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  • चन्नी को मिली पंजाब चुनाव की अहम जिम्मेदारी, राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस लड़ेगी चुनाव

    चन्नी को मिली पंजाब चुनाव की अहम जिम्मेदारी, राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस लड़ेगी चुनाव

    चंडीगढ़.

    पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस अब जमीनी स्तर पर अपना अभियान तेज करने की तैयारी में है। इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने ‘पगड़ी संभाल यात्रा’ निकालने का एलान किया है।

    चन्नी के मुताबिक, यह यात्रा नशे और गैंगस्टरवाद के खिलाफ होगी। इसके जरिए युवाओं को नशे से दूर रहने और पंजाब को गैंगस्टरवाद से मुक्त करने के लिए जागरूक किया जाएगा। चन्नी के इस अभियान में साइकिल रैली भी अहम हिस्सा होगी। इसमें दो हजार से अधिक साइकिल चालक शामिल होंगे। साइकिल सवार पंजाब के अलग-अलग जिलों में पहुंचकर युवाओं और आम लोगों के बीच नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाएंगे। कांग्रेस इस अभियान को सीधे तौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देख रही है।

    राहुल गांधी की अगवाई में कांग्रेस की बस यात्रा
    कांग्रेस की ओर से आने वाले दिनों में पंजाब में बस यात्रा निकालने की भी तैयारी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस यात्रा की शुरुआत लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कर सकते हैं। राहुल गांधी के जल्द पंजाब दौरे पर आने की भी संभावना है। बस यात्रा के दौरान पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एक साथ बस में सवार होकर प्रदेशभर में जाएंगे और एकजुट कांग्रेस का संदेश देंगे।

    रणनीति का बड़ा हिस्सा पगड़ी संभाल यात्रा
    पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव के बाद पार्टी अब चुनावी तैयारियों को अभियान के रूप में जमीन पर उतारने की रणनीति बना रही है। दिल्ली में भी इन कार्यक्रमों को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। चन्नी की ‘पगड़ी संभाल यात्रा’ को इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

  • चन्नी को कांग्रेस हाईकमान की बड़ी जिम्मेदारी, तीसरी बार सौंपी कृषि समिति की कमान

    चन्नी को कांग्रेस हाईकमान की बड़ी जिम्मेदारी, तीसरी बार सौंपी कृषि समिति की कमान

    चंडीगढ़.

    पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी पर पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर भरोसा जताया है। संसदीय स्थायी समितियों के पुनर्गठन के बाद चन्नी को लगातार तीसरी बार कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी और मत्स्य पालन संबंधी स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।

    जताया पार्टी प्रमुखों का आभार
    चन्नी ने इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का आभार जताया है। चन्नी ने कहा कि वह किसानों की सेवा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरी ईमानदारी, लगन और समर्पण के साथ काम करते रहेंगे। चन्नी सितंबर 2024 से इस समिति के अध्यक्ष हैं। समिति कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े मंत्रालयों की नीतियों, योजनाओं, बजट और कामकाज की समीक्षा करती है।

    दो साल में दो संसद रत्न सम्मान
    चन्नी के संसदीय प्रदर्शन को हाल के वर्षों में लगातार पहचान मिली है। वर्ष 2025 में उन्हें व्यक्तिगत संसदीय प्रदर्शन के लिए संसद रत्न सम्मान मिला था। वहीं 2026 में उनके नेतृत्व वाली कृषि संबंधी स्थायी समिति को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए संसद रत्न सम्मान दिया गया।

  • संसद रत्न सम्मान लेने दिल्ली आए चन्नी, वेणुगोपाल से पंजाब कांग्रेस के सियासी हालात पर बातचीत!

    संसद रत्न सम्मान लेने दिल्ली आए चन्नी, वेणुगोपाल से पंजाब कांग्रेस के सियासी हालात पर बातचीत!

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी बुधवार को नई दिल्ली पहुंचेंगे। चन्नी को आज संसद रत्न अवार्ड से सम्मानित किया जाना है। वह कृषि संबंधी संसदीय समिति के चेयरमैन भी हैं।

    दिल्ली प्रवास के दौरान कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से उनकी मुलाकात होने की संभावना है। माना जा रहा है कि मुलाकात होती है तो पंजाब कांग्रेस के मौजूदा राजनीतिक हालात और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रहे मतभेदों पर चर्चा हो सकती है। चन्नी की वेणुगोपाल से संभावित मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, जब पंजाब कांग्रेस में संगठन को लेकर अंदरूनी खींचतान लगातार सामने आ रही है। एक जुलाई को विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस हाईकमान की ओर से चुनाव समितियों के गठन के बाद चन्नी और उनके समर्थक नेताओं की ओर से असहमति जताई गई थी। इसके बाद से चन्नी की हाईकमान के साथ सक्रिय स्तर पर मुलाकात नहीं हो सकी है। चन्नी समेत कई नेताओं ने राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा था, लेकिन संसद सत्र के दौरान भी उनकी राहुल गांधी से मुलाकात नहीं हो पाई।

    अगले सप्ताह पायलट आ सकते हैं पंजाब
    इधर, कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब में संगठन के भीतर समन्वय बढ़ाने की कवायद तेज कर दी है। पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट अगले सप्ताह पंजाब दौरे पर आएंगे। उनके दौरे की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रहे मतभेदों को दूर कर सभी नेताओं को एक मंच पर लाने की होगी। सूत्रों के मुताबिक पायलट पंजाब दौरे के दौरान पार्टी के प्रमुख नेताओं से मुलाकात करेंगे। वह नेताओं के साथ संगठन की स्थिति, आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और आपसी मतभेदों को लेकर चर्चा कर सकते हैं।

    संगठन में समन्वय बढ़ाने की कोशिश
    माना जा रहा है कि सभी प्रमुख नेताओं को एक साथ बैठाकर संगठन में समन्वय बढ़ाने की कोशिश भी की जाएगी। मंगलवार को चंडीगढ़ में हुए पंजाब कांग्रेस के रोष प्रदर्शन में भी पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों की सक्रियता दिखाई दी थी। ऐसे में पायलट का पहला पंजाब दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चन्नी और उनके समर्थक नेताओं ने पायलट की नियुक्ति का स्वागत किया है। अब हाईकमान की कोशिश यह है कि नए प्रभारी की अगुवाई में सभी नेताओं को साथ लेकर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां आगे बढ़ाई जाएं।

  • चन्नी का वायरल एग्जाम फोटो बना विवाद की वजह, पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन कटघरे में

    चन्नी का वायरल एग्जाम फोटो बना विवाद की वजह, पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन कटघरे में

     चंडीगढ़
     पंजाब विश्वविद्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के एमए लोक प्रशासन की परीक्षा देने के दौरान परीक्षा कक्ष के भीतर की तस्वीर सामने आने के बाद परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    चंडीगढ़ के पूर्व मेयर और पंजाब विश्वविद्यालय के पूर्व सीनेट एवं सिंडिकेट के सदस्य देवेश मौदगिल ने मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन से नियमों के समान अनुपालन और जांच की मांग की है।

    मौदगिल ने पंजाब विश्वविद्यालय के चांसलर सीपी राधाकृष्णन, कुलपति मीनाक्षी गोयल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान तथा पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र भेजकर मामले में कार्रवाई की मांग की है।

    तस्वीर में चन्नी परीक्षा कक्ष के भीतर परीक्षा देते दिखाई दिए
    उन्होंने कहा कि 21 अगस्त को प्रकाशित तस्वीर में चन्नी परीक्षा कक्ष के भीतर परीक्षा देते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि तस्वीर किसने और किस उपकरण से खींची।

    उन्होंने सवाल उठाया कि जब परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, कैमरा, स्मार्ट वाच, ईयरफोन, टेबलेट और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रानिक उपकरण प्रतिबंधित हैं, तो तस्वीर लेने वाला उपकरण परीक्षा कक्ष तक कैसे पहुंचा।

    उन्होंने मामले की तत्काल जांच करने की मांग की। मौदगिल ने यह भी सवाल उठाया कि यदि चन्नी को निर्धारित परीक्षा के बजाय विशेष अवसर दिया गया था तो वह किस नियम और श्रेणी के तहत था। उन्होंने विशेष अवसर के आवेदन, कारण, संबंधित श्रेणी और सक्षम अधिकारी की मंजूरी से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।

    परीक्षा की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की मांग
    वहीं, मौदगिल ने 20 अगस्त की परीक्षा की सीसीटीवी रिकार्डिंग सुरक्षित रखने की मांग करते हुए कहा कि इससे परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने वाले लोगों और प्रतिबंधित उपकरण के संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकती है। मौदगिल ने कहा कि सामान्य विद्यार्थी के पास प्रतिबंधित इलेक्ट्रानिक उपकरण मिलने पर यूएमसी के तहत कार्रवाई होती है।

    इसलिए चन्नी के मामले में भी नियम समान रूप से लागू होने चाहिए। उन्होंने जांच में उल्लंघन साबित होने पर यूएमसी दर्ज कर परीक्षा रद्द करने और नियमानुसार दो वर्ष के लिए परीक्षा से प्रतिबंधित करने की मांग की।

  • पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी संग्राम तेज, चन्नी-वारिंग के बीच तनातनी, वेणुगोपाल के सामने बढ़ा विवाद

    पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी संग्राम तेज, चन्नी-वारिंग के बीच तनातनी, वेणुगोपाल के सामने बढ़ा विवाद

    चंडीगढ़
    पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल कर रहे थे। इस दौरान पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस मुख्यालय में हुई यह बैठक बिना किसी सहमति या नतीजे के बेनतीजा समाप्त हो गई। इस बैठक में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष (पंजाब) अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और राणा गुरजीत सिंह जैसे दिग्गज नेता मौजूद थे। बैठक के बाद किसी भी नेता ने मीडिया से खुलकर बात करने से परहेज किया।

    सूत्रों के मुताबिक, बैठक में अंदरूनी गुटबाजी उस वक्त चरम पर पहुंच गई जब पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने खुले तौर पर चेतावनी दे डाली। चन्नी ने कहा कि यदि राजा वारिंग प्रदेश अध्यक्ष पद पर बने रहते हैं तो वह चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। वहीं दूसरी ओर सुखजिंदर सिंह रंधावा और राणा गुरजीत सिंह ने शीर्ष नेतृत्व पर जमीनी सर्वे रिपोर्टों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। बैठक में विरोधी गुट के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि वे वारिंगग के नेतृत्व में चुनाव में जाने के पक्ष में नहीं हैं।

    इस बैठक के दौरन विरोधी धड़े ने राजा वांरिग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग दोहराई। वेणुगोपाल ने नेताओं को सरेआम बयानबाजी और सार्वजनिक रूप से पार्टी की अंदरूनी कलह उजागर करने पर कड़ी फटकार लगाई। एक वरिष्ठ नेता ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल से सीधे कहा कि अब यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप पार्टी को आगामी चुनावों में जीत की ओर ले जाते हैं या हार की ओर।

    सर्वे रिपोर्ट के बाद भड़का विवाद
    सूत्रों के अनुसार, बैठक में हंगामा तब शुरू हुआ जब पार्टी के चुनावी रणनीतिकार सुनील कानूगोलू ने अपनी सर्वे रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में संकेत दिया गया था कि वारिंग को पीसीसी अध्यक्ष बनाए रखने के फैसले के बाद मालवा क्षेत्र में कांग्रेस के ग्राफ और समर्थन में गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट सामने आते ही नेताओं के बीच तीखी बहस छिड़ गई। हाईकमान ने चन्नी, वारिंग और रंधावा को एक साथ लाने और मतभेद सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन सभी प्रयास विफल साबित हुए।

    वेणुगोपाल के जाते ही बीच में बैठक छोड़ निकले नेता
    बैठक का माहौल इतना तल्ख था कि जैसे ही केसी वेणुगोपाल बाहर निकले कि चन्नी और रंधावा भी तुरंत बैठक छोड़कर चले गए। हालांकि भूपेश बघेल और राजा वारिंग काफी देर तक वहीं बैठे रहे। बैठक के बाद पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने स्थिति को संभालते हुए कहा कि चूंकि कुछ प्रमुख नेता इस बैठक में शामिल नहीं हो सके थे इसलिए रणनीतिक चर्चा को पूरा करने के लिए कल यानी गुरुवार को दोबारा बैठक बुलाई गई है।