Category: लाइफ स्टाइल

  • अल्जाइमर से जंग में नई उम्मीद, यह ब्लड टेस्ट पहले ही कर देगा बीमारी का खुलासा

    अल्जाइमर से जंग में नई उम्मीद, यह ब्लड टेस्ट पहले ही कर देगा बीमारी का खुलासा

    अल्जाइमर ऐसा मानसिक बीमारी है, जो धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने की क्षमता और दैनिक कार्यों को कम कर देती है। यह 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को प्रभावित करता है, जिसमें मस्तिष्क में प्रोटीन के असामान्य जमाव (प्लाक और टेंगल्स) के कारण कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं।

    लक्षण दिखने से पहले चल सकता है बीमारी का पता
    अल्जाइमर रोग के शुरुआती निदान के लिए रक्त प्लाज्मा में विशिष्ट प्रोटीनों के संरचनात्मक और मात्रात्मक परिवर्तन महत्वपूर्ण संकेत है। इनमें शामिल हैं- पूरक 4ए और फाइब्रिनोजेन वाइ का बढ़ना, जबकि एपोलिपोप्रोटीन ए-1, ए- 2-एचएस-ग्लाइकोप्रोटीन और अफामिन में कमी होना, जो मस्तिष्क में सूजन और न्यूरोडीजेनेरेशन को दर्शाते हैं। ये बदलाव लक्षणों के प्रकट होने से वर्षों पहले न्यूरोनल क्षति और सूजन का संकेत दे सकते हैं।

    नए प्रकार के ब्लड सैंपल जो अमीनो एसिड के मात्रा के बजाय उनके मोड़ने का विश्लेषण करता है, अरंभिक संकेतों का पता लगाने में सक्षम हो सकता है। 500 से अधिक व्यक्तियों के रक्त प्लाज्मा नमूनों के विश्लेषण से पता चला है कि तीन प्रोटीनों में संरचनात्मक भिन्नताएं, एक जो इम्यून सिग्नलिंग में शामिल है, दूसरा प्रोटीन मोड़ने में और तीसरा जो रक्त प्रवाह में वसा का परिवहन करता है, अल्जाइमर स्थिति से मजबूत रूप से जुड़ी हुई हैं, जैसा कि नेचर एजिंग पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों में बताया गया है।

    अल्जाइमर का पता लगाने का सटीक तरीका
    शोधकर्ताओं, जिनमें अमेरिका के द स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के विज्ञानी भी शामिल हैं, ने कहा कि प्लाज्मा प्रोटीनों की संरचनात्मक भिन्नताएं संज्ञानात्मक रूप से सामान्य व्यक्तियों और अल्जाइमर तथा हल्के संज्ञानात्मक हानि वाले व्यक्तियों के बीच सटीक अंतर करने में मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि यह विधि अंततः प्रारंभिक निदान और उपचार की दे सकती है।

    अल्जाइमर रोग का वर्तमान में निदान अमाइलाइड पट्टियों और टाऊ टंगल्स को मापकर किया जाता है, जो मस्तिष्क में अमाइलाइड और टाऊ प्रोटीनों के संचय के कारण बनते हैं, रक्त या रीढ़ की तरलता में। हालांकि, शोधकर्ताओं ने कहा कि न्यूरोडीजेनेरेटिव स्थिति को प्रोटियोस्टैसिस की व्यापक विफलता शामिल होने की आशंका बढ़ती जा रही है, जो प्रोटीनों को सही तरीके से मोड़ने और क्षतिग्रस्त प्रोटीनों को हटाने के लिए जिम्मेदार प्रणाली है।

    प्रोटीन संरचना में बदलावों के कारण कई न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग  
    यह प्रणाली उम्र बढ़ने के साथ कम प्रभावी होती जाती है, जिसके कारण प्रोटीनों के निर्माण या पुनर्गठन के दौरान गलत तरीके से मोड़ने की संभावना बढ़ जाती है। द स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर व वरिष्ठ लेखक जाच येट्स ने कहा कि कई न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग प्रोटीन संरचना में परिवर्तनों द्वारा संचालित होते हैं। सवाल यह था कि क्या विशिष्ट प्रोटीनों में संरचनात्मक परिवर्तन हैं, जो भविष्यवाणी के मार्कर के रूप में उपयोगी हो सकते हैं?

    शोधकर्ताओं ने प्रस्तावित किया कि यदि मस्तिष्क में प्रोटियोस्टैसिस बाधित होती है, तो रक्त में प्रवाहित प्रोटीनों में समान संरचनात्मक परिवर्तन दिखाई दे सकते हैं। प्रतिभागियों के प्लाज्मा नमूनों को तीन समूहों में विभाजित किया गया संज्ञानात्मक रूप से वयस्क, हल्के संज्ञानात्मक हानि वाले व्यक्ति और अल्जाइमर से निदान किए गए रोगी ।

    तीन प्रोटीनों के संरचनात्मक परिवर्तन रोग के साथ संबंध
    विश्लेषण ने यह निर्धारित किया कि तीन-आयामी अमीनो एसिड श्रृंखला में कुछ विशिष्ट क्षेत्रों की कितनी मात्रा उजागर या दबी हुई थी, जो उनकी संरचना में परिवर्तनों को दर्शाती है। मशीन लर्निंग, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एक रूप है का उपयोग रोग के चरण से जुड़े पैटर्न की पहचान के लिए किया गया। जैसे-जैसे अल्जाइमर रोग बढ़ा, विशिष्ट रक्त प्रोटीनों की संरचना कम "खुली" होती गई, जिसमें तीन प्रोटीनों के संरचनात्मक परिवर्तन रोग के साथ सबसे मजबूत संबंध दिखाते हैं।

     

  • स्क्रीन टाइम भी बढ़ाता है जोखिम! न्यूरोलॉजिस्ट से समझें मिर्गी के 6 ट्रिगर

    स्क्रीन टाइम भी बढ़ाता है जोखिम! न्यूरोलॉजिस्ट से समझें मिर्गी के 6 ट्रिगर

    एपिलेप्सी, जिसे मिर्गी भी कहा जाता है, रोजमर्रा के कुछ फैक्टर्स के कारण भी ट्रिगर हो सकता है। इसलिए इन ट्रिगर्स को मैनेज करना काफी जरूरी है।

    इस बारे में न्यूरोलॉजी बताते हैं कि ये ट्रिगर्स हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य फैक्टर्स ऐसे हैं, जो बार-बार देखने को मिलते हैं। इन ट्रिगर्स को समझना मिर्गी के दौरों को कम करने के लिए काफी जरूरी हैं।

    नींद की कमी
    नींद की कमी एपिलेप्टिक सीजर के सबसे अहम ट्रिगर्स में से एक है। अधूरी या सोने की अनियमित आदतें दिमाग की एक्टिविटीज को अस्थिर कर सकती है, जिससे सीजर थ्रेशोल्ड यानी दौरे सहने की क्षमता कम हो जाती है। कुछ व्यक्तियों में केवल एक रात की खराब नींद भी दौरे की संभावना को काफी हद तक बढ़ा सकती है।

    मानसिक और शारीरिक तनाव
    ज्यादा चिंता, अचानक भावनात्मक बदलाव या लंबे समय तक बना रहने वाला मानसिक तनाव दिमाग के न्यूरोकेमिकल बैलेंस को बिगाड़ सकता है। इसी तरह, ज्यादा शारीरिक थकावट भी शरीर पर वैसा ही असर डालती है, जिससे दौरे पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है।

    दवाओं में अनियमितता
    मिर्गी के दौरों को रोकने का सबसे असरदार तरीका दवाएं हैं, लेकिन इन्हें छोड़ना या समय पर न लेना एक बड़ा ट्रिगर बन जाता है। एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं ब्लड फ्लो में एक स्थिर स्तर बनाए रखकर काम करती हैं। अगर खुराक छूट जाती है, तो उसका असर कम हो जाता है और दौरे पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।

    पर्यावरणीय और विजुअल फैक्टर्स
    कुछ मरीजों में चमकती रोशनी या कुछ खास विजुअल पैटर्न, जैसे- टीवी या गेमिंग स्क्रीन दौरे को ट्रिगर कर सकते हैं। इसे फोटोसेंसिटिविटी कहा जाता है। बिना ब्रेक के लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहना इस जोखिम को और ज्यादा बढ़ा देता है।

    खान-पान और लाइफस्टाइल
    अक्सर लोग खान-पान से जुड़ी आदतों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ये भी मिर्गी का दौरा ट्रिगर करने में अहम भूमिका निभाती हैं। खाना स्किप करना, शरीर में पानी की कमी होना, ज्यादा मात्रा में चाय-कॉफी पीना या अल्कोहल के कारण एपिलेप्टिक सीजर का खतरा बढ़ा देती हैं।

    हार्मोनल बदलाव और बीमारियां
    महिलाओं में हार्मोनल उतार-चढ़ाव, खासतौर से मेंसुरल साइकिल के दौरान, दौरों के पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं। इसे कैटामेनियल एपिलेप्सी कहा जाता है। इसके अलावा, बुखार या किसी अन्य बीमारी के दौरान शरीर का स्ट्रेस रिस्पॉन्स भी मिर्गी ट्रिगर कर सकता है।

     

  • बेहतर सेहत का राज, सही पोषण की 7 जरूरी आदतें

    बेहतर सेहत का राज, सही पोषण की 7 जरूरी आदतें

    हम क्या खाते हैं और कितना पानी पीते हैं, यह तय करता है कि हम कितने फिट और स्वस्थ रहेंगे। अच्छी सेहत के लिए खान-पान में पोषण का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। जानते हैं कुछ बातें, जो कर सकती हैं इसमें आपकी मदद…

    नाश्ता जरूर करें
    खुद को यह बताएं कि सुबह का नाश्ता अच्छी सेहत के साथ-साथ शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए जरूरी है। टोंड दूध के साथ ओट्स लें। उच्च फाइबरयुक्त फल और एक चुटकी दालचीनी खाएं। इससे रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। आप चाहें तो मल्टीग्रेन ब्रेड और कुछ अंडे, हल्के तले हुए मशरूम और हरी पत्तेदार सब्जियां भी खा सकते हैं।

    ज्यादा चाय-कॉफी ठीक नहीं
    चाय और कॉफी की मात्रा का ध्यान देना बहुत जरूरी है। ग्रीन टी भी अधिक न पिएं। पांच कप से अधिक ग्रीन टी लेना शरीर में पानी की कमी पैदा करेगा। अगर आप सिर्फ दूध और चीनी वाली चाय पीते हैं तो यह तय है कि आप सीमा से अधिक चीनी डाइट में ले रहे हैं।

    खूब खाएं हरी पत्तेदार सब्जियां
    यह ध्यान रखें कि हररोज कितनी मात्रा में हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन कर रहे हैं। पालक और मेथी में फोलेट प्रचुरता में होते हैं। इस विटामिन से शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से बनती हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें कैलरी बहुत कम होती है। तीनों समय हरी सब्जियों को भोजन में शामिल करें।

    पानी है अनमोल
    हर आधे घंटे में पानी पिएं। पानी शरीर के पोषक तत्वों को भीतरी अंगों और ऊतकों तक ले जाता है। यह ध्यान रखें कि जूस और अन्य ड्रिंक्स पानी की बराबरी नहीं कर सकते।

    नींद का रखें ध्यान
    पोषक तत्व नींद पर भी असर डालते हैं। सोने से पहले कैफीन, चॉकलेट, अधिक चिकनाई वाली चीजें न खाएं। ये चीजें आंतों को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए सोने से पहले अधिक तला हुआ खाना पित्त बनाता है और पाचन प्रक्रिया को धीमा करता है।

    हर रोज व्यायाम करें
    अपने वर्कआउट में हृदय के लिए लाभकारी व्यायाम करें। शरीर को मजबूत और लचीला बनाए रखने वाले व्यायामों को शामिल करें।

    हेल्दी स्नेक्स
    हल्के-फुल्के नाश्ते के लिए स्वस्थ तरीके आजमाएं। इससे भूख नियंत्रित रहती है। सेब, अनार के दाने और बादाम का सलाद खाएं। शाम के समय गाजर और खीरे का सलाद खाएं।

     

  • नमी बनाए रखेगी खूबसूरती, हर दिन दिखेंगी ग्लोइंग

    नमी बनाए रखेगी खूबसूरती, हर दिन दिखेंगी ग्लोइंग

    सुन्दर व आकर्षक त्वचा पाने के लिए कई तरह के उपाय आजमाए जाते हैं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता। सिर्फ कॉस्मेटिक्स के बल पर मनचाही खूबसूरती हासिल नहीं की जा सकती। खूबसूरत दिखना है तो त्वचा को भीतर से चाहिए नमी। पानी क्यों जरूरी है आपकी खूबसूरती के लिए….

    हम खूबसूरत त्वचा पाने के लिए क्या कुछ नहीं करते! टीवी पर आने वाले विज्ञापनों को देखकर कभी कोई क्रीम लगाते हैं तो कभी किसी खास फेसवॉश पर जोर देते हैं। इस दौरान आस-पड़ोस के लोगों द्वारा बताए गए नुस्खे भी बड़े महत्वपूर्ण लगते हैं। पर नतीजा जीरो ही आता है। पता है ऐसा क्यों? क्योंकि खूबसूरती सिर्फ बाहरी लेप लगाने से नहीं आती। इसके लिए हमारा खानपान भी बेहद मायने रखता है। बात अगर सुंदर त्वचा की हो रही है तो यहां यह बात भी मायने रखती है कि आप दिन भर में कितना पानी पीती हैं।

    डॉक्टरों की रिपोर्ट भी यही कहती है। लेडी हार्डिंग कॉलेज की डॉक्टर मोनिका पुरी के अनुसार त्वचा में निखार सिर्फ ब्यूटी प्रोडक्ट से नहीं आता, बल्कि इसके लिए पानी सबसे महत्वपूर्ण है। त्वचा जब तक हाईड्रेटेड नहीं होगी, उसमें चमक आना नामुमकिन है। हालांकि डॉ. मोनिका यह भी कहती हैं कि त्वचा को हाईड्रेटेड रखना सिर्फ त्वचा की सेहत के लिए ही नहीं, बल्कि हमारे शरीर की सेहत के लिए भी जरूरी है। हमारा शरीर 70 फीसदी पानी से बना हुआ है। इसलिए यह और भी जरूरी हो जाता है कि हम दिन में खूब सारा पानी पिएं, ताकि शरीर के भीतर पानी का स्तर बना रहे। त्वचा का महत्व इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि त्वचा पसीने के रूप में हमारे शरीर से विषाक्त बाहर निकालता है और यह तभी संभव है, जब त्वचा में भरपूर नमी होगी।

    खाने में करें बदलाव…
    चमकदार त्वचा चाहिए तो खाने-पीने के मामले में भी आपको थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। अंदाजा लगाएं तो शरीर में जाने वाले 20 फीसदी पानी का स्रोत हमारा खाना ही होता है, जिसमें फल और सब्जियां शामिल हैं। इसलिए अगर आप खूब सारा पानी नहीं पी सकतीं तो ऐसे फल या सब्जी खाएं, जिनमें 90 फीसदी पानी होता है, जैसे खीरा। खीरे में 96.6 फीसदी पानी होता है। टमाटर में 95 प्रतिशत पानी होता है। ऐसे ही शिमला मिर्च, गोभी, तरबूज, स्ट्रॉबेरी, ब्रोकली, गाजर आदि को ज्यादा-से-ज्यादा मात्रा में अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। इन सब में 90 फीसदी से ज्यादा पानी होता है।

    इनसे बनाएं दूरी…
    -सिगरेट, शराब, बीड़ी, गुटखा आदि से त्वचा को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है। जिस चीज में निकोटीन होगी, उससे आपकी त्वचा के हाईड्रेशन को खतरा है। कई बार आपने सुना होगा कि चाय ज्यादा पीने से रंग काला हो जाता है। यह मिथक है, पर इस बात में थोड़ी सच्चाई भी है। चाय में भी निकोटीन होती है। इसलिए आप चाय और कॉफी पर ज्यादा जोर न दें।
    -बाहर का तला-भुना, फास्ट फूड आदि पर अपनी निर्भरता कम करें। इससे हमारा पूरा सिस्टम प्रभावित होता है, त्वचा भी इससे अछूती नहीं है।
    -त्वचा काली हो, गोरी हो या सांवली, अगर सेहतमंद नहीं है तो कोई भी ब्यूटी प्रोडक्ट लगाकर वह खूबसूरत व आकर्षक नहीं बन सकती। इसलिए खूब पानी पिएं। सेहतमंद खाना खाएं और अपनी हाइजीन का ध्यान रखें।

    हाईड्रेशन की खातिर देखभाल जरूरी….
    कभी-कभी चीजें बहुत सरल होती हैं, लेकिन हम उनसे इतने डरे होते हैं कि उन समस्याओं में खुद को बेहद उलझा हुआ महसूस करते हैं। त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी कुछ ऐसी ही होती हैं। त्वचा को हाईड्रेटेड रखने के लिए सबसे पहले यह जरूरी है कि आप त्वचा को साफ पानी से धोती रहें और धोने के तुरंत बाद चेहरा पोछें नहीं। त्वचा को कुछ देर पानी के साथ छोड़ दें और कुछ देर के बाद पोछ लें। इसके अलावा रात को सोने से पहले चेहरे को अच्छी तरह धोना न भूलें। घर में अगर मलाई और बेसन है तो दोनों को मिलाकर चेहरे पर लगाएं। कुछ देर बाद उसके सूखने से पहले हल्के हाथ से रगड़ते हुए उसे हटाएं। यह पूरे दिन की गंदगी निकाल बाहर करेगा। बाजार में आने वाले फेसवॉश को इस्तेमाल करने से अच्छा है कि आप घर में ही एक लेप बनाकर रख लें। 100 एमएल रोज वाटर, 90 एमएल वेजिटेबल ग्लिसरीन, 90 एमएल एलोवेरा, किसी एसेंशियल ऑयल की 8 बूंदें और रोज एसेंशियल ऑयल को एक बाउल में डालकर अच्छी तरह से मिला लें। इस मिश्रण को एक कांच की बोतल में रख लें और जब भी इस्तेमाल करें, पहले बोतल को अच्छी तरह हिला लें। इस लेप से चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें और फिर साफ पानी से धो लें।

    ना नहाएं ज्यादा देर…
    अगर आपको गुनगुने पानी से नहाने की आदत है तो दस मिनट से ज्यादा न नहाएं। गर्म पानी त्वचा की नमी चुरा लेता है। यही नहीं, त्वचा से निकलने वाले प्राकृतिक तेल, जो त्वचा के लिए मॉइस्चराइजर का काम करते हैं, उन्हें भी खत्म कर देता है। ठंडे पानी से ही नहाएं। ठंड के मौसम में भी ज्याद गर्म पानी से न नहाएं।

    10 नियम हर दिन त्वचा को ताजा रखने के…
    -रोजाना दिन में दो से ढाई लीटर पानी जरूर पिएं। ज्यादा काम करने से भी पानी की कमी हो जाती है। इसलिए जरूरी है कि आप शरीर की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त पानी पिएं।
    -पूरा दिन पानी पीती रहें, फिर चाहे आपको प्यास लगी हो या नहीं। अगर प्यास नहीं लग रही है तो इसका मतलब यह हुआ कि डीहाइड्रेशन की शुरुआत हो चुकी है।
    -जो भी ड्रिंक पसंद है, उसे साथ लेकर चलें। इससे ये होगा कि आप थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ लिक्विड लेती रहेंगी।
    -आप हाईड्रेटेड रहने के लिए पानी के अलावा हर्बल टी, सॉफ्ट ड्रिंक्स, जूस, दूध आदि भी पी सकती हैं।
    -फल और सब्जियां भी आपकी सहायता कर सकती हैं। इनमें काफी मात्रा में पानी होता है।
    -शराब से दूर रहें। शराब पीने के बाद बार-बार पेशाब लगती है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
    -अगर आप कोई खेल खेलती हैं तो खेल शुरू करने से पहले पानी पी लें, क्योंकि खेल के दौरान और उसके बाद पसीने के रूप में शरीर से ज्यादा पानी निकल जाता है।
    -घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन क्रीम जरूर लगाएं, ताकि धूप से त्वचा पर कम असर हो।
    -12 बजे से 4 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें। इस दौरान धूप त्वचा को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।
    -त्वचा के समय से पहले बूढ़ा होने से बचने के लिए यूवीए व यूवीबी फिल्टर वाले सनस्क्रीन लोशन का उपयोग करें।

     

  • हाथों की खूबसूरती बनाए रखने के ये 6 नुस्खे

    हाथों की खूबसूरती बनाए रखने के ये 6 नुस्खे

    त्वचा को जवां बनाने और निखारने की बात करते हैं तो अपने हाथों को भूल जाते हैं। जबकि देखभाल की सबसे ज्यादा जरूरत हमारे हाथों को होती है, क्योंकि इन पर धूप का प्रभाव सबसे ज्यादा पडता है। इसके अलावा घरेलू कामकाज के दौरान भी हार्ड केमिकल्स का इन पर बहुत प्रभाव पडता है। अगर इनकी ठीक प्रकार से देखभाल की जाए, तो आपके हाथ लम्बे समय तक जवां और खूबसूरत बने रहेंगे।

    -बढती एज की निशनियां
    -अपने हाथों पर गौर करें।
    -हाथों की स्किन का ढीला हा कर लडक जाना।
    -हाथों की नसों का दिखायी देना।
    -हथेलियों का हर समय रूखा-सूखा रहना।

    हाथों की खूबसूरती बनाएं रखें:-

    1. दिनभर घर का काम करने से हाथों का मॉइश्चर खत्म हो जाता है और वे खुरदरे हो जाते हैं। बदलते मौसम में शुष्क हवाओं के असर भी हाथ रूखे हो जाते हैं। पानी में काम करने के बाद और सुबह नहाने के बाद अच्छा अब्जॉर्बिग लोशन लगाएं। रात में थोडा हेवी और क्रीम बेस्ड मॉइश्चराइजर लगाएं, ताकि क्रीम हाथों में अच्छी तरह से जज्ब हो आए।

    2. धूप और धूल के प्रभाव से हाथों में पिगमेंटेशन और टैनिंग भी हो जाती है। इन्हें दूर करने के लिए स्क्रब करके पैक लगाएं। हाथों की ब्लीचिंग भी की जा सकती है।

    3. स्क्रबिंग के लिए होममेड स्क्रब जैसे चीनी और बेसन का यूज करें और ताजे फलों का पैक लगाएं। चीनी से सक्रब करने के लिए हथेलियों को गीला करके थोडी सी चीनी लें और तब तक हाथों की मसाज करें जब तक चीनी घुल ना जाए। फिर साफ पानी से हाथ धो लें। इसी तरह 1 चम्मच बेसन में थोडा नींबू का रस, हल्दी और कच्चाा दूध या मलाई मिलाएं। इसे हाथों पर लगा कर स्क्रब करें।

    4. सनस्क्रीन ना सिर्फ आपके चेहरे के लिए, बल्कि बॉडी के उन सभी पाट्र्स के लिए जरूरी है, जो सीधे धूप के सम्पर्क में आते हैं। घर से बाहर निकलते समय 15 मिनट पहले चेहरे के साथ-साथ हाथों पर भी सनस्क्रीन लगाएं।

    5. नाखूनों के क्यूटिकल्स की भी देखभाल करें। हाथ रूखें हो जाने पर क्यूटिकल्स निकल आते हैं, जिनसे हो कर गंदगी और बैक्टीरिया हमारे शरीर में घुस जाते हैं। हाथ धोने के बाद शिया बटर युक्त मॉइश्चराइजर लगाएं। चाहें, तो नाखूनौं के बेस पर थोडा सा लिप बाम भी लगा सकती हंै।

    6. हटाए झुर्रियां हाथों में आयी झुर्रियां आपको अपने हाथ छिपाने के लिए मजबूर ना करें इाके लिए जरूरी है कि हैंड रिजूविनेशन ट्रीटमेंट अपनाया जाए। डर्मा फिल्र्स जैसे ज्यूवडर्म इसके लिए बेहद करागर उपचार है। इस ट्रीटमेंट में हाइएल्यूरोनिक एसिड जैल का इस्तेमाल किया जाता है। यह हमारी स्किन का एक कुरती तत्व है, जो स्किन को वॉल्यूम देता है। इस ट्रीटमेंट के बाद हाथ भरे-भरे दिखते हैं, स्किन का टेक्सचर बेहतर होता है और स्किन में कोलेजन बन कर स्किन में कसाव आता है। हाथों की झुर्रियां हटाने के लिए भी यह अच्छा ट्रीटमेंट है।

     

  • फूल भी करते हैं दवा का काम, इन रोगों में ये हैं रामबाण

    फूल भी करते हैं दवा का काम, इन रोगों में ये हैं रामबाण

    फूलों की खूशबू और उनकी सुंदरता तो हम सभी का मन मोह लेती है, लेकिन क्या आप जानते है कि हम फूलों को भी खा सकते हैं। खाने में फूलों का उपयोग भले ही हम सीधे न कर पाएं, लेकिन सही पर फूलों का इस्तेमाल हम कई चीजें में करते हैं, फिर चाहे वह खाना हो या सलाद।

    हजारो सालों से हम फूलों कि सुंदरता को देखते और महक का आनंद लेते आए हैं। उनके इन्हीं रंगों में उनकी बहुत सारी खूबियां छिपी हुई हैं। अभी तक अधिकांश लोग यही जानते थे कि फूलों का उपयोग सिर्फ इत्र बनाने में होता है,तो आइए जाने कुछ ऐसे ही फूलों को जो हमारे भोजन को स्वादिष्ट बनाते हैं।

    लैवेंडर फूल-इन खुशबूदार फूलों का इस्तेमाल आइस्क्रीम और दही में किया जाता है। इसका इस्तेमाल एंटीसेप्टिक और बालों की रूसी को रोकने में भी होता है।

    गुलदाउदी-कैमोमाइल की तरह ही गुलदाउदी का चाय में इस्तेमाल होता है। गुलदाउदी में एंटी ऑक्सीडेंट और मिनरल्स के अलावा एंटी इन्फ्लेमेटरी, एंटी-कार्सनोजेनिक गुण भी पाए जाते हैं।

    बबूने का फूल (कैमोमाइल)-यह फूल आपको शान्त रखने में मदद करता है, इसीलिए इसका इस्तेमाल चाय में किया जाते है। इसमें एंटीइनफ्लेमेटरी, एंटी-कार्सनोजेनिक और घाव भरने के गुण पाए जाते हैं।

    गुडहल के फूल-इन फूलों का इस्तेमाल सलाद को गार्निश करने के लिए होता है, इसके अलावा चाय में भी गुड़हल के फूलों का इस्तेमाल होता है। इनमें भरपूर मात्रा में एंटी-आक्सीडेंट पाए जाते हैं जो लो-ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करते हैं।

    एप्पल और ऑरेंज के फूल-ये दोनों फूल सबसे ज्यादा खाए जाते हैं, इन्हें खाने से कई रोग दूर होते हैं। इसके बारे में कुछ ही लोग जानते हैं, लेकिन इनका उपयोग कम मात्रा में करना चाहिए।

     

  • फिट और एक्टिव रहने का आसान तरीका: फाइबर क्यों है जरूरी

    फिट और एक्टिव रहने का आसान तरीका: फाइबर क्यों है जरूरी

    कभी वर्क कभी फोटो शूट तो कभी मार्केटिंग कॉल पर आउटडोर जाना इनके काम में शुमार है। होटल की ब्रैंडिंग के लिए लोगों से मिलना और होटल में ही खाना इनके रुटीन में शामिल होता है। जी हां, होटल्स मार्क कॉम मैनेजर का प्रोफेशन ही कुछ ऐसा है कि इन्हें अपने लिए भी समय नहीं मिलता। ऐसे में यह अपनी सेहत और खानपान का खयाल कैसे रखते हैं, डीडी ने की पड़ताल। साथ ही इनकी लाइफस्टाइल को दुरुस्त करने के लिए डाइटीशियन से जानें कुछ खास टिप्स।

    दिनचर्या: मेरे दिन की शुरुआत सुबह 7 बजे होती है। मुझे घर से होटल के लिए लगभग 8.30 बजे निकल जाना होता है। 7.30 से 8 के बीच मैं ब्रेकफस्ट करती हूं। सुबह का इतना बिजी शेड्यूल होता है कि कोई एक्सरसाइज या वर्कआउट तक नहीं कर पाती। मैं पिछले एक साल से इस जॉब में हूं। व्यस्तता के कारण वॉक नहीं कर पाती। सुबह भागमभाग रहती है।

    ब्रेकफस्ट: मैं सुबह 7.45 बजे ब्रेकफस्ट करती हूं जिसमें आमतौर पर एक ग्लास दूध या चाय, कॉर्नफ्लेक्स, फ्रूट्स, ब्रेड बटर या फिर ऑमलेट होते हैं। इससे ज्यादा समय नहीं होता। मैं नॉनवेजटेरियन हूं। मैं होटल पहुंचने के बाद 9.30 तक ग्रीन टी लेती हूं। मन हुआ तो साथ में बिस्किट भी ले लेती हूं। 12.30 बजे तक कोई फल खाती हूं या ज्यादा भूख हो तो लंच जल्दी कर लेती हूं। मैं 2-3 घंटे के अंतर पर थोड़ा-थोड़ा कुछ न कुछ खाती रहती हूं।

    लंच: आमतौर पर मैं लंच 1 बजे तक कर लेती हूं। होटल में ही खाती हूं, जिसमें दाल, चपाती, सब्जी और दही या सैलेड होते हैं।

    स्नैक्स: शाम 4-5 बजे कभी कोल्ड कॉफी-बिस्किट या जूस या फिर सैंडविच लेती हूं। कोल्ड कॉफी पंद्रह दिन में एक बार लेती हूं। फिर घर पहुंचकर 7.00-7.30 बजे तक मेयोनीज चिकेन या हैम सैंडविच लेती हूं या फिर 1 ग्लास दूध लेती हूं। मैं सप्ताह में 2-3 दिन रात में या शाम को दूध लेती हूं।

    डिनर: रात 10 बजे तक डिनर में दाल, रोटी, सब्जी और थोड़ा चावल लेती हूं। जब बाहर जाती हूं तो सिर्फ सैलेड, फ्रूट्स या सूप ही प्रेफर करती हूं। रात 12 बजे तक सो जाती हूं।

     

  • बार-बार पिंपल्स को न करें नजरअंदाज! ये अंदरूनी दिक्कतों का बड़ा इशारा हो सकते हैं

    बार-बार पिंपल्स को न करें नजरअंदाज! ये अंदरूनी दिक्कतों का बड़ा इशारा हो सकते हैं

    अक्सर लोग एक्ने को सिर्फ त्वचा से जुड़ी समस्या मानते हैं और गंदगी से जोड़कर देखते हैं। इसलिए इस समस्या को दूर करने के लिए फेस वॉश और क्रीम की मदद लेते हैं, लेकिन अगर सही स्किन केयर के बावजूद एक्ने बार-बार लौट रहा है, तो समस्या शरीर के अंदर छिपी हो सकती है।

    अगर शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी हो या हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाए, तो भी इसका असर हमारी त्वचा पर एक्ने के रूप में नजर आ सकता है। आइए जानें बार-बार एक्ने होने के पीछे कौन-से कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

    किन वजहों से हो बार-बार लौट आते हैं एक्ने?

        हार्मोनल इंबैलेंस- हार्मोनल इंबैलेंस एक्ने होने का सबसे बड़ा कारण है। शरीर में एंड्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ने से ऑयल ग्लैंड ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं, जिसके कारण पोर्स बंद हो जाते हैं। इसके कारण एक्ने होने की समस्या बढ़ जाती हैष
        पीसीओएस- महिलाओं  में पीसीओएस या पीरियड्स के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव अक्सर ठुड्डी और जॉलाइन पर एक्ने का कारण बनते हैं।
        डाइट- खाने में ज्यादा मीठे और डेयरी प्रोडक्ट्स भी एक्ने की वजह बन सकते हैं। इन फूड आइटम्स से इंसुलिन स्पाइक होता है, जो एक्ने को बढ़ावा देता है।
        तनाव और मानसिक सेहत- जब हम तनाव में होते हैं, तो शरीर कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज करता है। इस हार्मोन के कारण त्वचा ज्यादा ऑयल प्रोड्यूस करता है। साथ ही, तनाव के कारण नींद पूरी नहीं होती, जिससे त्वचा को रिपेयर होने का समय नहीं मिलता और एक्ने की समस्या गंभीर हो जाती है।

    बचाव के लिए क्या करें?

    एक्ने से छुटकारा पाने के लिए सिर्फ स्किन केयर पर ध्यान देना काफी नहीं है। आपको अपनी लाइफस्टाइल और डाइट में भी कुछ सुधार करने होंगे।

        डाइट- अपने खाने में से चीनी, मैदा और ऑयली चीजों की मात्रा कम करें। अगर आपको डेयरी प्रोडक्ट्स से भी एक्ने होता है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात करें। साथ ही, डाइट में ताजे फल और हरी सब्जियों को ज्यादा मात्रा में शामिल करें।
        हाइड्रेशन- हर दिन कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं ताकि टॉक्सिन्स बाहर निकलें। स्किन को हाइड्रेटेड रखने के लिए भी भरपूर मात्रा में पानी पीना जरूरी है।  
        नींद- रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लें ताकि हार्मोन बैलेंस बना रहे और तनाव भी कम हो।
        सफाई- दिन में दो बार माइल्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें और तकिए का कवर नियमित बदलें।
        डॉक्टर से सलाह- अगर आपको बहुत ज्यादा एक्ने की समस्या है, तो डॉक्टर से सलाह लें। वे पीसीओएस या हार्मोनल इंबैलेंस की जांच कर सकते हैं और एक्ने के लिए आपको मेडिकेटेड क्रीम भी दे सकते हैं।

     

  • क्या वजह है कि आज की युवा पीढ़ी रहती है लो फील? नई स्टडी का बड़ा खुलासा

    क्या वजह है कि आज की युवा पीढ़ी रहती है लो फील? नई स्टडी का बड़ा खुलासा

    ऑस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि अवसाद के शिकार युवाओं के मस्तिष्क और रक्त कोशिकाएं एक असामान्य पैटर्न में काम करती हैं। शोधकर्ता रोजर वरेला के अनुसार, जब ये युवा आराम की स्थिति में होते हैं, तब उनकी कोशिकाएं बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा पैदा करती हैं। लेकिन, जब तनाव के समय या जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त ऊर्जा की मांग होती है, तो ये कोशिकाएं ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने में बुरी तरह संघर्ष करती हैं। इसी असंतुलन की वजह से अवसाद से ग्रसित युवाओं में लगातार थकान और प्रेरणा की कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

    कैसे हुआ यह बड़ा शोध?
    यह दिलचस्प शोध 'जर्नल ट्रांसलेशनल सायकिएट्री' में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने 18 से 25 वर्ष की आयु के 18 ऐसे युवाओं के मस्तिष्क स्कैन और रक्त के नमूनों का गहराई से अध्ययन किया जो अवसाद से पीड़ित थे। इसके बाद, उनके डेटा की तुलना उन स्वस्थ व्यक्तियों से की गई जिन्हें अवसाद नहीं था। शोध की मुख्य लेखिका और एसोसिएट प्रोफेसर सुसान्ना टाय ने बताया कि यह इतिहास में पहली बार है जब वैज्ञानिकों ने अवसादग्रस्त युवाओं के मस्तिष्क और रक्तधारा में सीधे तौर पर थकान से जुड़े अणुओं के पैटर्न को ट्रैक किया है।

    लंबे समय की समस्याओं का मिलता है संकेत
    इस शोध से यह भी पता चलता है कि अवसाद की बीमारी के शुरुआती चरण में कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा काम कर रही होती हैं। यही अत्यधिक दबाव आगे लंबे समय तक चलने वाली समस्याओं का मुख्य कारण बन सकता है। लेखिका ने स्पष्ट किया कि 'थकान' प्रमुख अवसाद विकार का एक ऐसा आम लक्षण है जिसका इलाज करना सबसे ज्यादा मुश्किल होता है।

    भविष्य के लिए एक नई उम्मीद
    इस अध्ययन ने चिकित्सा जगत में एक नई उम्मीद जगाई है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन नए निष्कर्षों की मदद से प्रमुख अवसाद विकार का पहले ही पता लगाया जा सकेगा। इसके अलावा, इससे संभावित रूप से अधिक लक्षित और हर मरीज की जरूरत के हिसाब से व्यक्तिगत उपचार तैयार करने के रास्ते खुलेंगे, जिससे लोगों को इस बीमारी से बाहर निकलने में सही मदद मिल सकेगी।

     

  • समय के साथ चेकअप जरूरी है सेहत के लिए

    समय के साथ चेकअप जरूरी है सेहत के लिए

    अच्छा स्वास्थ्य सबकी चाहत होती है। बहुत से लोग स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए योगा, सैर, जिम, व्यायाम, तैराकी आदि नियमित रूप से करते रहते हैं। बहुत कम लोग ऐसे हैं जो अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक न हों। अच्छी सेहत बहुत बड़ी देन है। भगवान की इस देन को आगे बरकरार रखने के लिए हमें समय-समय पर डाक्टरों से सलाह लेते रहना चाहिए और उनके परामर्शानुसार अपनी जांच आदि करवाते रहना चाहिए ताकि बीमारी को अधिक पनपने से रोका जा सके। यदि जांच के दौरान शुरुआती लक्षण दिखायी दें और उनका समय रहते इलाज किया जाए ताकि आसानी से उस पर काबू पाया जा सके। इसलिए हम सबके लिए जरूरी है कि हम समय-समय पर अपनी जांच करवाते रहें। यह जांच नवजात शिशु के संसार में आते ही प्रारम्भ हो जाती है। बड़े नर्सिंग होम में तो बाल विशेषज्ञ होते हैं। जब भी डिलीवरी होती है तो वे बच्चे के शुरुआती लक्षणों से जांच लेते हैं कि सब ठीक ठाक है।

    डिलीवरी के समय बाल विशेषज्ञ उपलब्ध न हो तो बच्चे के पैदा होने के 2-3 दिन के भीतर बच्चे को डाक्टर के पास ले जायें। इस प्रकार महीना खत्म होने से पहले, फिर दूसरे, चैथे, छठे, नौवें और बारहवें महीने में बच्चे को बार विशेषज्ञ को दिखाने ले जाते रहें ताकि बच्चे की वृध्दि, टीकाकरण पर पूरा ध्यान रहे। कुछ असामान्य पर पूरा ध्यान रहे। कुछ असामान्य लक्षण होने पर समय रहते ध्यान दिया जा सके। दूसरे, तीसरे, चैथे साल में भी बच्चे को डाक्टर के पास ले जाते रहें। जब बच्चा थोड़ा और बड़ा होना शुरू होता है तब भी बच्चे को कम से कम साल में एक बार फिजिकल एग्जामिनेशन के लिए डाक्टर के पास ले जाएं ताकि बच्चों की लम्बाई व वजन आदि उम्र के हिसाब से ठीक है या नहीं और कुछ जरूरी टीकाकरण यदि आवश्यक हों तो लगवा लें।

    बच्चों की दांत, आंख, कान, प्लस व हार्ट रेट, ब्लडप्रेशर, मधुमेह और श्वास प्रक्रिया की जांच करवाएं, बच्चों का शारीरिक विकास उम्र के मुताबिक कम हो तो डाक्टर से सलाह लें। उम्र बढ़ाने के साथ-साथ शरीर में कई बदलाव आते रहते हैं जैसे किशोरावस्था में हार्मोनल चेंजेंस आदि। इस अवस्था में बच्चे में कई बदलाव आते हैं। इन मानसिक और शारीरिक बदलावों को डाक्टर बच्चे और माता-पिता को बताकर गलतफहमी को दूर करने में मदद करते हैं। जब शरीर का पूरा विकास हो जाता है तब भी कई समस्याएं आती हैं। छोटी-छोटी मुश्किलें तो शरीर आसानी से सह लेता है पर बिल्कुल नजरअंदाज करने पर छोटी मुश्किलें बड़ी हो जाती हैं। 40 वर्ष पश्चात् तो साल में एक बार कुछ चेकअप करवाते रहना चाहिए जैसे ब्लडप्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्राल, यूरिन अनालिसस, वजन, हीमोग्लोबिन, लीवर प्रोफाइल, लिपिड प्रोफाइल, चेस्ट एक्सरे, ईसीजी आदि करवाते रहना चाहिए। यदि कोई समस्या की शुरुआत हो तो समय पर इलाज परहेज कर उस पर काबू पाना आसान होता है। महिलाओं को 40 वर्ष बाद पेप स्मीअर, बोन डेंसिटी टेस्ट करवाने चाहिए। अल्ट्रासाउंड वगैरह आवश्यकता होने पर करवा लेना चाहिए। 60 वर्ष पश्चात् अपने स्वास्थ्य का पूरी तरह ध्यान रखना चाहिए। कोई भी तकलीफ महसूस होने पर डाक्टर से सलाह लें और लगकर इलाज करवायें। बड़ी आयु में व्यायाम भी डाक्टर की सलाह अनुसार करें। इस आयु में अपना लाइफस्टाइल एक्टिव रखें। आलस्य को दूर रखें। अपने काम स्वयं करें। योगाभ्यास और मेडिटेशन से तनावों पर काबू पायें।