Category: राज्य

  • मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा तेज, विजय चौधरी बोले- एनडीए में सब ठीक है

    मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा तेज, विजय चौधरी बोले- एनडीए में सब ठीक है

    पटना

    मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के 12 दिन बाद जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार अपनी पार्टी के प्रदेश कार्यालय पहुंचे। यहां पर जदयू के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। नीतीश कुमार के समर्थकों ने जमकर उनके समर्थन में नारेबाजी की। इसी बीच कुछ कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार पर बनाए गए गीतों को बजाया। इन गीतों को सुनकर नीतीश कुमार ताली बजाने लगे और मंच पर बैठे लोगों से ताली बजवाई। नीतीश कुमार के साथ दोनों डिप्टी सीएम विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव भी मौजूद थे।

    भामाशाह जयंती पर नीतीश कुमार के पांच संदेश
    बताया जा रहा कि रविवार यानी 26 अप्रैल को भामाशाह जयंती पर जदयू दफ्तर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें ही नीतीश कुमार शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान जदयू कार्यालय में एक पंपलेट भी बांटा गया। इसमें भामाशाह के परिचय के अलावा नीतीश कुमार का संदेश भी लिखा था। इसमें नीतीश कुमार के हवाले से लिखा गया था कि मैं काम करता हूं, मेरा काम ही बोलता है। राजनीति सेवा के लिए है, मेवा के लिए नहीं। न्याय के साथ विकास यानी हर क्षेत्र और हर तबके का विकास। आधे मन से कोई बड़ा काम नहीं होता है। बिहार को मैं उस ऊंचाई पर ले जाना चाहता हूं, जहां से चाहकर कोई भी नीचे नहीं जा सकता है।

    निशांत कुमार और मंत्रिमंडल विस्तार पर विजय चौधरी ने क्या कहा?
    इधर, नीतीश कुमार और अन्य नेताओं की भी जदयू समर्थक निशांत कुमार को भी खोज रहे थे। वह निशांत कुमार को बड़ी जिम्मेदारी देने की मांग कर रहे थे। कुछ कार्यकर्ता तो उन्हें बिहार का अगला मुख्यमंत्री तक बता रहे थे। इसी बीच डिप्टी सीएम विजय चौधरी से कुछ पत्रकारों और निशांत कुमार और मंत्रिमंडल विस्तार पर सवाल पूछ लिया। उन्होंने कहा कि निशांत पार्टी में आ चुके हैं। वह काफी सक्रिय भी हैं। जदयू की पूरी टीम उन्हें पसंद करती है। मंत्रिमंडल विस्तार पर उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है। एनडीए में सबकुछ ठीक है। जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। 

  • काम के पास घर की सुविधा, यूपी में श्रमिक आवास नीति का विस्तार

    काम के पास घर की सुविधा, यूपी में श्रमिक आवास नीति का विस्तार

    नोएडा

     उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहरों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सबसे बड़ी समस्या हमेशा सस्ते और सुरक्षित आवास की रही है। बढ़ते किराए, लंबी दूरी और सीमित आय के बीच जीवन यापन करना उनके लिए चुनौती बना हुआ है। अब इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार और प्राधिकरण स्तर पर बड़े फैसले लिए गए हैं। नोएडा में जहां श्रमिकों के लिए चार बड़े हॉस्टल बनाए जाएंगे, वहीं पूरे राज्य में किफायती किराया आवास नीति को औद्योगिक क्षेत्रों में लागू करने की तैयारी है, जिससे मजदूरों को उनके कार्यस्थल के पास ही सस्ती और सुविधाजनक रहने की व्यवस्था मिल सकेगी।

    नोएडा में बनेंगे 4 श्रमिक हॉस्टल
    नोएडा प्राधिकरण श्रमिकों के लिए चार आधुनिक हॉस्टल बनाने जा रहा है। इनमें से दो हॉस्टल प्राधिकरण स्वयं बनाएगा, जबकि दो का निर्माण श्रम कल्याण बोर्ड के साथ संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) में किया जाएगा।

    चारों हॉस्टल एक-एक एकड़ जमीन पर विकसित होंगे और प्रत्येक हॉस्टल में लगभग 1000 श्रमिकों के रहने की क्षमता होगी। इन हॉस्टल्स को औद्योगिक सेक्टरों के पास बनाया जाएगा, जिससे श्रमिकों को कार्यस्थल तक पहुंचने में अतिरिक्त परिवहन खर्च नहीं करना पड़ेगा।

    औद्योगिक क्षेत्रों में बनेंगे श्रमिक आवास
    राज्य स्तर पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह तय किया गया है कि औद्योगिक क्षेत्रों की 30 प्रतिशत भूमि पर श्रमिकों के लिए आवास विकसित किए जाएंगे। इस निर्णय में आवास, औद्योगिक विकास, नगर विकास और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग शामिल रहे, जिन्होंने श्रमिकों को कार्यस्थल के नजदीक रहने की सुविधा देने पर सहमति जताई।

    सरकारी एजेंसियों के साथ निजी डेवलपर्स भी होंगे शामिल
    इस योजना को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ निजी डेवलपर्स को भी जोड़ा जाएगा। निजी बिल्डरों को अपनी परियोजनाओं में श्रमिकों के लिए किराए के मकान बनाने की अनुमति दी जाएगी। इसके बदले उन्हें भू-उपयोग में छूट, मानचित्र स्वीकृति में तेजी और विकास शुल्क में राहत जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे परियोजना को तेजी से जमीन पर उतारा जा सके।

    1000 से 1500 रुपये तक होगा किराया
    इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण इसका किफायती किराया है। सूत्रों के अनुसार, इन श्रमिक आवासों का मासिक किराया लगभग 1000 से 1500 रुपये के बीच रखा जा सकता है। मौजूदा समय में बड़े शहरों में एक कमरे का किराया 4 से 5 हजार रुपये तक पहुंच चुका है, ऐसे में यह योजना कम आय वाले श्रमिकों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।

    कुशल और अकुशल दोनों श्रमिकों को मिलेगा लाभ
    यह योजना केवल फैक्ट्री मजदूरों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि वेंडर, पेंटर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और अन्य कुशल व अकुशल श्रमिकों को भी इसका लाभ मिलेगा। आवास का आवंटन इस तरह किया जाएगा कि यदि कोई श्रमिक शहर छोड़ता है तो उसी मकान को दूसरे जरूरतमंद को दे दिया जाएगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।
    प्रधानमंत्री आवास योजना का विस्तार
    राज्य सरकार पहले ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किफायती किराया आवास (ARH) नीति को मंजूरी दे चुकी है। अब इस नीति को औद्योगिक विकास विभाग में लागू करने का निर्णय लिया गया है, जिससे इसका दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।

    क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?
    हाल के वर्षों में नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों ने महंगे किराए, बच्चों की फीस और बढ़ती महंगाई को लेकर विरोध जताया था। कोविड-19 महामारी के दौरान भी श्रमिकों के सामने आवास की गंभीर समस्या सामने आई थी, जिसने इस दिशा में ठोस नीति बनाने की आवश्यकता को और स्पष्ट किया।

     

  • स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से रांची में बुनियादी ढांचे और रोजगार के नए अवसर

    स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से रांची में बुनियादी ढांचे और रोजगार के नए अवसर

    रांची

    रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन ने अपना दायरा बढ़ाने की तैयारी की है। राज्य सरकार ने धुर्वा स्थित एचईसी से 500 एकड़ अतिरिक्त जमीन लेने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस अतिरिक्त जमीन में स्मार्ट सिटी फेज 2 के रूप में विकसित किया जाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य स्मार्ट सिटी का क्षेत्रफल बढ़ाकर आधुनिक आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र का विस्तार करना है। यह प्रस्तावित जमीन मौजूदा 656 एकड़ के प्रोजेक्ट के अलावा होगी। रांची स्मार्ट सिटी 656 एकड़ में धुर्वा क्षेत्र में विकसित की जा रही है, जो पूरी तरह से आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। अतिरिक्त जमीन मिलने से स्मार्ट सिटी का दायरा बढ़ने के साथ यहां कई अत्याधुनिक सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी।

    भारी उद्योग मंत्रालय प्रस्ताव पर कर रहा विचार
    अतिरिक्त जमीन लेने से राज्य सरकार ने एचईसी से बातचीत भी शुरू की है। बीते कुछ माह पहले रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने नई दिल्ली में केंद्र सरकार से इसे लेकर चर्चा की थी। अब भारी उद्योग मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। जानकारी के अनुसार अब एचईसी जमीन चिन्हित कर रहा है। इसके तहत एचईसी को बड़ी राशि मिलने की संभावना है, जो लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहे निगम के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। इसके अलावा मिलने वाली राशि से कर्मचारियों के बकाया भुगतान और मशीनों के आधुनिकीकरण का रास्ता खुलेगा। एचईसी के पास बड़ी मात्रा में अप्रयुक्त जमीन है, जहां अतिक्रमण की समस्या भी बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि इस जमीन का स्मार्ट सिटी में उपयोग कर इसे व्यवस्थित विकास में बदला जा सकता है।

    शहर के विकास का नया मॉडल होगा तैयार
    प्रस्तावित अतिरिक्त 500 एकड़ जमीन में एक ही स्थान पर आवासीय, व्यावसायिक या संस्थागत उपयोगों वाली गतिविधियों को बढ़ावा देने की तैयारी है। इससे छोटे कैफे, बुटीक, कंसल्टेंसी फर्म व रिटेल आउटलेट्स के लिए नए मौके खुलेंगे। स्मार्ट सिटी के विस्तार से धुर्वा, हटिया व जगन्नाथपुर क्षेत्र में संरचनात्मक ढांचे में भी सुधार होगा। चौड़ी सड़कें, 24 घंटे बिजली व हाईटेक ड्रेनेज सिस्टम से आसपास के क्षेत्रों को भी फायदा मिलेगा। अतिरिक्त जमीन में स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन द्वारा विकास का नया मॉडल भी तैयार करने का प्रस्ताव है। यानी छोटे-छोटे प्लॉट तैयार होंगे, जिससे रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे।

    वर्तमान में जिस 656 एकड़ जमीन में स्मार्ट सिटी विकसित हो रही है, उसकी सबसे बड़ी बाधा जमीन का दाखिल-खारिज थी। वर्षों पहले एचईसी को मिली जमीन का म्यूटेशन नहीं कराया गया था, जिससे वर्ष 2016 में प्रोजेक्ट शुरू होने के बावजूद प्लॉट आवंटन और निर्माण कार्य ठप पड़ा था। पिछले माह ही नामकुम अंचल में इस तकनीकी खामी को दूर करते हुए 656 एकड़ में से करीब 450 एकड़ जमीन का म्यूटेशन पूरा कर लिया है। शेष जमीन पर भी प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

  • हाईवे पर अफरा-तफरी, क्रेन से हटाई गई बस, पुलिस जांच जारी

    हाईवे पर अफरा-तफरी, क्रेन से हटाई गई बस, पुलिस जांच जारी

     बूंदी

    राजस्थान के बूंदी जिले में रविवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे ने यात्रियों की जान जोखिम में डाल दी. कापरेन थाना क्षेत्र के अंतर्गत कापरेन और हीरापुर के बीच बूंदी-कोटा लालसोट हाईवे पर सवारियों से भरी एक तेज रफ्तार स्लीपर बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई. यह बस कोटा से दिल्ली की ओर जा रही थी, जिसमें बड़ी संख्या में यात्री सवार थे. इस हादसे में लगभग 15 यात्री घायल हो गए हैं.

    बाइक सवार को बचाने के चक्कर में हुआ हादसा
    हादसे की शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है. बताया जा रहा है कि बस ड्राइवर ने सड़क पर अचानक आए एक बाइक सवार को बचाने का प्रयास किया था, लेकिन बस की रफ्तार इतनी तेज थी कि वह उस पर नियंत्रण नहीं रख सका. देखते ही देखते बस सड़क पर पलट गई और मौके पर चीख-पुकार मच गई. जान बचाने की जद्दोजहद में यात्री इधर-उधर भागने लगे, जिससे हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया.

    क्रेन की मदद से बाहर निकाले गए फंसे हुए यात्री
    घटना की जानकारी मिलते ही कापरेन थाना पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. बस पलटने के कारण कुछ यात्री उसके अंदर ही बुरी तरह फंस गए थे, जिन्हें निकालने के लिए पुलिस को क्रेन की मदद लेनी पड़ी. काफी मशक्कत के बाद दो यात्रियों को बस के मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया.

    4 गंभीर घायलों को कोटा किया गया रेफर
    सभी घायलों को तत्काल कापरेन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया. चिकित्सकों के अनुसार, घायल 15 यात्रियों में से 4 की हालत अत्यंत गंभीर है, जिसके चलते उन्हें बेहतर इलाज के लिए कोटा के एमबीएस (MBS) अस्पताल रेफर कर दिया गया है. अन्य घायलों का उपचार कापरेन में ही जारी है.

    हाइवे पर लगा लंबा जाम, पुलिस ने संभाली स्थिति
    इस दुर्घटना के बाद हाईवे पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. पुलिस ने मौके पर स्थिति को संभालते हुए क्रेन की मदद से बस को हटवाया और धीरे-धीरे यातायात को सुचारू कराया. फिलहाल पुलिस हादसे के वास्तविक कारणों की जांच कर रही है और घायलों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है.

  • सचिन पायलट के गढ़ में शक्ति प्रदर्शन, बीजेपी की भव्य जनसभा की तैयारी

    सचिन पायलट के गढ़ में शक्ति प्रदर्शन, बीजेपी की भव्य जनसभा की तैयारी

    टोंक

    टोंक में भारतीय जनता पार्टी की मेगा सभा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. 27 अप्रैल को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा टोंक पहुंचेंगे. राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन का राजस्थान में पहला दौरा होगा. यह दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है. खास इसलिए भी क्योंकि टोंक विधानसभा कांग्रेस नेता सचिन पायलट का गढ़ भी है. इस लिहाज से भी बीजेपी का यह आयोजन अहम माना जा रहा है.  

    7 नए पार्टी ऑफिस का भी होगा उद्घाटन
    इसी दौरान, टोंक में बीजेपी के नए कार्यालय का उद्घाटन भी किया जाएगा. साथ ही राजस्थान के छह अन्य पार्टी कार्यालयों का वर्चुअली उद्घाटन भी किया जाएगा. इसके बाद बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ एक बड़ी जनसभा आयोजित होगी.

    हेलीपैड से लेकर सभा स्थल तक 11 जगहों पर होगा स्वागत
    सभा को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है. राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत राजस्थानी परंपरा होगा. हेलीपैड से सभा स्थल तक 11 जगहों पर ढोल-नगाड़े और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भव्य स्वागत की तैयारी है. प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पहले ही सभा स्थल का पूजन कर तैयारियों का जायजा लिया है. वहीं, कैबिनेट मंत्री भी तैयारी में जुटे हैं. जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर भी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर तैयारियों का जायजा ले रहे हैं. 

  • विदेशी फंडिंग और इंटरनेशनल नेटवर्क तक पहुंची जांच, 14 से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार

    विदेशी फंडिंग और इंटरनेशनल नेटवर्क तक पहुंची जांच, 14 से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार

    आगरा

    उत्तर प्रदेश के आगरा से शुरू हुए धर्मांतरण सिंडिकेट मामले में पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. सिंडिकेट के मुख्य आरोपी और फंडिंग के स्रोत दाऊद अहमद पर शिकंजा कसते हुए आगरा पुलिस ने भोपाल स्थित उसकी संपत्ति को कुर्क कर दिया है और अब पुलिस उसे विदेश से भारत लाने की तैयारी में जुट गई है. इस पूरे मामले में अब इंटरनेशनल कनेक्शन और फंडिंग नेटवर्क की जांच भी तेज हो गई है.

    आगरा पुलिस ने भोपाल के गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित रिलायबल हाईटेक सिटी में दाऊद अहमद के घर पर पहुंचकर कुर्की की कार्रवाई पूरी की. इससे पहले CrPC की धारा 82 के तहत नोटिस चस्पा किया गया था, लेकिन अदालत में पेश न होने पर अब धारा 83 के तहत संपत्ति कुर्क कर दी गई.

    कनाडा में छिपा है दाऊद
    आगरा पुलिस का मकसद साफ है कि आरोपी या उसका परिवार अब संपत्ति बेचकर फरार न हो सके. पुलिसिया सूत्रों के मुताबिक, पिछले 3 सालों से दाऊद अहमद कनाडा में मौजूद है. उसे भारत लाने के लिए आगरा पुलिस उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग से पत्राचार कर रही है ताकि CBI के जरिए इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया जा सके.

    इसके साथ ही MLAT यानी म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी के तहत भी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. इस पूरे मामले में एक बड़ा इंटरनेशनल कनेक्शन भी सामने आ रहा है. सूत्रों के मुताबिक, दाऊद अहमद का संबंध कनाडा के ब्राम्पटन इस्लामिक सेंटर (Brampton Islamic Centre) से बताया जा रहा है.

    जांच एजेंसियां इस एंगल की पड़ताल कर रही हैं कि विदेश से आने वाली फंडिंग का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया जा रहा था और क्या इसके जरिए देश के अंदर कोई संगठित नेटवर्क ऑपरेट किया जा रहा था.

    बताया जा रहा है कि दाऊद अहमद पिछले करीब तीन साल से भारत नहीं आया है और उसकी गतिविधियां अब केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के रडार पर हैं.

    जानिए क्या है पूरा मामला
    दरअसल, इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा जुलाई 2025 में हुआ था. जब आगरा के सदर क्षेत्र से दो सगी बहनें लापता हो गई थीं. जांच में सामने आया कि दोनों एक संगठित गिरोह के संपर्क में आ गई थीं. पुलिस ने उन्हें कोलकाता से बरामद किया, जिसके बाद इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ.

    14 से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार
    इस मामले में अब तक 14 से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. गिरोह का मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान दिल्ली में सक्रिय था, जबकि उसकी सहयोगी आयशा गोवा से नेटवर्क चला रही थी.

    कनाडा और यूएई से फंडिंग
    पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस सिंडिकेट को विदेशों खासतौर पर कनाडा और यूएई से फंडिंग मिल रही थी. जांच में दाऊद अहमद को इस फंडिंग का अहम स्रोत बताया गया.

    पुलिस ने दाऊद अहमद की गिरफ्तारी के लिए भोपाल में दबिश भी दी, लेकिन वह हाथ नहीं आया. अदालत के आदेश के बावजूद पेश न होने पर अब सख्ती बढ़ा दी गई है. थाना सदर बाजार में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 209 के तहत एक और मुकदमा भी दर्ज किया गया है.

    पुलिस कमिश्नर का कड़ा संदेश
    इस पूरे ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने कई लड़कियों को इस गिरोह के चंगुल से मुक्त भी कराया है. यानी साफ है कि पुलिस आयुक्त दीपक कुमार के नेतृत्व में आगरा से हुए खुलासे के बाद अब यह मामला इंटरनेशनल नेटवर्क और फंडिंग तक जा पहुंचा है.

    फिलहाल, आगरा पुलिस इस सिंडिकेट को जड़ से खत्म करने के लिए आगे भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है.

  • 500 महिलाओं को मिला रोजगार, युवा उद्यमी की पहल से बना सफल मिठाई कारोबार

    500 महिलाओं को मिला रोजगार, युवा उद्यमी की पहल से बना सफल मिठाई कारोबार

    बस्ती

    उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में इन दिनों मुस्लिम महिलाओं के हाथों से बना "राम जी पेड़ा" देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी जमकर धूम मचा रहा है. इन पेड़ों के प्रसिद्ध होने के पीछे कारण देशी स्टाइल में बनाना है. जिसे बड़े-बड़े बर्तनों में लकड़ी के चूल्हों की मदद से महिलाओं द्वारा गुड़ डालकर शुद्ध दूध व देशी घी से बनाया जाता है. जिस वजह से ये काफी स्वादिष्ट होते हैं, इतना ही नहीं लकड़ी के चूल्हों पर पकने की वजह से इन पेड़ों में सोंधापन आने से इनके स्वाद में चार चांद लग जाते हैं.

    गुड में बनने की वजह से ये शुगर फ्री होते हैं, जिस वजह से इन पेड़ों की मांग देश से ज्यादा विदेशों में है. क्योंकि ये किसी को नुक़सान नहीं पहुंचाते हैं. हालांकि इन महिलाओं का सपना साकार नहीं होता अगर इन्हें युवा उद्यमी का साथ नहीं मिला होता. क्योंकि युवा उद्यमी ने ही इन्हें बिजनेस प्लान बताया. जिसके बाद महिलाओं ने इस अमल में लाया.

    अयोध्या में भोग लगाने के बाद भेजा जाता है विदेश
    जानकारी के अनुसार बस्ती जिले के रहने वाले युवा उद्यमी मनीष मिश्रा गांव ने बेरोज़गार और गरीब महिलाओं को रोजगार के लिए पहले तो पेड़े बनाने की ट्रेनिंग दी. उसके बाद उन्हें रा-मैटेरियल देकर काम की शुरुआत की और धीरे-धीरे महिलाओं का कारवां बढ़ता गया और आज 500 गरीब महिलाएं इस रोजगार से जुड़ीं हैं. ये महिलाएं हजारों रुपए कमाकर अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं, सबसे हैरानी कि बात यह है कि इस काम में मुस्लिम महिलाएं भी अपना हाथ बंटाती हैं.

    "राम जी का पेड़ा" देशी स्टाइल में बेहद ही स्वच्छता और हाइजीन तरीके से बनाया जाता है. जिसे लकड़ी के चूल्हे पर दूध में गुड़ डालकर शुद्ध देशी घी में पकाया जाता है. चूल्हे पर पकने की वजह से पेड़े में सोंधी खुशबू आ जाती है. जिससे इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. गुड़ से बने इस पेड़े की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूर्ण रूप से शुगर फ्री होता है. जिस वजह से इसकी देश विदेश के बाजारों में मांग है. "राम जी पेड़ा" बनने के बाद पहले अयोध्या जाता है. यहां भगवान राम को भोग लगाया जाता है फिर देश- विदेश में इसकी सप्लाई की जाती है.

    दो दिनों में ही तैयार हो जाता है कई किलो पेड़ा
    इस संस्था के मैनेजर ने बताया कि हमारा "राम जी का पेड़ा"देश ही नहीं बल्कि विदेशों में जैसे रूस व यूरोप जैसे देशों में सप्लाई किया जा रहा है. ऑर्डर आने के बाद महिलाएं काम में जुट जाती हैं. दो दिनों में ही कई किलो पेड़े बनाकर उसे मटके में पैक कर देती हैं. जिसके बाद इन पेड़ों का अयोध्या में भोग लगाया जाता है. फिर देश के अलावा विदेशों में भी सप्लाई किया जाता है.

  • सुरक्षा मंजूरी और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के बाद एयरपोर्ट बनेगा बड़ा एविएशन हब

    सुरक्षा मंजूरी और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के बाद एयरपोर्ट बनेगा बड़ा एविएशन हब

    नोएडा

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अगले महीने उड़ानें शुरू करने की तैयारी है. एयरलाइंस कंपनियों ने शुरुआत में 17 शहरों के लिए घरेलू उड़ानें शुरू करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है. यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड की एयरपोर्ट साइट पर बोर्ड बैठक हुई.

    बैठक में एयरपोर्ट से उड़ान शुरू होने में आ रही रुकावटों समेत अन्य प्रस्तावों पर चर्चा की गई. मई के अंत तक एयरपोर्ट से घरेलू और कार्गो विमान सेवा शुरू करने का निर्णय लिया गया. तीन एयरलाइंस कंपनियों के पदाधिकारियों से वार्ता की गई, जिन्होंने शुरुआत में एयरपोर्ट से 17 फ्लाइट्स शुरू करने का प्रस्ताव रखा है.

    17 शहरों के लिए मिलेगी कनेक्टिविटी
    बैठक में पूरा खाका तैयार करने और टिकट बुकिंग सेवा शुरू करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के आदेश दिए गए. हालांकि, उड़ान के लिए शहरों का चयन अभी नहीं हो सका है. नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) से उड़ान के लिए अंतिम मंजूरी के प्रस्ताव पर भी यापल और नायल के अधिकारियों के बीच बैठक हुई.

    सुरक्षा और विदेशी CEO का मसला
    बकास से अभी एयरपोर्ट सिक्योरिटी प्रोग्राम (ASP) को मंजूरी मिलना बाकी है. इसके बाद ही उड़ान सेवा शुरू की जाएगी. इस दौरान गृह मंत्रालय की आपत्तियों को दूर करने और विदेशी सीईओ से संबंधित मसले को सुलझाने पर भी अधिकारियों के बीच मंथन हुआ. यापल के अधिकारियों ने दावा किया कि इस पर काम शुरू हो गया है और एएसपी के लिए सभी आपत्तियां इसी माह में दूर कर ली जाएंगी, ताकि मई तक उड़ानें शुरू की जा सकें.

    इंफ्रा पर बड़ा निवेश, 300 करोड़ खर्च होंगे
    यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड की बोर्ड बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि एयरपोर्ट पर अगले दो वर्षों में विमानों को खड़ा करने के लिए 25 नए स्टैंड बनेंगे, जिस पर करीब 300 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. वर्तमान में 28 स्टैंड बनकर तैयार हैं, जिनमें तीन कार्गो और 25 व्यावसायिक विमानों के लिए हैं.

    इसके अलावा, एयरपोर्ट पर 10 एयरोब्रिज जोड़े गए हैं, जिससे विमान यात्री एक साथ उड़ान भर सकेंगे. एयरपोर्ट के रनवे को प्रति घंटे लगभग 30 विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग की क्षमता के साथ तैयार किया गया है.

  • अवैध खनन पर कड़ा रुख: Ravi River-Sutlej River मामले में हाईकोर्ट के आदेश, Punjab सरकार को 3 हफ्ते का अल्टीमेटम

    अवैध खनन पर कड़ा रुख: Ravi River-Sutlej River मामले में हाईकोर्ट के आदेश, Punjab सरकार को 3 हफ्ते का अल्टीमेटम

    चंडीगढ़.

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने रावी और सतलुज दरिया के क्षेत्र में अवैध खनन के मामले में पंजाब सरकार को जिम्मेदार अधिकारियों पर तीन हफ्ते के भीतर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने यह आदेश ड्रोन सर्वे रिपोर्ट के आधार पर दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि निर्धारित खनन क्षेत्र से बाहर खुदाई पाई जाती है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाए।

    चंडीगढ़ निवासी गुरबीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि पंजाब में अवैध खनन का कार्य जोरों पर चल रहा है, जिससे राज्य सरकार को हर वर्ष लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि अमृतसर बार्डर और रावी दरिया किनारे में अवैध रेत खनन अभी भी जारी है। सुनवाई के दौरान सर्वे आफ इंडिया द्वारा प्रस्तुत ड्रोन आधारित सर्वे रिपोर्ट को अदालत ने महत्वपूर्ण साक्ष्य माना।

    रिपोर्ट में हाई रिजोल्यूशन इमेजरी और डिजिटल टेरेन माडल के माध्यम से यह संकेत मिला कि कई स्थानों पर खुदाई निर्धारित खनन क्षेत्र से बाहर की गई है। हालांकि, ड्रोन सर्वे अभी केवल कुछ गांवों तक सीमित है और पूरे रावी-सतलुज बेल्ट का आकलन बाकी है। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अधूरी रिपोर्ट के आधार पर वास्तविक स्थिति का आकलन संभव नहीं है।

    कोर्ट ने सर्वे आफ इंडिया को निर्देश दिया कि शेष क्षेत्रों का व्यापक सर्वेक्षण तीन सप्ताह के भीतर पूरा कर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपे, ताकि पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। अदालत ने पंजाब सरकार को भी निर्देशित किया कि जैसे ही अंतिम रिपोर्ट प्राप्त हो, अवैध खनन से जुड़े मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जाए। इस पहले सुनवाई पर केंद्र सरकार ने भी बताया था कि बीएसएफ, सेना और केंद्र सरकार अवैध खनन और इसके जरिये सीमा क्षेत्र में होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकने की दिशा में काम कर रही है। हाई कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय को आदेश दिया था कि वह बताएं कि सीमा के निकट कैसे वैध खनन की अनुमति दी जा सकती है। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने कहा था कि सीमा पर अवैध खनन बंद है और केवल रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही खनन की इजाजत दी जा रही है।

  • Harbhajan Singh की सुरक्षा पर बड़ा अपडेट: Bhagwant Mann सरकार ने हटाई Z सिक्योरिटी, केंद्र ने दी नई सुरक्षा

    Harbhajan Singh की सुरक्षा पर बड़ा अपडेट: Bhagwant Mann सरकार ने हटाई Z सिक्योरिटी, केंद्र ने दी नई सुरक्षा

    चंडीगढ़.

    पंजाब की राजनीति में उठापटक के बीच मान सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व क्रिकेटर और आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य हरभजन सिंह की जेड प्लस सुरक्षा वापस ले ली है। रविवार सुबह जालंधर स्थित उनके आवास से सुरक्षाकर्मियों को हटा लिया गया। इस कदम ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी के भीतर टूट और बगावत की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

    सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा वापस लेने का निर्णय हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के मद्देनजर लिया गया है। इससे पहले आप छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की सुरक्षा में भी बदलाव किया गया था। बाद में उन्हें केंद्र की ओर से जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिल गई थी। अब हरभजन सिंह को भी केंद्र सरकार ने तुरंत सुरक्षा दे दी है।  दरअसल, राघव चड्ढा ने दावा किया था कि आप के सात राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं, जिनमें हरभजन सिंह का नाम भी शामिल बताया गया।

    हालांकि, हरभजन सिंह ने इस पूरे मामले पर अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, आप नेतृत्व ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि केवल तीन सांसदों ने ही पार्टी छोड़ी है। इधर, पार्टी छोड़ने की खबरों के बीच आप कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। जालंधर, लुधियाना और फगवाड़ा में कुछ सांसदों के आवास और संस्थानों के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए। दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे गए, जिससे माहौल और गरमा गया। पुलिस मौके पर मौजूद रही, लेकिन प्रदर्शन को लेकर सख्ती कम नजर आई।

    राष्ट्रपति से मिलने के लिए सीएम मान ने मांगा समय
    राजनीतिक तनाव के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। उन्होंने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है। माना जा रहा है कि वे पार्टी बदलने वाले सांसदों के खिलाफ संवैधानिक कार्रवाई की मांग उठा सकते हैं। दूसरी ओर, आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी उपराष्ट्रपति से मुलाकात कर इन सांसदों की सदस्यता रद करने की मांग करेंगे। पूरे घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति को चुनावी मोड में ला दिया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की उठापटक को बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह संकट गहराता है तो इसका असर पार्टी के संगठन और चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। फिलहाल, हरभजन सिंह की चुप्पी और सुरक्षा वापसी के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि वे इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और पंजाब की सियासत किस दिशा में आगे बढ़ती है।