Category: टेक्नॉलॉजी

  • X का नया ‘X Number’ फीचर, बिना फोन नंबर शेयर किए करें चैट और कॉल

    X का नया ‘X Number’ फीचर, बिना फोन नंबर शेयर किए करें चैट और कॉल

    एलॉन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X  पर एक ऐसा फीचर आया है, जिसके बाद किसी से बात करने के लिए आपको अपना फोन नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इतना ही नहीं, बिना एक-दूसरे को फॉलो किए भी चैट और कॉल कर सकेंगे. यानी नंबर भी प्राइवेट रहेगा और बातचीत भी हो जाएगी. आखिर कैसे काम करता है X का ये नया फीचर? आइए जानते हैं.

    जानिए क्या है ये नया X Number
    कई बार ऐसा होता है कि आप किसी से बात करना चाहते हैं, लेकिन प्राइवेसी की वजह से अपना फोन नंबर शेयर नहीं करना चाहते. कई बार आप सामने वाले को फॉलो भी नहीं करना चाहते. ऐसे में X का ये नया फीचर आपके काम आ सकता है.

    X नंबर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X का नया फीचर है, जिसकी मदद से लोग एक-दूसरे से बात कर सकते हैं. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि अगर आप किसी से चैट या कॉल पर बात करना चाहते हैं, तो आसानी से कर सकते हैं.

    X Number आपको एक प्राइवेट कोड बनाने का ऑप्शन देता है. इस कोड को आप उस व्यक्ति के साथ शेयर कर सकते हैं, जिससे आप बात करना चाहते हैं. कोड शेयर करने के बाद आप X पर चैट या कॉल के जरिए बात कर सकते हैं.

    जानिए X Number कैसे करता है काम
    इस फीचर की मदद से आप एक कोड बना सकते हैं और जिसे आपसे बात करनी है, उसके साथ शेयर कर सकते हैं. कोड शेयर करने के बाद आप X पर एक-दूसरे से चैट कर सकते हैं. इसके लिए दोनों लोगों का एक-दूसरे को फॉलो करना जरूरी नहीं है.

    ये फीचर सिर्फ चैट तक ही सीमित नहीं है. अगर आप किसी से कॉल या वीडियो कॉल पर बात करना चाहते हैं, तो वो भी कर सकते हैं. हालांकि, कॉल और वीडियो कॉल का ऑप्शन आपकी X की प्राइवेसी सेटिंग्स पर भी डिपेंड करता है.

    कोड बदलते ही चैट करने वाला हो जाएगा ब्लॉक!
    अगर आप अपने X नंबर को रिफ्रेश करके नया कोड बनाते हैं, तो पुराना कोड काम करना बंद कर देता है. यानी पुराने कोड से कोई भी व्यक्ति आपसे दोबारा संपर्क नहीं कर पाएगा. इस तरह आप अपनी प्राइवेसी को अपने हिसाब से कंट्रोल कर सकते हैं.

    सबसे जरूरी बात ये है कि X नंबर कोई फोन नंबर नहीं है. ये एक प्राइवेट कोड है, जिसकी मदद से आप X पर किसी से चैट या कॉल कर सकते हैं. इसी को X Number कहा जाता है.

  • Meta ने लॉन्च किए 100 ग्राम वाले VR Glasses, 2027 में आएंगे; कीमत ₹1.24 लाख

    Meta ने लॉन्च किए 100 ग्राम वाले VR Glasses, 2027 में आएंगे; कीमत ₹1.24 लाख

    Meta ने एक बड़ा ऐलान कर दिया है. फेसबुक की पैरेंट कंपनी ने अपने नए और हल्के वर्चुअल रियलिटी (VR) ग्लासेस को लॉन्च कर दिया है. इन्हें आम चश्मों की तरह आसानी से पहना जा सकता है. ये Apple Vision Pro जैसे भारी भरकम हेडसेट नहीं है. मेटा के न्यू VR ग्लासेस के PayTM फाउंडर भी फैन हो चुके हैं.

    कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क में कंपनी के एनुअल प्रोग्राम कनेक्ट इवेंट हुआ. इस इवेंट के दौरान Meta CEO मार्क जकरबर्ग ने कई बड़े ऐलान किए हैं, जिसमें VR ग्लास एक खास अनाउंसमेंट हैं.

    कंपनी ने इसका नाम Meta VR Glasses रखा है. जकरबर्ग ने खुद बताया है कि इसका वजन 100 ग्राम से भी कम है. इसका वजन लगभग एक सामान्य चश्मे के आसपास ही है. हालांकि अन्य VR हेडसेट की तुलना में यह काफी हल्के हैं.

    Meta VR ग्लासेस की कीमत
    Meta VR ग्लासेस की कीमत 1299 अमेरिकी डॉलर (करीब 1,24,513 रुपये) है. जकरबर्ग ने बताया है कि न्यू VR ग्लासेस की सेल अगले साल के पहले क्वार्टर में शुरू होगी. इसको खासतौर से मूवी देखने, कंप्यूटिंग और गेमिंग एक्सपीरियंस के लिए तैयार किया गया है.

    इवेंट के दौरान जुकरबर्ग ने बताया है कि कंपनी ने फिलहाल मेटावर्स को लेकर अपना फोकस कम कर दिया है और VR डिवाइस लॉन्च करने का फैसला किया है.

    Paytm फाउंडर हुए फैन्स
    Paytm फाउंडर विजय शेखर शर्मा ने गुरुवार की सुबह-सुबह ही मेटा के न्यू VR ग्लासेस को पोस्ट किया. उन्होंने एक वीडियो भी पोस्ट किया है, जिसमें न्यू Meta VR हेडसेट की खूबियों को दिखाया गया है.

    Apple Vision Pro से होगा मुकाबला
    Meta के न्यू VR ग्लासेस का सीधा मुकाबला Apple Vision Pro के साथ होगा. दोनों डिवाइस में सबसे बड़ी चुनौती साइज है, जहां विजन प्रो एक भारी डिवाइस है और मेटा का VR हेडसेट 100 ग्राम से भी कम है. दोनों की कीमत में भी काफी अंतर विजन प्रो की कीमत 3,700 डॉलर है.

    जुकरबर्ग ने दिखाया नया Muse Charm
    Connect इवेंट के दौरान जकरबर्ग ने एक अन्य प्रोडक्ट को पेश किया है. इसको चाबी आदि में लगाया जा सकता है, जिसमें Meta का Muse AI एजेंट मौजूद हैं. यह एक रियल टाइम वॉयस मोड का भी सपोर्ट मिलता है.

  • iPhone Duo को लीड कर रहे भारतीय पीयूष प्रतीक, IIT Delhi से Apple तक का सफर

    iPhone Duo को लीड कर रहे भारतीय पीयूष प्रतीक, IIT Delhi से Apple तक का सफर

    Apple का पहला फोल्डेबल iPhone Duo इस समय टेक की दुनिया में चर्चा का सबसे बड़ा नाम है. करीब 3 लाख रुपये से शुरू होने वाला यह फोन सिर्फ इसलिए खास नहीं है कि यह फोल्ड होता है. इसके पीछे काम करने वाली टीम में एक भारतीय नाम भी अब खास तौर पर चर्चा में है. नाम है पीयूष प्रतीक. IIT Delhi से पढ़े पीयूष अब Apple में iPhone Duo के प्रोडक्ट मैनेजर हैं और उन्होंने खुद LinkedIn पर बताया है कि इस नए iPhone को लीड करना उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी रही है.

    Apple ने 9 सितंबर 2026 को अपना पहला फोल्डेबल iPhone पेश किया था. कंपनी ने इसका नाम iPhone Duo रखा. फोन खुलने पर इसमें 7.6 इंच का बड़ा डिस्प्ले मिलता है, जबकि बंद करने पर 5.4 इंच की बाहरी स्क्रीन मिलती है. भारत में इसकी शुरुआती कीमत ₹2,99,900 है और इसकी बिक्री 23 अक्टूबर से शुरू होगी.

    कौन हैं पीयूष प्रतीक?
    लेकिन इस फोन की चर्चा के बीच एक भारतीय प्रोफेशनल का नाम भी तेजी से सामने आया है. यह नाम है Piyush Pratik. उनकी मौजूदा लिंक्डइन प्रोफाइल पर पद प्रोडक्ट मैनेजर, iPhone Duo लिखा है. अपने हालिया पोस्ट में उन्होंने iPhone Duo को लेकर लिखा कि इस प्रोडक्ट को लीड करना उनके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी और सौभाग्य है. उन्होंने इस काम के पीछे ऐपल की कई टीमों की मेहनत का भी जिक्र किया है.

    यहां एक बात समझना जरूरी है. iPhone Duo किसी एक व्यक्ति ने नहीं बनाया है. ऐपल के ऐसे प्रोडक्ट में हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, डिजाइन, इंजीनियरिंग, कैमरा, ऑपरेशंस और मार्केटिंग समेत कई टीमें काम करती हैं. इसलिए पीयूष को अकेले 'iPhone Duo बनाने वाला भारतीय' कहना सही नहीं होगा. लेकिन उनकी मौजूदा भूमिका और उनके अपने बयान यह जरूर बताते हैं कि वह इस प्रोडक्ट की लीडिंग टीम का हिस्सा हैं.

    IIT Delhi से शुरू हुआ सफर
    पीयूष प्रतीक की कहानी किसी सामान्य इंजीनियरिंग जॉब से Apple तक पहुंचने वाली कहानी नहीं है. उन्होंने IIT Delhi से बायोकेमिकल इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी में B.Tech और M.Tech की डुअल डिग्री की. एवेलेबल प्रोफाइल और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने 2011 में IIT Delhi से पढ़ाई पूरी की और वहां गोल्ड मेडल भी हासिल किया.

    दिलचस्प बात यह है कि इंजीनियरिंग के बाद पीयूष सीधे Apple नहीं पहुंचे. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत Bain & Company में एसोसिएट कंसल्टेंट के तौर पर की. इसके बाद 2013 में वह InMobi से जुड़े. यहां उन्होंने प्रोडक्ट मार्केटिंग में काम किया और आगे चलकर डायरेक्टर की भूमिका तक पहुंचे.

    इसके बाद उनके करियर में एक और बड़ा मोड़ आया. 2017 में उन्होंने स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस में MBA शुरू किया. रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें रिलायंस धीरूभाई स्कॉलरशिप मिली थी, जिसके जरिए उनकी स्टैनफोर्ड की पढ़ाई को पूरा समर्थन मिला. 2019 में MBA पूरा करने के बाद पीयूष ने ऐपल जॉइन किया.

    iPhone Duo के अलावा इन iPhone मॉडल्स में बड़ा रोल
    पीयूष का ऐपल के साथ काम iPhone 16 से शुरू नहीं हुआ था. ऐपल में आने के बाद उन्होंने iPhone की प्रोडक्ट मैनेजमेंट टीम में काम किया और iPhone 13 लाइनअप और दूसरी जेनेरेशन के iPhone SE से जुड़े काम में भी उनकी भूमिका रही.  2024 में उनका नाम पहली बार बड़े पैमाने पर लोगों के सामने तब आया, जब Apple के iPhone 16 लॉन्च इवेंट में उन्होंने नए कैमरा कंट्रोल के बारे में जानकारी दी. इस समय भी वो भारत में सुर्खियों में रहे थे.

    यह सिर्फ एक नॉर्मल कैमरा बटन नहीं था. ऐपल ने इसे टच और प्रेशर सेंसर के साथ डिजाइन किया था. इससे कैमरा जल्दी खोला जा सकता था, फोटो क्लिक की जा सकती थी और उंगली को स्लाइड करके कैमरा सेटिंग्स जैसे जूम को कंट्रोल किया जा सकता था. बाद में इसी Camera Control को Visual Intelligence जैसे फीचर्स दिए गए.

    पीयूष ने Apple के इस नए फीचर के पीछे की सोच को भी समझाया था. उनके मुताबिक मकसद सिर्फ iPhone में एक और बटन जोड़ना नहीं था, बल्कि कैमरा इस्तेमाल करने के पूरे अनुभव को तेज और आसान बनाना था. Apple की टीम ने कैमरा कंट्रोल को इस तरह डिजाइन किया कि इसे फोन को पोर्ट्रेट और लैंडस्केप दोनों तरह से पकड़कर इस्तेमाल किया जा सके.

    अब कहानी पहुंची iPhone Duo तक
    2026 में पीयूष की भूमिका और भी ज्यादा चर्चा में आ गई है. ऐपल ने पहली बार iPhone को फोल्डेबल डिजाइन दिया है और इसका नाम iPhone Duo रखा है. पीयूष ने अपने LinkedIn पोस्ट में इस लॉन्च को ओरिजनल आईफोन के बाद सबसे बड़े बदलावों में से एक बताया और लिखा कि वह इस प्रोडक्ट को लीड करने के लिए खुद को भाग्यशाली मानते हैं. उन्होंने खास तौर पर ऐपल की अलग-अलग टीमों की मेहनत और डिटेल पर दिए गए ध्यान को इस प्रोडक्ट की सफलता का हिस्सा बताया.

  • मोबाइल स्क्रीन प्रोटेक्टर पर नए नियम, 1 अप्रैल 2027 से BIS सर्टिफिकेशन होगा जरूरी

    मोबाइल स्क्रीन प्रोटेक्टर पर नए नियम, 1 अप्रैल 2027 से BIS सर्टिफिकेशन होगा जरूरी

    भारत सरकार ने मोबाइल फोन पर इस्तेमाल होने वाली स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए नए नियम का ऐलान किया है. नए नियम के तहत फोन डिस्प्ले पर लगने वाले प्रोटेक्टर के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) को अनिवार्य कर दिया है. यह नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा.

    इलेक्ट्रोनिक्स और सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की तरफ से दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अधिसूचना के मुताबिक, मोबाइल फोन के डिस्प्ले पर इस्तेमाल होने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर को उन सामानों की लिस्ट में शामिल किया है, जिनके लिए BIS सर्टिफिकेशन्स की जरूरत होती है.

    स्मार्टफोन के डिस्प्ले के लिए इस्तेमाल होने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर का नया नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा. स्क्रीन प्रोटेक्टर को निर्धारित भारतीय मानक IS 19348:2025 का पालन करना होगा. रजिस्ट्रेशन सिस्टम के तहत  BIS की मंजूरी के बिना ऐसे स्क्रीन प्रोटेक्टर को भारत में कानूनी रूप से बेचना संभव नहीं होगा.

    किन कंपनियों पर पड़ेगा सीधा असर
    मोबाइल स्क्रीन प्रोटेक्टर वाले नियम का सीधा असर उन कंपनियों और ब्रांड पर पड़ेगा, जो भारत में इंपोर्ट करने वालों पर पड़ेगा. नियमों के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मार्केट में सेल होने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर क्वालिटी और सेफ्टी मानकों को पूरा करते हैं.

    BIS स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए नए स्टैंडर्ड को सेट करेगा
    BIS के स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए नए स्टैंडर्ड तैयार किए जाएंगे, जिनको स्क्रीन प्रोटेक्टर मैन्यूफैक्चरर और सेलर को मानना होगा. इसके लिए जरूरी फीचर्स और टेस्टिंग को कंप्लीट करना होगा.

    इसमें स्क्रीन प्रोटेक्टर की थिकनेस और डाइमेंशन को तय किया जाएगा. साथ ही ग्लास की क्वालिटी, मजबूती का ध्यान रखा जाएगा. इसमें एंटी-शैटर फिल्म, ओलेओफोबिक कोटिंग, एंटी-ग्लेयर फिल्म, ब्लू-लाइट फिल्टर आदि के लिए नियम बनाएं जाएंगे.

    स्मार्टफोन यूजर्स पर क्या पड़ेगा असर
    स्क्रीन प्रोटेक्टर के नए नियम आने के बाद स्मार्टफोन यूजर्स पर उसका क्या असर पड़ेगा. बिजनेस टुडे ने बताया है कि भारत में बिकने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर एक निर्धारित क्वालिटी स्टैंडर्ड को पूरा करेंगे. इसकी वजह से स्क्रीन प्रोटेक्टर की कीमत और अवेलेबिलिटी पर असर नजर आएगा. नए स्टैंडर्ड के तहत बनने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर महंगे की कीमत ज्यादा हो सकती है.

    भारतीय मार्केट में मौजूदा समय में ढेरों स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर ब्रांड और कंपनियां मौजूद हैं. इनमें से कुछ भारत में प्रोडक्शन करती हैं तो कई चीन और अन्य देशों से इंपोर्ट भी करते हैं.

  • OnePlus 16 की पहली झलक आई सामने, 1TB स्टोरेज और 165Hz डिस्प्ले से मचेगा तहलका

    OnePlus 16 की पहली झलक आई सामने, 1TB स्टोरेज और 165Hz डिस्प्ले से मचेगा तहलका

    OnePlus 16 को लेकर अब तक सिर्फ लीक्स और टीजर सामने आ रहे थे, लेकिन अब कंपनी ने फोन की तस्वीर और कलर ऑप्शन जारी कर दिए हैं. यानी OnePlus का अगला फ्लैगशिप फोन अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है. फोन का डिजाइन देखकर साफ है कि कंपनी ने इस बार परफॉर्मेंस के साथ लुक पर भी काफी काम किया है.

    OnePlus 16 को तीन कलर में लाया जाएगा. खास बात यह है कि स्टारलाइट वेरिएंट में पीछे की तरफ अलग तरह का स्टारलाइट इफेक्ट दिया गया है. कंपनी के मुताबिक इसमें सिल्क ग्लास फिनिश का इस्तेमाल किया गया है, जिससे फोन पर उंगलियों के निशान कम पड़ेंगे. यह फोन फिलहाल चीन में प्री-ऑर्डर के लिए सामने आया है.

    OnePlus 16 में 1TB तक स्टोरेज
    OnePlus 16 का एक बड़ा अट्रैक्शन इसका 1TB स्टोरेज वेरिएंट है. प्री-ऑर्डर लिस्टिंग के मुताबिक फोन 12GB RAM के साथ 256GB और 512GB स्टोरेज में आएगा. इसके अलावा 16GB RAM के साथ 512GB और 1TB स्टोरेज का विकल्प भी दिया जाएगा. यानी जिन लोगों के फोन में फोटो, वीडियो और गेम्स की वजह से स्टोरेज जल्दी भर जाती है, उनके लिए यह बड़ा अपग्रेड हो सकता है.

    फोन का डिजाइन पिछले OnePlus फ्लैगशिप से पूरी तरह अलग नहीं है. पीछे ऊपर बाईं तरफ चौकोर कैमरा मॉड्यूल दिया गया है, जिसमें तीन कैमरे और फ्लैश नजर आते हैं. लेकिन नए कलर और फिनिश की वजह से फोन को अलग लुक मिलता है.

    165Hz डिस्प्ले
    OnePlus 16 की सबसे ज्यादा चर्चा इसके डिस्प्ले को लेकर है. कंपनी ने 165Hz रिफ्रेश रेट कन्फर्म किया है. खास बात यह है कि यह सिर्फ गेमिंग के लिए नहीं होगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक OnePlus 16 में सिस्टम लेवल पर 165Hz रिफ्रेश रेट काम करेगा.

    पिछले OnePlus 15 में भी 165Hz डिस्प्ले दिया गया था, लेकिन इसका इस्तेमाल कई मामलों में गेमिंग तक सीमित था. OnePlus 16 में कंपनी इसे ज्यादा जगह इस्तेमाल करने की तैयारी में है. गेमिंग के दौरान रिफ्रेश रेट 185Hz तक पहुंचने की बात भी रिपोर्ट्स में कही गई है, हालांकि इसे अभी पूरी तरह आधिकारिक स्पेसिफिकेशन नहीं माना जाना चाहिए.

    इसका फायदा क्या होगा? फोन पर स्क्रॉलिंग ज्यादा स्मूद दिख सकती है और गेम में मूवमेंट ज्यादा फ्लुइड महसूस हो सकता है. हालांकि आम यूजर के लिए 120Hz और 165Hz के बीच का फर्क हर सिचुएशन में बहुत बड़ा नहीं होगा. इसका असली फायदा हाई-फ्रेम गेमिंग में ज्यादा दिखाई दे सकता है.

    9000mAh की बैटरी भी हो सकती है
    OnePlus 16 को लेकर सबसे बड़ी लीक इसकी बैटरी को लेकर है. रिपोर्ट्स में 9000mAh बैटरी की बात सामने आई है. अगर यह सही साबित होती है तो यह आज के ज्यादातर प्रीमियम फोन की तुलना में काफी बड़ी बैटरी होगी.

    फोन में 100W वायर्ड चार्जिंग और 50W वायरलेस चार्जिंग मिलने की भी रिपोर्ट है. 3C सर्टिफिकेशन में 100W चार्जिंग सपोर्ट सामने आ चुका है. यहां OnePlus 15 से तुलना भी दिलचस्प है.  OnePlus 15 में 7300mAh बैटरी थी और कंपनी ने 120W चार्जिंग और 50W वायरलेस चार्जिंग दी थी.

    कैमरा में 200MP का बड़ा दांव
    कैमरे को लेकर भी OnePlus 16 काफी बड़ा अपग्रेड कर सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक फोन में 200MP का मेन कैमरा मिल सकता है. इसके साथ 50MP अल्ट्रावाइड और 50MP पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा दिया जा सकता है.

    मेन कैमरे में 1/1.4 इंच का सेंसर मिलने की बात है. इसका मतलब सिर्फ मेगापिक्सल ज्यादा होना ही नहीं, बल्कि सेंसर का साइज भी बड़ा होगा. हालांकि कैमरे की असली क्वालिटी का पता फोन के लॉन्च और रियल लाइफ टेस्ट के बाद ही चलेगा.

    अंदर मिल सकती है नई फ्लैगशिप चिप
    परफॉर्मेंस के लिए OnePlus 16 में Qualcomm की अगली फ्लैगशिप चिप मिलने की रिपोर्ट है. अलग-अलग रिपोर्ट्स में इसे Snapdragon 8 Elite Gen 6 Pro या Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 नाम से बताया गया है.

  • AI को लेकर बराक ओबामा की चिंता, बोले- अब खुद सीख रहे AI सिस्टम

    AI को लेकर बराक ओबामा की चिंता, बोले- अब खुद सीख रहे AI सिस्टम

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनियाभर में बहस चल रही है. कोई इसे फ्यूचर की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी बता रहा है, तो कोई इससे जॉब्स और इंसानों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित है. इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama ने AI को लेकर अपनी चिंता बताई है. ओबामा का कहना है कि एआई कंपनियों के मार्केट वैल्यूएशन में हाइप हो सकता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि एआई की टेक्नोलॉजी भी ओवरहाइप्ड है. आइए जानते हैं इसके बारे में. उन्होंने AI से ह्यूमैनिटी खत्म होने की बात से भी इनकार नहीं किया है और ये बेहद डरावना है.

    Obama के समय में ही बनी थी AI पर रिपोर्ट
    ओबामा ने बताया कि उनके राष्ट्रपति रहते 2015-16 के आसपास उनकी एडमिनिस्ट्रेशन ने एआई के सोशल, इकोनॉमिक और एथिकल इम्पैक्ट को समझने के लिए एक कमीशन बनाया था. इस कमीशन ने AI को लेकर एक बड़ी रिपोर्ट भी तैयार की थी.

    ओबामा के मुताबिक इसके बाद आई एडमिनिस्ट्रेशन ने इस रिपोर्ट को ज्यादा आगे नहीं बढ़ाया. यानी AI को लेकर जिन सवालों पर उस समय चर्चा शुरू हुई थी, वो अब और ज्यादा बड़े हो चुके हैं.

    अब AI खुद सीख रहा है
    एआई के तेजी से आगे बढ़ने की सबसे बड़ी वजहों में से एक रिसर्सिव लर्निंग है. आसान भाषा में समझें तो AI अब सिर्फ इंसानों से ट्रेनिंग लेकर आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि खुद भी सीखने लगा है.

    ओबामा के मुताबिक कुछ समय पहले तक एआई मॉडल्स की लर्निंग में करीब 90 फीसदी हिस्सा इंसानों के इनपुट का था. लेकिन कुछ ही महीनों में तस्वीर बदल गई और यह बैलेंस करीब 50-50 तक पहुंच गया. यानी अब AI को आगे बढ़ाने में ह्यूमन ट्रेनिंग के साथ उसका खुद से सीखना भी बड़ी भूमिका निभा रहा है.

    आने वाले समय में 90% खुद सीखेगा AI?
    ओबामा का अनुमान है कि आने वाले समय में एआई की लर्निंग में करीब 90 फीसदी हिस्सा सेल्फ-लर्निंग का हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो AI डेवलपमेंट की स्पीड आज के मुकाबले काफी ज्यादा तेज हो सकती है.

    उन्होंने एआई की इस ग्रोथ को हॉकी स्टिक जैसी ग्रोथ बताया. इसका मतलब है कि शुरुआत में ग्रोथ धीरे होती है, लेकिन एक पॉइंट के बाद इसकी स्पीड अचानक बहुत ज्यादा बढ़ने लगती है.

    किलर रोबोट नहीं, ये है असली डर
    एआई के खतरे की बात होते ही किलर रोबोट्स और इंसानों को खत्म करने वाली मशीनों की चर्चा शुरू हो जाती है. ओबामा के मुताबिक ऐसा खतरा पूरी तरह जीरो नहीं है, लेकिन इसकी संभावना कम है.उनकी असली चिंता AI मिसअलाइनमेंट को लेकर है. यानी एआई सिस्टम ऐसा गोल तय कर ले जो इंसानों के इरादों से अलग हो.

    इसके लिए AI का कॉन्शियस होना या इंसानों से नफरत करना जरूरी नहीं है. अगर एआई खुद से फैसले लेने लगे और उसके गोल्स इंसानों के गोल्स से अलग हो जाएं, तो बड़ी समस्या पैदा हो सकती है. यही वजह है कि एआई के तेज विकास के साथ यह सवाल भी जरूरी होता जा रहा है कि आखिर इसे इंसानों के कंट्रोल और गोल्स के साथ कैसे जोड़ा जाए.

  • AI के ‘गॉडफादर’ Geoffrey Hinton की चेतावनी, बोले- खतरा समझेंगे तो रात में चैन से नहीं सो पाएंगे

    AI के ‘गॉडफादर’ Geoffrey Hinton की चेतावनी, बोले- खतरा समझेंगे तो रात में चैन से नहीं सो पाएंगे

    आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से सभी के अंदर डर का माहौल बना हुआ है. पिछले कुछ सालों में AI में होने वाली तेजी को देखकर कई लोग हैरान हो चुके हैं. बड़ी कंपनियों में कई एंट्री-लेवल जॉब्स भी खत्म हो रही हैं. इसकी वजह से नए स्टूडेंट्स हों या जॉब करने वाले लोग, सभी के दिमाग में AI का डर होना आम बात है.

    लेकिन ऐसे कई बच्चे भी होंगे जो इसको बहुत ज्यादा सीरियस प्रॉब्लम नहीं मान रहे होंगे. हालांकि, दुनिया भर के एक्सपर्ट्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से हो रहे डेवलपमेंट को देखकर बहुत बड़ी चिंता जाहिर की है. इनमें AI के 'गॉडफादर' कहे जाने वाले Geoffrey Hinton भी शामिल हैं. उन्हें 2024 में नोबेल प्राइज से नवाजा गया था.

    ज्योफ्री हिंटन ने AI के खतरे को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि अगर आप रात में चैन से सो पा रहे हैं, तो शायद आप AI के असली खतरे को समझ नहीं रहे हैं. आइए जानते हैं कि AI कितना बड़ा खतरा बन सकता है और क्यों दुनिया भर के एक्सपर्ट्स इसके खतरे को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं.

    जानिए 'गॉडफादर' का क्या कहना है AI के बारे में
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के 'गॉडफादर' कहे जाने वाले ज्योफ्री हिंटन दुनिया के जाने-माने AI एक्सपर्ट हैं. उन्हें साल 2024 में फिजिक्स का नोबेल प्राइज दिया गया था.

    AI के खतरों को लेकर एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि अगर आप AI के तेजी से बढ़ते खतरे के बावजूद आराम से सो पा रहे हैं, तो शायद आप इस खतरे की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं. उनका मानना है कि AI का खतरा काफी गंभीर है. यही वजह है कि कई एक्सपर्ट्स भी AI के खतरों के बारे में सोचकर चिंता जाहिर कर चुके हैं.

    इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु के प्रोफेसर ने भी जताया था खतरा
    डॉ. प्रतोष, जो भारत के नंबर 1 माने जाने वाले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, उनका एक लेक्चर वीडियो भी वायरल हो रहा है. इसमें वह बता रहे हैं कि दुनिया में AI को लेकर जो कुछ हो रहा है, उसे देखने के बाद वह भी ठीक से सो नहीं पा रहे हैं.

    इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी AI को लेकर कई ऐसी बातें सामने आ रही हैं, जिनमें इसके तेजी से बढ़ते इस्तेमाल और इसके संभावित खतरों को लेकर चिंता जताई जा रही है.

    इंसानों को खत्म करने वाली बात
    OpenAI के एक कर्मचारी ने कंपनी से रिजाइन करने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर AI के खतरे को लेकर अपनी चिंता जाहिर की. उनका कहना था कि आने वाले 10 सालों में AI इंसानों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि AI की वजह से इंसानों के खत्म होने की 10 फीसदी संभावना हो सकती है.

    इस एम्पलाई का नाम Jacob Coxon है. इन सभी बातों से यह साफ नजर आ रहा है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल और इसके संभावित खतरों को लेकर दुनिया भर के एक्सपर्ट्स और AI को बनाने वाले लोग भी चिंता जाहिर कर रहे हैं.

  • AI की रफ्तार रोकने का आरोप, Anthropic-OpenAI समेत 4 कंपनियों पर अमेरिका में मुकदमा

    AI की रफ्तार रोकने का आरोप, Anthropic-OpenAI समेत 4 कंपनियों पर अमेरिका में मुकदमा

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रफ्तार रोकने की बात अब सिर्फ बहस तक नहीं रही, मामला कोर्ट पहुंच गया है. अमेरिका में Anthropic, OpenAI, Google और SpaceXAI के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है. आरोप है कि इन बड़ी AI कंपनियों ने मिलकर AI के विकास की रफ्तार कम करने पर सहमति बनाई. अगर ये आरोप साबित होते हैं, तो मामला अमेरिकी एंटीट्रस्ट कानूनों के तहत गंभीर हो सकता है.

    एआई को लेकर अब तक सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही है कि इसे कितना तेज बनाया जाए. लेकिन अब सवाल उल्टा हो गया है. क्या AI को जानबूझकर स्लो करने की कोशिश भी कंपनियों के लिए कानूनी मुसीबत बन सकती है? अमेरिका में दायर एक नए मुकदमे में Anthropic, OpenAI, Google और SpaceXAI पर यही आरोप लगाया गया है.

    मामला अमेरिका के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया की कोर्ट में पहुंचा है. मुकदमा उन लोगों की तरफ से दायर किया गया है, जो ChatGPT, Claude, Grok और Gemini जैसी AI सर्विस के पेड यूजर हैं.

    एक पोस्ट से शुरू हुआ पूरा विवाद
    इस मामले की शुरुआत 12 सितंबर को एंथ्रोपिक के CEO Dario Amodei के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई. अमोदेई ने एआई के तेजी से बढ़ते विकास को लेकर चिंता जताई और कहा कि कंपनियों को AI को ज्यादा सावधानी और सेफ्टी के साथ आगे बढ़ाना चाहिए.

    उनकी बात का मतलब था कि AI की रफ्तार इतनी तेज हो रही है कि उसकी सेफ्टी को लेकर भी ज्यादा तैयारी जरूरी है. उन्होंने AI कंपनियों के बीच सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोलैबोरेशन की जरूरत की बात भी कही.

    इसके बाद OpenAI के CEO Sam Altman, SpaceXAI के Elon Musk और Google DeepMind के Demis Hassabis ने भी अमोदेई के प्रपोजल पर सार्वजनिक तौर पर रिएक्शन दिया. मुकदमा करने वालों का दावा है कि इन बयानों से पता चलता है कि बड़ी एआई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार कम करने के मुद्दे पर एक-दूसरे के साथ तालमेल कर रही थीं.

    यूजर्स को क्या नुकसान होने का दावा?
    मुकदमे में सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसे एआई कंपनियों के कॉम्पिटिटर्स ने नहीं, बल्कि उनके पेड यूजर्स ने दायर किया है.
    पिटीशनर्स का कहना है कि अगर ChatGPT, Claude, Grok और Gemini जैसी सर्विसेज को बेहतर बनाने की रफ्तार कंपनियां मिलकर कम करती हैं, तो इसका सीधा असर यूजर्स को मिलने वाली सर्विस पर पड़ सकता है.

    उनका तर्क है कि अगर कोई एक कंपनी खुद अपनी AI डेवलपमेंट की रफ्तार कम करती है तो उसे बाकी कंपनियों से पीछे रहने का खतरा होगा. लेकिन अगर सभी बड़ी कंपनियां मिलकर ऐसा करें, तो मार्केट में कॉम्पिटिशन कम हो सकता है. हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है. अभी ये सिर्फ मुकदमे में लगाए गए आरोप हैं. कोर्ट ने इन आरोपों को सही साबित नहीं किया है.

    खुद एंथ्रोपिक ने भी उठाई थी एंटीट्रस्ट की बात
    इस पूरे मामले का एक दिलचस्प पहलू यह है कि एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने अपने प्रपोजल में खुद भी एंटीट्रस्ट से जुड़ी चिंता का जिक्र किया था. उन्होंने सुझाव दिया था कि अमेरिकी सरकार एआई कंपनियों के बीच सेफ्टी से जुड़ी बातचीत को आसान बनाने में मदद कर सकती है. इसके लिए कुछ खास तरह की सेफ्टी बातचीत को लेकर सीमित कानूनी छूट की जरूरत हो सकती है.

    Sam Altman ने भी ऐसे सरकारी फ्रेमवर्क का समर्थन किया था, जिसमें एआई सेफ्टी को लेकर कंपनियों के लिए एक जैसे नियम हों. हालांकि उनका कहना था कि AI सेफ्टी पर काम शुरू करने के लिए किसी नई एंटीट्रस्ट छूट या कानून का इंतजार जरूरी नहीं है.

    अब कोर्ट के सामने बड़ा सवाल
    अब इस केस में असली सवाल यही है कि एआई कंपनियों का सेफ्टी के लिए साथ काम करना कहां तक सही है. AI कंपनियां अगर अलग-अलग अपने मॉडल की सेफ्टी बढ़ाती हैं, तो यह एक बात है. लेकिन अगर कम्पेटिटर कंपनियां मिलकर एआई के विकास की रफ्तार कम करने पर सहमत होती हैं, तो अमेरिकी एंटीट्रस्ट कानून इसे किस नजर से देखता है, यही इस केस का अहम मुद्दा बन गया है.

    फिलहाल मामला शुरुआती स्टेज में है. एंथ्रोपिक, ओपनएआई, गूगल और स्पेसएक्स एआई के रेप्रेसेंटेटिव ने शनिवार तक इस मुकदमे पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया था. अब आगे कोर्ट में यह तय होना है कि कंपनियों का दावा किया गया सहयोग AI की सुरक्षा के लिए था या फिर इससे मार्केट में कम्पटीशन पर असर पड़ सकता है.

  • Google AI ने खुद खोजी सिस्टम की खामी? 3 कंपनियों को किया टारगेट, सामने आया मामला

    Google AI ने खुद खोजी सिस्टम की खामी? 3 कंपनियों को किया टारगेट, सामने आया मामला

    नई दिल्ली
    Google के आर्टिफिशियल मॉडल (AI) ने सभी को हैरान कर दिया है. AI मॉडल Gemini ने साइबर सिक्योरिटी टेस्टिंग के दौरान तीन कंपनियों के सिक्योरिटी सिस्टम को तोड़ते हुए उनके सिस्टम तक पहुंच बना ली. पहली बार सामने आया है, जब Google के AI सिस्टम ने खुद इस तरह का एक्शन लिया है। 

    सिस्टम में सेंधमारी की यह घटना मई में हुई थी, उस दौरान एक साइबर सिक्योरिटी कंपनी जेमिनाई की सिक्योरिटी ताकत को टेस्ट कर रही थी। 

    गूगल की सिक्योरिटी इंजीनियर की वाइस प्रेसिडेंट हेथर एकिंस ने बताा है कि एक सामान्य टेस्टिंग के दौरान Gemini ने इंटरनेट पर मौजूद पब्लिक इंफोर्मेशन को कलेक्ट किया और क्रेडेंशियल का अनुमान लगाया. फिर जेमिनाई ने तीन अन्य वेबसाइट के सिस्टम में सेंधमारी कर दी। 

    तीनों संस्थाओं को इस घटना की जानकारी दी
    एडकिंस ने बताया है कि उन्होंने यह सुनिश्चित किया है
    कि तीनों संस्थाओं को इस घटना की जानकारी दी जाए. फिर अपने ट्रेनिंग पार्टनर के साथ मिलकर उनके टेस्टिंग प्रोसेस में बदलाव पर काम किए हैं।  

    ऐसे में यह घटना दिखाती है कि पावरफुल AI मॉडल को जिम्मेदारी से काम करना सिखाना कितना मुश्किल और जरूरी भी है. यह कई कंपनियों के लिए बड़ा ही खतरनाक साबित हो सकता है। 

    गूगल के अलावा और भी कंपनियां 
    गूगल के अलावा और भी कंपनियां पावरफुल मॉडल बना चुकी है, जिसमें OpenAI और एंथ्रोपिक के नाम शामिल हैं. एंथ्रोपिक का Claude मिथोस मॉडल है, जो कंपनियों के सिस्टम को रिव्यू करता है और उनकी कमजोरियों का पता लगाता है। 

    पनी का दावा है कि इसकी मदद से कंपनियां अपनी सिक्योरिटी वॉल को मजबूत कर सकती हैं. हालांकि कई लोगों को चिंता सता रही है कि अगर मिथोस गलत हाथों में पड़ गया तो वह कंपनियों के सिस्टम में सेंधमारी करने की आशंका है। 

  • Samsung Galaxy Z Fold8 पर बड़ी राहत, Galaxy Forever प्लान से 25% तक घटेगी EMI

    Samsung Galaxy Z Fold8 पर बड़ी राहत, Galaxy Forever प्लान से 25% तक घटेगी EMI

    Samsung Galaxy Z Fold8 और Galaxy Z Fold8 Ultra खरीदने वालों के लिए कंपनी ने नया Galaxy Forever प्लान पेश किया है. इसके तहत दोनों फोल्डेबल फोन की महीने की EMI 25% तक कम हो जाएगी. हालांकि, कम EMI का मतलब फोन पर 25% की छूट नहीं है. फोन की कीमत का 40% हिस्सा 24 महीने बाद देना होगा. चूंकि ये फोन काफी महंगा है, इसलिए कई लोग चाहते हैं कि कम पैसे देकर फोन चलाया जाए, बाद में पूरा पैसे दे देंगे. इसी को साधते हुए ये स्कीम आई है.

    Samsung अपने महंगे फोल्डेबल फोन खरीदने का नया तरीका लेकर आया है. कंपनी ने Galaxy Z Fold8 और Galaxy Z Fold8 Ultra के लिए Galaxy Forever प्रोग्राम में नया 24 महीने का प्लान पेश किया है. इसके तहत ग्राहक हर महीने कम EMI देकर फोन खरीद सकते हैं, लेकिन फोन की कुल कीमत का एक बड़ा हिस्सा बाद में देना होगा.

    नए प्लान में Galaxy Z Fold8 Ultra की EMI 9,417 रुपये से घटकर 6,997 रुपये हो जाती है. वहीं Galaxy Z Fold8 की EMI 8,584 रुपये से घटकर 6,416 रुपये रह जाती है. यानी महीने की EMI में करीब 25 फीसदी की कमी आती है. यह प्लान 24 महीने के लिए है.

    40 फीसदी पैसा 2 साल बाद देना होगा
    यहां सबसे जरूरी बात यह है कि सैमसंग ने फोन की कीमत 25 फीसदी कम नहीं की है. कंपनी सिर्फ पेमेंट का तरीका बदल रही है. Galaxy Forever प्लान में फोन की कीमत का 60 फीसदी हिस्सा 24 महीने की EMI के जरिए चुकाया जाता है. इसके साथ Galaxy Forever की प्रोग्राम फीस भी जुड़ी होती है. बाकी 40 फीसदी रकम 24 महीने पूरे होने के बाद देनी होती है. इसे बुलेट पेमेंट कहा जाता है.

    मसलन, Galaxy Z Fold8 की शुरुआती कीमत 1,79,999 रुपये है, जबकि Galaxy Z Fold8 Ultra की कीमत 1,99,999 रुपये से शुरू होती है. ऐसे में कम EMI देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि फोन सस्ता हो गया है. अगर कस्टमर फोन अपने पास रखना चाहता है, तो 24 महीने बाद बची हुई 40 फीसदी रकम का भुगतान करना होगा.

    2 साल बाद तीन विकल्प मिलेंगे
    24 महीने पूरे होने के बाद कस्टमर्स के पास तीन विकल्प होंगे. पहला, वह अपना पुराना फोन वापस करके नया Galaxy फोन ले सकता है. दूसरा, 40 फीसदी की बची हुई रकम देकर मौजूदा फोन अपने पास रख सकता है. तीसरा, फोन वापस करके Galaxy Forever प्रोग्राम से बाहर निकल सकता है. ये विकल्प सैमसंग की शर्तों के तहत उपलब्ध होंगे.

    सैमसंग ने 24 महीने पूरे होने से पहले फोन वापस करने या अपग्रेड करने का विकल्प भी दिया है. 10 से 11 महीने के बीच फोन लौटाने पर 55 फीसदी तक, 12 से 13 महीने में 50 फीसदी तक, 14 से 18 महीने में 45 फीसदी तक और 19 से 25 महीने में 40 फीसदी तक अश्योर्ड बायबैक वैल्यू भी मिल सकती है.

    Samsung Care+ भी मिलेगा
    Galaxy Forever प्लान में Samsung Care+ भी शामिल है. इसमें फोन को एक्सिडेंटल और लिक्विड से सुरक्षा मिलती है. इसके लिए ग्राहक को अलग से Care+ खरीदने की जरूरत नहीं होगी.