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  • Bhopal Master Plan 2047: ग्रोथ कॉरिडोर से मिक्स लैंड यूज तक, जानें ड्राफ्ट में क्या-क्या खास

    Bhopal Master Plan 2047: ग्रोथ कॉरिडोर से मिक्स लैंड यूज तक, जानें ड्राफ्ट में क्या-क्या खास

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल के बाद भोपाल विकास योजना-2047 के प्रारूप का प्रकाशन कर दिया गया है। नए मास्टर प्लान में शहर के विकास के साथ पर्यावरण, रोजगार, यातायात और नागरिक सुविधाओं पर खास जोर दिया गया है। अब प्रशासन इस ड्राफ्ट पर जनता से दावे-आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करेगा। मास्टर प्लान का ड्राफ्ट चार प्रमुख आधारों पर तैयार किया गया है। इनमें प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण, आधुनिक और नागरिक हितैषी विकास, शहर में जरूरी बदलावों को बढ़ावा देना और रोजगार व आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि लंबे अंतराल के बाद भोपाल विकास योजना-2047 का प्रारूप प्रकाशित किया गया है। इसमें भोजताल, वन क्षेत्रों और बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, आसान आवाजाही और आर्थिक विकास के अवसर देने का प्रयास किया गया है।

    51 किलोमीटर का होगा ग्रोथ कॉरिडोर
    मास्टर प्लान में करीब 3000 हेक्टेयर जमीन ग्रोथ कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित की गई है। इसके साथ ही 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है। यह कॉरिडोर ईकेएआई सिटी, एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक और थोक व्यापार क्षेत्र सहित विभिन्न उपनगरों को जोड़ेगा। ग्रोथ कॉरिडोर में होटल, स्वास्थ्य सेवाएं, आईटी, एआई और डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक, थोक व्यापार, हाइपर मार्केट, मॉल, मल्टीप्लेक्स, कॉरपोरेट ऑफिस, एजुकेशन हब और आवास जैसी गतिविधियां विकसित की जा सकेंगी। यहां मिश्रित उपयोग और ज्यादा घनत्व वाले विकास का प्रस्ताव है। इस कॉरिडोर में लोक परिवहन के लिए बीआरटीएस कॉरिडोर का प्रस्ताव है, जिसे भविष्य में एमआरटीएस में बदला जा सकेगा। विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम और इंदौर मार्गों को भी ग्रोथ कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है।

    एक ही इलाके में मकान और दुकान
    मास्टर प्लान में मिश्रित भूमि उपयोग का प्रस्ताव रखा गया है। यानी सड़क की चौड़ाई के आधार पर कुछ क्षेत्रों में आवासीय उपयोग के साथ दुकान और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति होगी। इसका उद्देश्य लोगों के घर और काम की जगह के बीच दूरी कम करना और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। चौड़ी सड़कों पर स्थित जमीनों के लिए एफएआर और भवन की ऊंचाई को लेकर अधिक छूट देने का प्रस्ताव है। विकास के नियमों को भी आसान बनाने की बात कही गई है।

    हरित क्षेत्र 16 से बढ़कर 27 प्रतिशत
    भोपाल मास्टर प्लान-2005 में हरित क्षेत्र करीब 16 प्रतिशत था। नए भोपाल विकास योजना-2047 में इसे बढ़ाकर करीब 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। भानपुर खंती के पुनर्विकास के लिए यहां गोल्फ कोर्स प्रस्तावित किया गया है। कॉलोनी स्तर पर खुले क्षेत्र को भी 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। योजना में भोजताल और उसके जलग्रहण क्षेत्र, पहाड़ियों, जंगल, तालाबों, जलाशयों और बाघ भ्रमण क्षेत्रों को संरक्षित रखने पर जोर दिया गया है।

    डिजिटल ट्विन सिटी से होगी निगरानी
    शहर के विकास और निर्माण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी के लिए डिजिटल ट्विन सिटी की व्यवस्था का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य अवैध निर्माण, यातायात और दूसरी शहरी समस्याओं पर समय रहते कार्रवाई करना है। सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्थानों पर लगे निजी सीसीटीवी कैमरों की नेटवर्किंग, सार्वजनिक भवनों की बाउंड्री वॉल को पारदर्शी रखने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था जैसे प्रावधान भी किए गए हैं।

    पार्किंग की समस्या दूर करने पर जोर
    मास्टर प्लान में मल्टीलेवल और मैकेनाइज्ड पार्किंग को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है। सामुदायिक खुले क्षेत्रों के नीचे, आरओबी और फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग की व्यवस्था भी की जा सकेगी। बेसमेंट पार्किंग के लिए जमीन के संयुक्त उपयोग की अनुमति देने का भी प्रस्ताव है।

    भौंरी में बनेगी एजुकेशन हब
    भौंरी क्षेत्र में एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ईकेएआई) सिटी विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य शिक्षा और एआई से जुड़े संस्थानों को बढ़ावा देना है।

    अनाथ आश्रम, मूक-बधिर विद्यालय, छात्रावास, दिव्यांग विशेष विद्यालय, वृद्धाश्रम और रैन बसेरा जैसी चैरिटेबल गतिविधियों को भी कई तरह के भूमि उपयोग क्षेत्रों में अनुमति देने का प्रस्ताव है।

    45 लाख आबादी के हिसाब से तैयार योजना
    भोपाल विकास योजना-2047 को 1016.90 वर्ग किलोमीटर के निवेश क्षेत्र के लिए तैयार किया गया है। इसमें 254 गांव शामिल हैं और इसे करीब 45 लाख की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। योजना में विकास योग्य प्रस्तावित क्षेत्रफल 61,017.02 हेक्टेयर रखा गया है। अब इस प्रारूप पर प्रशासन जनता से दावे, आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करेगा। इसके बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    तीन हजार हेक्टेयर का ग्रोथ कॉरिडोर
    मास्टर प्लान ड्राफ्ट में मेट्रो के तहत भोपाल विकास योजना-2047 के प्रस्ताव में करीब तीन हजार हेक्टेयर का ग्रोथ कॉरिडोर प्रस्तावित है. इसमें निवेश के लिए माहौल बनाने के लिए 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है. यह ग्रोथ कॉरिडोर एजुकेशन, नॉलेज, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिटी, एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक भंडारण एवं थोक परिक्षेत्र के साथ-साथ विभिन्न उपनगरों को भी जोड़ता है। .

    रेडियल मार्ग से ग्रोथ कॉरिडोर से जुड़ेंगे ये रोड
    ग्रोथ कॉरिडोर में नगर के बाहर विभिन्न दिशाओं से आने वाले क्षेत्रीय मार्ग जैसे विदिशा मार्ग, रायसेन मार्ग, नर्मदापुरम मार्ग एवं इन्दौर मार्ग को ग्रोथ कॉरीडोर के जरिए शहर से जोड़ा जाएगा. इसमें मेट्रेपोलिटन क्षेत्र के विभिन्न भागों से बेहतर संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया गया है. ग्रोथ कॉरिडोर एवं इसके रेडियल मार्गों का विकास नगर विकास स्कीम के माध्यम से भोपाल विकास प्राधिकरण करेगा. निवेश क्षेत्र की बाहरी सीमा पर स्थित नवीन प्रस्तावित बायपास मार्ग को ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित है. ये मार्ग के दोनों ओर 50-50 मीटर भूमि हरित क्षेत्र के रूप में प्रस्तावित की गई है। 

    मास्टर प्लान में मिक्स लैंड यूज भी प्रस्तावित
    भोपाल मास्टर प्लान ड्राफ्ट में मिक्स लैंड यूज के प्रस्ताव राज्य की टीओडी नीति के अनुरूप आवासीय उपयोग के तहत मार्ग की चौड़ाई के आधार पर मिक्स लैण्ड यूज प्रस्तावित किए गए हैं. जिससे कि वर्क स्पेस और रेजिडेंशियल एरिया में कॉर्डिनेशन हो सके. असीमित एफएआर एवं भवन ऊंचाई नगरीय क्षेत्र की भूमि का अनुकूलतम उपयोग सुनिश्चित करने तथा निवेश मित्र वातावरण तैयार करने के उ‌द्देश्य से मार्ग की चौड़ाई के आधार पर एफएआर का निर्धारण किया गया है। 

    अधिक चौड़े मार्गों पर स्थित भूमियों को एफएआर एवं भवन की ऊंचाई की सीमा से मुक्त रखा गया है. यानि भोपाल में भी अब गगनचुंबी इमारतें होंगी. मास्टर प्लान ड्राफ्ट में भूतल कवरेज को हटाया गया है, जिससे नागरिकों एवं विकासकर्ताओं को लाभ होगा एवं डिजाइन विकल्प उपलब्ध होंगे। 

    शहर की हरियाली बढ़ाने प्लान में ये किए गए उपाय
    भोपाल मास्टर प्लान 2005 में ग्रीन एरिया 16 प्रतिशत था, जिसको बढ़ाकर भोपाल विकास योजना-2047 में लगभग 27 प्रतिशत किया गया है. जो यूआरडीपीएफआई गाइडलाइन के मानकों से कहीं अधिक है. भानपुर खंती के पुर्नविकास के लिए इस पर गोल्फ कोर्स प्रस्तावित किया गया है. इसके अतिरिक्त कॉलोनी स्तर पर भी खुला क्षेत्र 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किया गया है. इससे हरित क्षेत्र में अतिरिक्त वृद्धि होगी. इसके अलावा सर्विस एरिया हेतु भी 2 प्रतिशत का क्षेत्रफल रखा जाना आवश्यक होगा। 

    भोपाल मास्टर प्लान के महत्वपूर्ण पाइंट

        शहर में साथ-साथ हो सकते हैं मकान-दुकान, मिक्स लैंड यूज का प्रस्ताव
        भोपाल के ग्रीन एरिया को 16 फीसदी से बढ़ाकर 27% करने का प्रस्ताव
        2047 तक 3000 हेक्टेयर का ग्रोथ कॉरिडोर प्रस्तावित
        पहली बार FAR और ऊंचाई की सीमा मुक्त भवन का प्रावधान, होंगी गगनचुंबी इमारतें.
        भोपाल मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में एजुकेशन हब और गोल्फ कोर्स भी
        रेडियल मार्ग से ग्रोथ कॉरिडोर से जुड़ेंगे विदिशा-रायसेन-इंदौर रोड
        निवेश क्षेत्र की बाहरी सीमा पर स्थित नवीन प्रस्तावित बायपास ग्रीन फील्ड कॉरिडोर 

     

  • Bhopal Master Plan 2047: 24 मीटर सड़क पर ही मिक्स्ड लैंड यूज, दुकानों के नियम बदलेंगे

    Bhopal Master Plan 2047: 24 मीटर सड़क पर ही मिक्स्ड लैंड यूज, दुकानों के नियम बदलेंगे

    भोपाल 
    भोपाल में रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों और सीलिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को करीब 3 घंटे सुनवाई हुई। कोर्ट ने सीलिंग में लापरवाही पर नाराजगी जताई। कहा- रहवासी इलाकों में कारोबार नहीं होना चाहिए और स्पष्ट रूप से रहवासी उपयोग वाली जगहों पर सीलिंग या डिमोलिशन की कार्रवाई जारी रहेगी।

    कोर्ट ने कहा- जिन जगहों का लैंड यूज स्पष्ट नहीं है या जहां मिक्स्ड लैंड यूज है, वहां कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। भोपाल में कई जगह निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं होने पर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए। कोर्ट ने साफ किया कि उसके आदेशों का पालन हर हाल में सुनिश्चित करना होगा।

    इसी सुनवाई में 21 साल से अटके भोपाल के नए मास्टर प्लान के ड्रॉफ्ट को जारी करने की मंजूरी भी मिल गई। सरकार फाइनल प्रकाशन से पहले कोर्ट को इसकी जानकारी देगी। नए मास्टर प्लान के लागू होने तक सीलिंग की कार्रवाई नहीं रुकेगी। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

    10 शिकायतें पहुंचीं, शाम को खुल रहे थे सील दुकानें
    सुनवाई से पहले भोपाल के रहवासियों की करीब 10 शिकायतें एमिकस क्यूरी एके सिन्हा के जरिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचीं। शिकायतों में कहा गया कि नगर निगम ने अगस्त में जिन प्रतिष्ठानों को सील किया था, उनमें से कई सुबह बंद रहते हैं, लेकिन शाम होते ही दोबारा खुल जाते हैं।

    इन शिकायतों के बाद कोर्ट ने सीलिंग की कार्रवाई में लापरवाही पर नाराजगी जताई। कोर्ट के सामने यह मुद्दा भी आया कि कागजों पर कार्रवाई के बावजूद जमीन पर उसका असर कई जगह दिखाई नहीं दे रहा है।

    अब नई कमेटी नहीं बनेगी
    सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए केएन नटराजन ने कोर्ट को बताया कि सरकार से इस संबंध में बात हो चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अब कोई नई कमेटी नहीं बनाई जाएगी। सीलिंग की कार्रवाई में रुकावट नहीं डाली जाएगी।

    दरअसल, पहले राज्य सरकार ने सीलिंग से जुड़े मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कमेटी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। बाद में कमेटी बनाने को लेकर अवमानना का मुद्दा भी उठा।

    एमिकस क्यूरी एके सिन्हा ने कोर्ट को बताया था कि सरकार की ओर से कमेटी बनाना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना के दायरे में आता है। सरकार के आश्वासन के बाद कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया। हालांकि, अवमानना की कार्रवाई होगी या नहीं, यह लिखित आदेश से स्पष्ट होगा।

    1995 के बाद नया मास्टर प्लान नहीं आया
    सरकार ने कोर्ट को बताया कि भोपाल के लिए 1995 के बाद नया मास्टर प्लान नहीं आया। 2005 में लागू किया गया मास्टर प्लान भी अपनी अवधि पूरी कर चुका है। इसके बावजूद शहर का विकास पुराने मास्टर प्लान के आधार पर किया जा रहा है।

    सरकार ने बताया कि नए मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट तैयार है। इसी ड्रॉफ्ट को जारी करने की अनुमति सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी थी, जिस पर कोर्ट ने अनुमति दे दी।

    8,084 प्रतिष्ठानों को मिले थे नोटिस
    सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के फैसले के बाद नगर निगम ने रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई शुरू की थी। निगम ने शहरभर में नोटिस बांटे थे। करीब 15 दिन तक नोटिस देने की प्रक्रिया चली।

    नगर निगम की सूची में कुल 62,500 दुकानें दर्ज थे। इनमें से 8,084 दुकानों को नोटिस दिए गए। इसके बाद करीब 190 दुकानों को तीन दिन के लिए बंद या सील किया गया था।

    व्यापारियों के विरोध के बाद 22 दिन से रुकी थी कार्रवाई
    नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने प्रदर्शन किया था। विरोध के बाद नगर निगम ने कार्रवाई रोक दी थी। मंगलवार की सुनवाई से पहले करीब 22 दिन से सीलिंग की कार्रवाई नहीं हुई थी।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई कार्रवाई रिपोर्ट पर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि निगम ने गलत कार्रवाई दिखाने वाले दस्तावेज कोर्ट में पेश किए और जिन प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, वे बाद में दोबारा खुल गए।

    अगस्त में 10 सदस्यीय कमेटी पर लगी थी रोक
    इस मामले में अगस्त की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई 10 सदस्यीय जांच कमेटी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ओर से दुकान संचालकों को दिए गए सभी राहत और स्टे आदेश भी रद्द कर दिए थे।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की सुनवाई पहले 15 सितंबर को होनी थी, लेकिन उस दिन सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद मंगलवार को कोर्ट में करीब तीन घंटे तक मामले पर सुनवाई हुई।

    नियम तोड़ने पर एक्शन
    नगर निगम की स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ढोल ग्यारस को देखते हुए जोन क्षेत्र में निरीक्षण किया। इस दौरान दो स्थानों पर मांस की दुकानें संचालित मिलीं। नगर निगम द्वारा त्योहार के अवसर पर निर्धारित प्रतिबंधों के बावजूद दुकानें खुली मिलने पर टीम ने तत्काल कार्रवाई की। प्रतिबंधित अवधि में दुकान खोलने पर होगी कार्रवाई
    नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि त्योहारों के दौरान निर्धारित नियमों और प्रतिबंधों का पालन कराना निगम की प्राथमिकता है। निरीक्षण के दौरान यदि प्रतिबंधित अवधि में मांस की दुकानें खुली मिलती हैं तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाएगी।

    जोन क्रमांक 11 के स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में मांस विक्रेताओं के बीच भी सतर्कता बढ़ गई है। निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में भी क्षेत्र में निरीक्षण जारी रहेगा और नियमों की अनदेखी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। 

    अब तक ऐसे रहे मास्टर प्लान के ड्राफ्ट

        अगस्त 2009 में ड्राफ्ट-2021 जारी हुआ। 2008 से तैयारी शुरू हुई। 813.92 वर्ग किमी क्षेत्रफल व 196 गांवों को शामिल किया था। बड़ा तालाब कैचमेंट- एफटीएल और ग्रीन बेल्ट के नियमों व सर्वे में गलतियों से विरोध हुआ। यह अधिसूचित नहीं हो सका। इसे ही नए सिरे से बनाने के लिए 2011 में कमेटी बनाई। बैठकें हुईं, पर 2012 में इसे रद्द कर दिया गया।

        मार्च 2020 में ड्राफ्ट 2031 जारी हुआ। 1016.90 वर्ग किमी क्षेत्रफल प्लानिंग एरिया किया। कोरोना के कारण इस पर सुझाव आपत्ति की समय सीमा बढ़ाई। धारा 19-2 तक कार्रवाई पहुंची। अंतिम नोटिफिकेशन के लिए ड्राफ्ट तैयार था, लेकिन फरवरी 2024 में यह भी रद्द हो गया।

    रहवासियों की शिकायत- शोर, भीड़ और सुरक्षा का मुद्दा
    रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्थानीय लोगों की मुख्य शिकायत शोर और भीड़ को लेकर है। उनका कहना है कि घरों के आसपास लगातार व्यावसायिक गतिविधियां होने से सार्वजनिक शांति प्रभावित होती है।

    रहवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि ऐसे इलाकों में भीड़ और आवाजाही बढ़ने से सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को भी ट्रैफिक और दुर्घटना का खतरा रहता है। इसी वजह से रहवासी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को बंद करानेकी मांग की जा रही है।

     

    सुप्रीम निर्देश… ड्राफ्ट में ये होंगे बदलाव

    -रह ड्राफ्ट में मिक्स्ड लैंड यूज के जो प्रावधान थे, नए में उन्हें ही लिया जाएगा। 24 मीटर चौड़ी रोड पर ही मिक्स्ड लैंडयूज रहेगा। शहर के नए हिस्से में गलियों में दुकानें अवैध रहेंगी।
    -10 नंबर, त्रिलंगा, कोलार का कटियार मार्केट, अवधपुरी के बाजार, इंद्रपुरी के बाजार, अशोका गार्डन 80 फीट रोड से लगी गलियों के बाजार क्षेत्र नियमित नहीं होंगे।

    -पार्किंग का स्पष्ट प्रावधान। अरेरा कॉलोनी समेत अन्य क्षेत्रों में छोटे प्लॉट पर बने नर्सिंग होम, अस्पताल से लेकर शॉपिंग सेंटर्स पर असर पड़ेगा। पार्किंग के लिए अपनी जमीन पर जगह देनी होगी या 500 मीटर के दायरे में व्यवस्था करनी होगी।

    -बेसमेंट में पार्किंग की जगह अन्य उपयोग को अवैध ।

    -हाउसिंग बोर्ड, बीडीए, निगम की 35000 संपत्तियां लीज होल्ड हैं। इनमें व्यावसायिक गतिविधि अमान्य होंगी।

    -लेआउट अप्रूव्ड 2433 कॉलोनी में 5% तक कमर्शियल एक्टिविटी। इसके अतिरिक्त व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगेगी।

    -पुराने शहर के चौक समेत अन्य पुराने बाजारों में दिल्ली की तरह 9 मीटर चौड़ी रोड पर ही कारोबार।
    -33% एरिया ग्रीन रहेगा।

    जनहित में मुख्यमंत्री ने मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने का निर्देश दिया है। सुनियोजित शहर और जनता के हित को ध्यान में रखकर बनाए ड्राफ्ट को जल्द जारी किया जाएगा।- कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, आयुक्त सह संचालक, टीएंडसीपी

  • जम्मू के औद्योगिक विकास से रूबरू हुआ भोपाल का मीडिया दल

    जम्मू के औद्योगिक विकास से रूबरू हुआ भोपाल का मीडिया दल

    भोपाल से आए पत्रकारों के दल ने जम्मू क्षेत्र के औद्योगिक विकास के बारे में जानकारी ली

    सिडको  इंडस्ट्रियल एरिया में औद्योगिक इकाइयों का किया दौरा

    भोपाल/जम्मू 
     पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल के नेतृत्व में जम्मू आए पत्रकारों के एक दल ने आज जम्मू में उद्योग और वाणिज्य निदेशालय का दौरा किया। सहायक निदेशक श्री जतिंदर पॉल सिंह ने उनका स्वागत किया और उन्हें जम्मू-कश्मीर इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2021–30 और नई सेंट्रल सेक्टर स्कीम
      (NCSS 2021) के तहत जम्मू-कश्मीर में हो रहे तेज़ी से औद्योगिक बदलाव के बारे में जानकारी दी।श्री जतिंदर पॉल सिंह ने  मीडिया दल को बताया कि जम्मू डिवीज़न में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास हुआ है। यहां तय औद्योगिक एस्टेट्स में सरकारी ज़मीन पर 1,767 औद्योगिक इकाइयाँ काम कर रही हैं, जिनमें कुल ₹13,391.46 करोड़ का निवेश हुआ है और 49,795 लोगों को सीधा रोज़गार मिला है। 
    नई सेंट्रल सेक्टर स्कीम 2021 फ्रेमवर्क के तहत, 30 सितंबर 2024 तक 971 इकाइयों का पंजीयन हुआ। इनमें कुल ₹14,294 करोड़ का प्रस्तावित निवेश शामिल है, जिसमें से ₹10,514 करोड़ प्लांट और मशीनरी के लिए हैं। साथ ही, इससे 51,897 लोगों को रोज़गार मिलने का अनुमान है और ₹32,017 करोड़ के वित्तीय प्रोत्साहन का भी अनुमान है।
    सहायक निदेशक ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र शासित प्रदेश में असल निवेश ₹5,824 करोड़ तक पहुँच गया। यह 2021 से पहले के समय में हुए औसत सालाना निवेश के मुकाबले 13 गुना ज़्यादा है। तेज़ी से काम करते हुए, 1 अगस्त 2026 तक रजिस्टर्ड 440 नई और विस्तार वाली इकाइयों में से 401 (यानी 91 प्रतिशत) ने कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के इतिहास में पहली बार, पैकेजिंग, फ़ूड प्रोसेसिंग, पॉलिमर और फ़ार्मास्यूटिकल्स जैसे तेज़ी से बढ़ने वाले सेक्टर में कई बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ (मेगा इंडस्ट्रियल यूनिट्स) सफलतापूर्वक स्थापित की गई हैं, जिनमें से हर एक में ₹500 करोड़ से ज़्यादा का निवेश हुआ है।
    प्रतिनिधिमंडल को निवेशकों को मिलने वाले मज़बूत संस्थागत सहयोग के बारे में भी जानकारी दी गई। इसमें ₹45 लाख तक के  डीजी सेट पर 100% सब्सिडी, ₹50 लाख तक के प्रदूषण नियंत्रण 
     उपकरणों पर 60% सब्सिडी, पात्र इकाइयों के लिए 10 साल तक 100% नेट SGST की वापसी, 5 साल तक टर्नओवर से जुड़े इंसेंटिव और सिंगल विंडो पोर्टल के ज़रिए मैनेज होने वाला 99 साल तक का पारदर्शी ज़मीन लीज़ फ़्रेमवर्क शामिल है।
    बाद में, प्रतिनिधिमंडल ने SIDCO इंडस्ट्रियल एरिया में मौजूद फील्ड यूनिट्स का दौरा किया और  नई स्थापित इंडस्ट्रियल यूनिट्स के कामकाज, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं और ऑपरेशनल इकोसिस्टम को प्रत्यक्ष रूप से देखा।

  • भोपाल में अवैध निर्माण पर सख्ती, 22 मकान मालिकों को 15 दिन का अल्टीमेटम

    भोपाल में अवैध निर्माण पर सख्ती, 22 मकान मालिकों को 15 दिन का अल्टीमेटम

     भोपाल
     बावड़िया कलां स्थित शुभालय विहार में टीएंडसीपी के स्वीकृत नक्शे के विपरीत बने 22 मकानों पर नगर निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें 17 मकान मालिकों को नोटिस देकर 15 दिन में निर्माण खुद हटाने को कहा गया है। पांच अधूरे मकानों का निर्माण रोकने के नोटिस दिए गए हैं।

    हाईकोर्ट में याचिका के बाद शुरू हुई कार्रवाई
    इस कार्रवाई के पीछे की वजह यह है कि गौरव गृह निर्माण सहकारी संस्था की 5 एकड़ जमीन पर बने ये निर्माण टीएंडसीपी के स्वीकृत नक्शे के अनुरूप नहीं हैं। हाईकोर्ट में अवमानना याचिका के बाद उपायुक्त सहकारिता ने 13 फरवरी 2026 को निगम को पत्र लिखा था। इसके बाद निगम ने कार्रवाई शुरू की।

    खास बात है कि जिन मकानों को अब अवैध निर्माण बताकर हटाने के नोटिस दिए गए हैं, उन्हें नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा ने ही निर्माण की अनुमति दी थी। इससे निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    48 प्लॉट अवैध तरीके से बेचे गए
    याचिकाकर्ता विवेक दीक्षित के मुताबिक, संस्था के 44 संस्थापक सदस्यों की जमीन पर 48 प्लॉट अवैध तरीके से बेचे गए थे। सहकारिता विभाग इनकी रजिस्ट्रियां शून्य कराने के लिए सिविल कोर्ट भी पहुंच चुका है।

    38 रजिस्ट्रियों के 18.74 करोड़ रुपए गायब
    फरवरी 2026 में सहकारिता विभाग की जांच में सामने आया कि 2018 से 2023 के बीच वास्तविक सदस्यों को दरकिनार कर बाहरी लोगों के नाम करीब 50 रजिस्ट्रियां की गईं। इनमें 32 अवैध पाई गई। 38 रजिस्ट्रियों के करीब 18.74 करोड़ रुपए संस्था के खाते में नहीं आए।

    ऑडिटर अनिल कुमार रावत की रिपोर्ट के मुताबिक फर्जी दस्तावेजों और हैंडराइटिंग में हेरफेर कर वास्तविक सदस्यों का अधिकार छीना गया। ये रजिस्ट्रियां तत्कालीन अध्यक्ष अनिता विष्ट और तत्कालीन प्रबंधक मनोज साहू के कार्यकाल में हुई थीं।

  • रिहायशी भवनों में कारोबार करने वालों की बढ़ी मुश्किलें, भोपाल हाईकोर्ट का सख्त रुख; 7 दिन में पेश करें कागजात

    रिहायशी भवनों में कारोबार करने वालों की बढ़ी मुश्किलें, भोपाल हाईकोर्ट का सख्त रुख; 7 दिन में पेश करें कागजात

    भोपाल 

    भोपाल के रिहायशी इलाकों में आवासीय भूखंडों पर चल रहे मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिए हैं शहर में आवासीय और लो-डेंसिटी क्षेत्रों में अवैध निर्माण व गैर-कानूनी व्यावसायिक गतिविधियों पर संकट गहरा गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मॉल, होटल व व्यावसायिक संचालकों को वैधानिक अनुमति पत्र नगरनिगम को दिखाने का निर्देश दिया है। जिस पर निगम विधि पूर्वक उनकी पड़ताल करेगा। दूसरी ओर, शहर के लो-डेंसिटी इलाकों में तय सीमा से 10 गुना तक ज्यादा अवैध निर्माण हो चुके हैं। नगर निगम की नोटिस व सीलिंग कार्रवाई के बीच अफसर अब मास्टर प्लान के जरिए इन्हें नियमित करने का रास्ता तलाश रहे हैं, जिससे मास्टर प्लान का ड्राफ्ट फिर अटक गया है।

    मास्टरप्लान नियमित करने की प्लानिंग
    शहर के जिन क्षेत्रों को 2005 के मास्टर प्लान में लो-डॅसिटी तय कर निर्माण की लिमिट तय कर रखी है, वहां बेशुमार व बड़े निर्माण हो गए है। अब इन निर्माणों को मास्टर प्लान के रास्ते नियमित कराने की कोशिश की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आवासीय परिसरों से व्यावसायिक गतिविधि बंद कराने नगर निगम नोटिस और सीलिंग कर रहा है। दोनों ही पक्ष इसके लिए मास्टर प्लान को लागू करने की मांग कर रहे है। प्लानिंग एरिया के लो-डेंसिटी क्षेत्रों को नियमित करने बीते पंद्रह दिन से टीएंडसीपी और नगरीय प्रशासन के अफसर बैठकें कर रहे हैं। गौरतलब है कि लो-डेंसिटी एरिया में 10 हजार वर्गफीट जमीन पर 0.06 एफएआर से महज 600 वर्गफीट तक के निर्माण की अनुमति है, जबकि यहां दस गुना ज्यादा 6000 से 8000 वर्गफीट तक निर्माण हो गए।

    ये हैं लो-डेंसिटी के नियम
    ग्राम बैरागढ़ चिचली, नीलबड़ व मिंडोरी में लो-डेंसिटी तय है। इनमें 48 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर डेंसिटी तय है। इनमें निर्माण के लिए कम से कम 1000 वर्गमीटर यानि 10 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल जरूरी है। यहां निर्माण की अनुमति पर 0.06 एफएआर तय है। यानि 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट पर 600 वर्गफीट निर्माण ही हो सकता है। इससे अधिक अवैध है। इसमें भी जमीन पर कुल अनुमति का छह फीसदी ही निर्मित किया जा सकता है।

    कार्रवाई का रास्ता साफ
    कोर्ट के आदेश के बाद रिहायशी क्षेत्रों में बिना वैध अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की स्थिति साफ हो गई है। अब संबंधित पक्षों को अपने व्यावसायिक उपयोग की वैध अनुमति साबित करने के लिए दस्तावेज निगम के सामने रखने होंगे।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह रिहायशी इलाकों को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अब नगर निगम के सामने कार्रवाई करने के लिए स्पष्ट न्यायिक निर्देश हैं।

    ट्रैफिक-पार्किंग की समस्या से जूझ रहे रहवासी
    रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों को भी कोर्ट के आदेश से कार्रवाई की उम्मीद है। रहवासी लवनीश भाटी ने कहा कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, अब कोर्ट के आदेश के बाद जमीन पर कार्रवाई की उम्मीद है।

    संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भी फैसले का स्वागत करते हुए नगर निगम से रिहायशी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की मांग की है। समिति का कहना है कि जिनके पास वैध अनुमति नहीं है, उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

    ये हैं स्थिति

    -कलियासोत कैचमेंट में साक्षी ढाबे के पास से अंदर के के क्षेत्र में निर्मित वीआइपी कॉलोनी में 600 वर्गफीट की जगह 6000 वर्गफीट के बंगले बना लिए। मामला कोर्ट में चला गया।

    -चार इमली, श्यामला हिल्स पर अवैध तौर पर बंगले बन गए।
    -नरसिंहगढ़ रोड पर लो-डेंसिटी में 12 बड़ी कॉलोनियां बन गईं।
    -मिंडोरी और संबंधित क्षेत्र में बड़े मकान, रेस्टोरेंट विकसित हो गए।
    -केरवा डेम से लगी जमीन लो-डेंसिटी है, लेकिन इसकी ओर जाने वाली रोड किनारे अवैध तौर पर कॉलोनियां विकसित हो गईं।

    कोर्ट ने कहा-कागजात दिखाएं नगर निगम करेगा सभी के परीक्षण
    आवासीय क्षेत्र के मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर अनुमति और वैधानिकता की जांच नगरनिगम भोपाल करेगा। हाईकोर्ट में सोमवार को 42 याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। वहीं, मंगलवार को दस नम्बर, कलियासोत और बड़ा तालाब के 50 मीटर दायरे में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने सम्बंधी आदेश और शो-कॉज नोटिस को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। शोकॉज नोटिस की याचिकाओं का निराकरण करते हुए कोर्ट ने नगर निगम को याचिकाकर्ताओं के जवाब का विधि के अनुसार परीक्षण कर कारण सहित आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे। मकानों को तोड़ने के मामले में दलीलें पूरी नहीं हो सकीं। एकलपीठ ने मकान तोड़ने पर लगी रोक बरकरार रखते हुए अगली सुनवाई 15 सितंबर निर्धारित की है।

    सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत
    हाईकोर्ट के रुख का स्थानीय रहवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने इसे शहर के आवासीय इलाकों को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। उनका कहना है कि अब अनुमति के नाम पर टालमटोल या बहानेबाजी नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि असली परीक्षा भोपाल नगर निगम की है, जिसे यह साबित करना होगा कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई प्रभावशाली व्यक्ति।

    शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई
    रहवासी लवनीश भाटी और संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण पैदा हो रही ट्रैफिक, पार्किंग, अत्यधिक शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई। रहवासियों का कहना हैं कि वे वर्षों से इन दिक्कतों को झेल रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी।

  • भोपाल में व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन, सीलिंग के विरोध में CM हाउस कूच; बंद की चेतावनी

    भोपाल में व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन, सीलिंग के विरोध में CM हाउस कूच; बंद की चेतावनी

    भोपाल 

    भोपाल के रहवासी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी के खिलाफ मंगलवार सुबह 9 बजे से नगर निगम की कार्रवाई फिर शुरू हो गई। कोहेफिजा स्थित चाय लीला कैफे समेत होटल, बुक शॉप और बैकरी पर सीलिंग की कार्रवाई की गई।रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ मंगलवार को भोपाल में व्यापारी सड़कों पर उतर आए। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के बैनर तले बड़ी संख्या में व्यापारी सुबह 11 बजे न्यू मार्केट स्थित नानके पेट्रोल पंप पर जुटे और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने सीएम हाउस की ओर बढ़े। रोशनपुरा चौराहे से पहले पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया।

    बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़े व्यापारी, धक्का-मुक्की
    व्यापारियों ने बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने सख्ती की और प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। धक्का-मुक्की के बीच कुछ व्यापारी नीचे भी गिर गए। प्रदर्शन में व्यापारी लगातार सीलिंग कार्रवाई रोकने और सरकार से राहत देने की मांग कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि चाहे लाठी खानी पड़े, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा।

    'कारोबार बंद हुआ तो रोजी-रोटी पर संकट'
    व्यापारियों का कहना है कि शहर में कई दुकानें 50 से 60 साल पुरानी हैं। सरकार ने इन्हें जीएसटी नंबर, गुमाश्ता लाइसेंस और व्यावसायिक बिजली कनेक्शन तक दिए हैं। ऐसे में अब अचानक सीलिंग की कार्रवाई से हजारों कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बैंक से लिए गए कर्ज की किस्त, कर्मचारियों की तनख्वाह और परिवार की जिम्मेदारियां भी प्रभावित होंगी। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अजय देवनानी ने कहा कि व्यापारियों की मांग है कि व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। इसके लिए मिश्रित भू-उपयोग और क्षेत्रवार योजना लागू की जा सकती है। व्यापारियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर तत्काल राहत देने की मांग की है।

    चार दिन से नोटिस नहीं, सीधे कार्रवाई का आरोप
    व्यापारियों का आरोप है कि पिछले चार दिनों से प्रतिष्ठानों को नए नोटिस नहीं दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई की जा रही है। निगम अधिकारियों का कहना है कि नोटिस देने के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों का परीक्षण किया जा रहा है और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

    दूसरे दिन भी कैफे-होटल समेत कई प्रतिष्ठान बंद
    इधर, व्यापारियों के प्रदर्शन के बीच मंगलवार सुबह 9 बजे से नगर निगम ने दूसरे दिन भी कार्रवाई शुरू कर दी। कोहेफिजा स्थित चाय लीला कैफे सहित होटल, बुक शॉप और बेकरी पर कार्रवाई की गई। कई संचालकों ने निगम की टीम पहुंचने से पहले ही अपने प्रतिष्ठान स्वैच्छिक रूप से बंद कर दिए। बैरागढ़ के चंचल चौराहे पर होटल प्रेस्टिसाइड और शैक बार, इकबाल मैदान में स्वीट बुक, करोंद में फ्रेश बेकरी और कोहेफिजा में चाय लीला को बंद कराया गया। कई प्रतिष्ठानों के बाहर संचालकों ने खुद ही बंद होने के पोस्टर लगा दिए थे। इससे पहले सोमवार को पुलिस की मौजूदगी में 7 प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, जबकि 102 दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान स्वैच्छिक रूप से बंद कर दिए थे।

    किन इलाकों में नगर निगम की कार्रवाई?
    नगर निगम की टीमें मंगलवार को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में कार्रवाई कर रही हैं। इनमें उत्तर विधानसभा के कोहेफिजा, सिंधी कॉलोनी और कबाड़खाना; नरेला विधानसभा के करोंद और सुभाष नगर; दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के न्यू एमपी-एमएलए कॉलोनी; मध्य विधानसभा के जहांगीराबाद, शादी हॉल और करबला रोड; गोविंदपुरा के बाग मुगालिया, अमराई, सहयोग विहार, रघुनाथ नगर, रोहित नगर और ज्योतिनगर, जबकि हुजूर विधानसभा के चंचल नगर, सीहोर नाका, गांधी नगर और सीटीओ क्षेत्र शामिल हैं।

    शिकायत के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
    आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का विरोध करने वालों का कहना है कि इससे शोर, भीड़ और सार्वजनिक शांति में व्यवधान पैदा हो रहा है। उनका आरोप है कि कुछ इलाकों में असामाजिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं। स्कूलों के आसपास बढ़ते यातायात से बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कार्रवाई सिर्फ छोटे कारोबारियों तक सीमित है और बड़े व रसूखदार लोगों को छोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि निगम की पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाई जाएगी।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई सीलिंग
    आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई की थी। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत संबंधी आदेश भी निरस्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को है। इस दौरान नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी पेश करनी है। इसी के चलते शहर में नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई तेज हुई है।

    व्यापारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
    व्यापारियों ने रहवासी इलाकों में पुरानी दुकानों और कारोबार के लिए व्यावहारिक समाधान निकालने, मिश्रित भू-उपयोग और क्षेत्रवार योजना लागू करने, वर्षों से चल रहे कारोबार को अचानक सील नहीं करने, सरकार द्वारा दिए गए लाइसेंस और व्यावसायिक सुविधाओं को ध्यान में रखने तथा छोटे कारोबारियों को राहत देने की मांग की है। साथ ही बड़े और प्रभावशाली व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी समान कार्रवाई की मांग उठाई है। 

     

  • भोपाल में 1 लाख लोगों की राह होगी आसान, 16 किमी रोड पर बनेंगे 18 अंडरपास

    भोपाल में 1 लाख लोगों की राह होगी आसान, 16 किमी रोड पर बनेंगे 18 अंडरपास

    भोपाल
    राजधानी भोपाल के रत्नागिरी तिराहा से आशाराम तिराहा तक 16 कि.मी की अयोध्या बायपास 10-लेन रोड को पार करने व्हीकल अंडरपास का निर्माण शुरू हुआ है। रोड में पौन किमी के अंतराल में 18 अंडरपास बनेंगे। आसपास रहने वाली व सर्विस रोड का उपयोग करने वाली एक लाख आबादी को इससे मदद मिलेगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इसे 1000 करोड़ रुपए के बजट से तैयार कर रहा है। प्रोजेक्ट का शुरुआती बजट 832 करोड़ रुपए था, लेकिन काम शुरू होने में देरी की वजह से बजट में 170 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हो गई। 2027 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसमें सिक्सलेन मुख्यमार्ग के साथ दो-दो लेन सर्विस रोड का हिस्सा है।

    कॉलोनियां, अब ढाई फीट तक रोड से नीचे रोड ने आसपास की कॉलोनियों के लिए अजीब स्थिति बनाई है। रत्नागिरी से आशाराम तिराहा तक 60 कॉलोनियां है। रोड को जमीन से काफी ऊंचाई पर बनाया गया, इससे ये कॉलोनियां रोड से ढाई फीट तक नीचे हो गई है। अब इनके सामने बारिश के पानी की निकासी के साथ कॉलोनी के सीवेज की निकासी की समस्या है। रोड किनारे बड़ी डक्ट से कॉलोनियों के सामने अघोषित दीवार बन गई है।

    जमीन से दो फीट तक ऊंची रोड, अंडरपास ही नाला भी
    प्रोजेक्ट ने बायपास के दोनों तरफ के पानी की निकासी पूरी तरह बांध दी है। इसकी सुगम निकासी बनी रहे, इसके लिए कोई अलग से इंतजाम नहीं किए गए। निर्माणाधीन अंडरपास ही एकमात्र विकल्प है, जिससे बारिश का पानी गुजर सकेगा। यानी बारिश के दौरान यहां पानी रहेगा और आमजन को आवाजाही में दिक्कत होगी। समय के साथ रोड के दोनों तरफ भूजल स्तर में भी बदलाव नजर आने की बात एक्सपर्ट कह रहे हैं।

    ऐसे समझें प्रोजेक्ट
    इसमें 11 फ्लाइओवर-एलीवेटेड सेक्शन है। एक रेलवे ओवरब्रिज भी बनेगा। प्रोजेक्ट एयरपोर्ट, करोंद, रायसेन रोड, कानपुर की ओर भारी वाहनों की आवाजाही के लिए इसे बेहतर बताया जा रहा है।

    इस बात का रखना चाहिए ध्यान
    टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ के अनुसार, प्रोजेक्ट के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए। अंडरपास समेत ब्रिज का काम चल रहा है। आसपास की कॉलोनियां भी नीची हुई है। इससे कोई पर्यावरणीय संकट न बने, इसका ध्यान रखना चाहिए।

  • किसानों की जमीन लेने पर सरकार देगी चार गुना मुआवजा, CM डॉ. यादव ने कही बड़ी बात

    किसानों की जमीन लेने पर सरकार देगी चार गुना मुआवजा, CM डॉ. यादव ने कही बड़ी बात

    किसानों से भूमि अधिग्रहण पर उन्हें दिया जाएगा चार गुना मुआवजा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    किसानों की सुरक्षा के लिए सरकार ने किया पुख्ता प्रबंध
    मुख्यमंत्री भोपाल की करौंद मंडी के बलराम कृषि महोत्सव में वीसी से हुए शामिल

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार खेती और किसान के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपनी जमीन हर हाल में सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भूमि हमारी माता है। यह हमारा उदर-पोषण करती है। इसे किसी को न बेचें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को भरोसा देते हुए कहा कि किन्हीं भी शासकीय योजनाओं के निर्माण के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण करने पर किसानों को एक-दो नहीं, पूरे चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय से भोपाल की करौंद कृषि उपज मंडी परिसर में हुए बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा कि आपके खेत सरकार के लिए देवस्थल है और आपका एक-एक दाना हमारे लिए प्रसाद के समान है। आपके पसीने की हरेक बूंद के सम्मान के लिए हमारी सरकार हमेशा आपके साथ है। उन्होंने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव किसानों की मेहनत, समर्पण और कृषि क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने का माध्यम है। मुख्यमंत्री ने वीसी से बलराम कृषि महोत्सव में मौजूद किसानों से संवाद भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आपकी खुशी हमारे लिए होली और सबसे बड़ी दिवाली है। उन्होंने किसानों से पूरे उत्साह के साथ बलराम कृषि महोत्सव में सहभागी बनने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। बीते 26 दिनों में यह प्रदेश का 14वां बलराम कृषि महोत्सव आयोजन है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द भोपाल मुख्यालय में भी एक बड़ा कृषि महोत्सव आयोजित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से "कवच'' योजना शुरू की है। इससे सहकारी खातों की पुरानी गड़बड़ियां दूर कर 5 हजार किसानों को ऋण और विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया गया है। किसानों को बिना ब्याज के ऋण और ऋण चुकाने के लिए पूरे 12 महीने का समय देने की व्यवस्था भी इस योजना में की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश का किसान अपने परिश्रम से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। मध्यप्रदेश दलहन में पहले अन्न उत्पादन में देश में दूसरे, , तिलहन में दूसरे और दुग्ध उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। जैविक खेती और जैविक कपास उत्पादन में प्रदेश पूरे देश में अव्वल है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय के साधन बढ़ाने, खेती की लागत घटाने तथा तकनीक और नवाचार के माध्यम से उत्पादन एवं आमदनी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है। हमने प्रदेश में सिंचाई क्षमता को 100 लाख हैक्टेयर तक बढ़ाने, उद्यानिकी का रकबा 30 लाख हैक्टेयर करने तथा 10 हजार नई सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से फसल विविधीकरण अपनाने, उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा पशुपालन एवं मछली पालन से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेती को सिर्फ अन्न उत्पादन का जरिया होने तक सीमित न रखकर इसे प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़कर किसानों की आय के नए रास्ते खोले जा रहे है।

    बलराम कृषि महोत्सव में स्थानीय विधायक विष्णु खत्री, तीरथ सिंह मीणा, गोपाल सिंह मीणा, कलेक्टर भोपाल प्रियंक मिश्रा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ जिलाधिकारीगण सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान बंधु उपस्थित थे। विधायक रामेश्वर शर्मा और अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने मंत्रालय से ही बलराम कृषि महोत्सव में सहभागिता की।

     

  • भोपाल में अवैध अधिभोग पर एक्शन की तैयारी, पर्यावरण और लोकहित में नीति तय करेगी नई समिति

    भोपाल में अवैध अधिभोग पर एक्शन की तैयारी, पर्यावरण और लोकहित में नीति तय करेगी नई समिति

    भोपाल के निर्मित क्षेत्रों में अधिभोग उल्लंघन संबंधी विषयों पर, पर्यावरण तथा व्यापक लोक हित के लिए नीतिगत निर्णय लेने के उद्देश्य से बनेगी समिति

    समिति के सुझाव प्राप्त होने पर राज्य शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से ही नगर निगम भोपाल द्वारा की जाएगी कार्यवाही

    *मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल शहर के जनप्रतिनिधियों के साथ ली अधिकारियों की बैठक , मुख्य सचिव भी थे उपस्थित *

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भोपाल शहर के जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों की बैठक ली।बैठक में मुख्य सचिव श्री अशोक वर्णवाल भीं थे उपस्थित । बैठक में मंत्री श्री विश्वास सारंग , मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा एवं भगवान दास सबनानी उपस्थित थे। साथ ही मुख्य सचिव श्री अशोक वर्णवाल , अपर मुख्यसचिव श्री नीरज मंडलोई , आयुक्त नगरीय प्रशासन श्री संकेत भोंडवे, आयुक्त नगर तथा ग्राम निवेश श्री कौशलेन्द्र सिंह, कलेक्टर भोपाल श्री प्रियंक मिश्रा , आयुक्त नगर निगम श्रीमती संस्कृति जैन आदि भी उपस्थित थे। 

    •    माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सिविल अपील क्रमांक 14604/2024 में पारित आदेश दिनांक 17 दिसम्बर, 2024 एवं विविध अपील डायरी क्रमांक 1713/2026 में पारित आदेश में भोपाल शहर में निर्मित भवनों के अधिभोग उल्लंघन संबंधी आदेशों के पालन में प्रक्रिया और नीतिगत निर्णय के लिए समिति का गठन होगा।   
    •    राज्य शासन द्वारा समिति के सुझाव के तारत्म पर निर्धारित प्रक्रिया से किया जाएगा, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन। 
    •    फिलहाल नगर निगम भोपाल द्वारा कोई कठोर कार्यवाही नहीं की जाएगी।
    •    समिति में निम्नानुसार अध्यक्ष और सदस्य रहेंगे- 
    1- अपर मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, अध्यक्ष
    2- अपर  प्रमुख सचिव, सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम विभाग, सदस्य
    3- सचिव श्रम विभाग, सदस्य
    4- आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास, सदस्य 
    5- महानिरीक्षक पंजीयन एवं मुद्रांक ,मध्य प्रदेश, सदस्य 
    6- सदस्य सचिव मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल,सदस्य
    7-  उप सचिव पर्यावरण विभाग, सदस्य 
    8- आयुक्त नगर तथा ग्राम प्रवेश, सदस्य 
    कलेक्टर भोपाल और आयुक्त नगर निगम (विशेष आमंत्रित सदस्य)

    इस समिति द्वारा माननीय न्यायालय के आदेशों के पालन हेतु सभी पहलुओं पर अध्ययन कर शासन को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाएगा । इस प्रतिवेदन पर शासन विचार उपरांत प्रक्रिया निर्धारित कर सकेगा जिसके अनुसार नगर निगम भोपाल द्वारा पालन करवाया जाएगा। तब तक नगर निगम भोपाल कोई सख्त कार्यवाही नहीं करेगा, यह भी आज जनप्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में निर्णय लिया गया है।

    दिखावे की कार्रवाई से लोगों में आक्रोश
    संयुक्त रहवासी संघ के सदस्य विवेक त्रिपाठी ने कहा कि शनिवार को नगर निगम ने अवैध दुकानों के खिलाफ जो कार्रवाई की, वह केवल औपचारिकता थी। इससे शहर के नागरिकों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि नियमों का पालन कराना है तो पूरे शहर में एक समान कार्रवाई होनी चाहिए, न कि कुछ क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए।

    भू-माफियाओं को संरक्षण देना बंद करे निगम
    विवेक त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि नगर निगम भू-माफियाओं और प्रभावशाली लोगों से जुड़े अवैध प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करने से बच रहा है। उन्होंने कहा कि निगम को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना चाहिए और सभी अवैध दुकानों व व्यावसायिक गतिविधियों पर बिना किसी भेदभाव के तालाबंदी करनी चाहिए। 

    नगर निगम के घेराव की चेतावनी
    रहवासी संघ ने चेतावनी दी कि यदि नगर निगम ने पूरे शहर में समान रूप से कार्रवाई नहीं की तो नगर निगम मुख्यालय के बाहर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शहरभर के रहवासी इस आंदोलन में शामिल होंगे और निगम की कार्यप्रणाली के खिलाफ व्यापक विरोध दर्ज कराया जाएगा। विवेक त्रिपाठी ने कहा कि नगर निगम की कार्रवाई और कथित भेदभाव से जुड़े सभी तथ्यों को न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा। उनका कहना है कि वर्ष 2021 से इस मुद्दे को लगातार उठाया जा रहा है और अब समान कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए कानूनी लड़ाई भी जारी रहेगी।

    कल की कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद
    शनिवार को नगर निगम ने रोहित नगर और
    बावड़ियाकलां में सीलिंग अभियान चलाया था। करीब तीन घंटे की कार्रवाई में केवल दो प्रतिष्ठानों को सील किया गया, जबकि अरेरा कॉलोनी में कोई कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठे। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों से जुड़े प्रतिष्ठानों को छोड़ दिया गया। हालांकि नगर निगम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पूरे शहर में चरणबद्ध तरीके से अभियान जारी रहेगा। 

  • भोपाल किसान प्रोटेस्ट समाप्त, मूंग खरीदी पर सरकार के बड़े आश्वासन से खत्म हुआ गतिरोध

    भोपाल किसान प्रोटेस्ट समाप्त, मूंग खरीदी पर सरकार के बड़े आश्वासन से खत्म हुआ गतिरोध

    भोपाल

    मध्य प्रदेश में मूंग खरीद पर सरकार और किसानों के बीच बात नहीं बन पाई. इसके बाद देर रात किसानों ने अपना प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया. इससे पहले बुधवार रात MP सरकार और किसानों के बीच 3 घंटे तक बैठक चली थी. इसमें सरकार के 25% की जगह 60% मूंग खरीदी का फैसला किया था। 

    बैठक में मौजूद किसानों ने इसपर संतुष्टि भी जताई थी. लेकिन थोड़ी बार आधिकारिक बयान में सहमति नहीं बनने की बात कही. ऐलान के बाद प्रदर्शनकारी किसान और पुलिस आमने-सामने भी आ गई. वहां हल्की झड़प भी हुई. पुलिस ने लाउडस्पीकर से किसानों से शांति बनाए रखने की अपील करती दिखी। 

    किसान प्रतिनिधियों के साथ हुई चर्चा के बाद MP सरकार का बयान भी आया है. इसमें बताया गया था कि मध्यप्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि अब हर पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 25 प्रतिशत नहीं, बल्कि 60 प्रतिशत उपार्जन किया जाएगा, जो नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों में लगभग 3 क्विंटल प्रति एकड़ आता है. इस फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू करने की बात कही गई है। 

    सरकार ने किसानों से बातचीत के लिए बनाई थी समिति
    बताते चलें कि किसानों के आंदोलन को देखते हुए राज्य सरकार ने कमेटी का गठन किया था. किसानों से बातचीत के लिए समिति बनाई गई थी. मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना, मंत्री विश्वास सारंग, मंत्री कृष्णा गौर और राकेश सिंह को समिति का सदस्य बनाया गया. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि उनकी सरकार किसानों के साथ हमेशा खड़ी हुई है. जनता को दिक्कत न आए, इसके लिए भी दोनों पक्षों को चिंता करनी चाहिए. सभी किसान संगठन मिलकर समस्या का हल निकालेंगे। 

    किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अवधि भी 10 दिन बढ़ाने का निर्णय लिया था. कहा गया था कि अब किसान 30 जुलाई की जगह 10 अगस्त तक स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे। 

    इसी तरह उपार्जन की आखिरी तारीख भी 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त की गई थी. साथ ही खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित की गई थी। 
    राज्य के कृषि और किसान कल्याण मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने कहा, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला लिया है. यह समिति ई-टोकन व्यवस्था से जुड़ी सभी समस्याओं का परीक्षण कर राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएं पेश करेगी. समिति की अनुशंसाओं के आधार पर जरूरी सुधार तत्काल किए जाएंगे. सुझाव प्राप्त होकर सुधार होने तक ई-टोकन से खाद वितरण की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित की जा रही है। 

    सरकार के फैसले से किसान सहमत नहीं
    भारतीय किसान यूनियन के संतोष बटवारे ने कहा, हमने किसानों के सामने अपनी बात रखी, लेकिन वे सहमत नहीं हुए, इसलिए विरोध-प्रदर्शन जारी है. स्थिति यह है कि सरकार को किसानों के हित में फैसला लेना चाहिए. अगर किसानों के पास लगभग 4 से 6.5 क्विंटल उपज बचती है, तो उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर भी लगभग 2,800 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है. हमने समझौता करने की कोशिश की और कम से कम 10,000–12,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे का प्रस्ताव रखा, लेकिन सरकार सहमत नहीं हुई। 

    किसान सुबोध राय ने कहा, हमारी मांग मूंग की 100% खरीद की थी, लेकिन सरकार ने इसे नहीं माना. वे केवल 60% खरीद के लिए सहमत हुए हैं. टोकन सिस्टम को तुरंत हटा दिया गया है, लेकिन हम इसे किसानों को शांत करने और विरोध खत्म करने का सिर्फ एक अस्थायी उपाय मानते हैं. लगभग 19 किसान संगठन एक साथ आ रहे हैं और बातचीत के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा. हम 100% खरीद की अपनी मांग पर अडिग हैं। 

    विरोध-प्रदर्शन स्थल पर मौजूद एक किसान बोले, बातचीत प्रति एकड़ 3 क्विंटल के बारे में हुई है और किसानों से सलाह-मशविरा करने के बाद ही हम तय करेंगे कि प्रस्ताव स्वीकार करना है या नहीं. मैं राष्ट्रीय किसान मोर्चा का जिला अध्यक्ष भी हूं और किसानों के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए वहां गया था. हम अगला कदम तभी उठाएंगे जब किसान सहमत होंगे… सरकार 3 क्विंटल पर सहमत हो गई है और अगर हमारे साथी किसान इससे संतुष्ट हैं, तो हम इसे स्वीकार कर लेंगे; वरना, हम अपनी मांग पर अड़े रहेंगे। 

     भोपाल में किसानों के प्रदर्शन की वजह?
    – ⁠सरकार ने प्रति एकड़ केवल 1 क्विंटल 20 किलो मूंग ही समर्थन मूल्य MSP पर खरीदने की सीमा तय की है, जबकि किसानों के मुताबिक 1 एकड़ में औसतन 4 से 5 क्विंटल मूंग की उपज होती है.
    – ⁠किसानों के मुताबिक सरकार प्रति क्विंटल 8668 रुपये की दर से केवल 1.20 क्विंटल मूंग ही खरीद रही
    – ⁠बची हुई 3 से 4 क्विंटल मूंग किसानों को खुले बाजार (मंडी) में मजबूरीवश 4000 से 5500 रुपये प्रति क्विंटल के कम दाम पर बेचनी पड़ रही
    – ⁠इससे किसानों को प्रति क्विंटल 3000 से 4000 रुपये तक का सीधा नुकसान हो रहा है. 

    कांग्रेस ने सरकार को घेरा
    किसान आंदोलन और सरकार द्वारा कमेटी बनाने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेशभर से भोपाल पहुंचे हजारों किसान भाई शांतिपूर्वक अपनी जायज मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं लेकिन अहंकार में डूबी सरकार सुनने को तैयार नहीं है. मुख्यमंत्री जी कमेटी बनाकर समय टालने से समाधान नहीं होगा. किसानों की मांगों पर तत्काल निर्णय लिया जाए. प्रदेश में मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी की गारंटी मिले. खाद वितरण की बदहाल व्यवस्था में तुरंत सुधार हो. किसानों से जुड़े सभी लंबित मुद्दों का ठोस समाधान किया जाए. लोकतंत्र में पदयात्रा करना अपराध नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार है. सरकार अहंकार से नहीं संवाद और संवेदनशीलता से चलती है. मध्य प्रदेश कांग्रेस किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और उनकी हर जायज मांग का पूरा समर्थन करती है।