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  • तीन बेटों में से किस पर दांव लगाएंगे अनंत सिंह? खुद विधायक ने बताई रणनीति

    तीन बेटों में से किस पर दांव लगाएंगे अनंत सिंह? खुद विधायक ने बताई रणनीति

    मोकामा

    मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि अब वो आगे चुनाव नहीं लड़ेंगे। कुछ दिनों पहले अनंत सिंह ने अपने चुनाव ना लड़ने का ऐलान करते वक्त यह भी कहा था कि अब आगे उनके बेटे चुनाव लड़ेंगे। अनंत सिंह के तीन बेटे हैं। तो अब सवाल यह उठ रहे हैं कि अनंत सिंह अपने तीन बेटों में से किसे चुनावी रण में उतारेंगे? जब अनंत सिंह से पूछा गया कि नीतीश कुमार के बेटे राजनिति में आ चुके हैं तो क्या अब वो भी अपने बेटे को चुनाव लड़वाएंगे। तब इसपर अनंत सिंह ने कहा कि जनता की जो सेवा करेगा उसको हम चुनाव लड़वाएंगे।

    हमको तीन बेटे हैं। तीनों को हम जाचेंगे कि जनता किसे चाहती है और जनता का रुझान क्या है। कौन जनता की सेवा में जाता है। दुकान से लाने की चीज नहीं है ना कि हम लाकर दे देंगे। मेहनत करना पड़ेगा। जनता की सेवा करनी होगी। काम करना होगा। जो बढ़िया करेगा वो मोकामा का विधायक रहेगा। बता दें कि मोकामा बिहार की हॉट सीट मानी जाती है।

    अनंत सिंह से जब पूछा गया कि नीतीश कुमार तो अब दिल्ली जा रहे हैं? तब इसपर अनंत सिंह ने कहा कि हां, वो तो जा रहे हैं। दिल्ली कोई विदेश थोड़े ना है। दिन भर में चार बार आदमी दिल्ली से आना-जाना करता है। निशांत को लेकर अनंत सिंह ने कहा कि उनका राजनीति में एक्टिव होना जरूरी था। उनको सीएम बनना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या नीतीश कुमार के बाद उनको भी दिल्ली जाने की इच्छा है? तब अनंत सिंह ने इसपर कहा कि वो तो दिल्ली आते-जाते ही रहते हैं।

    जमानत पर जेल से बाहर आए हैं अनंत सिंह

    बहरहाल आपको बता दें कि पटना उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष बिहार में विधानसभा चुनाव के दौरान दुलार चंद यादव की हत्या के मामले में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधायक अनंत सिंह को बृहस्पतिवार को जमानत दे दी थी। अनंत सिंह को एक नवंबर को गिरफ्तार किया गया था और उन पर हत्या की साजिश रचने का आरोप है। अनंत सिंह ने मोकामा विधानसभा सीट से जेल में रहते हुए चुनाव जीता था और राष्ट्रीय जनता दल ( राजद) की वीणा सिंह को 28,000 से अधिक मतों से हराया था। न्यायमूर्ति रुद्र प्रकाश मिश्रा की पीठ ने 15,000 रुपये के मुचलके पर सिंह को जमानत प्रदान की।

    अदालत ने आदेश में कहा, "याचिकाकर्ता मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा और न ही किसी गवाह को प्रभावित या धमकाएगा।" दुलारचंद यादव, चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन कर रहे थे। दुलारचंद यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, हृदय और फेफड़ों में भारी वस्तु से लगी चोट के कारण पहुंचे आघात से कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर के कारण उनकी मौत हुई।

    मोकामा सीट पर 1990 से है कब्जा

    मोकामा विधानसभा सीट पर 1990 से अनंत सिंह के परिवार का कब्जा रहा है फिर चाहे सरकारी किसी भी पार्टी की रही हो। अनंत सिंह ने वर्ष 2022 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम से जुड़े एक मामले में दोषसिद्धि के कारण विधानसभा की सदस्यता समाप्त होने पर यह सीट छोड़ दी थी। इस सीट पर हुए उपचुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने जीत हासिल की थी। उच्च न्यायालय ने हालांकि बाद में उन्हें उस मामले में बरी कर दिया था।

  • अनंत सिंह का राजनीति से रिटायरमेंट का ऐलान, बोले- “अब चुनाव नहीं लड़ूंगा, बच्चों को सौंपूंगा राजनीति की कमान”

    अनंत सिंह का राजनीति से रिटायरमेंट का ऐलान, बोले- “अब चुनाव नहीं लड़ूंगा, बच्चों को सौंपूंगा राजनीति की कमान”

    पटना:

    बिहार में राज्यसभा चुनाव के दौरान बाहुबली नेता अनंत सिंह वोट डालने के लिए पहुंचे.  मतदान करने के बाद वो फिर से जेल लौट गए. इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कई अहम बयान दिए. अनंत सिंह ने  ऐलान किया कि अब वे आगे कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि अब उनके बच्चे ही राजनीति में आगे बढ़ेंगे और चुनाव लड़ेंगे.

    बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा के बाद ही अनंत सिंह ने यह फैसला लिया है. फिलहाल उनके इस बयान से बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है. अनंत सिंह ने दावा किया कि एनडीए के सभी पांचों उम्मीदवार चुनाव जीतेंगे. उन्होंने कहा कि गठबंधन मजबूत है और सभी प्रत्याशियों की जीत तय मानी जा रही है.

    मुख्यमंत्री पद को लेकर भी अनंत सिंह ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि निशांत कुमार में मुख्यमंत्री बनने के सभी गुण मौजूद हैं. हालांकि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, यह फैसला बड़े नेता करेंगे.

    पिछले साल मिली थी धमाकेदार जीत
    बता दें कि पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह को धमाकेदार जीत मिली थी. उन्होंने मोकामा सीट से 28,206 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी. अनंत सिंह ने आरजेडी की उम्मीदवार वीणा देवी को हराया था. अनंत सिंह को 91,416 वोट मिले, जबकि वीणा देवी को 63,210 वोट मिले. जेल में रहने के बावजूद अनंत सिंह ने ये चुनाव जीता था. 3 फरवरी 2026 को उन्हें जेल से पुलिस की गाड़ी में बिहार विधानसभा लाया गया. जहां उन्होंने विधायक पद की शपथ ली. शपथ लेने के बाद उन्हें फिर से जेल वापस ले जाया गया.

    अनंत सिंह क्यों हैं जेल में?
    अनंत सिंह इस समय जेल में हैं. उन पर प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलार चंद यादव की हत्या के मामले में शामिल होने का आरोप है. 1 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें गिरफ्तार किया गया था. ये गिरफ्तारी उनके समर्थकों और यादव के लोगों के बीच हुई झड़प के बाद हुई, जिसमें दुलार चंद यादव की मौत हो गई थी. पटना की एक अदालत ने उन्हें बेऊर जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया. नवंबर 2025 में स्पेशल MP-MLA कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी. अब इस फैसले को पटना हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है.

    अनंत सिंह का चुनावी सफर

    अनंत सिंह ने 2005 में जेडीयू (JD(U)) के टिकट पर मोकामा सीट से पहली बार विधायक का चुनाव जीता था. इसके बाद वह कुल 6 बार विधायक चुने जा चुके हैं. उन्होंने 2005, 2010, 2015, 2020 और 2025 में चुनाव जीता. अलग-अलग चुनावों में उन्होंने कभी किसी पार्टी के टिकट पर तो कभी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की.

        2005 – पहली बार मोकामा से विधायक बने (JDU के टिकट पर)
        2010 – दूसरी बार जीत हासिल की (JDU)
        2015 – तीसरी बार जीत (निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में)
        2020- चौथी बार जीत (RJD के टिकट पर)
        2022-आर्म्स केस में सजा के बाद उनकी सदस्यता चली गई. इस दौरान उनकी पत्नी नीलम देवी ने उपचुनाव जीतकर सीट बरकरार रखी.
        2025- छठी बार मोकामा सीट से जीत (JDU). जबकि वे उस समय जेल में थे और RJD की वीणा देवी को करीब 28,206 वोटों से हराया.

     

  • कानूनी शर्तों के साथ ली शपथ, जेल से एंबुलेंस से विधानसभा पहुंचे अनंत सिंह

    कानूनी शर्तों के साथ ली शपथ, जेल से एंबुलेंस से विधानसभा पहुंचे अनंत सिंह

    पटना.

    बाहुबली नेता अनंत सिंह ने मंगलवार को बिहार विधानसभा में विधायक पद की शपथ ली। स्वास्थ्य कारणों से उन्हें बेऊर जेल से एंबुलेंस के जरिए विधानसभा लाया गया। शपथ ग्रहण के दौरान विधानसभा परिसर और उसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पूरे कार्यक्रम पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी रही। किसी भी तरह की भीड़ को अनुमति नहीं दी गई।

    बिना शपथ पत्र पढ़े दिलाई गई शपथ
    अनंत सिंह ने शपथ पत्र पढ़े बिना ही विधायक पद की शपथ ली। शपथ पूरी होते ही वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उनके माथे पर लगे तिलक के बारे में भी पूछा। इसके बाद अनंत सिंह अपनी निर्धारित सीट पर जाकर बैठ गए। सदन में मौजूद सदस्य यह दृश्य देखते रहे।

    तबीयत खराब होने का दिया हवाला
    मीडिया से बातचीत में अनंत सिंह ने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं होने के कारण शपथ लेने में देरी हुई। उन्होंने बताया कि अदालत की अनुमति मिलने के बाद ही वे विधानसभा पहुंचे हैं। अनंत सिंह ने साफ कहा कि जेल से बाहर आना उनके हाथ में नहीं है। उन्होंने कहा कि जब जज साहब चाहेंगे, तभी वे जेल से बाहर आएंगे। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं।

    कोर्ट ने सिर्फ शपथ के लिए दी इजाजत
    पटना सिविल कोर्ट के आदेश के बाद अनंत सिंह के शपथ ग्रहण का रास्ता साफ हुआ। हालांकि कोर्ट ने उन्हें केवल शपथ लेने की ही अनुमति दी है। दुलारचंद यादव हत्याकांड में उन्हें अब तक जमानत नहीं मिली है। शपथ समारोह के अलावा किसी भी अन्य गतिविधि में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है। शपथ के बाद उन्हें वापस बेऊर जेल भेजा जाएगा। वे दोबारा न्यायिक हिरासत में रहेंगे।

    विधानसभा परिसर छावनी में तब्दील
    अनंत सिंह को जेल से विधानसभा तक लाने और वापस ले जाने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई। एस्कॉर्ट वाहन और क्विक रिस्पॉन्स टीम को तैनात किया गया था। विधानसभा परिसर के अंदर और बाहर अतिरिक्त पुलिस बल मौजूद रहा। सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी गई। समर्थकों के किसी भी तरह के जमावड़े पर पूरी तरह रोक लगाई गई थी। प्रवेश द्वारों पर सघन जांच की गई।

    हाईकोर्ट में जमानत पर अब भी इंतजार
    अनंत सिंह पिछले करीब तीन महीनों से बेऊर जेल में बंद हैं। सिविल कोर्ट से उनकी जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने 24 दिसंबर को पटना हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। जिस पीठ में मामले की सुनवाई सूचीबद्ध हुई थी, उस कोर्ट के जज ने सुनवाई से इनकार कर दिया। अब इस मामले को दूसरी पीठ में सूचीबद्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। जमानत पर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है।

    संविधान के तहत शपथ लेना था जरूरी
    संविधान के अनुच्छेद 188 के अनुसार हर विधायक को पदभार संभालने से पहले शपथ लेना अनिवार्य है। शपथ लिए बिना कोई विधायक सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकता। शपथ तक विधायक को वेतन और भत्ते का भी अधिकार नहीं मिलता। अनुच्छेद 193 के तहत बिना शपथ सदन में शामिल होने पर जुर्माने का प्रावधान है। इसी कारण अनंत सिंह के लिए शपथ लेना जरूरी था। शपथ के साथ उनकी सदस्यता औपचारिक रूप से पूरी हो गई।

    मोकामा से बड़ी जीत के बाद शपथ
    अनंत सिंह मोकामा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं। उन्होंने 28,206 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। अनंत सिंह को कुल 91,416 वोट मिले थे। राजद की प्रत्याशी वीणा देवी दूसरे स्थान पर रहीं, जिन्हें 63,210 वोट प्राप्त हुए थे। जीत के बाद अनंत सिंह शपथ न ले पाने के कारण सदन से बाहर थे। मंगलवार को शपथ लेने के साथ ही उनकी विधायकी औपचारिक रूप से शुरू हो गई।