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  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, कक्षा 6 में तीन भाषा नीति लागू करने से इस साल छूट

    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, कक्षा 6 में तीन भाषा नीति लागू करने से इस साल छूट

    नईदिल्ली 
    सुप्रीम कोर्ट ने तीन भाषा नीति को लेकर क्लास 6 के छात्रों को इस साल छूट देने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने अंतरिम आदेश में सीबीएसई से कहा कि क्लास 6 के मौजूदा छात्रों को एक बार की छूट दी जाए। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत तीन भाषा नीति के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। ये याचिकाएं पहले क्लास 9 और बाद में क्लास 6 के लिए नीति लागू करने के फैसले को चुनौती देती हैं। मुख्य मुद्दे पर अब छह हफ्ते बाद सुनवाई होगी। उसमें इस सवाल पर भी बात होगी कि अंग्रेजी को विदेशी भाषा माना जाए या नहीं।

    सुनवाई के दौरान सीबीएसई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुए। उन्होंने बताया कि अदालत के सुझाव पर बोर्ड ने विचार किया और क्लास 6 में इसी साल से नीति लागू करने का फैसला लिया है। मेहता के मुताबिक देश के करीब 28,000 सीबीएसई स्कूलों में से लगभग 99 फीसदी ने नीति अपना ली है। उनके पास किताबें और शिक्षक दोनों हैं। सिर्फ 1.2 फीसदी स्कूल दिक्कत में हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि एनईपी 2020 और एनसीएफ-एसई 2023 में क्लास 6 को ही शुरुआती पड़ाव माना गया है। अगर यह बैच छूट गया, तो बच्चे सीधे क्लास 7 और 8 में उस सीख के बिना पहुंचेंगे, जो नए ढांचे में सोची गई थी।
    सीबीएसई की दलील पर बेंच ने नहीं दिखाई सहमति

    बेंच इससे सहमत नहीं दिखी। उसने कहा कि अप्रैल में सत्र शुरू हुए महीनों बीत चुके हैं, इसलिए नीति अप्रैल 2027 से लागू की जाए। तब तक किताबें और शिक्षक भी पूरी तरह मिल जाएंगे। अदालत ने यह भी साफ किया कि वह सीबीएसई की योजना पर रोक नहीं लगा रही। यह बस एक "सॉफ्ट लॉन्च" है, ताकि बच्चे बदलाव से तालमेल बिठा सकें।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन और आनंद ग्रोवर ने कहा कि मामला ज्यादा लंबा नहीं खिंचना चाहिए, क्योंकि बच्चों में घबराहट है। उनके मुताबिक करीब तीन लाख छात्र इससे जुड़े हैं और पहले से मानसिक दबाव झेल रहे हैं। बीच सत्र में कुछ नया थोपना उन पर और बोझ डालेगा। ग्रोवर ने यह भी बताया कि कुछ भारतीय भाषाओं की किताबें अब तक उपलब्ध नहीं हैं। क्लास 9 की कुछ किताबें सिर्फ ऑनलाइन हैं और छपी कॉपी का इंतजार है। इससे ग्रामीण इलाकों के बच्चों को खासी परेशानी होगी। इस पर बेंच ने याद दिलाया कि कोविड के दौर में बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई के आदी हो चुके हैं और मोबाइल पर काम संभाल सकते हैं। उसने याचिकाकर्ताओं को बेहतर वजहें ढूंढने के लिए टोका भी। अदालत ने दिक्कत झेल रहे स्कूलों तक पहुंचने के लिए विशेषज्ञ अफसरों की एक समिति बनाने का सुझाव भी दिया।
    सीबीएसई ने भी कोर्ट में दिए आंकड़े

    सीबीएसई ने कोर्ट को आंकड़े भी दिए। क्लास 6 की तीसरी भाषा की किताबें सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में एनसीईआरटी की वेबसाइट पर मौजूद हैं। इनसे 98 फीसदी से ज्यादा स्कूलों की पसंद पूरी हो जाती है। बाकी भाषाओं के लिए एससीईआरटी की किताबें और संसाधन काम आएंगे। शिक्षकों के मामले में 20,777 स्कूलों के आंकड़े देखें तो 19,386 यानी करीब 93.3 फीसदी स्कूलों में कम से कम दो भारतीय भाषाओं के शिक्षक हैं। इनमें से 3,523 स्कूलों में तीन या उससे ज्यादा भाषाओं के शिक्षक हैं।

    बोर्ड ने यह भी बताया कि 16 सितंबर को पांच सदस्यीय समिति बनी है, जो क्लास 6 से 10 तक इस ढांचे को लागू करने में मदद करेगी और निगरानी भी रखेगी। इसके प्रमुख शिक्षा मंत्रालय के निदेशक भगवती प्रसाद कलाल हैं। समिति में एनसीईआरटी सचिव राजीव कुमार, सीबीएसई की अकादमिक निदेशक प्रज्ञा एम. सिंह, केवीएस की अतिरिक्त आयुक्त चंदना मंडल और एनवीएस के उपायुक्त सोमवीर पूनिया शामिल हैं। नए नियम में तीन में से कम से कम दो भाषाओं का भारतीय होना जरूरी है। क्लास 7, 8 और 9 के जो बच्चे दो गैर-भारतीय भाषाएं पढ़ रहे थे, उन्हें सीबीएसई पहले ही राहत दे चुका है। वे अपना मौजूदा कॉम्बिनेशन रख सकते हैं और एक भारतीय भाषा अलग से जोड़ेंगे। इस अतिरिक्त भाषा का आकलन स्कूल स्तर पर होगा, क्लास 10 की बोर्ड परीक्षा में नहीं।

    गौरतलब है कि कुछ याचिकाकर्ताओं को डर था कि क्लास 10 के स्कूल-स्तर के आकलन में भी रिजल्ट रोके जा सकते हैं। बेंच ने इसे खारिज करते हुए कहा कि वह देखना चाहेगी कि कौन सा स्कूल इंटरनल असेसमेंट के आधार पर किसी बच्चे को रोकता है।

  • रेखा सरकार ने वापस लिया R3 नियम, 9वीं में तीसरी भाषा की बाध्यता खत्म; 10वीं बोर्ड के लिए CBSE पैटर्न लागू

    रेखा सरकार ने वापस लिया R3 नियम, 9वीं में तीसरी भाषा की बाध्यता खत्म; 10वीं बोर्ड के लिए CBSE पैटर्न लागू

    नई दिल्ली

     दिल्ली के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण खबर है। दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने अपने उस नियम को वापस ले लिया है, जिसमें कहा गया था कि यदि कोई छात्र कक्षा 9वीं में तीसरी भाषा (R3) के विषय में पास नहीं होता है, तो उसे 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    शिक्षा विभाग ने इस संबंध में एक नया नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि अब इस मामले में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा जारी किए गए नियम और गाइडलाइंस को ही फॉलो किया जाएगा।

    क्या था पूरा मामला और क्यों परेशान हुए छात्र?
    राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF-SE 2023) के तहत सीबीएसई ने तीन-भाषा नीति लागू की है। इसके तहत 9वीं कक्षा से छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी अनिवार्य हैं, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।

    17 अगस्त को दिल्ली शिक्षा विभाग ने कक्षा 9वीं की परीक्षा और प्रमोशन नीति का एक सर्कुलर जारी किया था। जिसमें लिखा था कि जो छात्र 9वीं में तीसरी भाषा (R3) में फेल होंगे, उन्हें 10वीं कक्षा में प्रमोट तो कर दिया जाएगा, लेकिन जब तक वे R3 विषय को पास नहीं कर लेते, तब तक उन्हें 10वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।

    दूसरी ओर, सीबीएसई के 10 जुलाई वाले सर्कुलर में यह कहा गया था कि R3 का मूल्यांकन पूरी तरह से स्कूल के इंटरनल असेस्मेंट के जरिए होगा। छात्र को पासिंग सर्टिफिकेट पाने के लिए R3 पास करना होगा, लेकिन R3 में अंक कम होने या पास न होने पर छात्र को 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने से रोका नहीं जाएगा। दोनों सर्कुलर के बीच इस विरोधाभास के कारण छात्रों और उनके माता-पिता के बीच काफी परेशान थे।

    सीबीएसई के नियम ही होंगे लागू
    अब दिल्ली सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तीसरी भाषा (R-3) को लेकर पूरी तरह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के नियम ही लागू होंगे। कक्षा 9 और 10 के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। तीसरी भाषा (R-3) का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर इंटरनल असेसमेंट के माध्यम से होगा। कक्षा 10 में तीसरी भाषा के लिए अलग से बोर्ड परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी। R-3 में मिले अंक छात्र के फाइनल सीबीएसई सर्टिफिकेट पर जरूर दिखेंगे, लेकिन ये अंक 10वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए जरूरी नहीं हैं।

  • CBSE Re-Evaluation 2026 प्रक्रिया प्रभावित, पोर्टल क्रैश होने से छात्र परेशान

    CBSE Re-Evaluation 2026 प्रक्रिया प्रभावित, पोर्टल क्रैश होने से छात्र परेशान

    नई दिल्ली

    सीबीएसई बोर्ड की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। चार दिन के लंबे इंतजार के बाद जब पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन पोर्टल एक्टिव हुआ तो छात्र खुशी से फूले नहीं समाए, लेकिन उनकी खुशी बहुत ज्यादा देर नहीं टिक सकी। पोर्टल लॉन्च होने के कुछ देर बाद ही सोशल मीडिया पर शिकायतें आने लगी, लेकिन अब बोर्ड ने वापस से पोर्टल को सक्रिय कर दिया है। हालांकि, कुछ समय पहले अधिकांश छात्रों को अपने सभी लॉगिन विवरण अपलोड करने के बाद स्क्रीन फ्रीज होने की समस्या का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही कुछ छात्रों ने आॅनलान पाई गई गलतियों का वीडियो भी शेयर किया है।

    वहीं, कुछ ने तो पोर्टल पर लॉगिन को लेकर शिकायतें दर्ज की है। दरअसल, सीबीएसई की ओर से 12वीं क्लास की कॉपियों के लिए पुनर्मूल्यांकन के लिए पोर्टल आज यानी मंगलवार से फिर से ओपन कर दिया गया है। जिन छात्रों ने री-इवैल्यूएशन के लिए स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था और उनको कॉपी में अंकों की गड़बड़ी है वे अब कॉपी को रीचेक करवाने के लिए आॅनलाइन माध्यम से फॉर्म भर सकते हैं। एप्लीकेशन फॉर्म भरने की लास्ट डेट 6 जून 2026 तय की गई है।

    10-12 बार ट्राई क‍िया पर नहीं खुल रहा पोर्टल
    सीबीएसई की एक छात्रा की मां ने बताया कि उनकी बेटी कॉमर्स की छात्रा है. उन्होंने 10 से 12 बार लॉग‍िन करने की कोश‍िश की, कैप्चा कोर्ड भरने के बाद पेज क्रैश हो जाता है। 

    स्कैन कॉपी या फिजिकल कॉपी? पेज नंबर को लेकर छात्रों का कन्फ्यूजन हुआ दूर
    सीबीएसई 12वीं पुनर्मूल्यांकन का फॉर्म भरते समय छात्रों के सामने एक नया तकनीकी असमंजस खड़ा हो गया है. छात्र लगातार पूछ रहे हैं कि री-इवैल्युएशन फॉर्म में उन्हें 'स्कैन की गई डिजिटल कॉपी' का पेज नंबर लिखना है या उनकी 'मूल (फिजिकल) उत्तर पुस्तिका' का? उदाहरण के लिए, यदि कोई उत्तर डिजिटल कॉपी में पेज 7 पर है और असल कॉपी में पेज 4 पर, तो क्या भरें?

    सीबीएसई के नियमों और पूर्व मूल्यांकन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, छात्रों को फॉर्म में स्कैन की गई डिजिटल कॉपी (Scanned Copy Page Number) का ही पेज नंबर लिखना चाहिए. इसकी वजह यह है कि जो परीक्षक आपकी कॉपी की दोबारा जांच करेगा, उसके सामने आपकी फिजिकल कॉपी नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर वही 'स्कैन की गई डिजिटल कॉपी' होगी. अगर आप स्कैन कॉपी के अनुसार पेज नंबर (जैसे- पेज 7) लिखेंगे, तो परीक्षक को उस विवादित उत्तर या 'अनचेक्ड सवाल' तक तुरंत पहुंचने में आसानी होगी. छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी गफलत से बचने के लिए स्कैन की गई पीडीएफ (PDF) के पेज नंबर को ही आधार बनाएं.

     एक-एक नंबर के लिए मची है जंग, छात्र बोले- हमारे साथ मत खेलो
    कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए यह पुनर्मूल्यांकन कोई मामूली प्रक्रिया नहीं है. दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) सहित देश के तमाम बड़े विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए दशमलव के अंकों की भी भारी अहमियत होती है. ऐसे में सिस्टम की तकनीकी गड़बड़ियों या परीक्षकों की लापरवाही के कारण जिन छात्रों के 5 से 10 नंबर कम हुए हैं, उनका पूरा साल और करियर दांव पर लग गया है. छात्र बोर्ड से त्वरित न्याय की गुहार लगा रहे हैं। 

    फीस…25 से 100 रुपए
    अगर कोई छात्र किसी एक प्रश्न को रीचेक करवाने के लिए आवेदन करेगा तो उसे 25 रुपए का भुगतान करना होगा। इसके अलावा पूरी कॉपी का पुनर्मूल्यांकन/ री-टोटलिंग करवाने के लिए 100 रुपए फीस जमा करनी होगी।

    सीबीएसई ने साझा की डिटेल
    इधर, सीबीएसई ने सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी साझा की है। सीबीएसई ने लिखा- प्रिय विद्यार्थियों, मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल अब सक्रिय हो गया है। अंकों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया के चरण-दर-चरण निर्देशो के लिए कृपया वीडियो को ध्यानपूर्वक देखें।

    पोर्टल लिंक: https://postresult.cbseit.in/pvr/ 

    अगले साल से डिजीलॉकर रखेंगे कॉपियां
    इधर, दावार किया जा रहा है कि सीबीएसई बोर्ड अगले साल से बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है। इसमें स्टूडेंट्स को सीधे डिजीलॉकर पर रिजल्ट के साथ ही स्कैन की हुई कॉपी भी उपलब्ध करवा दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य पूरी परीक्षा के लिए पारदर्शिता और स्टूडेंट के बीच भरोसा बनाने का है। 

  • भव्या रंजन का कमाल: CBSE 12वीं में 99.8% अंक हासिल कर बनीं देश की टॉपर

    भव्या रंजन का कमाल: CBSE 12वीं में 99.8% अंक हासिल कर बनीं देश की टॉपर

    रांची
    रांची की छात्रा भव्य रंजन ने CBSE 12वीं परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 99.8 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं. रांची के ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल की छात्रा भव्या अब तक सामने आए परिणामों के अनुसार नेशनल टॉपर्स की सूची में शामिल मानी जा रही हैं. ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल  की छात्रा आर्ट्स स्ट्रीम की नेशनल टॉपर के रूप में सामने आई हैं. उनकी इस सफलता से स्कूल, परिवार और शहर में खुशी की लहर है. भव्या ने इंग्लिश, हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस और पेंटिंग में 100 में 100 नंबर हासिल किए हैं। 

    भव्या की सफलता ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के दम कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है। 

    अपनी उपलब्धि पर क्या बोलीं भव्या? 

    अपनी उपलब्धि के बारे में बताते हुए छात्रा ने कहा कि वह पढ़ाई को घंटों में नहीं बांटती थीं बल्कि प्रोडक्टिव स्टडी पर फोकस करती थीं. उन्होंने कहा कि रोजाना पढ़ाई, सही प्लानिंग और खुद पर भरोसा उनका सफलता बनीं. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और दोस्तों को दिया। 

    स्कूल से हमेशा मिला सहयोग
    बात करते हुए भव्या ने बताया कि स्कूल के शिक्षकों ने उनका हर कदम पर साथ दिया. परीक्षा के समय किसी भी तरह की परेशानी में उनके शिक्षकों ने दूर करने में मदद की. भव्या ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि केवल पढ़ाई करना ही जरूरी नहीं है बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।   

    भविष्य की योजना 
    बता दें कि भव्या की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता बिजनेसमैन हैं. परिवार के अनुसार भव्या रोजाना 10 से 12 घंटे नियमित पढ़ाई करती थीं. भव्या का अगला लक्ष्य  UPSC परीक्षा पास कर सिविल सर्विसेज में जाना चाहती हैं और देश की सेवा करना चाहती हैं। 

    क्या बोले स्कूल के डयरेक्टर? 
    स्कूल के अकादमिक डयरेक्टर सिम्मी मेहता ने कहा कि भव्या जैसी छात्रा देश के उज्ज्वल भविष्य की पहचान हैं और उनकी सफलता अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा है।