Tag: Ayushman scheme

  • आयुष्मान सेवाओं पर संकट: 1200 करोड़ के लंबित भुगतान से अस्पताल नाराज, 16 सितंबर से पूर्ण बंद की चेतावनी

    आयुष्मान सेवाओं पर संकट: 1200 करोड़ के लंबित भुगतान से अस्पताल नाराज, 16 सितंबर से पूर्ण बंद की चेतावनी

    यमुनानगर
     आयुष्मान योजना में प्रदेश के करीब 480 अस्पतालों के लगभग 1200 करोड़ रुपये फंस गए हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के मुताबिक अस्पतालों द्वारा किए यह क्लेम भुगतान छह माह से अधिक समय से अटके हैं। इससे अस्पताल संचालकों में रोष है। इस पर आइएमए ने आयुष्मान हरियाणा के सीईओ को पत्र भेज लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग की, वहीं एक सितंबर को 24 घंटे का सांकेतिक बंद और 16 सितंबर को सेवाएं पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी।

    आइएमए के अनुसार आयुष्मान के क्लेम का भुगतान 15 दिन में करने की समय-सीमा तय है, पर अस्पतालों के क्लेम छह माह से अधिक समय से अटके हैं। इससे अस्पतालों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

    कई अस्पतालों के लिए आयुष्मान के मरीजों का इलाज जारी रखना मुश्किल हो रहा है। हाल ही में आर्थिक संकट के चलते एक अस्पताल के बंद होने का भी दावा भी आइएमए ने किया।

    आइएमए ने पत्र में स्पष्ट किया है कि एक सितंबर को रात 12 बजे से 24 घंटे तक आयुष्मान सेवाएं सांकेतिक रूप से बंद रखी जाएंगी। इसके बाद भी यदि लंबित भुगतान को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 16 सितंबर की रात 12 बजे से आयुष्मान सेवाएं पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी।

    सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर करे लंबित क्लेम भुगतान
    आइएमए की राज्य प्रधान डा. सुनीला सोनी ने कहा कि प्रदेश के 480 अस्पतालों के लगभग 1200 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर अस्पतालों के लंबित क्लेम का भुगतान करना चाहिए, ताकि मरीजों को इलाज के लिए भटकना न पड़े और आयुष्मान योजना की सेवाएं बाधित होने से बच सकें। उन्होंने कहा कि अस्पतालों के लिए भविष्य में क्लेम के समय पर भुगतान की स्थायी व्यवस्था भी जरूरी है।

     

  • बिना इलाज बिल लगाने और गलत लाभार्थी पर कार्रवाई, अनावश्यक इलाज और गुणवत्ता मानकों में कमी पर भी कार्रवाई

    बिना इलाज बिल लगाने और गलत लाभार्थी पर कार्रवाई, अनावश्यक इलाज और गुणवत्ता मानकों में कमी पर भी कार्रवाई

    लखनऊ

     योगी सरकार ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जुड़े सभी अस्पतालों को योजना के नियमों और आपत्तिजनक कार्यप्रणाली विरोधी दिशानिर्देशों  का पालन अनिवार्य रूप से करने के सख्त निर्देश दिये हैं ताकि लाभार्थियों को बेहतर और पारदर्शी इलाज मिले। ऐसे में सीएम योगी के निर्देश पर स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) अस्पतालों को लगातार इन नियमों की जानकारी दे रही है। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने बताया कि इसके बाद भी नियमों का उल्लंघ करने, लाभार्थी से अवैध वसूली, बिना इलाज के बिल लगाना, गलत लाभार्थी के नाम पर इलाज दर्ज करना, अनावश्यक इलाज या तय मानकों का पालन नहीं करने पर अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    साचीज की वेबसाइट पर देखें दिशानिर्देश 

    डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों को आपत्तिजनक कार्यप्रणाली विरोधी दिशानिर्देशों की जानकारी दी जा रही है। योगी सरकार का प्रयास है कि अस्पताल पहले से ही नियमों को समझें और अपने स्तर पर कमियों को दूर करें, ताकि मरीजों को परेशानी न हो और योजना में किसी तरह की गड़बड़ी न हो। उन्होंने बताया कि सभी सूचीबद्ध अस्पताल आपत्तिजनक कार्यप्रणाली संबंधी दिशानिर्देश साचीज की आधिकारिक वेबसाइट https://sachis.in/ पर देख और डाउनलोड कर सकते हैं। विभाग की ओर से अस्पतालों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, बिलिंग कर्मचारियों और प्रशासनिक कर्मचारियों को भी इन नियमों की जानकारी दें।

    नियम तोड़ने पर पहली, दूसरी और तीसरी बार अलग कार्रवाई

    लाभार्थी से अवैध नकद भुगतान: पहली बार नियम तोड़ने पर राशि का पूर्ण रिफंड तथा अवैध भुगतान की राशि का पांच गुना दंड, दोबारा उल्लंघन पर क्लेम निरस्तीकरण एवं चिकित्सालय का निलंबन तथा तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की जा सकती है।

    बिना सेवा दिए बिलिंग: पहली बार उल्लंघन पर क्लेम निरस्त करने के साथ क्लेम राशि के पांच गुना तक दंड, दूसरी बार उल्लंघन पर दस गुना तक दंड एवं निलंबन तथा तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान है।

    अपकोडिंग, अनबंडलिंग एवं अनावश्यक प्रक्रियाएं: पहली बार उल्लंघन पर अतिरिक्त क्लेम राशि के दस गुना तक तथा दूसरी बार उल्लंघन पर बीस गुना तक दंड एवं निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान है।

    गलत लाभार्थी पहचान: पहली बार उल्लंघन पर पांच गुना तक तथा दूसरी बार उल्लंघन पर दस गुना तक दंड एवं निलंबन की कार्रवाई हो सकती है। तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की जा सकती है।

    गुणवत्ता एवं सेवा मानकों में कमी: न्यूनतम एम्पैनलमेंट, गुणवत्ता एवं निर्धारित सेवा मानकों में कमी पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर निर्धारित अवधि में सुधार एवं अनुपालन का अवसर दिया जाएगा। निर्धारित अवधि में सुधार न होने पर क्लेम निरस्तीकरण, तीन गुना तक दंड एवं निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी बार उल्लंघन पर संबंधित स्वीकृत क्लेम्स पर पांच गुना तक दंड एवं सत्यापन तक निलंबन तथा तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट एवं संबंधित स्वीकृत क्लेम्स पर पांच गुना तक दंड का प्रावधान है।

    चिकित्सालयों के लिए महत्वपूर्ण संदेश 

    साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने सभी सूचीबद्ध चिकित्सालयों से आपत्तिजनक कार्यप्रणाली विरोधी दिशानिर्देशों को केवल औपचारिक निर्देश के रूप में न लेते हुए, इसे अपने दैनिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक चिकित्सालय अपने स्तर पर यह सुनिश्चित करें कि चिकित्सकीय, नर्सिंग, बिलिंग एवं प्रशासनिक स्टाफ को योजना के सभी नियमों और दंडात्मक प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी हो। चिकित्सालयों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से अपने क्लेम, उपचार प्रक्रिया, दस्तावेजीकरण एवं लाभार्थी सेवाओं की आंतरिक समीक्षा करें और किसी भी संभावित अनियमितता को समय रहते ठीक करें। लाभार्थी से अवैध राशि लेना, बिना उपचार के क्लेम करना, अनावश्यक उपचार या प्रक्रियाएं करना, गलत लाभार्थी के नाम पर उपचार दर्ज करना अथवा योजना के मानकों का उल्लंघन न केवल योजना के नियमों के विरुद्ध है, बल्कि इसके लिए निर्धारित दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।