Category: टेक्नॉलॉजी

  • गर्मियों में AC यूज करने के 5 जरूरी नियम, कूलिंग भी बढ़ेगी और बिजली भी बचेगी

    गर्मियों में AC यूज करने के 5 जरूरी नियम, कूलिंग भी बढ़ेगी और बिजली भी बचेगी

    AC चलाने का तरीका

    दिल्ली-NCR समेत देश में कई शहरों और कस्बों में लोग गर्मी से राहत पाने के लिए एयर कंडीशनर (AC) का यूज करते हैं. हालांकि AC चलाने की वजह से भारी बिजली का भी सामना करना पड़ता है.

    AC चलाने में करते हैं गलतियां
    AC चलाने में बहुत से लोग कॉमन गलतियां करते हैं. इसकी वजह से ना सिर्फ उनको भारी बिजली बिल का सामना करना पड़ता है बल्कि उनका AC भी खराब हो सकता है.

    रूल नंबर-1
    AC को हमेशा सही टेम्प्रेचर पर रखकर चलाना चाहिए, जो 24-25 डिग्री सेल्सियस होता है. 18 डिग्री सेल्सियस पर टेम्प्रेचर सेट करके AC को नहीं चलाना चाहिए. इससे बिजली बिल और AC दोनों पर असर पड़ता है.

    रूल नंबर-2
    AC की रेगुलर मेंटेनेंस करानी चाहिए. इसके लिए AC मैकेनिक को घर बुलाएं और AC को क्लीन कराएं. AC को 2 महीने में एक बार जरूरी क्लीनिंग करा लेना चाहिए.  

    रूल नंबर-3
    AC के वायरिंग को रेगुलर चेक करें. अगर बिजली का तार खराब, टूट रहा है या फिर उसमें कट गया है तो तुरंत मैकेनिक को बुलाकर उसको चेंज कराएं. ध्यान रखें कि AC की वायरिंग पूरी एक सिंगल पीस में हो. कई बार तार दो तार को जोड़कर उनपर टेप लगा दिया जाता है.  

    रूल नंबर-4
    AC से बेहतर कूलिंग और एयर फ्लो पाने के लिए एयर फिल्टर को रेगुलर क्लीन करें. इसको हर सप्ताह क्लीन करना चाहिए. इससे AC पर लोड कम पड़ेगा और वह बेहतर कूलिंग भी प्रोवाइड कराएगा.  

    रूल नंबर-5
    AC की हवा जल्दी से पूरे कमरे में सर्कुलेट नहीं हो पाती है, इसके लिए सबसे कम स्पीड पर सीलिंग फैन का यूज कर सकते हैं. ये ट्रिक्स रूम के टेम्प्रेचर को कम करने में मदद करती है.  (Photo: Unsplash)

     

  • Google ने 5GB स्टोरेज विवाद पर दी सफाई, कहा- सिर्फ कुछ रीजन में चल रही टेस्टिंग

    Google ने 5GB स्टोरेज विवाद पर दी सफाई, कहा- सिर्फ कुछ रीजन में चल रही टेस्टिंग

    गूगल की तरफ से मुफ्त में मिलने वाले 15GB की जगह 5GB स्टोरेज दी जा रही है. ये जानकारी हाल ही रिपोर्ट्स में सामने आई थी. इसके बाद एक्सपर्ट ने कई तरह के कयास लगाए और कुछ अफवाहें भी सामने आईं. अब गूगल ने इन अफवाहों पर लगाम लगाते हुए खुद सही जानकारी दी है.  

    एंड्रॉयड अथॉरिटी को दिए गए बयान में गूगल के प्रवक्ता ने कहा है. कंपनी इसपर टेस्टिंग कर रही है, जो कस्टमर को हाई क्वालिटी स्टोरेज सर्विस प्रोवाइड कराने में मदद करेगा.

    गूगल ने चुनिंदा इलाकों का दिया हवाला
    Google ने बताया है कि वे कुछ चुनिंदा रीजन में बनाए गए नए अकाउंट्स के लिए एक नई स्टोरेज पॉलिसी को लेकर टेस्टिंग हो रही है.

    5GB फ्री स्टोरेज देने का मकसद
    गूगल का मकसद यूजर्स को बेहतर स्टोरेज क्वालिटी प्रोवाइड कराना है. साथ ही अकाउंट की सिक्योरिटी और डेटा रिकवरी को मजबूत करने के लिए भी प्रोत्साहित करना है.

    पुराने यूजर्स को मिलती रहेगा 15GB डेटा
    हालांकि टेक्नोलॉजी कंपनी के द्वारा उन रीजन के नाम नहीं बताए हैं, जहां पर न्यू स्टोरेज नियम की टेस्टिंग हो रही है. प्रवक्ता ने बताया है कि जहां पर गूगल के पुराने अकाउंट्स की बात है वहां पर यूजर्स ने अपने फोन नंबर्स को कनेक्ट किया हुआ है. उन्हें जीमेल, गूगल ड्राइव और गूगल फोटोज के लिए पहले की तरह ही 15GB फ्री स्टोरेज मिलेगी.

    गूगल ने सपोर्ट पेज भी बदला
    गूगल ने अपने सपोर्ट पेज पर भी बदलाव किया है. पहले वहां लिखा था कि हर Google अकाउंट में 15GB स्टोरेज शामिल है. अब इसको बदलकर कर दिया है कि हर Google अकाउंट में अधिकतम 15GB तक स्टोरेज शामिल है.

    क्या है मामला?
    2-3 दिन पहले मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया था कि एक यूजर्स को गूगल अकाउंट बनाते समय मुफ्त में सिर्फ 5जीबी स्टोरेज मिली. इसके बाद और भी यूजर्स को ये मैसेज दिखाई दिया. इसके बाद यूजर्स को मोबाइल नंबर कंफर्म करने को कहा उसके बाद 15GB मुफ्त स्टोरेज देने का वादा किया है.

  • चीन में रोबोट्स को मिलेगा यूनिक ID कार्ड, इंसानों की तरह होगी पहचान

    चीन में रोबोट्स को मिलेगा यूनिक ID कार्ड, इंसानों की तरह होगी पहचान

     जिस प्रकार भारत के नागरिकों को आधार कार्ड आधिकारिक पहचान के तौर पर दिया जाता है। इस तरह से अब चीन में रोबोट ्स को भी आधिकारिक पहचान मिलेगी। हुबेई में कुछ रोबोट्स को खुद का आधिकारिक यूनिक ID कार्ड नंबर दिया जाएगा। ये रोबोट देश के पहले ऐसे रोबोट्स बनेंगे, जिन्हें यूनिक एआई कार्ड नंबर मिलेगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि इंसानों की तरह अधिकारी रोबोट के भी पूरे जीवन की गतिविधियों को ट्रैक किया जा सके।

    29 अक्षरों का होगा यूनिक कार्ड नंबर
    ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूनिक ID कार्ड नंबर 29 अक्षरों का होगा। इस कोड में रोबोट के ब्रांड की राष्ट्रीयता, निर्माता, प्रोडक्ट मॉडल, सीरियल नंबर, हार्डवेयर स्पेसिफिकेशन्स, इंटेलिजेंस लेवल और फैक्ट्री रिकॉर्ड जैसी डिटेल्स शामिल हैं। इसका मकसद चीन के ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स उद्योग के तेजी से बढ़ने के साथ-साथ इन रोबोट्स के काम की निगरानी की जा सके।

    ट्रेक कर पाएंगे रोबोट की जानकारी
    यह प्रोजेक्ट वुहान में स्थित हुबेई ह्यूमनॉइड रोबोट इनोवेशन सेंटर के नेतृत्व में हो रहा है। क्योंकि चीन फैक्ट्री और बिजनेस क्षेत्रों में ह्यूमनॉइड रोबोट्स के इस्तेमाल को लगातार बढ़ा रही है। चीन के नागरिकों के ID नंबरों की तरह ही हर रोबोट को एक यूनिक पहचान कोड मिलेगा। लेकिन इसमें 11 अतिरिक्त अक्षर होंगे। चाइना डेली की रिपोर्ट के अनुसार, यह डिजिटल ID प्लेटफॉर्म रोबोट के पूरे जीवन के दौरान उसके डिवाइस के रखरखाव की हिस्ट्री, और परफॉर्मेंस के रिकॉर्ड को इक्ट्ठा व ट्रैक कर सकता है।

    इनोवेशन सेंटर के मुताबिक, हर रोबोट का अपना एक खास पहचान नंबर (ID) होगा। इस नंबर के जरिए एक ही जगह पर बैठे-बैठे यह देखा जा सकेगा कि रोबोट के पुर्जे कितने घिसे हैं, उसकी बैटरी कैसी है और वह कितनी सटीकता से काम कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ये रिकॉर्ड खराबी की स्थिति में क्या करना है, यह तय करने और रखरखाव की स्थिति में सुधार करने में भी मदद कर सकते हैं।

    क्यों लाया जा रहा ये सिस्टम?
        तेजी से विकास के बावजूद, इस इंडस्ट्री को अभी भी तकनीकी मानकों में सुरक्षा निगरानी और डेटा के आदान-प्रदान के लिए एक जैसे फ्रेमवर्क की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
        इस नए सिस्टम का मकसद इन कमियों को दूर करना और बड़े पैमाने पर हाई क्वालिटी वाले डेवलपमेंट को बढ़ावा देना है।
        चाइना डेली की रिपोर्ट के अनुसार, यह सिस्टम खराबी, डेटा से जुड़े जोखिमों या ऑपरेशनल घटनाओं की स्थिति में तेजी लाएगा और निगरानी व्यवस्था को भी बेहतर बना सकती है।
        इंडस्ट्री के डेटा से पता चलता है कि 2025 में दुनिया भर में ह्यूमनॉइड रोबोट की शिपमेंट लगभग 17,000 यूनिट तक पहुंच गई। इसमें चीन का हिस्सा सबसे ज्यादा है, जहां 140 से ज्यादा मैन्युफैक्चरर हैं और लगभग 14,400 यूनिट शिप की गईं, जो दुनिया भर के कुल प्रोडक्शन का लगभग 84.7 प्रतिशत है।

  • मेटा ने पेश किया नया AI स्मार्ट ग्लास, हवा में टाइपिंग का मिलेगा फीचर

    मेटा ने पेश किया नया AI स्मार्ट ग्लास, हवा में टाइपिंग का मिलेगा फीचर

    फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा ने कुछ नए फीचर्स का ऐलान किया है, जो उसके आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) स्मार्ट ग्लास के लिए है. इस स्मार्ट ग्लास का नाम मेटा रेबेन डिस्प्ले है. यूजर्स बिना किसी डिस्प्ले या कीबोर्ड को छुए बिना ही हवा में उंगलियां घुमाने से टाइप कर सकेंगे. यह न्यूरल रिस्टबैंड के चलते संभव हो पाया है. यह सभी मैसेजिंग ऐप्स जैसे वॉट्सऐप आदि को सपोर्ट करेगा.

    मेटा रेबन डिस्प्ले को कंपनी ने करीब 6 महीने पहले लॉन्च किया था और अब इसके लिए कई नए फीचर्स का ऐलान किया है. यह नए फीचर्स डिवाइस के लिए कम्युनिकेशन में बहुत ही मददगार साबित होंगे. मेटा रेबेन डिस्प्ले अभी भारत में सेल के लिए उपलब्ध नहीं है.

    ना फोन, ना कीबोर्ड, ना वायस कमांड
    नए अपडेट में सबसे अहम रोल न्यूरल हैंडराइटिंग है. इसकी मदद से स्मार्टफोन को पॉकेट से निकाले बिना ही टाइपिंग की जा सकती है. इसके लिए किसी भी कीबोर्ड, फिजिकल या डिजिटल कीबोर्ड का यूज नहीं करना होगा.

    हवा में उंगलियों को घुमाकर टाइपिंग कर सकेंगे
    मेटा रेबन डिस्प्ले पहनने वाला शख्स सिर्फ हवा में उंगलियों को घुमाकर टाइपिंग कर सकेंगे. यूजर्स को हवा में शब्द का टाइप करना होगा, जैसे एम लिखने के लिए अंग्रेजी में एम बनाने की शेप में उंगलियां चलानी होंगी.

    न्यूरल रिस्टबैंड का यूज करना होगा
    मेटा रेबेन डिस्प्ले के साथ यूजर्स को न्यूरल रिस्टबैंड का यूज करना होगा, जिसको कंपनी ने मेटा रेबन डिस्प्ले के साथ लॉन्च किया गया है. यह बैंड इंसानी हाथों के जेस्चर को ट्रैक करता है और उनको समझता है और उसको कमांड में भी ट्रांसलेट कर सकता है.

    सभी मैसेजिंग ऐप्स जैसे वॉट्सऐप आदि को सपोर्ट करेगा
    लेटेस्ट अपडेट की मदद से अब यह सभी मैसेजिंग ऐप्स जैसे वॉट्सऐप, मैसेंजर, इंस्टाग्राम और एंड्रॉयड व आईओएस के मैसेजिंग ऐप्स पर भी सपोर्ट करता है.

    मेटा ने ये नए फीचर्स भी शामिल किए हैं
    जेस्चर बेस्ड टाइपिंग के अलावा कंपनी ने कुछ और फीचर्स को शामिल किया गया है. इसमें डिस्प्ले रिकॉर्डिंग, इम्प्रूव्ड नेविगेशन और लाइव कैप्शन एक्सपेंड कर सकेंगे. ये न्यू अपडेट मेटा रेबन ग्लास डिस्प्ले फीचर को बेहतर करा सकेंगे.
     

  • पुराना AC भी देगा नई जैसी ठंडक, बस अपनाएं ये आसान मेंटेनेंस टिप्स

    पुराना AC भी देगा नई जैसी ठंडक, बस अपनाएं ये आसान मेंटेनेंस टिप्स

    गर्मी जैसे-जैसे बढ़ती है, पुराने AC का असली टेस्ट शुरू हो जाती है. कई लोगों की शिकायत होती है कि AC चल तो रहा है, लेकिन पहले जैसी ठंडक नहीं दे रहा. कमरे को ठंडा होने में बहुत समय लग रहा है या फिर AC बस हवा फेंक रहा है, ठंडक नहीं.

    अच्छी बात ये है कि ज्यादातर मामलों में इसका समाधान आसान होता है, बस थोड़ी समझ और सही मेंटेनेंस की जरूरत होती है.

    कार की तरह AC की भी रेग्यूलर सर्विस
    सबसे पहले बात करते हैं सर्विसिंग की. अगर आपका AC एक-दो साल पुराना है और आपने हर साल सर्विस नहीं करवाई है, तो ठंडक कम होना लगभग तय है. AC के अंदर धूल, मिट्टी और गंदगी जमा हो जाती है, जिससे एयरफ्लो कम हो जाता है और कूलिंग पर असर पड़ता है.

    इसलिए हर सीजन की शुरुआत में प्रोफेशनल सर्विस कराना बेहद जरूरी है. सर्विसिंग के दौरान टेक्नीशियन कॉइल्स, फिन्स और ड्रेनेज सिस्टम को साफ करता है, जिससे AC की परफॉर्मेंस वापस बेहतर हो जाती है.

    फिल्टर क्लीनिंग
    अब बात आती है फिल्टर की सफाई की, जो आप खुद भी कर सकते हैं. AC का फिल्टर सबसे जल्दी गंदा होता है क्योंकि वही सारी धूल को रोकता है. अगर फिल्टर चोक हो गया, तो हवा ठीक से पास नहीं हो पाएगी और ठंडक कम हो जाएगी.

    पीक समर में आपको हर 10-15 दिन में फिल्टर निकालकर पानी से धोना चाहिए और पूरी तरह सूखने के बाद ही वापस लगाना चाहिए. ये छोटा सा काम आपके AC की कूलिंग को काफी हद तक सुधार सकता है.

    गैस की इश्यू
    कूलिंग कम होने का एक बड़ा कारण गैस भी होता है. AC में जो रेफ्रिजरेंट गैस होती है, वही असल में हवा को ठंडा करती है. अगर गैस कम हो गई है या लीक हो रही है, तो AC चाहे जितना चलाएं, ठंडक नहीं मिलेगी.

    ऐसे में आपको किसी एक्सपर्ट से गैस चेक करवानी चाहिए. अगर गैस कम है, तो उसे रिफिल किया जाता है, लेकिन उससे पहले ये देखना जरूरी है कि कहीं लीकेज तो नहीं है. अगर लीक है और आपने सिर्फ गैस भरवा ली, तो कुछ ही समय में वही समस्या फिर से आ जाएगी.

    गैस लीक
    लीकेज की समस्या को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी गलती होती है. पाइप्स या कॉइल्स में छोटी सी दरार भी गैस को धीरे-धीरे बाहर निकाल सकती है. एक अच्छा टेक्नीशियन पहले लीकेज ढूंढेगा, उसे ठीक करेगा और उसके बाद ही गैस भरेगा. इससे आपका AC लंबे समय तक सही कूलिंग देगा.

    एक और अहम चीज है आउटडोर यूनिट की सफाई. कई लोग सिर्फ इंडोर यूनिट पर ध्यान देते हैं, जबकि आउटडोर यूनिट भी उतनी ही जरूरी है. अगर आउटडोर यूनिट पर धूल या कचरा जमा है या उसके आसपास हवा का सही फ्लो नहीं है, तो हीट बाहर नहीं निकल पाएगी और कूलिंग कमजोर हो जाएगी. कोशिश करें कि आउटडोर यूनिट खुली जगह पर हो और उसके आसपास कोई रुकावट न हो.

    कमरे की कंडीशन कैसी हो?
    इसके अलावा, कमरे की कंडीशन भी बहुत मायने रखती है. अगर कमरे में बहुत ज्यादा धूप आती है या दरवाजे-खिड़कियां ठीक से बंद नहीं हैं, तो AC को ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी. मोटे पर्दे इस्तेमाल करें और कोशिश करें कि ठंडी हवा बाहर न जाए. इससे AC की एफिशिएंसी बढ़ती है. डायरेक्ट सनलाइट आती है तो ब्लैकआउट ब्लाइंड का यूज करना बेहतर होगा.

    पुराने AC में एक और ट्रिक काम आती है, थर्मोस्टेट सेटिंग्स को समझदारी से यूज करना. बहुत लोग AC को 16 डिग्री पर सेट कर देते हैं, ये सोचकर कि जल्दी ठंडा होगा. लेकिन इससे कंप्रेसर पर लोड बढ़ता है और बिजली भी ज्यादा खर्च होती है.

    24-26 डिग्री का सेटिंग आमतौर पर सही रहता है, जिससे कूलिंग भी अच्छी मिलती है और AC पर दबाव भी कम रहता है.

    अगर आपका AC बहुत पुराना है, तो कभी-कभी पार्ट्स की हालत भी खराब हो जाती है, जैसे कंप्रेसर या फैन मोटर. ऐसे में बार-बार छोटी-मोटी रिपेयर कराने से बेहतर है कि एक बार सही से जांच करवा लें कि कौन सा पार्ट बदलने की जरूरत है.

    ये समझना जरूरी है कि AC मशीन है और उसे सही देखभाल चाहिए. समय पर सर्विसिंग, साफ फिल्टर, सही गैस लेवल और लीकेज फिक्सिंग, इन सब चीजों का ध्यान रखेंगे, तो आपका पुराना AC भी नई जैसी ठंडक दे सकता है. थोड़ी सी मेहनत और सही जानकारी से आप बिना नया AC खरीदे भी इस गर्मी में आराम से ठंडक का मजा ले सकते हैं.

  • WhatsApp Plus: नया सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च

    WhatsApp Plus: नया सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च

    WhatsApp अब सिर्फ मैसेज भेजने वाला ऐप नहीं रहना चाहता. कंपनी अब इसे एक प्रीमियम प्लेटफॉर्म में बदलने की तैयारी कर रही है. अब कंपन WhatsApp Plus ला रही है. ये दरअसल एक सब्सक्रिप्शन सर्विस है जिसके लिए यूजर्स को पैसे देने होंगे.

    फिलहाल ये सब्सक्रिप्शन प्लान चुनिंदा आईफोन यूजर्स के लिए रोलआउट होना शुरू हो गया है. पिछले कई महीनों से इसकी चर्चा बीटा वर्जन में हो रही थी, लेकिन अब पहली बार कुछ यूजर्स को इसका एक्सेस मिलने लगा है.

    सबसे दिलचस्प बात यह है कि काफी समय तक एक फर्जी WhatsApp Plus वायरल होता रहा था. ये ऐप यूजर्स को एक्स्ट्रा फीचर्स दिलाने का दावा करता था, लेकिन बाद में य स्कैम ऐप निकला. लेकिन अब कंपनी खुद ही WhatsApp Plus ला रही है. कंपनी खुद ही लोगों को पहले WhatsApp Plus यूज करने से मना करती रही. कई यूजर्स के अकाउंट परमानेंट ब्लॉक भी हो गए.

    बहरहाल, कंपनी का नया WhatsApp Plus फीचर सिर्फ कुछ आईफोन यूजर्स को दिख रहा है और धीरे-धीरे बाकी लोगों तक पहुंचाया जाएगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन लोगों के पास WhatsApp का लेटेस्ट iOS वर्जन है, उन्हें सेटिंग्स में इसका ऑप्शन दिख सकता है.

    पैसे देकर मिलेगा क्या?
    व्हाट्सऐप प्लस का पूरा फोकस ऐप को ज्यादा पर्सनल और कस्टमाइज्ड बनाने पर है. यानी मैसेजिंग और कॉलिंग जैसी बेसिक सुविधाएं अभी भी मुफ्त रहेंगी, लेकिन जो लोग ऐप का लुक और फीचर्स बदलना चाहते हैं, उन्हें एक्स्ट्रा चीजें मिलेंगी.

    इस नए प्लान में यूजर्स को 18 नए थीम कलर मिलेंगे. अभी व्हाट्सऐप का ज्यादातर इंटरफेस हरे रंग का होता है, लेकिन प्लस सब्सक्रिप्शन के बाद लोग पर्पल, ब्लू, रेड, यलो और कई दूसरे रंग चुन पाएंगे. ऐप के आइकन भी बदले जा सकेंगे. कंपनी करीब 14 नए ऐप आइकन देने वाली है.

    नए थीम्स, नए स्टिकर्स
    इसके अलावा प्रीमियम स्टिकर्स भी मिलेंगे जिनमें एनिमेटेड इफेक्ट होंगे. यानी स्टिकर भेजने का एक्सपीरियंस थोड़ा ज्यादा इंटरैक्टिव और विजुअल होगा. कंपनी नए रिंगटोन भी दे रही है ताकि व्हाट्सऐप कॉल बाकी ऐप्स से अलग महसूस हो.

    एक बड़ा बदलाव पिन चैट्स में देखने को मिलेगा. अभी आम यूजर्स सिर्फ 3 चैट पिन कर सकते हैं, लेकिन WhatsApp Plus लेने के बाद 20 चैट तक पिन की जा सकेंगी. जिन लोगों के पास बहुत ज्यादा काम या बिजनेस चैट्स होती हैं, उनके लिए यह फीचर उपयोगी माना जा रहा है.

    व्हाट्सऐप ग्रुपिंग और चैट मैनेजमेंट पर भी काम कर रहा है. उदाहरण के लिए अगर किसी ने ऑफिस नाम से एक चैट लिस्ट बनाई है, तो वह एक साथ सभी ऑफिस चैट्स का थीम, नोटिफिकेशन साउंड और कॉल ट्यून बदल सकेगा. अभी यह सब अलग-अलग करना पड़ता है.

    300 रुपये प्रति माह
    सबसे ज्यादा चर्चा इसकी कीमत को लेकर हो रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोप में इसकी कीमत करीब 2.49 यूरो प्रति महीना रखी गई है. यानी भारतीय रुपये में लगभग 280 रुपये के आसपास. अलग-अलग देशों में कीमत अलग हो सकती है. कुछ जगहों पर कंपनी ट्रायल भी दे सकती है.

    हालांकि अभी भारत में इसकी आधिकारिक लॉन्च डेट सामने नहीं आई है. लेकिन टेक रिपोर्ट्स मान रही हैं कि आने वाले हफ्तों या महीनों में यह ज्यादा यूजर्स तक पहुंच सकता है.

    दिलचस्प बात यह भी है कि मेटा अब धीरे-धीरे अपने सभी प्लेटफॉर्म पर पेड फीचर्स बढ़ा रहा है. इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पहले से सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम कर रहे हैं. अब व्हाट्सऐप भी उसी दिशा में जाता दिख रहा है.

    फ्यूचर में जरूरी फीचर्स भी पेड कर सकती है कंपनी
    इस नए मॉडल को लेकर बहस भी शुरू हो गई है. कुछ लोग मानते हैं कि आज थीम और स्टिकर्स पैसे में मिल रहे हैं, लेकिन फ्यूचर में कहीं जरूरी फीचर्स भी पेड न हो जाएं. आम तौर पर कंपनियां पैसे कमाने के लिए ये स्ट्रैटिजी अपनाती आई हैं. नया सब्सक्रिप्शन ला कर फ्री में मिलने वाले जरूरी फीचर्स पेड कर देती हैं.

  • AI डीपफेक पर सरकार सख्त, 2 घंटे में कंटेंट हटाने का नया नियम लागू

    AI डीपफेक पर सरकार सख्त, 2 घंटे में कंटेंट हटाने का नया नियम लागू

    दरअसल पिछले कुछ सालों में AI डीपफेक और फर्जी इंटीमेट तस्वीरों का मामला तेजी से बढ़ा है. कई लोगों की तस्वीरों को मॉर्फ करके अश्लील फोटो और वीडियो बनाए गए.

    सरकार सख्त, लेकिन कंपनियां अब भी कर रहीं हैं लापरवाही!
    खासकर महिलाओं और लड़कियों को इसका सबसे ज्यादा नुकसान हुआ. कई मामलों में ब्लैकमेलिंग, ऑनलाइन ट्रोलिंग और मानसिक उत्पीड़न तक की शिकायतें सामने आईं. AI टूल्स की वजह से अब किसी की तस्वीर लेकर कुछ ही मिनटों में नकली वीडियो या फोटो बनाना आसान हो गया है.

    इसी खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने 2026 में आईटी रूल्स को और सख्त किया. नए नियमों के तहत अगर कोई यूजर किसी प्लेटफॉर्म पर गैर-सहमति वाली इंटीमेट फोटो या डीपफेक कंटेंट की शिकायत करता है, तो सोशल मीडिया कंपनियों को बहुत तेजी से कार्रवाई करनी होगी.

    कई मामलों में 2 घंटे के अंदर कंटेंट हटाने की बात कही गई है, जबकि सरकारी या कोर्ट ऑर्डर वाले मामलों में 3 घंटे के अंदर एक्शन लेना पड़ सकता है. ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक सराकरी ऑफिशियल्स ने कहा है कि अब करीब 75% ऐसे कंटेंट को शिकायत मिलने के दो घंटे के अंदर हटाया जा रहा है. पहले यही प्रक्रिया कई बार 24 घंटे से लेकर कई दिनों तक चलती थी.

    अब प्लेटफॉर्म्स को तेज मॉडरेशन सिस्टम, AI डिटेक्शन टूल और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम बनानी पड़ रही है.

    सरकार ने AI कंटेंट पर लेबल भी किया था मैंडेटरी
    नए नियम सिर्फ कंटेंट हटाने तक सीमित नहीं हैं. सरकार चाहती है कि AI से बने कंटेंट को साफ तौर पर लेबल भी किया जाए ताकि लोग समझ सकें कि फोटो या वीडियो असली नहीं है. कई नियमों में यह भी कहा गया है कि सिंथेटिक या AI जनरेटेड मीडिया पर मार्किंग जरूरी होगी.

    एक बड़ा बदलाव यह भी है कि अब प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी पहले से ज्यादा बढ़ गई है. अगर कोई कंपनी शिकायत के बाद भी ऐसे कंटेंट को हटाने में लापरवाही करती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.

    भारत सरकार का फोकस अब पहले हटाओ, बाद में जांच करो वाले मॉडल पर दिख रहा है क्योंकि डीपफेक कंटेंट बहुत तेजी से वायरल हो जाता है.

    रिपोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि पुराने नियमों में दिया गया समय बहुत लंबा था और तब तक ऐसा कंटेंट तेजी से वायरल हो जाता था.

    रिपोर्ट के मुताबिक नए नियमों के बाद इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स और दूसरे प्लेटफॉर्म्स ने अपनी मॉडरेशन टीम और AI सिस्टम को और मजबूत किया है ताकि डीपफेक, मॉर्फ्ड फोटो और रिवेंज पोर्न जैसे कंटेंट को जल्दी पकड़ा जा सके. सरकार का फोकस खासतौर पर महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाने वाले कंटेंट पर है.

    अधिकारियों ने यह भी माना कि सिर्फ AI पर भरोसा करना आसान नहीं है क्योंकि कई मामलों में गलत तरीके से भी कंटेंट फ्लैग हो सकता है. इसलिए कुछ मामलों में मानव समीक्षा भी की जाती है, जिससे थोड़ी देरी हो सकती है. लेकिन सरकार चाहती है कि ज्यादातर मामलों में तुरंत कार्रवाई हो ताकि पीड़ित को कम से कम नुकसान पहुंचे.

    ब्रिटेन में कंपनियों पर जुर्माना का प्रोविजन
    सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के कई देश अब इस तरह के कंटेंट पर सख्ती बढ़ा रहे हैं. ब्रिटेन में भी सरकार ने टेक कंपनियों को चेतावनी दी है कि अगर रिवेंज पोर्न या डीपफेक इंटीमेट कंटेंट को तय समय में नहीं हटाया गया तो भारी जुर्माना या प्लेटफॉर्म ब्लॉक तक हो सकता है.

    एक और बड़ी चिंता यह है कि AI टूल्स अब आम लोगों तक पहुंच चुके हैं. रिसर्च में सामने आया है कि हजारों ऐसे मॉडल इंटरनेट पर मौजूद हैं जिनसे किसी की फर्जी तस्वीरें बनाई जा सकती हैं. कई टूल इतने आसान हो चुके हैं कि बिना टेक्निकल जानकारी वाला व्यक्ति भी इन्हें इस्तेमाल कर सकता है.

    यही वजह है कि सरकारें अब सोशल मीडिया कंपनियों से सिर्फ शिकायत सुनने की उम्मीद नहीं कर रहीं, बल्कि पहले से ऐसे कंटेंट को पकड़ने वाली टेक्नोलॉजी लगाने का दबाव बना रही हैं. आने वाले समय में इंस्टाग्राम, फेसबुक और दूसरे प्लेटफॉर्म पर AI आधारित मॉनिटरिंग और ज्यादा बढ़ सकती है.

    हालांकि इस पर बहस भी शुरू हो गई है. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि बहुत तेजी से कंटेंट हटाने के नियम का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है और इससे फ्री स्पीच पर असर पड़ सकता है.

    लेकिन दूसरी तरफ साइबर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि डीपफेक और गैर-सहमति वाले इंटीमेट कंटेंट को रोकने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं क्योंकि इस

  • चीन ने 6G रेस में बढ़ाई रफ्तार, 6GHz बैंड ट्रायल को मिली मंजूरी

    चीन ने 6G रेस में बढ़ाई रफ्तार, 6GHz बैंड ट्रायल को मिली मंजूरी

    रोबोट और एआई के बाद अब चीन 6G की रेस में सबसे आगे निकलने की तैयारी में है। ऐसा हम इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि चीन के टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर ने एक अहम कदम उठाया है। चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 6G के मोबाइल संचार सिस्टम के लिए टेस्ट फ्रीक्वेंसी के इस्तेमाल को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। MIIT के अनुसार, उसने IMT-2030 (6G) प्रमोशन ग्रुप को 6GHz बैंड के लिए ट्रायल फ्रीक्वेंसी इस्तेमाल करने का परमिट दे दिया है। इससे चीन के चुनिंदा इलाकों में तकनीकी ट्रायल किए जा सकेंगे। इस मंजूरी का मकसद चीन में 6G टेक्नोलॉजी पर रिसर्च और औद्योगिक लेवल पर उसके इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

    6G डेवलपमेंट को मिलेगा बढ़ावा
    Xinhua न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह टेस्टिंग उन खास कामों पर आधारित होगी, जिन्हें इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) ने 6G नेटवर्क के लिए जरूरी माना है। इनमें बहुत हाई डेटा स्पीड, बहुत कम लेटेंसी (देरी), बड़े पैमाने पर कनेक्टिविटी और इंटीग्रेटेड सेंसिंग शामिल हैं। इस फेज में डेवलपर्स तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए R&D (रिसर्च और डेवलपमेंट) और वेरिफिकेशन टेस्टिंग करेंगे। MIIT ने एक बयान में कहा कि इन टेस्ट फ्रीक्वेंसी को मिली मंजूरी से चीन में 6G के हाई क्वालिटी वाले डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा।

    तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश
    यह टेस्टिंग उन खास कामों पर आधारित होगी, जिन्हें इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) ने 6G नेटवर्क के लिए जरूरी माना है। चीन IMT-2030 प्रमोशन ग्रुप के जरिए 6G रिसर्च को तेजी से आगे बढ़ाने में लगा हुआ है। IMT-2030 प्रमोशन ग्रुप एक खास इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म है, जिसमें बड़े टेलीकॉम ऑपरेटर, इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियां, शिक्षण संस्थान और रिसर्च इंस्टीट्यूट शामिल हैं। ये नए ट्रायल लाइसेंस चीन द्वारा पहले 5G लॉन्च करने और अभी चल रहे 5G एडवांस्ड डिप्लॉयमेंट के बाद एक अहम पड़ाव हैं।

    6G का मतलब सिर्फ हाई स्पीड इंटरनेट नहीं- ज्योतिरादित्य सिंधिया
    भारत की बात करें तो मार्च में टेलीकॉम मानकीकरण पर एक इंटरनेशनल वर्कशॉप में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि 6G सिर्फ तेज स्पीड और कम लेटेंसी तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इमर्सिव टेक्नोलॉजी और रियल-टाइम कनेक्टिविटी से पावर्ड "इंटेलिजेंट इंटरनेट ऑफ एवरीथिंग" को संभव बनाएगा

    उनका कहना था कि 6G का मतलब सिर्फ स्पीड और लेटेंसी में जबरदस्त बढ़ोतरी करना ही नहीं है। यह इंटेलिजेंस, इमर्सिवनेस और असीमित संभावनाओं की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।

    भारत में किस बात का इंतजार
    मंत्री ने कहा कि भारत 6G के विकास में खुद को सबसे आगे रखने के लिए एक्टिव होकर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत 6G IPR में सबसे आगे है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि 6G स्पेक्ट्रम के आवंटन का फैसला ITU और 3GPP करेंगे। यह फैसला अभी बाकी है और मानकीकरण की प्रोसेस पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।

     

  • नए Apple AirPods में मिलेगा कैमरा और AI सपोर्ट, जानें क्या होंगे फीचर्स

    नए Apple AirPods में मिलेगा कैमरा और AI सपोर्ट, जानें क्या होंगे फीचर्स

    एपल नए एयरपॉड्स पर काम कर रहा है, जिसमें बिल्ट इन कैमरा होगा. यूनिक एयरपोड्स को लेकर अब तक कई रिपोर्ट्स सामने आ चुकी है. लेटेस्ट रिपोर्ट में दावा किया है कि ऐपल इन बड्स के फाइनल स्टेज में पहुंच गया है.

    रिपोर्ट में दावा किया है कि न्यू बड्स को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) फीचर्स के साथ लॉन्च किया जाएगा. हालांकि कंपनी को लंबे समय से नए जनरेटिव एआई बेस्ड सिरी को रोलआउट करने में देरी का सामना करना पड़ रहा है.

    ब्लूमबर्ग ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि नए एयरपोड्स की अभी टेस्टिंग की जा रही है. रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि न्यू बड्स का डिजाइन और काम करने का फाइनल प्रोडक्ट जैसे ही है.

    न्यू बड्स जल्द होंगे लॉन्च
    पुरानी रिपोर्ट्स में दावा किया है कि ऐपल इन इयरबड्स  को इस साल की पहली छमाही में लॉन्च कर सकती है. हालांकि अभी तक कंपनी ने इसको लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं दी है. हालांकि अभी कंपनी अपने सिरी का न्यू जनरेटिव AI वर्जन को अभी तैयार नहीं कर कर पाया है.

    ऐपल एयरपॉड्स में कैमरा कैसे काम करेंगे?
    ऐपल के न्यू एयरपॉड्स में दिए गए कैमरे सेल्फी लेने या वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए नहीं होंगे. ये ऐपल के एआई असिस्टेंट सिरी के आंखों की तरह काम कर सकेंगे. कैमरों की मदद से आसपास मौजूद चीजों को जान सकेगी और उसकी डिटेल्स भी शेयर कर सकेगी.  

    विजुअल मोड के जैसे काम करता है
    यह आइडिया काफी कुछ ओपनएआई और चैटजीपीटी के लाइव विजुअल मोड के जैसे काम करता है. इसकी मदद से किसी भी सामान की तरफ कैमरा करके उसके बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं.

    उदाहरण के तौर पर समझें तो मार्केट या किसी नई लोकेशन पर जाते हैं और वहां किसी नई चीज को देखते हैं और उसके बारे में नहीं जानते हैं तो कैमरे की मदद से उनके बारे में आसानी से जाना जा सकता है.

    साथ ही बड्स यूजर्स को उन मूमेंट्स को भी दिखाएगा, जिनको पहले वह पहले देख चुके है और उस खास मूमेंट पर याद नहीं कर पा रहे हैं तो ये बड्स उनको बारे में भी डिटेल्स शेयर कर सकेंगे.

    रिपोर्ट में दावा किया है कि AirPods में एक छोटू LED भी होगा, जो कैमरा ऑन होने पर LED लाइट भी ऑन हो जाएगी.