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  • रूसी सेना में फंसे भारतीयों के लिए राहत की खबर, 140 की हुई वापसी; 55 नागरिक अब भी वहां

    रूसी सेना में फंसे भारतीयों के लिए राहत की खबर, 140 की हुई वापसी; 55 नागरिक अब भी वहां

    नई दिल्ली
     भारत-रूस के बीच सलाहकार समिति की बैठक हुई है। इस बैठक के बाद सामने आई जानकारी से पता चला है कि रूसी सेना में भर्ती किए गए लगभग 140 भारतीय नागरिकों को सेवा से मुक्त कर दिया गया है। वहीं भारत रूसी सशस्त्र बलों में सेवा कर रहे अन्य 55 लोगों के बारे में जानकारी मांग रहा है।

    एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने ऐसे सभी लोगों को जल्द से जल्द सेवा से मुक्त कराने के लिए रूसी अधिकारियों से बातचीत की है।

    भारत-रूस के बीच सलाहकार समिति की बैठक
    बैठक की जानकारी में कहा गया, 'भारत सरकार ने ऐसे सभी लोगों को जल्द से जल्द सेवा से मुक्त कराने के लिए रूसी अधिकारियों के साथ, उच्चतम स्तर पर भी, बातचीत की है। अब तक, लगभग 140 भारतीय नागरिकों को सेवा से मुक्त किया जा चुका है।'

    बैठक में आगे बताया गया, 'भारतीय पक्ष रूसी सेना में कथित तौर पर मौजूद 55 भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी के लिए रूसी अधिकारियों के संपर्क में है। भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां बेईमान एजेंटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही हैं।'

    विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने पिछले महीने ये ताजा आंकड़े साझा किए थे। उस समय, मिसरी ने कहा था कि रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किए गए 227 भारतीय नागरिकों में से 139 को सेवा से मुक्त कर दिया गया था, जबकि 51 की मौत हो गई थी।

    विदेश सचिव मिसरी ने कहा कि यह मुद्दा रूस के साथ अलग-अलग मौकों पर अलग-अलग स्तरों पर उठाया गया था। मिसरी ने कहा था, 'आखिरी गिनती के अनुसार, हमारे पास रूसी सेना में भर्ती किए गए 227 भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी थी। उनमें से, हमारे पास जानकारी है कि हमारे 139 नागरिकों को सेना से मुक्त कर दिया गया है।'

    विदेश सचिव ने आगे बताया था, 'दुर्भाग्य से, हमारे पास उन 51 लोगों के बारे में भी जानकारी है जिनकी अब तक मौत हो चुकी है। भारत अभी भी सेवा कर रहे लोगों की जल्द रिहाई और वापसी सुनिश्चित करने के लिए मॉस्को के साथ लगातार बातचीत कर रहा है।'

  • सऊदी-अरब में हूतियों के खिलाफ जंग की तैयारी तेज, 30-40 हजार पाकिस्तानी सैनिक तैनात होने की रिपोर्ट

    सऊदी-अरब में हूतियों के खिलाफ जंग की तैयारी तेज, 30-40 हजार पाकिस्तानी सैनिक तैनात होने की रिपोर्ट

    दुबई 

    दुनिया के तेल और व्यापार की सप्लाई पर दोहरी चोट लगी है. एक तरफ ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद है, तो दूसरी तरफ यमन में हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट पर कब्जा कर लिया है. दुनिया के समुद्री व्यापार के इन दोनों अहम रास्तों पर संकट के बीच सऊदी अरब ने हूतियों पर हमले की तैयारी शुरू कर दी है. सऊदी अपने लोगों को इस जंग में नहीं भेजेगा. इस ऑपरेशन में यमन की एक लाख से ज्यादा सैनिकों वाली सेना को मैदान में उतारा जा सकता है, जबकि सऊदी अरब हवाई हमलों से उनका साथ देगा. इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी बढ़ गई है. उसने सऊदी अरब में 30 से 40 हजार सैनिक तैनात किए हैं और सैन्य उपकरणों के साथ सलाहकार भी भेजे हैं. हालांकि कहा जा रहा है कि ये सैनिक सऊदी की रक्षा के लिए हैं. सऊदी के इस अटैक प्लान से पहले खबर आई थी कि अमेरिका ने अपनी कई पैट्रियट मिसाइलों को सऊदी और कतर के तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा में तैनात किया है। 

    सऊदी अरब का क्या है प्लान?
    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब हूतियों के खिलाफ हमले के दो विकल्पों पर विचार कर रहा है. पहला विकल्प बाब-अल-मंदेब के आसपास के तटीय इलाकों को हूतियों से वापस लेने का है. दूसरा विकल्प यमन के कई मोर्चों पर एक साथ हमला करने का है. इसमें अल-बायदा, मारिब, ताइज और अल-जौफ जैसे इलाके शामिल हो सकते हैं. इस हमले की टाइमिंग फिक्स नहीं है, लेकिन आने वाले कुछ हफ्तों में शुरू किया जा सकता है. हालांकि, इसकी तारीख को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं. कुछ सूत्रों का कहना है कि हमला एक हफ्ते के भीतर शुरू हो सकता है, जबकि कुछ का मानना है कि अमेरिका के नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों के बाद ही सैन्य कार्रवाई हो सकती है। 

    1 लाख सैनिक कर सकते हैं हमला
    रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब इस बार सीधे बड़े जमीनी अभियान के बजाय यमनी सैनिकों को आगे रखकर ऑपरेशन चलाने की तैयारी कर रहा है. इस अभियान में 1 लाख से ज्यादा यमनी सैनिकों को जुटाया जा सकता है. हालांकि, सैनिकों की संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि हमले का दायरा कितना बड़ा रखा जाता है. जमीन पर यमनी सेना हूतियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी, जबकि सऊदी अरब हवाई हमलों के जरिए समर्थन देगा. इस तरह ऑपरेशन की कमान सऊदी के समर्थन वाले यमनी बलों के हाथ में होगी और रियाद उन्हें सैन्य मदद देगा। 

    अमेरिका भी इस अभियान में सऊदी अरब की मदद कर रहा है. वह खुफिया जानकारी और टारगेट से जुड़ी सूचनाएं उपलब्ध करा रहा है. इससे पहले उसने उसकी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पैट्रियट एयर डिफेंस तैनात किए हैं. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सीधे सैन्य मदद और हवाई हमलों की मांग को पहले ठुकरा दिया था। 

    समंदर के दो बड़े दरवाजे बंद
    इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा पहलू समुद्री व्यापार के दो अहम रास्तों का संकट में आना है. होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान युद्ध के कारण लगभग बंद है. ऐसे में दुनिया की नजर बाब-अल-मंदेब पर टिक गई है, जो लाल सागर का दक्षिणी प्रवेश मार्ग है. बाब-अल-मंदेब भूमध्य सागर और एशिया के बीच समुद्री व्यापार का बेहद अहम रास्ता है. होर्मुज में आवाजाही बाधित होने के बाद इसकी अहमियत और बढ़ गई है. अब हूतियों के इस इलाके पर नियंत्रण से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर दबाव बढ़ने का खतरा है. सऊदी अरब का मानना है कि जब तक हूतियों के हाथ में बाब-अल-मंदेब का नियंत्रण रहेगा, तब तक उनके साथ शांति वार्ता की नई प्रक्रिया शुरू करना मुश्किल होगा. इसकी वजह यह है कि इस समुद्री रास्ते पर नियंत्रण हूतियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा दबाव बनाने की ताकत देता है। 

    पाकिस्तान के 30-40 हजार सैनिक सऊदी अरब में तैनात
    इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है. सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने हाल ही में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसके बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब को सैन्य उपकरणों और सलाहकारों के जरिए मदद दी है. रॉयटर्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने पिछले महीने चार कार्गो विमान अदन भेजे थे. इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, छोटी तोपें, ड्रोन और एंटी ड्रोन सिस्टम शामिल थे. अदन यमन की सऊदी समर्थित सरकार का मुख्य केंद्र है. इसके अलावा, पाकिस्तानी सैन्य सलाहकार सऊदी अधिकारियों के साथ मिलकर यमनी बलों की मदद कर रहे हैं. रिपोर्ट में एक पाकिस्तानी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब में 30 हजार से 40 हजार सैनिक तैनात किए हैं. ये सैनिक सऊदी अरब की जमीनी सीमाओं की सुरक्षा और ड्रोन-मिसाइल हमलों को रोकने में मदद कर रहे हैं. इनकी तैनाती पिछले साल से अलग-अलग चरणों में हुई है और हालिया तनाव के बाद भी सैनिक पहुंचे हैं। 

    सऊदी के सामने क्या है दिक्कत?
    सऊदी अरब के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह भी है कि यमन में हूतियों के खिलाफ लड़ने वाले सभी गुट एकजुट नहीं हैं. पहले गृहयुद्ध के दौरान सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने अलग-अलग यमनी लड़ाकू गुटों को हथियार और ट्रेनिंग दी थी. पिछली सर्दियों में यमन के दक्षिणी हिस्से में UAE समर्थित लड़ाकों ने पूर्वी इलाकों पर कब्जा करने और अलग देश बनाने की योजना का ऐलान किया था. इसके बाद सऊदी समर्थित लड़ाकों के साथ उनकी झड़पें हुईं और अंत में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. यमन मामलों के जानकार मोहम्मद अलबाशा के मुताबिक, हूतियों के खिलाफ लड़ने वाले कई गुट अभी भी बड़े और लंबे सैन्य अभियान के लिए तैयार नहीं हैं. दूसरी तरफ हूती कई मोर्चों पर दबाव बनाने की क्षमता रखते हैं। 

  • बडगाम में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, मुठभेड़ में लश्कर कमांडर मूसा ढेर

    बडगाम में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, मुठभेड़ में लश्कर कमांडर मूसा ढेर

    बडगाम 

     मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के ऊंचाई वाले इलाके में राष्ट्रीय राइफल्स के साथ मुठभेड़ में एक आतंकी का एनकाउंटर किया गया। मारा गया आतंकी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का एक सबसे वांछित आतंकवादी थी। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि कश्मीर स्थित चिनार कोर ने मारे गए आतंकवादी की पहचान का खुलासा नहीं किया, लेकिन अधिकारियों ने उसकी पहचान सुलेमान शाह उर्फ ‘मूसा’ के रूप में की।

    सेना ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि उसने अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर मध्य कश्मीर के कोराग, यूसमर्ग के सामान्य क्षेत्र में अभियान शुरू किया था।सेना ने कहा, 'सतर्क जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद भीषण गोलीबारी हुई, जिसमें एक आतंकवादी को मार गिराया गया।'

    यूसमर्ग की पहाड़ियों में हुई मुठभेड़ में भाग निकला था मूसा
    अधिकारियों ने बताया कि अभियान अभी जारी है और इस दौरान वन क्षेत्र दूधपथरी में हुई मुठभेड़ में ‘मूसा’ मारा गया। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से पीर पंजाल पर्वतमाला के दोनों ओर हुए कई हमलों में शामिल होने के कारण वांछित मूसा इस महीने की शुरुआत में यूसमर्ग की पहाड़ियों में हुई मुठभेड़ से बच निकला था।

    यासिर का साथी था मूसा
    सूत्रों ने यह भी बताया है कि मूसा, लश्कर के आतंकवादी यासिर का साथी था. यासिर को इसी महीने की शुरुआत में (4 सितंबर को) ऊंचे पहाड़ों पर 13 दिन तक चले ऑपरेशन के बाद यूसमर्ग के पास के इलाके में मार गिराया गया था। 

    पुलिस और सुरक्षा रिकॉर्ड के अनुसार, यासिर एक 'हाई-वैल्यू टारगेट' था और उस पर इलाके में कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल होने का आरोप था, जिनमें पुंछ में IAF काफिले पर हमला और सोनमर्ग, बोटा पाथरी और भट्टा डुरियन में हुए हमले शामिल हैं। 

    यासिर के मारे जाने के बाद से अलर्ट
    यासिर के एनकाउंटर के बाद, सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर थे और उसके साथ यात्रा कर रहे अन्य साथियों का पता लगाने के लिए घने पीर पंजाल जंगलों में तलाशी अभियान जारी रखे हुए थे। 

    J&K पुलिस के मुताबिक, यह मुठभेड़ तब हुई जब सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम ने इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की पक्की जानकारी मिलने के बाद घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाया। 

    अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही बल उस संदिग्ध जगह पर पहुंचे, छिपे हुए आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिससे मुठभेड़ शुरू हो गई. सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में एक अज्ञात आतंकवादी मारा गया और ऑपरेशन अभी भी जारी है। 

    भारतीय सेना की श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने एक्स पर लिखा, "खुफिया जानकारी के आधार पर, भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने यूसमर्ग के कोराग इलाके में एक संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। 

    उन्होंने लिखा, ''सतर्क जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती देने पर आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिससे ज़बरदस्त गोलीबारी हुई और इस दौरान एक आतंकवादी को मार गिराया गया। 

    करीबी सहयोगी का पहले हो चुका एनकाउंटर
    अधिकारियों के अनुसार, उसका करीबी सहयोगी यासिर पांच सितंबर को हुई उस मुठभेड़ में मारा गया था। अधिकारियों ने कहा कि मूसा का मारा जाना जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

    CRPF और BSF ने चलाया था अभियान
    अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध गतिविधियों की खबरों के बाद मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के राजौरी, पुंछ और कठुआ ज़िलों में लगभग एक दर्जन जगहों पर सुरक्षा बलों ने तलाशी अभियान शुरू किया है। इन तीनों जिलों के दूर-दराज़ और जंगली इलाकों में जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना, CRPF और BSF मिलकर तलाशी अभियान चला रहे हैं।

    राजौरी में कालाकोट के पीर खाना, पोथा नरोटा और अंध गांवों में, और सुंदरबनी के ठंडा पानी और कंसार में तलाशी की गई। कठुआ में सुरक्षा बल पंजवारी, कठेरा और आस-पास के इलाकों में तलाशी ली पुंछ में, यह अभियान मेंढर सेक्टर के अपर कसबलारी, थेराटोपा, नागल गली, कालाबन और पटनातीर इलाकों में चलाया गया।

    ऑपरेशन जारी रहने के दौरान अधिकारियों ने कहा कि गोलीबारी के दौरान दूधपथरी के दूर के जंगल वाले इलाके में ‘मूसा’ मारा गया. अधिकारियों ने बताया कि मूसा पिछले कई सालों में पीर पंजाल रेंज के दोनों तरफ हुए कई हमलों में शामिल होने के लिए वॉन्टेड था। 

    इस महीने की शुरुआत में यूसमर्ग पहाड़ियों में हुए एक एनकाउंटर से वह बच निकला था. उसका करीबी यासिर 5 सितंबर को उस एनकाउंटर में मारा गया था. अधिकारियों ने कहा कि मूसा का मारा जाना जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। 

  • कश्मीर में आतंक के खिलाफ बड़ा एक्शन, पाकिस्तानी लश्कर कमांडर यासिर मारा गया

    कश्मीर में आतंक के खिलाफ बड़ा एक्शन, पाकिस्तानी लश्कर कमांडर यासिर मारा गया

    श्रीनगर

    यूसमर्ग में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई. संयुक्त बलों के साथ हुई इस मुठभेड़ में पाकिस्तानी लश्कर कमांडर यासिर मारा गया. सूत्रों के मुताबिक, मुठभेड़ में मारा गया लश्कर कमांडर यासिर पहले सुलेमान मूसा के बड़े लश्कर ग्रुप का हिस्सा था. हालांकि, करीब एक साल पहले वह इस ग्रुप से अलग हो गया था। सुरक्षाबलों ने जिस आतंकी को मार गिराया था, उसकी पहचान यासिर के रूप में हुई है। यासिर पाकिस्तान का नागरिक था और प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से जुड़ा हुआ था।

    सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन अशदर के तहत कार्रवाई करते हुए आतंकी को मार गिराया। उसकी पहचान सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां उसके नेटवर्क और गतिविधियों से जुड़ी अन्य जानकारियां जुटाने में लगी हैं।

    आतंकी नेटवर्क पर सुरक्षा बलों की नजर
    इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की मुहिम में अहम सफलता माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इलाके में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और उनके मददगारों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    यूसमर्ग में ऑपरेशन अशदर के दूसरे दिन सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई
    पिछले दो दिनों से चल रहा आतंकवाद के खिलाफ अभियान में सुरक्षाबलों को मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग में शुक्रवार को बड़ी सफलता मिली। सेना और पुलिस ने अशदर गली के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में जारी मुठभेड़ के दूसरे दिन ऑपरेशन अशदर के तहत एक आतंकी को मार गिराया। उसके कब्जे से एके-47 राइफल और अन्य युद्ध सामग्री बरामद की गई है।

    सुरक्षाबलों को इलाके में चार से पांच और आतंकियों के छिपे होने की आशंका है। जंगल व पहाड़ी क्षेत्र में उनकी तलाश के लिए घेराबंदी जारी है। सेना की चिनार कोर के अनुसार, सटीक खुफिया सूचना पर अशदर गली क्षेत्र में आतंकियों की तलाश के लिए संयुक्त अभियान चलाया जा रहा था।यह क्षेत्र यूसमर्ग के दूधपथरी से करीब आठ घंटे की कठिन पैदल चढ़ाई वाला है। सेना की 53 राष्ट्रीय राइफल्स, 10 पैरा कमांडो, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) की टीमें बुधवार से ही इस इलाके में आतंकियों की तलाश में जुटी थीं। वीरवार को जंगल में संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर जवानों ने आतंकियों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी। इसके जवाब में आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी।

    सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। दोनों पक्षों के बीच भीषण गोलीबारी के बाद आतंकी घने जंगल में छिप गए। शुक्रवार सुबह अभियान दोबारा तेज किया गया और मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया। मारे गए आतंकी की अभी पहचान नहीं हो पाई है। सूत्रों के अनुसार, उसके पाकिस्तानी होने की आशंका है। साथ ही लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े होने की बात भी सामने आ रही है। वहीं, कश्मीर जोन के आईजीपी सुजीत कुमार भी मुठभेड़ स्थल के पास पहुंचे और अभियान का जायजा लिया।

    यासिर की गतिविधियों का पता यूसमर्ग के ऊपरी इलाकों में चलने के बाद संयुक्त बलों ने ऑपरेशन चलाया. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, सुलेमान उर्फ मूसा उस लश्कर ग्रुप का सदस्य था, मूसा पिछले साल श्रीनगर के डाचीगाम जंगल इलाके में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। 

    रात में घेरे के भीतर ही छिप गए थे आतंकी
    रक्षा सूत्रों के अनुसार, कुछ देर की गोलीबारी के बाद आतंकी घने जंगल और रात के अंधेरे का फायदा उठाकर घेरे के भीतर ही छिप गए। रात में दृश्यता कम होने के कारण सुरक्षाबलों ने जंगल से बाहर निकलने के संभावित रास्तों को सील कर घेराबंदी बनाए रखी। शुक्रवार सुबह रोशनी होते ही तलाशी अभियान को फिर से चलाया और एक आतंकी ढेर कर दिया।

    आतंकियों के खात्मे के लिए स्निफर डॉग्स भी लगाए
    सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ में शामिल आतंकियों की संख्या चार से पांच हो सकती है। आशंका है कि आतंकियों का यह गुट पीर पंजाल की ऊंची पहाड़ियों के रास्ते दक्षिण कश्मीर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा था। घने जंगलों, प्राकृतिक गुफाओं और खड़ी चट्टानों वाले इस इलाके में अन्य आतंकियों के छिपे होने की आशंका को देखते हुए सुरक्षाबलों ने तलाशी अभियान तेज कर दिया है। आतंकियों की मौजूदगी को पूरी तरह खत्म करने के लिए स्निफर डॉग्स और आधुनिक उपकरणों की मदद से जंगल में अभियान जारी है।

    लेफ्टिनेंट जनरल ने चिनार कोर की कार्रवाई को सराहा
    नॉर्दर्न कमांड के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने अशदर गली इलाके में एक आतंकी को मार गिराने की त्वरित व सटीक कार्रवाई के लिए चिनार कोर की सराहना की। नॉर्दर्न कमांड ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वह जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद मुक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    स्थानीय सूत्रों ने दो आतंकियों के मारे जाने का दावा किया है, लेकिन रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, मुठभेड़स्थल से अभी तक एक ही आतंकी का शव, एक एसाल्ट राइफल व अन्य युद्धक सामग्री मिली है। जब तक दूसरे आतंकी का शव नही मिल जाता उसके मारे जाने की पुष्टि नहीं हो सकती। प्रवक्ता ने बताया कि मारे गए आतंकियों के वहीं आस पास छिने होने की संभावना को देखते हुए अभियान को जारी रखा गया है।

    ऊपरी युसमर्ग पीर पंजाल पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है और घने जंगलों तथा दुर्गम पहाड़ी भूभाग के कारण सुरक्षा अभियानों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। युसमर्ग एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इसे पर्यटकों के लिए बंद किया गया था। यहां से राजौरी-पुंछ क्षेत्र की ओर जाने वाले मार्ग भी निकलते हैं।

    सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके में घेराबंदी और तलाशी बढ़ा दी है। अधिकारियों के अनुसार, अभियान पूरा होने के बाद ही मारे गए आतंकी की पहचान और अन्य विवरण साझा किए जाएंगे।

     

     

  • 286 दिन बाद Pattaya में US सैनिकों की एंट्री, Parasailing से Cannabis तक इन चीजों की इजाजत नहीं

    286 दिन बाद Pattaya में US सैनिकों की एंट्री, Parasailing से Cannabis तक इन चीजों की इजाजत नहीं

    पटाया 
    मिडिल ईस्ट में लंबे और मुश्किल मिशन के बाद USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर बुधवार सुबह आखिरकार थाईलैंड पहुंच गया. पश्चिम एशिया के समंदर में 200 दिन गुजारने के बाद ये अमेरिकी सैनिकों के लिए राहत और रिलैक्स होने की बात है. इस जहाज से लगभग 5000 अमेरिकी सैनिक थाइलैंड पहुंचे हैं. इन सैनिकों का ठिकाना थाईलैंड का पटाया शहर है. ये सैनिक यहां रिलैक्स और रिफ्रेश तो हो सकते हैं, लेकिन यहां इन पर कई तरह की रोक रहेगी।

    थाइलैंड के अखबार बंकॉक पोस्ट के अनुसार हजारों सैनिकों के आने से पास के रिज़ॉर्ट शहर पटाया में आर्थिक तेज़ी की उम्मीदें जगी हैं. यह शहर लंबे समय से सेक्स टूरिज़्म डेस्टिनेशन के तौर पर भी जाना जाता है। 

    पटाया के मेयर पोरामासे न्गाम्पिचेस ने बताया कि लगभग 40 बसों का एक बेड़ा सैनिकों को पटाया और लैम चाबांग बंदरगाह के बीच ले जाएगा, जहां जहाज रुकेंगे। 

    द नेशन ने थाई अधिकारियों के अनुसार बताया है कि समुद्र में 200 से ज़्यादा दिन बिताने के बाद लगभग 5,000 नाविकों और मरीन को आराम करने और तरोताज़ा होने के लिए किनारे पर आने की छुट्टी (शोर लीव) दी जाएगी। 

    पटाया के मेयर पोरामासे नगाम्पिचेस का अनुमान है कि थाईलैंड में अमेरिकी सैनिकों की इस भीड़ से होटलों, रेस्तरां, बार, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों, खुदरा विक्रेताओं और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों को फ़ायदा होने की उम्मीद है। 

    टूरिज्म एसोसिएशन के अनुसार पटाया में रहने की जगह के बाज़ार में 3,00,000 से ज़्यादा कमरे उपलब्ध हैं। 

    पटाया में ये काम नहीं कर पाएंगे अमेरिकी सैनिक
    पटाया में ये सैनिक आराम और रिफ्रेश तो कर पाएंगे, लेकिन इन पर कुछ प्रतिबंध भी होंगे। 

    अमेरिकी सैनिकों को होटलों में रात बिताने या अपने जहाज़ों पर लौटने की इजाज़त होगी. लेकिन उन्हें कुछ टूरिस्ट गतिविधियों में हिस्सा लेने की इजाज़त नहीं होगी. जैसे ये सैनिक जेट स्की राइडिंग और पैरासेलिंग जैसे वॉटरस्पोर्ट्स में शामिल नहीं हो पाएंगे. इसके अलावा ये सैनिक पटाया में गांजे का भी सेवन नहीं कर पाएंगे। 

    थाईलैंड में हाल की घटनाओं के बाद गांजे से जुड़ी नीति में बदलाव दिख रहा है. वहां का जन स्वास्थ्य मंत्रालय भांग के इस्तेमाल को सिर्फ़ मेडिकल मक़सद तक सीमित करने की दिशा में कदम उठा रहा है। 

    इधर अमेरिकी सैनिकों की आमद के बाद पटाया में टूरिस्ट पुलिस की गश्त बढ़ाई गई है. सर्विलांस कैमरों की जांच की जा रही है और हॉटलाइन 1155 मदद के लिए तैयार है. मेयर ने कहा कि स्थानीय कारोबारियों को पर्यटकों से ज़्यादा पैसे न लेने के लिए कहा गया  है। 

    सोमवार को पटाया के मेयर के सेक्रेटरी बांचा कुल्लावानिच और असिस्टेंट मेयर कियातिसाक श्रीवोंगचाई ने अमेरिकी नौसेना के प्रतिनिधियों के साथ सुरक्षा उपायों पर चर्चा की। 

    बैठक में यह तय हुआ कि नाविक पटाया वॉकिंग स्ट्रीट जा सकते हैं, लेकिन उन्हें रात 2 बजे तक वह इलाका छोड़ना होगा। 

    अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि पटाया में वेश्यावृत्ति गैर-कानूनी है। 
    बता दें कि आमतौर पर अमेरिकी नौसैनिक तैनाती छह से नौ महीने के लिए होती है, लेकिन संघर्ष के समय इसे बढ़ाया जा सकता है. ईरान वॉर के समय ये सैनिक 200 दिनों से पश्चिम एशिया के समंदर में तैनात थे। 

  • भोपाल में सेना का शक्ति प्रदर्शन, टैंक-हेलीकॉप्टर संग दिखेगा मिलिट्री कॉम्बेट

    भोपाल में सेना का शक्ति प्रदर्शन, टैंक-हेलीकॉप्टर संग दिखेगा मिलिट्री कॉम्बेट

    भोपाल 
     मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में जल्द ही भारतीय सेना के टैंकों और हेलीकॉप्टर्स की गर्जना सुनाई देगी. इसी के साथ सेना का शौर्य भी देखने मिलेगा. दरअसल, आगामी 15 जनवरी को भारतीय सेना के टैंक, हेलीकॉप्टर से लेकर मिलिट्री का कॉम्बेट डेमो भोपाल में दिखाया जाएगा. दरअसल, भारतीय सेना द्वारा, '' आपकी सेना-आपके पास'' कार्यक्रम के तहत शौर्य प्रदर्शन भोपाल में किया जाना है. इसे लेकर भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने भारतीय सेना के अधिकारियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ तैयारियां शुरू कर दी हैं। 

    जम्बूरी मैदान में दिखेंगे भारतीय सेना के टैंक
    कर्नल सुब्रत मिश्रा ने बताया, '' राजधानी भोपाल में मुख्य आर्मी डे परेड भेल के कालीबाड़ी मार्ग पर आयोजित होगा. टीटी नगर स्टेडियम में देशभक्ति को जगानेवाले भव्य शौर्य संध्या का आयोजन किया जाएगा. शहर के जम्बूरी मैदान में भारतीय सेना के आधुनिक सैन्य उपकरणों का स्टेटिक और डायनेमिक प्रदर्शन किया जाएगा. इसके अलावा बोट क्लब पर सेना के शौर्य, सामरिक क्षमता और रणनीतिक कौशल को दिखाने के लिए इंटीग्रटेड कॉम्बेट डिस्प्ले का आयोजन किया जाएगा। 

    सेना के टैंकों के लिए मैदान होगा दुरूस्त
    उधर सेना के इस अद्भुत कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी है. भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बैठक बुलाकर अधिकारियों को इसकी तैयारियों में जुटने के निर्देश दिए हैं. भारतीय सेना के सिविल इंजीनियर विशेषज्ञ पवन कुमार ने कहा, '' परेड मैदान को इस तरह से तैयार किया जाएगा जिससे मैदान सेना के टैंकों का वजन सह सके. इसके लिए परेड मैदान को सेना के टैंक व गाइडलाइन के हिसाब से तैयार करने के लिए लोक निर्माण विभाग, नगर निगम और अन्य निर्माण एजेंसियों के साथ तकनीकि मानकों पर चर्चा की गई है। 

    सेना के कार्यक्रम को लेकर लोगों में उत्साह
    उधर भारतीय सेना के इस कार्यक्रम को लेकर लोगों का जबर्दस्त उत्साह दिखाई देगा. भोपाल में 30 सितंबर 2023 को भारतीय वायुसेना का भव्य एयर शो और फ्लाईपास्ट का आयोजन किया जा चुका है, इसे देखने के लिए लोगों ने जबरदस्त उत्साह दिखाया था. वहीं, इस कार्यक्रम में भारतीय वायु सेना के 65 फाइटर प्लेन और दूसरे विमानों ने शानदार करतब दिखाए थे. इसमें सुखोई, मिराज, जगुआर और एलसीए तेजस जैसे फाइटर प्लेन शामिल होंगे। 

  • आर्मी डे पर भोपाल में होगा सैन्य शक्ति का भव्य प्रदर्शन, पहली बार सड़कों पर दौड़ेंगे लड़ाकू टैंक

    आर्मी डे पर भोपाल में होगा सैन्य शक्ति का भव्य प्रदर्शन, पहली बार सड़कों पर दौड़ेंगे लड़ाकू टैंक

    भोपाल 

     भोपालवासियों के लिए यह बेहद गौरव का क्षण होने वाला है, क्योंकि 15 जनवरी 2027 को 'आर्मी डे' (सेना दिवस) के मौके पर पहली बार शहर की सड़कों पर भारतीय सेना के लड़ाकू टैंक अपना शौर्य प्रदर्शित करेंगे। इस ऐतिहासिक परेड के गवाह करीब 50 हजार दर्शक बनेंगे।

    खास बात यह है कि सेना के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब 'आर्मी डे' की परेड किसी सैन्य छावनी (केंटोनमेंट) तक सीमित न रहकर किसी सार्वजनिक क्षेत्र में आयोजित की जा रही है। इस आयोजन के लिए भोपाल शहर का चयन इसी साल मार्च में ही कर लिया गया था।

    टैंकों का भार सहने के लिए मजबूत होगी 2.4 किमी लंबी सड़क
        पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर एससी वर्मा के मुताबिक, परेड के लिए गोविंदपुरा थाने से लेकर जंबूरी मैदान तक की 2.4 किलोमीटर लंबी सड़क को 15 मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है।

        भारी-भरकम सैन्य टैंकों का वजन आसानी से सहने के लिए इस सड़क की विशेष रूप से स्ट्रेंथनिंग (मजबूतीकरण) की जाएगी। टैंकों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए पूरे मार्ग से स्पीड ब्रेकर हटा दिए जाएंगे। इसके साथ ही, रास्ते में आने वाले कुछ पेड़ों और बिजली के खंभों को भी शिफ्ट किया जाएगा।

    अधिकारियों ने किया निरीक्षण
        इस भव्य आयोजन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए शनिवार को सेना, भोपाल पुलिस, जिला प्रशासन, भेल (BHEL), पीडब्ल्यूडी, बिजली कंपनी और सीपीए के तमाम अधिकारी आयोजन स्थल पर पहुंचे। एडीएम महेंद्र कपचे ने पूरी टीम के साथ गोविंदपुरा थाने से जंबूरी मैदान तक के परेड रूट का बारीकी से निरीक्षण किया।

     

  • भारत की सैन्य ताकत को नया बूस्ट, 23,000 करोड़ की डील से चीन-पाकिस्तान सीमा पर होगी कड़ी निगरानी और जवाबी क्षमता मजबूत

    भारत की सैन्य ताकत को नया बूस्ट, 23,000 करोड़ की डील से चीन-पाकिस्तान सीमा पर होगी कड़ी निगरानी और जवाबी क्षमता मजबूत

    नई दिल्ली

    भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है. हाल ही में भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की बड़ी डील को मंजूरी मिलने के बाद अब थल सेना के लिए भी खजाना खुलता दिख रहा है. सेना 23,000 करोड़ रुपये की लागत से 300 अतिरिक्त K9 वज्र-टी स्वचालित तोपें खरीदने की तैयारी में है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। 

    पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी सैन्य ताकत को तेजी से आधुनिक बनाया है. वायुसेना को पहले 36 राफेल लड़ाकू विमान मिले. इसके बाद भारतीय नौसेना के लिए भी राफेल मरीन विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई. अब एयरफोर्स के लिए और 114 राफेल खरीदे जा रहे हैं. अब सरकार का फोकस थल सेना की मारक क्षमता बढ़ाने पर है. इसी रणनीति के तहत K9 वज्र तोपों की बड़ी खरीद की तैयारी चल रही है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की टू-फ्रंट वार यानी चीन और पाकिस्तान दोनों से एक साथ निपटने की रणनीति का हिस्सा है। 

    रक्षा सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना ने 300 अतिरिक्त K9 वज्र-टी हॉवित्जर खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया है. इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. प्रस्ताव जल्द ही रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) के सामने रखा जा सकता है. मंजूरी मिलने पर यह भारतीय सेना के इतिहास की सबसे बड़ी तोपखाना खरीद परियोजनाओं में शामिल होगी। 

    K9 वज्र ने पिछले कुछ वर्षों में सेना का भरोसा जीता है. मूल रूप से इसे रेगिस्तान और मैदानी इलाकों में युद्ध के लिए विकसित किया गया था. लेकिन पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव के दौरान इसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी तैनात किया गया.कठिन मौसम और पहाड़ी इलाकों में भी इसके प्रदर्शन ने सेना को प्रभावित किया. यही कारण है कि सेना अब इसकी संख्या तेजी से बढ़ाना चाहती है। 

    K9 वज्र-टी एक 155 मिमी और 52 कैलिबर की आधुनिक स्वचालित तोप है. यह ट्रैक वाले प्लेटफॉर्म पर चलती है. इसलिए टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के साथ तेजी से आगे बढ़ सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है शूट एंड स्कूट क्षमता. यानी दुश्मन पर गोले बरसाने के तुरंत बाद यह अपनी जगह बदल सकती है. इससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचना आसान हो जाता है. आधुनिक युद्ध में यह क्षमता बेहद अहम मानी जाती है। 

    भारतीय सेना के पास फिलहाल 100 K9 वज्र तोपें हैं. इसके अलावा 2024 में 100 और तोपों की खरीद को मंजूरी दी गई थी. इस सौदे की कीमत 7,629 करोड़ रुपये थी. अगर नया प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो सेना के पास K9 वज्र का विशाल बेड़ा तैयार हो जाएगा. इससे भारतीय तोपखाने की ताकत में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी। 

    K9 वज्र का निर्माण भारत में किया जाता है. इसे लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और दक्षिण कोरिया की हनव्हा एयरोस्पेस की साझेदारी में तैयार किया जाता है. इसमें स्वदेशी सामग्री का हिस्सा लगातार बढ़ाया गया है. इसलिए यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

  • राजौरी में हाई अलर्ट! जंगलों में छिपे लश्कर आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का बड़ा अभियान

    राजौरी में हाई अलर्ट! जंगलों में छिपे लश्कर आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का बड़ा अभियान

     श्रीनगर

    जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सुरक्षाबलों का आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन पिछले छह दिनों से जारी है. सूत्रों के अनुसार, 2 से 3 शीर्ष लश्कर-ए-तैयबा आतंकवादी जंगल के इलाके में छिपे हुए हैं, जिनकी तलाश में सुरक्षाबलों ने गुरुवार सुबह पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है।

    अधिकारियों ने बताया कि राजौरी के गंभीर मुगलान इलाके में कुछ आतंकियों को छिपे होने का इनपुट मिला था. इसके आधार पर सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ द्वारा संयुक्त रूस आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है जो छठे दिन भी जारी है. सूत्रों का कहना है कि इस इलाके में 2 से 3 लश्कर के आतंकी छिपे हुए हैं।

    लेफ्टिनेंट जनरल ने किया सैन्य क्षेत्र का दौरा
    आतंकवाद विरोधी इस बड़े ऑपरेशन की गंभीरता को देखते हुए उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने बुधवार को खुद इस सैन्य क्षेत्र का दौरा किया था. उन्होंने अग्रिम चौकियों पर तैनात जवानों से मुलाकात की और कमान संभाल रहे अधिकारियों के साथ जारी काउंटर टेरर ऑपरेशन की रणनीतिक समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए।

    उन्होंने बताया कि शनिवार को सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच सुबह करीब साढ़े 11 बजे भीषण मुठभेड़ हुई थी, जिसमें सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घने जंगल वाले इलाके से खदेड़ दिया।

    इस बेहद घने जंगल क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों से निपटने के लिए सेना द्वारा आधुनिक तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है. अत्याधुनिक ड्रोन और सैन्य हेलिकॉप्टरों के जरिए पूरे जंगल के कोने-कोने पर पैनी नजर रखी जा रही है, ताकि छिपे हुए आतंकियों को भागने का कोई मौका न मिले।

  • बड़े बेटे ने पहनी वर्दी, छोटे की तिरंगे में लिपटी लाश घर लौटी, आंखों से छलके आंसू

    बड़े बेटे ने पहनी वर्दी, छोटे की तिरंगे में लिपटी लाश घर लौटी, आंखों से छलके आंसू

     बागपत
    उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है. यह कहानी सिर्फ एक परिवार के दर्द की नहीं, बल्कि उस विडंबना की भी है, जिसमें खुशियां और गम एक ही दिन, एक ही घर में टकरा गए. जिस दिन एक बेटे ने अपने सपनों को साकार करते हुए पुलिस सेवा में कदम रखा, उसी दिन दूसरे बेटे ने देश सेवा करते हुए अपनी जान गंवा दी। 

    बागपत जिले के छपरौली क्षेत्र के लूम्ब गांव के निवासी अग्निवीर सोहित चौहान की अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान दर्दनाक मौत हो गई. जानकारी के अनुसार, रविवार को आए बर्फीले तूफान के दौरान एक पेड़ अचानक गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आकर सोहित गंभीर रूप से घायल हो गए. हादसा इतना भयानक था कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया. इस घटना ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव को शोक में डुबो दिया। 

    सोहित 2023 में अग्निवीर के तहत हुआ था भर्ती
    सोहित चौहान वर्ष 2023 में अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना की 3 ग्रेनेडियर यूनिट में भर्ती हुए थे. वह अपने परिवार के सबसे छोटे सदस्य थे. परिवार में माता-पिता, एक बड़ा भाई और एक बहन है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले सोहित ने कठिन परिश्रम और लगन के दम पर सेना में जगह बनाई थी. उनके परिवार को उन पर गर्व था और गांव के युवाओं के लिए वे प्रेरणा बन चुके थे। 

    लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. जिस दिन सोहित की मौत की खबर आई, उसी दिन उनके बड़े भाई मोहित चौहान उत्तर प्रदेश पुलिस में शामिल हो रहे थे. उस दिन उनकी पासिंग आउट परेड थी, जिसे देखने के लिए उनके पिता मोहर सिंह भी गए हुए थे. घर में जश्न का माहौल था, हर कोई खुश था कि परिवार का एक बेटा पुलिस में भर्ती हो गया है. लेकिन इसी खुशी के बीच अचानक आई दुखद खबर ने सब कुछ बदल दिया। 

    जैसे ही परिवार को सोहित की मौत की सूचना मिली, खुशी का माहौल मातम में बदल गया. पिता, जो बड़े बेटे की सफलता पर गर्व महसूस कर रहे थे, अचानक छोटे बेटे की मौत की खबर सुनकर टूट गए।. मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. एक ही दिन में परिवार ने जीवन का सबसे बड़ा सुख और सबसे बड़ा दुख दोनों देख लिया। 

    सोहित की अंतिम विदाई में हर आंख हुई नम
    जब सोहित चौहान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. गांव की गलियों, सड़कों और घरों की छतों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. हर कोई अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचा. अंतिम संस्कार के दौरान सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ सोहित को विदाई दी. उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और सलामी दी गई.यह दृश्य इतना भावुक कर देने वाला था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों से आंसू छलक पड़े. गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, सभी ने अपने इस वीर बेटे को नम आंखों से विदा किया। 

    इस दुखद घटना के बाद कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी परिवार से मिलने पहुंचे. उन्होंने परिवार को सांत्वना दी और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया. स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि सोहित चौहान को शहीद का दर्जा दिया जाए और उनके परिवार को उचित मुआवजा तथा पेंशन दी जाए. ग्रामीणों का कहना है कि सोहित ने देश सेवा करते हुए अपनी जान गंवाई है, इसलिए उन्हें पूरा सम्मान मिलना चाहिए। 

    सांसद बोले परिवार देश परिवार के साथ
    सोहित के पिता मोहर सिंह ने बताया कि उनका बेटा बहुत मेहनती और जिम्मेदार था. वह परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना चाहता था और इसी उद्देश्य से सेना में भर्ती हुआ था. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है, लेकिन उसका इस तरह चले जाना असहनीय है. उन्होंने सरकार से मांग की कि उनके परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए ताकि वे आगे का जीवन सम्मानपूर्वक जी सकें. वहीं दुख की इस घड़ी में परिवार से मिलने पहुंचे सांसद राजकुमार सांगवान ने कहा कि सोहित के परिवार के साथ पूरा देश खड़ा है. सरकार उनके साथ है. जो भी मदद होगी हर संभव मदद दिलाई जाएगी. उनकी अंतिम यात्रा में हर दल का आदमी शामिल हुआ. उनका योगदान देश याद  रखेगा।