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  • CG बाल आयोग की बड़ी उपलब्धि, ‘रक्षक’ को गोल्ड अवार्ड

    CG बाल आयोग की बड़ी उपलब्धि, ‘रक्षक’ को गोल्ड अवार्ड

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। आयोग के अभिनव नवाचार ‘रक्षक’ कार्यक्रम को देश के प्रतिष्ठित SKOCH गोल्डन अवार्ड से सम्मानित किया गया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में यह सम्मान प्राप्त हुआ है।

    बाल अधिकारों के क्षेत्र में यह पुरस्कार पाने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है। इस उपलब्धि पर आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि अवार्ड के लिए चयन प्रक्रिया काफी कठोर थी। सर्वप्रथम आयोग की ओर से जूरी के समक्ष ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसके बाद कड़े परीक्षण के उपरांत इसे गोल्ड श्रेणी के लिए चुना गया है। SKOCH गोल्डन अवार्ड प्रसिद्ध पर्यावरणविद सुनीता नारायण, पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की पूनम मुटरेजा, भारत सरकार के पूर्व सचिव संजय कुमार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व महासचिव भरत लाल की गरिमामयी उपस्थिति में SKOCH ग्रुप के चेयरमैन समीर कोचर द्वारा प्रदान किया गया।

    SKOCH अवार्ड क्या है?
    SKOCH ग्रुप 1997 से कार्यरत देश का एक प्रमुख स्वतंत्र थिंक-टैंक है। यह वर्ष 2003 से सुशासन, डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक सुधारों में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्रदान करता है, जिसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिना जाता है।

    क्या है ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम?
    ‘रक्षक’ का पूरा नाम Post Graduation Diploma in Protection of Child Rights (PGDPCR) है। यह एक वर्षीय (2 सेमेस्टर) डिप्लोमा कोर्स है, जिसकी न्यूनतम योग्यता स्नातक है। डॉ. वर्णिका शर्मा ने बताया कि बाल संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी को देखते हुए यह पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका प्रैक्टिकल मॉडल है।

    छात्र केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं लेंगे, बल्कि आयोग की संवाद इकाइयों के माध्यम से बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, चाइल्ड केयर संस्थानों और स्वैच्छिक संगठनों के साथ सीधे जुड़कर फील्ड वर्क, केस स्टडी और प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर कार्य करेंगे। पाठ्यक्रम में पॉक्सो एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम 2015, बाल विवाह एवं बाल श्रम प्रतिषेध, दत्तक ग्रहण कानून, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और पुनर्वास योजनाओं जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। यह पाठ्यक्रम प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में उनके बोर्ड/परिषद की अनुमति से प्रारंभ किया जा रहा है। इससे युवाओं के लिए बाल संरक्षण, काउंसलिंग और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

  • भवभूति अलंकरण से सम्मानित होंगे गिरधर राठी और राजेन्द्र दानी

    भवभूति अलंकरण से सम्मानित होंगे गिरधर राठी और राजेन्द्र दानी

    भोपाल
     नर्मदापुरम जिले के पिपरिया में जन्मे प्रख्यात कवि, संपादक,अनुवादक और मानवाधिकार कार्यकर्ता गिरधर राठी तथा जबलपुर निवासी वरिष्ठ कथाकार एवं संपादक राजेन्द्र दानी को वर्ष 2026 का मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन का प्रतिष्ठित भवभूति अलंकरण प्रदान किया जाएगा। अलंकरण के लिए गठित निर्णायक मण्डल में वरिष्ठ साहित्यकार सत्यमोहन वर्मा, रामप्रकाश त्रिपाठी तथा प्रो इकबाल मसूद शामिल थे। 

    राठी साहित्य अकादमी की हिन्दी पत्रिका समकालीन भारतीय साहित्य (1992-2003) और प्रतिपक्ष के संपादक रह चुके हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पत्रिका अल्टरनेटिव्स (1978-1991) के प्रबंध संपादक और चाइना रिपोर्ट और जनयुग के संपादकीय सहायक का दायित्व भी निभाया है। उनके तीन काव्य संग्रह, एक यात्रा वृत्तांत और आलोचना की दो पुस्तकें  प्रकाशित हैं।उन्होंने डेनियल वेइसबोर्ट के साथ 'सर्वाइवल : एन एक्सपीरियंस एंड एन एक्सपेरिमेंट इन ट्रांसलेटिंग मॉडर्न हिन्दी पोएट्री' का सह-संपादन किया है। अनेक भारतीय तथा विदेशी कवियों की रचनाओं का अनुवाद भी राठी ने किया है। वे एमनेस्टी इंटरनेशनल की भारत शाखा के सचिव भी रहे हैं। गिरधर राठी, ओमप्रकाश साहित्य सम्मान तथा कृष्णा सोबती की जीवनी पर आधारित पुस्तक 'दूसरा जीवन' के लिए रज़ा फैलोशिप से सम्मानित हैं। 

    दूसरी ओर राजनांदगांव में जन्मे और लगभग चालीस वर्षों से कथा-लेखन में अनवरत सक्रिय शीर्षस्थ कथाकार राजेन्द्र दानी वर्गीय चेतना और प्रगतिशील-जनवादी मूल्यों के साथ गहरी प्रतिबद्धता के लिये जाने जाते हैं। वे लंबे समय तक हिन्दी कथा साहित्य की महत्वपूर्ण पत्रिका 'पहल' के सम्पादन से जुड़े रहे। उनके 17 कहानी संग्रह, दो उपन्यास और कथेतर गद्य की एक पुस्तक प्रकाशित है। विगत 4 वर्षों से वे साहित्यिक पत्रिका अन्विति का सम्पादन और प्रकाशन कर रहे हैं। उन्हें मप्र शासन के अखिल भारतीय मुक्तिबोध सम्मान सहित अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

  • ‘सुयशक्ति’ पुरस्कार से महिला उद्यमियों को किया गया सम्मानित और प्रोत्साहित

    ‘सुयशक्ति’ पुरस्कार से महिला उद्यमियों को किया गया सम्मानित और प्रोत्साहित

    ​चेन्नई

    महिला उद्यमियों और उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को पहचान देने और उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, शक्ति मसाला पिछले नौ वर्षों से प्रतिष्ठित ‘सुयशक्ति’ पुरस्कार प्रदान करता आ रहा है। इसी पहल के तहत, इस वर्ष का पुरस्कार समारोह चेन्नई के चेटपट स्थिति आंडाल ऑडिटोरियम में भव्य रूप से आयोजित किया गया।​शक्ति मसाला द्वारा आयोजित इस पुरस्कार समारोह में तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा मंत्री राजमोहन और वित्त मंत्री मारिया विल्सन ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर सांसद प्रवीण चक्रवर्ती और प्रसिद्ध अभिनेता सूरी भी उपस्थित रहे।

    ​कार्यक्रम की अध्यक्षता शक्ति मसाला के संस्थापक पी.सी. दुरैसामी और निदेशक शांति दुरैसामी ने की। इस कार्यक्रम में विधायक सौम्या अन्बुमणि और अभिनेत्री उर्वशी सहित कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। शिक्षा, साहित्य, समाज सेवा, खाद्य, कला और संस्कृति जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को ‘सुयशक्ति’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

    ​समारोह को संबोधित करते हुए विधायक सौम्या अन्बुमणि ने कहा कि उनके मायके और ससुराल दोनों की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है। डॉ. अन्बुमणि रामदास के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के रूप में कार्यकाल के दौरान की गई पहलों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सांप के काटने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे।

    ​उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उसी अवधि के दौरान 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई थी और सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-स्नेक वेनम (सांप के जहर की दवा) की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए थे।
    ​उन्होंने कहा, "मुझे धर्मपुरी के हर गांव का दौरा करना और लोगों से मिलना बहुत पसंद है। लोग ही मेरी प्रेरणा हैं। उन्हें देखकर मुझे खुशी होती है, और मुझे विश्वास है कि जब वे मुझे देखते हैं तो वे भी खुश होते हैं।"

    ​शक्ति मसाला के संस्थापक पी.सी. दुरैसामी ने अपने संबोधन में सौम्या अन्बुमणि के व्यक्तित्व और बात करने की शैली की सराहना की।
    ​उन्होंने कहा, "सौम्या अन्बुमणि के भाषण रचनात्मक और सटीक होते हैं। वह एक उत्कृष्ट व्यक्तित्व के रूप में उभरी हैं। डॉ. अन्बुमणि रामदास इस कहावत का एक बेहतरीन उदाहरण हैं कि हर सफल महिला के पीछे एक पुरुष का हाथ होता है। मैं भी इसका एक उदाहरण हूँ।"​विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित और प्रोत्साहित करने वाले इस पुरस्कार समारोह को प्रतिभागियों और अतिथियों से काफी उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली।