Tag: air

  • हवाई कनेक्टिविटी में MP की बड़ी छलांग, भोपाल-अयोध्या-शारजाह और इंदौर-बैंकॉक रूट जुड़ेंगे

    हवाई कनेक्टिविटी में MP की बड़ी छलांग, भोपाल-अयोध्या-शारजाह और इंदौर-बैंकॉक रूट जुड़ेंगे

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश के हवाई नेटवर्क के विस्तार की दिशा में तीन नई विमान सेवाएं शुरू करने की तैयारी है। भोपाल से अयोध्या और शारजाह के लिए सीधी उड़ान शुरू करने की योजना पर काम चल रहा है। वहीं, इंदौर से बैंकॉक के लिए भी विमान सेवा शुरू करने की तैयारी है। फिलहाल इन तीनों शहरों के लिए मध्य प्रदेश से सीधी विमान सेवा उपलब्ध नहीं है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दुबई दौरे के दौरान भोपाल से अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा शुरू करने को लेकर निजी निवेशकों से चर्चा हुई थी। इसके बाद एक निजी विमानन कंपनी के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर विमान सेवा के क्षेत्र में निवेश का प्रस्ताव रखा। अब राज्य शासन ने इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से पहले उड़ान शुरू करने की तैयारी
    नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के निर्धारित मानकों के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद भोपाल और इंदौर से प्रस्तावित उड़ानें शुरू करने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य इन्हें ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से पहले शुरू करने का है।

    नई विमान सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य की विमानन नीति के तहत संबंधित निजी विमानन कंपनी को अनुदान भी दिया जाएगा। इससे नई उड़ानों के संचालन को आर्थिक सहयोग मिलने की उम्मीद है।

    भोपाल को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा
    भोपाल से शारजाह के लिए सीधी उड़ान शुरू होने के बाद राजा भोज विमानतल अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन वाले हवाई अड्डों की सूची में शामिल हो जाएगा। इसके साथ ही भोपाल से विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को दूसरे शहरों के एयरपोर्ट पर निर्भरता कम हो सकती है।

    ई-गेट से होगी यात्रियों की क्लीयरेंस
    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एयरपोर्ट पर यात्रियों की क्लीयरेंस प्रक्रिया ई-गेट के माध्यम से पूरी करने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए इमीग्रेशन और कस्टम विभाग के कर्मचारियों की तैनाती भी की जाएगी।

    एयरपोर्ट को कस्टम दर्जा मिलने के बाद लाउंज के पास नया इंटरनेशनल विंग तैयार किया गया है। इस विंग में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच, क्लीयरेंस और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं के लिए आठ काउंटर स्थापित किए गए हैं।

    अयोध्या, शारजाह और बैंकॉक से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
    भोपाल से अयोध्या और शारजाह तथा इंदौर से बैंकॉक की सीधी उड़ान शुरू होने पर प्रदेश की धार्मिक, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को विस्तार मिलेगा। खासतौर पर भोपाल से शारजाह और इंदौर से बैंकॉक की उड़ानें प्रदेश के यात्रियों को विदेश यात्रा के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराएंगी।

     

  • पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव बढ़ा, एयरस्ट्राइक में 28 लोगों के मारे जाने की खबर

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव बढ़ा, एयरस्ट्राइक में 28 लोगों के मारे जाने की खबर

    नूरगल
    पाकिस्तान ने सोमवार को अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में एयरस्ट्राइक की। पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया कि हमले में 28 मारे गए। वहीं, तालिबान सरकार ने कहा कि कुनार में 3 नागरिकों की मौत हुई और 4 लोग घायल हुए।

    तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बताया कि कुनार में एक घर पर हुए हमले में एक महिला और दो पुरुष मारे गए। पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में भी दो जगहों पर बमबारी हुई। यहां एक घर और दुकान को नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी के मारे जाने की जानकारी नहीं है।

    मुजाहिद ने कहा कि अफगानिस्तान इस हमले का उचित जवाब देगा। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन से आतंकी उसके खिलाफ हमले कर रहे हैं। हालांकि तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती है।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इन हमलों में कितने लोग मारे गए या घायल हुए हैं और कितना नुकसान हुआ है. जानकारी अभी शुरुआती दौर में है, इसलिए स्थिति की पूरी तस्वीर सामने आने में समय लग सकता है. स्थानीय परिवारों को रात के समय अचानक हुए इन हवाई हमलों का सामना करना पड़ा, जिसकी वजह से डर और तनाव का माहौल पैदा होने की खबर है। 

    आतंकवाद के बहाने अफगानिस्तान में घुस गए 
    आपको बता दें कि 20 सितंबर, 2026 को पाकिस्तान के हंगू जिले में सुरक्षा बलों के काफिले और आतंकियों के बीच गोलीबारी हुई. पाकिस्तानी सेना ने जानकारी दी है कि इस मुठभेड़ में प्रभावी कार्रवाई के दौरान आठ आतंकियों को मार गिराया गया और एक बार फिर से पाकिस्तानी फौज ने इसमें भारत का नाम जोड़ा. ऐसा ही वो अफगानिस्तान को लेकर करता रहा है. अपने आंतरिक हालात जब उससे संभलते नहीं हैं तो वो भारत और अफगानिस्तान पर आरोप लगाने लगता है. इसके साथ ही तलाशी और सफाई अभियान के नाम पर अफगानी सरहद में घुस जाना उसके लिए कोई नई बात नहीं है। 

    .हमले से जुड़ी रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नूर मोहम्मद के घर पर पाकिस्तानी सैन्य बलों ने बम गिराए और पूरा घर तबाह हो गया. स्थानीय लोगों के मुताबिक, हमले के बाद मलबे से बमों के अवशेष मिले हैं. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि हमले में घर के अंदर कितने लोग मौजूद थे और नुकसान कितना हुआ है। 

    कुनार में यह एयरस्ट्राइक ऐसे समय में हुई है, जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है. सामने आई रिपोर्टों में इसे पाकिस्तानी विमानों की ओर से की गई ताजा कार्रवाई बताया गया है. फिलहाल हमले में हुए कुल नुकसान और हताहतों की पूरी जानकारी का इंतजार है। 

    दोनों देशों के बीच लगातार बना है तनाव 
        फरवरी, 2026 में सीमा पर बढ़ते तनाव के बाद अफगान तालिबान बलों ने पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर जवाबी और आक्रामक हमले किए। 

    पाकिस्तान ने जवाब में 27 फरवरी 2026 को इसके जवाब में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर काबुल, कंधार और पख्तिया जैसे इलाकों में हवाई व जमीनी हमले तेज कर दिए और इसे खुले युद्ध जैसी स्थिति करार दिया। 

        मार्च के बीच में दोनों पक्षों में लगातार संघर्ष जारी रहा, जिसमें काबुल पर हुए हमलों में भारी जानमाल का नुकसान हुआ. कतर, सऊदी अरब और तुर्की की मध्यस्थता से ईद-उल-फितर के अवसर पर मार्च के अंत में कुछ दिनों के लिए अस्थायी युद्धविराम हुआ, लेकिन छिटपुट तनाव और संघर्ष का दौर बीच-बीच में जारी रहा है. इससे पहले अक्टूबर, 2025 में भी दोनों देशों के बीच गंभीर सीमा-संघर्ष हुआ था। 

     

  • Aerospace सेक्टर में भारत-रूस की नई उड़ान, IL-114-300 और SJ-100 को लेकर बढ़ी साझेदारी की उम्मीद

    Aerospace सेक्टर में भारत-रूस की नई उड़ान, IL-114-300 और SJ-100 को लेकर बढ़ी साझेदारी की उम्मीद

     नई दिल्ली

    रूस अब भारत के साथ सिर्फ पारंपरिक रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहता. वह नागरिक विमानन क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. रूस एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (यूएसी) के सीईओ वादिम बाडेखा ने हाल ही में बताया कि पिछले छह महीनों में भारतीय कंपनियों के साथ बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। 

    नई दिल्ली में चल रहे इन्नोप्रोम इंडिया प्रदर्शनी के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते औपचारिक रूप लेने वाले हैं. इस प्रदर्शनी में 120 से ज्यादा रूसी और भारतीय कंपनियां हिस्सा ले रही हैं. यह आयोजन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रहा है, जिससे दोनों देशों के औद्योगिक सहयोग को गति मिलने की उम्मीद है। 

    सबसे ज्यादा चर्चा आईएल-114-300 क्षेत्रीय यात्री विमान को लेकर हो रही है. यह विमान छोटी और मध्यम दूरी की उड़ानों के लिए बनाया गया है. रूसी कंपनियां भारतीय एयरलाइंस और ऑपरेटरों को यह विमान बेचने के लिए सक्रिय हैं। 

    प्रस्तावित सौदों में पिनेकल एयर के लिए 50 विमान, एयर केरल के लिए 20 विमान और स्लीक एविएशन से जुड़े एमओयू के तहत 35 विमान शामिल हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि रूस पक्ष भारत में कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाले विमानों की बड़ी मांग देख रहा है। 

    आईएल-114-300: क्षेत्रीय उड़ानों का संभावित गेम चेंजर
    आईएल-114-300 एक टर्बोप्रॉप क्षेत्रीय यात्री विमान है जिसे रूस यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन ने विकसित किया है. यह विमान मुख्य रूप से छोटे शहरों और क्षेत्रीय मार्गों को जोड़ने के लिए उपयुक्त माना जाता है. भारत जैसे विशाल देश में जहां कई छोटे शहर अभी भी अच्छी हवाई कनेक्टिविटी का इंतजार कर रहे हैं, ऐसे विमान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 

    जनवरी में विंग्स इंडिया एविएशन एग्जीबिशन के दौरान हैदराबाद में यूएसी ने भारतीय कंपनी फ्लेमिंगो एयरोस्पेस के साथ छह आईएल-114-300 विमानों की संभावित आपूर्ति के लिए प्रारंभिक समझौता किया था. अब इन्नोप्रोम के दौरान इससे बड़े सौदे होने की संभावना जताई जा रही है। 

    अगर ये समझौते सफल होते हैं तो यह न सिर्फ रूसी विमानों के लिए भारतीय बाजार का दरवाजा खोलेगा बल्कि भारत की क्षेत्रीय हवाई सेवाओं को भी नई दिशा देगा. भारतीय पक्ष के लिए यह आकर्षक इसलिए भी है क्योंकि कई घरेलू ऑपरेटर छोटे विमानों की तलाश में हैं जो कम यात्री क्षमता वाले मार्गों पर आर्थिक रूप से प्रैक्टिकल हों. बड़े जेट विमान इन मार्गों पर घाटे में चलते हैं, जबकि टर्बोप्रॉप विमान ईंधन की बचत और संचालन लागत कम रखने में मदद कर सकते हैं। 

    एसजे-100 का स्थानीय उत्पादन: मेक इन इंडिया की दिशा में कदम
    आईएल-114-300 के अलावा रूस पक्ष एसजे-100 क्षेत्रीय जेट के भारत में स्थानीय उत्पादन पर भी गंभीरता से काम कर रहा है. यूएसी के अनुसार इस विषय पर बातचीत लगभग 80% पूरी हो चुकी है. जल्द ही समझौता होने की उम्मीद है. इससे पहले यूएसी और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने एसजे-100 के संयुक्त लाइसेंस प्राप्त उत्पादन से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। 

    एसजे-100 एक आधुनिक क्षेत्रीय जेट है जिसे रूस ने विकसित किया है. भारत में इसका उत्पादन शुरू होने से न सिर्फ तकनीक का हस्तांतरण होगा बल्कि स्थानीय निर्माण क्षमता भी बढ़ेगी. भारतीय कंपनियां अगर इस विमान का बड़ा हिस्सा देश में ही बना पाती हैं तो लागत कम होगी, रोजगार बढ़ेगा और भविष्य में निर्यात की संभावनाएं भी खुलेंगी।

    स्थानीय उत्पादन की बातचीत इतनी आगे बढ़ना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच सिर्फ खरीदार-विक्रेता का रिश्ता नहीं बल्कि साझा विनिर्माण साझेदारी बनेगी. रक्षा क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे सहयोग के बाद नागरिक विमानन में भी ऐसा मॉडल अपनाना दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। 

    भारत-रूस सहयोग का नया अध्याय
    भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग दशकों पुराना है. लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर, मिसाइल सिस्टम और अन्य प्लेटफॉर्म दोनों देशों के रिश्ते की रीढ़ रहे हैं. अब रूस नागरिक विमानन क्षेत्र में भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है. पश्चिमी देशों पर प्रतिबंधों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के बीच रूस नए बाजारों की तलाश में है. भारत उसकी नजर में एक बड़ा और स्थिर बाजार है। 

    इन्नोप्रोम इंडिया प्रदर्शनी इसी रणनीति का हिस्सा लगती है. यहां सिर्फ विमान सौदों की बात नहीं हो रही बल्कि औद्योगिक सहयोग के कई अन्य क्षेत्रों पर भी चर्चा हो रही है. 120 से अधिक कंपनियों की भागीदारी से साफ है कि दोनों देश सिर्फ सरकारी स्तर पर नहीं बल्कि निजी क्षेत्र से भी रिश्ते मजबूत करना चाहते हैं। 

    क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भारत सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. उड़ान योजना के तहत छोटे शहरों को हवाई सेवा से जोड़ने के प्रयास चल रहे हैं. रूसी क्षेत्रीय विमान अगर प्रतिस्पर्धी कीमत और विश्वसनीय सेवा के साथ आते हैं तो वे इस लक्ष्य को पूरा करने में मददगार साबित हो सकते हैं. साथ ही स्थानीय उत्पादन से भारत की विमानन विनिर्माण क्षमता भी मजबूत होगी। 

    संभावनाएं और चुनौतियां दोनों मौजूद
    ये प्रस्ताव आशाजनक जरूर हैं लेकिन कई चुनौतियां भी हैं. सबसे पहले प्रमाणन और नियामक मंजूरी का मुद्दा. किसी भी नए विमान को भारतीय आसमान में उड़ान भरने के लिए सख्त सुरक्षा और प्रमाणन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. दूसरी चुनौती रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता है. लंबे समय तक विमानों को सुचारू रूप से चलाने के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम जरूरी होता है। 

    तीसरी चुनौती कॉम्पीटिशन है. भारतीय बाजार में अन्य देशों के क्षेत्रीय विमान भी मौजूद हैं या आने की कोशिश कर रहे हैं. कीमत, फ्यूल एफिसिएंसी, यात्री सुविधा और आफ्टर सेल्स सपोर्ट जैसे मुद्दे फैसला करने वाले साबित होंगे. चौथी बात फाइनेंशियल सपोर्ट की है. बड़े सौदों के लिए आसान ऋण सुविधा या लीजिंग व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 

    इन चुनौतियों के बावजूद रूस पक्ष आशावादी नजर आ रहा है. पिछले छह महीनों में हुई प्रगति और इन्नोप्रोम में संभावित समझौते इस बात का संकेत देते हैं कि दोनों देश व्यावहारिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. अगर आईएल-114-300 के बड़े ऑर्डर और एसजे-100 का स्थानीय उत्पादन दोनों सफल होते हैं तो यह भारत-रूस एयरोस्पेस संबंधों का नया अध्याय साबित हो सकता है। 

    आगे की राह और रणनीतिक महत्व

    भारत के लिए यह सहयोग कई मायनों में फायदेमंद हो सकता है. 

        पहला- क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी में सुधार. 
        दूसरा- घरेलू विनिर्माण क्षमता का विकास. 
        तीसरा- आपूर्ति स्रोतों में विविधता. 

    एक ही देश या क्षेत्र पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत रूस विकल्प उपयोगी साबित हो सकता है. रूस के लिए भारत एक बड़ा बाजार है जहां वह अपने नागरिक विमानों को जगह दे सकता है. साथ ही स्थानीय उत्पादन से वह तकनीक साझा कर दीर्घकालिक साझेदारी बना सकता है। 

    ब्रिक्स जैसे मंचों पर दोनों देश पहले से सहयोग कर रहे हैं. औद्योगिक और तकनीकी सहयोग को और गहरा करने से यह रिश्ता और मजबूत होगा. कुल मिलाकर, इन्नोप्रोम इंडिया में होने वाले संभावित समझौते सिर्फ कुछ विमानों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहेंगे। 

    वे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, स्थानीय विनिर्माण और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दे सकते हैं. IL-114-300 और SJ-100 जैसे प्रस्ताव अगर धरातल पर उतरते हैं तो भारत-रूस सहयोग रक्षा से आगे बढ़कर नागरिक एयरोस्पेस क्षेत्र में भी मजबूती से स्थापित हो जाएगा. यह दोनों देशों के लिए आपसी लाभ का नया अध्याय साबित हो सकता है। 

     

  • Air India Express फ्लाइट में मिड-एयर इमरजेंसी, 36 हजार फीट पर इंजन बंद कर कोच्चि लौटे पायलट

    Air India Express फ्लाइट में मिड-एयर इमरजेंसी, 36 हजार फीट पर इंजन बंद कर कोच्चि लौटे पायलट

    कोच्चि
    कोच्चि से अबू धाबी जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX 415 (बोइंग 737) को बीच रास्ते में ही वापस लौटना पड़ा। क्रू को पता चला कि इंजन 1 में ऑयल का लेवल तेज़ी से गिर रहा है और जब ऑयल प्रेशर डेंजर ज़ोन में पहुंच गया, तो उन्होंने इंजन बंद कर दिया। प्लेन कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरा। प्लेन में सवार यात्रियों को पता नहीं था कि स्थिति कितनी गंभीर हो गई थी। 

    सूत्रों के मुताबिक, टेक-ऑफ के करीब 50 मिनट बाद और 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते समय पायलट और को-पायलट ने देखा कि इंजन 1 में ऑयल का लेवल तेज़ी से गिर रहा है। क्रू ने FORDEC असेसमेंट किया। ऑयल का लेवल लगातार गिरते देख, उन्होंने अबू धाबी जाने का प्लान छोड़कर कोच्चि वापस लौटने का फैसला किया। इसके बाद कमांडर ने हाई फ्रीक्वेंसी पर मुंबई रेडियो से संपर्क किया और ATC को बताया कि फ्लाइट कोच्चि वापस लौट रही है। प्लेन का रास्ता बदलने के दौरान स्टैंडर्ड सेफ्टी प्रोसीजर का पालन किया गया। रास्ता बदलने के पूरे समय, दोनों पायलट इंजन के पैरामीटर्स पर नज़र रखे हुए थे और किसी भी स्थिति के लिए तैयार थे। 

    वापस मुड़ने के करीब 45 मिनट बाद, इंजन 1 का ऑयल प्रेशर ऊपर-नीचे होने लगा और कॉकपिट गेज पर रेड ज़ोन में पहुंच गया, जो डेंजर रेंज में गिरावट का संकेत था। इसके बाद क्रू ने नॉन-नॉर्मल चेकलिस्ट (NNC) का पालन किया और इंजन 1 बंद कर दिया। ज़्यादा वज़न वाले बोइंग 737 को एक इंजन पर लैंड कराना बहुत ज़्यादा काम और जोखिम वाला काम होता है। क्रू ने इसे आसानी से पूरा किया। यात्रियों को कॉकपिट में हुई घटना की गंभीरता का अंदाज़ा नहीं हुआ। 

    भारतीय एयरलाइंस में टेक्निकल डायवर्जन लगभग हर हफ़्ते होने वाली घटना बन गई है। यह ताज़ा घटना एयर इंडिया पर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की शुरुआती रिपोर्ट आने के कुछ दिनों बाद हुई है। फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट। उस रिपोर्ट में बताया गया है कि एयरबस के टेक्निकल एक्सपर्ट्स ने जांच टीम की मौजूदगी में उस विमान की तीन दिनों तक जांच की। इसके बाद आगे की जांच के लिए हाइड्रोलिक पार्ट्स और हाइड्रोलिक सैंपल इकट्ठा किए गए। फुकेत-दिल्ली घटना के बाद, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि DGCA फ़्लाइट क्रू के लिए साइकोएक्टिव पदार्थों (नशीले पदार्थों) के टेस्ट का सालाना प्रतिशत बढ़ाएगा। 

    एयर इंडिया एक्सप्रेस के इंजन-ऑयल वाली घटना से अब एक और सवाल उठता है: क्या नागरिक उड्डयन मंत्रालय DGCA के सेफ्टी ऑडिट के नियमों को भी और सख्त करेगा? US फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) आमतौर पर हर पांच साल में एक बार इंटरनेशनल एविएशन सेफ्टी असेसमेंट (IASA) प्रोग्राम के तहत किसी देश की सेफ्टी निगरानी की समीक्षा करता है। भारत का पिछला बड़ा IASA ऑडिट अक्टूबर 2021 में हुआ था; अगला ऑडिट इस साल नवंबर में होने की उम्मीद है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नई दिल्ली DGCA सेफ्टी ऑडिट से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए इस मौके का इस्तेमाल करती है या नहीं। एयर इंडिया एक्सप्रेस और DGCA की आधिकारिक टिप्पणी का इंतज़ार है।