Category: छत्तीसगढ़

  • महतारी वंदन योजना से लक्ष्मी मांझी की जिंदगी में आया बदलाव, सिलाई मशीन ने खोली आत्मनिर्भरता की राह

    महतारी वंदन योजना से लक्ष्मी मांझी की जिंदगी में आया बदलाव, सिलाई मशीन ने खोली आत्मनिर्भरता की राह

    रायपुर

    महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई राह खोल रही है। योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से महिलाएं अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ स्वरोजगार की दिशा में भी कदम बढ़ा रही हैं। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत गोरखपुर के आवास मोहल्ला निवासी लक्ष्मी मांझी की कहानी भी इसी बदलाव की एक प्रेरक मिसाल है।

    लक्ष्मी मांझी बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें लगातार आर्थिक सहायता मिल रही है। योजना की 31वीं किस्त की राशि भी उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई है। इस आर्थिक सहायता ने उनके लिए न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करना आसान बनाया, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर भी दिया।

    सिलाई मशीन खरीदकर शुरू किया स्वरोजगार

    लक्ष्मी मांझी ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को बचाकर सिलाई मशीन खरीदने का निर्णय लिया। सिलाई मशीन मिलने के बाद उन्होंने घर से ही सिलाई का काम शुरू कर दिया। अब वे आसपास की महिलाओं और परिवार के लोगों के कपड़े सिलकर अपनी आय अर्जित कर रही हैं।

    पहले जहां अपनी व्यक्तिगत जरूरतों और परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भरता रहती थी, वहीं अब सिलाई के काम से होने वाली आमदनी के माध्यम से लक्ष्मी मांझी परिवार की आर्थिक व्यवस्था में स्वयं योगदान दे रही हैं। घर से ही काम करने की सुविधा के कारण वे घरेलू जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए स्वरोजगार भी कर पा रही हैं।

    बच्चों की पढ़ाई में भी कर रहीं सहयोग

    लक्ष्मी मांझी बताती हैं कि सिलाई से होने वाली आय और महतारी वंदन योजना से मिलने वाली सहायता राशि का उपयोग वे परिवार की आवश्यकताओं के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में भी कर रही हैं। बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर पाना उनके लिए संतोष और आत्मविश्वास का विषय है।

    वे कहती हैं कि नियमित आर्थिक सहायता मिलने से परिवार की छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत हुई है। इसी सहायता को बचाकर उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और आज यही मशीन उनके लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन गई है। इससे उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक नई शुरुआत हुई है।

    प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से घरेलू जीवन भी हुआ आसान

    लक्ष्मी मांझी को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन का लाभ भी प्राप्त हुआ है। इससे खाना बनाने के लिए स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिली है और घरेलू कार्य पहले की तुलना में अधिक आसान हुए हैं। महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने से उनके परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।

    सरकारी योजनाओं का लाभ बन रहा आत्मनिर्भरता का आधार

    लक्ष्मी मांझी का कहना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ जब जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचता है, तो उसका असर केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवारों को आगे बढ़ने और अपने लिए नए अवसर तैयार करने का रास्ता भी मिलता है। महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का उपयोग उन्होंने अपनी जरूरतों के साथ-साथ स्वरोजगार शुरू करने में किया, जिससे अब वे स्वयं आय अर्जित कर रही हैं।

    लक्ष्मी मांझी ने महतारी वंदन योजना सहित शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय जी के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं से मिली सहायता ने उनके परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है।

    लक्ष्मी मांझी की यह कहानी इस बात की मिसाल है कि यदि आर्थिक सहायता का सही उपयोग किया जाए तो सरकारी योजनाएं परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार भी बन सकती हैं।

  • सेवा की कहानी: अमृत सरोवर बना महिलाओं की आजीविका का आधार, मछली पालन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम

    सेवा की कहानी: अमृत सरोवर बना महिलाओं की आजीविका का आधार, मछली पालन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम

    रायपुर

     गांव में बना अमृत सरोवर अब जल संरक्षण के साथ ग्रामीण महिलाओं की आजीविका का जरिया भी बन रहा है। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड की ग्राम पंचायत बिरीमकेला के ज्योति स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने अमृत सरोवर में मछली पालन शुरू कर आय की नई राह बनाई है। पहले किसी आयमूलक गतिविधि से नहीं जुड़ी इन महिलाओं को सरोवर के रूप में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधन मिला तो उन्होंने सामूहिक प्रयास से इसे अपनी आजीविका का माध्यम बना लिया। पहली बार मछलियों की बिक्री से हुई आमदनी ने समूह का हौसला बढ़ाया है और अब महिलाओं ने दोबारा मछली पालन शुरू कर दिया है।

    पहली बिक्री से मिली आमदनी ने बढ़ाया महिलाओं का हौसला

    ज्योति स्व-सहायता समूह की सदस्य रजनी चौहान बताती हैं कि अमृत सरोवर मिलने के बाद समूह ने पहली बार मछली पालन की गतिविधि शुरू की। तैयार हुई मछलियों में से लगभग 15 किलो मछली की बिक्री की गई, जिससे समूह को पहली बार इस गतिविधि से आमदनी हुई।

    मछली पालन से मिली इस शुरुआती सफलता ने समूह की महिलाओं को इसे आगे भी जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। अब महिलाएं इस गतिविधि को नियमित आजीविका के साधन के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

    दोबारा शुरू किया मछली पालन, नियमित आजीविका बनाने की तैयारी

    रजनी बताती हैं कि समूह ने एक बार फिर अमृत सरोवर में मछलियां डाली हैं। इस बार 10 पैकेट डाले गए हैं। समूह की महिलाएं मिलकर मछली पालन का काम कर रही हैं और आने वाले समय में इससे अपनी आमदनी को और बढ़ाना चाहती हैं। अमृत सरोवर से जुड़ने से पहले समूह के पास ऐसी कोई आयमूलक गतिविधि नहीं थी। अब स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जल संसाधन का उपयोग करते हुए महिलाएं सामूहिक रूप से मछली पालन कर रही हैं। इससे उन्हें गांव में ही काम और आय का अवसर मिला है।

    “आजीविका बढ़ाएंगे और अपने पैरों पर खड़े होंगे”

    रजनी चौहान ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “पहले हम लोग समूह में कुछ नहीं करते थे। अब अमृत सरोवर मिला है, जिसमें मछली पालन कर रहे हैं और हमारी आजीविका बढ़ रही है। आगे भी हम लोग आजीविका बढ़ाएंगे और अपने पैरों पर खड़े होंगे।” उन्होंने समूह की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

    जल संरक्षण के साथ आजीविका का भी बना माध्यम

    सेवा संकल्प अभियान के तहत ज्योति स्व-सहायता समूह की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि गांव में तैयार जल संरचनाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़कर ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं। अमृत सरोवर में मछली पालन से रजनी और उनकी साथी महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया है। अब उनका प्रयास इस गतिविधि को आगे बढ़ाकर अपनी आमदनी मजबूत करने और अपने पैरों पर खड़े होने का है।

  • पक्का मकान  पीएम जनमन से पहाड़ी कोरवा परिवारों को मिला सुरक्षित आशियाना, आवास प्लस 2.0 से छूटे परिवारों तक भी पहुंचेगा लाभ

    पक्का मकान पीएम जनमन से पहाड़ी कोरवा परिवारों को मिला सुरक्षित आशियाना, आवास प्लस 2.0 से छूटे परिवारों तक भी पहुंचेगा लाभ

    रायपुर

    कभी बारिश में टपकती छत और कमजोर दीवारों के बीच रात गुजारने को मजबूर परिवार आज अपने पक्के घर में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना जशपुर जिले के ऐसे हजारों परिवारों के लिए केवल एक आवास योजना नहीं, बल्कि वर्षों पुराने सपने को साकार करने और जीवन में स्थायित्व लाने का माध्यम बनी है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में अब तक 1 लाख 12 हजार 948 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 96 हजार 801 आवास पूर्ण हो चुके हैं।

    प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों तक भी पक्के आवास और बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। वहीं मुख्यमंत्री  साय की मंशा के अनुरूप आवास प्लस 2.0 के तहत पूर्व में छूटे परिवारों का सर्वेक्षण कर पात्रतानुसार उन्हें भी योजना से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

    कच्चे मकान की चिंता खत्म, पक्की छत ने दिया सुरक्षा और सम्मान का भरोसा

    जशपुर जिले के अनेक परिवारों का जीवन वर्षों तक कच्चे मकानों में अभाव और कठिनाइयों के बीच बीता। कमजोर दीवारें, टूटी-फूटी छत और बरसात के दिनों में घर के भीतर टपकता पानी उनकी रोजमर्रा की परेशानी का हिस्सा था। बारिश के दौरान सामान को भीगने से बचाना और परिवार के लिए सुरक्षित जगह तलाशना बड़ी चुनौती होती थी। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण अपना पक्का घर बनाना ऐसे परिवारों के लिए आसान नहीं था।

    प्रधानमंत्री आवास योजना ने इस स्थिति को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पक्की छत मिलने से परिवारों को मौसम की मार से सुरक्षा के साथ अपने घर में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का भरोसा मिला है। आज ये आवास केवल ईंट और सीमेंट से बने मकान नहीं, बल्कि परिवारों के बेहतर भविष्य, सुरक्षा और आत्मसम्मान की मजबूत नींव बन रहे हैं।

    जशपुर में 1.12 लाख से अधिक आवास स्वीकृत, 96,801 आवास पूर्ण

    प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जशपुर जिले में अब तक कुल 1 लाख 12 हजार 948 आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 96 हजार 801 आवासों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इन पक्के घरों में हजारों परिवार अब अपने बच्चों और परिजनों के साथ सुरक्षित जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

    योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के साथ उनके जीवन स्तर में व्यापक सुधार का प्रयास किया जा रहा है। आवास के साथ स्वच्छ पेयजल, बिजली, शौचालय और एलपीजी जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच परिवारों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने में सहायक हो रही है। इस तरह पक्का मकान परिवार की सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य, स्वच्छता और बेहतर जीवन स्तर का भी आधार बन रहा है।

    पीएम जनमन से पहाड़ी कोरवा परिवारों के जीवन में आया बदलाव

    जशपुर जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों तक विकास की बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने में प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2023 से 2025 तक जिले में पीएम जनमन के अंतर्गत 2,100 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 1,614 से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं।

    इससे विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों को सुरक्षित पक्के आवास का लाभ मिला है। पीएम जनमन के तहत आवास के साथ स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, सड़क एवं दूरसंचार कनेक्टिविटी और स्थायी आजीविका जैसी बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की यह पहल उनके जीवन में स्थायी बदलाव का आधार बन रही है।

    आवास प्लस 2.0 : छूटे 1.02 लाख से अधिक परिवारों का हुआ सर्वेक्षण

    पक्के आवास की सुविधा से कोई पात्र परिवार वंचित न रहे, इसके लिए आवास प्लस 2.0 के तहत जिले में पूर्व में छूटे परिवारों का पुनः सर्वेक्षण किया गया है। इसके अंतर्गत 1 लाख 2 हजार 371 परिवारों का सर्वे किया गया है। सर्वेक्षण के बाद निर्धारित पात्रता के आधार पर परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना सहित संबंधित योजनाओं से लाभान्वित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    इस पहल से उन जरूरतमंद परिवारों के लिए भी पक्के आवास की उम्मीद मजबूत हुई है, जो किसी कारणवश पूर्व में योजना में शामिल नहीं हो पाए थे। इससे जिले में पक्के आवास का दायरा और व्यापक होगा तथा अधिक से अधिक पात्र परिवारों तक योजना का लाभ पहुंच सकेगा।

    एक पक्का घर, परिवार के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव

    प्रधानमंत्री आवास योजना से जशपुर में दिखाई दे रहा बदलाव केवल मकानों की बढ़ती संख्या तक सीमित नहीं है। पक्के घर ने हजारों परिवारों को मौसम की चिंता से राहत, बच्चों को बेहतर वातावरण और पूरे परिवार को सुरक्षा तथा सम्मान का अहसास दिया है। पीएम जनमन और आवास प्लस 2.0 जैसी पहलों के माध्यम से इस बदलाव का दायरा दूरस्थ और वंचित परिवारों तक भी लगातार बढ़ रहा है।

    सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत ‘सेवा मेरा योगदान’ की भावना के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच जशपुर के हजारों पक्के आवास बदलाव की एक सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। कभी जो पक्का घर परिवारों के लिए दूर का सपना था, वही आज उनके सुरक्षित वर्तमान और बेहतर भविष्य का आधार बन चुका है।

  • खरीफ की 30 और रबी की 15 हेक्टेयर फसल को मिल रहा सिंचाई का पानी, वर्तमान में पूरी क्षमता से भरा बांध

    खरीफ की 30 और रबी की 15 हेक्टेयर फसल को मिल रहा सिंचाई का पानी, वर्तमान में पूरी क्षमता से भरा बांध

    रायपुर

    ग्रामीणों की एक मांग ने आज सरगुजा जिले के सकालो और आसपास के क्षेत्र में जल उपलब्धता की तस्वीर बदल दी है। मवेशियों के लिए पेयजल और निस्तारी की समस्या को देखते हुए ग्रामीणों की मांग पर निर्मित सकालो मुरना बांध अब सिंचाई, निस्तारी और जल संरक्षण का महत्वपूर्ण आधार बन गया है। बांध से खरीफ की 30 हेक्टेयर और रबी की 15 हेक्टेयर फसल को पानी मिल रहा है। इस तरह कुल 45 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को खेती में सहूलियत मिली है।

    ग्रामीणों की जरूरत बनी बांध निर्माण की पहल का आधार

    अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम सकालो में ग्रामीणों ने मवेशियों के लिए पेयजल संकट और निस्तारी की समस्या को देखते हुए जल संसाधन विभाग से सकालो मुरना में बांध निर्माण की मांग की थी। ग्रामीणों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जल संसाधन विभाग ने स्थल का मुआयना किया और बांध निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा।

    सकालो मुरना बांध निर्माण योजना को 30 जनवरी 2023 को 374.96 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिली। इसके बाद निविदा प्रक्रिया पूरी कर निर्माण शुरू किया गया और 15 जून 2024 को बांध का निर्माण पूर्ण हुआ।

    पूरी क्षमता से भरा बांध, आसपास के क्षेत्र में बढ़ा जलस्तर

    वर्तमान में सकालो मुरना बांध पूरी क्षमता से भरा हुआ है। बांध में पर्याप्त जलभराव होने से सकालो मुरना के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी जलस्तर बढ़ा है। इससे निस्तारी और जल संकट की समस्या से राहत मिलने के साथ मवेशियों के लिए भी पेयजल की उपलब्धता बेहतर हुई है।

    स्थानीय स्तर पर जल संग्रहण की सुविधा विकसित होने से ग्रामीणों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है और क्षेत्र में जल संरक्षण को भी मजबूती मिली है।

    45 हेक्टेयर खेती को मिला सिंचाई का सहारा

    बांध का बड़ा लाभ क्षेत्र के किसानों को मिल रहा है। इससे लगभग 30 हेक्टेयर खरीफ और 15 हेक्टेयर रबी फसल के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध हो रहा है। कुल 45 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में पानी की सुविधा मिलने से किसानों के लिए खेती करना आसान हुआ है।

    रबी सीजन में भी पानी की उपलब्धता ने किसानों के लिए खेती की संभावनाओं को मजबूत किया है। सिंचाई का स्थानीय स्रोत उपलब्ध होने से खेती को सहारा मिलने के साथ किसानों की आजीविका को भी संबल मिला है।

    जल संरक्षण के साथ आवागमन की भी मिली सुविधा

    सकालो मुरना बांध का लाभ केवल जल संग्रहण और सिंचाई तक सीमित नहीं है। बांध निर्माण के बाद आसपास के ग्रामीणों को आवागमन में भी सुविधा मिली है। इस प्रकार ग्रामीणों की मांग पर तैयार हुई यह जल संरचना सिंचाई, निस्तारी, मवेशियों के पेयजल और आवागमन जैसी कई जरूरतों को पूरा कर रही है।

    सेवा संकल्प अभियान के तहत सकालो मुरना बांध की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि स्थानीय जरूरत के अनुरूप तैयार जल संरचना किस तरह पूरे क्षेत्र में बदलाव का आधार बन सकती है। जल संसाधन संभाग क्रमांक-01, अम्बिकापुर द्वारा निर्मित यह बांध आज जल संरक्षण के साथ किसानों की खेती और ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों को सहारा देने वाली महत्वपूर्ण परिसंपत्ति बन गया है।

  • वन मंत्री  कश्यप जगदलपुर के राहत शिविर में प्रभावित परिवारों से मिले, भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की ली जानकारी

    वन मंत्री कश्यप जगदलपुर के राहत शिविर में प्रभावित परिवारों से मिले, भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की ली जानकारी

    रायपुर

    वन मंत्री  केदार कश्यप ने बस्तर के बाढ़ प्रभावित घोटिया और नारायणपाल क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का मौके पर जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली और अधिकारियों को नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    मंत्री  कश्यप ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर कमी नहीं होनी चाहिए। प्रभावित लोगों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखते हुए उन्हें समय पर हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।

    मंत्री  कश्यप ने जगदलपुर टाउन हॉल में बनाए गए राहत शिविर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने शिविर में रह रहे बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और उनकी आवश्यकताओं के संबंध में चर्चा की। उन्होंने शिविर में नाश्ता, भोजन, पेयजल और आवश्यक दवाइयों सहित उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। 

    वन मंत्री  कश्यप ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राहत शिविर में रह रहे परिवारों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित होती रहें और प्रभावित परिवारों की जरूरतों के अनुसार तत्काल सुविधाएं मुहैय्या कराई जाएं।

    वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संकट की इस घड़ी में बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहना और प्रभावित लोगों की सुरक्षा और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस अवसर पर जगदलपुर के महापौर  संजय पांडे भी उपस्थित थे।

  • महानदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत-बचाव कार्य जारी

    महानदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत-बचाव कार्य जारी

    रायपुर

    महानदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पुसौर विकासखंड अंतर्गत महानदी के तटीय क्षेत्रों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

    पुसौर विकासखंड में महानदी के तटीय इलाके में स्थित गांव सूरजगढ़ और परसापाली में बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों को राहत शिविरों में शिफ्ट किया जा रहा है। सूरजगढ़ गांव में प्रभावित करीब 450 लोग ग्रामीणों को पड़ीगांव राहत शिविर में शिफ्ट किया जा रहा है। शिविर में भोजन, पेयजल सहित आवश्यक व्यवस्थाएं प्रशासन द्वारा की जा रही हैं। इसी तरह परसापाली में भी बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रभावित लोगों के लिए छिछोर उमरिया के स्कूल भवन में राहत शिविर बनाया गया है। यहां भी प्रभावित ग्रामीणों को पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन द्वारा महानदी के अन्य तटीय क्षेत्रों में भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। तटीय इलाकों में बाढ़ की संभावना को देखते हुए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। प्रभावित क्षेत्रों में मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

    एसडीएम  महेश शर्मा सहित प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। अधिकारी मौके पर पहुंचकर जलस्तर, प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और राहत व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। पुसौर जनपद पंचायत के सीईओ, पंचायत सचिव, पटवारी तथा पशुपालन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी मौके पर उपस्थित रहकर राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों से जलभराव वाले क्षेत्रों और नदी के आसपास जाने से बचने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

  • कुंगारपाल में वन मंत्री श्री केदार कश्यप की मौजूदगी में ग्रामीणों ने सुना ‘मन की बात’ का 138 वां संस्करण

    कुंगारपाल में वन मंत्री श्री केदार कश्यप की मौजूदगी में ग्रामीणों ने सुना ‘मन की बात’ का 138 वां संस्करण

    रायपुर

     जिले के जनपद पंचायत बस्तर के अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंगारपाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' का 138 वां संस्करण पूरे उत्साह के साथ सुना गया। इस विशेष प्रसारण के दौरान छत्तीसगढ़ शासन के वन मंत्री केदार कश्यप मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
    कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सहभागिता देखने को मिली। ग्रामीणों ने वन मंत्री के साथ बैठकर देश के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक बदलावों और जन-सरोकारों से जुड़े विषयों को सुना।           

    इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, जनपद पंचायत अध्यक्ष संतोष बघेल तथा जिला पंचायत सदस्य निर्देश दीवान प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इसके अलावा क्षेत्र के विभिन्न जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।

  • केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने सखी वन स्टॉप सेंटर का किया निरीक्षण

    केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने सखी वन स्टॉप सेंटर का किया निरीक्षण

    रायपुर

     केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने अपने दुर्ग प्रवास के दौरान दुर्ग स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण कर वहां संचालित व्यवस्थाओं और सेवाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने संकटग्रस्त महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही काउंसलिंग, कानूनी सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं एवं पुनर्वास संबंधी सुविधाओं की जानकारी ली।

     सखी वन स्टॉप सेंटर में घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद सहित विभिन्न समस्याओं से पीड़ित महिलाओं को काउंसलिंग के साथ आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। महिला एवं बाल विकास अधिकारी द्वारा केन्द्रीय राज्यमंत्री को सेंटर में दर्ज होने वाले प्रकरणों और महिलाओं को प्रदान की जा रही सेवाओं के संबंध में जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान सावित्री ठाकुर ने संकटग्रस्त महिलाओं को समय पर सुरक्षा, आवास, कानूनी सहायता और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

     राज्यमंत्री ने सेंटर में संचालित विभिन्न सुविधाओं का भी अवलोकन किया। इनमें परामर्श, विधिक सहायता, चिकित्सा सहायता, पुलिस सहायता तथा अस्थायी आश्रय की व्यवस्था शामिल है। निरीक्षण के दौरान सेंटर की व्यवस्थाओं, साफ-सफाई और स्टाफ द्वारा किए जा रहे कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने केंद्र की सराहना की। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री अशोक शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री अजय साहू सहित वन स्टॉप सेंटर के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।

  • हर संभव मदद का दिया भरोसा

    हर संभव मदद का दिया भरोसा

    ​रायपुर
         
     प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं आपदा प्रबंधन कार्यों को गति देने के लिए राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने आज लखना, बेमता और बलौदीखुर्द गांवों का सघन दौरा किया। उन्होंने बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनका हालचाल जाना और पीड़ितों को ढांढस बंधाते हुए आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस विपदा की घड़ी में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

     ​अपने दौरे के दौरान राजस्व मंत्री ने गांव-गांव में बाढ़ के पानी से हुए नुकसान का प्रत्यक्ष जायजा लिया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से आत्मीय चर्चा करते हुए उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना। ग्रामीणों को भरोसा दिलाते हुए  वर्मा ने कहा कि आपदा की इस कठिन परिस्थिति में शासन-प्रशासन पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है। किसी भी प्रभावित परिवार को असहाय नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि फसल, मकान एवं जन-धन के नुकसान का निष्पक्ष और त्वरित आकलन कराया जा रहा है, ताकि सभी पीड़ितों को नियमानुसार जल्द से जल्द राहत राशि और सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
             
    ​निरीक्षण के दौरान मंत्री  वर्मा ने मौके पर उपस्थित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था बिना किसी रुकावट के सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही फसल क्षति, मकानों के नुकसान और पशु हानि का पारदर्शी सर्वे तुरंत पूरा करने के आदेश दिए गए, ताकि मुआवजा वितरण में कोई देरी न हो। संक्रामक बीमारियों के खतरे को देखते हुए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को गांवों में विशेष कैंप लगाने और कीटनाशकों का छिड़काव कराने की बात भी कही।
           
    ​आपदा के समय सीधे अपने बीच पहुंचे राजस्व मंत्री की इस संवेदनशीलता और त्वरित पहल से लखना, बेमता एवं बलौदीखुर्द के ग्रामीणों ने मंत्री  वर्मा का आभार प्रकट किया। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित राजस्व और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

  • नेलसनार में बाढ़ के बीच जिला प्रशासन की मानवीय पहल, बाढ़ में फंसे यात्रियों को कराया भोजन

    नेलसनार में बाढ़ के बीच जिला प्रशासन की मानवीय पहल, बाढ़ में फंसे यात्रियों को कराया भोजन

    बीजापु

    भैरमगढ़ के समीप नेलसनार क्षेत्र में बाढ़ के कारण नेशनल हाईवे के अवरुद्ध होने से आवागमन प्रभावित हुआ। इस दौरान मार्ग में फंसे यात्रियों को जिला प्रशासन की ओर से भोजन उपलब्ध कराया गया।

    बाढ़ की स्थिति को देखते हुए 26 सितंबर को दिन के समय करीब 150 लोगों तथा रात्रि में लगभग 70 मुसाफिरों को भोजन कराया गया। विपरीत परिस्थितियों में जिला प्रशासन की इस मानवीय पहल से रास्ते में फंसे लोगों को राहत मिली।

    कलेक्टर श्री विश्वदीप के मार्गदर्शन में संबंधित क्षेत्रों के एसडीएम, तहसीलदार सहित मैदानी अमला लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासनिक एवं एसडीआरएफ की टीम द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है तथा आवश्यकता के अनुसार प्रभावित एवं फंसे लोगों तक सहायता पहुंचाई जा रही है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि बाढ़ प्रभावित मार्गों पर अनावश्यक आवागमन से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।