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  • भीड़, जाम और माओवाद पर ड्रोन की नजर, बिहार पुलिस को मिलेंगे 50 नए हाईटेक ड्रोन

    भीड़, जाम और माओवाद पर ड्रोन की नजर, बिहार पुलिस को मिलेंगे 50 नए हाईटेक ड्रोन

     पटना
    बिहार पुलिस विधि-व्यवस्था एवं अपराधियों के साथ प्रमुख शहरों में यातायात की आसमान से निगरानी करेगी।

    इसके लिए उच्च क्षमता वाले 50 ड्रोन खरीदे जाएंगे। गृह विभाग की आरक्षी शाखा ने इसकी स्वीकृति दे दी है। इसके लिए 24 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च होंगे।

    विभागीय जानकारी के अनुसार, विधि-व्यवस्था और ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए 45 लाख की कीमत वाले 40 ड्रोन खरीदे जाएंगे। इनका इस्तेमाल बिहार पुलिस की ड्रोन यूनिट करेगी।

    विरोध-प्रदर्शन, मेले पर भी रहेगी नजर
    राज्य में निकलने वाले विरोध-प्रदर्शन, भीड़ के उपद्रव, मेला-महोत्सव, त्योहार, बड़े आयोजनों आदि में इन ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा।

    इसके अलावा पटना समेत प्रमुख शहरों के चौक-चौराहों, पुल आदि पर लगने वाले जाम के कारण और निदान में भी इन ड्रोन का इस्तेमाल पुलिस करेगी।

    इसके अलावा माओवाद और एंटी क्राइम ऑपरेशन आदि के लिए भी 10 ड्रोन खरीदे जाएंगे। इसके लिए इस्तेमाल होने वाला ड्रोन और भी अत्याधुनिक होगा जिसकी कीमत 65 लाख होगी।

    साढ़े छह करोड़ में आएंगे 10 ड्रोन
    करीब साढ़े छह करोड़ से ऐसे दस ड्रोन खरीदकर पुलिस को दिए जाएंगे। जंगली, दुर्गम एवं पहाड़ी इलाकों में होने वाले पुलिस आपरेशन में इन ड्रोन का सहयोग लिया जाएगा।

    विभागीय जानकारी के अनुसार, पुलिस आधुनिकीकरण के तहत 50 ड्रोन की खरीद की जा रही है। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के स्तर से 60 प्रतिशत जबकि राज्य सरकार के स्तर से 40 प्रतिशत की राशि दी जाएगी।

    आने वाले पर्व-त्योहार को देखते हुए पुलिस की ड्रोन यूनिट को मजबूत किया जा रहा है। नए ड्रोन के आने से भीड़ नियंत्रण एवं निगरानी में पुलिस को काफी सुविधा होगी।

  • 40 पुलिस जिलों की कमान 36 अफसरों को, 27 सितंबर तक देनी होगी रिपोर्ट

    40 पुलिस जिलों की कमान 36 अफसरों को, 27 सितंबर तक देनी होगी रिपोर्ट

    पटना
    बिहार पुलिस मुख्यालय ने कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एडीजी से लेकर डीआईजी स्तर के 36 पुलिस पदाधिकारियों को 40 पुलिस जिलों का प्रभारी व नोडल पदाधिकारी नामित किया है। नयी व्यवस्था में एडीजी (विधि व्यवस्था) केएस अनुपम को पटना, जबकि एडीजी (बी-सैप) नैय्यर हसनैन खान को मुजफ्फरपुर का नोडल पदाधिकारी बनाया गया है।

    इनके अलावा एडीजी आर मलार विझि को नालंदा, एडीजी ईओयू डॉ. अमित कुमार जैन को वैशाली, एडीजी एसवीयू सुधांशु कुमार को दरभंगा की कमान मिली है। चार अफसरों को दो-दो जिलों की जिम्मेदारी दी गयी है। मुख्यालय ने सभी पुलिस पदाधिकारियों को जिला का आवंटन करते हुए 27 सितंबर तक अपने आवंटित जिले का निरीक्षण पूरा करते हुए डीजीपी प्रीता वर्मा को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।

    किस जिले के प्रभारी कौन?
    मुख्यालय के मुताबिक, एडीजी रेल डॉ. कमल किशोर सिंह को समस्तीपुर, एडीजी सीआईडी पारसनाथ को मुंगेर, एडीजी आधुनिकीकरण अजिताभ कुमार को गोपालगंज, एडीजी तकनीकी सेवाएं अमित लोढ़ा को लखीसराय व शेखपुरा, एडीजी एटीएस अमृत राज को भोजपुर, आईजी (एससीआरबी) राजेश कुमार को पूर्णिया, आईजी (प्रोविजन) पी कन्नन को सारण, आईजी प्रशिक्षण अनुसूया रणसिंह साहू को औरंगाबाद, आईजी रेल पंकज कुमार राज को भागलपुर और नवगछिया, आईजी मद्य निषेध प्रेमलथा को जहानाबाद, आईजी सीआईडी और सीसीएसयू रंजीत कुमार मिश्रा को मधुबनी, आईजी मुख्यालय मनोज कुमार को गया जी, आईजी विशेष शाखा संजय कुमार को बेतिया और बगहा, डीआईजी सीआईडी जयंत कांत को कटिहार, डीआईजी ईओयू मानवजीत सिंह ढिल्लन को रोहतास, डीआईजी विशेष शाखा हरप्रीत कौर को कैमूर, डीआईजी बी-सैप मीनू कुमारी को बेगूसराय, डीआईजी एससीआरबी सुधीर पोरिका को खगड़िया, डीआईजी आधुनिकीकरण तौहिद परवेज को किशनगंज, डीआईजी (विधि एवं मानवाधिकार) सुशील कुमार को शिवहर, डीआईजी मद्य निषेध अनिल कुमार को सहरसा, डीआईजी कार्मिक राजेंद्र कुमार भील को मधेपुरा, डीआईजी (विधि व्यवस्था) आनंद कुमार को मोतिहारी का प्रभारी पुलिस बनाया गया है। डीआईजी साइबर अवकाश कुमार को सीतामढ़ी, डीआईजी सीआईडी दीपक रंजन को बक्सर, डीआईजी इनामुल हक मेंगनू को जमुई, डीआईजी एसयूवी आमिर जावेद को सीवान, डीआईजी प्रशिक्षण राजीव रंजन एक को बांका, डीआईजी ईआरएसएस अजय कुमार पांडेय को अरवल एवं नवादा, डीआईजी एसटीएफ नीरज कुमार सिंह को अररिया और डीआईजी एटीएस सुशांत कुमार सरोज को सुपौल जिले को प्रभारी पुलिस पदाधिकारी बनाया गया है।

    डीजीपी को देंगे रिपोर्ट
    मुख्यालय ने जिन अफसरों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है, उनको अपने-अपने आवंटित जिले में जाकर कानून व्यवस्था की समीक्षा करनी होगी। वे निश्चित अंतराल पर संबंधित जिले में बैठक कर उस जिले के कानून व्यवस्था की स्थिति, केसों के अनुसंधान, उसके निष्पादन की स्थिति, ट्रायल, पुलिस स्टेशन की कार्यप्रणाली, गश्ती, महिला संबंधित अपराध व पॉक्सो सहित विभिन्न अधिनियमों के क्रियान्वयन और उसकी स्थिति आदि की समीक्षा कर डीजीपी को रिपोर्ट करेंगे।

    25 से 28 तक संबंधित जिलों में रात्रि विश्राम करेंगे
    इसके साथ ही, बिहार पुलिस मुख्यालय के विधि व्यवस्था प्रभाग ने सभी क्षेत्रीय आईजी और डीआईजी से अपने-अपने क्षेत्र अंतर्गत जिलों में विधि व्यवस्था से संबंधित मामलों की समीक्षा कर रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए क्षेत्रीय आईजी व डीआईजी 25 से 28 तक संबंधित जिलों में रात्रि विश्राम करते हुए जिले के लंबित कांडों, वारंट, इश्तिहार, कुर्की व गश्ती आदि की समीक्षा कर 29 सितंबर तक पुलिस मुख्यालय को अपनी रिपोर्ट देंगे।

  • बिहार पुलिस का बड़ा एक्शन प्लान, 3 महीने में 23,958 वांछित गिरफ्तार; माफियाओं की संपत्ति पर कार्रवाई

    बिहार पुलिस का बड़ा एक्शन प्लान, 3 महीने में 23,958 वांछित गिरफ्तार; माफियाओं की संपत्ति पर कार्रवाई

    पटना
    बिहार में अपराधियों पर कड़ा प्रहार करने की तैयारी कर ली गई। दरअसल अपराध से संपत्ति अर्जित करने वाले बिहार के 4000 से अधिक अपराधी और माफियाओं की संपत्तियां अब जब्त होंगी। एसपी की अनुशंसा के आधार पर बिहार पुलिस मुख्यालय ने इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार किया है। इनमें से 800 मामले न्यायालय के स्तर पर प्रक्रियाधीन हैं। सोमवार को बिहार पुलिस के एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार और एडीजी (विधि-व्यवस्था) केएस अनुपम ने इसकी जानकारी दी। पुलिस मुख्यालय में एडीजी (विधि व्यवस्था) ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 107 के तहत संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव है।

    पुलिस पर हमले के 1166 आरोपित गिरफ्तार
    एडीजी (विधि व्यवस्था) ने बताया कि विगत तीन माह (जून से अगस्त माह) में 23,958 वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गयी है। इनमें पुलिस पर हमला के मामलों में 1166, सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में 42, भीड़ द्वारा हिंसा के मामलों में 11 एवं हर्ष फायरिंग के मामलों में 10 सहित कुल 1229 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गयी है। इसके अलावा, 1270 हत्या, 784 एससी-एसटी एक्ट, 214 डकैती और 473 लूट कांडों के अभियुक्त भी गिरफ्तार हुए।

    जांच के दौरान बिना निबंधन के मिले 400 महिला छात्रावास
    केएस अनुपम ने बताया कि राज्य भर में महिला हॉस्टल और कोचिंग संस्थान की जांच को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान सिर्फ पटना में 400 महिला हॉस्टल बिना निबंधन के मिले हैं। पुलिस दीदी की मदद से निजी महिला हॉस्टलों पर नजर रखी जा रही है। इनमें सुरक्षा से संबंधित ऑडिट भी कराये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बक्सर में स्कूली छात्राओं के साथ गलत हरकत करने वाले आरोपित शिक्षकों के मामले में सभी आरोपितों की गिरफ्तारी कर ली गई है। जल्द ही इनके खिलाफ चार्जशीट दायर की जाएगी। पुलिस मुख्यालय इस मामले पर निरंतर नजर रखे हुए है।

    कांडों के निष्पादन को विशेष अभियान
    एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार ने बताया कि लंबित कांडों के पर्यवेक्षण और निष्पादन को लेकर भी अभियान चलाया गया है। अभियान के दौरान दस दिन में 33,390 कांडों का निष्पादन किया गया। इनमें 10,875 कांड एसपी, 9159 कांड डीएसपी और 13356 कांड अंचल पुलिस निरीक्षक स्तर पर निष्पादित किए।

  • ईंट-भट्ठे से खनन तक खंगाले जा रहे उग्रवाद के आर्थिक स्रोत, 63 पूर्व माओवादियों का होगा पुनर्वास

    ईंट-भट्ठे से खनन तक खंगाले जा रहे उग्रवाद के आर्थिक स्रोत, 63 पूर्व माओवादियों का होगा पुनर्वास

    पटना
     बिहार को भले ही माओवादमुक्त घोषित कर दिया गया हो, लेकिन माओवादी दोबारा संगठित न हो सकें, इसके लिए पुलिस मुख्यालय सतर्क है। जेल से रिहा होने वाले पूर्व माओवादियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    पुलिस की टीम सिर्फ पूर्व माओवादियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों से भी संपर्क कर रही है।

    इस दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति, बच्चों की शिक्षा और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों की जानकारी ली जा रही है।

    पूर्व माओवादियों की वर्तमान सोच और मुख्यधारा में उनके समायोजन को लेकर भी फीडबैक जुटाया जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति दोबारा उग्रवादी गतिविधियों से न जुड़े।

    परिवार की आर्थिक स्थिति और बच्चों की पढ़ाई पर भी नजर
    पुलिस और प्रशासन की ओर से पूर्व माओवादियों के परिवारों से संवाद कर उनकी जरूरतों और समस्याओं को समझने का प्रयास किया जा रहा है।

    परिवार की आर्थिक स्थिति, बच्चों की शिक्षा और रोजगार से जुड़े पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि पूर्व माओवादी मुख्यधारा के जीवन में किस हद तक समायोजित हो चुके हैं।

    पुलिस का मानना है कि संवाद और पुनर्वास के जरिए दोबारा उग्रवादी गतिविधियों की आशंका को कम किया जा सकता है। इस कवायद के तहत पुलिस की स्थानीय इकाइयों और खुफिया तंत्र को भी सतर्क रखा गया है।
    पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में विशेष निगरानी जारी है।

    झारखंड से सटे इलाकों में सक्रिय संगठनों पर भी नजर
    माओवादियों से अलग होकर बने संगठनों की गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। बिहार से सटे झारखंड के जिलों में सक्रिय पीएलएफआइ और जेजेएमपी जैसे संगठनों की गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    सीमावर्ती क्षेत्रों में इनके संभावित प्रभाव और आवाजाही को लेकर खुफिया तंत्र सतर्क है। पुलिस मुख्यालय के स्तर से इन संगठनों से जुड़े इनपुट का लगातार विश्लेषण किया जा रहा है।

    किसी भी नए नेटवर्क या संगठनात्मक गतिविधि की जानकारी मिलते ही संबंधित जिलों को अलर्ट किया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि बिहार में उग्रवादी संगठनों को फिर से पैर पसारने का मौका न मिले।

    ईंट-भट्ठा से खनन तक, आर्थिक स्रोतों की हो रही पड़ताल
    बिहार एसटीएफ के अनुसार, उग्रवादी संगठनों के संभावित आर्थिक स्रोतों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसमें ईंट-भट्ठा, अफीम की खेती, ठेकेदारी और खनन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

    खुफिया तंत्र यह पता लगाने में जुटा है कि इन क्षेत्रों से किसी प्रकार की लेवी या अवैध वसूली तो नहीं की जा रही है। इसके लिए विभिन्न स्तरों से सूचनाएं एकत्र कर खुफिया रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

    संदिग्ध आर्थिक गतिविधियों और पुराने नेटवर्क से जुड़े लोगों पर भी नजर रखी जा रही है। पुलिस का फोकस उग्रवादी संगठनों की आर्थिक रीढ़ को मजबूत होने से रोकने पर है।

    63 पूर्व माओवादियों को मिलेगा पुनर्वास नीति का लाभ
    पुलिस-प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले 63 लोगों को राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ देने की मंजूरी मिल चुकी है।

    पुनर्वास के जरिए इन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे गांवों में विकास कार्यों पर भी जोर दिया जा रहा है।

    इन इलाकों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि विकास और पुनर्वास के जरिए उग्रवाद की जमीन को कमजोर किया जा सकता है। इसी रणनीति के तहत सुरक्षा के साथ सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर भी काम किया जा रहा है।

    22 से शून्य जिले, अब केंद्रीय बलों के कैंप हटाने की तैयारी
    राज्य में वर्ष 2013 में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या 22 थी, जो अब घटकर शून्य रह गई है। हालांकि, दोबारा माओवादी गतिविधियां शुरू न हों, इसके लिए केंद्र सरकार ने चार जिलों को लेगसी और थ्रस्ट जिलों के रूप में चिह्नित किया है।

    इनमें औरंगाबाद, गयाजी, जमुई और लखीसराय शामिल हैं।
    इन जिलों में केंद्रीय बलों की तैनाती के साथ सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान में मौजूद 24 केंद्रीय बलों के कैंप को योजनाबद्ध तरीके से हटाने के लिए डी-इंडक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। साथ ही माओवादियों द्वारा पूर्व में लूटे गए हथियारों और अन्य सामग्री की बरामदगी के प्रयास भी जारी हैं।

  • बिहार में पुरानी जोनल सिस्टम की वापसी, पुलिसिंग सुधार के लिए सरकार का नया कदम

    बिहार में पुरानी जोनल सिस्टम की वापसी, पुलिसिंग सुधार के लिए सरकार का नया कदम

     पटना
    बिहार में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. राज्य में 7 साल पहले खत्म की गई जोनल व्यवस्था को फिर से लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है. इसके लिए पुलिस मुख्यालय की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे मंजूरी मिलने की बात सामने आ रही है.

    12 पुलिस रेंज को फिर बांटा जाएगा जोन में
    फिलहाल बिहार में 12 पुलिस रेंज काम कर रही हैं. नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन रेंजों को फिर से जोन में विभाजित किया जाएगा. इससे फील्ड पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने और प्रशासनिक निगरानी मजबूत करने में मदद मिलेगी.

    जल्द लागू हो सकती है नई व्यवस्था
    सूत्रों के मुताबिक, गृह विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद नई व्यवस्था को जल्द लागू किया जा सकता है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, पहले की तरह चार जोन बनाए जा सकते हैं. हालांकि, वर्तमान जरूरतों को देखते हुए कुछ बदलाव भी किए जा सकते हैं.

    2019 में खत्म हुई थी जोनल व्यवस्था
    बिहार पुलिस में जुलाई 2019 में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया था. उस समय जोनल सिस्टम को समाप्त कर केवल रेंज व्यवस्था लागू की गई थी. साथ ही बेगूसराय को नया रेंज बनाकर कुल रेंज की संख्या 11 से बढ़ाकर 12 कर दी गई थी.

    अभी किन जिलों को संभालती हैं रेंज?
    वर्तमान में पटना रेंज में पटना और नालंदा शामिल हैं. मगध रेंज में गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल आते हैं.

    भागलपुर रेंज में भागलपुर, बांका और नवगछिया पुलिस जिला शामिल है. तिरहुत रेंज में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली जिले आते हैं.

    कोसी रेंज में सहरसा, सुपौल और मधेपुरा हैं. वहीं पूर्णिया रेंज में पूर्णिया, कटिहार, अररिया
    और किशनगंज जिले शामिल हैं.
    मुंगेर रेंज में मुंगेर, जमुई, लखीसराय और शेखपुरा आते हैं. बेगूसराय रेंज में बेगूसराय और खगड़िया जिले शामिल हैं.

    37 साल तक लागू रही थी जोन व्यवस्था
    बिहार पुलिस में जोनल सिस्टम की शुरुआत 1982 में हुई थी. उस समय राज्य को चार जोन- पटना, भागलपुर, कोसी और तिरहुत में बांटा गया था. यह व्यवस्था करीब 37 वर्षों तक लागू रही. जोन में आईजी रैंक के अधिकारी और रेंज में डीआईजी रैंक के अधिकारी तैनात किए जाते थे.

    पुलिसिंग को और मजबूत करने की कवायद
    सरकार का मानना है कि जोनल व्यवस्था लागू होने से पुलिस प्रशासन की निगरानी और जवाबदेही बढ़ेगी. साथ ही कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा. इसी उद्देश्य से पुराने सिस्टम को नए स्वरूप में फिर से लागू करने की तैयारी की जा रही है.

  • ईशापुर की पिस्टल और पुणे की गोलियों से लैस होंगे बिहार के जवान, ट्रेनिंग के लिए भी विभाग ने खर्च किए करोड़ों

    ईशापुर की पिस्टल और पुणे की गोलियों से लैस होंगे बिहार के जवान, ट्रेनिंग के लिए भी विभाग ने खर्च किए करोड़ों

    पटना
    बिहार में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। बिहार पुलिस अब अत्याधुनिक हथियारों और गोला-बारूद से लैस होने जा रही है। गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय के उस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसमें करीब 43.42 करोड़ रुपये की लागत से नए हथियार और ट्रेनिंग के लिए गोला-बारूद खरीदने की बात कही गई है।

    9mm की पिस्टल से लैस होंगे जवान
    इस बड़ी खरीद में सबसे खास है '(9mm) सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल'। गृह विभाग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के ईशापुर स्थित राइफल फैक्ट्री से इन पिस्टलों की सप्लाई होगी। पुलिस इसे दो चरणों में खरीदेगी। पहले चरण में 2,500 पिस्टल और दूसरे चरण में 1,500 पिस्टल ली जाएंगी। सिर्फ इन पिस्टलों की खरीद पर ही करीब 42 करोड़ 28 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।

    ट्रेनिंग के लिए आएंगी 1.20 लाख विशेष गोलियां
    बिहार पुलिस ने प्रैक्टिस के लिए 1.20 लाख ब्लैंक गोलियां खरीदने का फैसला किया है। इन गोलियों का इस्तेमाल ट्रेनिंग के दौरान किया जाएगा। पुणे की खड़की फैक्ट्री से 60 हजार गोलियां और महाराष्ट्र के जलगांव फैक्ट्री से 60 हजार गोलियां आएंगी। इन विशेष गोलियों पर करीब 1 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बता दें कि बिहार पुलिस इन हथियारों और गोला-बारूद की खरीद सीधे देश की प्रतिष्ठित फैक्ट्रियों से करेगी। इसके लिए पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की फैक्ट्रियों को चुना गया है। गृह विभाग की मंजूरी मिलने के बाद अब खरीद की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

  • लापरवाही रवैया और ‘अनफिट’ पर होगा एक्शन, बिहार पुलिस के जवानों को हर रोज लगानी होगी दौड़

    लापरवाही रवैया और ‘अनफिट’ पर होगा एक्शन, बिहार पुलिस के जवानों को हर रोज लगानी होगी दौड़

    भागलपुर.

    बिहार पुलिस सुनते ही एक तस्वीर उभरती थी- थुलथुल काया और उस पर वर्दी। अब यह तस्वीर बदलने वाली है। अब बिहार पुलिस के जवान और पदाधिकारी स्मार्ट दिखेंगे। चुस्त-दुरुस्त काया और उस पर सलीके से पहनी हुई वर्दी। पुलिस मुख्यालय ने अब स्मार्ट पुलिसिंग के लिए पुलिस जवान और अधिकारियों को स्मार्ट बनाने का निर्णय लिया है।

    जी हां, अब पुलिस जवान और आफिसरों की प्रत्येक दिन सुबह में पुलिस केंद्र के मैदान पर हाजिरी लगेगी, जहां वे अपने बाडी को फिट रखने के लिए एक घंटे तक पसीना बहाएंगे। रेंज के भागलपुर, नवगछिया और बांका के पुलिस केंद्र में सिंथेटिक ट्रैक बनाया जाएगा। सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ लगा कर पुलिस जवान और अधिकारी थुलथुल काया से निजात पाकर खुद को फिट बनाएंगे।

    लापरवाह पुलिस कर्मियों पर होगी कार्रवाई
    अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले सिंथेटिक ट्रैक मुहैया कराने को हरी झंडी मिल गई है। बहुत जल्द सारी सुविधाएं पुलिस मुख्यालय पुलिस केंद्र में मुहैया करा दी जाएगी। पुलिस केंद्र में अब सिर्फ जिम खोलना ही मकसद नहीं है, बल्कि रोजाना जवानों को वहां उपस्थित हो वर्क-आउट भी करना है, जिसकी मानीटरिंग एसएसपी, एसपी, डीएसपी, सार्जेंट मेजर करेंगे। सुबह यदि पुलिसकर्मी बैरक या क्वार्टर में रहकर खर्राटे लेते रहेंगे या आराम तलबी दिखाएंगे तो उनका यह कृत्य लापरवाही की श्रेणी में लाया जाएगा और उनपर जांच के बाद दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    वरीय पुलिस पदाधिकारी भी पहुंचने लगे हैं अभ्यास में
    भागलपुर रेंज में जवानों की संख्या करीब चार हजार है। जिसमें हवलदार, सहायक अवर निरीक्षक, अवर निरीक्षक, इंस्पेक्टर को जोड़ दें तो यह संख्या पांच हजार के पार हो जाएगी। भागलपुर में जहां एसएसपी प्रमोद कुमार यादव, सिटी एसपी शैलेंद्र कुमार समेत कई पदाधिकारी भी नियमित अभ्यास में पुलिस जवानों के बीच पहुंच रहे हैं। नवगछिया और बांका जिले में भी कमोवेश सक्षम पुलिस अधिकारियों की ऐसी उपस्थिति जवानों को इस दिशा में प्रोत्साहित करेगी।

    वजन होगा कम, मांसपेशियों को मिलेगी मजबूती
    पालीयूरेथेन या लैटेक्स से तैयार की जाने वाली सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ने से कई फायदे होते हैं। इस पर दौड़कर पुलिसकर्मी न सिर्फ अपनी वजन कम कर सकेंगे बल्कि उनकी मांसपेशियां भी मजबूत बन जाएगी। बैड कालेस्ट्रोल से उन्हें मुक्ति मिलेगी। उच्च रक्तचाप, हृदय स्वास्थ्य में भी सुधार आएगा। सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ते समय यदि पुलिसकर्मी गिर जाएं तो भी उन्हें चोटें कम आएगी।

    पुलिस मुख्यालय की तरफ से अभिनव प्रयोग
    चुस्त-दुरुस्त शरीर स्मार्ट पुलिसिंग का सबसे प्रमुख हिस्सा है। पुलिसकर्मी-पदाधिकारियों की टीम तभी बेहतर प्रदर्शन कर सकती जब वो पूरी तरह फिट और चुस्त-दुरुस्त हों। पुलिस मुख्यालय की तरफ से यह अभिनव प्रयोग पुलिसिंग को और बेहतर बना देगा।
    – विवेक कुमार, रेंज आईजी, भागलपुर।

  • 462 पदों के लिए आवेदन कल से शुरू, बिहार पुलिस रेडियो में एएसआई की होगी भर्ती

    462 पदों के लिए आवेदन कल से शुरू, बिहार पुलिस रेडियो में एएसआई की होगी भर्ती

    पटना.

    बिहार पुलिस में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सुनहरा अवसर आया है। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (बीपीएसएससी) ने बिहार पुलिस रेडियो (वितंतु) संवर्ग में सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) के 462 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया चार फरवरी से शुरू होगी और चार मार्च तक चलेगी। पुरुष, महिला और मंगलामुखी सभी श्रेणी के अभ्यर्थी इस भर्ती में आवेदन कर सकेंगे।

    शैक्षणिक योग्यता और पात्रता तय
    इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से भौतिकी विषय के साथ विज्ञान में स्नातक (बीएससी) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों को 45 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण होना होगा। आयोग ने साफ किया है कि शैक्षणिक योग्यता की जांच सभी चरणों में की जाएगी।

    ऊंचाई और शारीरिक मानकों का निर्धारण
    भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक मानकों को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। अनारक्षित और पिछड़ा वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 165 सेंटीमीटर तय की गई है। अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के पुरुष उम्मीदवारों के लिए यह मानक 160 सेंटीमीटर रखा गया है। सभी वर्गों की महिला उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 155 सेंटीमीटर निर्धारित की गई है।

    तीन चरणों में होगी पूरी चयन प्रक्रिया
    एएसआई भर्ती की चयन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा आयोजित होगी, जिसमें 100 अंकों का एक प्रश्न पत्र होगा। इस परीक्षा में सामान्य ज्ञान एवं समसामयिक विषयों से 40 प्रश्न और भौतिकी से 60 प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा की अवधि दो घंटे की होगी और प्रश्न वस्तुनिष्ठ बहुविकल्पीय होंगे। 30 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए अयोग्य माने जाएंगे।

    मुख्य परीक्षा में दो प्रश्न पत्र
    प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलेगा। मुख्य परीक्षा में पहला प्रश्न पत्र सामान्य भाषा ज्ञान का होगा, जिसमें सामान्य हिंदी और सामान्य अंग्रेजी से 50-50 अंकों के प्रश्न पूछे जाएंगे। यह परीक्षा इंटरमीडिएट स्तर की होगी और डेढ़ घंटे की होगी। इसमें न्यूनतम 30 अंक लाना अनिवार्य होगा, हालांकि इसके अंक मेरिट में नहीं जोड़े जाएंगे। दूसरा प्रश्न पत्र स्नातक स्तर की भौतिकी का होगा, जिसमें 100 अंकों के 100 प्रश्न होंगे और परीक्षा की अवधि तीन घंटे की रहेगी।

    नेगेटिव मार्किंग और शारीरिक दक्षता परीक्षा
    प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों में प्रत्येक गलत उत्तर पर 0.2 अंक काटे जाएंगे। मुख्य परीक्षा के भौतिकी प्रश्न पत्र में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। इसके आधार पर रिक्तियों के अधिकतम पांच गुना अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। तीसरे चरण की यह परीक्षा अर्हक प्रकृति की होगी, जिसमें कोई अंक नहीं दिए जाएंगे, लेकिन सभी मानकों में सफल होना अनिवार्य होगा।

    युवाओं के लिए बड़ा मौका
    बीपीएसएससी की यह भर्ती बिहार पुलिस में तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए बड़ा अवसर मानी जा रही है। आयोग ने अभ्यर्थियों से समय पर आवेदन करने और आधिकारिक अधिसूचना को ध्यान से पढ़ने की अपील की है, ताकि किसी भी तरह की गलती से बचा जा सके।