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लखनऊ के CSIR वैज्ञानिकों ने खोजा कैंसर कोशिकाओं पर असर डालने वाला यौगिक, बिना नुकसान के इलाज की दिशा में बढ़े कदम

लखनऊ
 कैंसर से पीड़ित और इसकी गिरफ्त में आ रहे लोगों में नई उम्मीद जगी है। कैंसर अनुसंधान के क्षेत्र में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है।

सीएसाईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंध पौधा संस्थान (सीमैप) और सीएसआइआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआइ) के वैज्ञानियों ने तीन वर्ष के लंबे शोध के बाद पुदीने और अजवाइन में फेफड़े के कैंसर को रोकने के यौगिक की खोज की है।

तीन वर्ष के अध्ययन में पाया कि पुदीना की विशेष प्रजाति मेंथा स्पाइकेटा और अजवाइन की प्रजाति कारुम कार्वी (शिया जीरा) में पाय जाने वाला प्राकृतिक यौगिक कार्वीओल फेफड़ों के कैंसर (नान-स्माल सेल लंग कैंसर ) को रोकने में बेहद असरदार है। यह प्राकृतिक यौगिक स्वस्थ कोशिकाओं को बिना नुकसान पहुंचाए सिर्फ कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करता है। यही इसकी इसकी सबसे बड़ी खासियत है।

अध्ययन का नेतृत्व करने वाली सीमैप की वैज्ञानी डॉ. आभा मीना ने बताया कि वर्तमान में फेफड़ों के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कीमोथेरेपी और अन्य थेरेपी अक्सर शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं। इससे मरीजों को काफी शारीरिक कष्ट और साइड इफेक्ट्स झेलने पड़ते हैं।

पुदीना और अजवाइन की इस विशेष प्रजाति में साइड इफेक्ट्स न के बराबर रहता है। कार्वीओल एक सक्रिय प्राकृतिक यौगिक है, जिससे भविष्य में फेफड़े के कैंसर की बिना गंभीर साइड इफेक्ट्स वालीं दवाएं बनाई जा सकती हैं। अध्ययन में सीमैप के विज्ञानी अनुराग माथुर और सीएसआइआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान के विज्ञानी भी शामिल रहे।

कार्वीओल यौगिक की खासियत
कैंसर की कोशिकाओं की वृद्धि में रुकावट: लैब की जांच में सामने आया कि कार्वीओल यौगिक सिर्फ फेफड़े की कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोका और उन्हें नष्ट कर करता है। जबकि सामान्य कोशिकाएं पूरी तरह सुरक्षित रहीं।
कैंसर की रफ्तार पर लगाम: शरीर में सूजन और कैंसर को बढ़ाने वाले हानिकारक एंजाइम एलओएक्स-5 को कार्वीओल ने पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया। इससे कैंसर की रफ्तार पर लगाम लग गई।
सुरक्षित और असरदार: यौगिक शरीर में पूरी तरह सुरक्षित और असरदार तरीके से काम करता है।

 

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