Category: पंजाब

  • पंजाब में 6 दिन भारी बारिश का अलर्ट, 18 जिले प्रभावित; लुधियाना मेयर ने रात 2 बजे पंपिंग स्टेशन का किया निरीक्षण

    पंजाब में 6 दिन भारी बारिश का अलर्ट, 18 जिले प्रभावित; लुधियाना मेयर ने रात 2 बजे पंपिंग स्टेशन का किया निरीक्षण

    लुधियाना /चंडीगढ़

    पंजाब और चंडीगढ़ में मानसून की एंट्री होते ही गर्मी से राहत मिली है। कई जिलों में भारी बारिश हुई। चंडीगढ़ मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आज (2 जुलाई) से अगले 6 दिन पूरे राज्य में भारी बारिश, गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने का अलर्ट है।

    मानसून के असर से गुरुवार को पंजाब के 18 जिलों में बारिश का पूर्वानुमान है। जबकि 14 जिलों के लिए तेज हवाओं और बिजली गिरने का अलर्ट है। इनमें से 5 जिलों में भारी बारिश की भी चेतावनी दी गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार, पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर और मोहाली में भारी बारिश के साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब और पटियाला में भी गरज-चमक के साथ तेज हवाओं की संभावना है।

    लुधियाना में मानसून ने बुधवार रात 1 बजे दस्तक दी। इसके साथ ही तेज बारिश हुई। इसी बीच शहर की मेयर इंद्रजीत कौर रात 2 बजे वाटर लॉगिंग का जायज लेने निकलीं। उन्होंने दो पंपिंग स्टेशन और जीटी रोड पुली पर बुड्‌ढा दरिया का फ्लो चेक किया। उन्होंने कर्मचारियों को सख्त हिदायतें दी है कि पंपिंग स्टेशन 24 घंटे चलाए जाएं, ताकि शहर में वाटर लॉगिंग न हो।

    बुधवार को अधिकतम तापमान में 3.3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, यह सामान्य से 3.6 डिग्री अधिक था। सबसे अधिक तापमान 41.5 डिग्री बठिंडा में दर्ज किया गया है। जबकि, चंडीगढ़ का तापमान 5.8 डिग्री की गिरावट के बाद 29.7 डिग्री सेल्सियस रहा।

    बारिश-मेयर रात 2 बजे पंपिंग स्टेशन पहुंची
    लुधियाना शहर में मानसून ने रात करीब एक बजे दस्तक की। एक बजे से पूरे शहर में झमाझम बारिश शुरु हुई तो शहर में वाटर लॉगिंग का खतरा मंडराने लगा। उधर, मेयर इंद्रजीत कौर ने मानसून की दस्तक के एक घंटे बाद यानि मिड नाइट 2 बजे पंपिंग स्टेशन पर रेड की।

    मेयर रात को पहले टिब्बा रोड स्थित पंपिंग स्टेशन पर पहुंची। जब मेयर वहां पहुंची तो वहां स्टाफ मौजूद था और पंपिंग स्टेशन वर्किंग था। मेयर ने उसके बाद जीटी रोड पुली पर बुड्‌ढा दरिया का फ्लो चेक किया।

    मेयर फिर वहां से माधोपुरी के पास बने पंपिंग स्टेशन का जायजा लेने पहुंची। वहां भी पंपिंग स्टेशन वर्किंग कंडीशन में था। मेयर ने ताजपुर रोड पर एसटीपी की भी जांच की। मेयर ने पंपिंग स्टेशन के कर्मचारियों को सख्त हिदायतें दी हैं कि पंपिंग स्टेशन 24 घंटे चलाए जाएं ताकि शहर में वाटर लॉगिंग न हो।

    आधी रात में मेयर को देख घबराए कर्मचारी
    मेयर आधी रात में जब पंपिंग स्टेशन पर पहुंची तो नाइट शिफ्ट में काम कर रहे कर्मचारी घबरा गए। मेयर ने जाते ही पंपिंग स्टेशन चेक किया और कर्मचारियों से जानकारी ली। कर्मचारियों ने मेयर को बताया कि पंपिंग स्टेशन लगातार चल रहा है और सीवरेज के पानी को यहां से एसटीपी तक पंपिंग सेट के जरिए ही पहुंचाया जा रहा है। हर पंपिंग स्टेशन पर जनरेटर की व्यवस्था है। बिजली बंद हो जाती है तो जनरेटर के जरिए पंपिंग सेट चलाए जाते हैं।

    वाटर लॉगिंग से बचना है तो फील्ड में उतरना होगा
    मेयर इंद्रजीत कौर ने आधी रात को बरसात में फील्ड में उतरकर अफसरों को भी साफ संदेश दे दिया है कि मानसून सीजन में सिर्फ दफ्तरों में बैठकर आदेश जारी करने से शहर को वाटर लॉगिंग से नहीं बचाया जा सकेगा। इसके लिए फील्ड में उतरना होगा। मेयर ने अफसरों को कहा है कि बारिश शुरू होते ही सभी अलर्ट मोड पर रहें ताकि पानी की निकासी के लिए जो संसाधन हैं उनको यूटेलाइज किया जा सके।

    25 साल में मानसून 2008 में जल्दी आया
    साल 2026 में मानसून ने 1 जुलाई को पंजाब और चंडीगढ़, दोनों में दस्तक दी। यह पिछले साल के मुकाबले पंजाब में 9 दिन और चंडीगढ़ में 7 दिन देरी से पहुंचा। पिछले 25 वर्षों के रिकॉर्ड के अनुसार, पंजाब में सबसे जल्दी मानसून 13 जून 2008 को पहुंचा था। जबकि सबसे ज्यादा देरी 2002 में हुई, जब पूरे राज्य में मानसून 15 अगस्त तक फैल पाया।

    आमतौर पर 2001 से 2026 के बीच मानसून ने पंजाब में जून के आखिरी सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह के बीच दस्तक दी है। हालांकि, 2020 और 2025 में मानसून जून में ही पूरे पंजाब और चंडीगढ़ को कवर कर चुका था। जबकि, 2021 और 2023 में पूरे पंजाब तक पहुंचने में करीब 1 महीना लग गया।

    कई बार चंडीगढ़ में मानसून पहले पूरी तरह पहुंच गया। जबकि, पंजाब के बाकी हिस्सों में कुछ दिन बाद फैला। वहीं, मानसून की विदाई ज्यादातर सितंबर के आखिर या अक्टूबर की शुरुआत में हुई, जिससे राज्य में इसका असर करीब 3 महीने तक बना रहा।

  • Punjab News: आज से शुरू हुई ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’, महिलाओं के खाते में ₹3000-₹4000 ट्रांसफर

    Punjab News: आज से शुरू हुई ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’, महिलाओं के खाते में ₹3000-₹4000 ट्रांसफर

     बरनाला
     पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने महलकलां में कहा कि राज्य महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक दिन लिखने को तैयार है, क्योंकि आम आदमी पार्टी सरकार ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ शुरू करके एक और बड़ी गारंटी पूरी कर रही है।

    उन्होंने कहा कि दोपहर 12 बजे के बाद पूरे पंजाब में मोबाइल फोन बजने लगेंगे, क्योंकि हर महिला के बैंक खाते में तीन हजार और अनुसूचित जाति (एससी) की महिलाओं के खाते में चार हजार रुपये की तीन महीने की ‘सत्कार राशि’ एक ही किश्त में जमा की जाएगी। उन्होंने कहा कि पंजाब के तेज़ी से हो रहे विकास से घबराए विरोधी राज्य की प्रगति में बाधा डालने की साजिश कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "एक जुलाई से महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में पैसे मिलने लगेंगे। 'मावां-धीयां सत्कार योजना' के तहत, हर महिला को हर महीने एक हजार मिलेंगे, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह मिलेंगे।

    यह रकम सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी और जो महिलाएं पहले से ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन पा रही हैं, वे भी इसके लिए पात्र होंगी। उम्मीद है कि पंजाब की लगभग 97% महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलेगा, जिसके लिए राज्य सरकार ने बजट में कुल 9,300 करोड़ का प्रावधान किया है।"

    मान ने कहा, "हमारी सरकार लोगों की भलाई के लिए लगातार काम कर रही है। हमने घरों को मुफ़्त बिजली दी है, बिना किसी भ्रष्टाचार के 68,000 से ज़्यादा युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं, सड़कों को बेहतर बनाया है, टोल प्लाज़ा बंद करके रोज़ाना लगभग 70 लाख की बचत की है, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत किया है, बुनियादी ढांचा तैयार किया है और कई अन्य अहम पहल की हैं।

    जब हमारी सरकार सत्ता में आई थी, तब सिंचाई के लिए नहर के पानी का सिर्फ़ 22% ही इस्तेमाल हो रहा था। आज यह आंकड़ा बढ़कर 80% से ज़्यादा हो गया है। हम राज्य भर में गांवों के विकास के लिए अनुदान भी दे रहे हैं।" राज्य में हेल्थकेयर में किए गए सुधारों के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "मुख्यमंत्री सेहत योजना देश की अपनी तरह की पहली योजना है जो पंजाब के हर परिवार को 10 लाख तक का कैशलेस इलाज देती है। इसका मकसद राज्य के हर परिवार को यूनिवर्सल हेल्थकेयर देना है, और लोग इस योजना के तहत 650 करोड़ से ज़्यादा का मुफ़्त इलाज करवा चुके हैं।"

    AAP ने पूरी की आखिरी गारंटी 

    मुख्यमंत्री वेब लिंक लॉन्च कर योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। अब तक योजना के तहत करीब 50 लाख महिलाओं का पंजीकरण हो चुका है। जनरल वर्ग की महिलाओं को एक हजार रुपये और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1500 रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी। बाद में रजिस्ट्रेशन कराने वाली महिलाओं को भी इस स्कीम का पूरा लाभ मिलेगा।

    सीएम मान आज तीन महीने की सम्मान राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर करेंगे। यह राशि 3500 रुपये से लेकर 4000 रुपये के बीच होगी।

    क्या है मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना?
    मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण महिला कल्याण स्कीम है। सीएम मान ने इस योजना का एलान पंजाब बजट 2026–27 के दौरान किया था। योजना का उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

    इस योजना के अंतर्गत पंजाब की सामान्य वर्ग की महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये और अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये सम्मान राशि दी जाएगी। योजना की शुरुआत आज से होगी।

    कैसे मिलेंगे रुपये?
    योजना के अंतर्गत राशि महिलाओं के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी। पंजाब राज्य की 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाएं इस योजना का लाभ ले सकती हैं।

    क्या है पात्रता?

        योजना का लाभ लेने के लिए महिला का पंजाब का निवासी होना आवश्यक है।
        महिला की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए।
        महिला का आधार कार्ड बैंक अकाउंट से लिंक होना चाहिए।

    जरूरी दस्तावेज

        महिला का आधार कार्ड।
        महिला की बैंक पासबुक की फोटोकॉपी।
        पंजाब का राशन कार्ड या वोटर आईडी कार्ड।
        मोबाइल नंबर- आधार कार्ड और बैंक पासबुक से लिंक होना चाहिए।

    आज 97 फीसदी महिलाओं को मिलेगा लाभ
    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को घोषणा की बुधवार को दोपहर 12 बजे के बाद राज्य की महिलाओं के मोबाइल फोन पर खास संदेश आएगा। संदेश में लिखा होगा कि आपके खाते में 4,500 या 3,000 रुपये जमा हो गए हैं। यह राशि पंजाब सरकार की ओर से राज्य की महिलाओं के लिए शुरू की जा रही मांवां धीयां सत्कार योजना के तहत डाली जाएगी।

     

  • CBI Action: रिटायरमेंट वाले दिन IAS प्रदीप कुमार पर शिकंजा, 169 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में गिरफ्तारी

    CBI Action: रिटायरमेंट वाले दिन IAS प्रदीप कुमार पर शिकंजा, 169 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में गिरफ्तारी

    चंडीगढ़
    सरकारी नौकरी में रिटायरमेंट का दिन आमतौर पर विदाई, सम्मान और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. लेकिन हरियाणा के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के लिए यही दिन कानूनी कार्रवाई का दिन बन गया. हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के तत्कालीन सदस्य सचिव और आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उनके अंतिम कार्य दिवस पर गिरफ्तार कर लिया. आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान सरकारी धन के 169 करोड़ रुपये के कथित गबन और फर्जी निवेश से जुड़े मामले में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

    यह गिरफ्तारी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह उस बहुचर्चित बैंकिंग घोटाले की कड़ी है, जिसमें हरियाणा सरकार के कई विभागों के करोड़ों रुपये कथित तौर पर फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और संदिग्ध बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किए गए. सीबीआई का दावा है कि अकेले HSPCB को 169 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिसे एजेंसी हरियाणा सरकार के किसी विभाग को हुआ अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय नुकसान बता रही है। 

    जानिए, क्या है पूरा मामला

    सीबीआई के अनुसार, प्रदीप कुमार मूल रूप से 2011 बैच के हरियाणा सिविल सेवा (HCS) अधिकारी थे, जिन्हें बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नत किया गया. सदस्य सचिव के तौर पर कार्यरत रहते हुए उन्होंने बोर्ड की निवेश संबंधी प्रक्रिया में सीधे तौर पर भूमिका निभाई. जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने निर्धारित वित्तीय सीमा से कहीं अधिक राशि को चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित IDFC First Bank शाखा में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) बनाने के नाम पर ट्रांसफर करने की मंजूरी दी. यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ लिया। 

    फिक्स्ड डिपॉजिट कभी बना ही नहीं
    सीबीआई की जांच में सामने आया कि जिस रकम को एफडी के लिए भेजा गया था, वह पहले HSPCB के नाम से कथित तौर पर खोले गए एक बैंक खाते में ट्रांसफर की गई. जांच एजेंसी का कहना है कि इस खाते को खोलने के लिए न तो विभागीय स्वीकृति ली गई थी और न ही इसका कोई अधिकृत रिकॉर्ड मौजूद था. सबसे गंभीर आरोप यह है कि उस खाते में कभी कोई फिक्स्ड डिपॉजिट बनाया ही नहीं गया. इसके बजाय खाते से कथित तौर पर फर्जी डेबिट ट्रांजैक्शन किए गए और 169 करोड़ रुपये की रकम निकाल ली गई. सीबीआई का कहना है कि यह पूरा लेनदेन सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का हिस्सा प्रतीत होता है, जिसकी जांच अभी जारी है। 

    नोटिस के बाद भी नहीं हुए पेश
    जांच एजेंसी के मुताबिक, प्रदीप कुमार को कई बार जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजे गए थे, लेकिन वह पूछताछ से बचते रहे. इसी बीच उन्होंने पंचकूला की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका भी दायर कर दी थी, जिस पर 2 जुलाई को सुनवाई प्रस्तावित थी. सीबीआई ने बताया कि उनकी लोकेशन ट्रेस करने के बाद मंगलवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. संयोग यह रहा कि उसी दिन उनका सरकारी सेवा का अंतिम कार्य दिवस भी था। 

    504 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले से जुड़ा है मामला
    HSPCB का यह मामला अकेला नहीं है. जांच एजेंसी के अनुसार, यह 504 करोड़ रुपये के उस बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है जिसमें हरियाणा सरकार के आठ विभागों के सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग की जांच चल रही है. सीबीआई का आरोप है कि सरकारी रकम को फर्जी या अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट के नाम पर बैंक खातों में भेजा गया. बाद में कथित तौर पर फर्जी डेबिट ट्रांजैक्शन के जरिए रकम निकालकर विभिन्न शेल कंपनियों तक पहुंचाई गई. इसी नेटवर्क की पूरी वित्तीय श्रृंखला की जांच अब सीबीआई कर रही है। 

    राज्य सरकार के अनुरोध पर CBI ने संभाली जांच
    शुरुआत में इस पूरे मामले की जांच हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कर रहा था. बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की. सीबीआई ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद बैंकिंग रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन, विभागीय फाइलों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच शुरू की. बताया जा रहा  है कि सीबीआई के अनुसार, अब तक इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है. इनमें IDFC First Bank और AU Small Finance Bank के छह अधिकारी,  हरियाणा सरकार के तीन अधिकारी, दो प्राइवेट कंपनियां और उसमें काम करने वाल छह कर्मचारी शामिल हैं.  प्रदीप कुमार की गिरफ्तारी से पहले भी दो सीनियर सरकारी अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 

  • भगवंत मान ने की घोषणा, गुरदासपुर का कादियां अब बनेगा सब-डिवीजन

    भगवंत मान ने की घोषणा, गुरदासपुर का कादियां अब बनेगा सब-डिवीजन

    गुरदासपुर. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने घोषणा की कि कादियां हल्के को सब-डिवीजन के रूप में अपग्रेड किया जाएगा, जिससे लोगों की लंबे समय से लटकती मांग पूरी होगी और आधुनिक प्रशासनिक कॉम्प्लेक्स के माध्यम से सभी प्रमुख सरकारी सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी

    कादियां में विशेष जनता कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अकाली नेतृत्व पर तीखे निशाने साधते हुए कहा कि उन्होंने वोट हासिल करने के लिए लोगों को डराया-धमकाया और वर्षों तक पंजाब को लूटा। पंजाबियों को "चोरों, लुटेरों और ठगों" के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लोगों से अपील की कि वे साल 2027 के चुनावों में 'झाड़ू' को इतने निर्णायक ढंग से चलाएं कि विपक्षी दल को सूबे को गंदला करने का फिर कोई मौका न मिले। मुख्यमंत्री ने किसानों को यह भरोसा भी दिया कि कीड़ी शुगर मिल के गन्ने के बकाए जल्द ही अदा कर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की लोक-पक्षीय पहलकदमियों, जिनमें 90 फीसद घरों के लिए शून्य बिजली बिल और 47 लाख परिवारों के लिए 10 लाख रुपये का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा शामिल है, का जिक्र करते हुए लोगों से 'रंगला पंजाब' बनाने में एकजुट होने की अपील की। इस कार्यक्रम की कुछ झलकियां साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 'एक्स' पर लिखा: "माझे की बहादुर धरती और कादियां हल्के के लोगों के अपार प्यार और स्नेह के लिए तहे दिल से धन्यवाद। लोगों की लंबे समय से लटकती आ रही मांग को पूरा करते हुए मैंने घोषणा की है कि कादियां को अब सब-डिवीजन बनाया जाएगा।

    एस.डी.एम., डी.एस.पी., और ए.डी.सी. के कार्यालय एक ही आधुनिक इमारत से काम करेंगे, जिससे लोगों को सरकारी सेवाएं लेने में होने वाली ख्वारी खत्म होगी। हल्के के विकास को और तेज करने के लिए गुरइकबाल सिंह माहल को हल्के का नया सेवादार नियुक्त किया गया है।" "पारंपरिक राजनीतिक नेताओं द्वारा शोषण का दौर अब खत्म हो गया है। आज पंजाब के 90 फीसद घरों के बिजली बिल शून्य आ रहे हैं, और 47 लाख परिवार पहले ही 10 लाख रुपये के कैशलेस स्वास्थ्य उपचार के कार्ड प्राप्त कर चुके हैं। आओ, हम सब मिलकर खुशहाल पंजाब का निर्माण करें।"

    विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "यह बड़ी भीड़ दिखाती है कि कादियां के लोग बदलाव लाने और इस हल्के को उस परिवार से मुक्त करवाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जिसने दशकों तक यहां राज किया है। पिछली सरकारों ने पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्र के विकास को अनदेखा किया, पर हमारी सरकार ने इसकी तरक्की को सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश की है। सीमा पर रहने वाले लोग सच्चे देशभक्त हैं जो हमेशा देश के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे हैं, और हमारी सरकार उनकी भलाई के लिए पूरी तरह से वचनबद्ध है।" मुख्यमंत्री ने कहा, "इस विधानसभा हल्के की लंबे समय तक नुमाइंदगी करने वाले स्मगलरों ने पंजाब की पीढ़ियों को बरबाद कर दिया है। लोगों को आने वाले विधानसभा चुनावों में उन्हें उचित सबक सिखाना चाहिए।"

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "हम पड़ोस की बेकरियों में बने बिस्कुट खाकर बड़े हुए हैं, जबकि पहाड़ों के कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़े ये नेता अपने पिता-दादाओं द्वारा स्मगल किए गए सोने के बिस्कुट खाते रहे हैं। उनके पास न तो कोई विचारधारा है और न ही जनता की सेवा के लिए कोई वचनबद्धता। उनका एकमात्र उद्देश्य हमेशा सत्ता पर काबिज होना रहा है। अब समय आ गया है कि लोग बेकरी के बिस्कुटों और सोने के बिस्कुटों के बीच फर्क को समझें।" उन्होंने कहा, "इन शाही नेताओं का आम पंजाबियों से कोई लेना-देना नहीं है। इनकी गाड़ियां, कपड़े और जीवनशैली हमसे बिल्कुल अलग है। जिन्होंने विधानसभा, राज्यसभा और लोकसभा में इस क्षेत्र का नुमाइंदगी की, उन्होंने कभी इसके विकास के लिए काम नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने सड़कों पर टोल लगाए और लोगों पर बोझ डाला। यहां तक कि उनका अपना घर भी बंटा हुआ है, जिस पर अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के झंडे लहरा रहे हैं।"
    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "मेरा नाम पारंपरिक पार्टियों के नेताओं के लिए डरावना सपना बन गया है क्योंकि मैंने उनके बुरे कामों को लोगों के सामने बेनकाब किया है। वे इस बात को हजम नहीं कर पा रहे कि एक आम आदमी का बेटा पंजाब को सफलतापूर्वक चला रहा है। लोगों ने इन नेताओं को पहले ही नकार दिया है क्योंकि हमेशा पंजाब और पंजाबियों से ज्यादा अपने परिवारों की परवाह की है।"

    कादियां को जल्द ही सब-डिवीजन बनाने की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सभी औपचारिक प्रक्रियाएं शीघ्र पूरी कर ली जाएंगी ताकि लोगों को अपने कार्यों के लिए अधिक इंतजार न करना पड़े। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल डूबता हुआ जहाज है और उसके समझदार नेता भी जनता के हित में पार्टी छोड़ रहे हैं। वर्षों तक लोगों ने अकालियों को इस सोच के साथ वोट दिए कि वे महान गुरुओं की पवित्र ‘तकड़ी’ का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन उन्होंने जनता को लूटा और अवैध कारोबारों में हिस्सेदारी की।” मुख्यमंत्री ने कहा, “अकाली दल, कांग्रेस और भाजपा जानते हैं कि वे राजनीतिक रूप से मेरा मुकाबला नहीं कर सकते। इसलिए वे फर्जी वीडियो के माध्यम से धार्मिक मुद्दों पर मुझे बदनाम करने के लिए एकजुट हो गए हैं। अकाली नेतृत्व ने पंजाब को बेरहमी से लूटा और आम लोगों पर अनेकों अक्षम्य अत्याचार किए। उन्होंने राज्य को तबाह करने वाले माफिया को संरक्षण दिया और नशे के कारोबार को बढ़ावा दिया, जिसके कारण लंबे शासनकाल में पंजाब की कई पीढ़ियां बर्बाद हो गईं।”

    मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार पूरे पंजाब में 43,000 किलोमीटर से अधिक लिंक सड़कों का नवीनीकरण कर रही है तथा ठेकेदारों को उनके रखरखाव के लिए जवाबदेह बनाया गया है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सरकारी खजाने का प्रत्येक पैसा जनता के कल्याण और पंजाब के सर्वांगीण विकास पर विवेकपूर्ण ढंग से खर्च हो।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज पंजाब के 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है। पहली बार किसानों को दिन के समय भी बिना किसी रुकावट के बिजली आपूर्ति मिल रही है, जिसे कभी असंभव माना जाता था।”

    मुख्यमंत्री ने कहा, “जनता से एकत्र किया गया कर का पैसा उन्हीं का है और हमारी सरकार उसे पूरी ईमानदारी से जनता के कल्याण पर खर्च कर रही है। प्रत्येक रुपया विकास, बेहतर स्कूलों, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, बेहतर सड़कों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण पर लगाया जा रहा है। जनता का पैसा अब कुछ लोगों की जेबें भरने के बजाय सीधे जनता के हित में खर्च हो रहा है।” भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारी सरकार ने घरों को मुफ्त बिजली दी है, युवाओं को बिना किसी भ्रष्टाचार के 68,000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं, सड़क नेटवर्क को मजबूत किया है, टोल प्लाजा बंद कर लोगों के प्रतिदिन लगभग 70 लाख रुपये बचाए हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया है, आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया है तथा पंजाब के हित में अनेक ऐतिहासिक पहलें की हैं।”
    मुख्यमंत्री ने कहा, “जब हमारी सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब राज्य में सिंचाई के लिए केवल 22 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग हो रहा था। आज यह बढ़कर 80 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जिससे किसानों को अधिक पानी उपलब्ध हो रहा है और भूजल पर निर्भरता कम हुई है।”

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारी सरकार गांवों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और प्रत्येक गांव के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए अनुदान जारी किए जा रहे हैं।”
    मुख्यमंत्री ने कहा, “युवाओं को नशे की लत से दूर रखने के लिए पंजाब सरकार 15 जुलाई तक पूरे राज्य में नव-निर्मित 3,100 खेल मैदान जनता को समर्पित करेगी। नशे के विरुद्ध हमारी लड़ाई में खेलों को बढ़ावा देना सबसे प्रभावी हथियारों में से एक है, क्योंकि इससे युवाओं की असीम ऊर्जा को सही दिशा तथा राष्ट्र निर्माण की ओर लगाया जा सकता है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारी सरकार ने पूरे राज्य के गांवों के तालाबों के पुनर्जीवन के लिए भी एक व्यापक अभियान शुरू किया है। इन तालाबों की सफाई, जल शोधन तथा कृषि कार्यों के लिए उनके उपयोग की विस्तृत योजना पहले ही तैयार की जा चुकी है। यह पहल तेजी से घटते भूजल स्तर पर दबाव कम करने में सहायक होगी और पूरे पंजाब में टिकाऊ सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करेगी।”

  • 35 एनकाउंटर पर उठे सवाल, मिलते-जुलते पैटर्न के आरोपों के बीच पंजाब पुलिस को ह्यूमन राइट्स कमीशन का नोटिस

    35 एनकाउंटर पर उठे सवाल, मिलते-जुलते पैटर्न के आरोपों के बीच पंजाब पुलिस को ह्यूमन राइट्स कमीशन का नोटिस

     चंडीगढ़
     पंजाब स्टेट एंड चंडीगढ़ ह्यूमन राइट्स कमीशन ने राज्य में कथित पुलिस एनकाउंटरों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। पंजाब मानवाधिकार संगठन (पीएचआरओ) के अध्यक्ष रंजीत सिंह की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने पंजाब के डीजीपी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने पंजाब पुलिस को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।शिकायतकर्ता ने आयोग में आरोप लगाया है कि पुलिस गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को हथियार या नशा तस्करी की बरामदगी के लिए ले जाती है और रास्ते में उनका एनकाउंटर कर देती है। आरोप यह भी है कि मामलों को अदालत तक पहुंचने से पहले ही खत्म करने की कोशिश की जाती है।

    मामले की अगली सुनवाई 30 जून 2026 को निर्धारित की गई है। शिकायत में राज्यभर में हुए 35 पुलिस एनकाउंटरों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई मामलों में पुलिस की कार्रवाई का पैटर्न लगभग एक जैसा दिखाई देता है।

    शिकायत के अनुसार, आरोपित को किसी हथियार या अन्य बरामदगी के लिए मौके पर ले जाया जाता है। वहां आरोपित की ओर से पुलिसकर्मी का हथियार छीनने या हमला करने की कोशिश का दावा किया जाता है और इसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपित के पैर में गोली लगने की कहानी सामने आती है।

    पुलिस अधिकारियों के वर्जन पर उठे सवाल
    पीएचआरओ ने आयोग को बताया कि कई मामलों में पुलिस का आधिकारिक वर्जन सवालों के घेरे में है। शिकायत में कहा गया है कि इस तरह की कार्रवाई से मामलों को अदालत तक पहुंचने से पहले ही खत्म करने की कोशिश की जाती है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक प्रतिनिधियों के बयान कानून से बाहर जाकर हिंसक कार्रवाई को बढ़ावा देते हैं।

    शिकायत में गुरदासपुर के हालिया एनकाउंटर का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि घटना के वास्तविक हालात पुलिस के सार्वजनिक दावों से मेल नहीं खाते। साथ ही “गोली का बदला गोली” जैसे बयानों पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसी सोच कानून के शासन और संविधान प्रदत्त जीवन के अधिकार के विपरीत है।

    अब विस्तार से जानिए क्या है पूरा मामला:-

        पुलिस की कहानी लगभग एक जैसी रही: पंजाब मानवाधिकार संगठन के अध्यक्ष रणजीत सिंह ने इस मामले में शिकायत की। शिकायत में पंजाब में पिछले कुछ समय के दौरान हुए 35 एनकाउंटरों पर सवाल उठाए गए। 

    शिकायत में दावा किया गया कि कई मामलों में पुलिस की कहानी लगभग एक जैसी रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी को बरामदगी के लिए ले जाया जाता है, वह हथियार छीनने या फायरिंग करने की कोशिश करता है और फिर जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लग जाती है।

        एनकाउंटर पूर्व नियोजित या फर्जी हो सकते हैं: शिकायतकर्ता के अनुसार इस तरह के एनकाउंटर पूर्व नियोजित या फर्जी हो सकते हैं। उन्होंने शिकायत में यह भी कहा कि गुरदासपुर में हाल ही में हुए एक एनकाउंटर का जिक्र करते हुए दावा किया गया कि जमीनी तथ्यों और पुलिस के आधिकारिक दावों में अंतर है।

        एनकाउंटर को लेकर जारी किए गए निर्देशों की अनदेखी: सत्ताधारी दल के कुछ प्रतिनिधि "गोली का बदला गोली" जैसी सोच को बढ़ावा दे रहे हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 21, जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ है। साथ ही हाई कोर्ट की तरफ से एनकाउंटर को लेकर जारी किए गए निर्देशों की अनदेखी है।

        कुछ इन मामलों का किया गया जिक्र: शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में कई कथित एनकाउंटर मामलों का उल्लेख किया है। इनमें 20 दिसंबर 2023 को अमृतसर के जंडियाला गुरु इलाके में गैंगस्टर और हेरोइन तस्कर अमृतपाल सिंह, दिसंबर 2025 में अमृतसर में फायरिंग मामले के आरोपी अमृतपाल सिंह, फरवरी 2026 में गुरदासपुर में 19 वर्षीय युवक रणजीत सिंह, 2023 में फतेहगढ़ साहिब में गैंगस्टर तेजा मेहंदीपुरिया, मार्च 2024 में गैंगस्टर सुखविंदर सिंह और फरवरी 2024 में बरनाला में गैंगस्टर गुरमीत सिंह सहित संजू बहमन और सुखदेव सिंह जैसे मामलों का जिक्र किया गया है।

    दो साल में बढ़े केस
    यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजाब में पुलिस मुठभेड़ों के मामलों में पिछले दो वर्षों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पंजाब पुलिस ने 2025 में राज्य में कम से कम 47 पुलिस मुठभेड़ दर्ज की गईं, जिनमें कई गैंगस्टर, नशा तस्कर और संगठित अपराध से जुड़े आरोपित शामिल थे। वहीं जनवरी से जून 2026 के बीच ही 35 से अधिक एनकाउंटर सामने आ चुके हैं। इनमें गुरदासपुर, अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और मोहाली प्रमुख जिले रहे।

     

  • श्री अकाल तख्त साहिब का क्या है महत्व? जहां पेश होंगे पंजाब के CM भगवंत मान, समझिए इसकी पूरी भूमिका

    श्री अकाल तख्त साहिब का क्या है महत्व? जहां पेश होंगे पंजाब के CM भगवंत मान, समझिए इसकी पूरी भूमिका

    चंडीगढ़ 
    पंजाब के सीएम भगवंत मान श्री अकाल तख्त साहिब के सामने आज अपना पक्ष रखेंगे. वह पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों, विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष के साथ जाएंगे. मान एक वीडियो को लेकर विवाद पर हैं. उन पर गुरु द्रोही औ पंथ विरोधी होने के आरोप हैं. इसके अलावा पंजाब सरकार के ईशनिंदा से जुड़े एक अधिनियम को भी पंथ की सलाह के बिना पारित किए जाने से नाराजगी है। 

    अकाल तख्त के सामने भगवंत मान इससे पहले भी पेश हो चुके हैं, जब उन्होंने वीडियो को फर्जी बताया था. उन्होंने दावा किया था कि वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से बनाया गया है. हालांकि मामले की सुनवाई के बाद अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने 15 जून को एक आदेश जारी करते हुए मान को गुरुद्रोही और खालसा पंथ का विरोधी घोषित किया था. ऐसा दावा किया गया है कि फोरेंसिक जांच में वीडियो सही पाया गया है. इसीलिए पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों विधायकों को अकाल तख्त के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। 

    श्री अकाल तख्त साहिब क्या है?
    श्री अकाल तख्त साहिब सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था है.सरल शब्दों में कहें तो यह सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक और नैतिक अदालत है. यह अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में है और सिखों के पांच तख्तों में सबसे प्रमुख मानी जाती है. इसका अर्थ है अकाल का सिंहासन, जिसका उद्देश्य सिर्फ आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं है, यह समाज, न्याय और समुदाय से जुड़े मामलों में भी फैसला सुनाता है। 

    सिख नेट के मुताबिक जब गुरु हरगोबिंद के पिता और पांचवें सिख गुरु अर्जन देव को मुगल सम्राट जहांगीर ने शहीद करवाया तो उसके जवाब में गुरु हरगोबिंद ने इसकी स्थापना की थी. जब उन्होंने अकाल तख्त के मंच का अनावरण किया था तो उन्होंने दो तलवारें धारण की थीं. इनमें एक आध्यात्मिक शक्ति पीरी का संकेत देती थी ओर दूसरी सांसारिक शक्ति मीरी का. यह पीरी और मीरी दर्शन ही अकाल तख्त की आत्मा है. जो ये विचार देता है कि धर्म और न्याय अलग नहीं हैं. यानी एक हाथ में आस्था और दूसरे में अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति। 

    क्या करता है अकाल तख्त?
        अकाल तख्त हुक्मनामा यानी धार्मिक आदेश जारी करता है. यह हुक्मनामा दुनिया भर के सिखों पर लागू होता है। 

        अकाल तख्त सिख हितों के लिए गलत बात करने वाला या हानिकारक कदम उठाने वाले को धार्मिक दंड दे सकती है। 

        तख्त किसी भी व्यक्ति की सेवा या उसके बलिदानों की सराहना भी कर सकता है जो सिख हितों के लिए काम करते हैं। 

        यह सिख समुदाय से जुड़े विवादों और महत्वपूर्ण मामलों पर मार्गदर्शन भी देता है। 

    जत्थेदार होता है अकाल तख्त का मुखिया
    अकाल तख्त का प्रमुख जत्थेदार ही उसका मुखिया होता है. जत्थेदार को ही दुनिया भर के सिखों का सर्वोच्च प्रवक्ता और प्रमुख माना जाता है. यह एक धार्मिक नेता की तरह होते हैं जिनसे अपेक्षा की जाती है कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त रहें. वर्तमान में कुलदीप सिंह गरगज कार्यवाहक जत्थेदार हैं.इनकी नियुक्त शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से 2025 में की गई थी. हालांकि तकनीकी तौर पर अकाल तख्त एक स्वतंत्र धार्मिक संस्था है। 

    अकाल तख्त के सामने बुलाए जाने का अर्थ क्या?
    श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार अगर किसी को पेश होने का आदेश देते हैं तो यह एक तरह का धार्मिक समन है. जो आरेापी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका देता है. जो भी व्यक्ति इसकी अनदेखी करता है वह सिख समुदाय की नजर में अपनी विश्वसनीयता खो देता है. आरोपी अगर पेश होता है तो उसका पक्ष सुनकर अकाल तख्त फैसला करता है कि उसे क्लीनचिट देनी है या फिर प्रायश्चित का आदेश देना है. इसे तनखाह कहा जाता है. यह धार्मिक दंड है. आम तौर पर तनखाह में सेवा कार्य, सार्वजनिक माफी की सजा दी जाती है। 

    सुखबीर सिंह बादल को मिला था धार्मिक दंड

    श्री अकाल तख्त साहिब ने 2024 में पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को तनखैया घोषित किया था. उन्हें तनखाह यानी धार्मिक सजा सुनाई गई थी. उन पर आरोप था कि 2007 से 2027 तक पंजाब की शिरोमणि अकाली दल सरकार में कुछ ऐसे फेसले हुए जिनसे पंथक हितों को नुकसान पहुंचा है. इसमें बेअदबी का माला भी शामिल था. सुखबीर सिंह बादल ने अपनी गलतियों के लिए बिना शर्त माफी मांगी थी. इसके बाद उने तनखाह सुनाई गई थी. उन्हें स्वर्ण मंदिर के बाद सेवादार की वर्दी पहनकर सेवा करनी पड़ी थी। 

    अकाल तख्त सबसे ऊपर क्यों?
    सिखों के पांच तख्त हैं. तख्त का अर्थ सिंहासन या सत्ता का आसन होता है. यह सिख धर्म का आध्यात्मिक और सांसारिक केंद्र है. पहला केंद्र श्री अकाल तख्त साहिब है, जो अमृतसर में है. दूसरा तख्त श्री केशगढ़ साहिब है जो आनंदपुर साहिब में है. तीसरा तख्त श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और चौथा तख्त श्री पटना साहिब तथा पांचवां तख्त श्री हजूर साहिब नांदेड़ में है. अकाल तख्त सर्वोच्च इसलिए है, क्योंकि ये पहला तख्त है। 

     

  • बेअदबी कानून पर आज होगी अहम सुनवाई, अकाल तख्त के सामने पंजाब सरकार रखेगी अपना पक्ष

    बेअदबी कानून पर आज होगी अहम सुनवाई, अकाल तख्त के सामने पंजाब सरकार रखेगी अपना पक्ष

    अमृतसर.

    आम आदमी पार्टी ने फैसला किया है कि सोमवार को पार्टी के सभी मंत्री व विधायक श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होंगे। रविवार को पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान की उपस्थिति में पार्टी विधायकों व मंत्रियों की हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।

    श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ने पंजाब सरकार द्वारा बनाए गए बेअदबी कानून के प्रावधानों में संशोधन नहीं करने पर विधानसभा के सभी सिख विधायकों व पूरी कैबिनेट को 29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होने के लिए कहा था। रविवार को बैठक के बाद अरविंद केजरीवाल के साथ पत्रकारों से वार्ता करते हुए भगवंत मान कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब से जारी प्रत्येक आदेश का अक्षरशः पालन किया जाएगा। पार्टी के सभी मंत्री, विधायक तथा विधानसभा के स्पीकर, जिन्हें श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा तलब किया गया है, सोमवार को विनम्र सिख के रूप में सरकार की स्थिति स्पष्ट करेंगे तथा अपना पक्ष रखेंगे।

    वीडियो से संबंधित विवरण भी श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपेंगे
    इसके अलावा उनकी नकल करने वाले व्यक्ति के फर्जी वीडियो से संबंधित समस्त विवरण भी श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपेंगे। मान ने कहा कि उन्हें पेश होने के लिए कोई पत्र जारी नहीं किया गया है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा 70 वर्ष पुराने "नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब अधिनियम, 1956" को निरस्त करने के निर्णय पर मुख्यमंत्री ने कहा, "महाराष्ट्र सरकार को सिख कौम के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। महाराष्ट्र की भाजपा सरकार को ऐसे कदम उठाने से बचना चाहिए जिनसे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हों। राजनीति और धर्म दोनों अलग-अलग विषय हैं और इन्हें किसी भी स्थिति में आपस में नहीं मिलाया जाना चाहिए।

    15 जून को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने दिया था करार
    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री के कथित वीडियो को लेकर 15 जून को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने गुरु व पंथ दोखी (गुरु व पंथ के दोषी) करार दिया था। इसी कारण मान को पेश होने के लिए नहीं कहा गया है। मान ने कहा कि एसजीपीसी ने अब गुरुद्वारों के बाहर मेरे सामाजिक बहिष्कार के पोस्टर लगाने का आदेश दिया है। उन्होंने सवाल किया कि शिरोमणि अकाली दल अथवा सुखबीर बादल के खिलाफ ऐसे पोस्टर कभी क्यों नहीं लगाए गए, जबकि उन्होंने स्वयं बेअदबी की घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार की थी? मान ने कहा कि संगत समझदार है और जनता सर्वोच्च है। आरोप लगाया कि भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल मुझे धार्मिक रूप से बदनाम कर राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं।

  • अकाल तख्त साहिब में पेशी से पहले AAP की बड़ी बैठक, CM मान और सिसोदिया ने तय किया आगे का प्लान

    अकाल तख्त साहिब में पेशी से पहले AAP की बड़ी बैठक, CM मान और सिसोदिया ने तय किया आगे का प्लान

    अमृतसर.

    श्री अकाल तख्त साहिब पर सोमवार को प्रस्तावित पेशी से एक दिन पहले आम आदमी पार्टी (आप) की 11:30 बजे अमृतसर के सर्किट हाउस में अपने सभी विधायकों व मंत्रियों की विशेष बैठक होगी। बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान भी शामिल होंगे।

    बैठक में पार्टी धार्मिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस पूरे घटनाक्रम पर अपना रुख स्पष्ट करने के साथ ही साथ आगे की रणनीति तय करेगी। हालांकि मुख्यमंत्री भगवंत मान को अब तक कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। बावजूद इसके उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से उन्हें बुलाया जाता है, तो वे वह सम्मानपूर्वक उपस्थित होंगे। श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश होने से पहले रविवार स्तरीय अमृतसर में बैठक रखी है, जिसमें विशेष तौर पर भाग लेने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल व पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया भी पहुंच चुके हैं।

  • मोगा में कुत्तों का आतंक, झुंड ने मजदूर पर किया जानलेवा हमला, मौके पर हुई मौत

    मोगा में कुत्तों का आतंक, झुंड ने मजदूर पर किया जानलेवा हमला, मौके पर हुई मौत

    मोगा.

    थाना मेहना के गांव कपूरे में गत रात्रि खूंखार कुत्तों द्वारा खेत से काम करके वापस लौट रहे एक मजदूर को बुरी तरह नोच डाला है। जिसकी मौका पर मौत हो गई घटना का पता सुबह परिवार को लगा तो परिवार ने सूचना पुलिस को दी पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोगा के सिविल अस्पताल में पहुंचा दिया है।

    सिविल अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार 50 वर्षीय सरबजीत सिंह पुत्र भजन सिंह निवासी कपूरे गांव के ही एक किसान के पास मेहनत मजदूरी करता था। वह गत रात्रि खेत में फसल को पानी लगाने के लिए गया था पानी लगाने के बाद वह पैदल वापस लौट रहा था तो रास्ते में खूंखार कुत्तों के झुंड ने सरबजीत सिंह को घेर लिया और बुरी तरह नोच डाला। जिसकी मौका पर ही मौत हो गई सूचना मिलते ही शव को कब्जे में लेकर आगामी जांच शुरू कर दी है।

    पहले भी हो चुकी है ऐसी घटनाएं
    शव को लेकर सिविल अस्पताल में पहुंचे गांव वासियों ने बताया कि उनके गांव में खूंखार कुत्तों का झुंड अक्सर ही लोगों को अपना शिकार बना लेता है गांव में बहुत ज्यादा गिनती में खूंखार कुत्ते घूमते हैं इससे पहले भी खूंखार कुत्तों के झुंड ने गांव के कई लोगों को अपना शिकार बना लिया यह कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले भी लगभग 6-7 लोग काट कर घायल किया जा चुके हैं।

  • नशे के खिलाफ पंजाब सरकार की नई पहल, लुधियाना में CM मान लॉन्च करेंगे ‘सूरमा’ मुहिम

    नशे के खिलाफ पंजाब सरकार की नई पहल, लुधियाना में CM मान लॉन्च करेंगे ‘सूरमा’ मुहिम

    लुधियाना

    पंजाब को नशामुक्त बनाने और युवाओं को नशे की दलदल से बाहर निकालने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान शनिवार को लुधियाना में नशा विरोधी अभियान के तहत ‘सूरमा’ मुहिम की शुरुआत करेंगे। 

    नशे जैसी गंभीर समस्या को हराना किसी जंग जीतने से कम नहीं माना जा रहा है। इसी के तहत पंजाब सरकार ने उन युवाओं को ‘सूरमा’ (योद्धा) का नाम दिया है, जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से नशे को मात दी है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भी ऐसे ही युवा होंगे।

    6 युवाओं का होगा विशेष सम्मान
    इस मुहिम के तहत मुख्यमंत्री भगवंत मान आज ऐसे 6 युवाओं को मंच पर विशेष रूप से सम्मानित करेंगे, जो कभी नशे की गिरफ्त में थे, लेकिन अब पूरी तरह नशा छोड़ चुके हैं। ये सभी युवा अब समाज की मुख्यधारा से जुड़कर विभिन्न कार्यों में लगे हुए हैं।

    कोई मेहनत-मजदूरी कर रहा है तो कोई छोटा-मोटा रोजगार चलाकर अपने परिवार का सम्मानपूर्वक पालन-पोषण कर रहा है। सरकार का उद्देश्य इन युवाओं को सम्मानित कर यह संदेश देना है कि नशे को छोड़कर एक बेहतर और सम्मानजनक जीवन की शुरुआत की जा सकती है।

    प्रशासन की तैयारियां मुकम्मल
    लुधियाना के गुरु नानक भवन में होने वाले इस बड़े आयोजन को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इसमें कई कैबिनेट मंत्री, विधायक और पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

    दूसरों के लिए बनेगी प्रेरणा
    इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य राज्य के अन्य युवाओं को प्रेरित करना है। जो युवा अभी भी नशे के जाल में फंसे हैं, उन्हें यह संदेश देना है कि नशा छोड़ने पर सरकार और समाज दोनों उनके साथ खड़े हैं। यह सम्मान समारोह उन माता-पिता के लिए भी उम्मीद की किरण लेकर आया है, जिनके बच्चे इस बुरी लत का शिकार हैं। ‘सूरमा’ मुहिम पंजाब के युवाओं में नई ऊर्जा और सकारात्मक बदलाव लाने का काम करेगी।