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  • रक्षाबंधन पर लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा ‘ब्लड मून’

    रक्षाबंधन पर लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा ‘ब्लड मून’

     भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन का पावन पर्व इस साल एक बेहद खास और दुर्लभ खगोलीय संयोग लेकर आ रहा है. इस साल श्रावण पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन ही साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. इस खगोलीय घटना के दौरान कई जगहों पर ब्लड मून (Blood Moon) का अद्भुत नजारा भी देखने को मिलेगा, जिसे लेकर लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं और सवाल उठ रहे हैं.  आइए जानते हैं इस ग्रहण से जुड़ी हर एक जरूरी और महत्वपूर्ण बात.

    कब और कितने बजे लगेगा चंद्र ग्रहण?
    खगोल विज्ञान और पंचांग के अनुसार, साल का यह दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा. भारतीय समयानुसार यह ग्रहण सुबह 06:53 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:31 बजे तक यानी करीब 5 घंटे 39 मिनट तक रहेगा.

    इस दौरान एक दिलचस्प खगोलीय स्थिति यह होगी कि पृथ्वी की गहरी छाया (अम्ब्रा) चंद्रमा के लगभग 93 से 96 प्रतिशत हिस्से को ढक लेगी.  इस वजह से चंद्रमा पूरी तरह काला दिखने के बजाए गहरे तांबे जैसे लाल (कॉपर रेड) रंग का नजर आएगा, जिसे ब्लड मून कहा जाता है.

    क्या भारत में नजर आएगा चंद्र ग्रहण?
    सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में यह ग्रहण दिखाई देगा? तो आपको बता दें कि यह चंद्र ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा. यह मुख्य रूप से यूरोप, पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, अटलांटिक और प्रशांत महासागर के क्षेत्रों में दिखाई देगा.  चूंकि जिस समय यह ग्रहण लग रहा होगा, उस वक्त भारत में दिन का उजाला होगा, इसलिए देश में इसकी दृश्यता शून्य होगी.

    क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, जिसमें सूतक के दौरान तमाम मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है और मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं.

    लेकिन चूंकि 28 अगस्त का यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा.  सूतक न होने के कारण देश में किसी भी प्रकार के धार्मिक नियमों या पाबंदियों का पालन करने की आवश्यकता नहीं है. मंदिर खुले रहेंगे.  सामान्य पूजा-पाठ जारी रह सकेगा.

    क्या रक्षाबंधन के त्योहार या राखी बांधने पर पड़ेगा कोई असर?
    चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्यामान नहीं है और इसका कोई सूतक काल नहीं है, इसलिए रक्षाबंधन के पर्व पर इसका कोई भी नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा.बहनें बिना किसी संकोच या चिंता के पूरे दिन अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं.पंचांग के अनुसार इस दिन उदया तिथि होने के कारण त्योहार मनाने के लिए पूरा दिन श्रेष्ठ रहेगा.बस परंपरा के अनुसार सामान्य रूप से भद्राकाल आदि का ध्यान रखा जा सकता है.

  • चंद्र ग्रहण 2026 LIVE: 6:48 बजे मोक्ष काल, भारत में कुछ मिनटों के लिए दिखेगा लालिमा लिए ‘ब्लड मून’

    चंद्र ग्रहण 2026 LIVE: 6:48 बजे मोक्ष काल, भारत में कुछ मिनटों के लिए दिखेगा लालिमा लिए ‘ब्लड मून’

    नई दिल्ली
    3 मार्च 2026, मंगलवार (फाल्गुन पूर्णिमा) को साल का पहला चंद्र ग्रहण शुरू हो चुका है। दोपहर 3:20 बजे ग्रहण का स्पर्श काल प्रारंभ हुआ और इसी के साथ यह खगोलीय घटना आधिकारिक रूप से शुरू मानी गई। यह खंडग्रास यानी आंशिक चंद्र ग्रहण है, जिसमें पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर अपनी छाया चंद्रमा के एक हिस्से पर डालती है। इसी कारण चंद्रमा का कुछ भाग ढका हुआ दिखाई देता है। खगोलीय दृष्टि से यह पूरी तरह प्राकृतिक और वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के कारण समय-समय पर होती रहती है। लेकिन धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं में चंद्र ग्रहण को विशेष महत्व दिया जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने के कारण इस ग्रहण को और भी अहम माना जा रहा है। यह भारत में ‘ग्रस्तोदय’ रूप में दिखाई देगा- यानी चंद्रोदय के समय ग्रहण का अंतिम चरण नजर आएगा।

    कब से कब तक रहेगा ग्रहण?
    भारतीय समयानुसार ग्रहण की प्रमुख टाइमिंग इस प्रकार है:
    ग्रहण प्रारंभ (स्पर्श): दोपहर 3:20 बजे
    ग्रहण मध्य: शाम 5:05 बजे
    ग्रहण समाप्ति (मोक्ष): शाम 6:48 बजे
    उपच्छाया समाप्ति: रात 7:55 बजे

    हालांकि यह पूरा समय भारत में दिखाई नहीं देगा। वजह यह है कि ग्रहण शुरू होने के समय देश में दिन रहेगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे होगा। भारत में यह ग्रहण ‘ग्रस्तोदय’ रूप में दिखाई देगा। यानी जब यहां चंद्रमा उदय होगा, तब तक ग्रहण अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका होगा।

    क्यों कहा जा रहा है ‘ब्लड मून’?- ग्रहण के दौरान जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा को ढकती है, तो सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते हुए चंद्रमा तक पहुंचती हैं। इस प्रक्रिया में लाल रंग की किरणें ज्यादा परावर्तित होती हैं। इसी वजह से चंद्रमा तांबे या लालिमा लिए दिखाई देता है। इसी कारण इसे आम भाषा में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।

    चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना सुरक्षित- वैज्ञानिकों के अनुसार यह पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित घटना है। चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना सुरक्षित है और इसके लिए किसी विशेष चश्मे की आवश्यकता नहीं होती।

    भारत में कितनी देर दिखेगा ग्रहण?- भारत में चंद्रमा शाम को उदय होगा, इसलिए लोग ग्रहण का केवल अंतिम हिस्सा ही देख पाएंगे। अधिकांश शहरों में यह दृश्य लगभग 20 से 25 मिनट तक ही दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण ‘ग्रस्तोदय’ रूप में दिखाई देगा, इसलिए चंद्रोदय के बाद यानी लगभग 6:20–6:30 बजे के बीच (शहर अनुसार अलग-अलग) से लेकर 6:48 बजे तक ही इसका अंतिम हिस्सा नजर आएगा।

    उत्तर-पूर्वी राज्यों- जैसे अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और मणिपुर – में चंद्रमा सबसे पहले उदय होता है, इसलिए वहां दृश्यता का समय अपेक्षाकृत अधिक रहेगा। इसके बाद पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में ग्रहण नजर आएगा।

    दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत में ग्रहण लगभग 6:22 बजे के बाद दिखाई देगा और 6:48 बजे मोक्ष तक ही सीमित रहेगा। पश्चिमी भारत- मुंबई, गुजरात और राजस्थान- में यह अवधि और भी कम हो सकती है।

    सूतक काल का महत्व- ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस बार सूतक सुबह लगभग 6:20 बजे से प्रभावी है और ग्रहण समाप्ति यानी 6:48 बजे तक रहेगा। सूतक के दौरान परंपरागत रूप से मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं, शुभ कार्यों को टाला जाता है और कई लोग भोजन बनाने या ग्रहण करने से परहेज करते हैं। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण का दैनिक जीवन पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं माना जाता।

    2026 में कितने चंद्र ग्रहण?- साल 2026 में कुल दो चंद्र ग्रहण होंगे। हालांकि भारत में केवल 3 मार्च का ग्रहण ही दिखाई देगा। वर्ष का दूसरा ग्रहण भारत से दृश्य नहीं होगा।