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  • ‘इसलिए कर रहे प्रदर्शन ताकि बाद में वोट चोरी का आरोप लगा सकें’- विपक्ष के हंगामे पर ओपी राजभर का बयान

    ‘इसलिए कर रहे प्रदर्शन ताकि बाद में वोट चोरी का आरोप लगा सकें’- विपक्ष के हंगामे पर ओपी राजभर का बयान

    ‘अखिलेश यादव को न राम प्यारे हैं, न कृष्ण’, सपा प्रमुख पर निशाना साधते हुए राजभर बोले- 2027 में हम जीतेंगे 350 सीट

    ‘12 बजे तक अखिलेश करते हैं अली-अली, उसके बाद बजरंगबली’- सपा प्रमुख पर ओपी राजभर का बड़ा हमला

    ‘इसलिए कर रहे प्रदर्शन ताकि बाद में वोट चोरी का आरोप लगा सकें’- विपक्ष के हंगामे पर ओपी राजभर का बयान

    'अखिलेश यादव शिवपाल को फूटी आंख भी नहीं देखना चाहते'- राजभर

    'सपा में शिवपाल की हालत झुनझुना बजाने वाले जैसी': अखिलेश पर ओपी राजभर का निशाना

    ओपी राजभर ने सपा को बताया डूबती नांव, 2027 को लेकर कहा- NDA के साथ लड़ेंगे चुनाव

    लखनऊ,
     योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि 2027 के चुनाव में हम 350 सीट जीतने जा रहे हैं। वहीं अयोध्या में हो रही कथा में अखिलेश यादव के जाने को लेकर राजभर ने कहा, “उनको ना तो राम प्यारे हैं और ना ही कृष्ण प्यारे हैं, अखिलेश यादव खुद को कृष्ण का वशंज बताते हैं लेकिन वो मथुरा और अयोध्या नहीं जाते। उन्हें डर लगा रहता है कि मुस्लिम सपा का साथ न छोड़ दें।”

    राजभर ने कहा, “अखिलेश यादव 12 बजे तक अली-अली करते हैं। उसके बाद बजरंगबली करते हैं। अखिलेश यादव का हाल माया मिली ना राम वाला है।” उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव कांग्रेस को चालू पार्टी बता चुके हैं। कांग्रेस सपा को भाजपा की बी टीम बता चुकी है। 2027 में कोई लड़ाई नहीं है।”

    वहीं सपा में शिवपाल यादव की स्थिति को लेकर ओपी राजभर ने कहा, “शिवपाल की स्थिति बैंड पार्टी में झुनझुना बजाने वाले जैसी हो गई है जिसे सुर-ताल से कोई मतलब नहीं होता। वही हाल उनका भी है।”

    उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव शिवपाल यादव को फूटी आंख से भी नहीं देखना चाहते हैं। अभी उनको लोहिया ट्रस्ट से भी हटा दिया। अभी मैंने सुना कि अब कार्यालय में भी शिवपाल जाएंगे तो अखिलेश से पूछकर जाएंगे। यह सब अविश्वास ही तो है। अखिलेश यादव हमेशा शिवपाल यादव को अपमानित करने का काम करते हैं।”

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रोटेस्ट पर राजभर का बयान
    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रोटेस्ट पर ओपी राजभर ने कहा, “कांग्रेस-सपा को तो ज्ञानेश कुमार को धन्यवाद देना चाहिए कि निष्पक्ष चुनाव करवाया। जिसमें 37 सीट सपा को, 6 सीट कांग्रेस को मिली।”

    उन्होंने कहा, “अगर चोरी होती, तो 2019 में लोकसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 303 सीट जीती। चोरी करती, तो बढ़ता न। और 2024 में 240 ही आई। यह क्या साबित करता है?”

    राजभर ने कहा, “2014 के पहले पूरे देश के सिस्टम पर कब्जा कांग्रेस का था। चुनाव आयोग कांग्रेस का था। तो क्या कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मिलकर के मोदी जी को प्रधानमंत्री बना दिया? 2012 से 2017 तक समाजवादी पार्टी का कब्जा उत्तर प्रदेश के सारे सिस्टम पर था। तो क्या अखिलेश जी ने योगी जी को मुख्यमंत्री बना दिया?”

    उन्होंने आगे कहा, “अब मोदी जी और योगी जी दोनों लोग मिलकर के जनता का काम करने लगे, तो जनता उन पर विश्वास करने लगी और राहुल-अखिलेश को छोड़ दिया। तो अब यह लोग सोच रहे हैं कि अब प्रदर्शन करें कि आगामी चुनाव के बाद जनता से हम लोग कह सकें कि भाई वोट चोरी हो गई। बस इसी नाते लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। और कोई बात नहीं है।”

    2027 को लेकर क्या बोले राजभर?
    2027 को लेकर ओम प्रकाश राजभर से सवाल हुआ कि क्या सुभासपा भाजपा के साथ रहेगी या कहीं जाएगी? इस पर राजभर ने कहा, “अखिलेश यादव भी तो 8 बार समझौता किए, बसपा से, आरएलडी से, कांग्रेस से, सुभासपा से। उनसे नहीं कोई पूछता है।” राजभर ने कहा कि हम लोग NDA के साथ हैं। समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए राजभर ने कहा, “सपा डूबती हुई नैया है, जिसे डूबना हो वही उस पार्टी में जाए।"

  • सपा राज में पत्रकार को जिंदा जलाया गया था, अखिलेश पर चौधरी भूपेंद्र का तीखा प्रहार

    सपा राज में पत्रकार को जिंदा जलाया गया था, अखिलेश पर चौधरी भूपेंद्र का तीखा प्रहार

    अखिलेश के खिलाफ मंत्रियों ने खोला मोर्चा, चौधरी भूपेंद्र सिंह और राजभर ने गिनाए पुराने कारनामे

    अखिलेश ने तिजोरी भरने के लिए बनाया था एक्सप्रेसवे: चौधरी भूपेंद्र सिंह

    सपा राज में पत्रकार को जिंदा जलाया गया था, अखिलेश पर चौधरी भूपेंद्र का तीखा प्रहार

    पीडीए मतलब परिवार, दौलतमंद और अपराधी: ओम प्रकाश राजभर

    ‘लोकतंत्र की देते हैं दुहाई और इमरजेंसी वाली कांग्रेस से करते हैं गलबहियां’: भूपेंद्र और राजभर

    लखनऊ, 
     समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान, लोकतंत्र की रक्षा, एक्सप्रेसवे निर्माण और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयानों पर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह और ओम प्रकाश राजभर ने कड़ा पलटवार किया है। दोनों नेताओं ने अखिलेश यादव के बयानों को उनके पुराने राजनीतिक फैसलों और सपा सरकार के कार्यकाल की याद दिलाते हुए आड़े हाथ लिया।

    लोकतंत्र की दुहाई पर चौधरी भूपेंद्र सिंह का निशाना
    चौधरी भूपेंद्र सिंह ने अखिलेश यादव द्वारा लोकतंत्र सेनानियों को 51 हजार सम्मान राशि देने के ऐलान पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र की बात करने वालों को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्होंने कहा कि अखिलेश एक तरफ इमरजेंसी का रोना रोते हैं, वहीं दूसरी तरफ उसी कांग्रेस के साथ गलबहियां कर चुनाव लड़ रहे हैं, जिसने देश पर तानाशाही थोपकर इमरजेंसी लगाने का ऐतिहासिक पाप किया था।

    एक्सप्रेसवे के मुद्दे पर घेरा
    अखिलेश यादव के एक्सप्रेसवे संबंधी दावों पर चौधरी भूपेंद्र सिंह ने सपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकाल के दौरान सड़क और एक्सप्रेसवे निर्माण में हुई संगठित लूट जगजाहिर है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश के कार्यकाल में केवल एक एक्सप्रेसवे बना, जिसमें भारी भ्रष्टाचार हुआ। निजी और पारिवारिक तिजोरी भरने के लिए एक्सप्रेसवे का रूट जानबूझकर बदला गया था, और सपा इस खुली धांधली से मुंह नहीं मोड़ सकती।

    'सपा राज में पत्रकार को जिंदा जलाया गया था'
    पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा के दावों पर पलटवार करते हुए चौधरी भूपेंद्र सिंह ने शाहजहांपुर में पत्रकार को जिंदा जलाए जाने की घटना याद दिलाई। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में एक मंत्री के खिलाफ स्टोरी करने पर पत्रकार को जिंदा जला दिया गया और बाद में अस्पताल में भी उसकी जान लेने की कोशिश हुई।

    उन्होंने आगे कहा कि जब अखिलेश यादव को प्रेस वार्ता में किसी पत्रकार का सवाल पसंद नहीं आता, तो वे उसकी जाति पूछने लगते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पत्रकारों को धमकाने, सपा कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट करने और 'मुर्दाबाद' के उस मामले में अखिलेश की मौजूदगी और उनके इशारे पर पत्रकारों से बर्बरता की गई थी।

    राजभर बोले- अखिलेश की किसी बात का भरोसा नहीं
    कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव की राजनीतिक विश्वसनीयता पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 में कांग्रेस के साथ गठबंधन की विफलता के बाद खुद अखिलेश ने इसे अपनी 'सबसे बड़ी भूल' करार दिया था। इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जाकर जनता से कांग्रेस को वोट न देने की अपील की और उसे धोखेबाज बताया। राजभर ने उत्तराखंड उपचुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सपा के 2,200 वोट काटने की वजह से ही कांग्रेस मामूली अंतर से हारी थी।

    इमरजेंसी के इतिहास पर राजभर का वार
    इमरजेंसी का जिक्र करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि रायबरेली से राज नारायण के चुनाव मामले में अदालत द्वारा इंदिरा गांधी को 6 साल के लिए अयोग्य ठहराए जाने के बाद कांग्रेस ने देश में इमरजेंसी थोपी थी। लाखों नेताओं, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को सलाखों के पीछे डाला गया। राजभर ने सवाल उठाया कि उसी कांग्रेस के साथ खड़े होकर अखिलेश किस मुंह से लोकतंत्र सेनानियों को पेंशन और सम्मान देने की बात कर रहे हैं।

    PDA मतलब परिवार, दौलतमंद और अपराधी
    अखिलेश के 'पीडीए' (PDA) फार्मूले की धज्जियां उड़ाते हुए राजभर ने कहा कि इनके PDA का असली अर्थ है- 'P' से परिवार, 'D' से धनी राम यानी दौलतमंद, और 'A' से अपराधी। राजभर ने सवाल उठाया कि जिन निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने खून-पसीना बहाकर, लाठियां खाकर सपा को सींचा, उनके हक को दरकिनार कर केवल धनकुबेरों और अपराधियों को तरजीह दी जा रही है।

    मुस्लिम व अन्य वर्गों के प्रतिनिधित्व पर सवाल
    राजभर ने सपा के भीतर मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुसलमानों के एकतरफा वोट से सपा विधायक जीतते हैं, लेकिन जब राज्यसभा भेजने की बात आती है तो मुसलमानों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्हें केवल वोट बैंक और गुलाम बनाकर रखा गया है। उन्होंने यह भी पूछा कि PDA में पंडित और सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी कहां है? एक बार किसी को भेजा गया, उसके बाद उन्हें भी दरकिनार कर दिया गया।

    डिंपल यादव के निर्विरोध चुनाव पर उठाए सवाल
    राजभर ने डिंपल यादव के पूर्व में हुए निर्विरोध चुनाव का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाया कि उस समय विरोधी प्रत्याशियों को कथित तौर पर अगवा कर जबरन पर्चे वापस कराए गए थे। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का सरोकार न तो पिछड़ों से है, न दलितों से, न मुसलमानों से और न ही सामान्य वर्ग से, उनकी राजनीति केवल परिवार और निजी स्वार्थ तक सीमित है।

  • मंत्री पद के बंटवारे पर राजभर का तंज, चुनाव से पहले सपा पर उठाए सवाल

    मंत्री पद के बंटवारे पर राजभर का तंज, चुनाव से पहले सपा पर उठाए सवाल

    चुनाव हुआ नहीं, सपा में बंटने लगे मंत्री पद, राजभर ने अखिलेश पर कसा तंज

    इंद्रजीत सरोज के मंत्री बनने और बालू खनन वाले बयान को लेकर सुभासपा अध्यक्ष ने सपा प्रमुख को घेरा

    कहा, पहले जनता की अदालत का फैसला तो आने दीजिए, फिर बांटिए विभाग

    बोले, सरकार बनने से पहले ही मंत्री पद और बालू-मिट्टी का हिसाब-किताब लगाया जा रहा

    अखिलेश से पूछा, 2027 के लिए किस-किस नेता को कौन-कौन सा विभाग सपने में बांट रखा है

     लखनऊ
     सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज के बयान को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में अभी समय है और जनता का फैसला भी नहीं आया है, लेकिन सपा में अभी से मंत्री पद और विभाग बांटने के सपने देखे जाने लगे हैं।

    राजभर ने मंगलवार को एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सपा नेता इंद्रजीत सरोज अभी से बता रहे हैं कि 2027 में सपा की सरकार बनी तो उन्हें मंत्री बनने से कोई नहीं रोक पाएगा। उन्होंने सरोज के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब वह पार्टी के बुरे दिनों के साथी रहे हैं तो बड़े मंत्री भी वही बनेंगे।

    राजभर ने सरोज की जेसीबी, डंपर और बालू खनन को लेकर की गई टिप्पणी पर भी अखिलेश यादव को घेरा। उन्होंने सवाल किया कि चुनाव होने में अभी समय है, लेकिन सपा में मंत्री कौन बनेगा और कार्यकर्ताओं को जेसीबी-डंपर लगाकर बालू-मिट्टी खोदने की छूट कैसे मिलेगी, इसकी तैयारी अभी से शुरू हो गई है क्या?

    सुभासपा अध्यक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि ये चुनाव की तैयारी चल रही है या सरकार बनने से पहले ही मंत्री पद और बालू-मिट्टी का हिसाब-किताब लगाया जा रहा है? उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता कोई खाली कुर्सी नहीं है कि किसी ने चाहा और उस पर बैठ गया। पहले जनता की अदालत का फैसला आने देना चाहिए।

    राजभर ने पोस्ट के आखिर में अखिलेश से पूछा कि 2027 के लिए और किस-किस नेता को कौन-कौन सा विभाग सपने में बांट रखा है। उन्होंने तंज किया कि चच्चू भी अपने विभाग का इंतजार कर रहे हैं। सपने में ही सही, लेकिन बता दीजिए कि पीडब्ल्यूडी देंगे या सिंचाई, ताकि नींद अच्छी आए।

  • पहले अपने कार्यकाल का हिसाब दें अखिलेश… भ्रष्टाचार के आरोपों पर अनिल राजभर का करारा जवाब

    पहले अपने कार्यकाल का हिसाब दें अखिलेश… भ्रष्टाचार के आरोपों पर अनिल राजभर का करारा जवाब

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री अनिल राजभर ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार पर आरोप लगाने से पहले समाजवादी पार्टी को अपने कार्यकाल के कामकाज का हिसाब देना चाहिए। अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि हल्का आदमी ही अखिलेश यादव की तरह रोज-रोज बयानबाजी करता है। इसीलिए सपा प्रमुख की उपयोगिता खत्म हो गई है।

    सपा भ्रष्टाचार की बात करे, यह अजूबा है
    अनिल राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी का भ्रष्टाचार की बात करना ही अपने आप में अजूबा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा नेता लगातार सरकार को लेकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि जनता राजनीतिक दलों के दावों के साथ-साथ सपा के पुराने रिकॉर्ड को भी समझती है।

    उन्होंने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी मौजूदा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है, तो उसे अपने शासनकाल से जुड़े सवालों का भी जवाब देना चाहिए। अनिल राजभर ने इसी सिलसिले में JPNIC, गोमती रिवर फ्रंट, आगरा एक्सप्रेसवे, सरकारी नौकरियों और खनन जैसे मामलों का जिक्र किया।

    JPNIC से खनन तक के मुद्दे पर सपा को घेरा
    मंत्री ने कहा कि सपा राज में JPNIC और गोमती रिवर फ्रंट समेत कई परियोजनाओं को लेकर सवाल उठे थे। उन्होंने खनन को लेकर भी सपा सरकार पर निशाना साधते हुए अनियमितताओं के आरोप लगाए। अनिल राजभर ने यह भी कहा कि पिछली सरकार के दौरान खनन से जुड़े मामलों में मंत्रियों को जेल जाना पड़ा। उन्होंने इन मामलों का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी से जवाब मांगा। मंत्री ने कहा कि विपक्ष को मौजूदा सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है, लेकिन उसे अपने कार्यकाल से जुड़े सवालों का भी जवाब देना चाहिए।

    अखिलेश को सच्चाई सुनने की हिम्मत रखनी चाहिए
    मीडिया के सवालों को लेकर भी अनिल राजभर ने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पत्रकार सपा सरकार के कार्यकाल या उत्तर प्रदेश के विकास से जुड़े सवाल पूछते हैं, तो पार्टी के नेता असहज हो जाते हैं।

    उन्होंने कहा कि पत्रकारों के सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और राजनीतिक दलों को कठिन सवालों का भी जवाब देने की हिम्मत रखनी चाहिए। अनिल राजभर ने आरोप लगाया कि सपा नेता मीडिया के सवालों का जवाब देने के बजाय पत्रकारों को ही निशाना बनाने लगते हैं।

  • अखिलेश को सलाह, बोले- जीतना है तो प्रदेश की पार्टी इकाई भी भंग कर दीजिए, हाल सब जगह एक सा

    अखिलेश को सलाह, बोले- जीतना है तो प्रदेश की पार्टी इकाई भी भंग कर दीजिए, हाल सब जगह एक सा

    बुलाई थी बैठक, हो गई कुश्ती, पीडीए मतलब ‘पैसा, दबंगई और आपसी लड़ाई’: ओम प्रकाश राजभर
     
    एटा-कासगंज में सपा नेताओं के विवाद पर ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को घेरा
     
    अखिलेश को सलाह, बोले- जीतना है तो प्रदेश की पार्टी इकाई भी भंग कर दीजिए, हाल सब जगह एक सा
     
    बोले- टिकट बंटा नहीं, चुनाव आया नहीं, सत्ता मिली नहीं और अभी से चढ़ गई ‘पैसे की गर्मी’
     
    कहा- राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने नेता भिड़ जाएं तो पार्टी के अनुशासन का हाल समझा जा सकता है
     
    राजभर का तंज- कार्यकर्ता की जगह अपराधी भरेंगे तो क्या होगा, बोए पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय
     
     लखनऊ

     सुभासपा अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एटा-कासगंज में सपा नेताओं के बीच हुए विवाद को लेकर अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने तंज किया कि अखिलेश यादव ने बैठक चुनावी रणनीति बनाने के लिए बुलाई थी, लेकिन उनके सामने ही नेताओं में कुश्ती हो गई। उन्होंने पीडीए का नया मतलब भी “पैसा, दबंगई और आपसी लड़ाई” बताया।
     
    राजभर ने लिखा, “अखिलेश यादव जी! क्या से क्या हो गया, देखते-देखते। बुलाए थे बैठक और हो गई कुश्ती।” उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में कार्यकर्ताओं की जगह अपराधियों को भरकर रखा जाएगा तो नतीजा ऐसा ही होगा। इसी के साथ उन्होंने कहावत लिखी, “बोए पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय।”
     
    सत्ता मिली नहीं, अभी से ‘पैसे की गर्मी’
    राजभर ने एटा-कासगंज की बैठक में हुए विवाद और इसके बाद दोनों जिलों की पार्टी इकाइयां भंग किए जाने को लेकर भी अखिलेश यादव को घेरा। उन्होंने अखिलेश की “पैसे की गर्मी” वाली टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि टिकट अभी बंटा नहीं, चुनाव आया नहीं और सत्ता मिली नहीं, लेकिन “पैसे की गर्मी” अभी से चढ़ गई है।
     
    उन्होंने कहा कि जिस पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने ही नेता आपस में भिड़ जाएं और अध्यक्ष को बैठक छोड़कर जाना पड़े, वहां अनुशासन का हाल समझा जा सकता है। राजभर ने कटाक्ष किया कि “सपा और अनुशासन” एक साथ नहीं आ सकते।
     
    प्रदेश की इकाई भी भंग कर दीजिए
    राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज करते हुए कहा कि यदि पार्टी को चुनाव जिताना है तो प्रदेश की पार्टी इकाई भी भंग कर देनी चाहिए। सिर्फ एटा-कासगंज के नेताओं को ही “पैसों की गर्मी” नहीं आई है, बल्कि हाल सब जगह एक जैसा है। पोस्ट के अंत में उन्होंने “जय भारत, जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण, जय महाराजा सुहेलदेव” लिखा।

  • UP Election 2027: डिंपल यादव बनाम चारू चौधरी, अखिलेश-जयंत की सियासी जंग में बहुरानियों की एंट्री

    UP Election 2027: डिंपल यादव बनाम चारू चौधरी, अखिलेश-जयंत की सियासी जंग में बहुरानियों की एंट्री

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में महिलाओं पर सभी दलों का फोकस है. सभी राजनीतिक दल भली भांति समझते हैं कि अगर महिलाएं उनके साथ आ गईं तो चुनाव में जीत दर्ज करना बिलकुल आसान हो जाएगा. क्योंकि महिलाएं जाति और धर्म से ऊपर उठकर वोट करती हैं. खास बात यह है कि वह जिस पार्टी का समर्थन करती हैं तो दिल खोलकर. इसी वजह से बीजेपी, सपा, कांग्रेस, आरएलडी समेत तमाम राजनीतिक दल महिलाओं पर डोरे डालने में जुटी हैं। 

    समाजवादी पार्टी पर हमेशा से गुंडागर्दी फैलाने के आरोप लगते रहे हैं. इस कहा जाता है कि महिलाएं सपा से दूरी बनाती हैं. इस नैरेटिव को बदलने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बार पत्नी डिंपल यादव को प्रमुखता से आगे करते दिख रहे हैं. डिंपल की सक्रियता को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बातें हो रही है, लेकिन इसी बीच जयंत चौधरी ने अपनी पत्नी चारू चौधरी को चुनावी मंच पर लेकर आ गए हैं. अब चारू सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. लोग डिंपल और चारू की तुलना भी करने लगे हैं। 

    मंच पर पहुंचते ही चारू ने अखिलेश यादव को निशाने पर लिया
    गुरुवार को सहारनपुर में राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) की रैली में जयंत चौधरी की पत्नी चारू चौधरी भी भाषण देने पहुंचीं. चारू ने लिखा हुआ भाषण पढ़ने के बजाय खुद से पूरे कॉन्फिडेंस के साथ भाषण दीं. उनका भाषण भले ही दो मिनट का रहा, लेकिन उसमें ही उन्होंने ऐसी बातें कहीं जो चर्चा का विषय बन गया है. चारू चौधरी ने बिना नाम लिए अखिलेश यादव को निशाने पर लिया और कहा- ‘किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि वो आपका अपमान करें या आपको सिखाएं और समझाएं. इस तरीके की बयानबाजी सिर्फ उनकी मानसिकता दर्शाता है. उनका अहंकार दर्शाता है. सच तो यह है कि यह लोकतंत्र है. सरकार किसकी बन रही है, कौन आ रहा है, जा रहा है, यह फैसला सिर्फ आप करते हैं। 

    चारू चौधरी का यह बयान अखिलेश यादव के उस तंज का जवाब था जिसमें, उन्होंने जयंत चौधरी का नाम लिए बगैर कहा था कि जिसको ‘चवन्नी से रुपया बनाया’ वो भी उधर भाग गए. जयंत चौधरी की पत्नी पूरे आत्मविश्वास के साथ मंच संभालती दिखीं. उन्होंने अपने छोटे भाषण में ही एनडीए के ज्यादा से ज्यादा प्रत्याशियों को जीत दिलाकर लखनऊ भेजने की अपील की. चारू चौधरी भले ही 2009 से पति जयंत के लिए चुनावी रैलियां और रोडशो करती रही हैं, लेकिन वह एंटरप्रेन्योर भी हैं. वह साउथ दिल्ली में ज्वेलरी और कपड़ों का फैशन ब्रांड शोरूम चलाती हैं. उन्होंने अभी तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है और ना ही विधानमंडल या संसद की सदस्य बनी हैं। 

    डिंपल यादव को आगे कर रहे हैं अखिलेश यादव
    वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव 2012 उपचुनाव में पहली बार निर्विरोध कन्नौज से सांसद चुनी गई थीं. 2014 के लोकसभा चुनाव में वह दोबारा कन्नौज से चुनाव जीतीं. 2022 में तीसरी बार मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली हुई मैनपुरी सीट पर हुए उपचुनाव में डिंपल यादव सांसद चुनी गईं. 2024 के लोकसभा चुनाव में मैनपुरी से जीत दर्ज कर वह अभी सांसद हैं। 

    पिछले दिनों जंतर मंतर पर GEN-Z के आंदोलन में अखिलेश यादव की गैरमौजूदरगी में डिंपल यादव छात्रों की अगुवाई करती दिखीं. इसके बाद छात्रों पर हुए लाठीचार्च के बाद डिंपल जिस तरह से घायल छात्रों के साथ खड़ी दिखीं उसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी इस छवि की काफी तारीफ हुई। 

    पिछले दिनों सपा प्रमुख आगामी यूपी चुनाव को लेकर महिलाओं के लिए बड़ी घोषणाएं करने के लिए मीडिया के सामने आए थे. इस दौरान महिलाओं के लिए घोषणाएं करने की जिम्मेदारी डिंपल यादव को ही दी गई. पत्रकारों के सामने डिंपल यादव ने घोषणा की कि अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो राज्य की महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये दिए जाएंगे. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने डिंपल को पत्रकारों के सवालों का भी जवाब देने के लिए भी प्रोत्साहित करते दिखे. डिंपल ने भी बेहद मजबूती के साथ पत्रकारों के सवालों का मंजे हुए राजनेता की तरह जवाब दिया। 

    जहां तक डिंपल की एजुकेशन का सवाल है तो वह लखनऊ यूनिर्सिटी से बी कॉम हैं. वहीं चारू दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं. इसके अलावा चारू लंदन से ज्वेलरी डिजाइनिंग का कोर्स भी कर चुकी हैं. जहां चारू भी पंजाबी फैमिली से होने के बावजूद जाट परिवार की बहू बनी हैं, वहीं डिंपल यादव राजपूत परिवार से होते हुए भी यादव परिवार की दुल्हन हैं. दोनों ने ही नारी सशक्तिकरण का परिचय देते हुए अपनी मर्जी से शादियां की हैं. 2027 के विधानसभा चुनाव में देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देवियां किस रूप में अपने-अपने दल और गठबंधन के लिए वोट जुटा पाती हैं।