Category: उत्तर प्रदेश

  • बिजली बिल में लगातार चौथी बार राहत, अक्टूबर में 5% से ज्यादा कमी संभव

    बिजली बिल में लगातार चौथी बार राहत, अक्टूबर में 5% से ज्यादा कमी संभव

     लखनऊ
    बिजली उपभोक्ताओं को अक्टूबर में भी बिजली के बिल से राहत मिलती दिख रही है। जून में 10 प्रतिशत ज्यादा बिजली का बिल देने वाले उपभोक्ताओं का जुलाई में 4.43 प्रतिशत, अगस्त में 2.92 प्रतिशत, सितंबर में रिकॉर्ड 7.93 प्रतिशत के बाद अब अक्टूबर में भी पांच प्रतिशत से अधिक बिल कम हो सकता है।

    एफपीपीसीए (ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन) के तहत जुलाई माह के ईंधन अधिभार शुल्क(फ्यूल सरचार्ज) में कमी को देखते हुए सितंबर के बिजली बिल पर अक्टूबर में सभी श्रेणियों के लगभग 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। इस संबंध में पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा जल्द ही आदेश जारी करने की कवायद की जा रही है।

    जून में भारी-भरकम 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क वसूलने पर विद्युत नियामक आयोग के कड़े रुख के बाद से लगातार चौथे माह उपभोक्ताओं को बिजली के बिल से कुछ राहत मिलना तय है।

    गौरतलब है कि कारपोरेशन द्वारा पुराने भुगतान को भी अधिभार में शामिल करते हुए 1610 करोड़ रुपये के लिए जून में उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत अतिरिक्त वसूला गया था। जून में उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत वसूलने के बाद कॉर्पोरेशन प्रबंधन जुलाई में भी 10 प्रतिशत वसूलता उससे पहले ही आयोग ने पुराने भुगतान को अधिभार में शामिल करने पर नाराजगी जताते हुए उसे गलत ठहराते हुए आदेश जारी किया था।

    आयोग ने कहा था कि वास्तविक बिजली खरीद की लागत एवं ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर ही अधिभार तय होगा। इसमें किसी अन्य माह की देनदारी के भुगतान या समायोजन को शामिल नहीं किया जा सकता।

    यही कारण रहा कि जुलाई से लगातार उपभोक्ताओं को बिजली का कम ही बिल देना पड़ रहा है। उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बताया कि एफपीपीसीए गणना में अब पारदर्शिता के चलते उपभोक्ताओं को कानूनन इसका लाभ समय पर मिल रहा है।

     

  • 1375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र, योगी बोले- युवाओं को मिल रही उड़ान

    1375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र, योगी बोले- युवाओं को मिल रही उड़ान

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों ने पहले राज्य के लोगों के सामने पहचान का संकट खड़ा किया, वे अब नए रूप और नारे के साथ गिरगिट की तरह रंग बदल रहे हैं। उनके शासनकाल में माफिया हर जिले में समानांतर सरकार चला रहे थे। पहले भर्तियों के विज्ञापन से पहले ही आशंकाएं सामने आ जाती थीं। जकड़न, बेईमानी और माफिया का राज था। वर्ष 2017 में सरकार बनते ही हमनें इस स्थिति को समाप्त करने का संकल्प लिया। आज प्रदेश सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था वाला राज्य बन गया है।

    नवचयनित 1375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को सोमवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के ज्यूपिटर हाल में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि नौजवानों के सपनों को उड़ान चाहिए, जो अब मिल रही है। 10 वर्ष पहले ऐसा नहीं था। आज हम युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभाओं का उपयोग राज्य की समृद्धि में कर रहे हैं। हमारी सरकार में 9.5 लाख युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सरकारी नौकरियां दी गई हैं।

    पहले हमारी अर्थव्यवस्था नीचे के पांच राज्यों में थी, अब हम शीर्ष तीन राज्यों में शामिल हैं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और राज्य का बजट तीन गुणा बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के लिए विकास का मतलब केवल सैफई था। हमने सपा अध्यक्ष से कहा था कि हर सप्ताह नियुक्ति पत्र बांटेंगे, छह महीने में एक लाख नौकरियां देंगे। आज चौथा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम हो रहा है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले तीन कार्यक्रमों में 5297 युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए जा चुके हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी के सपनों को केंद्र और प्रदेश की एनडीए सरकार ने साकार किया है। गांवों में अब ग्राम सचिवालय बनाए गए हैं, जहां ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी, लेखपाल, बीसी सखी और पंचायत सहायक के बैठने की व्यवस्था है। डिजिटल लाइब्रेरियां बनाई जा रही हैं। जितनी कमाई ग्राम पंचायतें करेंगी, उतनी ही धनराशि सरकार भी देगी।

    पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि इस सरकार में विभाग में 6581 नियुक्तियां की गईं हैं। सपा के शासनकाल में नौकरी का विज्ञापन आते ही शिवपाल यादव के गुर्गे पूरे प्रदेश में नौकरी बेचने में जुट जाते थे। सपा और कांग्रेस नफरत की राजनीति करती हैं। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि अब नौकरियों के लिए कोई पैसा नहीं ले सकता है। गांधी जी के नाम पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने कभी गांवों का विकास नहीं किया। इस कार्यक्रम में महापौर सुषमा खर्कवाल, एमएलसी डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक डा. नीरज बोरा, प्रमुख सचिव पंचायती राज रविंद्र, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एसएन साबत उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री के हाथों इन्हें मिले नियुक्ति पत्र
    मुख्यमंत्री ने 11 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिए, जिनमें आशुतोष त्रिपाठी, ओम बघेल, प्रवीण, सुधा, आदित्य सिंह, नेहा, रूपाली, श्रुति श्रीवास्तव, ब्यूटी शाही, शुभम और अमित कुमार सिंह शामिल हैं। कुशीनगर के आदित्य सिंह, लखनऊ की श्रुति सिंह और गोरखपुर की ब्यूटी शाही ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर अपने विचार साझा किए।

  • सीएम योगी की प्रेरणा से यूपी के युवाओं ने खोजी भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाने में सक्षम मशीन

    सीएम योगी की प्रेरणा से यूपी के युवाओं ने खोजी भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाने में सक्षम मशीन

    ग्रेटर नोएडा
     सोचिए, एक ऐसा अस्पताल जिसे न बड़ी इमारत चाहिए, न भारी-भरकम मशीनों से भरी लैब। उसे कार में रखिए और शहर से गांव या किसी दूर-दराज इलाके तक ले जाइए। मरीज सामने आया तो बीपी और शुगर से लेकर ईसीजी, फेफड़ों, आंख-कान तक की जांच वहीं शुरू। एक बूंद खून से कई जरूरी जांच और महज 10 मिनट में कुल 75 तरह के टेस्ट की सुविधा। भविष्य में होने वाली बीमारियों के जोखिम का समय रहते संकेत देने की क्षमता भी। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदर्शित ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ इसी सोच को हकीकत में बदलने की कोशिश है। करीब तीन लाख रुपये की यह मशीन स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पताल की चारदीवारी से निकालकर मरीज के दरवाजे तक पहुंचाने का मॉडल पेश कर रही है। सीएम योगी की प्रेरणा से यूपी के युवाओं ने भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाने में सक्षम ये मशीन खोजी है।

    तीन लाख की मशीन से अस्पताल जैसी जांच
    एमडी इंटरनल मेडिसिन और डॉक्टर्स ऑन ड्यूटी के फाउंडर एवं सीईओ डॉ. श्रेय श्रीवास्तव कहते हैं कि मशीन को इस तरह विकसित किया गया है कि प्राथमिक स्तर पर होने वाली कई महत्वपूर्ण जांच एक ही जगह की जा सकें। इसमें ब्लड प्रेशर, शुगर, बॉडी एनालिसिस, ईसीजी और लंग्स फंक्शन टेस्ट के साथ आंख, नाक और कान की जांच की सुविधा है। उनका कहना है कि सिंगल ड्रॉप ब्लड टेस्ट समेत कुल 75 जांच करीब 10 मिनट में की जा सकती हैं।

    इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका पोर्टेबल होना है। इसे कार में रखकर आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है। यानी जिस गांव में अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर नहीं है, वहां जांच की सुविधाएं पहुंचाने के लिए पूरी लैब खड़ी करने की जरूरत नहीं होगी। मशीन बिजली के साथ बैटरी और सोलर पावर से भी संचालित की जा सकती है।

    महंगी जांच का बोझ घटेगा
    इस मॉडल के जरिए अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर में होने वाली कई जांच की तुलना में बेहद कम लागत पर प्राथमिक जांच संभव हो सकती है। कई मामलों में खर्च मौजूदा लागत के करीब 10 प्रतिशत तक सीमित किया जा सकता है। यदि बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल सफल रहता है तो गांव और छोटे शहरों के मरीजों को सामान्य जांच के लिए बार-बार बड़े अस्पतालों की दौड़ लगाने से राहत मिल सकती है। इससे मरीज का पैसा ही नहीं, अस्पताल तक आने-जाने और जांच के इंतजार में लगने वाला समय भी बच सकता है।

    बीमारी दस्तक दे, उससे पहले मिल सकेगा संकेत
    ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ को केवल जांच मशीन तक सीमित रखने के बजाय एआई आधारित हेल्थ सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। उपलब्ध स्वास्थ्य संकेतकों और जांच रिपोर्ट के आधार पर मरीज में भविष्य में विकसित हो सकने वाले स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान में यह सहायक है। इसका उद्देश्य डॉक्टर को शुरुआती स्तर पर अधिक स्वास्थ्य डेटा उपलब्ध कराना और समय रहते मरीज को आगे की चिकित्सकीय सलाह तक पहुंचाना है। इस मॉडल के पीछे सोच है कि बीमारी गंभीर होने के बाद महंगे अस्पताल पहुंचने के बजाय जोखिम की पहचान पहले हो। खासकर ग्रामीण इलाकों में नियमित स्वास्थ्य जांच आसान होने से ऐसे लोगों तक स्क्रीनिंग पहुंचाई जा सकती है, जो दूरी और खर्च के कारण सामान्य जांच भी टाल देते हैं।

    बड़े अस्पतालों का दबाव घटाने की तैयारी
    ग्रेटर इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन के सीईओ डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि इस तकनीक का उद्देश्य लोगों की गाढ़ी कमाई के साथ समय बचाना भी है। प्राथमिक जांच स्थानीय स्तर पर होने से हर मरीज को शुरुआती टेस्ट के लिए बड़े अस्पताल जाने की जरूरत कम हो सकती है। इस मॉडल को सेंट्रल और बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव घटाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सामान्य जांच और शुरुआती स्क्रीनिंग स्थानीय स्तर पर होने के बाद जरूरत वाले मरीजों को ही विशेषज्ञ या बड़े अस्पताल तक रेफर करने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है।

    स्वास्थ्य सेवा के साथ रोजगार का भी मॉडल
    ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ केवल मेडिकल इनोवेशन तक सीमित नहीं है। करीब तीन लाख रुपये कीमत और पोर्टेबल स्वरूप के कारण इसे मेडिकल क्षेत्र में स्वरोजगार के मॉडल के रूप में भी विकसित करने की योजना है। प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी या उद्यमी मशीन के जरिए स्थानीय स्तर पर हेल्थ स्क्रीनिंग और जांच सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं। स्टार्टअप को ‘स्टार्ट इन यूपी’ के तहत उत्तर प्रदेश सरकार से 10 लाख रुपये की मदद भी मिली है। इंटरनेशनल ट्रेड शो में इसका प्रदर्शन इस बात का उदाहरण है कि प्रदेश के स्टार्टअप अब केवल ऐप और डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की लागत, पहुंच और उपलब्धता जैसी बुनियादी चुनौतियों के समाधान पर भी काम कर रहे हैं।

    बदल सकती है जांच की तस्वीर
    भारत जैसे विशाल देश में अस्पताल और विशेषज्ञ डॉक्टर तक पहुंच के साथ डायग्नोस्टिक सुविधाओं की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में कार में समा जाने वाला, बिजली-बैटरी-सोलर तीनों विकल्पों से चलने वाला और एक ही प्लेटफॉर्म पर दर्जनों जांच उपलब्ध कराने वाला मॉडल बड़े बदलाव की संभावना दिखाता है।

  • अधिकारियों को दिए निर्देश, तत्परता और संवेदनशीलता से हो जनता की समस्याओं का समाधान

    अधिकारियों को दिए निर्देश, तत्परता और संवेदनशीलता से हो जनता की समस्याओं का समाधान

    गोरखपुर
     सोमवार को गोरखपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनसेवा के नियमित प्रकल्प 'जनता दर्शन' में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात की। गंभीरता से उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन समस्याओं का समाधान तत्परता और संवेदनशील तरीके से किया जाए। इसमें किसी भी तरह की शिथिलता या लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय करते हुए संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जनता की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता है। हर समस्या का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और संतुष्टिपरक होना चाहिए।

    गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने आयोजित जनता दर्शन में कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद पहुंचे और एक-एक करके सबकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने करीब 150 लोगों से मुलाकात की। सबको आश्वस्त किया, घबराइए मत, समस्या का समाधान सुनिश्चित कराया जाएगा।  सबके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए। हर पीड़ित के साथ संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए उसकी सहायता की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि किसी की जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले, कमजोरों को उजाड़ने वाले किसी भी सूरत में बख्शे न जाएं। उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। जनता दर्शन में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। सीएम योगी ने उनके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि इलाज से जुड़ी एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण करा कर शासन में उपलब्ध कराया जाए। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सरकार भरपूर मदद उपलब्ध कराएगी।

    मुख्यमंत्री ने गोशाला में की गोसेवा
    गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर की गोशाला में जाकर गोसेवा भी की। उन्होंने गायों, गोवंश व नंदी को खूब दुलारा, गुड़ खिलाया और गोशाला के कार्यकर्ताओं को गोवंश की समुचित देखभाल के निर्देश दिए।

  • यूके से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर लौटे तन्मय तिवारी ने कानपुर में शुरू किया कारोबार

    यूके से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर लौटे तन्मय तिवारी ने कानपुर में शुरू किया कारोबार

    ग्रेटर नोएडा
    उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर किस तरह युवाओं और नए उद्यमियों को रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण से जोड़ रहा है, इसकी प्रेरक कहानी डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स के सह-संस्थापक एवं उप प्रबंध निदेशक तन्मय तिवारी ने यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में यूपीडा के विशेष सत्र में साझा की। यूके में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत लौटे तन्मय ने महज वन बीएचके फ्लैट से अपना कारोबार शुरू किया और आज उनकी कंपनी रक्षा क्षेत्र के लिए उन्नत और हल्के कंपोजिट उपकरण तैयार कर रही है।

    तन्मय तिवारी ने बताया कि उन्होंने ब्रिटेन में करीब पांच वर्ष बिताए और वहीं से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्नातक और परास्नातक की डिग्री पूरी की। वर्ष 2020 में लखनऊ में आयोजित डिफेंस एक्सपो के दौरान उन्होंने भारत के रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण इकोसिस्टम को करीब से देखा। डिफेंस एक्सपो में पांच दिन बिताने के बाद उन्होंने तय किया कि कंपनी की शुरुआत यूके के बजाय भारत में ही की जाएगी।

    उन्होंने वर्ष 2021 में परास्नातक की थीसिस पूरी करने के बाद भारत लौटकर डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि कंपनी की शुरुआती गतिविधियां एक बीएचके फ्लैट से शुरू हुईं। शुरुआत में कंपनी ने नागरिक क्षेत्र पर ध्यान दिया और कृषि ड्रोन, ऑटोमोबाइल तथा उच्च श्रेणी की सुपरबाइक्स में इस्तेमाल होने वाले कार्बन फाइबर और ग्लास फाइबर के कंपोजिट पुर्जे तैयार किए।

    आईआईटी कानपुर की टेस्टिंग से खुला रक्षा क्षेत्र का रास्ता
    तन्मय तिवारी ने बताया कि नागरिक क्षेत्र से रक्षा प्रौद्योगिकी की ओर उनका रुख तेजी से हुआ। कंपनी ने आईआईटी कानपुर के संपर्क में आकर अपने कंपोजिट नमूने और परीक्षण कूपन जांच के लिए भेजे। परीक्षण के बाद यह पुष्टि हुई कि कंपनी द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद रक्षा क्षेत्र में उपयोग के लिए आवश्यक मानकों को पूरा करने में सक्षम हैं। इसके बाद कंपनी ने रक्षा क्षेत्र के लिए उत्पादन शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी विनिर्माण क्षमता का विस्तार किया। एक छोटे शेड से शुरू हुई कंपनी आज कानपुर में करीब 20 हजार वर्गफुट की फैक्ट्री से संचालित हो रही है और इसमें लगभग 40 लोगों की टीम काम कर रही है। उन्होंने बताया कि कंपनी एएस 9100 प्रमाणित है, जो एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग में गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली से जुड़ा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानक है। कंपनी का यह प्रमाणन ब्यूरो वेरिटास द्वारा किया गया है।

    डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से मिला विस्तार का अवसर
    तन्मय तिवारी ने बताया कि कंपनी अब भारतीय रक्षा इकोसिस्टम के साथ-साथ उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में कार्यरत अन्य कंपनियों को भी अपने उत्पादों की आपूर्ति कर रही है। कंपनी विमान के ढांचे के निर्माण और हल्के आयुध से जुड़े प्रोजेक्ट में भी योगदान दे रही है। उन्होंने बताया कि अब कंपनी लखनऊ नोड स्थित उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में एक नई अत्याधुनिक इंजीनियरिंग एवं विनिर्माण सुविधा स्थापित करने जा रही है। इस नई इकाई का निर्मित क्षेत्र करीब 70 से 80 हजार वर्गफुट होगा, जो कंपनी की मौजूदा सुविधा से लगभग चार गुना बड़ा होगा। नई इकाई से करीब 200 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार और लगभग 1,500 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।

    निवेश पर 25 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी
    तन्मय तिवारी ने उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में मिल रहे प्रोत्साहनों का उल्लेख करते हुए बताया कि नई इकाई में किए जाने वाले पूंजी निवेश पर 25 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी का लाभ मिलेगा। इसके अलावा विदेश से आयात किए जाने वाले उपकरणों पर परिवहन संबंधी सब्सिडी तथा पेटेंट और ट्रेडमार्क के लिए प्रतिपूर्ति जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इन नीतिगत प्रोत्साहनों और सरकार के सहयोग से युवा उद्यमियों के लिए रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में प्रवेश तथा विस्तार के नए अवसर तैयार हुए हैं। तन्मय तिवारी ने कहा कि एक छोटे से बीएचके फ्लैट से शुरू हुई कंपनी का आज हजारों वर्गफुट की अत्याधुनिक रक्षा विनिर्माण इकाई की ओर बढ़ना इस बात का उदाहरण है कि नई तकनीक, युवा प्रतिभा और सरकारी सहयोग के साथ उत्तर प्रदेश में रक्षा विनिर्माण का नया इकोसिस्टम आकार ले रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से मिले सहयोग के लिए प्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें इस इकोसिस्टम का हिस्सा होने पर गर्व है।

  • 12वीं पुण्यतिथि पर बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होगी श्रद्धांजलि सभा, देशभर के संत-धर्माचार्य होंगे शामिल

    12वीं पुण्यतिथि पर बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होगी श्रद्धांजलि सभा, देशभर के संत-धर्माचार्य होंगे शामिल

    गोरखपुर
     गोरक्षपीठ में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का समापन बुधवार, 30 सितंबर को होगा। आश्विन कृष्ण चतुर्थी के अवसर पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। गोरखनाथ मंदिर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में देशभर के प्रतिष्ठित साधु-संत और धर्माचार्य भी शामिल होंगे।
    ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ का जीवन रामकाज और सामाजिक समरसता की स्थापना को समर्पित रहा। सामाजिक समरसता को अपने जीवन का ध्येय बनाने वाले महंत अवेद्यनाथ श्रीराम मंदिर आंदोलन के प्रमुख संत नेताओं में रहे। नाथपंथ की लोककल्याणकारी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के साथ राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वह पांच बार मानीराम विधानसभा और चार बार गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण आंदोलन को निर्णायक पड़ाव तक पहुंचाने में उनकी भूमिका के लिए उन्हें लंबे समय तक याद किया जाएगा। 18 मई 1919 को गढ़वाल, उत्तराखंड के ग्राम कांडी में जन्मे महंत अवेद्यनाथ जी का बचपन से ही धर्म और अध्यात्म के प्रति गहरा झुकाव था। गोरक्षपीठ में उन्हें महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज का सानिध्य मिला। 8 फरवरी 1942 को उन्होंने गोरक्षपीठ में विधिवत दीक्षा ली। वर्ष 1969 में महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की चिरसमाधि के बाद 29 सितंबर को वह गोरखनाथ मंदिर के महंत और पीठाधीश्वर बने। योग एवं दर्शन के मर्मज्ञ पीठाधीश्वर के रूप में उन्होंने अपने गुरुदेव के लोककल्याण और सामाजिक समरसता के आदर्शों को आगे बढ़ाया। वर्ष 2014 में आश्विन कृष्ण चतुर्थी को चिरसमाधि लेने तक उनका यह अभियान निरंतर जारी रहा।

    अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण रहा जीवन का प्रमुख मिशन
    अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए गोरक्षपीठ की तीन पीढ़ियों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के बाद मंदिर आंदोलन की कमान महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने संभाली। नब्बे के दशक में उनके नेतृत्व में श्रीराम मंदिर आंदोलन को व्यापक स्वरूप मिला और यह आंदोलन गांव-गांव तक पहुंचा। महंत अवेद्यनाथ ने विभिन्न मत-पंथों के धर्माचार्यों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। इसी क्रम में 21 जुलाई 1984 को अयोध्या के वाल्मीकि भवन में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन हुआ और सर्वसम्मति से महंत अवेद्यनाथ जी को इसका अध्यक्ष चुना गया। वह जीवनभर इस समिति के अध्यक्ष रहे।श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति और श्रीराम जन्मभूमि निर्माण उच्चाधिकार समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संतों, राजनीतिज्ञों और आमजन को आंदोलन से जोड़ने में भूमिका निभाई। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का मार्ग आगे चलकर उनके शिष्य और वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में पूर्णता तक पहुंचा।

    सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए चलाया अभियान
    महंत अवेद्यनाथ ने सामाजिक समरसता को अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाया। उन्होंने हिंदू समाज में छुआछूत और ऊंच-नीच के भेदभाव को दूर करने के लिए लगातार अभियान चलाया। अखिल भारतवर्षीय अवधूत भेष बारहपंथ योगी महासभा के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने देशभर के संतों को भी इस अभियान से जोड़ा।दक्षिण भारत के मीनाक्षीपुरम में दलित समाज के सामूहिक धर्मांतरण की घटना से वह बेहद चिंतित हुए। इसके बाद उन्होंने हिंदू समाज की सामाजिक कुरीतियों और जातिगत विभाजन को दूर कर समाज को एकजुट करने पर विशेष जोर दिया।उन्होंने दलित बस्तियों में सहभोज की परंपरा शुरू की, जहां जातिगत भेदभाव से अलग सभी लोग एक साथ भोजन करते थे। काशी में डोमराजा के घर संतों और साधु समाज के साथ भोजन कर उन्होंने सामाजिक समरसता का संदेश दिया। राम मंदिर के भूमिपूजन के दौरान दलित कामेश्वर चौपाल के हाथों पहली शिला रखवाने को भी इसी सामाजिक समरसता के संदेश से जोड़कर देखा जाता है। दलितों और वंचितों के घर सहभोज के जरिए सामाजिक एकता का संदेश देने का सिलसिला उनके जीवनकाल में लगातार चलता रहा। सामाजिक एकता के सवाल पर महंत अवेद्यनाथ अपने स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते थे और अस्पृश्यता तथा सामाजिक भेदभाव के खिलाफ मुखर रहे।

    श्रीराम और मां दुर्गा के उदाहरणों से समझाते थे सामाजिक एकता की ताकत
    नाथपंथ और गोरक्षपीठ के अध्येता तथा महंत अवेद्यनाथ के जीवन के शोधार्थी डॉ. प्रदीप कुमार राव के अनुसार, महंत अवेद्यनाथ सामाजिक समरसता का संदेश सरल उदाहरणों के माध्यम से देते थे। वह प्रभु श्रीराम और देवी दुर्गा के प्रसंगों के जरिए समाज में एकता की ताकत समझाते थे। महंत जी बताते थे कि प्रभु श्रीराम ने शबरी के बेर खाए, निषादराज को गले लगाया, गिद्धराज जटायु का अंतिम संस्कार अपने हाथों किया और वनवास के दौरान वनवासियों से मित्रता की। उनके अनुसार, इन प्रसंगों में समरस समाज की भावना दिखाई देती है।इसी तरह वह देवी दुर्गा की आठ भुजाओं का उदाहरण देते हुए समाज के चारों वर्णों की एकता को शक्ति का प्रतीक बताते थे। उनका संदेश था कि समाज के विभिन्न वर्ग एकजुट होकर सामूहिक शक्ति का निर्माण कर सकते हैं।

    महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद को दिया व्यापक विस्तार
    शिक्षा के क्षेत्र में भी महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने अपने गुरुदेव महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के प्रयासों को आगे बढ़ाया। अपनी निष्ठा, दीर्घकालीन तपस्या और अनुभव के माध्यम से उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद को व्यापक स्वरूप प्रदान किया। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अंतर्गत प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक के शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान, चिकित्सा संस्थान और सेवा संस्थान संचालित हो रहे हैं। पारंपरिक शिक्षण संस्थानों के साथ तकनीकी और स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़े संस्थानों में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

    राजनीति में भी रहा लंबा और प्रभावी सफर
    महंत अवेद्यनाथ ने राजनीति के क्षेत्र में भी लंबा सफर तय किया। उन्होंने 1962, 1967, 1969, 1974 और 1977 में मानीराम विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद 1970, 1989, 1991 और 1996 में गोरखपुर सदर संसदीय सीट से सांसद रहे। वह अखिल भारतीय हिंदू महासभा के उपाध्यक्ष और महासचिव के रूप में भी सक्रिय रहे। राजनीतिक जीवन में उन्होंने राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, भारतीय संस्कृति की पुनर्प्रतिष्ठा, शैक्षिक पुनर्जागरण और हिंदू समाज की एकता जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह उनके धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक योगदान को स्मरण करने का अवसर होगा। गोरक्षपीठ और देशभर से जुटने वाले संत-धर्माचार्य इस अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

  • अखिलेश की परमिशन के बिना शिवपाल और धर्मेंद्र यादव को सपा दफ्तर में नहीं मिलती एंट्री, राजभर का बड़ा हमला

    अखिलेश की परमिशन के बिना शिवपाल और धर्मेंद्र यादव को सपा दफ्तर में नहीं मिलती एंट्री, राजभर का बड़ा हमला

    ग्रेटर नोएडा
    सोचिए, एक ऐसा अस्पताल जिसे न बड़ी इमारत चाहिए, न भारी-भरकम मशीनों से भरी लैब। उसे कार में रखिए और शहर से गांव या किसी दूर-दराज इलाके तक ले जाइए। मरीज सामने आया तो बीपी और शुगर से लेकर ईसीजी, फेफड़ों, आंख-कान तक की जांच वहीं शुरू। एक बूंद खून से कई जरूरी जांच और महज 10 मिनट में कुल 75 तरह के टेस्ट की सुविधा। भविष्य में होने वाली बीमारियों के जोखिम का समय रहते संकेत देने की क्षमता भी। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदर्शित ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ इसी सोच को हकीकत में बदलने की कोशिश है। करीब तीन लाख रुपये की यह मशीन स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पताल की चारदीवारी से निकालकर मरीज के दरवाजे तक पहुंचाने का मॉडल पेश कर रही है। सीएम योगी की प्रेरणा से यूपी के युवाओं ने भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाने में सक्षम ये मशीन खोजी है।

    तीन लाख की मशीन से अस्पताल जैसी जांच
    एमडी इंटरनल मेडिसिन और डॉक्टर्स ऑन ड्यूटी के फाउंडर एवं सीईओ डॉ. श्रेय श्रीवास्तव कहते हैं कि मशीन को इस तरह विकसित किया गया है कि प्राथमिक स्तर पर होने वाली कई महत्वपूर्ण जांच एक ही जगह की जा सकें। इसमें ब्लड प्रेशर, शुगर, बॉडी एनालिसिस, ईसीजी और लंग्स फंक्शन टेस्ट के साथ आंख, नाक और कान की जांच की सुविधा है। उनका कहना है कि सिंगल ड्रॉप ब्लड टेस्ट समेत कुल 75 जांच करीब 10 मिनट में की जा सकती हैं।

    इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका पोर्टेबल होना है। इसे कार में रखकर आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है। यानी जिस गांव में अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर नहीं है, वहां जांच की सुविधाएं पहुंचाने के लिए पूरी लैब खड़ी करने की जरूरत नहीं होगी। मशीन बिजली के साथ बैटरी और सोलर पावर से भी संचालित की जा सकती है।

    महंगी जांच का बोझ घटेगा
    इस मॉडल के जरिए अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर में होने वाली कई जांच की तुलना में बेहद कम लागत पर प्राथमिक जांच संभव हो सकती है। कई मामलों में खर्च मौजूदा लागत के करीब 10 प्रतिशत तक सीमित किया जा सकता है। यदि बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल सफल रहता है तो गांव और छोटे शहरों के मरीजों को सामान्य जांच के लिए बार-बार बड़े अस्पतालों की दौड़ लगाने से राहत मिल सकती है। इससे मरीज का पैसा ही नहीं, अस्पताल तक आने-जाने और जांच के इंतजार में लगने वाला समय भी बच सकता है।

    बीमारी दस्तक दे, उससे पहले मिल सकेगा संकेत
    ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ को केवल जांच मशीन तक सीमित रखने के बजाय एआई आधारित हेल्थ सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। उपलब्ध स्वास्थ्य संकेतकों और जांच रिपोर्ट के आधार पर मरीज में भविष्य में विकसित हो सकने वाले स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान में यह सहायक है। इसका उद्देश्य डॉक्टर को शुरुआती स्तर पर अधिक स्वास्थ्य डेटा उपलब्ध कराना और समय रहते मरीज को आगे की चिकित्सकीय सलाह तक पहुंचाना है। इस मॉडल के पीछे सोच है कि बीमारी गंभीर होने के बाद महंगे अस्पताल पहुंचने के बजाय जोखिम की पहचान पहले हो। खासकर ग्रामीण इलाकों में नियमित स्वास्थ्य जांच आसान होने से ऐसे लोगों तक स्क्रीनिंग पहुंचाई जा सकती है, जो दूरी और खर्च के कारण सामान्य जांच भी टाल देते हैं।

    बड़े अस्पतालों का दबाव घटाने की तैयारी
    ग्रेटर इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन के सीईओ डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि इस तकनीक का उद्देश्य लोगों की गाढ़ी कमाई के साथ समय बचाना भी है। प्राथमिक जांच स्थानीय स्तर पर होने से हर मरीज को शुरुआती टेस्ट के लिए बड़े अस्पताल जाने की जरूरत कम हो सकती है। इस मॉडल को सेंट्रल और बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव घटाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सामान्य जांच और शुरुआती स्क्रीनिंग स्थानीय स्तर पर होने के बाद जरूरत वाले मरीजों को ही विशेषज्ञ या बड़े अस्पताल तक रेफर करने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है।

    स्वास्थ्य सेवा के साथ रोजगार का भी मॉडल
    ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ केवल मेडिकल इनोवेशन तक सीमित नहीं है। करीब तीन लाख रुपये कीमत और पोर्टेबल स्वरूप के कारण इसे मेडिकल क्षेत्र में स्वरोजगार के मॉडल के रूप में भी विकसित करने की योजना है। प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी या उद्यमी मशीन के जरिए स्थानीय स्तर पर हेल्थ स्क्रीनिंग और जांच सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं। स्टार्टअप को ‘स्टार्ट इन यूपी’ के तहत उत्तर प्रदेश सरकार से 10 लाख रुपये की मदद भी मिली है। इंटरनेशनल ट्रेड शो में इसका प्रदर्शन इस बात का उदाहरण है कि प्रदेश के स्टार्टअप अब केवल ऐप और डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की लागत, पहुंच और उपलब्धता जैसी बुनियादी चुनौतियों के समाधान पर भी काम कर रहे हैं।

    बदल सकती है जांच की तस्वीर
    भारत जैसे विशाल देश में अस्पताल और विशेषज्ञ डॉक्टर तक पहुंच के साथ डायग्नोस्टिक सुविधाओं की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में कार में समा जाने वाला, बिजली-बैटरी-सोलर तीनों विकल्पों से चलने वाला और एक ही प्लेटफॉर्म पर दर्जनों जांच उपलब्ध कराने वाला मॉडल बड़े बदलाव की संभावना दिखाता है।

  • योगी सरकार की डिजिटल पहल को नई मजबूती, राष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ीं यूपी की सभी 251 मंडियां

    योगी सरकार की डिजिटल पहल को नई मजबूती, राष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ीं यूपी की सभी 251 मंडियां

    लखनऊ
     किसानों को बेहतर बाजार सूचना उपलब्ध कराने और मंडी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में योगी सरकार की डिजिटल पहल को नई मजबूती मिली है। उत्तर प्रदेश की सभी 251 कृषि उपज मंडियां अब देश के कृषि बाजार सूचना नेटवर्क 'एगमार्कनेट 2.0' से जुड़ गई हैं। उत्तर प्रदेश मंडी परिषद के ई-मंडी पोर्टल का एगमार्कनेट 2.0 से एपीआई आधारित एकीकरण पूरा होने के साथ प्रदेश की सभी मंडियों से 100 प्रतिशत मार्केट रिपोर्टिंग सुनिश्चित हो गई है। केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने मंडी परिषद की इस उपलब्धि की सराहना की है।

    योगी सरकार प्रदेश की मंडी व्यवस्था में तकनीक का अधिकतम उपयोग कर किसानों और व्यापारियों तक सेवाओं और बाजार सूचनाओं की पहुंच आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है। ई-मंडी व्यवस्था के माध्यम से मंडियों की विभिन्न प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया गया है। अब इसे राष्ट्रीय कृषि बाजार सूचना नेटवर्क से जोड़ने से उत्तर प्रदेश की मंडियों में दर्ज कृषि उपज के भाव और आवक के आंकड़े राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध हो रहे हैं।

    किसान जान सकेंगे कहां क्या भाव, बाजार में कितनी आवक
    सभी 251 मंडियों के एकीकरण का सबसे महत्वपूर्ण लाभ किसानों को बाजार की व्यापक जानकारी के रूप में मिलेगा। अलग-अलग मंडियों में किसी कृषि उपज के क्या भाव हैं और कितनी आवक हो रही है, इसकी जानकारी से किसान बाजार का रुख समझकर अपनी उपज के विपणन से जुड़े निर्णय बेहतर ढंग से ले सकेंगे। भाव और आवक के आंकड़ों की व्यापक उपलब्धता से कृषि बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। व्यापारियों को भी अलग-अलग बाजारों की स्थिति समझने में सुविधा होगी। वहीं कृषि बाजार के रुझानों के विश्लेषण और नीतिगत निर्णयों के लिए अधिक व्यवस्थित डेटा उपलब्ध होगा। भाव और आवक के तुलनात्मक आंकड़े उपलब्ध होने से किसानों को अलग-अलग बाजारों की स्थिति समझने में भी आसानी होगी।

    भाव और आवक की सूचनाओं का निर्बाध प्रवाह हुआ सुनिश्चित
    उत्तर प्रदेश मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की मंडी व्यवस्था को तकनीक के माध्यम से अधिक पारदर्शी और किसानोपयोगी बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। तकनीक का वास्तविक लाभ तभी है, जब किसान तक सही बाजार सूचना सही समय पर पहुंचे। सभी 251 मंडियों को एगमार्कनेट 2.0 से जोड़ने से भाव और आवक की सूचनाओं का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित हुआ है। इससे किसानों को बाजार की स्थिति समझने और अपनी उपज के विपणन से जुड़े बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

    सभी 251 मंडियों से 100 प्रतिशत मार्केट रिपोर्टिंग
    एगमार्कनेट 2.0 से तकनीकी एकीकरण के साथ प्रदेश की सभी 251 मंडियों से 100 प्रतिशत मार्केट रिपोर्टिंग सुनिश्चित होना भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इतने बड़े मंडी नेटवर्क से नियमित और शत-प्रतिशत रिपोर्टिंग सुनिश्चित होना मंडी परिषद की डिजिटल व्यवस्था और फील्ड स्तर के समन्वय की प्रभावशीलता को दर्शाता है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव चिन्मय गोटमारे ने सभी 251 मंडियों के सफल एपीआई एकीकरण और शत-प्रतिशत मार्केट रिपोर्टिंग की सराहना की है। उन्होंने इसे मंडी परिषद, मंडी समितियों, अधिकारियों, तकनीकी टीम और फील्ड स्तर पर कार्यरत कार्मिकों के समन्वित प्रयासों का परिणाम बताया है।

    क्या है एगमार्कनेट 2.0?
    एगमार्कनेट यानी 'एग्रीकल्चरल मार्केटिंग इन्फॉर्मेशन नेटवर्क' कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यहां देश की कृषि मंडियों में विभिन्न कृषि जिंसों की आवक और बाजार भाव से संबंधित जानकारी एक स्थान पर उपलब्ध होती है। इसका उद्देश्य किसानों, व्यापारियों, नीति निर्माताओं और कृषि बाजार से जुड़े अन्य हितधारकों तक विश्वसनीय एवं समयबद्ध बाजार सूचना पहुंचाना है। उत्तर प्रदेश के ई-मंडी पोर्टल के एपीआई आधारित एकीकरण के बाद प्रदेश की मंडियों में दर्ज भाव और आवक का डेटा डिजिटल माध्यम से सीधे इस राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म तक पहुंच रहा है।

  • प्रशासन को दिया निर्देश- मृतकों के परिजनों व घायलों से निरंतर संवाद रखें, आवश्यक वस्तुएं कराएं मुहैया

    प्रशासन को दिया निर्देश- मृतकों के परिजनों व घायलों से निरंतर संवाद रखें, आवश्यक वस्तुएं कराएं मुहैया

    गोरखपुर
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फतेहपुर में सोमवार को हुए हादसे का संज्ञान लिया। उन्होंने जनहानि पर शोक जताया और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। मुख्यमंत्री ने मृतकों  के परिजनों व घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा भी की।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट कर इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री ने लिखा कि जनपद फतेहपुर में दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत दुःखद है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये व घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद का भी ऐलान किया।

    उन्होंने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने एवं घायलों के परिजनों से संवाद कर हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाने का भी निर्देश दिया।  मुख्यमंत्री ने प्रभु श्री राम से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्माओं को सद्गति एवं घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें।

  • कुशीनगर में ततवा टोला के पास टूटा बांध, देर रात तक पल-पल की जानकारी लेते रहे मुख्यमंत्री

    कुशीनगर में ततवा टोला के पास टूटा बांध, देर रात तक पल-पल की जानकारी लेते रहे मुख्यमंत्री

    गोरखपुर
     कुशीनगर में सोमवार देर रात नारायणी नदी का कहर कई गांवों पर बरपा। यहां एपी तटबंध के ततवा टोला के पास बांध टूट गया, जिससे व्यापक हानि का अनुमान है। जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देर रात ही सक्रिय हो गए। उनके निर्देश पर स्थानीय प्रशासन, पुलिस, आपदा प्रबंधन व राहत से जुड़ी टीमें राहत-बचाव कार्य में जुट गईं।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात ही गोरखपुर के आयुक्त, एडीजी, कुशीनगर के जिलाधिकारी आदि से  संपूर्ण जानकारी हासिल की। उन्होंने तत्काल राहत-बचाव कार्य प्रारंभ कर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आपदा से जुड़ी टीम, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ आदि को भी मोर्चा संभालने का निर्देश देते हुए व्यापक स्तर पर बचाव कार्य करने को कहा।