Category: छत्तीसगढ़

  • स्वास्थ्य व्यवस्था पर घमासान, मंत्री ने दीपक बैज को अस्पताल चलने का न्योता दिया

    स्वास्थ्य व्यवस्था पर घमासान, मंत्री ने दीपक बैज को अस्पताल चलने का न्योता दिया

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ की सियासत में नेताओं के बीच जुबानी जंग का सिलसिला जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पंचायत मंत्री विजय शर्मा के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर हुई बहस के बाद अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य मंत्री को चुनौती दी है।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल पर निशाना साधते हुए उन्हें चुनौती दी है। बैज ने कहा है कि वे प्रदेश के किसी भी अस्पताल में जाकर जमीनी स्थिति देखने के लिए तैयार हैं। बैज की ओर से स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद मामला राजनीतिक बहस में बदल गया।

    श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वीकार की चुनौती
    दीपक बैज की चुनौती पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी पलटवार करते हुए इसे स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि दीपक बैज उनके पुराने मित्र हैं और वे उनका सम्मान करते हैं। अस्पताल का चयन भी बैज अपनी पसंद से कर सकते हैं।स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बस्तर क्षेत्र या रायपुर का कोई भी अस्पताल चुन लिया जाए, वे वहां साथ चलने के लिए तैयार हैं। वे स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक मित्र के रूप में भी उनके साथ जाएंगे।

    जाना होगा तो खबर भेज दें, जरूर जाएंगे : स्वास्थ्य मंत्री
    स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा कि अगर दीपक बैज किसी अस्पताल का जायजा लेने जाना चाहते हैं तो उन्हें इसकी जानकारी भेज दें। जाना होगा तो खबर भेज दें, जरूर जाएंगे। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस को लेकर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस में चर्चा करने का कोई इंफेक्शन आ गया है।” अब दोनों नेताओं की चुनौती के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि अस्पताल का चयन कब और कहां होता है और क्या दोनों नेता साथ में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचते हैं।

  • बस्तर के नितेश कश्यप को मिला नया जीवन, लिवर कैंसर को दी मात

    बस्तर के नितेश कश्यप को मिला नया जीवन, लिवर कैंसर को दी मात

    आयुष्मान भारत बना संबल

    बस्तर के नितेश कश्यप को मिला नया जीवन, लिवर कैंसर को दी मात

    समय पर जांच और उपचार के साथ आयुष्मान भारत योजना से मिला पांच लाख रुपए तक के निःशुल्क उपचार का सहारा

    रायपुर,
    बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड के ग्राम करंजी निवासी 27 वर्षीय श्री नितेश कश्यप के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जीवन में नई उम्मीद लेकर आई। लंबे समय से पेट दर्द की असहनीय पीड़ा झेल रहे नितेश जब गांव के आयुष्मान आरोग्य मंदिर पहुंचे, तो उन्हें प्राथमिक उपचार और दवाइयां दी गईं। दवाइयों से अपेक्षित राहत नहीं मिलने पर दोबारा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने पर वहां पदस्थ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर श्रीमती प्रीति बघेल ने उनकी स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल उन्हें महारानी जिला अस्पताल, जगदलपुर रेफर किया।

    समय पर जांच से सामने आई गंभीर बीमारी
               महारानी जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने नितेश की आवश्यक जांचें कराईं। खून की जांच, अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी विस्तृत जांचों में उनके लिवर कैंसर से पीड़ित होने की पुष्टि हुई। गंभीर बीमारी की जानकारी मिलने के बाद परिवार चिंतित हो गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें उपचार की पूरी प्रक्रिया समझाते हुए आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत उपलब्ध निःशुल्क उपचार सुविधा का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

    पांच लाख रुपए तक के उपचार कवच से हुआ सफल ऑपरेशन
             आयुष्मान भारत योजना के तहत उपलब्ध पांच लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा ने नितेश और उनके परिवार को बड़ी आर्थिक चिंता से राहत दी। योजना के माध्यम से उनके जटिल उपचार और ऑपरेशन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। उपचार के बाद नितेश स्वस्थ होकर अपने सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।

    आयुष्मान भारत ने मुझे नई जिंदगी दी
              सफल उपचार के बाद नितेश कश्यप ने भावुक होकर कहा कि आयुष्मान भारत योजना ने उन्हें वास्तव में नई जिंदगी दी है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि पात्र हितग्राही इस जनहितकारी योजना का लाभ अवश्य लें। नितेश ने समय पर सही मार्गदर्शन देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों, उपचार करने वाले चिकित्सकों और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उनकी कहानी यह बताती है कि समय पर स्वास्थ्यकर्मियों की सतर्कता, उचित जांच और उपचार के साथ स्वास्थ्य योजना का आर्थिक संबल गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकता है।

  • कवर्धा में मंदिर पहुंचे मंत्री राजेश अग्रवाल, जनकल्याण और समृद्धि के लिए की प्रार्थना

    कवर्धा में मंदिर पहुंचे मंत्री राजेश अग्रवाल, जनकल्याण और समृद्धि के लिए की प्रार्थना

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कवर्धा में सिद्धेश्वर महादेव और संकट मोचन हनुमान मंदिर में की पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-शांति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए की प्रार्थना

    रायपुर,
    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज कवर्धा के ऐतिहासिक रानी सागर तालाब परिसर स्थित आस्था के पावन केंद्र और कवर्धा राज परिवार न्यास द्वारा निर्मित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर एवं संकट मोचन हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं जलाभिषेक किया। उन्होंने भगवान सिद्धेश्वर महादेव से समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की मंगल कामना की।

    इस अवसर पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल यहां की प्राकृतिक सुंदरता से ही नहीं, बल्कि इसकी समृद्ध धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी है। भोरमदेव और कवर्धा क्षेत्र आस्था, इतिहास और संस्कृति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमारी सरकार का प्रयास है कि इन ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों का संरक्षण करते हुए इन्हें आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी सृजित हों। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती आस्था और संस्कृति की विविध परंपराओं से समृद्ध है। इन परंपराओं को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

    भोरमदेव कॉरिडोर की प्रगति की समीक्षा के लिए कवर्धा पहुंचे मंत्री

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ पर्यटन विभाग की महत्वाकांक्षी भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना की प्रगति एवं आगामी कार्ययोजनाओं की समीक्षा के लिए कवर्धा प्रवास पर हैं। इस दौरान परियोजना से जुड़े कार्यों की वर्तमान स्थिति, निर्माण एवं विकास कार्यों की प्रगति तथा आगामी चरण की कार्ययोजना को लेकर समीक्षा की जाएगी। 

    केंद्र की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना से भोरमदेव को मिल रहा नया आयाम

    केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत कबीरधाम के भोरमदेव कॉरिडोर के विकास के लिए 145.99 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत है। भोरमदेव क्षेत्र छत्तीसगढ़ की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। कॉरिडोर के विकास से क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने और आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों को एक समग्र पर्यटन अनुभव से जोड़ने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।

    मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि भोरमदेव केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां आने वाला पर्यटक मंदिरों की स्थापत्य कला, क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय संस्कृति को एक साथ अनुभव कर सकता है। भोरमदेव कॉरिडोर का विकास इस समृद्ध विरासत को बेहतर ढंग से सामने लाने का अवसर है।

    स्थानीय लोगों के लिए बढ़ेंगे अवसर

    भोरमदेव कॉरिडोर के विकास से पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। होटल, होम-स्टे, स्थानीय परिवहन, हस्तशिल्प, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय उत्पादों से जुड़े लोगों को पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही का लाभ मिलेगा।

    मंत्री अग्रवाल ने कहा कि पर्यटन विकास का उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़ना भी है। स्थानीय संस्कृति, कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर क्षेत्र के लोगों के लिए आय के नए अवसर तैयार किए जाएगें।

    आस्था और विकास का बनेगा सुंदर संगम

    रानी सागर तालाब परिसर में पूजा-अर्चना के दौरान मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। भोरमदेव जैसे स्थलों का विकास आस्था, संस्कृति, इतिहास और पर्यटन को एक साथ जोड़ने का माध्यम बनेगा।

    उन्होंने कहा कि भोरमदेव कॉरिडोर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। हमारा प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलें, पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिले और स्थानीय लोगों को पर्यटन के माध्यम से आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हों।

  • केज कल्चर से बढ़ेगा मछली उत्पादन, बीमारी की त्वरित पहचान पर जोर

    केज कल्चर से बढ़ेगा मछली उत्पादन, बीमारी की त्वरित पहचान पर जोर

    केज कल्चर से बढ़ेगा मछली उत्पादन, बीमारी की त्वरित पहचान पर जोर 

     ICAR-CIFRI और मत्स्य विभाग की संयुक्त कार्यशाला में किसानों को मिला वैज्ञानिक एवं तकनीकी मार्गदर्शन 

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ के जलाशयों में केज कल्चर (पिंजरा पालन) के माध्यम से मछली उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग, छत्तीसगढ़ एवं ICAR-CIFRI, बैरकपुर (कोलकाता) के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। 8 एवं 9 सितंबर को रायपुर स्थित मत्स्य पालन विभाग कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में मछलियों में होने वाली बीमारियों की त्वरित पहचान, रोकथाम और आधुनिक प्रबंधन तकनीकों पर किसानों एवं अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया।
    कार्यशाला में ICAR-CIFRI के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. असित कुमार बेरा एवं श्रीमती सोहिनी चटर्जी ने केज कल्चर एवं तालाबों में मछलियों में होने वाले रोगों के लक्षण, बचाव तथा वैज्ञानिक उपचार की जानकारी दी। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 50-60 केज कल्चर किसानों, 50-60 पारंपरिक तालाब मत्स्य पालकों तथा मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की।
    कार्यशाला में फील्ड स्तर पर रोगों की त्वरित जांच, डायग्नोस्टिक सुविधाओं के विस्तार, मैदानी कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जलाशयों एवं मछलियों के स्वास्थ्य संबंधी डेटाबेस तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया गया। एकीकृत प्रबंधन व्यवस्था को राज्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
    कार्यक्रम में संचालक मत्स्य पालन श्री एन.एस. नाग, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा श्री आनंद निषाद, उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा डॉ. लखन लाल धीवर, उप-संचालक मत्स्य पालन प्रशिक्षण संस्थान सुश्री बीना गड़पाले तथा सहायक मत्स्य अधिकारी श्री विकास कुमार साहू सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
    जलाशयों में पहुंचकर वैज्ञानिकों ने किया केज कल्चर का निरीक्षण
    कार्यशाला के उपरांत 10 सितंबर को ICAR-CIFRI के वैज्ञानिक डॉ. असित कुमार बेरा एवं श्रीमती सोहिनी चटर्जी ने राज्य के जलाशयों का मैदानी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थापित केज कल्चर की स्थिति का जायजा लिया तथा मौके पर ही मत्स्य पालक किसानों को मछलियों के स्वास्थ्य, रोग प्रबंधन एवं बेहतर उत्पादन के संबंध में व्यावहारिक सुझाव दिए। राज्य में वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • सेवा की कहानी : बिहान से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आई आत्मनिर्भरता की नई सुबह

    सेवा की कहानी : बिहान से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आई आत्मनिर्भरता की नई सुबह

    सेवा की कहानी : बिहान से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आई आत्मनिर्भरता की नई सुबह

    मेहनत, हौसले और अवसर ने बदली तस्वीर, खेत से व्यवसाय तक महिलाओं ने लिखी ‘लखपति दीदी’ बनने की कहानी

    स्व-सहायता समूहों से मिला साथ, बचत और ऋण से आजीविका को मिला विस्तार

    रायपुर, 
    कभी घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज अपनी मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास से परिवार की आर्थिक मजबूती की आधारशिला बन रही हैं। किसी ने खेत में नई फसल उगाकर आय का रास्ता बनाया, किसी ने सब्जी उत्पादन को व्यवसाय का रूप दिया तो किसी ने मुर्गी पालन को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बना लिया। यह बदलाव केवल आय बढ़ने की कहानी नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता बढ़ने की कहानी भी है।

    छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जुड़ी महिलाओं को बचत, ऋण, प्रशिक्षण और आजीविका गतिविधियों से आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। महिलाएं इन अवसरों को अपनी मेहनत और लगन से उपलब्धि में बदल रही हैं। यही प्रयास उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहे हैं और अनेक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ के रूप में नई पहचान बना रही हैं।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आ रही ‘सेवा की कहानियां’ में इन महिलाओं का सफर इस बात का उदाहरण है कि जब शासन की योजनाएं जरूरतमंद तक पहुंचती हैं और उसके प्रयासों को सही दिशा मिलती है, तो बदलाव केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि परिवारों और जीवन में दिखाई देता है।

    छोटी बचत से बड़े सपनों तक

    ग्रामीण परिवारों में सीमित आय के बीच महिलाओं की भूमिका लंबे समय तक मुख्य रूप से घर संभालने तक सीमित रही। छोटी जरूरतों के लिए भी परिवार को दूसरों पर निर्भर होना पड़ता था। बिहान से जुड़े स्व-सहायता समूहों ने महिलाओं को संगठित होने, नियमित बचत करने और सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर दिया।

    नियमित बचत ने आर्थिक अनुशासन बढ़ाया तो समूह की सामूहिक शक्ति ने महिलाओं के लिए ऋण और आजीविका गतिविधियों के रास्ते खोले। किसी ने खेती को चुना, किसी ने सब्जी उत्पादन शुरू किया, किसी ने मुर्गी पालन को व्यवसाय बनाया तो किसी ने अपनी रुचि और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप आय का साधन अपनाया।

    छोटी शुरुआत धीरे-धीरे बड़े बदलाव में बदलती गई। घर की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाली महिलाएं अब अपनी आय अर्जित कर रही हैं और परिवार के आर्थिक फैसलों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

    खेत से बाजार तक पहुंची कल्पना सिंह की आत्मनिर्भरता

    अम्बिकापुर विकासखंड की कल्पना सिंह की कहानी इस बदलाव की सशक्त मिसाल है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने कृषि कार्य के लिए डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया और खीरे की खेती से शुरुआत की। इसके साथ ही वे बैंगन, टमाटर, तरबूज सहित मौसम के अनुरूप विभिन्न सब्जियों और फसलों की खेती करती हैं।

    कल्पना के लिए यह बदलाव केवल खेत में फसल उगाने तक सीमित नहीं रहा। पहले घर से बाहर निकलने और लोगों से बातचीत करने में संकोच महसूस करने वाली कल्पना आज बैंकिंग, बाजार और कृषि से जुड़े कार्य स्वयं आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं।

    खेती से मिली आय ने उनके भीतर यह विश्वास मजबूत किया है कि यदि मेहनत के साथ सही अवसर मिले तो ग्रामीण महिला अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। खेत से बाजार तक का उनका सफर आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सामाजिक आत्मविश्वास की भी कहानी है।

    मजदूरी से अपने व्यवसाय तक पहुंचीं मति बाई

    उदयपुर विकासखंड के ग्राम सोनतरई की मति बाई की कहानी भी संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक के सफर को सामने लाती है। कभी उनके परिवार की आजीविका मजदूरी और छोटे-मोटे कामों पर निर्भर थी। आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने राधा स्व-सहायता समूह से जुड़कर आगे बढ़ने का रास्ता चुना।

    समूह के माध्यम से तीन लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया। मेहनत, निरंतरता और परिवार के सहयोग से शुरू हुआ यह काम आज उनकी आय का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। मति बाई के अनुसार मुर्गी पालन से उन्हें सालाना लगभग दो से तीन लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है।

    आज वे पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर महसूस करती हैं। उनके बच्चे भी इस काम में हाथ बंटाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य को लेकर उम्मीद भी मजबूत हुई है।

    मति बाई की कहानी बताती है कि आजीविका का एक छोटा अवसर भी यदि महिला की मेहनत और निरंतर प्रयास से जुड़ जाए तो वह परिवार की आर्थिक दिशा बदल सकता है।

    ‘लखपति दीदी’—आय के साथ बढ़ा आत्मसम्मान

    ‘लखपति दीदी’ की पहचान इन महिलाओं के लिए केवल एक आर्थिक उपलब्धि नहीं है। यह उस यात्रा का प्रतीक है जिसमें उन्होंने निर्भरता से आत्मनिर्भरता, संकोच से आत्मविश्वास और अभाव से अवसर की ओर कदम बढ़ाए हैं।

    आज ये महिलाएं परिवार के खर्च में योगदान दे रही हैं, बच्चों की पढ़ाई और जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर रही हैं तथा भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। आय अर्जित करने के साथ उनके निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

    अब वे बैंक जा सकती हैं, ऋण संबंधी प्रक्रिया समझ सकती हैं, बाजार में अपने उत्पाद बेच सकती हैं और अपनी मेहनत से अर्जित आय के उपयोग का निर्णय स्वयं ले सकती हैं। यह परिवर्तन महिला सशक्तिकरण का वह स्वरूप है, जिसका असर घर से लेकर समाज तक दिखाई देता है।

    बिहान ने खोले आजीविका के अनेक रास्ते

    बिहान से जुड़े स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं अपनी रुचि, क्षमता और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं। कृषि एवं सब्जी उत्पादन, पशुपालन, मुर्गी पालन, दुग्ध व्यवसाय, सिलाई और अन्य आयमूलक गतिविधियां उनके लिए आमदनी बढ़ाने के अवसर बन रही हैं।

    स्व-सहायता समूह महिलाओं को केवल आर्थिक सहयोग नहीं देते, बल्कि साथ चलने का भरोसा भी देते हैं। समूह की बैठकों में महिलाएं अपने अनुभव साझा करती हैं और एक-दूसरे से सीखती हैं। प्रशिक्षण से उन्हें नई जानकारी मिलती है, जबकि बैंक और बाजार से जुड़ाव उनके निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है।

    इस तरह बिहान महिलाओं के लिए केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि सीखने, संगठित होने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को आकार देने का मंच बन रहा है।

    एक महिला की आय से मजबूत होता पूरा परिवार

    जब कोई महिला आय अर्जित करती है तो उसका लाभ केवल उसके व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। बच्चों की शिक्षा, बेहतर खान-पान, घर की जरूरतों और भविष्य की योजनाओं को पूरा करने में अतिरिक्त सहारा मिलता है।

    इसके साथ महिलाओं में अपने भविष्य को लेकर नया भरोसा पैदा होता है। उन्हें यह विश्वास होता है कि वे व्यवसाय चला सकती हैं, बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ सकती हैं, बाजार में अपने उत्पाद बेच सकती हैं और परिवार के आर्थिक फैसलों में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं।

    यही बदलाव महिला सशक्तिकरण को परिवार की मजबूती से जोड़ता है। सशक्त महिला केवल स्वयं आगे नहीं बढ़ती, बल्कि उसके साथ पूरा परिवार आगे बढ़ता है।

    संघर्ष से सफलता तक—छोटे प्रयासों की बड़ी कहानी

    इन महिलाओं की सफलता की कहानियों में बड़े संसाधनों से अधिक महत्वपूर्ण है लगातार प्रयास करते रहने का हौसला। किसी ने बचत से शुरुआत की, किसी ने समूह से ऋण लेकर पहली बार व्यवसाय शुरू किया, किसी ने खेत में नई फसल लगाई तो किसी ने पशुपालन या मुर्गी पालन को आय का साधन बनाया।

    शुरुआत छोटी थी, लेकिन सपने बड़े थे। धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई और घर की तस्वीर बदलने लगी। आर्थिक परेशानियों के बीच उम्मीद मजबूत हुई, बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने आकार लेने लगे और महिलाओं के चेहरे पर अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास दिखाई देने लगा।

    सशक्त महिला से सशक्त परिवार और सशक्त समाज

    बिहान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं का यह सफर महिला सशक्तिकरण की उस भावना को मजबूत करता है, जिसमें महिला को केवल सहायता प्राप्त करने वाली नहीं, बल्कि परिवार और समाज की आर्थिक प्रगति में सक्रिय भागीदार बनाया जा रहा है।

    स्व-सहायता समूहों की सामूहिक शक्ति ने महिलाओं को यह विश्वास दिया है कि वे अकेली नहीं हैं। साथ मिलकर बचत करना, सीखना, व्यवसाय करना और आगे बढ़ना संभव है। यही सामूहिकता उनके आत्मविश्वास की बड़ी ताकत बन रही है।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आ रही कल्पना सिंह और मति बाई जैसी महिलाओं की कहानियां बताती हैं कि बदलाव केवल किसी योजना के लाभ से नहीं आता, बल्कि अवसर, सहयोग और मेहनत के मिलन से बदलाव की स्थायी तस्वीर बनती है।

    आज गांवों में महिलाएं केवल परिवार की खुशहाली की सहभागी नहीं हैं, बल्कि अपनी मेहनत से आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। ‘लखपति दीदी’ के रूप में उनकी पहचान उस बदलाव का प्रतीक है, जहां महिला की मेहनत परिवार की ताकत और समाज की प्रगति का आधार बन रही है।

    बिहान ने ग्रामीण महिलाओं के हाथों को केवल काम नहीं दिया, बल्कि उन्हें अपने भविष्य की दिशा स्वयं तय करने का आत्मविश्वास और साहस भी दिया है। यही है सेवा संकल्प की एक ऐसी कहानी, जिसमें एक महिला की आत्मनिर्भरता से पूरे परिवार के जीवन में नई सुबह आती है।

  • लोग पहले कहते थे बेचारी,अब देती है,लोगो को काम

    लोग पहले कहते थे बेचारी,अब देती है,लोगो को काम

    ​"लोग पहले कहते थे बेचारी,अब देती है,लोगो को काम

    ‘सक्षम योजना’ से धमतरी की सफीना बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

    रायपुर, 

           ​हौसले बुलंद हों और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो तंगहाली की बेड़ियों को तोड़कर सफलता का नया इतिहास रचा जा सकता है। इसे सच कर दिखाया है धमतरी जिले के मगरलोड विकासखण्ड स्थित सुदूर वनांचल क्षेत्र की रहने वाली श्रीमती सफीना बानो ने। 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत सामने आई सफीना की कहानी केवल संघर्ष की दास्तान नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों को हराकर आत्मनिर्भर बनने की एक जीवंत मिसाल है।

    ​जब थम सी गई थी जिंदगी

           ​पति द्वारा परित्यक्त किए जाने के बाद सफीना के सामने जिम्मेदारियों का पहाड़ टूट पड़ा। बुजुर्ग माँ की देखभाल, मासूम बच्ची का पालन-पोषण और घर चलाने का खर्च—सब कुछ अकेले उनके कंधों पर आ गया। न रोजगार का कोई जरिया था और न ही कोई पैतृक संपत्ति। आर्थिक तंगी से घिरीं सफीना को एक समय लगा कि उनकी जिंदगी अब यहीं ठहर गई है।
            ​दिशा बदलने वाला 'सक्षम' सहारा
    ​घने अंधेरे के बीच उम्मीद की किरण बनकर आईं महिला एवं बाल विकास विभाग की सेक्टर पर्यवेक्षक। सफीना ने उनसे अपना दर्द साझा किया। पर्यवेक्षक ने सफीना को ढांढस बंधाया और विभाग की ‘सक्षम योजना’ की जानकारी दी। सफीना के भीतर आगे बढ़ने का जज्बा देखकर उन्होंने खुद घर पहुँचकर 2 लाख रुपये के स्वरोजगार ऋण के लिए आवेदन करवाया।
           ​दिसंबर 2025 में ऋण स्वीकृत हुआ और यह राशि सफीना के लिए सिर्फ एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने के सपनों की पहली उड़ान साबित हुई।

    छोटे कदम से बड़ा मुकाम: मुर्गी पालन से ईंट-भट्ठा तक

           ​ऋण राशि मिलते ही सफीना ने मुर्गी और खरगोश पालन से अपना छोटा-सा व्यवसाय शुरू किया। उनकी दिन-रात की मेहनत और लगन रंग लाई। देखते ही देखते फार्म में सैकड़ों मुर्गियाँ हो गईं और बिक्री से अच्छी आय होने लगी।
          ​सफीना यहीं नहीं रुकीं; अपनी व्यावसायिक समझ को बढ़ाते हुए उन्होंने ईंट-भट्ठा निर्माण का काम भी शुरू किया। आज वे अपनी माँ की दवाइयों, घर के खर्च और बच्ची की पढ़ाई को बिना किसी परेशानी के पूरा कर रही हैं।

    ​"पहले बेचारी कहते थे, आज काम माँगने आते हैं"

           ​आर्थिक स्थिति सुधरने के साथ-साथ सफीना के आत्मविश्वास में जो बदलाव आया, वह सबसे बड़ा परिवर्तन है। अपनी इस यात्रा पर भावुक होते हुए सफीना कहती हैं कि दीदी, पहले लोग मुझे बेचारी कहते थे, आज वही लोग मुझसे काम माँगने आते हैं।

    ​समाज के लिए नई मिसाल

          ​सफीना की यह सफलता दर्शाती है कि जब दृढ़ इच्छाशक्ति को सरकारी योजनाओं का सही संबल और मार्गदर्शन मिलता है, तो कोई भी राह असंभव नहीं रहती। कभी परिस्थितियों के आगे बेबस दिखने वाली महिला आज दूसरों को रोजगार दे रही है। उनकी यह प्रेरक यात्रा प्रदेश की हज़ारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दे रही है।

  • आस की कच्ची छत से विश्वास के पक्के मकान तक

    आस की कच्ची छत से विश्वास के पक्के मकान तक

    आस की कच्ची छत से विश्वास के पक्के मकान तक

     सोनिबाई की संघर्ष और सफलता की कहानी

    ​रायपुर

         प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की संवेदनशीलता के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में विकास की बयार हर जरूरतमंद के द्वार तक पहुँच रही है। राज्य सरकार की सुशासन नीति से दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों के ऐसे हज़ारों परिवारों के सपने साकार हो रहे हैं, जो वर्षों से एक पक्की छत की आस में संघर्षरत थे। ऐसी ही एक सुखद और जीवन बदलने वाली कहानी नारायणपुर जिले के ग्राम पंचायत भरंडा की रहने वाली श्रीमती सोनिबाई पति श्री संनु राम की है।
          ​सोनिबाई और उनका परिवार सालों से कच्चे और जर्जर मकान में रहने को मजबूर था। बारिश के दिनों में टपकती छत, कड़कड़ाती ठंड में ठिठुरती रातें और तेज आंधियों का डर—हर मौसम उनके लिए एक नया इंतहान लेकर आता था। कच्चे घरौंदे में असुरक्षा और परेशानियों के बीच बीतते हर दिन के साथ एक सुरक्षित और पक्के मकान की आस धुंधली पड़ती जा रही थी। ​लेकिन, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सोनिबाई के परिवार के लिए एक नया सवेरा और वरदान बनकर आई। योजना के तहत स्वीकृत राशि और प्रशासन की सहज प्रक्रिया से उनका पक्के घर का सपना हकीकत में बदल गया। जब घर की पक्की नींव पड़ी और छत ढली, तो केवल एक मकान ही नहीं खड़ा हुआ, बल्कि उस परिवार का आत्मसम्मान और नए कल का भरोसा भी सुदृढ़ हुआ।
          ​अपनी खुशी और अनुभव साझा करते हुए श्रीमती सोनिबाई कहती हैं कि पुराने दिनों की तकलीफें याद कर आज भी मन सिहर उठता है। टपकती छत और कड़कड़ाती ठंड में नींद उड़ जाती थी। अब पक्का मकान मिलने से जिंदगी से असुरक्षा का साया हमेशा के लिए हट गया है। यह योजना हमारे जैसे गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
            ​मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुँचे। ग्राम भरंडा की सोनिबाई की यह सफलता की कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि राज्य सरकार के उस अटूट संकल्प की प्रतीक है, जो हर नागरिक को सम्मानजनक, सुरक्षित और खुशहाल जीवन देने के लिए कटिबद्ध है।

  • नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली

    नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली

    ​सेवा का संकल्प, विकास की धार

    नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली

    ​रायपुर
           जब सुबह की शुरुआत पानी जुटाने की चिंता से न होकर एक नए आत्मविश्वास और सुविधा के साथ हो, तो समझ लेना चाहिए कि विकास ज़मीन पर उतर चुका है। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड स्थित पंडरवाही गांव में आज यह सुखद बदलाव हर घर की देहरी पर साफ़ महसूस किया जा सकता है। अंगीरा ऋषि पर्वत की मनमोहक वादियों और बालका नदी के प्राकृतिक आंचल में बसे इस गांव में कभी पानी के लिए मीलों पैदल चलने और घंटों इंतज़ार करने की मजबूरी थी। लेकिन आज 'सेवा संकल्प अभियान' और जल जीवन मिशन के सशक्त संयोजन ने यहाँ की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। गांव के 94 परिवारों के घरों तक नल कनेक्शन पहुँचने से अब स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल ग्रामीणों की दिनचर्या का एक सहज और सम्मानजनक हिस्सा बन गया है।
            ​पंडरवाही में पहले प्राकृतिक जलस्रोत उपलब्ध होने के बावजूद, विशेषकर गर्मी के दिनों में, पानी का प्रबंध करना एक गंभीर चुनौती हुआ करता था। इसका सबसे बड़ा खामियाजा महिलाओं और बच्चों को भुगतना पड़ता था, जिनकी सुबह और शाम का बहुमूल्य समय भारी बर्तन ढोने और पानी की कतारों में ही बीत जाता था। गांव की निवासी सुपेन बाई और सुशीला बाई बताती हैं कि अब घर-आंगन में ही नल लग जाने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बेहद आसान हो गई है। पानी लाने में जो श्रम और समय नष्ट होता था, अब उसका उपयोग वे अपने परिवार की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आय बढ़ाने वाली गतिविधियों में कर रही हैं। इसके साथ ही, पानी भरने की जिम्मेदारी से मुक्त होकर बच्चे भी अब नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं, जिससे उनके सुनहरे भविष्य की नींव मजबूत हो रही है।
            ​यहाँ यह योजना केवल नल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि जलापूर्ति को नियमित और सुचारू बनाए रखने के लिए एक पारदर्शी और मजबूत व्यवस्था भी तैयार की गई है। स्थानीय पंप ऑपरेटर चुमन पटेल निर्धारित समय पर मोटर चलाकर ओवरहेड टैंक भरते हैं और जलापूर्ति की हर जानकारी 'मेरी पंचायत' ऐप पर दर्ज करते हैं। इसके अलावा, पाइपलाइन या मोटर में किसी भी तरह की तकनीकी खराबी आने पर उसके तुरंत निवारण के लिए ग्रामीणों को सीधे संपर्क की सुविधा दी गई है, जो प्रशासनिक सजगता और जन-भागीदारी की एक मिसाल पेश करता है।
          ​घर-घर नल से जल पहुँचने का सीधा प्रभाव गांव की स्वच्छता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी साफ़ दिखाई दे रहा है। नियमित जल उपलब्धता से व्यक्तिगत स्वच्छता, घरेलू साफ़-सफाई और बीमारियों से बचाव में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। पंडरवाही की यह सफलता दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं की असली उपलब्धि केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए गुणात्मक सुधार में निहित है। आज पंडरवाही के घरों में नल से बहती पानी की धार केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि बदली हुई दिनचर्या, बचे हुए समय और छत्तीसगढ़ में सुशासन के एक नए और बेहतर कल का प्रतीक बन चुकी है।

  • छत्तीसगढ़ में स्कूलों की छुट्टियों का ऐलान, दशहरा-दिवाली पर मिलेगा अवकाश

    छत्तीसगढ़ में स्कूलों की छुट्टियों का ऐलान, दशहरा-दिवाली पर मिलेगा अवकाश

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ के स्कूलों में आगामी त्योहार और शीतकालीन छुट्टियों को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने अवकाश की घोषणा कर दी है।

    विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, दशहरा, दीपावली और शीतकालीन अवकाश के लिए कुल 15 दिनों की छुट्टी निर्धारित की गई है। जारी आदेश के मुताबिक दशहरा अवकाश 17 अक्टूबर 2026 से 21 अक्टूबर 2026 तक रहेगा। इस दौरान स्कूल पांच दिनों के लिए बंद रहेंगे। इसी तरह दीपावली अवकाश 6 नवंबर 2026 से 10 नवंबर 2026 तक निर्धारित किया गया है।

    दीपावली के अवसर पर भी विद्यार्थियों और शिक्षकों को पांच दिनों का अवकाश मिलेगा। वहीं, साल के अंत में शीतकालीन अवकाश 24 दिसंबर 2026 से 28 दिसंबर 2026 तक रहेगा। यह अवकाश भी पांच दिनों का होगा। इस तरह छत्तीसगढ़ के स्कूलों में दशहरा, दीपावली और शीतकालीन अवकाश को मिलाकर कुल 15 दिनों की छुट्टियां रहेंगी। स्कूल शिक्षा विभाग, मंत्रालय की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।

  • कांग्रेस में भाई के जाने पर मंत्री खुशवंत साहेब का बयान, विभाजनकारी नीति का आरोप

    कांग्रेस में भाई के जाने पर मंत्री खुशवंत साहेब का बयान, विभाजनकारी नीति का आरोप

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ की सियासत में उस वक्त बड़ा उलटफेर हुआ, जब कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े ढाल दास ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया. उनके कांग्रेस प्रवेश के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई. इस पर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कांग्रेस पर परिवार और समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया है.

    मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि कांग्रेस की नीति हमेश से फूट डालो और राज करो की रही है. कांग्रेस आपस में लड़ाने का काम कर रही है. कांग्रेस एक परिवार, समाज और धर्म को एक-दूसरे से लड़ाने का काम कर रही है. लेकिन हम सभी दृढ़ संकल्पित हैं और राष्ट्र प्रथम, देश प्रथम की विचारधारा से जुड़े हुए हैं. हमारा लक्ष्य प्रदेश को विकसित बनाने का है.

    कांग्रेस में आपसी कलह
    पीसीसी चीफ बैज के कांग्रेस से सीएम उम्मीदवारों वाले बयान पर मंत्री खुशवंत साहेब ने निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है. कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. आपसी कलह साफ दिखाई दे रही है. उन्होंने कहा कि जनता ने कांग्रेस को पहले ही अपनी पसंद से हटा दिया है. कांग्रेस कितना भी प्रयास कर ले, जनता का विश्वास खो चुकी है.

    कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर पर तंज कसते हुए खुशवंत साहेब ने कहा कि प्रशिक्षण शिविर से कुछ नहीं होने वाला. कांग्रेस ग्राउंड में कितना भी मेहनत कर ले, वहां पैसों का खेल और भ्रष्टाचार चलता है. 20 निष्कासित नेताओं की कांग्रेस में वापसी को लेकर खुशवंत साहेब ने कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जितने भी अपराध होते हैं, उनमें कांग्रेस का नाम सामने आता है. कांग्रेस पहले निष्कासन का पत्र जारी करती है और फिर उसे वापस ले लेती है.