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  • डिप्टी CM विजय चौधरी की अफसरों को चेतावनी, बाढ़ तैयारियों में कोताही बर्दाश्त नहीं

    डिप्टी CM विजय चौधरी की अफसरों को चेतावनी, बाढ़ तैयारियों में कोताही बर्दाश्त नहीं

     पटना

    बिहार में आगामी मानसून के दौरान संभावित बाढ़ और सुखाड़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह से ऐक्शन मोड में आ गई है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि बचाव की तैयारियों में किसी भी स्तर पर कोताही अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बेहतर काम करने वाले अधिकारियों की जहां एक तरफ पीठ थपथपाई जाएगी और उन्हें बधाई दी जाएगी, वहीं जानबूझकर लापरवाही और कार्यों में कोताही बरतने वाले अफसरों और कर्मचारियों पर सरकार का डंडा चलेगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    सिंचाई भवन में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक
    प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को राजधानी पटना के सिंचाई भवन में बाढ़ और सुखाड़ से पूर्व की तैयारियों को लेकर एक बेहद अहम और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए समय रहते पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करना था। डिप्टी सीएम ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि संभावित बाढ़ से बचाव और सुखाड़ से निपटने की सभी आवश्यक तैयारियां निर्धारित समय सीमा से पहले ही हर हाल में पूरी कर ली जाएं।

    तटबंधों पर होगी पेट्रोलिंग
    समीक्षा बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में चल रहे कटाव निरोधी कार्यों की प्रगति की गहन समीक्षा की। उन्होंने तटबंधों की मरम्मत, उनके उचित अनुरक्षण और बाढ़ सुरक्षात्मक सामग्री के प्राप्त इंतेजाम करने के कड़े निर्देश दिए। डिप्टी सीएम ने जोर देकर कहा कि बाढ़ की अवधि के दौरान तटबंधों की पूरी लंबाई पर अधिकारियों द्वारा पूरी मुस्तैदी के साथ पेट्रोलिंग की जाए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को समय रहते टाला जा सके और जानमाल का नुकसान न हो।

    सचिव ने बाढ़ प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था से कराया अवगत
    इस अहम बैठक में जल संसाधन विभाग के वरीय अधिकारी भी मौजूद रहे। इससे पहले विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने उपमुख्यमंत्री को बाढ़ प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए की जा रही सभी तैयारियों से विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संवेदनशील स्थलों की कड़ी निगरानी की जा रही है। सरकार का यह कड़ा रुख इस बात का साफ संकेत है कि इस बार मानसूनी आपदाओं को लेकर प्रशासन किसी भी तरह का कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है।

  • बिहार में करोड़ों के हेरफेर का आरोप, नियंत्रक महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट से हड़कंप

    बिहार में करोड़ों के हेरफेर का आरोप, नियंत्रक महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट से हड़कंप

    पटना

    बिहार विधानसभा में वित्त विभाग के मंत्री विजेंद्र यादव ने सीएजी की रिपोर्ट पेश की। उन्होंने गुरुवार को नियंत्रक महालेखापरीक्षक (सीएजी) से प्राप्त लेखापरीक्षा को सदन के पटल पर रखा। इसमें जिला परिवहन कार्यालयों की प्रगति की रिपोर्ट समेत अन्य कई रिपोर्ट शामिल हैं। CAG की रिपोर्ट पढ़ने के बाद सबलोग हैरान थे। इसमें कुछ ऐसी गड़बड़ी और घपले सामने आए जिसने विपक्ष को नीतीश सरकार को घेरने का बड़ा मौका दे दिया। आज भी विधानसभा में विपक्ष के विधायकों ने इस मामले पर जमकर प्रदर्शन किया।

    सीएजी की रिपोर्ट में यह बताया गया कि परिवहन विभाग में बड़ी गड़बड़ी हुई है। यह मामला चूंकि इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ा है इसलिए पहले जानते हैं इनपुट टैक्स घोटाला क्या होता है। चाणक्य इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार सिन्हा बताते हैं कि यह सीधे पर जीएसटी से जुड़ा मामला है। जब कोई व्यवसायी सामान बेचता है और वह ग्राहक से जो टैक्स वसूलता है तो आउटपुट टैक्स कहते हैं। इस इस आउटपुट टैक्स में से वह अपनी खरीदारी पर पहले दिए गए टैक्स यानी इनपुट टैक्स को घटा देता है। बाकी जो राशि बचती है वह सरकार को देनी होती है। अब जानिए इससे जुड़ा क्या घोटाला है…

    इनपुट टैक्स क्रेडिट में क्या गड़बड़ी हुई?
    वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार सिन्हा बताते हैं कि सीएजी की रिपोर्ट में बताया गया कि इनपुट टैक्स क्रेडिट पर काबू पाने में सरकार विपल रही। 12 अंचलों की जांच में टैक्स देने वाले 22 करदाताओं ने 1167.89 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले लिया। जांच में यह बता चला कि इन 22 करदाताओं को 914 करोड़ 51 लाख रुपये ही मिलनी चाहिए थी। रिपोर्ट में यह बताया गया कि पटना सिटी एक ट्रांसफोर्टर ने बाइक से दो करोड़ 32 लाख रुपये की माल ढुलाई कर ली। इसके आधार पर 19 लाख 32 हजार रुपये इनपुट टैक्स क्रेडिट दूसरे को ट्रांसफर कर दिया गया। इतना ही नहीं यह ढुलाई के लिए जो वाहन उपयोग में दिखाए गए, वह चोरी और स्क्रैप में जा चुके थे। ऐसी नौ गाड़ियों को माल परिवहन में दिखाया गया। यह बड़ी गड़बड़ी है।

    डोभी और बलथरी चेकपोस्ट गड़बड़ी का क्या मामला है?
    सीएजी की रिपोर्ट में बताया गया कि गया जिले के डोभी और गोपालगंज जिले के बलथरी चेकपोस्ट पर बिना जुर्माना लिए ही वाहनों को छोड़ दिया गया। इतना ही नहीं कुछ ऐसे ही भी जांच करते पाए गए जिनके पास ऐसा करने का अधिकार ही नहीं था। पुल पर बिना जांच किए ही वाहन चालकों को पास किया जा रहा था। इतना ही नहीं इन दोनों चेक पोस्ट पर गलत कागजात वाले वाहन चालकों को भी छोड़ दिया गया।

    पुल निर्माण के लिए 5.35 करोड़ रुपये बेकार
    लौरिया-नरकटियागंज मुख्य मार्ग पर विश्व प्रसिद्ध अशोक स्तंभ के समीप अधूरे निर्मित पुल के निर्माण पर पांच करोड़ 35 लाख रुपये खर्च कर दिया गया। हालांकि, अशोक स्तंभ के कारण पुरातात्विक विभाग ने आपत्ति जताई। इसके बाद इस पुल निर्माण के काम को रोक दिया गया। रिपोर्ट में यह कहा गया कि पुल के निर्माण में खर्ज किए गए रुपये बेकार हो गए।  

    इनके अलावा और कहां खामियां मिलीं?
    सीएजी की रिपोर्ट में आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन में गंभीर खामियों का खुलासा हुआ। इसके लिए खारिज हुए 14015 मामले में से 8371 में पूर्व प्राधिकरण पैनल डॉक्टरों की ओर से समय पर कार्रवाई नहीं हुई। इसमें गलत पैकेज चुके गए और निर्देश का भी पालन नहीं किया गया। इस कारण आयुष्मान योजना के 60 प्रतिशत आवेदन रद्द हो गए।

    नेता प्रतिपक्ष ने क्या कहा?
    वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार भ्रष्टाचार का गढ़ बन गया है। बिहार सरकार के हर विभाग और योजना में भ्रष्टाचार है। नीतीश सरकार ने 72,000 करोड़ का घोटाला कर दिया पर इतनी बड़ी राशि का कहीं अता पता नहीं है। सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए। हवा में ही आवास योजना का घर बनकर तैयार हो गया। टैक्स चोरी हुई है। इनपुट क्रेडिट टैक्स पर 250 करोड़ का घोटाला हुआ है।

    राजद विधायक ने क्या आरोप लगाया?
    राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनता दल विधाायक विधायक कुमार सर्वजीत ने आरोप लगाया कि CAG रिपोर्ट में यह बताया गया 31 मार्च 2023 तक 4844 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें से 1430.32 करोड़ रुपये पिछले पांच साल से पेंडिंग है। उन्होंने  परिवहन विभाग में भी घोटाला का आरोप लगाया। एसओपी का पालन किए बिना ही गाड़ियों का फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया गया। इससे सरकार को करोड़ों रुपये की हानि हुई है। उन्होंन कहा कि सरकार को जवाब देना चाहिए। 2005 से पहले की सरकार कोशिश के बजाए अपने विभाग की गड़बड़ियों पर क्यों नहीं बात करती है।