Tag: Chandigarh

  • संपत्ति मालिकों के लिए बड़ी सुविधा, 10-25 सितंबर तक लगेगा CHB का जन सुविधा शिविर

    संपत्ति मालिकों के लिए बड़ी सुविधा, 10-25 सितंबर तक लगेगा CHB का जन सुविधा शिविर

     चंडीगढ़
     लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलवाने के इच्छुक चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के आवंटियों और संपत्ति मालिकों के लिए राहत की खबर है। हाउसिंग बोर्ड की ओर से कन्वर्जन प्रक्रिया को आसान बनाने और लोगों को एक ही जगह पर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जन सुविधा शिविर लगाया जा रहा है।

    शिविर में आवासीय इकाइयों के साथ व्यावसायिक संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलवाने के मामलों पर भी कार्रवाई की जाएगी। यह शिविर 10 सितंबर से 25 सितंबर तक सभी कार्य दिवसों में आयोजित किया जाएगा। अवकाश के दिनों में कैंप नहीं लगेगा।

    आवंटी और संपत्ति मालिक सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक सेक्टर-9 डी स्थित चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड कार्यालय की छठी मंजिल के बहुउद्देशीय हॉल में पहुंच सकते हैं। बोर्ड का प्रयास है कि शिविर के माध्यम से कन्वर्जन से जुड़े मामलों की प्रक्रिया को सरल और जल्द पूरा किया जा सके।

    यह शिविर 10 सितंबर से 25 सितंबर 2026 तक सभी कार्य दिवसों में लगेगा। छुट्टी वाले दिन कैंप नहीं लगाया जाएगा। आवंटी और संपत्ति मालिक सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक सेक्टर-9 स्थित चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड कार्यालय की छठी मंजिल के बहुउद्देशीय हॉल में पहुंच सकते हैं।

    ये दस्तावेज साथ लेकर आएं
    कैंप में आने वाले आवंटियों और संपत्ति मालिकों को अपने साथ आवंटन पत्र या ट्रांसफर डीड की कॉपी, नवीनतम भुगतान रसीद, पहचान और पते का प्रमाण सहित कन्वर्जन से जुड़े अन्य जरूरी दस्तावेज लाने होंगे। दस्तावेज पूरे होने पर आवेदन की जांच और आगे की प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सकेगी।

    पहले ऑनलाइन चेक कर लें शुल्क और बकाया
    CHB ने लोगों को सलाह दी है कि कैंप में आने से पहले अपने मामले में लागू कन्वर्जन शुल्क और किसी भी बकाया राशि की जानकारी बोर्ड के ऑनलाइन पोर्टल पर जांच लें। इससे उन्हें पहले से पता रहेगा कि कितनी राशि जमा करनी है और कैंप में प्रक्रिया पूरी करने में कम समय लगेगा।

    एक ही जगह मिलेगी सुविधा
    जन सुविधा शिविर का मकसद लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड कन्वर्जन से जुड़े काम को आसान बनाना है। CHB ने पात्र आवंटियों और संपत्ति मालिकों से इस सुविधा का लाभ उठाने की अपील की है।

    दस्तावेज साथ लाना जरूरी
    सीएचबी ने आवंटियों और मालिकों से कहा है कि वे शिविर में आते समय अपने आवंटन पत्र या हस्तांतरण विलेख की प्रति, नवीनतम भुगतान रसीदें, पहचान और पते का प्रमाण तथा कन्वर्जन से संबंधित अन्य जरूरी दस्तावेज साथ लेकर आएं। दस्तावेज पूरे होने से आवेदन की जांच और आगे की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

    पहले ऑनलाइन जांच लें शुल्क और बकाया
    बोर्ड ने आवेदकों को सलाह दी है कि कैंप में आने से पहले अपने मामले में लागू कन्वर्जन शुल्क और यदि कोई बकाया राशि है तो उसकी जानकारी सीएचबी के ऑनलाइन पोर्टल पर जांच लें। इससे आवेदकों को पहले से देय राशि की जानकारी मिल जाएगी और शिविर के दौरान आवेदन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा।

    सीएचबी ने सभी पात्र आवंटियों और संपत्ति मालिकों से इस सुविधा का लाभ उठाने की अपील की है। बोर्ड के अनुसार, शिविर लोगों को लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलवाने की प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

  • चंडीगढ़ में PU अंडरपास को मिली रफ्तार, 2019 से लंबित प्रस्ताव अब मंजूरी की ओर; खर्च होंगे ₹8.40 करोड़

    चंडीगढ़ में PU अंडरपास को मिली रफ्तार, 2019 से लंबित प्रस्ताव अब मंजूरी की ओर; खर्च होंगे ₹8.40 करोड़

    चंडीगढ़

    चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़े दो बड़े अंडरपास प्रोजेक्ट अब फाइलों से निकलकर अगले चरण में पहुंच गए हैं। पीयू और पीजीआई के बीच बनने वाले अंडरपास का टेंडर जल्द आवंटित किया जाएगा।

    पीयू-पीजीआई अंडरपास का प्रस्ताव वर्ष 2019 में तैयार हुआ था। इसके बाद डिजाइन और सुविधाओं में कई बदलाव किए गए। अब करीब सात साल बाद इसका निर्माण शुरू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी है। इस प्रोजेक्ट पर कुल 8.40 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

    25 हजार लोगों की रोजाना आवाजाही
    पंजाब यूनिवर्सिटी और PGI के बीच रोजाना करीब 25 हजार लोग पैदल आवाजाही करते हैं। इनमें PGI आने वाले मरीज, उनके परिजन, पीयू के छात्र और कर्मचारी शामिल हैं। पहले पीयू के गेट नंबर-1 के सामने सड़क पार करने के लिए एक रास्ता था, लेकिन वहां वाहनों की आवाजाही बढ़ने से जाम लगने लगा। इसके बाद यह रास्ता बंद कर दिया गया।

    अब लोगों को नेहरू अस्पताल के निकास द्वार के सामने से सड़क पार करनी पड़ती है। यहां दोनों तरफ भारी ट्रैफिक होने के कारण खासकर मरीजों और बुजुर्गों को परेशानी होती है। पीजीआई के मुख्य गेट से आने-जाने वालों को भी लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।

    मई में निकला टेंडर जल्द आवंटन पीयू और पीजीआई के बीच बनने वाले अंडरपास के लिए मई में टेंडर जारी किया गया था। टेंडर प्रक्रिया में शामिल कंपनियों के साथ शर्तों को लेकर बातचीत हुई। अब सहमति बनने के बाद टेंडर जल्द आवंटित करने की तैयारी है। अंडरपास प्रोजेक्ट की कुल लागत 8.40 करोड़ रुपए है। इसमें से 6.73 करोड़ रुपए निर्माण कार्य पर खर्च होंगे, जबकि 1.67 करोड़ रुपए भूमिगत सीवरेज और ड्रेनेज लाइनों को बदलने पर खर्च किए जाएंगे।

    अंडरपास निर्माण से पहले इलाके में मौजूद भूमिगत सीवरेज और ड्रेनेज व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। पीजीआई के एडवांस न्यूरो साइंस सेंटर की ओर जाने वाले गेट नंबर-3 के छोटे चौक से लेकर सेक्टर-14 और 15 के चौक तक लाइनों को बदला जाएगा। नई लाइनें बिछाने के बाद उन्हें मौजूदा सीवरेज और ड्रेनेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

    पहले सिर्फ सीढ़ियां, सुविधा के लिए बदला प्लान इन सात वर्षों में अंडरपास के डिजाइन में कई बदलाव हुए। शुरुआती योजना में अंडरपास के अंदर केवल सीढ़ियों का प्रावधान था। बाद में पीजीआई आने वाले मरीजों और अन्य लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन में बदलाव किया गया। अंडरपास के अंदर बनने वाली दुकानों की संख्या भी कम की गई। पहले यहां 12 दुकानें बनाने की योजना थी, जिसे घटाकर 9 दुकानें कर दिया गया, ताकि दुकानों और आवाजाही के लिए अधिक जगह मिल सके।

    नॉर्थ-साउथ कैंपस के बीच जाम से समाधान
    पीयू के सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस में पिछले डेढ़ दशक के दौरान काफी विस्तार हुआ है। वर्ष 2010 तक यहां मुख्य रूप से डेंटल कॉलेज और यूआईईटी थे, लेकिन बाद में पंजाब यूनिवर्सिटी के कई साइंस विभाग और तीन हॉस्टल भी यहां बनाए गए। इसके कारण नॉर्थ और साउथ कैंपस के बीच छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की आवाजाही बढ़ी है।

    इलाके में जाम की समस्या भी बढ़ गई है
    दूसरी ओर, मध्य मार्ग और दक्षिण मार्ग पर भारी ट्रैफिक के कारण इस इलाके में जाम की समस्या भी बढ़ गई है। इसी को देखते हुए पीयू के गेट नंबर-3 के पास नॉर्थ और साउथ कैंपस को जोड़ने के लिए दूसरा अंडरपास बनाने की योजना तैयार की गई।

    चीफ आर्किटेक्ट के पास पहुंचा डिजाइन
    प्रशासनिक मंजूरी के बाद इंजीनियरिंग विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया था। कंसल्टेंसी रिपोर्ट तैयार होने के बाद अब प्रस्तावित डिजाइन को चंडीगढ़ टाउन प्लानिंग विभाग और चीफ आर्किटेक्ट कार्यालय की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।

    सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस तक पहुंच बनाई जाए
    प्रस्तावित योजना के अनुसार, गेट नंबर-3 के पास टीचर फ्लैट्स के सामने से अंडरपास निकालकर सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस तक पहुंच बनाई जाएगी। पार्क की ओर या टीचर फ्लैट्स की दूसरी साइड से अंडरपास बनाने के विकल्प पर योजना तैयार की गई है।

  • वार्ड आरक्षण के ड्रॉ से बदलेगा चंडीगढ़ निगम चुनाव का गणित, 11 सितंबर को तय होगी तस्वीर

    वार्ड आरक्षण के ड्रॉ से बदलेगा चंडीगढ़ निगम चुनाव का गणित, 11 सितंबर को तय होगी तस्वीर

    चंडीगढ़
     नगर निगम चुनाव के लिए 11 सितंबर को होने वाले वार्ड आरक्षण ड्राॅ से पहले सबसे ज्यादा नजर उन वार्डों पर है, जो अनुसूचित जाति (एससी) और महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकते हैं।

    2011 की जनगणना में वार्डवार एससी आबादी के प्रतिशत और पिछले आरक्षण की रोटेशन व्यवस्था को आधार मानें तो वार्ड नंबर-1, 3, 4, 9, 15, 29 और 32 एससी आरक्षण के लिए संभावित वार्डों की सूची में सबसे आगे हैं।

    सात एससी वार्डों में से तीन को 11 सितंबर के ड्रा में एससी महिला के लिए आरक्षित किया जाएगा, जबकि बाकी चार एससी वर्ग की महिला-पुरुष के लिए ओपन रहेंगे।

    इसलिए इन वार्डों के आरक्षित होने की संभावना अधिक
    वार्ड-1, 3, 4, 9, 15, 29, 32 इन सात वार्डों को संभावित एससी वार्डों के तौर पर इसलिए देखा जा रहा है क्योंकि 2021 में एससी के लिए आरक्षित रहे सात वार्डों को रोटेशन के तहत इस बार बाहर रखा गया है।

    2021 में वार्ड-7, 16, 19, 24, 26, 28 और 31 एससी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए थे। इनमें वार्ड-16, 19 और 28 एससी महिला के लिए आरक्षित थे।

    आरक्षण के तय फार्मूले के अनुसार एक चुनाव में एससी के लिए आरक्षित वार्डों को अगले चुनाव में दोबारा उसी श्रेणी में आरक्षित करने के बजाय एससी आबादी के प्रतिशत के आधार पर अगले वार्डों को मौका दिया जाता है।

    महिलाओं के लिए भी 12 वार्ड आरक्षित होंगे
    35 में से कुल 12 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएंगे। इनमें तीन एससी महिला और नौ सामान्य महिला वार्ड होंगे। कई पुरुष नेताओं को अपनी पत्नी को चेहरा बनाना होगा। पहले भी देवेंद्र बबला जैसे नेता ने महिला आरक्षण के बाद पत्नी हरप्रीत कौर बबला को चुनाव लड़ाया था।

    इन पार्षदों को तलाशना पड़ सकता है नया वार्ड
    वार्ड-1 में अभी आप पार्षद जसविंद्र कौर सामान्य वर्ग श्रेणी से हैं। वार्ड-3 पर भाजपा पार्षद दलीप शर्मा के सामने आरक्षण तीसरी बार जीत का क्रम रोकेगा। उन्हें नई राजनीतिक जमीन तलाशनी होगी। वार्ड-4 में आप से भाजपा में शामिल होने के बाद डिप्टी मेयर की कुर्सी पर पहुंची सुमन शर्मा काबिज हैं। उनको भी अब नए वार्ड से टिकट लेने के लिए लड़ाई लड़नी होगी।

    वार्ड-9 में भाजपा पार्षद बिमला दुबे हैं। 2021 में वार्ड-7 आरक्षित होने के कारण उन्होंने वार्ड-9 से चुनाव लड़ा था। अब वार्ड-9 छोड़ना पड़ सकता है। वह वापस वार्ड-7 लौट सकते हैं। वार्ड-15 में आप पार्षद रामचंद्र यादव की मुश्किल बढ़ने वाली है। उन्हें टिकट के लिए नई जगह तलाशनी पड़ सकती है।

    वार्ड-29 से आप की टिकट पर पार्षद बने मुन्नवर अब कांग्रेस में जा चुके हैं। आरक्षण को देखते हुए ही नई जगह टिकट की तलाश में उनके पार्टी बदलने की बात कही जा रही है। वहीं अंतिम वार्ड-32 में भाजपा पार्षद एवं सीनियर डिप्टी मेयर जसमनप्रीत सिंह हैं। अगर वार्ड रिजर्व होता है तो उन्हें भी टिकट के लिए दूसरी जगह तलाशनी होगी।