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  • ईरान के खिलाफ बढ़ी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी, मिडिल ईस्ट भेजे गए 10 हजार अतिरिक्त सैनिक

    ईरान के खिलाफ बढ़ी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी, मिडिल ईस्ट भेजे गए 10 हजार अतिरिक्त सैनिक

    वाशिंगटन 

    अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध शांत होने के बजाय एक नए और अत्यधिक विस्फोटक स्टेज में पहुंच गया है. पेंटागन ने मध्य पूर्व में अपने सैन्य बल को अत्यधिक मजबूत करते हुए एक तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात करने का निर्णय लिया है। 

    सैन डिएगो से रवाना हुआ नौसेना का विमानवाहक पोत 'यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट' (USS Theodore Roosevelt) अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है. इसके साथ ही मरीन सैनिकों से लैस 'यूएसएस मेकिन आइलैंड' (USS Makin Island) एम्फीबियस रेडी ग्रुप भी क्षेत्र में भेजा जा रहा है, जिससे इलाके में लगभग 9,000 से 10,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों और नौसैनिकों की तैनाती होने जा रही है। 

    पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्र में यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (USS George H.W. Bush) और यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन (USS George Washington) पहले से ही मोर्चा संभाले हुए हैं. यदि यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन क्षेत्र में बना रहता है, तो अक्टूबर के अंत तक रूजवेल्ट के पहुंचने पर एक ही समय में तीन-तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप्स की उपस्थिति दर्ज की जाएगी। 

    अप्रैल 2026 के बाद यह पहला अवसर होगा जब अमेरिका ने एक साथ तीन परमाणु-संचालित युद्धपोत बेड़ों को इस संवेदनशील क्षेत्र में उतारा है. हालिया रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व में अमेरिका के 50,000 से अधिक सैनिक और लगभग 20 अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत पहले से तैनात हैं, जो किसी भी बड़े सैन्य टकराव के लिए अमेरिका की पूर्ण युद्ध तत्परता को दर्शाते हैं। 

    चौतरफा दबाव बनाने का प्रयास
    अमेरिका की इस भारी सैन्य वृद्धि को ईरान पर चौतरफा दबाव बनाने और क्षेत्रीय सहयोगियों को सुरक्षा का भरोसा देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजरानी की सुरक्षा के साथ-साथ ईरान समर्थित गुटों के किसी भी हमले को विफल करना इसका मुख्य लक्ष्य है। 

    विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर युद्धपोतों, उन्नत लड़ाकू विमानों और नौसैनिक मरीन बलों का जमावड़ा केवल सुरक्षात्मक कदम नहीं है, बल्कि यह ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य अभियानों की पूर्व-तैयारी का संकेत भी देता है। 

    दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी सैन्य जमावड़े के जवाब में अपने मिसाइल रक्षा प्रणालियों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) को हाई-अलर्ट पर रख दिया है. तेहरान की ओर से चेतावनी दी गई है कि किसी भी अमेरिकी उकसावे या संप्रभुता के उल्लंघन का कड़ा और सीधा जवाब दिया जाएगा। 

    इस कूटनीतिक और सैन्य खींचतान के कारण अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है और फारस की खाड़ी के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं. तनाव का यह नया चरण वैश्विक शांति के लिए बेहद संवेदनशील साबित हो रहा है। 

    पेंटागन द्वारा अतिरिक्त 10,000 सैनिकों की तैनाती और नौसेना की इस आक्रामक गोलबंदी ने कूटनीतिक वार्ताओं की गुंजाइश को लगभग समाप्त कर दिया है. यदि किसी भी पक्ष से छोटी सी भी रणनीतिक चूक होती है, तो यह तनाव एक भीषण क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसके गंभीर दुष्परिणाम न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को भुगतने पड़ सकते है। 

  • CM के लिए नया लग्जरी जेट तैयार, कुछ दिन विदेशी पायलट उड़ाएंगे विमान

    CM के लिए नया लग्जरी जेट तैयार, कुछ दिन विदेशी पायलट उड़ाएंगे विमान

    भोपाल
     मध्य प्रदेश सरकार के लिए कनाडा से भोपाल आ रहा बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 विमान को लेकर हर दिन नई-नई जानकारी सामने आ रही हैं। डीजीसीए के कड़े नियमों, पायलटों की री-ट्रेनिंग और इस हाई-टेक विमान के प्रोटोकॉल को लेकर यह बात सामने आई है कि फिलहाल भारतीय पायलटों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    जमीनी स्तर पर एक्टिव रहते हैं सीएम
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मंत्रालय के वल्लभ भवन में बैठने की बजाए जमीनी स्तर पर निरीक्षण करने और जायजा लेने अक्सर निकल जाया करते हैं। वे अक्सर ही अलग-अलग जिलों के प्रवास पर रहते हैं, इसलिए त्वरित गति का इस्तेमाल करने के लिए इस विमान का भी उपयोग किया जाएगा।

    सुपर-मिड साइज है यह बिजनेस जेट
    6,297 किलोमीटर की नॉन-स्टॉप रेंज, हवा में उड़ता आलीशान विमान और 250 करोड़ की कीमत वाला सुपर-मिड साइज बिजनेस जेट 'बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500' अब मध्य प्रदेश के आसमान पर उड़ते रहेगा। मुख्यमंत्री जैसे अति-विशिष्ट और संवेदनशील पद की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए राज्य सरकार हर कदम बेहद फूंक-फूंक कर उठा रही है। कनाडा से उड़ान भरने को तैयार यह विमान 30 सितंबर तक भोपाल पहुंचने वाला है, लेकिन इससे पहले इसकी हर तकनीकी बारीकी को परखा जा रहा है।

    विमानन संचालनालय में नियमित पद पर पदस्थ सीनियर पायलट विश्वास राय इस नए प्लेन को उड़ाने के लिए कनाडा में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। प्लेन को उड़ाने के लिए तीन पायलटों की व्यवस्था रहेगी, लेकिन एक बार में दो पायलट ही प्लेन उड़ाएंगे।

    जब तक पायलट की ट्रेनिंग पूरी नहीं हो जाती, तब तक विमान निर्माता कंपनी एक साल के लिए अपने एक पायलट की सेवाएं मध्य प्रदेश सरकार को उपलब्ध कराएगी। तीसरे पायलट की नियुक्ति के लिए निजी एविएशन कंपनियों से दरें मांगी गई हैं।

    राज्य सरकार ने इस नए स्टेट जेट प्लेन की खरीदी के लिए अपने बजट में 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। कनाडा की कंपनी बॉम्बार्डियर से अत्याधुनिक चैलेंजर 3500 जेट विमान खरीदा जा रहा है।

    वर्तमान में, राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर किराए के विमानों पर निर्भर रहती है। नए विमान के आने के बाद यह निर्भरता समाप्त हो जाएगी। सरकार अभी किराए के विमान का उपयोग करने के लिए प्रति घंटा दो से पांच लाख रुपये किराया देती है।

    इसके अलावा, प्लेन का उपयोग हो या न हो, स्टेट हैंगर पर खड़े रहने का प्रतिदिन 10 लाख रुपये भुगतान करना होता है। इसके लिए अलग-अलग 12 विमान कंपनियों के साथ अनुबंध किया गया है। पिछले लंबे समय से यही व्यवस्था है, जिस वजह से राज्य का एक बड़ा बजट किराया भरने में ही चला जाता है।

    यह जेट प्लेन केवल छह शहरों की हवाई पट्टियों पर ही उतरने लायक है। इन शहरों में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा और सिंगरौली शामिल हैं। इन शहरों के अलावा मुख्यमंत्री इस प्लेन का उपयोग प्रदेश के अन्य शहरों तक पहुंचने में नहीं कर पाएंगे।

    इस प्लेन की सीटिंग कैपेसिटी आठ प्लस टू है, जिसका अर्थ है कि प्लेन में आठ यात्री बैठ सकेंगे और दो पायलट रहेंगे।

    देसी पायलट अटक रहे
    फिलहाल यह जानकारी सामने आई है कि इस हाई-टेक जेट को आसमान में उतारने के लिए भेजे गए दोनों भारतीय पायलट जब अपनी पहली कोशिश में कठिन टेस्ट पूरी तरह पास नहीं कर पाए, तो सुरक्षा से कोई समझौता न करते हुए उन्हें दोबारा गहन ट्रेनिंग दिलाई गई। अब ये दोनों पायलट सह-पायलट की भूमिका निभाएंगे। जबकि विमान की मुख्य कमान एक अनुभवी विदेशी पायलट के हाथों में होगी।

    विदेशी पायलट फिलहाल उड़ाएंगे
    विमानन नियमों के मुताबिक इसके लिए 'फॉरेन एयरक्रू टेम्परेरी ऑथराइजेशन' (FATA) की मंजूरी ली गई है। विमान नियम 1937 और डीजीसीए के कड़े मानकों के तहत 65 वर्ष से कम आयु और बड़े विमानों का कम से कम दो हजार घंटे का अनुभव रखने वाले विदेशी पायलट ही ऐसे विमानों को संभाल सकते हैं, जिसकी वैधता दिसंबर 2026 तक है।

    टर्बुलेंस को भी देता है मात
    गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के पुराने टर्बोप्रॉप विमान के मुकाबले यह नया विमान लगभग 50 प्रतिशत तेज और आधुनिक सुविधाओं से लैस यह जेट 45 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़कर टर्बुलेंस को मात देता है। इसकी 870 किमी/घंटा की रफ्तार इसे भोपाल से सीधे टोक्यो तक पहुंचाने में सक्षम है। सुरक्षा और तकनीकी जांच के तमाम कड़े दौर से गुजरने के बाद यह वीवीआईपी जेट मुख्यमंत्री के सुरक्षित और आरामदायक दौरों का नया सारथी बनने जा रहा है। पुराने टर्बोप्रॉप विमान की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत तेज और आधुनिक सुविधाओं से लैस इस जेट को उतरने के लिए कम से कम 5,500 फीट लंबे रनवे की जरूरत होगी, जिससे यह भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और खजुराहो सहित चुनिंदा हवाई पट्टियों पर ही संचालित हो सकेगा।

     

  • सुल्तानपुर में सुखोई और मिराज की गरज, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर पहली बार बनेगा एयरफोर्स रनवे

    सुल्तानपुर में सुखोई और मिराज की गरज, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर पहली बार बनेगा एयरफोर्स रनवे

    सुल्तानपुर
     उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में बनें पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर बुधवार को इंडियन एयरफोर्स का युद्धभ्यास होगा. एक्सप्रेसवे के एक हिस्से में वायुसेना के लिए बने रनवे पर आधुनिक लड़ाकू विमान जैसे सुखोई और मिराज इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड एक्टिवेशन एक्सरसाइज करते नजर आएंगे. यह आयोजन युद्ध जैसी आपात स्थित से निपटने के लिए नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर किया जा रहा है. इसका आयोजन उस दिन किया जा रहा है, जब आज पहलगाम हमले बरसी है, जिसमें पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा 26 निर्दोष भारतियों का कत्लेआम किया गया था. जिसके बाद इंडियन आर्म्ड फोर्सेज की तरफ से 6 मई को ऑपरेशन सिन्दूर के तहत पाकिस्तान पर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। 

    रिपोर्ट के अनुसार, एक्सप्रेसवे के चयनित हिस्से को इस तरह विकसित किया गया है कि जरूरत पड़ने पर यह पूरी तरह हवाई पट्टी का काम कर सके. इसके लिए सड़क की चौड़ाई, मजबूती और सतह की गुणवत्ता को विशेष मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है. साथ ही आसपास का क्षेत्र भी इस तरह व्यवस्थित किया गया है कि विमान संचालन के दौरान किसी प्रकार की बाधा न आए। 

    इस समय होगा आयोजन
    दोपहर 2 बजे से लेकर रात 8 बजे तक लगातार एयर शो का आयोजन होगा. खास बात यह है कि रात के अंधेरे में होने वाला एरियल लाइट शो दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा. बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में फाइटर जेट्स इस हवाई पट्टी पर उतरेंगे, जिससे आयोजन और भी भव्य बनेगा. वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव और पहलगाम हमले की पहली बरसी को देखते हुए इस सैन्य प्रदर्शन ने लोगों में देशभक्ति का जज्बा और भी मजबूत कर दिया है। 

    ड्रिल का यह है उद्देश्य
    प्रशासन और वायुसेना के अधिकारियों के बीच इस आयोजन को लेकर लगातार समन्वय किया जा रहा है. आज दोपहर दो बजे से यहां अभ्यास किया जाएगा, जिसमें सुखोई और मिराज जैसे लड़ाकू विमान इस एक्सप्रेसवे पर उतरकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन करेंगे. इस अभ्यास का उद्देश्य आपात स्थिति में वैकल्पिक रनवे की उपयोगिता को परखना है. यह अभ्यास इसलिए भी जरूरी है, ताकि युद्ध या अन्य संकट की स्थिति में पारंपरिक एयरबेस के अलावा भी विमानों के संचालन के विकल्प उपलब्ध होंगे. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पहले से ही उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना है, और अब इसका यह सैन्य उपयोग इसे और अधिक रणनीतिक महत्व प्रदान करता है. स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं, ताकि अभ्यास के दौरान आम लोगों को असुविधा न हो और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जा सके। 

  • वायुसेना का Su-30 MKI विमान क्रैश, दोनों पायलटों की जान गई

    वायुसेना का Su-30 MKI विमान क्रैश, दोनों पायलटों की जान गई

    गुवाहाटी

    भारतीय वायुसेना का एक सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट गुरुवार शाम को असम में लापता हो गया. देर रात इसके क्रैश होने की पुष्टि हुई. फाइटर जेट ने असम के जोरहाट से उड़ान भरी थी और शाम 7.42 बजे के बाद रडार से उसका संपर्क टूट गया. विमान का पता लगाने के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) ने सर्च और रेस्क्यू मिशन शुरू किया है।

    वायुसेना ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि IAF स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरगकर के निधन पर दुख जताता है, जिन्हें Su-30 क्रैश में जानलेवा चोटें आईं। IAF के सभी कर्मचारी गहरी संवेदना जताते हैं, और इस दुख की घड़ी में दुखी परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं।

    भारतीय वायुसेना ने अपने X हैंडल पर खोए हुए फाइटर जेट का अपडेट शेयर करते हुए लिखा, 'हमारे एक Su-30 MKI के लापता होने की खबर है. एयरक्राफ्ट ने असम के जोरहाट से उड़ान भरी थी और आखिरी बार शाम 7.42 बजे रडार के संपर्क में आया था. आगे की जानकारी का पता लगाया जा रहा है. एक सर्च और रेस्क्यू मिशन शुरू किया गया है।' 

    इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी सुपरमैन्यूवरबिलिटी, लंबी मारक क्षमता और दो इंजन वाला शक्तिशाली डिजाइन है. सुखोई-30 एमकेआई ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ले जाने में भी सक्षम है, जिससे इसकी स्ट्राइक कैपेसिटी कई गुना बढ़ जाती है. इसमें आधुनिक एवियोनिक्स, मल्टी-फंक्शन रडार, थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल और लंबी दूरी तक उड़ान की क्षमता है. यह लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाता है और देश की वायु सुरक्षा व सामरिक ताकत में इसकी भूमिका बेहद अहम है।

    सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना का सबसे ताकतवर और भरोसेमंद मल्टी रोल फाइटर जेट है. इसे 2000 के दशक की शुरुआत में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था. यह रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो द्वारा विकसित किया गया है. भारतीय वायुसेना इस फाइटर जेट का विशेष रूप से कस्टमाइज संस्करण इस्तेमाल करती है, जिसमें MKI का अर्थ है मॉडर्नाइज्ड, कमर्शियल और इंडियन. यह विमान हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्री लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है।

    रूस में इस एयरक्राफ्ट का प्रोडक्शन 2000 में शुरू हुआ था, जब नई दिल्ली ने मॉस्को से 140 Su-30 फाइटर एयरक्राफ्ट बनाने के लिए कहा था. पहला एयरक्राफ्ट 2002 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था, और तब से, समय के साथ इसकी संख्या बढ़ती ही गई है।. आज, Su-30 भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े में सबसे बड़ा हिस्सा रखता है