Category: राज्य

  • पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, कार्यवाहक चीफ जस्टिस बने अश्विनी कुमार मिश्रा

    पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, कार्यवाहक चीफ जस्टिस बने अश्विनी कुमार मिश्रा

    चंडीगढ़.

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होने के बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर दिया। भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद-223 के तहत यह नियुक्ति की है।

    केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने से पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो गया था, जिसके चलते जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के दायित्व सौंपे गए हैं। अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति ने जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय के कार्यों का निर्वहन करने के लिए नियुक्त किया है।

    यह नियुक्ति तब तक प्रभावी रहेगी जब तक हाई कोर्ट को नियमित मुख्य न्यायाधीश नहीं मिल जाता। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा का न्यायिक और विधिक क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है। उनका जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल कालेज से अर्थशास्त्र में बीए (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद कैंपस लॉ सेंटर, दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। 8 मई 1993 को अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराने के बाद उन्होंने मुख्य रूप से सिविल, संवैधानिक और सेवा संबंधी मामलों में वकालत की। अपने वकालती करियर के दौरान उन्होंने नोएडा प्राधिकरण, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, इलाहाबाद विकास प्राधिकरण, इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन तथा उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन सहित कई सार्वजनिक और वैधानिक संस्थाओं का पक्ष रखा।

    इसके अलावा वह उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भी महत्वपूर्ण मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पेश होते रहे। वर्ष 2013 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्रदान किया गया। जस्टिस मिश्रा ने 3 फरवरी 2014 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी और 1 फरवरी 2016 को स्थायी न्यायाधीश बने। 21 जुलाई 2025 को उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में हुआ था। न्यायिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट में रहते हुए उनकी पीठ ने चर्चित निठारी सीरियल किलिंग मामले में अहम निर्णय सुनाया था। वहीं पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में उन्होंने अवैध खनन के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए कई महत्वपूर्ण आदेश पारित किए और सेवा तथा संवैधानिक कानून से जुड़े मामलों में उल्लेखनीय निर्णय दिए।

    जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में चार जज हो गए जिनका संबध पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जिस्टस ए जी मसीह व जस्टिस अरुण पल्ली , पंजाब एवं हरियाणा हाई के कोटे से सुप्रीम कोर्ट में है जबकि जस्टिस शील नागू पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ रहते हुए मध्य प्रदेश कोटे से सुप्रीम कोर्ट पंहुचे है।

  • ठेकेदारी सिस्टम पर मान सरकार का बड़ा वार, 65 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को मिलेगा नियमितीकरण का लाभ

    ठेकेदारी सिस्टम पर मान सरकार का बड़ा वार, 65 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को मिलेगा नियमितीकरण का लाभ

    चंडीगढ़.

    पंजाब में नगर निकाय चुनावों के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में सोमवार को पंजाब कैबिनेट की अहम बैठक होने जा रही है। खास बात यह है कि निकाय चुनावों के बाद शनिवार को भी मंत्रिमंडल की बैठक हुई थी और अब दो दिन के भीतर दूसरी बार कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है।

    सूत्रों के अनुसार बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा जनहित से जुड़े मुद्दों, विकास परियोजनाओं और लंबित प्रशासनिक मामलों पर भी चर्चा होने की संभावना है। कुछ विभागों की ओर से भेजे गए प्रस्तावों को मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष रखा जा सकता है। हालांकि सरकार की ओर से बैठक का विस्तृत एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि राज्य में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। इसके साथ ही वित्तीय मामलों और विभागीय कार्यों से जुड़े मुद्दों पर भी मंत्रियों के साथ चर्चा हो सकती है।

    निकाय चुनावों के नतीजों के बाद यह लगातार दूसरी कैबिनेट बैठक है। ऐसे में सरकार की आगामी प्राथमिकताओं और प्रशासनिक रणनीति को लेकर भी बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि मंत्रिमंडल की बैठक में कौन-कौन से फैसले लिए जाते हैं और उनका राज्य की राजनीति तथा प्रशासन पर क्या असर पड़ता है। कैबिनेट बैठक मुख्यमंत्री आवास, सेक्टर-2, चंडीगढ़ में आयोजित होगी। बैठक के बाद सरकार की ओर से लिए गए फैसलों की जानकारी साझा की जाएगी।

    पक्की नौकरी का दमदार फॉर्मूला
    सरकार ने कर्मचारियों को रेगुलर करने का पारदर्शी और कड़ा ब्लूप्रिंट तैयार किया है. नियम के तहत जिन ग्रुप-C और ग्रुप-D के कर्मचारियों ने 5 साल की निरंतर सेवा पूरी कर ली है, उन्हें अब सीधे सरकारी ठेके के अधीन लाया जाएगा. वहीं, अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करने वाले फायर सर्विस कर्मचारी, पी.एस.पी.सी.एल. लाइनमैन, सीवर वर्कर और सफाई कर्मचारियों को महज 3 साल की सेवा के बाद ही यह लाभ मिल जाएगा. इसके बाद, सरकारी ठेके पर 10 साल पूरे करने वाले कर्मचारियों को मंजूरशुदा खाली पदों पर पूरी तरह से ‘रेगुलर’ कर दिया जाएगा। 

    ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने का ऐलान
    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘पंजाब के 65,000 से अधिक कॉन्ट्रैक्ट वर्करों ने सूबे की सेवा में अपनी जिंदगी के कई-कई साल दिए हैं. इस फैसले के साथ पंजाब सरकार ने उन्हें वह दे दिया है, जो उनका हक है. अब कोई भी ठेकेदार इन कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच खड़ा नहीं होगा.’ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘इन कर्मचारियों को अब सीधा रोजगार, पूरा सम्मान और पक्की नौकरी का स्पष्ट रास्ता मिलेगा. पंजाब सरकार के विभागों और संस्थाओं में निजी ठेकेदारों के माध्यम से काम करने वाले कर्मचारियों को सीधे राज्य सरकार की अपनी रोजगार प्रणाली के अधीन लाया जाएगा, जिससे बिचौलिया ठेकेदारी प्रथा समाप्त हो जाएगी। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब राज्य आउटसोर्स्ड पर्सनल (ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्टुअल एंगेजमेंट) बिल, 2026 के तहत आउटसोर्स्ड ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के कर्मचारियों, जिन्होंने पांच साल की निरंतर सेवा पूरी कर ली है, को सीधे सरकारी ठेके पर रोजगार के अधीन लाया जाएगा. जोखिम वाली श्रेणियों में काम करने वाले कर्मचारी तीन साल की सेवा पूरी करने के बाद योग्य हो जाएंगे. पांच साल की निरंतर आउटसोर्स्ड सेवा के बाद सीधे राज्य सरकार के अधीन रोजगार प्रदान किया जाएगा. इसके बाद सरकारी ठेके पर 10 साल सेवा पूरी करने के बाद, कर्मचारियों को रेगुलर मंजूरशुदा असामियों के विरुद्ध रेगुलर करने के लिए विचार किया जाएगा. दो नए कानून लाए जा रहे हैं, जिनमें से एक आउटसोर्स्ड रोजगार से सीधे राज्य सरकार के अधीन ठेके पर करने के लिए और दूसरा मंजूर खाली असामियों के विरुद्ध सरकारी ठेके से रेगुलर कैडर में करने के लिए है। 

    51 विभागों के 65 हजार कामगार को सरकारी नौकरी
    इस पहल के पैमाने को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ’51 विभागों में कुल 65,048 आउटसोर्स कामगार इस सुधार के दायरे में आते हैं और 26,000 से अधिक कामगार पहले लाभार्थियों में शामिल होंगे.’ उन्होंने आगे घोषणा की कि जीवन और स्वास्थ्य के लिए जोखिम से संबंधित ड्यूटी निभाने वाले कामगारों पर नीति के तहत तेजी से विचार किया जाएगा. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘जिन कामगारों की रोजाना ड्यूटी में खतरा होता है, उन्हें पांच साल की बजाय तीन साल बाद विचार किया जाएगा. इनमें फायर सर्विसेज कर्मचारी, पी.एस.पी.सी.एल. लाइनमैन, सीवर वर्कर, शहरी स्थानीय संस्थाओं के सेनिटेशन कर्मचारी, कूड़ा-कर्कट संभालने वाले कर्मचारी और फील्ड शिकायत स्टाफ शामिल हैं। 

    लाभार्थी में किस विभाग से कौन-कौन?
    लाभ लेने वाले विभागों का विवरण देते हुए बयान में कहा गया है कि सुधार में बिजली क्षेत्र के 15,753 कर्मचारियों को शामिल किया गया है, जिसमें शिकायतों का समाधान करने वाला स्टाफ, पैसको कर्मचारी, मीटर रीडर और नोडल सेंटर वर्कर शामिल हैं. स्थानीय सरकार विभाग के 8,436 कर्मचारी, जिनमें मुख्य रूप से सफाई कर्मचारी, चीनी मिलों, स्पिनफेड और मार्कफेड समेत सहकारी संस्थाओं के 8,373 कामगार; स्कूल शिक्षा के 7,704 कर्मचारी, परिवहन विभाग के 4,746 कर्मचारी और 1,472 आउटसोर्स्ड फायर कर्मचारी शामिल हैं। 

    इसके अलावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के 2,688 कर्मचारी, जल आपूर्ति और सेनिटेशन के 1,575 कर्मचारी, कृषि के 1,533 कर्मचारी, जेलों के 1,311 कर्मचारी, तकनीकी शिक्षा के 1,251 कर्मचारी, पी.डब्ल्यू.डी. (बी एंड आर) के 1,570 कर्मचारी, सामान्य प्रशासन विभाग के 1,322 कर्मचारी और मेडिकल शिक्षा के 1,231 कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। 

    ठेकेदारी खत्म, मजदूर-मालिक के बीच और कोई नहीं
    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘मजदूरों का अब मालिकों से सीधा संपर्क होगा. इस प्रणाली में अब ठेकेदारों के लिए कोई जगह नहीं होगी.’ मुख्यमंत्री ने आगे कहा, ‘मेहनताने के बिना किसी एजेंसी की कटौती या कमीशन के सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा की जाएंगी. कर्मचारियों को हर कैलेंडर वर्ष में कानूनी प्रसूति लाभ और 10 दिनों की कैजुअल छुट्टी मिलेगी. वे बायोमेट्रिक हाजिरी और आई.एच.आर.एम.एस. प्रणालियों के अधीन भी कवर किए जाएंगे। 

    काम में पारदर्शिता, मनमानी पर कार्रवाई
    कर्मचारियों की सुरक्षा के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यहां पारदर्शिता और मनमानी वाली कार्रवाई नहीं चलेगी. किसी भी कर्मचारी को लिखित कारण दर्ज किए बिना और सुनवाई का मौका दिए बिना हटाया नहीं जाएगा.’ मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल की मंजूरी के 45 दिनों के अंदर लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और अमला एवं वित्त विभागों द्वारा योग्य श्रेणियों को चरणबद्ध तरीके से नोटिफाई किया जाएगा. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘मुख्य सचिव की अगुवाई वाली राज्य स्तरीय अधिकृत समिति इस फैसले को लागू करने की निगरानी करेगी. जबकि कई राज्य ठेकेदारी की ओर बढ़ रहे हैं, पंजाब इस रुझान को उलट रहा है और ठेकेदारी प्रणाली को समाप्त किया जा रहा है। 

    हालांकि सरकार की ओर से बैठक का विस्तृत एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि राज्य में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। इसके साथ ही वित्तीय मामलों और विभागीय कार्यों से जुड़े मुद्दों पर भी मंत्रियों के साथ चर्चा हो सकती है।

    राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि मंत्रिमंडल की बैठक में कौन-कौन से फैसले लिए जाते हैं और उनका राज्य की राजनीति तथा प्रशासन पर क्या असर पड़ता है। कैबिनेट बैठक मुख्यमंत्री आवास, सेक्टर-2, चंडीगढ़ में आयोजित होगी। बैठक के बाद सरकार की ओर से लिए गए फैसलों की जानकारी साझा की जाएगी।

     

  • JEE Advanced 2026 में जालंधर के सिफ्त का जलवा, बेहतरीन रैंक से परिवार और शहर गौरवान्वित

    JEE Advanced 2026 में जालंधर के सिफ्त का जलवा, बेहतरीन रैंक से परिवार और शहर गौरवान्वित

     जालंधर
     देश की प्रतिष्ठित तकनीकी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश का रास्ता खोलने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा एडवांस्ड 2026 का परिणाम घोषित कर दिया गया है। परिणाम जारी होते ही विद्यार्थियों और अभिभावकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। शहर के विद्यार्थियों ने भी इस कठिन परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए सफलता का परचम लहराया है।

    ला ब्लॉसम स्कूल के विद्यार्थी सिफ्त मोंगा ने अखिल भारतीय स्तर पर 722वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। वहीं इनोसेंट हार्ट स्कूल के तनीष शर्मा ने 4146वीं अखिल भारतीय रैंक प्राप्त कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। दोनों विद्यार्थियों की उपलब्धि से उनके परिवारों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन में खुशी का माहौल है।

    17 मई को हुई थी परीक्षा
    संयुक्त प्रवेश परीक्षा एडवांस्ड 2026 का आयोजन 17 मई 2026 को किया गया था। परीक्षा दो अलग-अलग सत्रों में आयोजित हुई थी। इस वर्ष परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के पास थी। देशभर से लाखों विद्यार्थियों ने इस परीक्षा में भाग लिया था, जिनमें से सफल विद्यार्थियों को अब देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में दाखिले का अवसर मिलेगा।

    संयुक्त प्रवेश परीक्षा एडवांस्ड को देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में योग्य विद्यार्थियों का चयन करना है। परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को अब अगले चरण यानी काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेना होगा।

    काउंसलिंग प्रक्रिया जल्द होगी शुरू
    परिणाम घोषित होने के बाद अब संयुक्त सीट आवंटन प्राधिकरण की ओर से काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सफल अभ्यर्थियों को अपनी रैंक और पसंद के अनुसार संस्थानों तथा पाठ्यक्रमों का चयन करना होगा। इसके बाद सीट आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसी प्रक्रिया के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के साथ-साथ अन्य सहभागी तकनीकी संस्थानों में प्रवेश मिलेगा।

    शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि काउंसलिंग के दौरान विद्यार्थियों को अपनी रैंक, रुचि और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए विकल्प भरने चाहिए। सही निर्णय से उन्हें अपनी पसंद के संस्थान और पाठ्यक्रम में प्रवेश मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

  • सीएम योगी ने बिजली आपूर्ति जल्द बहाल करने तथा टूटे तारों, खंभों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा

    सीएम योगी ने बिजली आपूर्ति जल्द बहाल करने तथा टूटे तारों, खंभों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा

    आंधी-बारिश को लेकर मुख्यमंत्री सख्त, अधिकारियों को राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश

    प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता पहुंचाने, फसलों और जनहानि का आकलन करने के आदेश

    सीएम योगी ने बिजली आपूर्ति जल्द बहाल करने तथा टूटे तारों, खंभों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा 

    लखनऊ
     प्रदेश में पिछले तीन दिनों से जारी आंधी, बारिश और तेज हवाओं के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को पूरी सतर्कता बरतने और राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। रविवार को कई जिलों में आंधी, बारिश और तूफान की घटना के बाद मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन, राहत आयुक्त कार्यालय तथा संबंधित विभागों को लगातार निगरानी बनाए रखने और किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि मौसम विभाग ने रविवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई है। 

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि जिन जनपदों में तेज आंधी, बारिश, ओलावृष्टि अथवा अन्य प्राकृतिक आपदाओं से जनहानि अथवा पशुहानि हुई है, वहां प्रभावित परिवारों को तत्काल अनुमन्य राहत राशि वितरित की जाए। उन्होंने कहा कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक समयबद्ध सहायता पहुंचनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए। जहां भी कृषि क्षति की सूचना मिले, वहां राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर आकलन करे तथा शासन को रिपोर्ट उपलब्ध कराए, ताकि किसानों को नियमानुसार सहायता प्रदान की जा सके।

    मुख्यमंत्री ने विद्युत विभाग को भी आंधी और बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति जल्द बहाल करने तथा टूटे तारों, खंभों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर स्थिति का जायजा लें और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य संचालित करें। 

    जनता से सावधानी बरतने की अपील 
    मुख्यमंत्री ने जनता से भी अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतें, अनावश्यक रूप से खुले स्थानों में न जाएं तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • 72 जिलों के 1011 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित हुई परीक्षा, लगभग 90 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने किया प्रतिभाग

    72 जिलों के 1011 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित हुई परीक्षा, लगभग 90 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने किया प्रतिभाग

    शांतिपूर्वक सम्पन्न हुई संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा-2026

    योगी सरकार की पारदर्शी एवं तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली का सफल उदाहरण

    72 जिलों के 1011 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित हुई परीक्षा, लगभग 90 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने किया प्रतिभाग

    एआई, फेस रिकग्निशन, बायोमैट्रिक अटेंडेंस, 22 हजार सीसीटीवी कैमरे और लाइव कमांड कंट्रोल सिस्टम से हुई निगरानी

    लखनऊ,
    उत्तर प्रदेश में संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा-2026  प्रदेश के 72 जिलों के 1011 परीक्षा केन्द्रों पर सफलतापूर्वक, शांतिपूर्ण एवं शुचितापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी को सौंपी गई थी। परीक्षा में पंजीकृत 4,44,958 अभ्यर्थियों में से लगभग 90 प्रतिशत अभ्यर्थी दोनों पालियों में शामिल हुए।

    उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा-2026 के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश देश में पारदर्शी, नकलविहीन और तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली का मॉडल बनकर उभरा है। प्रदेश के 72 जिलों में स्थापित 1011 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा-2026 पूरी शुचिता, पारदर्शिता और शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई।

    मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि परीक्षा में कुल 4,44,958 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें 2,72,659 महिला, 1,72,297 पुरुष तथा 2 ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी शामिल थे। प्रथम पाली में सामान्य ज्ञान एवं भाषा विषय की परीक्षा तथा द्वितीय पाली में अभिरुचि परीक्षण एवं विषय योग्यता की परीक्षा आयोजित की गई। दोनों पालियों में लगभग 90 प्रतिशत अभ्यर्थियों की उपस्थिति दर्ज की गई। कासगंज और पीलीभीत में सर्वाधिक 95 प्रतिशत तथा गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में 84 प्रतिशत उपस्थिति रही।

    उन्होंने कहा कि परीक्षा की निगरानी के लिए बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी में अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्थापित किया गया, जहां से प्रदेश के सभी 1011 परीक्षा केन्द्रों की लाइव मॉनिटरिंग की गई। इसके लिए लगभग 22 हजार सीसीटीवी कैमरे और 5651 बायोमैट्रिक मशीनें लगाई गई थीं। परीक्षा के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फेस रिकग्निशन तकनीक, फिंगर प्रिंट आधारित बायोमैट्रिक सत्यापन और रियल टाइम अटेंडेंस सिस्टम का उपयोग किया गया, जिससे केवल वास्तविक अभ्यर्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित हो सके।

    योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि आधुनिक एआई सिस्टम के माध्यम से परीक्षा केन्द्रों के स्ट्रांग रूम, प्रवेश एवं निकास द्वारों तथा परीक्षा कक्षों की लगातार निगरानी की गई। किसी भी संदिग्ध गतिविधि अथवा अनाधिकृत व्यक्ति की उपस्थिति पर तत्काल कंट्रोल रूम को अलर्ट प्राप्त हुआ और संबंधित केन्द्र से तुरंत संपर्क स्थापित कर स्थिति का सत्यापन किया गया। गोपनीय सामग्री के बॉक्स खोले जाने की सूचना भी सीधे कंट्रोल रूम में प्राप्त होती रही।

    उन्होंने कहा कि इस वर्ष पहली बार परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता को और मजबूत बनाने के लिए विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों को जीपीएस आधारित बॉडी बॉर्न कैमरे उपलब्ध कराए गए। इन कैमरों के माध्यम से प्रतिनिधियों की लाइव लोकेशन, परीक्षा केन्द्रों के निरीक्षण तथा गोपनीय सामग्री से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी कंट्रोल रूम से की गई। 29 और 30 मई को आयोजित बैठकों का भी सीधा प्रसारण विश्वविद्यालय स्तर पर देखा गया।

    मंत्री ने बताया कि सभी परीक्षा केन्द्रों को VoIP (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) आधारित संचार प्रणाली से जोड़ा गया था। इसके माध्यम से आयोजक विश्वविद्यालय और परीक्षा केन्द्रों के बीच सुरक्षित एवं त्वरित संवाद स्थापित किया गया। परीक्षा के दौरान प्राप्त विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक अलर्ट का रियल टाइम समाधान सुनिश्चित किया गया।

    उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि योगी सरकार युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी। पिछले वर्षों में प्रदेश ने भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा-2026 का सफल आयोजन इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश में अब परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह तकनीक आधारित, पारदर्शी, जवाबदेह और अभ्यर्थी हितैषी बन चुकी है।

    उन्होंने बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय, विश्वविद्यालय प्रशासन, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन तथा परीक्षा आयोजन से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के क्षेत्र में नवाचार और पारदर्शिता की इस प्रक्रिया को आगे भी निरंतर जारी रखेगी।

  • MCD की प्रिंटिंग व्यवस्था पर सवाल, मेजरमेंट बुक न मिलने से विकास कार्य प्रभावित

    MCD की प्रिंटिंग व्यवस्था पर सवाल, मेजरमेंट बुक न मिलने से विकास कार्य प्रभावित

    नई दिल्ली

     एमसीडी में पिछले 4-6 महीने से मेजरमेंट बुक का भारी अकाल पड़ा हुआ है। मेजरमेंट बुक न होने की वजह से संबंधित डिविजनों (मेंटिनेंस) के तहत चल रहे हजारों कामों की मेजरमेंट बुक में एंट्री नहीं हो पा रही है। जब मेजरमेंट बुक में एंट्री ही नहीं हो पा रही है तो संबंधित डिविजनों में कॉन्ट्रैक्टर जितने भी काम कर रहे हैं उनकी कोई निगरानी नहीं हो रही है। इसका सीधा असर काम की क्वॉलिटी पर पड़ेगा।

    एमसीडी के पास खुद की प्रिटिंग प्रेस
    सूत्रों का कहना है कि यह स्थिति तो तब है जबकि एमसीडी को मेजरमेंट बुक किसी बाहरी प्रिंटर से नहीं छपवानी, बल्कि सिविल लाइन स्थित अपनी ही प्रिंटिंग प्रेस पर छापनी है। बावजूद इसके पिछले कई महीनों से डिविजनों में मेजरमेंट बुक उपलब्ध नहीं हो पा रही। दिल्ली सरकार की ओर से सड़कें, गलियां और कॉलोनियों की टूटी पुलिया आदि बनाने के लिए भरपूर फंड उपलब्ध कराया हुआ है।

    MCD के 12 जोनों में चल रहे विकास कार्य
    वॉर्ड वाइज काम कराने के लिए संबंधित जोन की डिविजनों द्वारा टेंडर मांगे जाते हैं। टेंडर अलॉट होने के बाद जब कॉन्ट्रैक्टर काम शुरू करता है उसी दिन से मेजरमेंट बुक में एंट्री करने का काम शुरू हो जाता है। एमसीडी के 12 जोनों के तहत आने वाली मेंटिनेंस डिविजनों में हजारों काम चल रहे हैं। किसी वॉर्ड में कॉलोनी के अंदर ही सड़कें बनाने का काम चल रहा है तो कहीं पर गलियों के साथ-साथ नालियों को बनाया जा रहा है।

    कॉन्ट्रैक्टर को काम शुरू करने से पहले करनी होती है एंट्री
    इसके अलावा जिन कॉलोनियों में पुलिया टूटी हुई थी उन्हें भी दोबारा बनाया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि कॉन्ट्रैक्टर जब काम शुरू करता है तो उसके हर दिन वह जो भी काम करता है उसकी एंट्री मेजरमेंट बुक में की जाती है। उदाहरण के रूप में अगर कोई कॉन्ट्रैक्टर कहीं पर सड़क बनाने का काम कर रहा है तो सड़क बनाने से पहले वह पुरानी सड़क को तोड़ेगा। कॉन्ट्रैक्टर ने किस दिन कितनी सड़क तोड़ी यह सब मेजरमेंट बुक में दर्ज किया जाता है।

    प्रिंटिंग प्रेस अपनी, फिर मेजरमेंट बुक क्यों नहीं ?
    प्रिंटिंग प्रेस अपनी, प्रिंटिंग प्रेस पर काम करने वाला स्टॉफ भी अपना, पेपर की भी कोई कमी नहीं, बावजूद इसके मेजरमेंट बुक का अकाल पड़ना एमसीडी के प्रिंटिंग प्रेस विभाग पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। डिविजन के लिए मेजरमेंट बुक का बड़ा महत्व है। कॉन्ट्रैक्टर को जो वर्कआर्डर मिलता है शुरुआत से लेकर आखिर तक छोटे से छोटे काम की एंट्री इसमें दर्ज होती है। मेजरमेंट बुक कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस वजह से कई डिविजनों में काम शुरू नहीं हो पाए।

  • एसीबी जांच में अनियमितताएं उजागर, होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

    एसीबी जांच में अनियमितताएं उजागर, होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

    चंडीगढ़

    होमगार्ड वेलफेयर एवं भर्ती घोटाले की जांच में गृह रक्षी विभाग (होमगार्ड) से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि विभागीय रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर कुछ स्वयंसेवकों (होमगार्ड) का दोबारा नामांकन कराया गया। जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितता की ओर संकेत किया गया है। हालांकि, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के अधिकारी जांच प्रभावित होने का हवाला देते हुए आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार, राज्य मुख्यालय ने अगस्त 2021 में 13 लोगों को दोबारा होमगार्ड के रूप में नामांकित करने की मंजूरी दी थी। बाद में रिकॉर्ड की जांच के दौरान पाया गया कि इनमें से 11 लोगों के नाम फर्जी तरीके से लॉन्ग रोल रजिस्टर में दर्ज किए गए थे। जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन सेंटर कमांडर स्तर पर रिकॉर्ड में फ्लूड लगाकर और बाद में प्रविष्टियां कर हेराफेरी की गई।

    जांच टीम ने 18 और 19 अक्तूबर 2021 को संबंधित कार्यालय पहुंचकर रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की। जांच में पाया गया कि जिन 11 लोगों के नाम दर्ज किए गए थे, उनके व्यक्तिगत नामांकन फॉर्म, सेवा रिकॉर्ड, ड्यूटी कॉल-आउट रजिस्टर, भुगतान प्राप्ति रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध ही नहीं थे। इतना ही नहीं, राज्य मुख्यालय को भेजी गई उनकी सेवा अवधि संबंधी रिपोर्ट भी संदिग्ध पाई गई।

    जांच के बाद पुलिस अधीक्षक ने संबंधित रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेने के साथ राज्य मुख्यालय को इन 11 लोगों की पुनर्नियुक्ति मंजूरी रद्द करने की सिफारिश की थी। इसके अलावा रिकॉर्ड से छेड़छाड़, फर्जी रिपोर्ट भेजने और सरकारी दस्तावेजों में कथित हेराफेरी के आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की भी अनुशंसा की गई है।

    रविवार को दर्ज मिली भर्ती की तारीख
    रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं। कुछ होमगार्ड स्वयंसेवकों की भर्ती की तारीख रविवार के दिन दर्ज मिली, जबकि कुछ की सेवा मुक्ति सरकारी अवकाश के दिन दर्शाई गई है। जांच अधिकारियों ने इसे रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी और सुनियोजित फर्जीवाड़े का संकेत माना है।

    उच्च अधिकारियों तक कब पहुंचेगी जांच की आंच
    एसीबी ने होमगार्ड विभाग के अज्ञात अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। हालांकि अब तक किसी वरिष्ठ अधिकारी को पूछताछ के लिए तलब नहीं किया गया है। शिकायत के अनुसार अनियमितताओं का यह मामला वर्ष 2010 से 2025 के बीच का बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जांच की आंच विभाग के उच्च अधिकारियों तक कब पहुंचेगी और इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होगी।

     

  • सीएम भजनलाल का ऐलान: अपराधियों को नहीं मिलेगा कोई मौका

    सीएम भजनलाल का ऐलान: अपराधियों को नहीं मिलेगा कोई मौका

    जयपुर

     राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सीधे तौर ये कह दिया है कि प्रदेश में अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस रहेगा। यहां अपराधियों को बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा। प्रदेश की कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपराधियों और भ्रष्ट अधिकारियों को बेहद सख्त संदेश दिया है। शनिवार को 'राजस्थान नगर पालिका कर्मचारी फेडरेशन' के अधिवेशन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि प्रदेश में अब न तो अपराध पनपेगा, न भ्रष्टाचारियों को पनाह मिलेगी और न ही कानून तोड़ने वालों को बख्शा जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'राजस्थान में यदि कोई अपराधी पैर पसारेगा, तो वह वापस नहीं जा पाएगा; उसे उसके सही मुकाम (जेल) तक पहुंचाया जाएगा।'

    भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' और बड़ी कार्रवाई
    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कर्मचारियों से पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ जनसेवा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ के मूलमंत्र पर चलते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रही है।

    सीएम बोले: करप्शन में 100 अधिकारी हुए सस्पेंड
    सरकार ने अब तक भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए 103 अधिकारियों को निलंबित (सस्पेंड) किया है। 6 अफसरों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। 11 भ्रष्ट अधिकारियों की आजीवन पेंशन पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही रिश्वतखोरी, ट्रैप, पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति के 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति दी गई है, जबकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत 37 अन्य मामलों में भी कठोर कार्रवाई अमल में लाई गई है।सीएम ने कर्मचारियों को नसीहत दी कि वे भ्रष्ट आचरण के दलदल से पूरी तरह दूर रहें।

    स्वच्छ सर्वेक्षण में 16 वें स्थान की तारीफ की
    नगरीय निकायों की भूमिका की सराहना करते हुए सीएम ने कहा कि पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण में जयपुर ग्रेटर को देश में 16वां स्थान मिला था। लेकिन अब हमें रुकना नहीं है, बल्कि प्रदेश के सभी शहरों को देश के सबसे स्वच्छ और सर्वश्रेष्ठ शहरों की श्रेणी में लाना है। यह लक्ष्य नगरीय निकाय कर्मचारियों के सहयोग के बिना संभव नहीं है, क्योंकि वे जनता और सरकार के बीच की सबसे मजबूत कड़ी हैं।

    किया 4 लाख नौकरियों का वादा
    इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं को संबल देते हुए प्रदेश में चार लाख सरकारी नौकरियां देने के अपनी सरकार के संकल्प को एक बार फिर दोहराया।
    खुशेंद्र तिवारी

  • टिफनी ट्रंप का राजस्थान दौरा: सोनार किला से सम ड्यून्स तक सख्त सुरक्षा के बीच सैर

    टिफनी ट्रंप का राजस्थान दौरा: सोनार किला से सम ड्यून्स तक सख्त सुरक्षा के बीच सैर

     जैसलमेर

    दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर और आगरा में ताज महल का दीदार करने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की छोटी बेटी टिफनी ट्रंप (Tiffany Trump) आज (रविवार) राजपूताना शान का अनुभव करने राजस्थान के जैसलमेर (Jaisalmer) पहुंच गई हैं. करीब 11 बजे जैसलमेर एयरपोर्ट से बाहर निकलते वक्त उनके पति माइकल बलोस (Michael Boulos) ने हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन भी किया है. इस दौरान एयरपोर्ट को भारी पुलिस फोर्स के साथ-साथ एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती भी देखी गई.

    लक्जरी सूर्यागढ़ होटल में ठहरेंगी टिफनी
    सूत्रों के मुताबिक, टिफनी ट्रंप और उनके पति का जैसलमेर के मशहूर और बेहद आलीशान सूर्यागढ़ होटल (Suryagarh Hotel) में रुकने का कार्यक्रम है. अपने दो दिवसीय इस निजी दौरे में टिफनी ट्रंप मरुस्थलीय सौंदर्य और राजस्थानी संस्कृति का करीब से अनुभव करेंगी. उनका संभावित कार्यक्रम के अनुसार, सबसे पहले वे विश्व प्रसिद्ध सोनार किला (Jaisalmer Fort) देखने जाएंगे. उसके बाद नक्काशीदार पटवों की हवेली और ऐतिहासिक गड़ीसर लेक घूमने जाएंगी. शाम के समय वह सम (Sam Sand Dunes) के रेतीले धोरों में मरुस्थलीय सौंदर्य और राजस्थानी लोक संस्कृति का आनंद लेंगी. वह सोमवार को अपना जैसलमेर दौरा पूरा कर यहां से प्रस्थान करेंगी.

    भारत-पाक सीमा का हाई-अलर्ट
    चूंकि जैसलमेर एक संवेदनशील सीमावर्ती जिला (Border District) है और यहां से भारत-पाकिस्तान की सीमा सटी हुई है, इसलिए अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी के दौरे को लेकर सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसके पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. उन्हें स्टेट गेस्ट (State Guest) का दर्जा दिया गया है. खुफिया एजेंसियां और स्थानीय पुलिस लगातार समन्वय कर रही हैं. पर्यटन स्थलों से लेकर उनके होटल तक के रूट पर ट्रैफिक रेगुलेशन और कड़े सुरक्षा घेरे की व्यवस्था की गई है.

    ट्रंप परिवार का जैसलमेर से पुराना नाता
    यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप परिवार का कोई सदस्य मरुधरा की धरती पर कदम रख रहा है. इससे पहले नवंबर 2018 में डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी बेटी इवांका ट्रंप के पति और तत्कालीन व्हाइट हाउस के वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर (Jared Kushner) भी जैसलमेर आ चुके हैं. वह इसी सूर्यागढ़ होटल में एक हाई-प्रोफाइल शादी में शामिल होने पहुंचे थे, तब भी अमेरिका और राजस्थान पुलिस ने मिलकर अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था की थी.
        
    दिल्ली और आगरा में बिताए यादगार पल
    जैसलमेर पहुंचने से पहले टिफनी और माइकल बलोस ने अपनी भारत यात्रा की शुरुआत नई दिल्ली से की थी. शुक्रवार को उन्होंने दिल्ली के स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर (Akshardham Temple) के दर्शन किए और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर मंदिर की भव्यता की तस्वीरें भी साझा कीं. इसके बाद शनिवार को इस जोड़े ने आगरा पहुंचकर ताज महल का दीदार किया और यूनेस्को विश्व धरोहर के सामने तस्वीरें खिंचवाईं.

  • त्योहार पर कुर्बानी और सबूत छिपाने का आरोप, इटखोरी में दो गिरफ्तार; इलाके में तनाव

    त्योहार पर कुर्बानी और सबूत छिपाने का आरोप, इटखोरी में दो गिरफ्तार; इलाके में तनाव

     चतरा

    इटखोरी थाना क्षेत्र के बक्शा डैम में प्रतिबंधित पशु के तीन कटे हुए सिर फेंकने के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज चंद घंटों के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान थाना क्षेत्र के पृथ्वीपुर गांव निवासी मोहम्मद इस्लाम और मोहम्मद इकराम के रूप में हुई है। पुलिस ने जब एक आरोपी के घर पर छापेमारी की तो वहाँ से एक फ्रिज बरामद हुआ। जिसके भीतर भारी मात्रा में प्रतिबंधित मांस छुपाकर रखा गया था।

    पुलिस ने मांस सहित फ्रिज को जब्त कर लिया है। पुलिस के अनुसार पकड़े गए आरोपियों ने कुबूल किया है कि त्योहार के मौके पर प्रतिबंधित पशु की कुर्बानी दी गई थी। कुर्बानी की बात गांव में फैल जाने और पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने साक्ष्य छुपाने के उद्देश्य से कटे हुए सिरों को बक्शा डैम में फेंक दिया था।

    बता दें कि रविवार को बक्शा डैम में प्रतिबंधित पशु के सिर तैरते मिलने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा था।

    घटना से नाराज सैकड़ों ग्रामीणों ने नगवां चौक के पास इटखोरी-चतरा मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। जिससे वाहनों का आवागमन ठप हो गया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए डीएसपी सुनील कुमार सिंह भारी पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे।

    डीएसपी ने आक्रोशित ग्रामीणों को निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया। जिसके बाद ग्रामीण शांत हुए और सड़क से जाम हटाया।

    जाम हटने के तुरंत बाद एक्शन में आई पुलिस ने त्वरित छापेमारी कर दोनों आरोपियों को धर-दबोचा। इस त्वरित गिरफ्तारी के बाद इलाके में तनाव कम हुआ है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।