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  • चारधाम यात्रा की तैयार,19 अप्रैल को उखीमठ से रवाना होगी बाबा केदार की पंचमुखी डोली, 22 को होंगे प्रथम दर्शन

    चारधाम यात्रा की तैयार,19 अप्रैल को उखीमठ से रवाना होगी बाबा केदार की पंचमुखी डोली, 22 को होंगे प्रथम दर्शन

    उत्तराखंड में स्थित चार धामों में से एक बाबा केदारनाथ के कपाट खुलने जा रहे हैं. केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे. यह घोषणा महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) पर की गई थी, जिसके बाद बाबा केदार की डोली के साथ पूजा-अर्चना के साथ यात्रा शुरू होगी.

    पिछले साल (2025) केदारनाथ के कपाट 2 मई को खुले थे. तकरीबन छह महीने तक दर्शन-पूजन के बाद  23 अक्टूबर 2025 को शीतकाल के लिए बंद हो गए थे. शीतकाल में कपाट बंद होने के बाद बाबा केदार की गद्दी ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में विराजमान होती है और यही उनका पूजा स्थल बन जाता है.

    कैसा है केदारनाथ का ज्योतिर्लिंग?
    केदारानाथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां महादेव शिव का ज्योतिर्लिंग बैल पृष्ठ यानी बैल के कूबड़ के उभरे हुए हिस्से जैसा है. इसीलिए यहां का शिवलिंग पारंपरिक तौर पर गोलाई लिए हुए नहीं दिखता बल्कि पिरामिड जैसी आकृति में त्रिकोण त्रिभुज या कुछ-कुछ प्रिज्म जैसा नजर आता है.

    पांडवों से जुड़ी है कहानी
    कहते हैं कि पांडव जब युद्ध के बाद अपने पापों के प्रायश्चित के लिए तीर्थयात्रा पर निकले थे, तब वह भगवान शिव के दर्शन करना चाहते थे. लेकिन शिवजी उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे. इसलिए उन्हें खोजते हुए पांडव कई तीर्थों में गए लेकिन वहां महादेव नहीं मिले.

    जब पांडव काशी पहुंचे तब शिवजी पर्वत पर आ गए.
    पांडव यहां भी पहुंच गए. तब शिवजी को भीम ने देख लिया, लेकिन शिव जी ने बैल का स्वरूप बनाया और उनके झुंड से होकर भागने लगे. तब भीम ने उनके कूबड़ को पकड़ लिया. शिव धरती में समाने लगे, लेकिन भीम की निष्ठा देखकर उन्होंने पांडवों को दर्शन दिए. भीम के पकड़ने से बैल के कूबड़ का हिस्सा ही ऊपर रह गया और शिवजी पांडवों की प्रार्थना पर इसी रूप में यहां स्थापित हो गए.

    एक नहीं पांच हैं केदार
    पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि जब भगवान शिव बैल के रूप में आए तो उनके धड़ का भाग काठमांडू में प्रकट हुआ, जहां अब पशुपतिनाथ मंदिर है. शिवजी की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मद्महेश्‍वर में और जटा कल्‍पेश्‍वर में प्रकट हुई. इन चार स्‍थानों के साथ केदारनाथ धाम को मिलाकर पंचकेदार के रूप में पूजा जाता है.

    सिर्फ 20 दिन में खुलेंगे कपाट
    यात्रा शुरू होने में अब केवल 20 दिन का समय शेष बचा है. धाम तक आवाजाही वाला मुख्य मार्ग बर्फ से ढका हुआ है. हालांकि रास्ते से बर्फ हटाने और ग्लेशियर तोड़ने का काम जारी है. रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन का मुख्य मकसद है की सबसे पहले पैदल यात्रा मार्ग को आवाजाही लायक बनाया जाय, जिससे धाम सहित पैदल यात्रा मार्ग पर अन्य सभी व्यवस्थाएं सुचारु की जा सके, लेकिन आये दिन मौसम खराब होने से परेशानियां भी बढ़ रही हैं.

    18 अप्रैल ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ से रवाना होगी गद्दी
    इस साल बाबा केदारनाथ की पंचमुखी डोली (गद्दी) 19 अप्रैल 2026 को शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ से केदारनाथ धाम के लिए रवाना होगी. डोली यात्रा के विभिन्न पड़ावों से होते हुए 21 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंचेगी और 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे कपाट खुलेंगे. डोली यात्रा का संभावित शेड्यूल 18 अप्रैल से है.

    18 अप्रैल को भैरवनाथ पूजा (उखीमठ) होगी. 19 अप्रैल को उखीमठ से प्रस्थान होगा और फाटा/गुप्तकाशी में रात्रि विश्राम होगा. इसके बाद 20 अप्रैल को यात्रा गौरीकुंड पहुंचकर रात्रि विश्राम करेगी. 21 अप्रैल को डोली का केदारनाथ धाम आगमन होगा और 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे केदारनाथ धाम के कपाट आम दर्शन के लिए खुलेंगे.
     

  • चारधाम जाने से पहले जान लें सब कुछ—रजिस्ट्रेशन, तैयारी और जरूरी टिप्स

    चारधाम जाने से पहले जान लें सब कुछ—रजिस्ट्रेशन, तैयारी और जरूरी टिप्स

    उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर है. साल 2026 की चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है. अगर आप भी केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री या यमुनोत्री के दर्शन का मन बना रहे हैं, तो रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इस बार भी यात्रियों की सुविधा के लिए सरकार ने ऑनलाइन, मोबाइल ऐप, व्हाट्सएप और ऑफलाइन चारों माध्यमों से रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की है. आइए जानते हैं स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन और ऑफलाइन पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में.

    चारधाम यात्रा 2026 का शेड्यूल
    इस साल अक्षय तृतीया के पावन पर्व से चारधाम यात्रा का श्रीगणेश होने जा रहा है, 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम तो वहीं 22 अप्रैल केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे. इसके बाद 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे.

    कैसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन?
    ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 6 मार्च 2026 से शुरू हो चुकी है. आप नीचे दिए गए तरीकों से अपना पंजीकरण कर सकते हैं

        सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in पर जाएं.
        होमपेज पर Register/Sign In बटन पर क्लिक करें.
        अपना नाम, मोबाइल नंबर और जरूरी जानकारी भरकर अपनी आईडी बनाएं.
        लॉग इन करने के बाद Create/Manage Tour के विकल्प को चुनें.
        अपनी यात्रा की तारीख और जिस धाम के दर्शन करने हैं, उसका चयन करें.
        Add Pilgrim पर क्लिक कर सभी यात्रियों की जानकारी भरें और आधार कार्ड या वोटर आईडी अपलोड करें.
        प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपको एक यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर (URN) मिलेगा.
        आखिर में, अपना रजिस्ट्रेशन लेटर डाउनलोड कर लें, जिसमें QR कोड होगा.

    WhatsApp के जरिए कैसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन?
    अगर आप वेबसाइट का उपयोग नहीं करना चाहते, तो अपने फोन से एक मैसेज भेजकर भी रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं:

        अपने मोबाइल में 8394833833 नंबर सेव करें.
        इस नंबर पर WhatsApp पर YATRA लिखकर भेजें.
        वहां से पूछे गए सवालों के जवाब दें और अपनी डिटेल्स भेजकर पंजीकरण पूरा करें.

    मोबाइल ऐप से कैसे करें रजिस्ट्रेशन?
        गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से Tourist Care Uttarakhand ऐप डाउनलोड करें.
        ऐप में मांगी गई जानकारी भरकर अपना टूर प्लान सबमिट करें.

    हेल्पलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा
    ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन: ऑफलाइन काउंटर 17 अप्रैल 2026 से शुरू होंगे. ये काउंटर हरिद्वार, ऋषिकेश और यात्रा मार्ग के मुख्य पड़ावों पर उपलब्ध रहेंगे.

    टोल-फ्री नंबर: यात्रा से जुड़ी किसी भी जानकारी या सहायता के लिए आप सरकार के टोल-फ्री नंबर 0135-1364 पर कॉल कर सकते हैं.

    रजिस्ट्रेशन क्यों है जरूरी?
    चारधाम यात्रा पर जाने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है. बिना रजिस्ट्रेशन के यात्रा की अनुमति नहीं दी जाती. यह व्यवस्था यात्रियों की सुरक्षा, ट्रैकिंग और बेहतर सुविधाओं के लिए लागू की गई है. इस बार चारधाम यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में इस कदर उत्साह है कि 6 मार्च को पोर्टल खुलते ही पहले 24 घंटों में 1 लाख से अधिक लोगों ने अपना पंजीकरण कराया था. अब श्रद्धालुओं की निगाहें 19 अप्रैल पर टिकी हैं, जब एक बार फिर आस्था की पवित्र राहें खुलेंगी और वे श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ चारधाम यात्रा का पुण्य अवसर प्राप्त कर सकेंगे.