Category: मध्य प्रदेश

  • राज्य स्तरीय वार्षिक जैव-विविधता पुरस्कार-2025 के लिये प्रविष्टियों के आमंत्रण की अंतिम तिथि 20 अप्रैल

    राज्य स्तरीय वार्षिक जैव-विविधता पुरस्कार-2025 के लिये प्रविष्टियों के आमंत्रण की अंतिम तिथि 20 अप्रैल

    भोपाल. 
    प्रदेश में जैव-विविधता संरक्षण को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा राज्य स्तरीय वार्षिक जैव विविधता पुरस्कार-25 के लिये प्रविष्टियाँ 20 अप्रैल 2026 तक आमंत्रित की गई हैं। विभिन्न श्रेणियों में जैव-विविधता पुरस्कार के लिये जैव-विविधता स्वामित्व रखने वाले वन, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मछली पालन, जल संसाधन विभाग और जैव-विविधता प्रबंधन समिति ग्राम पंचायत/जनपद पंचायत / नगर पंचायत / नगर पालिका/नगर निगम स्तर पर गठित जैव-विविधता प्रबंधन समितियाँ। संस्थागत (अशासकीय), व्यक्तिगत (अशासकीय), व्यक्तिगत (शासकीय) पहुंच एवं लाभ प्रभाजन के अधिकतम अनुबंध पहुंच एवं लाभ प्रभाजन की अधिकतम राशि श्रेष्ठ वनमंडल एवं श्रेष्ठ वनवृत्त के अंतर्गत विशिष्ट कार्य करने वाले अपनी प्रविष्टियाँ जमा कर सकते हैं।

    प्रविष्टियों का निर्धारित प्रारूप एवं अन्य जानकारियॉ बोर्ड की वेबसाईट www.mpforest.gov.in/mpsbb से डाउन लोड करें। जिन संस्था द्वारा राज्य स्तरीय वार्षिक जैव-विविधता पुरस्कार-2024 के लिये प्रविष्टियाँ प्रेषित की गई हैं, वो प्रविष्टि प्रेषित ना करें।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा: दो राज्यों को जोड़ने वाला फोर लेन बायपास होगा सांस्कृतिक पुल

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा: दो राज्यों को जोड़ने वाला फोर लेन बायपास होगा सांस्कृतिक पुल

    दो राज्यों को सांस्कृतिक डोर से जोड़ेगा नया फोर लेन बायपास : मुख्यमंत्री डॉ यादव

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी एवं केन्द्रीय मंत्री गडकरी का जताया आभार

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को दिन-प्रतिदिन नई-नई सौगात देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा रविवार को मध्यप्रदेश (ज़िला निवाड़ी) और उत्तर प्रदेश (ज़िला झाँसी) राज्यों में, झांसी के लिए 15.5 किमी लंबाई के 4-लेन वाले दक्षिणी बाईपास के निर्माण और बंगाय खास से ओरछा तिगेला तक राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और राष्ट्रीय राजमार्ग-39 को जोड़ने वाली लिंक रोड के लिए 631.73 करोड़ रुपए की लागत के साथ स्वीकृति दी गई है। यह बायपास और लिंक रोड दो बड़े प्रदेशों के नागरिकों को एक सांस्कृतिक डोर से हमेशा के लिए जोड़ देगा।

    केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग-27 (पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर), राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर), राष्ट्रीय राजमार्ग-39, राष्ट्रीय राजमार्ग-539, राष्ट्रीय राजमार्ग-552 इन पाँच राजमार्गों के जंक्शन पर स्थित है, जिसके कारण शहर के भीड़भाड़ वाले मुख्य इलाके से होकर गुज़रने वाले ट्रैफिक में भारी बढ़ोतरी होती है। झांसी में एक नया औद्योगिक शहर (BIDA) भी बसाया जा रहा है, जहां भारी माल ढुलाई की ज़रूरत होगी। उन्होंने कहा कि दक्षिणी बाईपास झांसी के आस-पास से गुज़रने वाले शहरों के बीच के ट्रैफिक के लिए एक निर्बाध रास्ता बनाएगा, जिससे शहर के अंदर यात्रा का समय कम होगा और शहर में ट्रैफिक का दबाव घटेगा। इससे प्रायद्वीपीय भारत, मध्य भारत और पूर्वी भारत के बीच, झांसी से होकर गुज़रने वाले पाँच राष्ट्रीय राजमार्गों के रास्ते माल की आवाजाही में लगने वाला समय भी कम होगा। यह बाईपास ओरछा तिगेला पर खत्म होता है, जो UNESCO की संभावित विश्व धरोहर सूची में शामिल है और जहाँ जहाँगीर महल, राम राजा मंदिर और बेतवा वन्यजीव अभयारण्य स्थित हैं। हाईवे तक बेहतर पहुंच से इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और विकास को भी गति मिलेगी।

     

  • उपार्जन व्यवस्था की निगरानी के लिए बनाएं राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    उपार्जन व्यवस्था की निगरानी के लिए बनाएं राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    सरकार हर घड़ी किसानों के साथ, तय वक्त पर प्रारंभ होगी गेहूं खरीदी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    पहले छोटे किसानों का खरीदा जाएगा गेहूं, फिर मध्यम एवं बड़े किसानों से होगी खरीदी
    प्रदेश में बारदाने की कोई कमी नहीं
    केन्द्र एवं जूट कमिश्नर के साथ ही बारदाना प्रदाय एजेंसियों से लगातार सम्पर्क में है राज्य सरकार
    उपार्जन व्यवस्था की निगरानी के लिए बनाएं राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूं उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के किसानों का हर तरह से कल्याण हमारी प्रतिबद्धता है। हमारी सरकार हर घड़ी किसानों के साथ है। प्रदेश में तय वक्त पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराने वाले सभी किसानों का गेहूं खरीदा जायेगा। उपार्जन प्रक्रिया में पहले छोटे किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा। इसके बाद मध्यम एवं बड़े किसानों के गेहूं की खरीदी की जाएगी। स्लॉट बुकिंग वाले सभी किसानों का गेहूं चरणबद्ध रूप से खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बारदाने की कोई कमी नहीं है। सरकार सभी व्यवस्थाएं कर रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में गेहूं उपार्जन कार्य के संबंध में सरकार द्वारा गठित मंत्री समूह के सदस्य एवं कृषक प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है। गेहूं उपार्जन में बारदान की उपलब्धता निरंतर बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में गेहूं खरीदी में किसानों को किसी भी प्रकार से बारदाने की समस्या नहीं आने दी जाएगी। केन्द्र सरकार, जूट कमिश्नर सहित अन्य बारदान प्रदाय एजेंसियों से बारदान आपूर्ति के लिए राज्य सरकार लगातार सम्पर्क बनाए हुए है।

    उपार्जन शुरू होने से पहले कराएं तौल केन्द्रों का निरीक्षण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन व्यवस्था को सरल, सहज और सुविधाजनक बनाया जाये। किसानों को उपार्जन केन्द्र तक आने और गेहूं बेचने में किसी भी तरह की कठिनाई न होने पाये। मुख्यमंत्री ने उपार्जन व्यवस्था पर नियमित रूप से निगरानी के लिए एक राज्य स्तरीय एवं कृषि उपज मंडियों में भी कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन के दृष्टिगत प्रदेश के सभी तौल केंद्रों का 10 अप्रैल से पहले गहन निरीक्षण करा लिया जाए, जिससे किसानों में किसी भी तरह का संशय न रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों के वर्तमान ढांचे में क्रमबद्ध सुधार किया जाये। सभी मंडियों को वैश्विक जरुरतों के मुताबिक अपग्रेड कर इन्हें वर्ल्ड क्लास मंडी की तरह तैयार किया जाये।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन केंद्रों में आने वाले किसानों को सभी प्रकार की बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पीने का पानी, बैठक, छाया, प्रसाधन एवं पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई जाये। किसी को भी किसी भी प्रकार की प्रक्रियागत या व्यवस्थागत असुविधा का सामना न करना पड़े। किसी भी केन्द्र में किसानों/ट्रेक्टर-ट्राली की लंबी-लंबी कतारें न लगें, सभी किसानों का सहजता से गेहूं तुल जाये, ऐसी व्यवस्थाएं की जाएं। जिन किसानों से गेहूं खरीदा जाये, कम से कम समय में उनके खातों में भुगतान कर देने की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएं।

    10 अप्रैल से प्रारंभ हो जाएगी गेहूं खरीदी

    अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल से एवं अन्य सभी संभागों में 15 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं का उपार्जन प्रारंभ होने जा रहा है। उन्होंने बतायाकि जिन संभागों में 10 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू होनी है, उनके लिए आगामी मंगलवार, 7 अप्रैल से पंजीकृत किसानों की स्लॉट बुकिंग प्रारंभ हो जायेगी। शुक्रवार, 10 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि उपार्जन वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन के लिए प्रदेश के 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। गेहूं उपार्जन के लिए इस वर्ष प्रदेश में कुल 3627 उपार्जन केंद्र बनाये गये हैं। बीते उपार्जन वर्ष 2025-26 में 15 लाख 44 हजार 55 किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया था। उन्होंने बताया कि इस उपार्जन वर्ष के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,625 रूपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 40 रूपए प्रति क्विंटल बोनस का लाभ भी इस वर्ष देने जा रही है।

    अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन होना अनुमानित है। इसके लिए 3 लाख 12 हजार गठान बारदानों की आवश्यकता होगी। प्रदेश में गेहूं खरीदी आरंभ करने के लिए आवश्यक बारदान का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। केन्द्र सरकार की ओर से लिमिट भी तय कर दी गई है। राज्य सरकार को केन्द्र से हर जरूरी सहयोग भी मिल रहा है। जूट कमिश्नर कार्यालय सहित अन्य बारदाना प्रदायकर्ताओं से भी बारदान सामग्री प्राप्त की जा रही है। इसके साथ ही गेहूं उपार्जन के लिए गठित मंत्री-मंडलीय समिति के निर्देश पर अतिरिक्त बारदान खरीदने की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है।

    बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत, पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, प्रदेशाध्यक्ष एवं वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल सहित कृषक प्रतिनिधि और खाद्य, सहकारिता एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।

     

  • MP का शराब बाजार प्रभावित: आबकारी विभाग ने निर्यात पर कड़ा प्रतिबंध लगाया

    MP का शराब बाजार प्रभावित: आबकारी विभाग ने निर्यात पर कड़ा प्रतिबंध लगाया

    भोपाल.

    मध्य प्रदेश में बीयर का संकट बढ़ता जा रहा है। बीयर का सीमित स्टॉक होने की वजह से आबकारी विभाग ने अन्य राज्यों में बीयर के निर्यात पर रोक लगा दी है। शराब के प्रीमियम ब्रांड का स्टॉक भी सीमित है। इसके साथ ही प्रदेश में नई शराब दुकानों के संचालन के शुरुआती दिनों में ही सप्लाई और बिलिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    ठेकेदारों का कहना है कि प्रीमियम ब्रांड्स के बिना दुकान चलाना लगभग असंभव है, लेकिन इन कंपनियों के लोकप्रिय ब्रांड्स की बिलिंग ही शुरू नहीं हो पाई है। ठेकेदारों का आरोप है कि आबकारी विभाग समय पर माल उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, जिसके कारण कई दुकानों में शुरुआती दिनों से ही बेचने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद नहीं है। ऐसे में ठेकेदारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दुकान में माल ही नहीं होगा, तो वे करोड़ों रुपये की आबकारी ड्यूटी कैसे जमा करेंगे।

    स्थिति यह है कि आठ से 10 दिन केवल स्टॉक उपलब्ध कराने में ही निकल सकते हैं। ग्रीष्म ऋतु में बीयर सीजन का पीक पीरियड होता है। यदि इस दौरान दुकानों पर बीयर और प्रीमियम ब्रांड्स उपलब्ध नहीं हुए, तो ठेकेदारों को शुरुआती चरण में ही भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक, यही एक बड़ा कारण है कि कई स्थानों पर ठेके उठाने को लेकर उत्साह कम दिखाई दे रहा है। कारोबारियों का कहना है कि सप्लाई, बिलिंग और ब्रांड उपलब्धता जैसे बुनियादी मुद्दे ठेका आवंटन से पहले ही अंतिम रूप से तय कर लिए जाने चाहिए थे।

  • सरकार का बड़ा फैसला: कर्मचारियों के परिजनों को अब 1.25 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता

    सरकार का बड़ा फैसला: कर्मचारियों के परिजनों को अब 1.25 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता

    भोपाल.

    अब तक सेवाकाल के दौरान किसी शासकीय सेवक की असामयिक मृत्यु होने पर उनके परिजनों को मिलने वाली 'अनुग्रह राशि' (Ex-gratia) की अधिकतम सीमा मात्र 50 हजार रुपये थी। बढ़ती महंगाई और आधुनिक दौर की जरूरतों के सामने यह राशि ऊंट के मुंह में जीरा के समान थी। लेकिन अब, मध्यप्रदेश सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए इस सीमा को ढाई गुना बढ़ाकर 1 लाख 25 हजार रुपये कर दिया है।

    वित्त विभाग के नए निर्देशों के अनुसार, अब मृतक कर्मचारी के परिवार को उनके छह माह के वेतन के बराबर राशि दी जाएगी। इसमें 'वेतन पुनरीक्षण नियम 2017' के मानकों को आधार बनाया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब अनुग्रह राशि केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ठोस आर्थिक सहायता होगी।
    आदेश 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी
    यह नया प्रावधान 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होने जा रहा है। यानी इस तारीख या इसके बाद आने वाले सभी दुखद प्रकरणों में पीड़ित परिवारों को सवा लाख रुपये तक की मदद तत्काल मिल सकेगी। यह कदम उन छोटे कर्मचारियों (जैसे चतुर्थ श्रेणी) के लिए जीवनदान जैसा है, जिनके पास बचत के नाम पर बहुत कम संसाधन होते हैं। सवा लाख रुपये की यह राशि शायद किसी की कमी को पूरा न कर सके, लेकिन अंतिम संस्कार, तात्कालिक बिलों और बच्चों की शिक्षा जैसे शुरुआती झटकों को सहने में यह एक मजबूत लाठी का काम जरूर करेगी।

  • कांग्रेस नेता कमलनाथ ने किया दावा, देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं

    कांग्रेस नेता कमलनाथ ने किया दावा, देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं

    भोपाल
     कांग्रेस नेता कमलनाथ के देश में LPG गैस क्राइसिस पर दिए गए बयान के बाद अब BJP ने कांग्रेस और राहुल गांधी के एलपीजी क्राइसिस को लेकर घेरना शुरू कर दिया है। सबसे आगे केंद्रीय मंत्री सिंधिया आए, जिन्होंने कहा कि कमलनाथ ने राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों की पोल खोल दी है, शर्म आना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने X हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है। इसमें उन्होंने लिखा है कि 'अब तो कांग्रेस नेता कमलनाथ जी ने भी स्वयं कह दिया है कि देश में पेट्रोल-डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है' 'झूठ और भ्रम के बलबूते जनता को इतने दिनों तक गुमराह कर रही कांग्रेस को अब शर्म आना चाहिए। अब समय है कि कांग्रेस जनता में डर और विश्वास पैदा कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना बंद कर दे।'

    क्या है मामला, ऐसे समझें
        कमलनाथ ने गैस क्राइसिस पर बयान दिया था
        उन्होंने कहा था, गैस की ऐसी कोई कमी नहीं है
        उनका बयान पार्टी लाइन से इतर आया था
        भाजपा ने तत्काल इसे कांग्रेस लपक लिया
        सिंधिया ने कहा, कांग्रेस जनता को गुमराह कर रही
        कांग्रेस को शर्म आना चाहिए

    कमलनाथ का वीडियो भी शेयर किया है
    मंत्री सिंधिया ने भाजपा मध्य प्रदेश के X की पोस्ट को शेयर किया था, जिसमें पार्टी ने लिखा था कि 'अब तो कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भी राहुल गांधी द्वारा एलपीजी को लेकर फैलाए जा रहे प्रोपेगेंडा की पोल खोल दी' इसमें कमलनाथ का छिंदवाड़ा का वह वीडियो भी लगाया गया था, जिसमें कमलनाथ ने कहा था कि, गैस की कमी नहीं है, सिस्टम में गड़बड़ी है और एक भ्रम फैलाया गया है।

    कमलनाथ ने LPG पर क्या कहा था
    दरअसल बीते रोज कमलनाथ छिंदवाड़ा आए थे। उन्होंने हेलीपेड पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि, 'गैस की कोई कमी नहीं है, यह अव्यवस्था है, लेकिन माहौल बना दिया कि कमी है।' उनके इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। उनका यह बयान पार्टी लाइन से हटकर दिया है। कांग्रेस पार्टी पूरे देश में एलपीजी और पेट्रोलियम क्राइसिस को लेकर MP सहित पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन कर रही है। जबकि कमलनाथ कह रहे हैं कि ऐसी कोई कमी नहीं है।

    BJP ने मौके को तत्काल लपक लिया
    कमलनाथ का 'गैस ऐसी कोई कमी नहीं है' बयान को BJP ने तत्काल पलक लिया और इसके 'कांग्रेस के गैस की क्राइसिस कैंपेन' की हवा निकालने के लिए उपयोग कर रही है। भाजपा इस मौके को कतई छोड़ने वाली नहीं है। MP से लेकर दिल्ली तक भाजपा ने इसको लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

  • सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन की मिसाल, CM यादव ने साझा किया महानाट्य का महत्व

    सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन की मिसाल, CM यादव ने साझा किया महानाट्य का महत्व

    सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन का संदेश देता है महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री मोदी राज्यों में परस्पर सहयोग को बढ़ाने का कर रहे हैं महत्वपूर्ण कार्य
    सुशासन से गढ़ा जा रहा है नया इतिहास
    सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य प्रतिभाओं का मंच, युवा पीढ़ी को सार्थक संदेश
    बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल की धरा को जोड़ा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने : उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी
    वाराणसी में मध्यप्रदेश सरकार का तीन दिवसीय अनूठा आयोजन

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुशासन की उत्कृष्ट परंपरा के नायक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन काल से हम सब परिचित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कर्मस्थली काशी में इस महानाट्य के मंचन के अवसर पर यह कहना प्रासंगिक होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के सुशासन से राष्ट्र को दिए जा रहे योगदान के लिए अभिनंदन के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी (काशी) में शुक्रवार को तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के मंचन पर संबोधित कर रहे थे। समारोह का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज बदलते दौर में 2 राज्यों के मध्य सांस्कृतिक संबंध को प्रगाढ़ करने के लिए यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। दोनों राज्य विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के आशीर्वाद से दोनों राज्यों को अंतर्राज्यीय केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की सौगात मिली है। यह दोनों राज्यों में सिंचाई, कृषि उत्पादन और पेयजल प्रदाय में सहयोग करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। यह प्रधानमंत्री मोदी का सुशासन भी है, जिसके अंतर्गत राज्यों के बीच परस्पर सहयोग को बढ़ाने की दिशा में कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सुशासन के इस काल में सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल में स्थापित सुशासन का स्मरण आना स्वभाविक है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्र के स्वाभिमान के सम्राट विक्रमादित्य के राष्ट्र प्रेम, पराक्रम, न्यायप्रियता, प्रजा वात्सल्य और ज्ञान विज्ञान परम्परा की पुनर्स्थापना के गुणों की जानकारी युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए महानाट्य माध्यम बन रहा है। सम्राट विक्रमादित्य के युग का पुनर्स्मरण करने के लिए महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का पहले नई दिल्ली में भी मंचन हुआ है। इस नाटक में अनेक इंजीनियर, डॉक्टर, वकील और अन्य व्यवसायों से जुड़े प्रतिभाशाली व्यक्ति विभिन्न पात्रों के रूप में मंच पर भूमिका निभाते हैं। इससे प्रतिभाओं को तो मंच मिल ही रहा है, एक कुशल शासक के योगदान से देश के नागरिक भी परिचित हो रहे हैं। इस तरह यह महानाट्य लोकरंजन के साथ भारत के गौरवशाली इतिहास को भी आज जीवंत करने में माध्यम बना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में भाइयों की तीन जोड़ियां प्रसिद्ध हुई हैं। इनमें भगवान श्रीराम और लक्ष्मण, भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के साथ सम्राट विक्रमादित्य और राजा भतृहरि की जोडी शामिल है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने एक करोड़ एक लाख रुपए का सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्रारंभ किया है। एक राष्ट्रीय सम्मान 21 लाख रुपए राशि का और तीन राज्य स्तरीय सम्मान 5-5 लाख रुपए राशि के स्थापित किए गए हैं। वर्ष 2024 में हुए विक्रमोत्सव को सर्वाधिक अवधि वाली धार्मिक- आध्यात्मिक फैस्टिवल का महाद्वीप स्तरीय वॉव अवार्ड भी मिला है। यही नहीं प्रतिष्ठित ईमैक्स ग्लोबल अवार्ड भी विक्रमोत्सव को प्राप्त हुआ है।

    विक्रमादित्य महानाट्य मंचन यादगार क्षण : उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विक्रमादित्य महानाट्य मंचन को यादगार क्षण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के "एक भारत-श्रेष्ठ भारत'' के भाव को साकार करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा विश्वनाथ की इस धरा को बाबा महाकाल की धरा से नाट्य मंचन के माध्यम से जोड़ने का विशिष्ट कार्य किया है। योगी ने भाइयों की जोड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य और राजा भरथरी की जोड़ी का उल्लेख है। महाराजा ने नाथ संप्रदाय में दीक्षा लेकर काशी की भूमि और चुनार के किले में साधना की थी। सम्राट विक्रमादित्य ने ही आज से दो हजार साल पहले अयोध्या नगरी की खोज की थी और महाराज लव के बाद सबसे पहले भगवान राम के मंदिर का निर्माण करवाया था। सम्राट विक्रमादित्य नीति शास्त्र और न्याय के पर्याय थे।

    उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उज्जैन महाकाल की नगरी है और काशी पंचांग की नगरी है दोनों मिलकर नया इतिहास बनाते हुए प्रेम और सहयोग किया परंपरा मजबूती से आगे बढ़ायेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ज्ञान परंपरा को उचित स्थान देकर पूरे विश्व में प्रतिष्ठित किया है। आज योग और आयुर्वेद की पूरी दुनिया में स्वीकार्यता बढ़ी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2024 में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन किया गया। इसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने मां गंगा में स्नान किया।

    भेंट की गई वैदिक घड़ी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ को वैदिक घड़ी भेंट की। यह घड़ी बाबा विश्वनाथ के मंदिर में वैदिक काल को वर्तमान में जनता के बीच पुनर्स्थापित करने में सहायक होगी। इस घड़ी में प्राचीन वैदिक परंपरा तथा आधुनिक ज्ञान विज्ञान का मिश्रण करके कल की अचूक गणना का समावेश किया गया है।

    समारोह में उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल, एमएसएमई मंत्री राजेश सचान, पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल ,महापौर अशोक तिवारी जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेश नाथ जी, विधायक, स्थानीय जन-प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

    वाराणसी की पावन धरा पर महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का हुआ ऐतिहासिक मंचन

    महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के भव्य मंचन और ओजस्वी प्रस्तुति से दर्शकों को हजारों वर्ष पुराने स्वर्णिम युग की यात्रा कराई। महानाट्य का आरंभ सम्राट विक्रमादित्य के उस संकल्प से हुआ, जब वे विदेशी आक्रांताओं के चंगुल से मातृ भूमि को मुक्त कराने का प्रण लेते हैं। रंगमंच पर कलाकारों के सजीव अभिनय ने उस कालखंड को जीवंत कर दिया, जब शकों के आतंक से त्रस्त प्रजा की रक्षा के लिए एक महानायक का उदय हुआ था। विशाल और भव्य सेट, ऊंचे दुर्ग और उस दौर के राजसी वैभव को दर्शाते दृश्यों ने दर्शकों को से बांधे रखा। प्रकाश संयोजन और संगीत की स्वर लहरियों ने हर दृश्य को इतना प्रभावशाली बना दिया कि युद्ध के दृश्यों में जहाँ वीरता का सजीव आभास हुआ, वहीं सम्राट की न्यायप्रियता के प्रसंगों ने दर्शकों को गौरव की भावना से भर दिया।

    महानाट्य की सबसे बड़ी विशेषता इसका यथार्थवादी चित्रण था, जिसमें मदमस्त हाथियों, सरपट दौड़ते घोड़ों और ऊंटों के काफिलों के प्रयोग ने युद्ध के दृश्यों और राजसी वैभव को अभूतपूर्व भव्यता प्रदान की। हाथियों की चिंघाड़ और घोड़ो की टापों ने मंच पर रणभूमि का साक्षात दृश्य उपस्थित कर दिया, जिससे दर्शक रोमांचित हो उठे। लगभग 400 से अधिक कलाकारों ने आधुनिक लाइट-एंड-साउंड तकनीक के साथ सम्राट की न्यायप्रियता, अदम्य शौर्य और विक्रम संवत की स्थापना के प्रसंगों को बड़े प्रभावशाली रूप प्रस्तुत किया। मंच पर निर्मित ऊंचे दुर्ग और राजप्रासाद के सेट ने इतिहास को जीवंत कर दिया।

    महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व के उन अनछुए पहलुओं को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया, जो उन्हें एक साधारण राजा से ‘चक्रवर्ती सम्राट’ बनाते हैं। वह दृश्य अत्यंत ह्रदय स्पर्शी था जब सम्राट अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए रात्रि के अंधकार में वेश बदलकर निकलते हैं। उनके द्वारा स्थापित 'विक्रम संवत' की प्रासंगिकता और भारतीय काल-गणना के महत्व को जिस सरल और साहित्यिक भाषा में संवादों के माध्यम से पिरोया गया, वह सराहनीय था। कलाकारों के संवादों में वह ओज और स्पष्टता थी, जिसने इतिहास को मंच पर साक्षात कर दिया। सम्राट का न्याय और 'सिंहासन बत्तीसी' के प्रसंगों ने यह संदेश दिया कि नेतृत्व केवल सत्ता का भोग नहीं, बल्कि त्याग और न्याय की वेदी पर खुद को समर्पित करना है।

    तीन दिवसीय महानाट्य की पहली गरिमामयी शाम में जनता और पर्यटक इस कदर उमड़े कि कार्यक्रम स्थल छोटा प्रतीत होने लगा नाटक के चरमोत्कर्ष पर पहुंचतें ही "जय महाकाल" और "सम्राट विक्रमादित्य" के जयकारों से आकाश गुंजायमान हो गया। यह महानाट्य केवल मंचन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ। अंतिम दृश्य में जब सम्राट का राज्याभिषेक हुआ और पुष्प वर्षा हुई, तो हर नागरिक का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया।

    कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भी देर तक दर्शक उस जादुई वातावरण के प्रभाव में रहे। महानाट्य के सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में भव्यता के साथ प्रस्तुत किया जाए, तो वह आज भी जनमानस को गौरवान्वित करता है। यह महानाट्य आने वाले समय में एक सांस्कृतिक मील का पत्थर साबित होगा।

    वाराणसी में तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के विशेष आकर्षण

    •     समारोह स्थल पर म.प्र. संस्कृति और पर्यटन विभाग द्वारा भव्य चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी में ऋषियों वैदिक ज्ञान तथा सांस्कृतिक गौरव को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
    •     महानाट्य में 200 से अधिक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्य मंच से दर्शकों के बीच जाकर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन का सजीव मंचन अत्यंत आकर्षक बना हुआ है।
    •     महानाट्य में तीन भव्य मंच बनाए गए हैं, जिनमें से एक मंच पर उज्जैन के महाकाल मंदिर की प्रतिकृति प्रदर्शित की गई, जो विशेष आकर्षण का केन्द्र बनी।
    •     महानाट्य में 18 घोड़े, दो रथ, चार ऊंट एक पालकी और एक हाथी के साथ जीवंत दृश्य से विक्रमादित्य का गौरव साकार हो रहा है।
    •     महानाट्य में आधुनिक सूचना संचार तकनीक का उपयोग कर युद्ध के दृश्य आतिशबाजी और प्राचीन परंपरा को अद्भुत ढंग से संजीव किया गया है।
    •     महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से लेकर राजतिलक तक की गाथा विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महाकाव्य कथा को प्रदर्शित किया जा रहा है।

     

  • आयुक्त भोंडवे ने दिया आदेश: विभागीय समन्वय और समयबद्ध योजना के साथ कार्य करें

    आयुक्त भोंडवे ने दिया आदेश: विभागीय समन्वय और समयबद्ध योजना के साथ कार्य करें

    विभागीय समन्वय और समयबद्ध कार्ययोजना के साथ कार्य करें : आयुक्त भोंडवे

    बेतवा नदी के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए में उच्च स्तरीय बैठक हुई

    भोपाल

    बेतवा नदी के पावन जल को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाए रखने के पुनीत उद्देश्य से गुरुवार को पालिका भवन में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य ध्येय नदी के पारिस्थितिक तंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार के प्रयासों को सूत्रबद्ध करना था।

    विभागीय समन्वय से सिद्ध होगा संकल्प

    नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि बेतवा का पुनर्जीवन केवल एक प्रशासनिक लक्ष्य नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है। उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि नदी के संरक्षण के लिये एक समेकित कार्ययोजना तैयार की जाए, जिसमें जल संसाधन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका स्पष्ट और समन्वित हो। आयुक्त भोंडवे ने इस बात पर विशेष बल दिया कि योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर दिखाई देना चाहिए, जिसके लिए वे स्वयं समय-समय पर कार्यों की समीक्षा करेंगे।

    राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन का सहयोग

    बैठक जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के सहयोग से आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के कार्यकारी निदेशक (परियोजना) बृजेन्द्र स्वरूप विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने नदी संरक्षण के विविध तकनीकी आयामों और वैश्विक मानकों पर प्रकाश डालते हुए केंद्र की ओर से हर संभव तकनीकी और वित्तीय सहयोग का आश्वासन दिया।

    प्रदूषण मुक्ति और जल संवर्धन पर गहन विमर्श

    बेतवा नदी में मिल रहे अपशिष्टों को रोकने के लिए आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की स्थापना, जल भराव क्षेत्रों का संरक्षण और तटवर्ती क्षेत्रों में वृक्षारोपण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चिंतन-मनन किया गया। आयुक्त भोंडवे ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नगरीय निकायों को और अधिक उत्तरदायी बनाया जाएगा।

    बैठक में जल संसाधन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन विभाग और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंधित नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों उपस्थित रहें।

     

  • एमपी में कर्मचारियों को 3% DA बढ़ाकर राहत, एरियर 6 किस्तों में मिलेगा, मई से नई सैलरी शुरू

    एमपी में कर्मचारियों को 3% DA बढ़ाकर राहत, एरियर 6 किस्तों में मिलेगा, मई से नई सैलरी शुरू

    भोपाल

     अप्रैल की शुरुआत मध्य प्रदेश के 12 लाख कर्मचारियों के लिए खुशखबरी लेकर आई है। प्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 3 फीसदी महंगाई भत्ता और राहत भत्ता बढ़ाने को लेकर आदेश जारी कर दिया है। आगे अब एरियर 6 किस्तों में मिलेगा, 4200 रुपए तक सैलरी में बढ़ोतरी होगी, बढ़ी हुई राशि अप्रेल की सैलरी में जोड़कर मई में दी जाएगी।

    सरकार ने पेंशनरों को भी बड़ी सौगात दी है, उनकी मंहगाई राहत 58% और 257% तक बढ़ गई है। जारी आदेश के अनुसार सातवें वेतनमान के अंतर्गत कर्मचारियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता अब दिनांक एक जुलाई 2025 से (भुगतान माह अगस्त 2025 से) 55 प्रतिशत से 3 प्रतिशत बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दिया गया है।

    महंगाई भत्ता अब 58 प्रतिशत होगा
    वित्त विभाग के परिपत्र के अनुसार यह बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता 1 जुलाई 2025 से कुल 58 प्रतिशत देय माना जाएगा। सरकार द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि 3 प्रतिशत की इस वृद्धि के बाद कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता अब 58 प्रतिशत हो जाएगा। यह निर्णय राज्य के लाखों कर्मचारियों के लिए आर्थिक राहत लेकर आएगा।

    6 किश्तों में होगा एरियर का भुगतान
    वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों को महंगाई भत्ते में हुई वृद्धि का लाभ एक जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 तक की एरियर राशि का भुगतान 6 समान किश्तों में दिया जाएगा। इन किश्तों का भुगतान मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 में किया जाएगा।

    सेवानिवृत्त और दिवंगत कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान
    वित्त विभाग ने जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी 1 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच सेवानिवृत्त हो चुके हैं या जिनका निधन हो गया है, उन्हें अथवा उनके नामांकित सदस्य को एरियर की पूरी राशि एकमुश्त प्रदान की जाएगी।

    भुगतान संबंधी अन्य निर्देश
    महंगाई भत्ते की गणना में 50 पैसे या उससे अधिक राशि को अगले पूर्ण रुपए में जोड़ा जाएगा। जबकि 50 पैसे से कम राशि को छोड़ दिया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि महंगाई भत्ते का कोई भी हिस्सा किसी अन्य प्रयोजन के लिए वेतन का भाग नहीं माना जाएगा। सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि महंगाई भत्ते के भुगतान पर होने वाला व्यय संबंधित विभाग के स्वीकृत बजट प्रावधान के भीतर ही सुनिश्चित किया जाए।

  • 5 अप्रैल तक MP में मौसम का खतरनाक दौर: भोपाल-इंदौर सहित 30 जिलों में बारिश और निमाड़ में ओले गिरने की संभावना

    5 अप्रैल तक MP में मौसम का खतरनाक दौर: भोपाल-इंदौर सहित 30 जिलों में बारिश और निमाड़ में ओले गिरने की संभावना

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश में मौसम ने करवट लेकर राहत और आफत दोनों का माहौल बना दिया है। प्रदेश में सक्रिय मजबूत वेदर सिस्टम के चलते आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का सिलसिला जारी है, जो 5 अप्रैल तक थमने के आसार नहीं हैं। गुरुवार को राजधानी भोपाल, इंदौर समेत करीब 30 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि निमाड़ क्षेत्र के धार, बड़वानी और झाबुआ में ओले गिरने की संभावना जताई गई है। पिछले 72 घंटों से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश ने मौसम को अस्थिर बनाए रखा है। बुधवार को भी आधे प्रदेश में बादल, बारिश और आंधी का असर देखने को मिला।

    अगले 24 घंटे के दौरान जिन जिलों में बारिश हो सकती है, उनमें ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, रतलाम, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, बड़वानी, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, देवास, शाजापुर शामिल हैं।

    50Km/प्रतिघंटा से चलेगी आंधी
    मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को छिंदवाड़ा, सिवनी और पांढुर्णा में तेज आंधी चलेगी। इसकी रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रह सकती है। बाकी जिलों में 30 से 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चलेगी।

    इससे पहले बुधवार को भोपाल में गरज-चमक के साथ बारिश हुई। सीहोर में आंधी-बारिश के साथ ओले गिरे। इंदौर, देवास, उज्जैन, खंडवा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिवनी, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, रायसेन, विदिशा, रतलाम, मंदसौर, खरगोन, बड़वानी, शहडोल, शाजापुर और बालाघाट समेत कई जिलों में मौसम बदला रहा।

    तेज हवाओं का भी खतरा
    मौसम विभाग के अनुसार छिंदवाड़ा, सिवनी और पांढुर्णा में आंधी की रफ्तार 40 से 50 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। अन्य जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटा की गति से हवाएं चलेंगी, जिससे फसलों और कमजोर ढांचों को नुकसान की आशंका है।

    बारिश के साथ गर्मी भी बरकरार
    अजीब मौसम के बीच गर्मी का असर भी बना हुआ है। नर्मदापुरम में तापमान 40 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि रतलाम, मंडला, खजुराहो, रायसेन, दमोह और सागर में भी पारा 38-39 डिग्री के बीच रहा। बड़े शहरों में जबलपुर 38.4°C, भोपाल 37.4°C, इंदौर 36.5°C, ग्वालियर 36.1°C और उज्जैन 35.6°C दर्ज किया गया।

    क्यों बदल रहा मौसम?
    प्रदेश में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन सक्रिय है, वहीं उत्तर-पश्चिमी हिस्से में भी दो सिस्टम काम कर रहे हैं। 7 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी एक्टिव होगा, जिससे 10 अप्रैल तक मौसम ऐसा ही बना रह सकता है। अप्रैल के दूसरे हफ्ते से सिस्टम कमजोर पड़ते ही तेज गर्मी का दौर शुरू होगा। महीने के आखिरी तक ग्वालियर, धार, खरगोन और बड़वानी जैसे जिलों में तापमान 44-45 डिग्री तक पहुंच सकता है।