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  • ₹1.5 करोड़ की फिल्म ने कमाए ₹366 करोड़, प्रोड्यूसर को मिल सकते हैं ₹50 करोड़!

    ₹1.5 करोड़ की फिल्म ने कमाए ₹366 करोड़, प्रोड्यूसर को मिल सकते हैं ₹50 करोड़!

    बॉलीवुड में हर साल बड़ी-बड़ी फिल्मों पर करोड़ों रुपये लगाए जाते हैं, लेकिन कभी-कभी छोटा बजट भी ऐसा कमाल कर देता है कि बड़े-बड़े रिकॉर्ड पीछे छूट जाते हैं. 2026 की सरप्राइज हिट बनकर सामने आई ‘हनुमान अंश’ इसका ताजा उदाहरण है. महज 1.5 करोड़ रुपये से थोड़े ज्यादा बजट में बनी ये फिल्म सिनेमाघरों में 7 हफ्ते पूरे कर चुकी है और अभी भी कमाई का सिलसिला जारी है.

    खास बात ये है कि फिल्म की एक प्रोड्यूसर ने इसमें 50 लाख रुपये लगाए थे और अब उनका दावा है कि उन्हें 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का फायदा हो सकता है.

    1.5 करोड़ के बजट में बनी फिल्म ने मचा दिया तहलका
    ‘हनुमान अंश’ इस साल की सबसे बड़ी सरप्राइज हिट्स में से एक बन गई है. फिल्म ‘धुरंधर 2’ और ‘बॉर्डर 2’ के बाद 2026 की तीसरी सबसे बड़ी हिट बताई जा रही है. फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज हुए 7 हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन इसकी रफ्तार अभी थमती नजर नहीं आ रही. फिल्म की एक प्रोड्यूसर अनूप्रिया नागर ने हाल ही में फिल्म के बजट और अपनी कमाई को लेकर खुलासा किया है.

    उनके मुताबिक, फिल्म को बनाने में 1.5 करोड़ रुपये से थोड़े ज्यादा खर्च हुए थे और उन्होंने खुद इसमें 50 लाख रुपये लगाए थे.

    प्रोड्यूसर ने लगाए 50 लाख, अब मिलेंगे 50 करोड़?
    सिद्धार्थ कन्नन से बातचीत में अनूप्रिया नागर ने अपने निवेश के बारे में खुलकर बताया. उन्होंने कहा- मैंने पूरी फिल्म के बजट का एक-तिहाई हिस्सा लगाया था. मैंने फिल्म में 50 लाख रुपये लगाए और बजट 1.5 करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा था. फिल्म की कमाई की बात करें तो ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क के मुताबिक-'हनुमान अंश’ ने पहले 47 दिनों में 366.45 करोड़ रुपये ग्रॉस कमा लिए हैं.

    जब अनुप्रिया से पूछा गया कि फिल्म से उन्हें कितना रिटर्न मिलेगा, तो उन्होंने बताया कि मुनाफे का चार हिस्सों में बंटवारा होगा. उन्होंने कहा, “मुझे मुनाफे का एक-चौथाई हिस्सा मिलेगा. सबसे पहले डिस्ट्रीब्यूटर अपना हिस्सा लेंगे. उसके बाद हमें दूसरे खर्चों का भुगतान करना होगा और टैक्स भी देना होगा. फिर जो भी रकम बचेगी, उसे हम चारों के बीच बांटा जाएगा.

    50 लाख लगाने वाली अनुप्रिया को मिल सकते हैं 50 करोड़
    जब अनुप्रिया से पूछा गया कि वह व्यक्तिगत तौर पर फिल्म से कितनी कमाई कर सकती हैं, तो उन्होंने कहा कि अभी तक के हिसाब से उन्हें कम से कम 50 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि ये आंकड़ा अभी सैद्धांतिक है, क्योंकि फिल्म की OTT, म्यूजिक और सैटेलाइट डील अभी बाकी है.

    अनुप्रिया ने कहा- अभी तक ऐसा लग रहा है कि मैं 50 करोड़ रुपये कमाऊंगी. लेकिन ये सब सैद्धांतिक है. हमें अभी OTT, म्यूजिक और सैटेलाइट डील करनी बाकी है. अगर आगे फिल्म की डिजिटल, सैटेलाइट और म्यूजिक डील भी अच्छी रही, तो कमाई का गणित और बड़ा हो सकता है.

    50 करोड़ मिले तो क्या करेंगी अनूप्रिया?
    अब सवाल ये था कि अगर अनूप्रिया को 50 करोड़ रुपये मिलते हैं, तो वह इस पैसे का क्या करेंगी? इस पर उनका जवाब भी काफी दिलचस्प था. उन्होंने कहा कि उन्हें खुद नहीं पता कि इतनी बड़ी रकम को कैसे संभालना है और वह इसका इस्तेमाल समाज के लिए करना चाहती हैं.

    अनुप्रिया ने कहा- मुझे यह भी नहीं पता कि इतने पैसे को कैसे संभालना है, इसलिए मुझे लगता है कि इसका सबसे अच्छा तरीका समाज को वापस देना है. उन्होंने आगे बताया कि वह अपनी खुद की प्रोडक्शन कंपनी शुरू करना चाहती हैं, ताकि ऐसी और कहानियां दर्शकों तक पहुंचा सकें. उनका फोकस रीजनल फिल्मों और वेब सीरीज बनाने पर होगा, लेकिन वह इन्हें बड़े बजट के बजाय छोटे बजट में बनाना चाहती हैं.

    अनुप्रिया ने कहा- मैं छोटे बजट में फिल्में बनाना चाहती हूं, क्योंकि मैं जानती हूं कि ‘हनुमान अंश’ सिर्फ इसलिए बन पाई क्योंकि इसका बजट छोटा था. अगर मेरा बजट बहुत बड़ा होता, तो मुझे नहीं लगता कि यह फिल्म इस तरह बन पाती. मैं यह सुनिश्चित करना चाहती हूं कि अपनी प्रोडक्शन कंपनी के लिए पैसे का एक निश्चित हिस्सा बचाकर रखूं.

    डायरेक्टर ने 14 साल तक सुनाई थी ये कहानी
    ‘हनुमान अंश’ के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी के लिए भी ये फिल्म किसी सपने के सच होने जैसी है. अनुप्रिया ने बताया कि विशाल पिछले 14 साल से इस कहानी को बनाना चाहते थे. उन्होंने कई OTT प्लेटफॉर्म्स को इसकी कहानी सुनाई थी, लेकिन बात नहीं बन पाई.

    अनुप्रिया ने कहा- उन्होंने 14 लंबे सालों तक इस कहानी को बनाने की कोशिश की. उन्होंने कई OTT प्लेटफॉर्म्स को इसकी कहानी सुनाई थी. रागिनी सोना और नम्रता सिंह (को-प्रोड्यूसर्स) ही वो लोग थीं, जिन्होंने फिल्म पर भरोसा दिखाया और कहा कि चलिए इसे बनाते हैं. अनुप्रिया खुद प्रोजेक्ट से पोस्ट-प्रोडक्शन के दौरान जुड़ी थीं. उस वक्त फिल्म की टीम को कुछ फंड की जरूरत थी और उन्होंने इसमें निवेश किया.

    डायरेक्टर ने नहीं ली कोई फीस, अब चारों में बंटेगा मुनाफा
    अनुप्रिया ने फिल्म के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी की फीस को लेकर भी बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया कि फिल्म का बजट बेहद कम था, इसलिए विशाल ने फिल्म बनाते वक्त कोई फीस लेने से इनकार कर दिया था.

    अनुप्रिया ने कहा- हमारा बजट बहुत कम था, इसलिए उन्होंने कहा कि वह फिल्म बनाते समय कोई फीस नहीं लेंगे. लेकिन कंपनी में हम सभी बराबर के पार्टनर हैं, इसलिए अगर हम अच्छा कर रहे हैं, तो हम चारों भी अच्छा करेंगे. डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने फिल्म के शुरुआती दौर में फीस नहीं ली, लेकिन अब फिल्म के मुनाफे में वह बाकी तीन पार्टनर्स के बराबर हिस्सेदार हैं.

    पहली फिल्म में ही विशाल ने कर दिया कमाल
    अनुप्रिया ने विशाल चतुर्वेदी की जमकर तारीफ भी की. उन्होंने कहा कि सभी लोगों को विशाल पर भरोसा था और उन्हें खुशी है कि एक फर्स्ट-टाइम डायरेक्टर को यह मौका मिला.

    उन्होंने कहा- हम सभी को विशाल पर भरोसा था. वह पहली बार फिल्म डायरेक्ट कर रहे हैं और मुझे खुशी है कि उन्हें यह मौका मिला. उन्होंने कितनी खूबसूरत डायरेक्शन की है और कितनी शानदार स्क्रिप्ट लिखी है.

    अभी OTT डील होना बाकी है
    ‘हनुमान अंश’ की सिनेमाघरों में कमाई भले ही जबरदस्त चल रही हो, लेकिन फिल्म की OTT डील अभी तक नहीं हुई है. इसके अलावा म्यूजिक और सैटेलाइट डील भी बाकी है. ऐसे में फिल्म की आगे की कमाई और प्रोड्यूसर्स को मिलने वाले मुनाफे पर अभी पूरी तस्वीर सामने आना बाकी है.

    लेकिन फिलहाल 1.5 करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा के बजट वाली इस फिल्म का 366 करोड़ रुपये से ज्यादा का ग्रॉस कलेक्शन अपने आप में इसकी सबसे बड़ी कहानी बन चुका है.

  • पंजाब बजट सत्र में बड़ी घोषणा, महिलाओं को ₹1000 मिलेंगे, 8 मार्च को मान सरकार का अंतिम बजट, गवर्नर ने गिनाईं उपलब्धियां

    पंजाब बजट सत्र में बड़ी घोषणा, महिलाओं को ₹1000 मिलेंगे, 8 मार्च को मान सरकार का अंतिम बजट, गवर्नर ने गिनाईं उपलब्धियां

    चंडीगढ़ 

    पंजाब विधानसभा का बजट सेशन आज (6 मार्च) से शुरू हो गया है। पहले दिन गवर्नर गुलाब चंद कटारिया ने अभिभाषण दिया। उन्होंने सत श्री अकाल कहकर संबोधन शुरू किया। उनके अभिभाषण शुरू करते ही कांग्रेस ने विरोध शुरू कर दिया। 

    गवर्नर के अभिभाषण के दाैरान कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल के बजट अभिभाषण के दौरान नारेबाजी की और सदन से वाकआउट कर दिया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है। आये दिन हाल बिगड़ते जा रहे हैं और उस पर चर्चा करवाई जानी चाहिए। सभी कांग्रेस विधायकों ने जमकर नारेबाजी की। हालांकि राज्यपाल ने कहा कि आपको  अपनी बात रखने का उचित समय मिलेगा, लेकिन बावजूद इसके कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी जारी रखी।

    सत्र से पहले सीएम भगवंत मान ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-2027 के बजट अनुमान को पंजाब मंत्रिमंडल ने पारित कर दिया है। यह बजट रविवार को पेश किया जाएगा। इस दिन को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह बजट प्रत्येक पंजाबी की प्रगति और समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देगा और पंजाब को एक बार फिर रंगला पंजाब बनाने में सहायक होगा।

    वुमन्स डे पर भगवंत मान सरकार दे सकती है 1000 रुपये का ‘गिफ्ट’

    हर महिला के खाते में आएंगे 1000 रुपये

    AAP ने 2021 में 'मिशन पंजाब' रैली के दौरान घोषणा की थी कि अगर पार्टी सत्ता में आई तो 18 साल से अधिक उम्र की हर महिला को हर महीने 1000 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में दिए जाएंगे। अरविंद केजरीवाल ने खुद यह वादा दोहराया था। पंजाब में लगभग एक करोड़ महिला मतदाता हैं, और यदि योजना सभी वयस्क महिलाओं पर लागू हुई तो सालाना खर्च 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। सरकार विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है, जैसे कि आय समूह के आधार पर लक्षित लाभार्थी या सभी के लिए वैकल्पिक योजना। वित्त विभाग फिस्कल प्रभाव का आकलन कर रहा है।

    पंजाब सरकार ने लागू की कई योजनाएं
    पंजाब सरकार ने सत्ता संभालने के बाद कई प्रमुख योजनाएं लागू की हैं। 2022 में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 300 यूनिट मुफ्त बिजली शुरू की गई। कृषि ट्यूबवेल के लिए मुफ्त बिजली सब्सिडी जारी है, जिससे सब्सिडी बिल 22,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। आम आदमी क्लीनिक्स की शुरुआत हुई, जहां अब 881 क्लीनिक चल रहे हैं जो ग्रामीण और शहरी इलाकों में मुफ्त परामर्श, दवाएं और 38 जांचें प्रदान करते हैं।

    बजट 8 मार्च को पेश होगा। जिसमें AAP सरकार 2022 में किए महिलाओं को हर महीने 1 हजार रुपए के चुनावी वादे को पूरा करेगी। हालांकि महिलाओं को यह राशि देने का काम 18 मार्च से शुरू होगा। महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये देने की घोषणा के साथ-साथ कुछ महीने का बकाया देने पर भी विचार चल रहा क्योंकि विपक्ष सूबे की महिलाओं को सरकार से 48 महीने का बकाया मांगने के लिए उकसा रहा है। पंथक एजेंडे को मजबूती देने के लिए कुछ विशेष घोषणाएं भी की जा सकती हैं। ये घोषणाएं पंजाब में धार्मिक नगरियों व स्थानों के विकास से संबंधित हो सकती हैं।

    विधानसभा में 7 मार्च को शनिवार के दिन अवकाश रहेगा। 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आप सरकार अपना पांचवां बजट पेश करेगी। माना जा रहा है कि इस बजट में महिलाओं के लिए विशेष घोषणाएं की जा सकती हैं।

    9 मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी, जबकि 10 और 11 मार्च को विधायकों द्वारा बजट पर चर्चा की जाएगी। 12 मार्च को वैधानिक कार्य निपटाए जाएंगे। 13 से 15 मार्च तक प्रगतिशील पंजाब निवेशक सम्मेलन के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित रहेगी। 16 मार्च को सत्र के अंतिम दिन विभिन्न विधेयक विधानसभा में पेश किए जाएंगे।

    अधूरे वादों और कानून-व्यवस्था पर कांग्रेस का प्रदर्शन

    विधानसभा सत्र के दौरान पंजाब प्रदेश कांग्रेस ने भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक और नेता पंजाब भवन से विधानसभा तक रोष मार्च निकालेंगे।

    कांग्रेस का कहना है कि वह सरकार को अधूरे चुनावी वादों, बढ़ते गैंगस्टरवाद और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेरने जा रही है। खासतौर पर महिलाओं को प्रति माह 1000 रुपये देने के वादे को लेकर कांग्रेस सरकार से जवाब मांगेगी। कांग्रेस का दावा है कि 2022 में किए गए इस वादे के आधार पर सरकार को प्रत्येक महिला को चार साल के 48 हजार रुपये देने चाहिए। विपक्ष कथित फर्जी मुठभेड़ों और कानून-व्यवस्था के मुद्दे को भी सत्र के दौरान जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी में है।

    प्रताप बाजवा की टिप्पणी के विरोध में मंत्री ईटीओ ने बजवाया बैंड
    कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने शुक्रवार को विधानसभा परिसर में बैंड बाजा बजवाकर प्रदर्शन किया। कुछ दिन पहले नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने मंत्री पर बैंड बाजे से संबंधित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। मंत्री ने एसएसपी अमृतसर को प्रताप बाजवा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत भी दी है। 

    फरवरी में अजनाला रैली के दौरान बाजवा ने कहा था कि मंत्री हरभजन ईटीओ बैंड बजाते थे लेकिन अब वह पंजाब का बैंड बजा रहा हैं। इस पर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर राजा वड़िंग ने मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस पर अब मंत्री ईटीओ कहा कि यदि वे मेहनत के बूते जमीन से उठकर मंत्री पद तक पहुंचे हैं तो कांग्रेस को क्या दिक्कत है। दरअसल, ये बयान कांग्रेसियों की मानसिकता को दर्शाते हैं।

     

  • MP विधानसभा में बजट सत्र: राज्यपाल ने मोहन सरकार की उपलब्धियां साझा कीं, बजट की अहम जानकारियां जारी

    MP विधानसभा में बजट सत्र: राज्यपाल ने मोहन सरकार की उपलब्धियां साझा कीं, बजट की अहम जानकारियां जारी

    भोपाल 
    मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की सोमवार से शुरुआत हो गई। कार्यवाही के प्रारंभ में संपूर्ण छह छंदों में वंदे मातरम् का गायन हुआ, जिसके बाद राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने अपना अभिभाषण दिया।

    अपने संबोधन में राज्यपाल ने सरकार की विकास उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं से आए बदलावों का उल्लेख किया। साथ ही संकल्प पत्र 2023 में किए गए वादों पर अब तक हुए कार्य और आगामी लक्ष्यों की जानकारी भी दी। सदन में विभिन्न हस्तियों और नेताओं के निधन पर पक्ष-विपक्ष के सदस्यों द्वारा श्रद्धांजलि दी जाएगी।

    इससे पहले विधानसभा पहुंचने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यपाल का स्वागत किया।

    6 मार्च तक चलेगा सत्र

    सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलेगा। पहले दिन राज्यपाल का अभिभाषण और कृतज्ञता प्रस्ताव होगा। सत्र के लिए कुल 3478 प्रश्नों की विधानसभा को सूचनाएं, 236 ध्यानाकर्षण, 10 स्थगन प्रस्ताव, 41 अशासकीय संकल्प पेश होंगे। शून्य काल में विधानसभा में 83 सवाल होंगे।

    जानिए बजट में क्या मिलने वाला है

    मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू हो रहा है और सबकी निगाहें 18 फरवरी पर टिकी हैं, जब वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा राज्य का 2026-27 का बजट पेश करेंगे। यह डॉ. मोहन यादव सरकार का तीसरा बजट होगा।

    सूत्रों के अनुसार, इस बार का बजट सिर्फ एक साल का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि भविष्य की एक विस्तृत वित्तीय योजना होगी, जिसमें पूंजीगत व्यय बढ़ाने, इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया गया है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में लगभग 10% की औसत वार्षिक वृद्धि दर हुई है।

    इसे देखते हुए, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक बजट का आकार 4.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। इस बजट में सरकार का फोकस स्वास्थ्य, पोषण, किसान, युवा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।

    बजट में करीब 1.40 करोड़ बच्चों को मिड डे मील में टेट्रा पैक दूध देने से लेकर, किसानों की आय बढ़ाने के लिए हर जिले में फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने और 'सीएम केयर' योजना के तहत मेडिकल कॉलेजों में कैंसर और हार्ट जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा देने जैसी बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं। पढ़िए, इस बजट में क्या खास रहने वाला है…

    स्वास्थ्य: 'सीएम केयर' से सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं का विस्तार इस बजट में सरकार 'सीएम केयर' योजना की घोषणा कर सकती है, जिसका मकसद प्रदेश में सुपर-स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।

        स्टेट कार्डियक सेंटर और अंग प्रत्यारोपण संस्थान: बजट में एक अत्याधुनिक स्टेट कार्डियक सेंटर और एक अंग प्रत्यारोपण संस्थान बनाने की घोषणा हो सकती है, जहां लिवर, किडनी, हार्ट, फेफड़े और कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध होगी।

        मेडिकल कॉलेजों में इलाज: इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और सागर के मेडिकल कॉलेजों में ऑन्कोलॉजी (कैंसर), ऑन्को-सर्जरी, कार्डियोलॉजी और कार्डियक सर्जरी जैसे सुपर-स्पेशलिटी विभाग शुरू किए जा सकते हैं।

        बजट और लागत: इस महत्वाकांक्षी योजना पर अगले पांच सालों में 2,000 करोड़ रुपए खर्च होने का प्रारंभिक अनुमान है, जो परियोजना के आगे बढ़ने पर और बढ़ सकता है।

        नए मेडिकल कॉलेज: सीहोर (बुधनी), दमोह और छतरपुर में केंद्र सरकार के सहयोग से नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए भी बजट में राशि का प्रावधान किया जा सकता है।

    वेलनेस टूरिज्म: 12 आस्था स्थल बनेंगे, पर्यटन और आरोग्य का संगम मध्य प्रदेश अब वेलनेस टूरिज्म के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। प्रदेश के 12 स्थलों को आस्था, पर्यटन और आरोग्य के संगम के रूप में विकसित किया जा सकता है।

        चयनित स्थल: उज्जैन, ओंकारेश्वर, खजुराहो, पचमढ़ी, सिंगरौली, चित्रकूट, चंदेरी, मंदसौर, आलीराजपुर, ओरछा, आगर मालवा और दतिया।

        सुविधाएं: इन स्थलों पर 10-10 बेड के झोपड़ीनुमा डीलक्स अस्पताल बनाए जाएंगे, जहां पर्यटक पंचकर्म, योग और ध्यान जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों से उपचार करा सकेंगे।

        आयुष वीजा: सबसे खास बात यह है कि मध्य प्रदेश, केरल के बाद देश का दूसरा राज्य बनने जा रहा है जो वेलनेस टूरिज्म को आयुष वीजा से जोड़ेगा। इससे विदेशी पर्यटक सीधे वेलनेस के लिए वीजा लेकर यहां आ सकेंगे।

        उज्जैन में आयुर्वेदिक एम्स: देश के तीन प्रस्तावित आयुर्वेद AIIMS में से एक उज्जैन में स्थापित किए जाने की कोशिश है, यदि ऐसा हुआ तो ये प्रदेश को आयुर्वेदिक चिकित्सा और शोध के क्षेत्र में एक नई पहचान देगा।

    पोषण एवं शिक्षा: बच्चों को मिलेगा टेट्रा पैक दूध पहली से आठवीं तक के 98.37 लाख बच्चे और आंगनवाड़ियों में 3 से 6 साल की उम्र के 48 लाख बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब मध्यान्ह भोजन के साथ इस भी बच्चों को ट्रेटा पैक दूध भी दिए जाने की योजना है। इसके लिए ग्रामीण एवं पंचायत विभाग मप्र दुग्ध महासंघ के साथ एमओयू साइन करेगा।

        टेट्रा पैक दूध की खासियत: यह दूध अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर (UHT) तकनीक से कीटाणु रहित किया जाता है और इसे 6-परतों वाली एयर-टाइट पैकेजिंग में सील किया जाता है। इससे यह बिना फ्रिज के 6-9 महीने तक सुरक्षित और ताजा रहता है, जो इसे दूर-दराज के इलाकों में वितरण के लिए आदर्श बनाता है।

        शिक्षा: शिक्षा के क्षेत्र में 200 नए सांदीपनि विद्यालय खोलने की घोषणा हो सकती है। साथ ही, जबलपुर स्थित धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दूसरे चरण के निर्माण के लिए 197 करोड़ रुपए का प्रावधान किया जा सकता है।

    किसानों के लिए: सिंचाई से लेकर भावांतर तक किसानों को साधने के लिए बजट में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं होने की उम्मीद है।

        सिंचाई: सिंचाई क्षमता को साढ़े सात लाख हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सिंचाई बजट को 17,214 करोड़ से बढ़ाकर 19-20 हजार करोड़ रुपये किया जा सकता है। राजगढ़ की सुल्तानपुर और बरेली की बारना जैसी नई सिंचाई परियोजनाओं के लिए 715 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जा सकता है।
        भावांतर और जैविक खेती: सोयाबीन के साथ अन्य नकदी फसलों पर भी भावांतर योजना की घोषणा हो सकती है। जैविक खेती करने वाले किसानों को शुरुआती नुकसान की भरपाई के लिए प्रोत्साहन राशि और जैविक उत्पादों के लिए विशेष मंडियां विकसित करने की भी घोषणा की जा सकती है।
        WINDS कार्यक्रम: फसल बीमा योजना को और प्रभावी बनाने के लिए WINDS (वेदर इंफॉर्मेशन नेटवर्क एंड डाटा सिस्टम) कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए 434 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जा सकता है, जिससे मौसम के सटीक आंकड़े उपलब्ध होंगे।

    इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़कों और शहरों का कायाकल्प

        मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना: इस योजना को 2026-27 तक जारी रखने के लिए अतिरिक्त 500 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी जा सकती है।
        बड़वाह-धामनोद 4-लेन: इस महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण के लिए भू-अर्जन सहित 2,508 करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है।
        ग्रामीण सड़कें: ग्रामीण सड़कों के नवीनीकरण और उन्नयन के लिए अगले पांच साल तक 10,196 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया जा सकता है। इसमें विशेष जनजातीय क्षेत्रों के लिए भी सड़कें और पुल शामिल हैं।
        अमृत योजना: शहरों में सीवेज और पाइपलाइन नेटवर्क के लिए केंद्र और राज्य मिलकर 5,000 करोड़ रुपए खर्च कर सकते हैं।
        मेट्रोपोलिटन रीजन: भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन रीजन के तौर पर विकसित करने के लिए 300 करोड़ रुपये से अधिक का बजट मिलने की संभावना है।

    कर्मचारी और युवा: वेतन वृद्धि से लेकर 50 हजार नौकरियों तक

        कर्मचारियों के लिए: सरकार ने वेतन, भत्ते और स्थायी व्यय की गणना के लिए एक नया फॉर्मूला तैयार किया है, जिसमें 3% वार्षिक वेतन वृद्धि और महंगाई भत्ते की गणना 74%, 84% और 94% के हिसाब से होगी। 50 साल पुराने पेंशन नियम में संशोधन कर 25 वर्ष से अधिक आयु की अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियों को भी परिवार पेंशन का पात्र बनाया गया है।

        युवाओं के लिए: सरकार अगले एक साल में 50,000 नई नौकरियों का ऐलान कर सकती है। विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAM G) के लिए बजट में 30% से अधिक की वृद्धि की जा रही है।

    पहली बार 'रोलिंग बजट': एक बजट, तीन साल की योजना इस बार मध्य प्रदेश सरकार एक नई पहल करते हुए विधानसभा में पहली बार रोलिंग बजट पेश करेगी। यह एक क्रांतिकारी कदम है, जिसमें सरकार एक साथ तीन वित्तीय वर्षों (2026-27 से 2028-29) की वित्तीय योजना पेश करेगी। राजनीतिक विश्लेषक इसे अगले विधानसभा चुनाव की अभी से तैयारी के तौर पर देख रहे हैं।

    हालांकि, सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से योजनाओं पर होने वाले खर्च पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकेगा और उनकी लगातार समीक्षा संभव होगी, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी होगा।

    एक छत के नीचे आएंगी समान प्रकृति की योजनाएं बजट में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब हर योजना के लिए यह स्पष्ट करना होगा कि उस पर खर्च क्यों किया जा रहा है, उसका लाभ किसे मिलेगा और उसका सामाजिक व आर्थिक प्रभाव क्या होगा। इस प्रक्रिया में, कई गैर-प्रभावी योजनाओं को समाप्त किया जा रहा है और समान प्रकृति की योजनाओं को एकीकृत किया जा रहा है।

    किसानों, महिलाओं, युवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी विभिन्न विभागों की योजनाओं को एक ही छतरी के नीचे लाकर बजट का प्रावधान किया जाएगा, ताकि योजनाओं का लाभ लाभार्थियों तक बिना किसी बाधा के और अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

  • बजट पर आर्थिक विशषज्ञों की राय

    बजट पर आर्थिक विशषज्ञों की राय

    बजट पर आर्थिक विशषज्ञों की राय 

    लखनऊ 

    बजट में एमएसएमई क्षेत्र के लिए 3,822 करोड़ रुपये का प्रावधान है। यह बीते साल से 19 प्रतिशत अधिक है। इससे उत्तर प्रदेश के नए उद्यमियों को काफी संबल मिलेगा। बजट में ऋण गारंटी को लेकर बैंकों के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इससे बड़ी जमानत के बिना भी छोटे उद्यमियों को ऋण लेने में आसानी होगी।

    शरद कोहली, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ 
    उत्तर प्रदेश के बजट में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास योजनाओं के लिए इस बार पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक धनराशि है। अब ₹27,103 करोड़ तय किए गए हैं। औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और डेटा सेंटर के जरिये सरकार लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों का सृजन कर रही है।

    प्रो मेनका सिंह, अर्थशास्त्री, दिल्ली यूनिवर्सिटी  
    देश के कुल मोबाइल फोन उत्पादन का 65 प्रतिशत उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है। भारत की 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेन्ट्स इकाइयां प्रदेश में स्थित हैं। प्रदेश का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 44,744 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस बार के बजट में इस क्षेत्र को बढ़ाना देने के ज्यादा धन दिया गया है।

    प्रो दीप्ति तनेजा, अर्थशास्त्री, दिल्ली यूनिवर्सिटी

  • बांग्लादेश को मिले बजट में कमी, चाबहार को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, ईरान को नहीं मिलेगा एक भी रुपया

    बांग्लादेश को मिले बजट में कमी, चाबहार को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, ईरान को नहीं मिलेगा एक भी रुपया

    नई दिल्ली

    बांग्लादेश के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच इस बार के केंद्रीय बजट में उसके विकास के लिए दी जाने वालीराशि चालू वित्त वर्ष में पिछले वर्ष के मुकाबले आधी कर दी गई है। बजट के मुताबिक बांग्लादेश के लिए इस बार केवल 60 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। वहीं भूटान को पिछले साल के मुकाबले ज्यादा राशि दी जाएगी। उसे कास सहायता के रूप में सबसे अधिक 2,288 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि नेपाल के लिए 800 करोड़ रुपये और मालदीव और मॉरीशस के लिए 550-550 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

    चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं

    इस बार के आम बजट में ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई राशि नहीं आवंटित की गई है। बता दें कि भारत चाबहार परियोजना में हिस्सेदार रहा है औऱ वह 100 करोड़ की मदद हर साल करता आ रहा था। अफगानिस्तान, मध्य एशिया और आगे के क्षेत्र में व्यापार के लिए यह बेहद जरूरी पड़ाव माना जाता है। चाबहार ओमान की खाड़ी के मुहाने पर स्थित बंदरगाह है जो कि वैश्विक समुद्री मार्गों तक सीधी पहुंच बनाता है। यह पाकिस्तान की सीमा के पूर्व में ग्वादर पोर्ट के पास है। चीन बी बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव के जरिए ग्वादर को विकसित कर रहा है। ऐसे में यह चाबहार परियोजना भारत के लिए संतुलन बनाने के लिए अहम है। जानकारों का कहना है कि ईरान और अमेरिका में तनाव की वजह से भारत इस बार चाबहार को कुछ नहीं दिया है।

    विदेश मंत्रालय को चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान 20,516 करोड़ रुपये और संशोधित अनुमान 21,742 करोड़ रुपये के मुकाबले 2026-27 के लिए कुल 22,118 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है।

    आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बांग्लादेश के लिए 60 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है, जबकि 2025-26 के बजट में बांग्लादेश के लिये 120 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। हालांकि, बाद में संशोधित अनुमान में यह राशि 34.48 करोड़ रुपये कर दी गई थी।
    अप्रैल में खत्म हो रही है अमेरिका से मिली छूट

    भारत पिछले कुछ वर्षों से ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में जारी वृहद संपर्क परियोजना पर प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत एक प्रमुख साझेदार है।

    पिछले वर्ष सितंबर में अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन चाबहार बंदरगाह परियोजना पर लागू प्रतिबंधों से भारत को छह महीने की छूट दी थी। यह छूट 26 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी।

    भारत और ईरान मिलकर चाबहार बंदरगाह का विकास कर रहे हैं, ताकि संपर्क और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिल सके। दोनों देश चाबहार बंदरगाह को अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) का अभिन्न अंग बनाने के लिए भी पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के आवंटन के तहत 2025-26 के लिए कुल विदेश साझेदारी विकास मद में 6,997 करोड़ रुपये है, जो विदेश मंत्रालय को किए गए आवंटन का 31 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। दिलचस्प बात यह है कि विदेश साझेदारी विकास मद के तहत कुल आवंटन में से 4,548 करोड़ रुपये निकटवर्ती पड़ोसी देशों के लिए निर्धारित किए गए हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, इस राशि का उपयोग पनबिजली संयंत्रों, बिजली पारेषण लाइनों, आवास, सड़कों, पुल जैसी बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं से लेकर छोटे पैमाने पर जमीनी स्तर की सामुदायिक विकास परियोजनाओं तक विभिन्न प्रकार की पहलों के कार्यान्वयन के लिए किया जाएगा। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में लातिन अमेरिकी देशों के लिए कुल सहायता राशि 120 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।

  • जनता के काम का बजट? हेल्थ और एजुकेशन में निवेश को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी

    जनता के काम का बजट? हेल्थ और एजुकेशन में निवेश को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी

    नई दिल्ली
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देश का बजट पेश करते हुए कई बड़ी घोषणाएं की। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने नौवें बजट में देश के परिवहन और रक्षा क्षेत्र पर सबसे अधिक पैसा लगाया है। दोनों ही क्षेत्रों पर करीब 6-6 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए भी बड़ी राशि रखी गई है।
     
    वित्त मंत्री ने ट्रांसपोर्ट पर सबसे अधिक 5,98,520 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव किया है। वहीं, रक्षा क्षेत्र पर 5,94,585 रुपये खर्च किए जाएंगे। होम अफेयर्स पर 2,55,234 करोड़ खर्च होने का प्रस्ताव है। कृषि कार्यों और इससे जुड़ी गतिविधियों पर 1,62,671 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। शिक्षा पर 1,39,289 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं ऊर्जा पर 1,09,029 करोड़ रुपये और हेल्थ पर 1,04,599 करोड़ रुपये का निवेश होगा।

    बजट 2026 में किस सेक्टर को कितना पैसा
    शहरी विकास पर 85,522 करोड़, आईटी और टेलिकॉम सेक्टर पर 74560 करोड़, कॉमर्स एंड इंडस्ट्री पर 70296 करोड़, सोशल वेलफेयर पर 62362 करोड़, साइंटिफिक डिपार्टमेंट्स पर 55,756 करोड़, टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन पर 45500 करोड़, एक्सटर्नल अफेयर्स पर 22,119 करोड़, फाइनेंस पर 20,649 करोड़ और नॉर्थ ईस्ट डिवलेपमेंट के लिए 6812 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है।

    रुपया कहां से आएगा और कहां जाएगा
    बजट डॉक्युमेंट्स में सरकार ने यह बताया है कि पैसा कहां से कितना आएगा और कहां कितना खर्च होगा। इसके मुताबिक बजट का 24 पर्संट हिस्सा सरकार उधार लेगी। 21 फीसदी हिस्सा इनकम टैक्स से और 18 पर्सेंट कॉर्पोरेशन टैक्स से आता दिख रहा है। 4 पर्सेंट कस्टम से और 6 फीसदी यूनियन एक्साइज ड्यूटीज से आएगा। नॉन-डेब्ट कैपिटल से 2 फीसदी की प्राप्ति होगी। नॉन टैक्स रेवेन्यू से 10 फीसदी और जीएसटी और अन्य टैक्सों से 15 फीसदी हिस्सा मिलने की उम्मीद है।

    रुपया कहां कितना जाएगा, इसके ब्योरे में बताया गया है कि सर्वाधिक 22 फीसदी हिस्सा राज्यों को टैक्स का हिस्सा देने में जाएगा। ब्याज देनदारी पर 20 फीसदी खर्च होगा। केंद्रीय योजनाओं पर 17 फीसदी हिस्सा खर्च होगा। बड़ी सब्सिडी पर 6 फीसदी, डिफेंस पर 11 फीसदी, केंद्र प्रयोजित योजनाओं पर 8 फीसदी पैसा खर्च होगा। सिविल पेंशन पर 2 फीसदी और अन्य मदों में 7 फीसदी पैसा लगेगा।