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  • वाराणसी में सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई, पोकलेन-बुलडोजर से 10 जर्जर भवन ध्वस्त

    वाराणसी में सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई, पोकलेन-बुलडोजर से 10 जर्जर भवन ध्वस्त

     वाराणसी

    वाराणसी में सोमवार को कचहरी चौराहे के पास बड़े लेवल पर बुलडोजर एक्शन देखने को मिला. कचहरी चौहारे के पास मुस्लिम बहुल इलाके में एक साथ छह बुलडोजर और एक पोकलेन मशीन की मदद से 10 बिल्डिंग्स को डिस्मेंटल करने की कार्रवाई शुरू की गई. कार्रवाई के दौरान कुछ भवनों पर लोगों ने खुद ही हथौड़े चलाकर निर्माण तोड़ना शुरू कर दिया. वहीं, कई लोग अपने घरों और दुकानों से सामान निकालते नजर आए। 

    दरअसल, संदहा से कचहरी चौराहे तक करीब 10 किलोमीटर लंबी सड़क के चौड़ीकरण का काम चल रहा है. इसका अधिकांश हिस्सा पूरा हो चुका है, लेकिन पुलिस लाइन से कचहरी चौराहे के बीच करीब 300 मीटर का हिस्सा बाकी था. इस हिस्से में स्थित 10 भवनों को वाराणसी नगर निगम की ओर से जर्जर घोषित किया गया था. अब इन्हीं भवनों को हटाकर सड़क चौड़ीकरण का रास्ता साफ किया जा रहा है। 

    पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने बताया कि संदहा से कचहरी चौराहे तक प्रस्तावित 10 किलोमीटर की सड़क में अब केवल 300 मीटर का हिस्सा शेष है. सड़क चौड़ीकरण में बाधा बने 10 मकान जर्जर हालत में थे, जिन्हें डिस्मेंटल किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि डिस्मेंटलिंग का काम आज ही पूरा कर लिया जाएगा। 

    केके सिंह के मुताबिक, पूरी सड़क चौड़ीकरण परियोजना करीब 250 करोड़ रुपये की है. इसमें अब तक 80 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में वितरित किए जा चुके हैं. पीडब्ल्यूडी का लक्ष्य अक्टूबर के अंत तक सड़क निर्माण का काम पूरा करने का है। 

    हालांकि कार्रवाई के दौरान सड़क पर आवागमन प्रभावित होने से कचहरी जाने वाले वकीलों ने नाराजगी जताई. वकीलों ने कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाते हुए इसे मनमानी बताया। 

  • काशी विश्वनाथ मंदिर का रास्ता होगा सुगम, दालमंडी में 60 फीट चौड़ी सड़क का काम तेज; 172 से ज्यादा भवन हटे

    काशी विश्वनाथ मंदिर का रास्ता होगा सुगम, दालमंडी में 60 फीट चौड़ी सड़क का काम तेज; 172 से ज्यादा भवन हटे

     वाराणसी

    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए दालमंडी से होकर बनाए जा रहे सुगम मार्ग के चौड़ीकरण का काम अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है. करीब एक साल पहले शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के तहत दालमंडी इलाके में ध्वस्तीकरण का काम लगभग पूरा हो गया है. सोमवार को पांच और भवनों पर बुलडोजर चलाया गया. इसके साथ ही चौड़ीकरण की जद में आए भवनों को हटाने का काम पूरा होने की बात पीडब्ल्यूडी ने कही है। 

    दालमंडी में चल रहा यह प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते को पहले के मुकाबले काफी चौड़ा करने के लिए शुरू किया गया था. पीडब्ल्यूडी की ओर से करीब सवा 200 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के तहत दालमंडी इलाके में कुल 187 भवन चौड़ीकरण की जद में आए थे. इन भवनों में छह मस्जिदें भी शामिल थीं। 

    अब तक 170 से ज्यादा भवनों को जमींदोज किया जा चुका है. पीडब्ल्यूडी के मुताबिक करीब 172 से 173 मकान पूरी तरह डिस्मेंटल किए जा चुके हैं. बचे हुए भवनों पर भी आधे से ज्यादा काम पूरा हो गया था. सोमवार को अंतिम चरण में पांच भवनों को गिराया गया. इसके साथ ही इस प्रोजेक्ट के तहत भवनों को हटाने का काम पूरा हो गया. दालमंडी का इलाका लंबे समय से संकरी गलियों और घनी आबादी के लिए जाना जाता है. इसी इलाके से होकर काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते को चौड़ा किया जा रहा है. प्रोजेक्ट के तहत करीब 60 फीट चौड़ी और साढ़े 600 मीटर लंबी सड़क तैयार की जानी है। 

    गलियों के जाल से निकलेगा 60 फीट चौड़ा रास्ता
    इस चौड़ी सड़क के तैयार होने के बाद मंदिर तक पहुंचने का रास्ता मौजूदा संकरी गलियों के मुकाबले काफी सुगम हो जाएगा. फिलहाल इस पूरे इलाके में चौड़ीकरण की जद में आए भवनों को हटाने का काम लगभग पूरा किया जा चुका है. अब आगे का काम सड़क और उससे जुड़ी सुविधाओं को तैयार करने पर केंद्रित होगा। 

    दालमंडी चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के तहत कुल 187 भवनों की पहचान की गई थी. इनमें छह मस्जिदें भी शामिल थीं. प्रशासन ने मस्जिद कमेटी के सहयोग से इन मस्जिदों को भी चौड़ीकरण की जरूरत के अनुसार आंशिक या पूर्ण रूप से हटाया है. भवनों को हटाने का काम चरणबद्ध तरीके से किया गया. अब अंतिम चरण में पांच भवनों को भी डिस्मेंटल कर दिया गया. पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक इसके साथ ही डिमोलिशन का अंतिम चरण पूरा हो गया है। 

    पीडब्ल्यूडी के वाराणसी के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने बताया कि दालमंडी में डिस्मेंटलिंग का फाइनल चरण सोमवार को था. इस चरण में करीब पांच भवनों को डिस्मेंटल किया गया. उन्होंने बताया कि अब तक 172 से 173 मकान पूरी तरह डिस्मेंटल किए जा चुके हैं. बचे हुए भवनों पर भी आधे से ज्यादा काम पहले ही हो चुका था. केके सिंह के मुताबिक चौड़ीकरण की जद में आए भवनों के लिए अब तक 132 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा जा चुका है. भवनों को हटाने के लिए पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद ली गई। 

    भवनों को हटाने के बाद अब प्रोजेक्ट के अगले महत्वपूर्ण हिस्से पर काम चल रहा है. अधिकारियों के मुताबिक इलाके में वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम अभी जारी है. यह काम नवंबर महीने में पूरा होने की उम्मीद है. पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने बताया कि वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम पूरा होने के बाद करीब एक से डेढ़ महीने में प्रोजेक्ट को पूरा कर दिया जाएगा. इस हिसाब से दिसंबर के अंत तक काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए तैयार किया जा रहा सुगम मार्ग पूरा होने की उम्मीद है। 

    अब वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम
    दालमंडी चौड़ीकरण का यह प्रोजेक्ट करीब एक साल त
    क चलने वाला था. अधिकारियों के मुताबिक इसे दिसंबर में पूरा करना बड़ी उपलब्धि होगी. इसके लिए भवनों के ध्वस्तीकरण के साथ-साथ सड़क से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं पर भी काम किया जा रहा है. केके सिंह ने बताया कि इस काम में प्रशासन का पूरा सहयोग मिला है. इसी सहयोग के चलते ध्वस्तीकरण के काम को अंतिम चरण तक पहुंचाया जा सका है. अब दालमंडी में भवनों को हटाने का काम खत्म हो चुका है और सड़क निर्माण से जुड़े बाकी काम को पूरा करने पर जोर है। 

    करीब एक साल पहले शुरू हुआ यह काम अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां दालमंडी में चौड़ीकरण की सबसे बड़ी बाधा यानी भवनों को हटाने का काम पूरा हो चुका है. 60 फीट चौड़ी और साढ़े 600 मीटर लंबी सड़क के तैयार होने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर जाने वाले रास्ते को नया स्वरूप मिलेगा. अधिकारियों की योजना के मुताबिक नवंबर में वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम पूरा होगा और इसके बाद करीब एक से डेढ़ महीने में पूरा प्रोजेक्ट तैयार कर दिसंबर के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। 

  • सड़क चौड़ीकरण के लिए उज्जैन में कार्रवाई, केडी गेट स्थित मदीना मस्जिद का हिस्सा हटाया गया

    सड़क चौड़ीकरण के लिए उज्जैन में कार्रवाई, केडी गेट स्थित मदीना मस्जिद का हिस्सा हटाया गया

    उज्जैन 

    शहर में सुगम यातायात और विकास कार्यों को गति देने के लिए नगर पालिक निगम द्वारा चलाए जा रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की गई है। गाड़ी अड्डा चौराहा से केडी गेट होते हुए सोमवरिया तक बनने वाले 2.2 किलोमीटर लंबे और 18 मीटर चौड़े मार्ग के निर्माण में बाधा बन रहे निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया जारी है।

    सड़क की जद में आए धार्मिक स्थलों के हिस्से हटाए
    इसी क्रम में नगर निगम की टीम ने जोन-1 के अंतर्गत केडी गेट स्थित मदीना मस्जिद (जमीयतुल कुरेश कस्साबान कसाई वाड़ा) और शिया दाऊदी बोहरा जमात की दाऊल इमारत के चौड़ीकरण की जद में आ रहे प्रभावित हिस्सों को हटाया। 

    पोकलेन और जेसीबी से हटाए गए निर्माण
    चौड़ीकरण की जद में आ रहे निर्माणों को नगर नि
    गम की रिमूवल गैंग ने पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद से ध्वस्त किया। कार्रवाई के दौरान टीम ने सड़क निर्माण में बाधा बन रहे हिस्सों को हटाने का काम किया। 

    अधिकारियों की निगरानी में चला अभियान
    पूरी कार्रवाई सहायक आयुक्त घनश्याम मचार, भवन अधिकारी राजकुमार राठौर और भवन निरीक्षक शिवम गुप्ता की देखरेख में संपन्न हुई। अधिकारियों की मौजूदगी में नगर निगम की टीम ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई को अंजाम दिया।

    सुरक्षा के लिए तैनात रहा पुलिस बल
    कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पर्याप्त पुलिस बल मौजूद रहा। पुलिस की मौजूदगी में नगर निगम की टीम ने प्रभावित हिस्सों को हटाने की कार्रवाई की। 

    18 मीटर चौड़ा मार्ग बनने से घटेगा ट्रैफिक दबाव
    नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, 18 मीटर चौड़े इस मार्ग के बनने से केडी गेट और आसपास के क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम होगा और आवागमन सुचारू हो सकेगा। प्रभावित हिस्सों को हटाने के बाद आगे के निर्माण कार्य को तेजी से पूरा किया जाएगा। 

  • सपा दफ्तर पर बुलडोजर कार्रवाई, 21 साल पुरानी इमारत ढही; राजनीति गरमाई

    सपा दफ्तर पर बुलडोजर कार्रवाई, 21 साल पुरानी इमारत ढही; राजनीति गरमाई

    सीतापुर 
    यूपी के सीतापुर में सुबह-सुबह समाजवादी पार्टी के ऑफिस में योगी सरकार का बुलडोजर गरजा। टॉउन हॉल परिसर में 21 साल पहले नजूल भूमि पर बना कार्यालय चार बुलडोजर की मदद से जमींदोज कर दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे। प्रशासन द्वारा नोटिस जारी होने पर दो दिन पहले सपा कार्यालय खाली कर दिया गया था।

    टाउन हॉल परिसर की नजूल भूमि को तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष राधेश्याम जायसवाल ने नियम विरुद्ध 15 जनवरी 2005 को समाजवादी पार्टी के कार्यालय संचालन के लिए आवंटित किया था। जिसका वार्षिक किराया केवल 100 रुपये था। आवंटन प्रक्रिया नियम विरुद्ध होने पर पूर्व में नगर पालिका ने उक्त आवंटन को निरस्त कर दिया था। आवंटन निरस्त होने के बाद भी सपा कार्यालय नियम विरुद्ध संचालित हो रहा था। बीते आठ जून को जिलाधिकारी न्यायालय ने नोटिस जारी कर कार्यालय को 15 दिन के भीतर खाली करने का आदेश जारी किया गया था।

    प्रशासन की ओर से लगातार कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी। तय समय पूरा होने के पहले ही सपा जिलाध्यक्ष छत्रपाल यादव ने लगभग दो दिन पहले ही कार्यालय खाली कर दिया। कार्यालय खाली होने के बाद सोमवार इसके बाद सोमवार सुबह ही प्रशासनिक अधिकारी बुलडोजर लेकर समाजवादी पार्टी कार्यालय पर पहुंच गए। समाजवादी पार्टी कार्यालय की बिल्डिंग को बुलडोजर की मदद से जमीदाज कर दिया। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

    सपा कार्यालय को दिया गया था नोटिस
    नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी सीमा सिंह ने कहा कि नियमों के तहत संबंधित पक्ष को विधिवत नोटिस जारी किया गया था। निर्धारित 15 दिन की अवधि पूरी होने के बाद भूमि को खाली कराया गया, क्योंकि उस पर अवैध कब्जा था। यहां एक पार्टी कार्यालय संचालित हो रहा था। प्रशासन का उद्देश्य इस भूमि को कब्जामुक्त कराकर सरकारी महाविद्यालय के निर्माण के लिए सुरक्षित करना है।

    बागपत में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद पर चला बुलडोजर
    उधर, बागपत के राजपुर खामपुर गांव में न्यायालय के आदेश पर प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बनी करीब 40 साल पुरानी मस्जिद को शनिवार को बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया। कार्रवाई के दौरान गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। प्रशासनिक अधिकारी पूरे अभियान की निगरानी करते रहे।

    राजपुर खामपुर गांव में तकिए वाली मस्जिद है। करीब पांच साल पहले गांव के एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई गई थी कि इस मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाया गया है। शिकायत के अनुसार तालाब की जमीन पर करीब 40 साल पहले मस्जिद का निर्माण कर लिया गया था। मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था। अब न्यायालय के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने पुलिस और राजस्व विभाग की टीम के साथ शनिवार को ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान गांव में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।

  • संभल में बड़ी कार्रवाई: खेड़ेश्वर महादेव मंदिर के पास कथित अवैध मजार जमींदोज

    संभल में बड़ी कार्रवाई: खेड़ेश्वर महादेव मंदिर के पास कथित अवैध मजार जमींदोज

     संभल 

    उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनी 'खेड़े वाले बाबा चमन शाह बाबा दरगाह शरीफ मजार' को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया है. कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में यह एक्शन लिया गया। 

    संभल के बबराला थाना इलाके के बाघऊ गांव में जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई की मौजूदगी में राजस्व विभाग की टीम ने गाटा संख्या 592 की सरकारी ऊसर भूमि पर अवैध रूप से बनी मजार को जमींदोज कर दिया. लेखपाल की जांच रिपोर्ट में 24 वर्ग मीटर क्षेत्र पर अवैध कब्जे की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद ग्राम सभा की शिकायत पर उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत यह बड़ी कार्रवाई की गई. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी मनोज रावत और चार थानों की पुलिस फोर्स मौके पर मुस्तैद रही। 

    पैमाइश में हुई थी अवैध कब्जे की पुष्टि

    बीते कुछ महीने पहले राजस्व विभाग की टीम, नायब तहसीलदार और एसडीएम विकास चंद्र ने गांव पहुंचकर जमीन की पैमाइश की थी. इसमें मजार बनाकर सरकारी जमीन घेरने की बात साबित हुई, जिसके बाद मजार की देखभाल करने वाले अजीज को नोटिस दिया गया था. तहसीलदार कोर्ट ने इस अवैध निर्माण को हटाने का आदेश जारी किया था। 

    डीएम कोर्ट से अपील खारिज होते ही एक्शन
    तहसीलदार कोर्ट के फैसले के खिलाफ मजार कमेटी ने जिलाधिकारी न्यायालय में अपील दायर की थी, जिसे कोर्ट ने 3 जून को खारिज कर दिया. सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण के लिए विशेष टीम गठित की. सुरक्षा के लिहाज से बबराला थाना प्रभारी निशांत राठी सहित भारी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवान तैनात रहे, जिससे कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। 

  • SAIL की जमीन पर बना था TMC नेता का ऑफिस, प्रशासन ने चलाया बुलडोजर अभियान

    SAIL की जमीन पर बना था TMC नेता का ऑफिस, प्रशासन ने चलाया बुलडोजर अभियान

    कोलकाता

    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार बनने के बाद राज्यभर में अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है. इसी कड़ी में पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल के बर्नपुर इलाके में एक और तृणमूल कांग्रेस कार्यालय पर बुलडोजर चलाया गया। 

    शनिवार को बर्नपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित टीएमसी पार्षद अशोक रुद्र के पार्टी कार्यालय को ध्वस्त कर दिया गया. बताया जा रहा है कि ये दफ्तर सेल-आईएसपी (इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी) की जमीन पर बना हुआ था। 

    स्थानीय प्रशासन और सेल अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा. पिछले कुछ दिनों में बर्नपुर इलाके में ये चौथा टीएमसी पार्टी दफ्तर है जिसे बुलडोजर चलाकर हटाया गया है। 

    टीएमसी ने लगाया 'टारगेट पॉलिटिक्स' का आरोप
    इस कार्रवाई को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर 'टारगेट पॉलिटिक्स' का आरोप लगाया है. टीएमसी नेताओं का कहना है कि विपक्षी दलों के दफ्तरों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. हालांकि सेल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज किया है. अधिकारियों का कहना है कि संबंधित लोगों को पहले कई बार नोटिस दिया गया था, लेकिन अवैध कब्जा नहीं हटाया गया. इसके बाद मजबूरन बुलडोजर कार्रवाई करनी पड़ी। 

    सेल अधिकारियों ने ये भी कहा कि अब प्रशासन का सहयोग मिलने से अवैध कब्जों को हटाने का अभियान तेज किया गया है और आगे भी ये कार्रवाई जारी रहेगी. उनका कहना है कि किसी विशेष दल को निशाना नहीं बनाया जा रहा, बल्कि विकास परियोजनाओं के लिए सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाएंगे। 

    इससे पहले मंगलवार को बर्नपुर के त्रिवेणी मोड़ स्थित तृणमूल युवा कांग्रेस के एक पार्टी दफ्तर पर भी बुलडोजर कार्रवाई की गई थी. IISCO प्रबंधन ने आरोप लगाए थे कि ये पार्टी दफ्तर उनकी जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था और जमीन खाली करने के लिए पहले नोटिस भी जारी किया गया था. हालांकि, नोटिस को अनदेखा कर दिया गया जिसके बाद दफ्तर पर बुलडोजर चलाया गया। 

    आसनसोल में टीएमसी के अवैध ऑफिस को तोड़ा

    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कई चीजों में बदलाव देखने को मिल रहा है। शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनने के बाद अवैध कब्जा हटाने के लिए लगातार बुलडोजर गरज रहा है। आसनसोल के बर्नपुर में सेल की जमीन से अवैध कब्जा को हटाया गया। यहां कब्जा कर टीएमसी का ऑफिस भी बनाया गया था, जिसे तोड़ दिया गया है।

    टीएमसी यूथ विंग का ऑफिस जमींदोज
    दरअसल, कोलकाता और हावड़ा के बाद आसनसोल के बर्नपुर में बुलडोजर की दहाड़ सुनाई दी है। त्रिवेणी मोड़ के करीब सेल की जमीन पर टीएमसी यूथ विंग का ऑफिस बना हुआ था। इस्को की तरफ से कई बार अवैध ऑफिस को हटाने के लिए नोटिस दिया गया था। टीएमसी सत्ता में थी तो यूथ विंग के लोग जबरदस्ती वहां निर्माण कर लिया। सत्ता बदलते ही भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में उस ऑफिस को तोड़ दिया गया है।

    बदले की भावना से कार्रवाई
    वहीं, बुलडोजर कार्रवाई के बाद टीएमसी के स्थानीय नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है। बिना किसी बातचीत के इस ऑफिस को तोड़ दिया गया है। टीएमसी नेता ने यह भी आरोप लगाया है कि सेल की जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर कई अन्य लोग भी व्यवसाय चला रहे हैं। मगर कार्रवाई सिर्फ टीएमसी ऑफिस पर की गई है।

    रेलवे की जमीनों से भी हटाया गया अतिक्रमण
    इसके साथ ही आसनसोल रेल मंडल की अतिक्रमित जमीनों से भी कब्जा हटाया गया है। अवैध क्वार्टर और घरों को बुलडोजर से तोड़ा गया है। बुलडोजर कार्रवाई के बाद वहां हड़कंप मच गया।

    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शुभेंदु अधिकारी
    गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनने के बाद पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों में बुलडोजर की कार्रवाई चल रही है। कोलकाता, हावड़ा और नंदीग्राम में भी यह कार्रवाई हो रही है। यह कार्रवाई अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ है।

  • दिल्ली के उत्तम नगर में बुलडोजर कार्रवाई जारी, ट्राइब्यूनल ने दी राहत की अर्जी को नकारा

    दिल्ली के उत्तम नगर में बुलडोजर कार्रवाई जारी, ट्राइब्यूनल ने दी राहत की अर्जी को नकारा

    नई दिल्ली

     उत्तम नगर की उसी पुनर्वासित कालोनी में  सुबह एक बार फिर निगम ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, जहां कुछ दिन पहले तरुण नाम के युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस बार निगम पूरी कानूनी तैयारी के साथ पहुंचा था। जैसे ही निगम के लिए गठित अपीलीय ट्रिब्यूनल ने डिमालिशन पर रोक हटाई, वैसे ही निगम ने उन विवादित इमारतों को गिराना शुरू कर दिया जो कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर बनाई गई थीं।

    के अनुसार तरुण की हत्या के कुछ दिन बाद ही जब निगम ने इस मामले में आरोपितों में से एक के घर के अवैध हिस्से पर हथौड़ा चलाया था, तब इस मामले में 13 पक्षकारों ने निगम की कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने उन्हें 15 दिन की राहत देते हुए ट्रिब्यूनल में अपील करने का निर्देश दिया था।

    28 अप्रैल को याचिकाकर्ता ट्रिब्यूनल पहुंचे। 29 अप्रैल हुई सुनवाई में निगम ने दलील दी कि ये निर्माण न केवल अवैध हैं, बल्कि सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज करते हुए स्टे हटा दिया। इसके अगले ही दिन निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी।

    निगम पश्चिमी जोन के अधिकारी ने बताया कि बृहस्पतिवार को पूरे दिन चली कार्रवाई के दौरान दो संपत्तियों पर निगम ने हथौड़ा चलाया। इनमें एक संपत्ति वह थी जिसपर तीन प्लाटों को जोड़कर इमारत खड़ी की गई थी। वहीं दूसरी संपत्ति ऐसी थी, जिसपर दो प्लाट को जोड़कर घर बनाया गया था। सुबह जब निगम की टीमें कार्रवाई करने पहुंचीं, तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे। इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस तैनात थी।

    इस इलाके में कई आवासीय इकाइयों को आपस में जोड़कर बड़ी इमारतें बना ली गई थीं. एक मामले में तीन घरों को मिलाकर एक ढांचा बनाया गया, जबकि दूसरे मामले में दो इकाइयों को जोड़ा गया था. इस मामले में आरोपी के परिवार ने पहले 13 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था. अदालत ने उन्हें 15 दिनों की अंतरिम राहत दी थी। 

    कोर्ट ने परिवार को एमसीडी ट्रिब्यूनल में अपील करने का निर्देश दिया था. याचिकाकर्ताओं ने 28 अप्रैल को ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया. 29 अप्रैल को सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने ठोस आधार की कमी की बात कही. इसके बाद स्टे ऑर्डर हटा लिया गया. अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 जून, 2026 को होगी। 

    क्या था पूरा मामला?
    बता दें कि 4 मार्च को दिल्ली के उत्तम नगर स्थित जेजे कॉलोनी, हस्तसाल में होली के दौरान तरुण के परिवार की एक बच्ची ने पानी का गुब्बारा फेंका था. गुब्बारे का पानी पड़ोसी महिला पर गिर गया. इसी बात पर दो पड़ोसियों के बीच खूनी संघर्ष हो गया, जिसमें 26 साल के तरुण की मौत हो गई थी. अब उसी मामले के आरोपियों के अवैध निर्माण पर प्रशासन का डंडा चला है। 

  • गोरखपुर में सरकारी जमीन पर कब्जा हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई, जाफर अली शाह ‘मासूम’ की मजार पर कार्रवाई

    गोरखपुर में सरकारी जमीन पर कब्जा हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई, जाफर अली शाह ‘मासूम’ की मजार पर कार्रवाई

     गोरखपुर

    गोरखपुर जिला प्रशासन ने शाहपुर थाना क्षेत्र के आवास विकास कॉलोनी के पास गोड़धोइया पुल पर स्थित हजरत बाबा जाफर अली शाह 'मासूम' की मजार को शुक्रवार को ध्वस्त कर दिया. 'गोड़धोइया नाला चौड़ीकरण' के रास्ते में आने के कारण इस बरसों पुराने निर्माण को हटाया गया. पीडब्ल्यूडी की जमीन पर बनी यह मजार नाले के विस्तार और सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रही थी. भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने गुरुवार को बुलडोजर चलाकर सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराया। 

    सीएम योगी का ड्रीम प्रोजेक्ट और मजार
    बताया जा रहा है कि 'गोड़धोइया नाला प्रोजेक्ट' मुख्यमंत्री का प्राथमिकता वाला प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य शहर की जल निकासी व्यवस्था को बेहतर करना है. इसी कड़ी में शाहपुर क्षेत्र में नाले के किनारे हुए अवैध कब्जों को चिन्हित किया गया था. जांच में पाया गया कि मासूम बाबा की मजार लोक निर्माण विभाग (PWD) की जमीन पर बनी थी. प्रोजेक्ट की ड्राइंग के अनुसार, मजार वाला हिस्सा चौड़ीकरण की बाधा बन रहा था, जिसके बाद इसे हटाने का निर्णय लिया गया। 

    कार्रवाई के दौरान भावुक हुए मोहल्ले के लोग
    जब प्रशासन का बुलडोजर मजार के पास पहुंचा, तो आवास विकास कॉलोनी और आसपास के इलाकों के पुरुष और महिलाएं वहां बड़ी संख्या में जुट गए. बरसों पुरानी आस्था का केंद्र होने के कारण कई लोग मजार को टूटता देख भावुक हो गए. हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाते हुए लोगों को समझाया कि सरकारी जमीन और विकास कार्य के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य है. भारी सुरक्षा घेरे के कारण प्रदर्शन की कोई स्थिति नहीं बनी और शांतिपूर्वक ध्वस्तीकरण पूरा हुआ। 

    सरकारी जमीन को कराया गया कब्जा मुक्त
    प्रशासन ने स्पष्ट किया कि गोड़धोइया नाला प्रोजेक्ट को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए सभी बाधाओं को हटाया जा रहा है. मजार ध्वस्त होने के बाद अब वहां नाले के पुख्ता निर्माण और सड़क को चौड़ा करने का काम तेजी से शुरू हो सकेगा. पीडब्ल्यूडी और नगर निगम की टीमें अब मलबे को हटाने और आगे की जमीन के समतलीकरण में जुट गई हैं। 

  • अफीम की करोड़ों की खेती का मामला: दुर्ग में गिरफ्तार नेता के भाई की दुकान पर प्रशासन का बुलडोजर

    अफीम की करोड़ों की खेती का मामला: दुर्ग में गिरफ्तार नेता के भाई की दुकान पर प्रशासन का बुलडोजर

     दुर्ग

    छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए समोदा गांव में बुलडोजर चलाया. इस अभियान के दौरान उस दुकान को ध्वस्त कर दिया गया, जिसे अधिकारियों ने सरकारी जमीन पर बना अवैध निर्माण बताया है. यह दुकान उस व्यक्ति की थी, जिसके भाई को हाल ही में अफीम की खेती के मामले में गिरफ्तार किया गया है. प्रशासन की इस कार्रवाई ने इलाके में काफी चर्चा पैदा कर दी है. जैसे ही बुलडोजर मौके पर पहुंचा, बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां इकट्ठा हो गए और पूरी कार्रवाई को देखने लगे. इस पूरे मामले का संबंध भाजपा किसान मोर्चा के नेता विजय ताम्रकार से जुड़ा बताया जा रहा है, जिन्हें कुछ दिन पहले पुलिस ने अफीम की खेती के आरोप में गिरफ्तार किया था।

    मक्के के खेत में मिली करोड़ों की अफीम
    जानकारी के मुताबिक 7 मार्च को पुलिस और नारकोटिक्स से जुड़ी एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक खेत में छापा मारा था. जांच के दौरान मक्के की फसल के बीच अफीम के पौधे पाए गए. जांच में सामने आया कि खेत में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की जा रही थी. अधिकारियों के अनुसार बरामद फसल की अनुमानित कीमत करीब 8 करोड़ रुपये आंकी गई. इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने भाजपा किसान मोर्चा से जुड़े नेता विजय ताम्रकार को दो अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी।

    भाई की दुकान पर चला बुलडोजर
    इसी घटनाक्रम के बीच प्रशासन ने समोदा गांव में एक और कार्रवाई की. अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार नेता के भाई बृजेश ताम्रकार गांव में करीब 32 डिसमिल सरकारी जमीन पर दुकान चलाते थे. जिला प्रशासन को लंबे समय से इस जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतें मिल रही थीं. जांच के बाद पाया गया कि यह दुकान सरकारी भूमि पर बनाई गई है. इसके बाद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया और मंगलवार को बुलडोजर की मदद से इस निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया. कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर मौजूद रही. इस अभियान का नेतृत्व अतिरिक्त तहसीलदार ने किया. उन्होंने बताया कि प्रशासन ने सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही यह कदम उठाया है. अवैध निर्माण को हटाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया और कुछ ही समय में पूरी संरचना को गिरा दिया गया. अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई अतिक्रमण हटाने के अभियान का हिस्सा थी और इसका उद्देश्य सरकारी जमीन को मुक्त कराना था।

    पहले ही जारी हो चुका था बेदखली आदेश
    प्रशासन के मुताबिक इस मामले में स्थानीय अदालत पहले ही बेदखली का आदेश जारी कर चुकी थी. इसके बावजूद लंबे समय तक कब्जा नहीं हटाया गया. गांव के लोगों और ग्राम प्रधान ने कई बार प्रशासन को लिखित शिकायत देकर बताया था कि सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण किया गया है. इन शिकायतों के आधार पर जांच की गई और अंततः अदालत से बेदखली वारंट जारी होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

    बुलडोजर कार्रवाई देखने जुटे ग्रामीण
    मंगलवार को जब प्रशासन की टीम समोदा गांव पहुंची, तो वहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया. जैसे ही बुलडोजर ने अवैध निर्माण को गिराना शुरू किया, गांव के लोग आसपास इकट्ठा होने लगे. कई लोग पूरे घटनाक्रम को देखने के लिए मौके पर मौजूद रहे. हालांकि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए थे, जिससे कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा नहीं हुई. अधिकारियों का कहना है कि जिले में सरकारी जमीन पर कब्जे के मामलों को लेकर प्रशासन गंभीर है. राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कई जगहों पर अवैध कब्जों की शिकायतें मिल रही हैं और उन्हें हटाने के लिए चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाया जा रहा है. प्रशासन का कहना है कि जहां भी सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मिलेगा, वहां इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।

    विपक्ष ने उठाए सवाल
    इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं. विपक्षी दल कांग्रेस ने अफीम की खेती के मामले को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर अफीम की खेती होना प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. उन्होंने मामले की गहन जांच की मांग भी की है. हालांकि सरकार की ओर से इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

    कानून व्यवस्था पर प्रशासन का जोर
    प्रशासन का कहना है कि अवैध गतिविधियों और सरकारी जमीन पर कब्जे के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिले में सरकारी भूमि की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है. इसी के तहत जहां भी अवैध कब्जे की शिकायत मिलेगी, वहां जांच कर कार्रवाई की जाएगी. समोदा गांव में हुई यह कार्रवाई इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. एक तरफ अफीम की करोड़ों की खेती का खुलासा और दूसरी तरफ उससे जुड़े व्यक्ति के परिवार की अवैध दुकान पर बुलडोजर चलने की घटना ने लोगों का ध्यान खींचा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं. प्रशासन के अधिकारियों ने साफ किया है कि यह कार्रवाई केवल एक मामले तक सीमित नहीं है. जिले में जहां-जहां सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतें हैं, वहां जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में भी अतिक्रमण हटाने का अभियान जारी रहेगा और अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे. इस बीच पुलिस अफीम की खेती से जुड़े मामले की भी जांच आगे बढ़ा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध गतिविधि में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

  • बुलडोजर देख व्यापारियों ने खौफ में खुद चलाए हथौड़े, भीलवाड़ा सर्राफा बाजार में 100 साल में पहली बड़ी स्ट्राइक

    बुलडोजर देख व्यापारियों ने खौफ में खुद चलाए हथौड़े, भीलवाड़ा सर्राफा बाजार में 100 साल में पहली बड़ी स्ट्राइक

    भीलवाड़ा.

    भीलवाड़ा शहर के सबसे पुराने और तंग रास्तों वाले सर्राफा बाजार में सोमवार को नगर निगम का 'पीला पंजा' खौफ की तरह गरजा। करीब सौ साल के इतिहास में यह पहला मौका था, जब इस व्यस्ततम बाजार में बुलडोजर की गर्जना सुनाई दी। इस कार्रवाई से व्यापारियों में हड़कंप मच गया। वहीं, सालों से अतिक्रमण की मार झेल रहे आमजन ने राहत की सांस ली।

    वहीं, नगर निगम ने बाजार क्षेत्र और आवासीय क्षेत्र में सालों से दबी नालियों को भी अतिक्रमण एवं पक्के कब्जों से मुक्ति दिलाई। निगम की कार्रवाई से दहशत में आए सर्राफा व अन्य कारोबारी स्वयं दुकानों व प्रतिष्ठानों के बाहर से अतिक्रमण हटाने में जुट गए। लोग व व्यापारी भी कटर, हथौड़ा, गेती व फावड़ा, संबल लेकर खुद के अतिक्रमण को हटाने के साथ ही प्रशासन के हटाने गिरे मलबे को समटने में जुट गए। बड़ा मंदिर से लेकर सांगानेरी गेट क्षेत्र के लोग तो अतिक्रमण का दस्ता पहुंचने से पहले ही स्वयं कब्जे हटाने में जुट गए।

    विरोध के बावजूद नहीं थमा 'पीला पंजा'
    क्षेत्र के बड़े बुजुर्गों का कहना है कि सर्राफा बाजार में पहली बार अतिक्रमण हटाने की इतनी बड़ी कार्रवाई हुई। उन्होंने खुशी भी जाहिर की कि इस कार्रवाई से पुराना भीलवाड़ा के इस सर्राफा बाजार में आवागमन सहज हो सकेगा। दूसरी ओर कई व्यापारियों ने निगम की कार्रवाई का विरोध भी किया, लेकिन पीला पंजा नहीं रुका। निगम की कार्रवाई से क्षेत्र में आवाजाही प्रभावित रही।

    पांसल चौराहा क्षेत्र से हटाया अतिक्रमण
    शहर में पुर रोड के पांसल चौराहा क्षेत्र में नगर निगम के दस्ते ने सड़कें के दोनों तरफ दुकानों के बाहर से होर्डिग्स व बैनर हटाए, दुकानों के टीन शेड भी खोल ले गए। केबिन व फर्नीचरों की भी जब्ती की गई।

    शिकायतों के बाद लिया गया बड़ा एक्शन
    नगर निगम आयुक्त हेमाराम चौधरी ने बताया कि सर्राफा बाजार की अतिक्रमण़ से सिकुड़ती राह को लेकर कई शिकायतें आमजन की तरफ से आ चुकी थीं। अतिक्रमण हटाने को लेकर क्षेत्र के लोगों को पूर्व में कई बार सूचित किया जा चुका। जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू के निर्देश पर शहर में प्रमुख बाजारों को अतिक्रमण मुक्त किए जाने के अभियान के तहत सोमवार को भी सर्राफा बाजार में प्रभावी कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि भीमगंज थाना से लेकर सर्राफा बाजार होते हुए पुराना भीलवाड़ा के शहीद चौक क्षेत्र से होते हुए सांगानेरी गेट चौराहा तक क्षेत्र के अतिक्रमण हटाए जाएंगे।

    प्रशासन का सराहनीय कदम
    सर्राफा एसोसिएशन के पदाधिकारी महेश सोनी ने बताया कि सर्राफा बाजार में सोमवार को हुई प्रशासनिक कार्रवाई स्वागत योग्य है। बाजार की सड़कों को कब्जे से मुक्त करने एवं सड़कों को चौड़ा किए जाने की जरूरत भी थी। शहर में नेहरू रोड को चौड़ा किए जाने के दौरान भी सर्राफा बाजार की सड़कों के चौड़ीकरण को लेकर भी कार्ययोजना बनी थी।