॉलर बंद होने से बढ़ी थी चिंता
    निर्वा के कॉलर से सिग्नल बंद होने के बाद उसकी निगरानी चुनौती बन गई थी। मानसून के दौरान जंगल में उसकी मौजूदगी और लगातार बदलते मौसम के बीच टीम के सामने उसे खोजने की चुनौती थी। आखिरकार उसकी लोकेशन ट्रेस की गई और उसे सुरक्षित वापस लाया गया।

    गायब होने पर दिल्ली तक पहुंची थी शिकायत
    निर्वा के लंबे समय तक ट्रेस नहीं होने और कॉलर खराब होने को लेकर वाइल्ड लाइफ वर्कर अजय दुबे ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री तथा एनटीसीए के सदस्य सचिव को लिखित शिकायत भी की थी। शिकायत में मामले की उच्च स्तरीय जांच और कॉलर की तकनीकी खराबी की जांच की मांग की गई थी।

    मां से अलग हुए दोनों शावक 
    निर्वा के साथ उसके नर और मादा शावक भी रह रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक दोनों शावक अब मां से अलग हो चुके हैं। वन विभाग के अनुसार यह चीतों के प्राकृतिक जीवनचक्र का हिस्सा है। जब शावक शिकार करने और स्वतंत्र रूप से जीवनयापन करने में सक्षम हो जाते हैं, तो वे मां से अलग होकर अपना अलग क्षेत्र तलाशने लगते हैं।

    तीन साल पहले भी गायब हो गई थी निर्वा
    निर्वा के लिए लापता होना पहली बार नहीं है। जुलाई 2023 में भी वह करीब 22 दिनों तक वन विभाग की निगरानी से बाहर रही थी। उस समय उसकी कॉलर आईडी से सैटेलाइट लोकेशन मिलनी बंद हो गई थी। बाद में करीब छह घंटे चले रेस्क्यू अभियान के बाद वन अमले ने उसे सुरक्षित पकड़ लिया था।

    राजस्थान के शाहबाद पहुंचा दूसरा चीता, दो बकरियों का किया शिकार
    उधर, कूनो पार्क की सरहद लांघ कर पिछले पांच दिनों से राजस्थान के शाहबाद इलाके में देखे जा रहे चीता की गंध का पीछा करते हुए दूसरा चीता भी वहां पहुंच गया है। गुरुवार को दोनों ने दो बकरियों का शिकार किया। वन विभाग की ट्रैकिंग टीमें लगातार उनका पीछा करते हुए उन पर नजर बनाए हुए हैं। उधर कूनो में मादा चीता केजेपी-1 और नर चीता केजीपी-3 के बीच नजदीकियां देखी जा रही हैं। उनके बीच मेटिंग की संभावना जताई जा रही है।

    कुत्तों की मौत के मामले में हैंडलर के खिलाफ विभागीय जांच
    कूनो में चीतों की निगरानी के लिए लाए गए खोजी कुत्तों बेल्जियम मेलिनोइस प्रजाति के इलू और रूबी की मौत के मामले में हैंडलर के खिलाफ वन विभाग के अधिकारियों ने जांच शुरू की है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वाइल्ड लाइफ के अधिकारियों के द्वारा जानकारी दी गई है कि उनके पास अभी इस तरह के ट्रेंड 16 डाग स्कावड की टीमें हैं। जिन्हें जरूरत पड़ने पर पूरे प्रदेश भर में उपयोग किया जाता है।

     

    स्निफर डॉग की मौत का मामला भी उठा
    शिकायत में कूनो में स्निफर डॉग इलू और रूबी की मौत का मामला भी उठाया गया है। दोनों मामलों में प्रबंधन की कथित लापरवाही की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही कूनो में वन्यजीवों के शिकार के मामलों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग भी की गई है।

    निर्वा के सुरक्षित मिलने के बाद फिलहाल चीता प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के लिए यह राहत की खबर है। हालांकि, उसके कॉलर ने सिग्नल क्यों देना बंद किया और इतने दिनों तक उसकी लोकेशन क्यों नहीं मिल सकी, इसे लेकर उठे सवालों का जवाब जांच से ही स्पष्ट होगा।