Category: राज्य

  • कह नहीं सकते क्या होगा – पूर्व सेना प्रमुख नरवणे को लेकर संजय राउत का बड़ा दावा

    कह नहीं सकते क्या होगा – पूर्व सेना प्रमुख नरवणे को लेकर संजय राउत का बड़ा दावा

    नई दिल्ली
    उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के नेता संजय राउत अपने आक्रामक अंदाज के लिए चर्चा में रहते हैं। अब उन्होंने एक और चौंकाने वाला बयान देते हुए पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की सुरक्षा को ही खतरा होने की बात कह दी है। संजय राउत ने मंगलवार को कहा कि जिस तरह से राहुल गांधी ने संसद में पूर्व आर्मी चीफ का हवाला देकर बात की और सरकार ने उन्हें रोक दिया। वह सही नहीं था। इस घटनाक्रम के चलते मुझे नरवणे की सुरक्षा की चिंता हो रही है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने एक ऐसा मुद्दा लाने की कोशिश की, जो राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला है।
     
    संजय राउत ने कहा कि जब देश पर संकट आता है या पड़ोसी मुल्क हमला करने की तैयारी में भारत की सीमा पर पहुंचता है तो उस वक्त राजनीतिक नेतृत्व को निर्णय लेना चाहिए। जनरल नरवणे बार-बार कोशिश कर रहे थे कि हमें आदेश दीजिए। उनका पूछना था कि चीन के इस अतिक्रमण के जवाब में हमें आदेश दीजिए। लेकिन 56 इंच का सीना रखने वाले भाग गए। उन्होंने कहा कि अब मुझे मनोज मुकुंद नरवणे की सुरक्षा की चिंता हो रही है। उनके साथ क्या होगा, यह मैं कह नहीं सकता। उनकी सिक्योरिटी बढ़ जानी चाहिए। इससे पहले ऐसे कई हादसे हो चुके हैं। इसलिए सुरक्षा दी जानी जरूरी है।

    संजय राउत का सवाल- आखिर सोनम वांगचुक के साथ क्या हुआ था
    उन्होंने कहा कि आखिर सोनम वांगचुक के साथ क्या हुआ था। उन्होंने भी तो सीमा की सुरक्षा का मसला उठाया था। दरअसल सोमवार को लोकसभा में उस वक्त काफी हंगामा हुआ था, जब मनोज मुकुंद नरवणे की गैर-प्रकाशित पुस्तक का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी बोलने लगे थे। उन्होंने डोकलाम में भारतीय सीमा के पास चीनी टैंकों के पहुंचने का कथित प्रकरण उठाया था। इस पर विवाद तब बढ़ गया, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऐतराज जताया। उनका कहना था कि संसद में ऐसी किसी पुस्तक को कोट नहीं किया जा सकता, जो प्रकाशित ही नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि यदि पुस्तक तथ्य सही होते तो वह प्रकाशित ही हो जाती। उस पर किसी तरह की रोक लगाने की जरूरत नहीं थी।

     

  • एमपी और महाराष्ट्र से आएंगे बाघ-बाघिन, नस्ल सुधार कर बाघों का बढेगा कुनबा

    एमपी और महाराष्ट्र से आएंगे बाघ-बाघिन, नस्ल सुधार कर बाघों का बढेगा कुनबा

    जयपुर.

    राजस्थान में बाघों की आबादी बढ़ाने और जीन पूल को बेहतर बनाने के लिए महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश से पांच बाघों को राज्य के रामगढ़ विषधारी एवं मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में लाने का फैसला किया गया है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के दिशा-निर्देश, राष्ट्रीय टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी की मंजूरी और तीनों राज्यों की आपसी सहमति के बाद यह फैसला लिया गया।

    पिछले दिनों मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व से तीन वर्ष की बाधिन रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया था। आगामी कुछ दिनों में एक और बाघिन मध्य प्रदेश से लाई जाएगी। इस बाघिन को सड़क मार्ग से लाया जाएगा। इन बाघों को रेडियो कालर लगाकर कुछ दिन वनकर्मियों की निगरानी में रखा जाएगा और फिर खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के पेंच, बांधवगढ़ एवं कान्हा टाइगर रिजर्व से राजस्थान में बाघ लाए जाएंगे। मकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय निदेशक सुगनाराम जाट ने बताया कि अंतरराज्यीय स्थानांतरण के तहत 15 फरवरी से पहले एक बाघिन को मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लेकर आने की योजना है।

    करीब सात सौ किलोमीटर का सफर सड़क मार्ग से 12 घंटे में तय किया जाएगा। इस संबंध में राजस्थान और मध्य प्रदेश के वन विभाग के अधिकारियों के बीच लगातार बात जारी है। पिछले साल दिसंबर में एक बाघिन को स्थानांतरित किया गया था। इस कारण आवश्यक है बाघों का अंतरराज्यीय स्थानांतरणबाघों या किसी भी प्रजाति में इनब्रीडिंग का मतलब होता है करीबी रिश्तेदारों का आपस में प्रजनन।

    जब बाघों की आबादी कम हो जाती है तो शेष बचे हुए बाघ-बाघिन करीबी रिश्तेदार होते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, इनब्रीडिंग से बच्चों में जन्मजात समस्याएं हो सकती हैं। जैसे दिल की बीमारी, पैरों की कमजोरी, आकार छोटा होना अथवा शिकार करने की क्षमता कम होना। बाघों में रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। बाघिन में गर्भधारण की समस्याएं होती है, कई बार शावकों की जन्म के समय ही मौत हो जाती है।

  • कानूनी और साइबर जांच तेज, बस्ती में लव जेहाद नेटवर्क से जुड़े 300 वीडियो मामले में कार्रवाई

    कानूनी और साइबर जांच तेज, बस्ती में लव जेहाद नेटवर्क से जुड़े 300 वीडियो मामले में कार्रवाई

    बस्ती 

    प्यार, भरोसा और शादी के सपनों के नाम पर रची गई यह साजिश इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली है. आरोप है कि बस्ती के एक शातिर युवक और उसका गिरोह 300 से ज्यादा लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाता रहा, फिर उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया गया. यही नहीं, इन वीडियो को हथियार बनाकर कई लड़कियों को जबरन देश और विदेशों में देह व्यापार के लिए भेजा गया. मामला सामने आते ही पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया है, जबकि पीड़िताओं की संख्या और नेटवर्क का दायरा जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.

    बस्ती के कलवारी थाना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता बस्ती शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में काम करती थी. जनवरी 2022 में उसकी मुलाकात अजफरुल हक उर्फ प्रिंस से हुई. खुद को हिंदू बताने वाले इस युवक ने पहले हमदर्दी दिखाई, फिर बेहतर नौकरी दिलाने का झांसा दिया. बातों-बातों में मोबाइल नंबर लिया गया और इसके बाद शुरू हुआ भावनात्मक जाल. पीड़िता के मुताबिक युवक न सिर्फ खुद को हिंदू बताता था, बल्कि भरोसा दिलाने के लिए हाथ में कलावा भी पहनता था, ताकि किसी तरह का शक न हो. धीरे-धीरे बातचीत प्यार में बदली और फिर एक दिन युवक ने भरोसा जीतकर उसके साथ दुष्कर्म किया. इसके बाद शादी का झांसा देकर लगातार उसका शारीरिक शोषण किया जाता रहा.

    जब शिकायत करने पहुंची तो गैंगरेप का आरोप

    पीड़िता का आरोप है कि जब वह अपनी आपबीती लेकर आरोपी के घर पहुंची और शादी की बात की, तो वहां हालात और भयावह हो गए. युवक ने अपने भाई और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. यही नहीं, विरोध करने पर उसे और उसके परिवार को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकियां दी गईं. पीड़िता का दावा है कि अगर वह आरोपी के पास नहीं जाती थी तो उसके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता, यहां तक कि उसके भाई को किडनैप करने की धमकी दी गई. हालात ऐसे बना दिए गए कि वह मजबूरी में बार-बार आरोपी के संपर्क में रहने को विवश हो गई.
    आपत्तिजनक वीडियो बने हथियार

    जांच में सामने आया है कि आरोपी और उसका गिरोह लड़कियों के निजी पलों के आपत्तिजनक वीडियो और फोटो बना लेता था. बाद में इन्हीं वीडियो के जरिए पीड़िताओं को ब्लैकमेल किया जाता. वीडियो वायरल करने, परिवार को बदनाम करने और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियों से लड़कियों को तोड़ दिया जाता था. पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में दावा किया है कि आरोपी और उसका भाई इसी तरीके से करीब 300 लड़कियों को प्रेम जाल में फंसा चुके हैं. इन सभी के वीडियो बनाकर उन्हें अलग-अलग राज्यों और नेपाल जैसे देशों तक देह व्यापार के लिए भेजा गया.

    हिस्ट्रीशीटर निकला मुख्य आरोपी

    पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर सामने आया कि अजफरुल हक उर्फ प्रिंस पहले से ही थाने का हिस्ट्रीशीटर अपराधी है. उस पर पहले भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. पीड़िता का यह भी आरोप है कि आरोपी के काले कारनामों में उसके घरवाले भी पूरी तरह शामिल थे और उन्होंने भी उसे देह व्यापार के दलदल में धकेलने की कोशिश की. पीड़िता का कहना है कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि संगठित अपराध है, जिसमें कई लोग शामिल हैं और इसका नेटवर्क बस्ती तक सीमित नहीं है.

    300 लड़कियों का दावा, जांच एजेंसियों के लिए चुनौती

    पीड़िता के इस दावे के बाद पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया है. अगर यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला राज्य के सबसे बड़े लव जिहाद और सेक्स ट्रैफिकिंग रैकेट में से एक बन सकता है. पुलिस फिलहाल पीड़िता के बयान, डिजिटल सबूतों और कॉल डिटेल्स के आधार पर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है.

    8 आरोपियों पर FIR, एक गिरफ्तार

    मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली पुलिस ने मुख्य आरोपी अजफरुल हक उर्फ प्रिंस समेत 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. इनमें आरोपी के परिजन और सहयोगी भी शामिल हैं. मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश के लिए दबिशें दी जा रही हैं. डिप्टी एसपी सत्येंद्र भूषण तिवारी ने बताया कि महिला की शिकायत के आधार पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. विवेचना के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस गिरोह का संबंध किसी अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से तो नहीं है.

    नेपाल और अन्य राज्यों तक फैले तार

    सूत्रों के अनुसार, पुलिस को शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ पीड़िताओं को नेपाल और देश के अन्य राज्यों में भेजा गया. इसके लिए एजेंट, ठिकाने और संपर्क सूत्रों का इस्तेमाल किया गया. मोबाइल डेटा और सोशल मीडिया अकाउंट्स की फोरेंसिक जांच की जा रही है. फिलहाल, गिरफ्तारी के साथ इस काले खेल की परतें खुलनी शुरू हुई हैं. आने वाले दिनों में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, यह साफ होगा कि यह आंकड़ा 300 तक सीमित है या इसके पीछे इससे भी बड़ा और खतरनाक नेटवर्क छिपा है.

  • वीजा नियमों का किया था उल्लंघन, फलस्तीन समर्थक दो ब्रिटिश नागरिकों भारत छोड़ेंगे

    वीजा नियमों का किया था उल्लंघन, फलस्तीन समर्थक दो ब्रिटिश नागरिकों भारत छोड़ेंगे

    जयपुर/अजमेर.

    राजस्थान के अजमेर जिले के तीर्थ नगरी पुष्कर में वीजा नियमों के उल्लंघन का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां आए दो विदेशी नागरिकों को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने के कारण प्रशासन द्वारा 'लीव इंडिया' नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई खुफिया विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 21 जनवरी को पुष्कर के विभिन्न सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल के विरोध में छोटे-छोटे स्टिकर लगाए गए थे। खुफिया विभाग (CID/IB) को यह जानकारी मिली कि इन स्टिकर को लगाने में एक विदेशी नागरिक और उसकी महिला मित्र की भूमिका संदिग्ध है। इसके बाद विभाग ने सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय सूत्रों के माध्यम से जांच शुरू की। पहचान के दौरान सामने आया कि ब्रिटिश नागरिक लुईस गैब्रिएल डी अपनी गर्लफ्रेंड अनुशी एमा क्रिस्टीन के साथ टूरिस्ट वीजा पर भारत भ्रमण के लिए आया था और पुष्कर में रुका हुआ था। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (CID) राजेश मीणा के नेतृत्व में विशेष टीम ने दोनों से पूछताछ की।

    पूछताछ में यह पाया गया कि उन्होंने टूरिस्ट वीजा की शर्तों का उल्लंघन करते हुए राजनीतिक प्रकृति की गतिविधियों में हिस्सा लिया। जिला पुलिस की सहायता से सभी विवादित स्टिकर हटवाए गए और खुफिया एजेंसियों ने उनके मूवमेंट, ठहरने की जानकारी और सोशल मीडिया गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों का वीजा निरस्त कर दिया गया है। प्रशासन ने उन्हें तत्काल भारत छोड़ने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि भारत में पर्यटक बनकर आने वाले किसी भी विदेशी द्वारा नियमों का उल्लंघन कर राजनीतिक या वैचारिक विरोध प्रदर्शन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में भविष्य के लिए ब्लैक लिस्ट करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।

  • कानूनी शर्तों के साथ ली शपथ, जेल से एंबुलेंस से विधानसभा पहुंचे अनंत सिंह

    कानूनी शर्तों के साथ ली शपथ, जेल से एंबुलेंस से विधानसभा पहुंचे अनंत सिंह

    पटना.

    बाहुबली नेता अनंत सिंह ने मंगलवार को बिहार विधानसभा में विधायक पद की शपथ ली। स्वास्थ्य कारणों से उन्हें बेऊर जेल से एंबुलेंस के जरिए विधानसभा लाया गया। शपथ ग्रहण के दौरान विधानसभा परिसर और उसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पूरे कार्यक्रम पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी रही। किसी भी तरह की भीड़ को अनुमति नहीं दी गई।

    बिना शपथ पत्र पढ़े दिलाई गई शपथ
    अनंत सिंह ने शपथ पत्र पढ़े बिना ही विधायक पद की शपथ ली। शपथ पूरी होते ही वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उनके माथे पर लगे तिलक के बारे में भी पूछा। इसके बाद अनंत सिंह अपनी निर्धारित सीट पर जाकर बैठ गए। सदन में मौजूद सदस्य यह दृश्य देखते रहे।

    तबीयत खराब होने का दिया हवाला
    मीडिया से बातचीत में अनंत सिंह ने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं होने के कारण शपथ लेने में देरी हुई। उन्होंने बताया कि अदालत की अनुमति मिलने के बाद ही वे विधानसभा पहुंचे हैं। अनंत सिंह ने साफ कहा कि जेल से बाहर आना उनके हाथ में नहीं है। उन्होंने कहा कि जब जज साहब चाहेंगे, तभी वे जेल से बाहर आएंगे। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं।

    कोर्ट ने सिर्फ शपथ के लिए दी इजाजत
    पटना सिविल कोर्ट के आदेश के बाद अनंत सिंह के शपथ ग्रहण का रास्ता साफ हुआ। हालांकि कोर्ट ने उन्हें केवल शपथ लेने की ही अनुमति दी है। दुलारचंद यादव हत्याकांड में उन्हें अब तक जमानत नहीं मिली है। शपथ समारोह के अलावा किसी भी अन्य गतिविधि में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है। शपथ के बाद उन्हें वापस बेऊर जेल भेजा जाएगा। वे दोबारा न्यायिक हिरासत में रहेंगे।

    विधानसभा परिसर छावनी में तब्दील
    अनंत सिंह को जेल से विधानसभा तक लाने और वापस ले जाने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई। एस्कॉर्ट वाहन और क्विक रिस्पॉन्स टीम को तैनात किया गया था। विधानसभा परिसर के अंदर और बाहर अतिरिक्त पुलिस बल मौजूद रहा। सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी गई। समर्थकों के किसी भी तरह के जमावड़े पर पूरी तरह रोक लगाई गई थी। प्रवेश द्वारों पर सघन जांच की गई।

    हाईकोर्ट में जमानत पर अब भी इंतजार
    अनंत सिंह पिछले करीब तीन महीनों से बेऊर जेल में बंद हैं। सिविल कोर्ट से उनकी जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने 24 दिसंबर को पटना हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। जिस पीठ में मामले की सुनवाई सूचीबद्ध हुई थी, उस कोर्ट के जज ने सुनवाई से इनकार कर दिया। अब इस मामले को दूसरी पीठ में सूचीबद्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। जमानत पर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है।

    संविधान के तहत शपथ लेना था जरूरी
    संविधान के अनुच्छेद 188 के अनुसार हर विधायक को पदभार संभालने से पहले शपथ लेना अनिवार्य है। शपथ लिए बिना कोई विधायक सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकता। शपथ तक विधायक को वेतन और भत्ते का भी अधिकार नहीं मिलता। अनुच्छेद 193 के तहत बिना शपथ सदन में शामिल होने पर जुर्माने का प्रावधान है। इसी कारण अनंत सिंह के लिए शपथ लेना जरूरी था। शपथ के साथ उनकी सदस्यता औपचारिक रूप से पूरी हो गई।

    मोकामा से बड़ी जीत के बाद शपथ
    अनंत सिंह मोकामा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं। उन्होंने 28,206 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। अनंत सिंह को कुल 91,416 वोट मिले थे। राजद की प्रत्याशी वीणा देवी दूसरे स्थान पर रहीं, जिन्हें 63,210 वोट प्राप्त हुए थे। जीत के बाद अनंत सिंह शपथ न ले पाने के कारण सदन से बाहर थे। मंगलवार को शपथ लेने के साथ ही उनकी विधायकी औपचारिक रूप से शुरू हो गई।

  • 462 पदों के लिए आवेदन कल से शुरू, बिहार पुलिस रेडियो में एएसआई की होगी भर्ती

    462 पदों के लिए आवेदन कल से शुरू, बिहार पुलिस रेडियो में एएसआई की होगी भर्ती

    पटना.

    बिहार पुलिस में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सुनहरा अवसर आया है। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (बीपीएसएससी) ने बिहार पुलिस रेडियो (वितंतु) संवर्ग में सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) के 462 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया चार फरवरी से शुरू होगी और चार मार्च तक चलेगी। पुरुष, महिला और मंगलामुखी सभी श्रेणी के अभ्यर्थी इस भर्ती में आवेदन कर सकेंगे।

    शैक्षणिक योग्यता और पात्रता तय
    इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से भौतिकी विषय के साथ विज्ञान में स्नातक (बीएससी) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों को 45 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण होना होगा। आयोग ने साफ किया है कि शैक्षणिक योग्यता की जांच सभी चरणों में की जाएगी।

    ऊंचाई और शारीरिक मानकों का निर्धारण
    भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक मानकों को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। अनारक्षित और पिछड़ा वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 165 सेंटीमीटर तय की गई है। अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के पुरुष उम्मीदवारों के लिए यह मानक 160 सेंटीमीटर रखा गया है। सभी वर्गों की महिला उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 155 सेंटीमीटर निर्धारित की गई है।

    तीन चरणों में होगी पूरी चयन प्रक्रिया
    एएसआई भर्ती की चयन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा आयोजित होगी, जिसमें 100 अंकों का एक प्रश्न पत्र होगा। इस परीक्षा में सामान्य ज्ञान एवं समसामयिक विषयों से 40 प्रश्न और भौतिकी से 60 प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा की अवधि दो घंटे की होगी और प्रश्न वस्तुनिष्ठ बहुविकल्पीय होंगे। 30 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए अयोग्य माने जाएंगे।

    मुख्य परीक्षा में दो प्रश्न पत्र
    प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलेगा। मुख्य परीक्षा में पहला प्रश्न पत्र सामान्य भाषा ज्ञान का होगा, जिसमें सामान्य हिंदी और सामान्य अंग्रेजी से 50-50 अंकों के प्रश्न पूछे जाएंगे। यह परीक्षा इंटरमीडिएट स्तर की होगी और डेढ़ घंटे की होगी। इसमें न्यूनतम 30 अंक लाना अनिवार्य होगा, हालांकि इसके अंक मेरिट में नहीं जोड़े जाएंगे। दूसरा प्रश्न पत्र स्नातक स्तर की भौतिकी का होगा, जिसमें 100 अंकों के 100 प्रश्न होंगे और परीक्षा की अवधि तीन घंटे की रहेगी।

    नेगेटिव मार्किंग और शारीरिक दक्षता परीक्षा
    प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों में प्रत्येक गलत उत्तर पर 0.2 अंक काटे जाएंगे। मुख्य परीक्षा के भौतिकी प्रश्न पत्र में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। इसके आधार पर रिक्तियों के अधिकतम पांच गुना अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। तीसरे चरण की यह परीक्षा अर्हक प्रकृति की होगी, जिसमें कोई अंक नहीं दिए जाएंगे, लेकिन सभी मानकों में सफल होना अनिवार्य होगा।

    युवाओं के लिए बड़ा मौका
    बीपीएसएससी की यह भर्ती बिहार पुलिस में तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए बड़ा अवसर मानी जा रही है। आयोग ने अभ्यर्थियों से समय पर आवेदन करने और आधिकारिक अधिसूचना को ध्यान से पढ़ने की अपील की है, ताकि किसी भी तरह की गलती से बचा जा सके।

  • हरियाणा में HCS को भी बड़ी राहत, 22 HPS अफसरों के होंगे प्रोमोशन

    हरियाणा में HCS को भी बड़ी राहत, 22 HPS अफसरों के होंगे प्रोमोशन

    चंडीगढ़.

    हरियाणा पुलिस सेवा (एच.पी.एस.) के अधिकारियों के लिए जल्द खुशखबरी आने वाली है। लंबे इंतजार के बाद, हरियाणा सरकार ने 22 एच.पी.एस. अधिकारियों को आई.पी.एस. रैंक पर प्रोमोट करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस बीच 2002 बैच के एच.सी.एस. अफसरों को राहत मिली है, जिन्हें प्रोवीजनल तौर पर आई.ए.एस. में प्रोमोट किया गया था।

    मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा इन अधिकारियों को इंटेग्रिटी सर्टिफिकेट जारी किए जाने के साथ ही सालों से अटका प्रोमोशन का रास्ता साफ हो गया है। अब राज्य सरकार जल्द ही इन नामों का पैनल यू.पी.एस.सी. को भेजने जा रही है। इन एच.पी.एस. अधिकारियों को मिले सर्टिफिकेटः मुख्य सचिव की ओर से जिन एच.पी.एस. अफसरों को ये सर्टिफिकेट दिए हैं, उनमें मुकेश कुमार, ध्यान सिंह पूनिया, धर्मवीर सिंह, चलजिंद्र सिंह, जयबीर सिंह, कुशाल सिंह, राज कुमार वालिया, ताहिर हुसैन, सिंह, नरेंद्र सिंह, रविंद्र कुमार, राजेश कुमार, ममता खर्च, रविंद्र विजय सिंह, सिद्धार्थ ढांडा, करण गोयल, संदीप कुमार, पूनम, भारती डवास, अमित दहिया, ऊषा देवी और जितेंद्र गहलावत शामिल हैं।

    2 वर्ष पहले प्रोमोशन पर फंसा था पेंच
    दरअसल दो साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में 13 एच. पी. एस. के प्रोमोशन की फाइल की मंजूरी मिली थी, लेकिन गृह विभाग की ओर से एच.पी.एस. अफसरों के प्रोमोशन की तैयार की गई फाइल को तत्कालीन मुख्य सचिव ने आपत्ति जताते हुए वापस भेज दिया था। उस समय कई एच.पी.एस. अफसरों की एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट (ए.सी.आर.) ही पूरी नहीं थी, इसके कारण उनके इंटेग्रिटी सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ था।

    2002 बैच के एच.सी.एस. अफसरों को भी राहत
    2002 बैच के एच.सी.एस. अफसरों को राहत हरियाणा सरकार के 2002 बैच के उन एच.सी. एस. अफसरों को कैट से राहत मिली है, जिन्हें प्रोवीजनल तौर पर आई.ए.एस. में प्रोमोट किया गया था। यू.पी.एस.सी. ने पिछले साल इन अफसरों के नामों पर विचार किया था और लंबित केस के कारण उनका नाम प्रोवीजनल लिस्ट में शामिल किया गया था। अब केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने हरियाणा सिविल सेवा के आठ अधिकारियों को अंतरिम राहत प्रदान की है, जिनकी भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति 2002 के भर्ती मामले में कथित संलिप्तता के कारण रुकी हुई है। कैट ने 27 जनवरी को पारित अपने नवीनतम आदेश में, न्यायाधिकरण ने निर्देश दिया कि उसकी पूर्व अंतरिम सुरक्षा 27 अप्रैल, 2026 तक जारी रहेगी, जिससे चयन सूची रद्द नहीं होगी। जिन आठ अधिकारियों को राहत मिली है, उनमें जगदीप ढांडा, सरिता मलिक, कमलेश भादू, कुलधीर सिंह, वत्सल वशिष्ठ, जग निवास, वीना हुडा और सुरेंद्र सिंह-1 का नाम शामिल हैं।

  • पंजाब में यातायात प्रभावित होने की आशंका, हल्की वर्षा के बाद बढ़ा घना कोहरा

    पंजाब में यातायात प्रभावित होने की आशंका, हल्की वर्षा के बाद बढ़ा घना कोहरा

    लुधियाना.

    पंजाब के तीन जिलों में हल्की वर्षा दर्ज की गई, जबकि अन्य सभी जिलों में धूप खिली रही। मौसम केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार रविवार मध्यरात्रि से सोमवार सुबह पांच बजे के दौरान रूपनगर में चार मिलीमीटर, पठानकोट में 12 व मानसा में 0.5 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। विभाग के अनुसार बठिंडा में न्यूनतम तापमान 5.8 डिग्री रहा।

    विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार मंगलवार को पंजाब के अधिकांश जिलों में घनी धुंध पड़ सकती है। पंजाब के जीरकपुर सहित कई इलाकों में घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे सुबह-सुबह यातायात बाधित हो सकता है।

    कहां कितना रहा तापमान
    मौसम केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार फरीदकोट में न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जोकि पंजाब में सबसे कम था। बठिंडा में न्यूनतम तापमान 4.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, वहीं लुधियाना में 5.4 डिग्री सेल्सियस, गुरदासपुर में 6.0 डिग्री सेल्सियस, एसबीएस नगर में 6.8 डिग्री सेल्सियस, पटियाला में 5.8 डिग्री सेल्सियस, अमृतसर में 6.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

  • गुरुग्राम में 32 कॉलोनियों को मिलेगी गंदे पानी से निजात, 50 करोड़ से बनेगा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट

    गुरुग्राम में 32 कॉलोनियों को मिलेगी गंदे पानी से निजात, 50 करोड़ से बनेगा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट

    चंडीगढ़.

    भोंडसी गांव की सीता राम मंदिर की भूमि पर एसटीपी लगेगा। प्लांट पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे मारुति कुंज की 32 कालोनियों को गंदे पानी की निकासी की समस्या से छुटकारा मिलेगा। कॉलोनी के लोग कई वर्षों से इस समस्या से परेशान थे। इन कॉलोनियों में करीब एक लाख प्रवासी लोग अपने घरौंदा बना कर रहते हैं। मारुति कुंज एवं भाेंडसी गांव निगम के 19 वार्ड के अंतर्गत है।

    समस्या से निजात दिलाने के लिए विधायक तेजपाल तंवर एवं गुरुग्राम नगर निगम की मेयर राजरानी मल्होत्रा ने 6 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। विधायक तेजपाल तंवर ने कहा कि मारुति कुंज की 32 कालोनी के लोगों को इस प्लांट से फायदा होगा। कॉलोनियों में करोड़ों रुपये खर्च कर बिजली व्यवस्था की जाएगी। मारुति कुंज का स्वरूप बढ़ता जा रहा है। उनका प्रयास है भोंडसी गांव में विकास कार्यों को बढ़ाना। जब पंचायत थी तब करोड़ों रुपये पंचायत के खाते में थे। उन्होंने गांव की पंचायत से अपील की थी इस पैसे का विकास कार्यों पर खर्च कर दो, नहीं तो सरकार के पास ही रह जाएंगे।

    भोंडसी पंचायत खर्च नहीं कर सकी। विकास नहीं किया। उनका करोड़ों रुपये दूसरी पंचायत और निगम में चला गया। भोंडसी के कुछ लोग एसटीपी के निर्माण से हो सकता है नाराज हों लेकिन यह जनहित में है। क्षेत्र के सब लोगों की सुविधा के लिए है। विकास के मामले में कालोनी को पीछे नहीं रहने दिया जाएगा। मेयर राजरानी मल्होत्रा ने कहा कि सरकार के पास पैसे की कमी नहीं है। जनहित के कार्य बताओ, सब कार्य प्राथमिकता से होंगे। वार्ड पार्षद अमित भड़ाना ने बताया कि करीब 7 एकड़ भूमि है, जिसमें एसटीपी के अलावा लोगों को स्वास्थ्य सुविधा के डिस्पेंसरी, मंदिर सहित कई जनहित कार्यों में प्रयोग में ली जाएगी।

  • पंजाब सरकार ने बताया बड़ा खतरा, बजट सत्र में शामिल नहीं हो पाएगा अमृतपाल सिंह

    पंजाब सरकार ने बताया बड़ा खतरा, बजट सत्र में शामिल नहीं हो पाएगा अमृतपाल सिंह

    चंडीगढ़.

    पंजाब सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह को अस्थायी रिहाई देने से साफ इनकार कर दिया है। सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था और सार्वजनिक शांति के हित सर्वोपरि हैं। ऐसे में उसे रिहाई की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    अमृतपाल ने बजट सत्र में भाग लेने की अनुमति देने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। गृह विभाग ने सोमवार को अमृतपाल की अर्जी खारिज कर दी। सरकार ने कहा कि हिरासत में रहते संसद सत्र में भाग लेना कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। 23 फरवरी 2023 को थाना अजनाला में खालिस्तानी समर्थक व सांसद अमृतपाल सिंह ने अपने साथी को छुड़वाने के लिए हमला कर दिया था। इस हमले में एसपी जुगराज सिंह, एएसआइ जतिंदर सिंह, पुलिस होमगार्ड का जवान सुरजीत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया था। थाना अजनाला की पुलिस ने अमृतपाल सिंह सहित 19 लोगों का बायनेम व 250 के करीब अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसके बाद पंजाब सरकार की ओर से इन पर एनएसए लगाया गया था और इन्हें असम की डिब्रूगढ़ जेल में भेज दिया था।

    खडूर साहिब सीट से बना सांसद
    पिछले साल लोकसभा चुनाव में अमृतपाल सिंह ने पंजाब की खडूर साहिब सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव में भाग लिया और यहां से वह सांसद चुना गया।