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  • Air India पर बढ़ा वित्तीय दबाव, रिकॉर्ड घाटे के बाद टर्नअराउंड के लिए चाहिए भारी फंडिंग

    Air India पर बढ़ा वित्तीय दबाव, रिकॉर्ड घाटे के बाद टर्नअराउंड के लिए चाहिए भारी फंडिंग

     नई दिल्ली
    एअर इंडिया ने अपने मालिकों टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब $1.5 बिलियन (₹14,355) की नई इक्विटी फंडिंग मांगी है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत करने वाले दो सूत्रों के मुताबिक, एयरलाइन को इस पूंजी की तत्काल जरूरत है. हालांकि, प्रस्तावित फंडिंग एकमुश्त देने के बजाय किस्तों में भी दी जा सकती है. फिलहाल इस प्रस्ताव पर बातचीत जारी है और टाटा संस या सिंगापुर एयरलाइंस की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। 

    एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में संयुक्त रूप से $2.33 बिलियन (₹22,180) का घाटा दर्ज किया है. यह दोनों एयरलाइंस का रिकॉर्ड वार्षिक नुकसान बताया जा रहा है. पिछले वित्त वर्ष की तुलना में यह घाटा दोगुने से भी ज्यादा रहा. एअर इंडिया के भारी नुकसान का असर उसकी शेयरहोल्डर सिंगापुर एयरलाइंस के मुनाफे पर भी पड़ा है. ऐसे में नई इक्विटी की मांग एयरलाइन के बड़े ट्रांसफॉर्मेशन और टर्नअराउंड प्लान के सामने मौजूद वित्तीय दबाव को दिखाती है। 

    टाटा द्वारा अधिग्रहण के बाद सबसे बड़ी फंडिंग

    टाटा ग्रुप द्वारा 2022 में अधिग्रहण करने के बाद से यह एअर इंडिया की सबसे बड़ी पब्लिक फंडिंग की डिमांड है. एयरलाइन पहले सरकार के स्वामित्व में थी. टाटा ग्रुप ने इसे फिर से मजबूत बनाने के लिए बड़े स्तर पर बदलाव की योजना बनाई थी, जिसमें पुराने विमानों का रिफर्बिशमेंट, नए विमान शामिल करना, नेटवर्क विस्तार और संचालन में सुधार जैसे कदम शामिल हैं. हालांकि, भारी नुकसान और बढ़ती पूंजी जरूरतों के बीच अब इस टर्नअराउंड प्लान पर वित्तीय दबाव बढ़ता दिख रहा है। 

    एअर इंडिया को तुरंत चाहिए पैसा
    न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, दो सूत्रों ने बताया कि एअर इंडिया यह रकम नई इक्विटी के तौर पर चाहती है. एक सूत्र के अनुसार, एयरलाइन को पूंजी की तत्काल जरूरत है, हालांकि निवेश को चरणबद्ध तरीके से भी किया जा सकता है. इस निवेश में सिंगापुर एयरलाइंस को भी अपनी हिस्सेदारी के अनुपात में योगदान करना होगा. सिंगापुर एयरलाइंस की एअर इंडिया में करीब 25 फीसदी हिस्सेदारी है। 

    फंडिंग पर अभी कोई फैसला नहीं
    सूत्रों के मुताबिक, फंडिंग को लेकर बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. दोनों सूत्रों ने पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर जानकारी दी, क्योंकि वे इस मामले पर सार्वजनिक रूप से बोलने के लिए अधिकृत नहीं थे। 

    न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के सवालों पर एअर इंडिया और टाटा संस ने कोई टिप्पणी नहीं की. सिंगापुर एयरलाइंस ने कहा कि वह टाटा संस के साथ मिलकर एअर इंडिया के ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम को सपोर्ट कर रही है. हालांकि, कंपनी ने एअर इंडिया की वित्तीय स्थिति पर टिप्पणी करने से इनकार किया

    एयरलाइन को कई मोर्चों पर झटके
    एअर इंडिया के टर्नअराउंड के बीच एयरलाइन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. भारतीय एयरलाइंस के लिए पाकिस्तान के एयरस्पेस पर लगी पाबंदी से उसके परिचालन पर असर पड़ा. इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने एयरलाइन के इंटरनेशनल नेटवर्क को प्रभावित किया. पिछले साल हुए घातक विमान हादसे का असर भी एअर इंडिया को झेलना पड़ा, जिसमें 260 लोगों की जान गई थी. इन घटनाओं ने एयरलाइन के संचालन और वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डाला है। 

    टर्नअराउंड में लग सकते हैं 10 साल
    टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन पहले कह चुके हैं कि एअर इंडिया के टर्नअराउंड में 10 साल तक का समय लग सकता है. उनके मुताबिक, एयरलाइन को सप्लाई चेन की बाधाओं के साथ-साथ पुराने सिस्टम, कार्य संस्कृति और फ्लीट में बड़े बदलाव की जरूरत है. इस बीच लागत घटाने की कोशिशें भी जारी हैं. रॉयटर्स ने इस साल रिपोर्ट किया था कि टाटा ग्रुप एयरबस और बोइंग से ऑर्डर किए गए सैकड़ों विमानों की डिलीवरी को टालने पर विचार कर रहा है, ताकि खर्च को नियंत्रित किया जा सके। 

  • दिल्ली एयरपोर्ट पर एयर इंडिया विमान में हड़कंप, अचानक झटका लगने से छत से टकराए यात्रियों के सिर

    दिल्ली एयरपोर्ट पर एयर इंडिया विमान में हड़कंप, अचानक झटका लगने से छत से टकराए यात्रियों के सिर

    नई दिल्ली

    दिल्ली एयरपोर्ट पर एक बड़ा हादसा टल गया. फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट में तेज टर्बुलेंस हुआ, जिसकी वजह से कई यात्रियों को चोटें लगी हैं.मौके पर एंबुलेस बुलाकर घायलों को अस्पताल ले जाया जा रहा है. एअर इंडिया ने ये जानकारी दी है. जानकारी के मुताबिक कई एंबुलेंस एयरपोर्ट से घायलों को अस्पताल ले गई हैं. फ्लाइट में सवार एक यात्री ने बताया कि विमान बहुत तेजी से नीचे आया, जिसकी वजह से कई यात्री घायल हो गए उनको चोटें लगी हैं। 

    टर्बुलेंस इतना भयानक था कि किसी कान में तो किसी को गर्दन में चोटें आई हैं. इनका इलाज कराया जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना में 12 यात्री घायल हुए हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टर्बुलेंस के दौरान विमान अपने तय एल्टीट्यूड से 300 फीट नीचे आ गया। 

    एअर इंडिया ने पुष्टि की है कि 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली जाने वाली फ़्लाइट AI2379 को उड़ान के दौरान कुछ देर के लिए टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा, जिससे विमान की ऊंचाई में अचानक थोड़ा बदलाव आया. विमान दिल्ली में सुरक्षित उतर गया और सभी यात्री व क्रू सदस्य सुरक्षित बाहर आ गए।  

    यात्रियों ने बताया कि दिल्ली में लैंडिंग से कुछ देर पहले विमान नीचे अचानक नीचे आने लगा. और हिचकोले खाने लगा. इससे यात्रियों में चीख पुकार मच गई. इस दौरान कई यात्रियों को चोटें आईं. कुछ देर के लिए विमान में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. हालांकि पायलट ने बड़ी मुश्किल से विमान को सफलतापूर्वक लैंड करवाया। 

    हालांकि एअर इंडिया के मुताबिक अभी तक किसी को गंभीर चोट नहीं आई है.  जिन कुछ यात्रियों और क्रू सदस्यों को मामूली चोटें आईं और जिन्हें मेडिकल जांच की ज़रूरत थी, उन्हें एहतियात के तौर पर जांच और देखभाल के लिए एअर इंडिया की एयरपोर्ट टीम और मेडिकल स्टाफ द्वारा एयरपोर्ट पर ही मेडिकल सुविधा केंद्र ले जाया गया है. यात्रियों और क्रू की सुरक्षा और भलाई एअर इंडिया के लिए सबसे ज़रूरी है। 

    सीलिंग से टकराए यात्रियों के सिर
    गनीमत रही कि फ्लाइट की लैंडिंग सही सलामत हो गई और सभी यात्री सुरक्षित हैं, हालांकि चोटें उनको जरूर लगी हैं. इस हादसे के बाद सभी यात्री डरे हुए हैं. एक यात्री ने बताया कि फ्लाइट उड़ाने के समय अचानक से बहुत नीचे आ गई, जिसकी वजह से कई यात्रियों के सिर सीधा सीलिंग में टकरा गए. कई लोगों के सिर पर सूजन भी आई है.फ्लाइट पूरी फुल थी। 

    उड़ान के दौरान अचानक आया तेज टर्बुलेंस
    जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 फुकेट से दिल्ली के लिए उड़ान भरकर आ रही थी. यात्रा के दौरान विमान अचानक तेज टर्बुलेंस की चपेट में आ गया. इस दौरान विमान की ऊंचाई में कुछ समय के लिए तेजी से बदलाव हुआ, जिससे यात्रियों को जोरदार झटके महसूस हुए. विमान के भीतर मौजूद यात्रियों के अनुसार, कुछ क्षणों के लिए ऐसा महसूस हुआ मानो विमान तेजी से नीचे की ओर जा रहा हो. अचानक आए इन झटकों के कारण कई यात्री अपनी सीटों से उछल गए और कुछ को चोटें भी आईं। 

    यात्रियों में मच गई अफरा-तफरी
    टर्बुलेंस के दौरान विमान के अंदर घबराहट का माहौल बन गया. कई यात्री डर के कारण सहम गए और स्थिति सामान्य होने तक तनाव में रहे. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, झटके इतने तेज थे कि कई लोगों को मामूली चोटें आईं. हालांकि क्रू मेंबर्स ने स्थिति को संभालते हुए यात्रियों को शांत रहने की अपील की और सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश दिए. इसी वजह से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। 

    दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरा विमान
    घटना के बावजूद एयर इंडिया की फ्लाइट ने दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग की. विमान के उतरते ही राहत और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था की गई. एयरपोर्ट पर पहले से एंबुलेंस तैनात की गईं और जिन यात्रियों को चोट लगी थी, उन्हें तत्काल मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया. कुछ घायलों को एहतियातन अस्पताल भी भेजा गया ताकि उनकी विस्तृत जांच की जा सके। 

    एयर इंडिया ने जारी किया आधिकारिक बयान
    एयर इंडिया ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि 4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही फ्लाइट AI2379 को उड़ान के दौरान कुछ समय के लिए टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था. इस दौरान विमान की ऊंचाई में अस्थायी बदलाव हुआ, लेकिन सभी सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया गया और विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंच गया. एयरलाइन के अनुसार, सभी यात्री और क्रू सदस्य सुरक्षित हैं. कुछ यात्रियों और क्रू मेंबर्स को हल्की चोटें आई हैं, जिन्हें चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई है। 

    घायलों को मेडिकल सेंटर में दी गई सहायता
    एयर इंडिया ने बताया कि जिन लोगों को चोटें आई थीं, उन्हें एहतियात के तौर पर एयरपोर्ट के मेडिकल सेंटर में जांच और उपचार के लिए भेजा गया. एयरलाइन प्रभावित यात्रियों को हर संभव सहायता उपलब्ध करा रही है. कंपनी ने यह भी कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच संबंधित अधिकारियों के सहयोग से की जा रही है। 

    विमान की दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग, सभी यात्री सुरक्षित
    एअर इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि 4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही फ्लाइट AI2379 उड़ान को दौरान कुछ समय के लिए टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा. इससे विमान की ऊंचाई में थोड़े समय के लिए बदलाव हुआ. हालांकि उसने दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग की. सभी यात्री और क्रू सुरक्षित विमान से उतर गए. किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है.कुछ यात्रियों और क्रू को हल्की चोटें आईं हैं। 

    एहतियात के तौर पर मेडिकल सेंटर ले जाया गया
    एहतियात के तौर पर उन्हें एयरपोर्ट के मेडिकल सेंटर में जांच और इलाज के लिए ले जाया गया है.एयर इंडिया ने कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. भावित लोगों को हर संभव मदद दी जा रही है और घटना की जांच में संबंधित अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग किया जा रहा है। 

  • जून से एयर ट्रैवल होगा महंगा! 250 उड़ानें बंद होने से यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी

    जून से एयर ट्रैवल होगा महंगा! 250 उड़ानें बंद होने से यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी

    मुंबई 

    भारतीय घरेलू विमानन (एविएशन) क्षेत्र इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है. वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ते ईंधन के दाम, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण देश की बड़ी विमानन कंपनियां भारी दबाव में हैं. इस गंभीर संकट से निपटने और खुद को वित्तीय घाटे से बचाने के लिए एयरलाइंस ने अब विस्तार की जगह 'सर्वाइवल मोड' अपना लिया है. इसके तहत जून 2026 से देश में रोजाना लगभग 250 घरेलू उड़ानों को बंद करने का बड़ा फैसला लिया गया है। 

    इस कटौती का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला है, जिससे आगामी महीनों में हवाई सफर बेहद महंगा और सीमित हो जाएगा। 

    किन एयरलाइंस ने कितनी की कटौती?

    भारत के घरेलू विमानन बाजार में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली तीन बड़ी कंपनियां—एयर इंडिया, इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस—मिलकर अपनी उड़ानों में भारी कटौती कर रही हैं:

    एयर इंडिया: कंपनी जून और जुलाई के महीनों में अपने घरेलू परिचालन में करीब 22 प्रतिशत की कटौती करेगी. एयर इंडिया रोजाना लगभग 500 उड़ानों का संचालन करती है, जिसमें से हर दिन करीब 110 उड़ानें रद्द रहेंगी. आंकड़ों के अनुसार, जहां अप्रैल-मई में कंपनी ने 31,184 उड़ानें संचालित की थीं, वहीं जून-जुलाई के लिए केवल 22,868 उड़ानें ही शेड्यूल की गई हैं। 

    कितनी कटौती करेगी एयरलाइंस
    इंडिगो: देश की सबसे बड़ी बजट एयरलाइन इंडिगो भी अपनी घरेलू क्षमता में 5 से 7 प्रतिशत की कमी कर रही है. इसके तहत कंपनी रोजाना अपनी करीब 110 उड़ानों को रोक देगी। 

    एयर इंडिया एक्सप्रेस: टाटा समूह की यह सहयोगी एयरलाइन भी अपने घरेलू नेटवर्क से लगभग 10 प्रतिशत उड़ानों को कम करने जा रही है। 

    टियर-2 और टियर-3 शहरों पर गिरेगी सबसे गाज
    एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, इस कटौती का सबसे पहला और गंभीर असर देश के छोटे और टियर-2 शहरों पर पड़ेगा. एयरलाइंस अब केवल उन्हीं रूटों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं जहां से उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है। 

    विशेषज्ञ अजय जसरा के मुताबिक, नागपुर, इंदौर, रायपुर, रांची, सूरत, वडोदरा, कोयंबटूर और विशाखापत्तनम जैसे शहरों की कनेक्टिविटी सबसे ज्यादा प्रभावित होगी. ये ऐसे रूट हैं जो मुख्य रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) के यात्रियों और बजट ग्राहकों पर निर्भर करते हैं, जहां प्रीमियम या बिजनेस क्लास के यात्री बहुत कम होते हैं। 

    प्रभावित होने वाले मुख्य रूट: नागपुर-बेंगलुरु, नागपुर-कोलकाता, इंदौर-अहमदाबाद, सूरत-हैदराबाद और विशाखापत्तनम-पुणे जैसे मार्गों पर उड़ानों की संख्या काफी कम कर दी जाएगी। 

    हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी की आशंका
    उड़ानों की संख्या घटने और सीटों की उपलब्धता कम होने के कारण टिकटों के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकते हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि:

        मेट्रो रूट (बड़े शहर): दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के बीच किराए में 10 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है.
        टियर-2 रूट (छोटे शहर): सीमित उड़ानों के कारण इन शहरों के किराए 20 से 40 प्रतिशत तक महंगे हो जाएंगे.
        लास्ट-मिनट बुकिंग
    : यदि कोई यात्री यात्रा से ठीक पहले या वीकेंड पर टिकट बुक करता है, तो उसे 50 से 80 प्रतिशत तक का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है.

    संकट के पीछे के मुख्य कारण क्या हैं?
    विमानन क्षेत्र के इस अचानक 'सुरक्षात्मक रवैये' के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं:

    एटीएफ (विमानन ईंधन) की आसमान छूती कीमतें
    ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव की वजह से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई है. इसके कारण घरेलू हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में 25 प्रतिशत तक का उछाल आया है। 

    अंतरराष्ट्रीय परिचालन का खर्च
    पश्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लंबे रूट से जाना पड़ रहा है. इससे विदेशी उड़ानों का ईंधन खर्च करीब 100 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिसका असर घरेलू बजट पर भी पड़ रहा है। 

    कैश बचाने की मजबूरी
    एविएशन एक्सपर्ट और एवियालाज कंसल्टेंट्स के सीईओ संजय लाजर के अनुसार, एयरलाइंस इस समय केवल नगदी (Cash) बचाने और अपने ऑपरेटिंग मार्जिन को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही हैं. जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात सामान्य नहीं होते, उद्योग के लिए अगली दो तिमाहियां बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाली हैं। 

    मांग में सुस्ती
    गर्मियों की मुख्य छु
    ट्टियों के बाद जून और जुलाई में वैसे भी पर्यटन यात्राएं कम हो जाती हैं. आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण लोग गैर-जरूरी यात्राओं पर खर्च करने से बच रहे हैं। 

    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी लगा ब्रेक
    घरेलू उड़ानों के साथ-साथ एयर इंडिया ने अपने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय रूटों पर भी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित या कम कर दिया है. दिल्ली-शिकागो, दिल्ली-शंघाई, चेन्नई-सिंगापुर और मुंबई-ढाका जैसी उड़ानों पर इसका सीधा असर पड़ा है. इसके अलावा सैन फ्रांसिस्को, टोरंटो, पेरिस और ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न व सिडनी जाने वाली उड़ानों के फेरे (Frequencies) भी घटा दिए गए हैं। 

    आने वाले कुछ महीने भारतीय हवाई यात्रियों के लिए काफी परेशानी भरे हो सकते हैं. यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी यात्रा की योजना काफी पहले बनाएं और किसी भी असुविधा से बचने के लिए एयरलाइंस की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी फ्लाइट का स्टेटस लगातार चेक करते रहें। 

  • ईरान संकट से हिली Air India की रणनीति, यात्रियों पर भी पड़ सकता है असर

    ईरान संकट से हिली Air India की रणनीति, यात्रियों पर भी पड़ सकता है असर

     नई दिल्ली

    अमेरिका-ईरान युद्ध (US Vs Iran War) के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद (Hormuz Strait Closure) होने से गहराए तेल संकट का बुरा असर तमाम देशों में पड़ा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है और देश में पेट्रोल-डीजल से लेकर एलपीजी तक की किल्लत देखने को मिली. हालांकि, मोदी सरकार ने तत्काल उठाए गए बड़े कदमों के जरिए इस संकट को कम करने का प्रयास किया।  

    ईरान युद्ध और ईंधन की ऊंची कीमत का असर भारतीय एविएशन सेक्टर की दिग्गज कंपनी एअर इंडिया (Air India) पर भी पड़ा है और उसे बड़ा फैसला लेना पड़ा है. इसके तहत एयरलाइंस अपनी घरेलू उड़ानों की संख्या में 22 फीसदी कटौती करेगी।

    जून-जुलाई में पड़ेगा असर
    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध की वजह से तेल के दाम में आए उछाल ने जेट फ्यूल महंगा किया है और इसने एयरलाइन कंपनियों का गणित बिगाड़ा है. इसकी वजह से एयरलाइन की वित्तीय स्थिति पर लगातार नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिसे देखते हुए एअर इंडिया ने अचानक जून और जुलाई के दौरान अपनी घरेलू उड़ानों में 22% की कटौती करने का फैसला किया है।

    Air India ने ये फैसला ऐसे समय में लिया है, जबकि वेस्ट एशिया टेंशन के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजारों में रुकावट जारी है और एविएशन सेक्टर को लागत में भारी बढ़ोतरी से जूझना पड़ रहा है. जून-जुलाई के लिए कंपनी ने फैसला ले लिया है, जबकि अगस्त के लिए अभी बाकी है।

    ईंधन की आसमान छूती कीमतें और वित्तीय दबाव
    एयर इंडिया के अधिकारियों के अनुसार, ईरान संघर्ष से पहले विमान ईंधन की कीमत लगभग ₹80,000 प्रति किलोलीटर थी, जो अब बढ़कर ₹1 लाख प्रति किलोलीटर से अधिक हो चुकी है. वर्तमान में एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले ईंधन पर खर्च होता है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में कंपनी को ₹26,800 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 गुना अधिक है. ऐसे में इन रूटों पर उड़ानों का संचालन जारी रखना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं रह गया था।

    उड़ानों के फेरों में युक्तिसंगत कमी
    एयर इंडिया वर्तमान में प्रति सप्ताह कुल 4,400 उड़ानों का संचालन करता है, जिसमें लगभग 3,600 घरेलू और 800 अंतरराष्ट्रीय सेवाएं शामिल हैं. 22 प्रतिशत की इस अस्थायी कटौती से प्रति सप्ताह लगभग 720 घरेलू उड़ानें प्रभावित होंगी. कंपनी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी रूट को पूरी तरह बंद नहीं किया जा रहा है, बल्कि चुनिंदा घरेलू मार्गों पर केवल उड़ानों के फेरे कम किए जा रहे हैं।

    कनेक्टिंग फ्लाइट्स की मांग में गिरावट
    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में की गई कटौती का सीधा असर घरेलू उड़ानों पर भी पड़ा है. विदेश से आने वाले यात्रियों की संख्या घटने के कारण दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े विमानन केंद्रों के लिए कनेक्टिंग घरेलू उड़ानों की मांग में भारी कमी आई है. मांग का यह असंतुलन भी उड़ानों को युक्तिसंगत बनाने का एक मुख्य कारण बना है।

    प्रभावित यात्रियों के लिए राहत के उपाय
    विमानन कंपनी ने यात्रियों को आश्वस्त किया है कि स्थिति सामान्य होते ही उड़ानों को पूर्ववत कर दिया जाएगा. इस दौरान प्रभावित होने वाले यात्रियों को निम्नलिखित सुविधाएं दी जाएंगी:

        वैकल्पिक उड़ान: यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के दूसरी उपलब्ध उड़ानों में सीट दी जाएगी.
        तारीख में मुफ्त बदलाव: यात्रा की तिथि बदलने पर कोई पेनल्टी या चेंज फीस नहीं ली जाएगी.
        पूर्ण रिफंड: विकल्प पसंद न आने पर यात्री अपनी टिकट का पूरा पैसा वापस ले सकते हैं.

    एअर इंडिया ने दिया ये बयान
    एअर इंडिया की ओर से पुष्टि करते हुए एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा है कि जेट फ्यूल प्राइस में उछाल के परिचालन पर दबाव जारी है, इसे देखते हुए उड़ानों में कटौती का कदम उठाना पड़ रहा है, लेकिन स्थितियों के स्थिर होते ही उड़ानों की संख्या बहाल की जा सकती है. इससे घरेलू उड़ानों में करीब 10% तक कटौती हो सकती है।

    न सिर्फ एअर इंडिया, बल्कि रिपोर्ट्स की मानें, तो भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo भी जून और अगस्त के बीच घरेलू उड़ानों में 7% तक कटौती कर सकती है. हालांकि, इंडिगो ने इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।  

    ऊंचे रह सकते हैं टिकट के दाम
    Iran War के चलते बीते कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर जेट फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और ये एयरलाइंस के सबसे बड़े खर्चों में से एक है, जो आमतौर पर परिचालन लागत का लगभग एक चौथाई होता है।

    इसकी कीमत बढ़ने से लागत पर खर्च में इजाफा हुआ है और वैश्विक स्तर पर एयरलाइनों को टिकटों की कीमतें बढ़ाने, घाटे वाले रूट्स को बंद करने और उड़ानों की संख्या कम करने के लिए मजबूर हो पड़ा है।

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर Jet Fuel की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो घरेलू हवाई किराया भी ऊंचा रह सकता है. इसके पीछे वजह ये है कि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव से सीधे एयरलाइंस भी प्रभावित होती हैं।

    मौसमी मंदी और भविष्य की रणनीति
    स्कूल की छुट्टियां खत्म होने के बाद आमतौर पर हवाई यात्रा में कमी आती है। इसे मौसमी मंदी कहा जाता है। इस अवधि में यात्रियों की संख्या घट जाती है, जिससे एयरलाइंस को नुकसान होता है। क्षमता में कटौती करके एयरलाइंस अपनी लागत कम करना चाहती हैं। यह कदम उन्हें वित्तीय दबाव से निपटने में मदद करेगा। एअर इंडिया और इंडिगो दोनों ही इस अवधि में अपनी सेवाओं को अनुकूलित कर रही हैं।

  • पाकिस्तान के फैसले से मचा हड़कंप! एयर इंडिया ने हर दिन 100 उड़ानें रोकीं, सामने आई बड़ी वजह

    पाकिस्तान के फैसले से मचा हड़कंप! एयर इंडिया ने हर दिन 100 उड़ानें रोकीं, सामने आई बड़ी वजह

    मुंबई 

    टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले यात्रियों को एक बड़ा झटका दिया है। दुनिया भर में विमान ईंधन (Jet Fuel) की कीमतों में आई भारी तेजी और ईरान में जारी युद्ध के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट को देखते हुए एयर इंडिया ने जून महीने से अगले तीन महीनों के लिए अपनी कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द या कम करने का फैसला किया है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

    एयर इंडिया ने अपने दिल्ली हब से कई महत्वपूर्ण रूटों पर उड़ानों को पूरी तरह से निलंबित कर दिया है। इसमें शिकागो, नेवार्क, सिंगापुर और शंघाई जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। इसके अलावा, सैन फ्रांसिस्को, पेरिस और टोरंटो जैसी जगहों के लिए उड़ानों की संख्या (Frequency) घटा दी गई है। कुल मिलाकर एयरलाइन ने अपने नेटवर्क से रोजाना लगभग 100 उड़ानों की कटौती की है।

    8 मई 2026 को खत्म हुए हफ्ते में विमान ईंधन की वैश्विक औसत कीमत 162.89 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो फरवरी के अंत में मात्र 99.40 डॉलर थी। किसी भी एयरलाइन के संचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 40% होती है। ऐसे में कीमतों में इतनी भारी बढ़ोतरी ने एयर इंडिया के मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

    एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने कर्मचारियों को बताया कि हवाई क्षेत्र (Airspace) के प्रतिबंधों और महंगे ईंधन ने कई रूटों को 'घाटे का सौदा' बना दिया है। उनके पास पीक ट्रैवल सीजन के दौरान उड़ानों में कटौती करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

    एयर इंडिया को अपने प्रतिद्वंद्वी इंडिगो के मुकाबले ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का बंद होना है। इस वजह से यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली उड़ानों को लंबे रास्तों से जाना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और क्रू का खर्च काफी बढ़ गया है। अब अमेरिका जाने वाली उड़ानों को वियना या स्टॉकहोम में रुकना पड़ता है, जिससे लागत और भी बढ़ जाती है।

    एयर इंडिया पहले ही ₹20,000 करोड़ से अधिक का घाटा झेल रही है। टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस पर लागत कम करने का भारी दबाव है। एयरलाइन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम कई उड़ानों पर अपनी परिचालन लागत (Operating Cost) भी नहीं निकाल पा रहे हैं। पिछले महीने, फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (IndiGo, Air India, SpiceJet) ने चेतावनी दी थी कि अगर सरकार ने टैक्स या ईंधन की कीमतों में राहत नहीं दी, तो सेवाएं निलंबित करना मजबूरी हो जाएगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईरान युद्ध के कारण उपजे आर्थिक संकट को देखते हुए देश के 140 करोड़ लोगों से ईंधन और यात्रा पर कम खर्च करने की अपील की है। एयर इंडिया का यह कदम उसी गहरे आर्थिक संकट का संकेत है, जहां बढ़ती लागत के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा अब आम आदमी की पहुंच से और दूर हो सकती है।

    दी हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद, भारत और पाकिस्तान ने एक-दूसरे के विमानों के लिए अपने-अपने हवाई क्षेत्र बंद कर दिए थे। जहां 24 अप्रैल 2025 से भारतीय विमानों के लिए पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद है, वहीं पिछले साल 30 अप्रैल 2025 से पाकिस्तानी विमानों को भारतीय हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं है। इनमें भारतीय पंजीकृत विमान, भारतीय एयरलाइंस/ऑपरेटरों द्वारा संचालित/स्वामित्व वाले विमान, सैन्य उड़ानें भी शामिल हैं। इनके लिए पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र उपलब्ध नहीं है। नई रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद करने की अवधि को 24 मई 2026 तक बढ़ा दिया है।

  • Air India का नया कदम: लुधियाना से एक टिकट पर विदेश यात्रा, बैगेज चेकइन की झंझट नहीं

    Air India का नया कदम: लुधियाना से एक टिकट पर विदेश यात्रा, बैगेज चेकइन की झंझट नहीं

    लुधियाना

    लुधियाना के हलवारा से एक ही टिकट पर विदेश का सफर किया जा सकेगा। एयर इंडिया ने लुधियाना एयरपोर्ट से फ्लाइट्स का टाइम ऐसे शेड्यूल किया है ताकि विदेश जाने वाले दिल्ली एयरपोर्ट से कनेक्टिंग फ्लाइट ले सकें।

    एयर इंडिया ने विदेश जाने वाले यात्रियों को सलाह दी है कि वो लुधियाना से सुबह की फ्लाइट पकड़ें और कनेक्टिंग फ्लाइट में अपनी टिकट साथ ही करवा दें। ऐसा करने से उन्हें बैगेज का बार-बार चेकइन करवाने की जरूरत नहीं होगी।

    तीन से चार घंटे में सारी फॉर्मेलिटी होगी पूरी
    एयर इंडिया ने तर्क दिया है कि विदेश जाने वालों को दिल्ली एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन व अन्य फॉर्मेलिटी को पूरा करने के लिए तीन से चार घंटे का समय लग जाता है। अगर लुधियाना एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाले यात्री सुबह की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचते हैं तो उन्हें एयरपोर्ट पर फार्मेलिटीज पूरी करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा।

    सुबह और दोपहर दो फ्लाइट्स जाएगी दिल्ली
    हलवारा से सुबह और दोपहर दो फ्लाइट्स दिल्ली के लिए उपलब्ध होंगी, लेकिन इंटरनेशनल यात्रा के लिए सुबह वाली फ्लाइट सबसे बेहतर मानी जा रही है। यह फ्लाइट यात्रियों को सुबह दिल्ली पहुंचा देती है, जिससे वे उसी दिन शाम की अंतरराष्ट्रीय उड़ान आसानी से पकड़ सकते हैं।

    एयरलाइन ने शेड्यूल इस तरह तैयार किया है कि यात्रियों को दिल्ली में 4 से 8 घंटे का ट्रांजिट टाइम मिल सके। यह समय इमिग्रेशन, सिक्योरिटी और बोर्डिंग के लिए पर्याप्त होता है।

    वहीं दूसरी तरफ दिल्ली एयरपोर्ट पर उन्हें बैगेज को लेकर भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। लुधियाना फ्लाइट से कंपनी बैगेज को अपने आप कनेक्टिंग फ्लाइट में ट्रांसफर हो जाएगा और यात्री आसानी से एयरपोर्ट पर अपनी बाकी फॉर्मेलिटीज पूर कर सकेगा।

    किन-किन देशों के लिए मिलेगी सुविधा
    एयर इंडिया का कहना है कि इस कनेक्टिविटी के जरिए यात्री यूनाइटेड किंगडम और यूरोप के प्रमुख शहरों तक सफर कर सकेंगे। इनमें लंदन, बरमिंगम,रोम, मिलन और पैरिस शामिल हैं।इसके अलावा अन्य देशों की कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी ली जा सकेगी।

    एक टिकट पर पूरी यात्रा कर सकेंगे
    एयर इंडिया ने बताया है कि यात्री हलवारा से अपने अंतिम विदेशी गंतव्य तक एक ही टिकट (सिंगल PNR) पर यात्रा कर सकते हैं। इस सुविधा में सबसे बड़ा फायदा यह है कि यात्री का बैगेज सीधे अंतिम गंतव्य तक चेक-इन हो जाता है और दिल्ली में दोबारा चेक-इन की जरूरत नहीं पड़ती। अगर यात्री अलग-अलग टिकट बुक करते हैं, तो उन्हें दिल्ली में बैगेज लेकर फिर से चेक-इन करना होगा, जिससे समय और जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं।

    दिल्ली से मिलेंगी एयर इंडिया की फ्लाइट
    कनेक्टिंग यात्रा में दिल्ली से आगे की उड़ान भी एयर इंडिया की ही होती है। हालांकि, कुछ रूट्स पर एयर इंडिया की पार्टनर एयरलाइंस (कोडशेयर) भी ऑपरेट कर सकती हैं। ऐसे मामलों में टिकट एक ही रहता है, लेकिन फ्लाइट दूसरी एयरलाइन की हो सकती है। इसके बावजूद, यदि बुकिंग एक ही टिकट पर है तो यात्रा सहज बनी रहती है और बैगेज सीधे अंतिम गंतव्य तक पहुंचता है।

    वेबसाइट, मोबाइल ऐप व ट्रैवल एजेंट के जरिए करें टिकट बुक
    यात्री एयर इंडिया की वेबसाइट, मोबाइल ऐप या ट्रैवल एजेंट के जरिए टिकट बुक कर सकते हैं। बुकिंग के समय लुधियाना से फाइनल डेस्टिनेशन डालना होगा। ताकि आपको कनेक्टिंग फ्लाइट का विकल्प मिल जायेंगे। टिकट एक ही बुकिंग में लिया जाए, ताकि यात्रा आसान और बिना परेशानी के हो सके।

    दिल्ली एयरपोर्ट पर कितना इंतजार
    हलवारा से सुबह पहुंचने वाले यात्रियों को दिल्ली एयरपोर्ट पर औसतन 4 से 8 घंटे का इंतजार करना पड़ सकता है। यह इंटरनेशनल कनेक्शन के लिए सामान्य और सुरक्षित समय माना जाता है। दिल्ली से किसी भी अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए यात्रियों को कम से कम 3 से 4 घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचना जरूरी होता है। हालांकि, कनेक्टिंग यात्रियों के लिए यह प्रक्रिया आसान हो जाती है क्योंकि वे पहले से चेक-इन रहते हैं।

    यात्रियों के लिए बड़ा फायदा
    इस नई सेवा से लुधियाना और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को अब सड़क या रेल से दिल्ली जाने की जरूरत कम होगी। हलवारा एयरपोर्ट से सीधी उड़ान और दिल्ली से कनेक्टिविटी के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा तेज, सुविधाजनक और कम झंझट वाली हो जाएगी। यह पहल लुधियाना को ग्लोबल एयर नेटवर्क से जोड़ देगी।

    एयर इंडिया लुधियाना से दिल्ली के लिए चलाएगा A320 फेमिली क्राफ्ट
    एयर इंडिया लुधियान से दिल्ली के बीच A320 फेमिली एयर क्राफ्ट चलाएगा। यह मुख्य रूप से घरेलू और शॉर्ट-हॉल इंटरनेशनल रूट्स पर इस्तेमाल होते हैं। इन विमानों को हाल के वर्षों में अपग्रेड किया गया है ताकि यात्रियों को बेहतर अनुभव मिल सके। इनके प्रमुख फीचर्स इस प्रकार हैं

    A320 फेमिली एयरक्राफ्ट की मुख्य विशेषताएं

    1. शॉर्ट-हॉल और हाई-फ्रीक्वेंसी रूट्स के लिए डिजाइन किया गया है।

    2. तीन क्लास की केबिन, बिजनेस क्लास में आरामदायक और ज्यादा स्पेस, प्रीमियम इकोनमी में अतिरिक्त लेगरूम और बेहतर सीटिंग और इकोनमी में किफायती और आरामदायक यात्रा। इसमें कुल 160 से 180 सीटें हैं जिसमें से 8 बिजनेस क्लास, 24 प्रीमियम और बाकी इकोनमी सीट होंगी।

    3. USB चार्जिंग और डिजिटल सुविधा है। यात्री अपने मोबाइल/लैपटॉप चार्ज कर सकते हैं। इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट मोबाइल पर देख सकते हैं।

    4. इन-फ्लाइट इंटरटेनमेंट के लिए वाइफाई की सुविधा मिलेगी।

  • महाजंग के कारण एयर इंडिया ने रद्द की अबू धाबी की सभी और दुबई की 5 फ्लाइट्स

    महाजंग के कारण एयर इंडिया ने रद्द की अबू धाबी की सभी और दुबई की 5 फ्लाइट्स

     नई दिल्ली

    मध्य पूर्व (Middle East) में गहराते युद्ध के बादलों ने अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. कई देशों द्वारा अपने एयरस्पेस (वायु क्षेत्र) को बंद करने या पाबंदियां लगाने के कारण वैश्विक उड़ानों का पूरा शेड्यूल बिगड़ गया है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एअरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा जारी नए निर्देशों के बाद एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानों पर भी बड़ा असर पड़ा है।

    15 मार्च 2026 के लिए निर्धारित कई 'एड-हॉक' (ad-hoc) उड़ानों को रद्द करना पड़ा है, जिससे भारत और यूएई के बीच यात्रा करने वाले सैकड़ों यात्री फंसे हुए हैं।

    एअर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि दुबई एअरपोर्ट अथॉरिटी के निर्देशों के कारण उसे अपनी उड़ानें कम करने पर मजबूर होना पड़ा है. एअर इंडिया की दिल्ली-दुबई मार्ग पर केवल एक रिटर्न फ्लाइट संचालित होगी, जबकि पांच में से चार निर्धारित उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।

    एअर इंडिया एक्सप्रेस की दुबई के लिए छह में से पांच उड़ानें रद्द हैं, केवल एक दिल्ली-दुबई रिटर्न फ्लाइट चलेगी. अबू धाबी के लिए एअर इंडिया एक्सप्रेस की सभी पांचों उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।

    शारजाह: एयर इंडिया एक्सप्रेस दिल्ली, कन्नूर, कोच्चि, कोझिकोड, मुंबई और तिरुवनंतपुरम के लिए उड़ानें संचालित करने की योजना बना रही है. रास अल खैमाह: कोझिकोड और कोच्चि के लिए उड़ानें चलेंगी।

    कंपनी ने साफ किया है कि ये उड़ानें भी स्लॉट की उपलब्धता और परिचालन के समय की स्थितियों पर निर्भर करेंगी. यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरपोर्ट निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक कर लें।