Category: छत्तीसगढ़

  • अब घर बैठे 1-क्लिक में कराएं जमीन का सीमांकन, तहसील दफ्तरों के चक्करों से मिली आजादी!

    अब घर बैठे 1-क्लिक में कराएं जमीन का सीमांकन, तहसील दफ्तरों के चक्करों से मिली आजादी!

    ​रायपुर

     ​राज्य में नागरिक सुविधाओं को सुगम, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। प्रदेश के राजस्व एवं भू-अभिलेख विभाग ने जमीन के सीमांकन संबंधी प्रकरणों के त्वरित और सहज निपटारे के लिए एक नया ऑनलाइन पोर्टल विकसित कर लागू कर दिया है। इस आधुनिक व्यवस्था के शुरू होने से अब आम नागरिकों को अपनी ही जमीन की नाप-जोख या सीमांकन कराने के लिए तहसील कार्यालयों के बार-बार चक्कर काटने की मजबूरी से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। राज्य का कोई भी नागरिक अब अपने घर अथवा नजदीकी केंद्र से ही सीमांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेगा।  

     ​पुरानी व्यवस्था के तहत जमीन का सीमांकन कराने के लिए आवेदकों को खुद तहसील दफ्तर जाकर आवेदन जमा करना पड़ता था। इतना ही नहीं, आवेदन के बाद फाइल किस स्तर पर अटकी है, कार्रवाई पूरी होने में देरी क्यों हो रही है या किन कारणों से मामला लंबित है—इसकी सही जानकारी समय पर न मिल पाने के कारण लोगों को हफ्तों और महीनों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। नवीन व्यवस्था ने इस पूरी जटिल प्रक्रिया को बेहद सुलभ बना दिया है। अब नागरिक अपनी सुविधा अनुसार लोक सेवा केंद्र (CSC), सेवा सेतु या फिर राजस्व विभाग के सिटीजन पोर्टल के माध्यम से सीधे ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे।  

     ​जैसे ही कोई आवेदक ऑनलाइन फॉर्म जमा करेगा, वह सीधे संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार की लॉगिन आईडी में प्राप्त हो जाएगा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। इसके साथ ही सीमांकन की पूरी जांच और मौका मुआयना करने के बाद राजस्व निरीक्षक (RI) भी अपनी जांच रिपोर्ट ऑनलाइन ही प्रस्तुत करेंगे। इस नए पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आवेदक अपने आवेदन की अद्यतन स्थिति, प्रकरण की प्रगति, फाइल लंबित रहने के कारणों और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई की हर छोटी-बड़ी अपडेट घर बैठे देख सकेंगे, जिससे प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनी रहेगी और मामलों का समय-सीमा में निपटारा हो सकेगा।  
             ​
    इस नई व्यवस्था की एक और बड़ी राहत देने वाली बात यह है कि यदि सीमांकन प्रक्रिया के दौरान किसी भी पक्ष द्वारा कोई आपत्ति दर्ज नहीं की जाती है, तो आवेदक को तहसील कार्यालय में शारीरिक रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। केवल किसी प्रकार की आपत्ति या जमीन से जुड़ा विवाद सामने आने पर ही संबंधित पक्षों को आमने-सामने की कार्रवाई के लिए बुलाया जाएगा।

  • विधेयक के प्रारंभिक प्रारूप पर नागरिकों और संस्थाओं को अपनी बात रखने का अवसर  हिंदी और अंग्रेजी में पुलिस विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रारूप, 30 दिनों के भीतर दे सकेंगे सुझाव और आपत्तियां

    विधेयक के प्रारंभिक प्रारूप पर नागरिकों और संस्थाओं को अपनी बात रखने का अवसर हिंदी और अंग्रेजी में पुलिस विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रारूप, 30 दिनों के भीतर दे सकेंगे सुझाव और आपत्तियां

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग की ड्राफ्ट कमेटी द्वारा छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 का प्रारंभिक प्रारूप तैयार किया है। प्रस्तावित विधेयक को लेकर राज्य के आम नागरिकों, विशेषज्ञों और संबंधित हितधारकों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं।

     गृह विभाग की ड्राफ्ट कमेटी द्वारा कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में आवश्यक संशोधन करते हुए नए विधेयक का प्रारूप तैयार किया गया है। आम नागरिक प्रस्तावित प्रावधानों का अध्ययन कर अपनी राय शासन के समक्ष रख सकें, इसके लिए विधेयक का प्रारूप हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है।

    विधेयक का प्रारूप पुलिस विभाग की वेबसाइट cgpolice.gov.in के नोटिस/प्रेस रिलीज सेक्शन में हिंदी एवं अंग्रेजी में अपलोड किया गया है। प्रस्तावित विधेयक के किसी प्रावधान को लेकर किसी नागरिक, संस्था अथवा संबंधित हितधारक का कोई सुझाव या आपत्ति है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत शासन को भेजा जा सकता है।

    सुझाव देने के लिए 30 दिनों का समय

    राज्य शासन ने सुझाव और आपत्तियां प्रस्तुत करने के लिए 30 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की है। इसके माध्यम से प्रस्तावित विधेयक पर आम जनता के साथ ही विषय विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों को भी अपनी राय रखने का अवसर मिलेगा। सुझाव एवं आपत्तियां 'प्रमुख सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, गृह एवं जेल विभाग, मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर, अटल नगर' के पते पर भेजी जा सकती हैं।

    इस पहल के माध्यम से प्रस्तावित छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 पर नागरिकों और संबंधित पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए उनके सुझाव एवं आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी।

  • आरोपी सहायक शिक्षक गिरफ्तार, विभाग ने किया सस्पेंड

    आरोपी सहायक शिक्षक गिरफ्तार, विभाग ने किया सस्पेंड

    सूरजपुर.

    सूरजपुर में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म मामले में गिरफ्तार सहायक आरोपी शिक्षक मधूसुदन गुप्ता के खिलाफ शिक्षा विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है. जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा ने आरोपी शिक्षक को तत्काल निलंबित कर दिया है. इस अवधि में उसका मुख्यालय प्रेमनगर शिक्षा कार्यालय रहेगा.

    जानकारी के मुताबिक, भटगांव थाना क्षेत्र में सरकारी स्कूल में 11 वीं कक्षा की छात्रा के साथ दुष्कर्म का मामला उजागर हुआ. आरोप है कि आरोपी शिक्षक द्वारा उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया गया. अश्लील वीडियो बनाकर बाद में उसे ब्लेकमेल और बार-बार शारीरिक शोषण करता था. 
    शिकायत के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार किया. कोर्ट में पेश करने के बाद उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है. मामले में पुलिस की जांच जारी है.

    भटगांव थाना में शिक्षक मधूसुदन गुप्ता के खिलाफ एफआईआर और गिरफ्तारी के बाद शिक्षा विभाग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है. उक्त कृत्य को प्रथम दृष्टया विभाग की छवि धूमिल करने वाला और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण अधिनियम नियम 1965 के नियम 3 का उल्लंघन माना गया. शिक्षक को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. सस्पेंशन की अवधि के दौरान, मधूसुदन गुप्ता का मुख्यालय प्रेमनगर स्थित शिक्षा कार्यालय में तय किया गया है. वहीं नियमों के अनुसार निर्वाह भत्ता भी दिया जाएगा.

  • महानदी जल विवाद सुलझाने की कवायद, शाह करेंगे साय-माझी संग बैठक

    महानदी जल विवाद सुलझाने की कवायद, शाह करेंगे साय-माझी संग बैठक

    रायपुर.

    महानदी जल विवाद के समाधान को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच बातचीत अब महत्वपूर्ण दौर में पहुंच गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 1 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की उच्चस्तरीय बैठक होने की संभावना है।

    इसकी जानकारी ओडिशा के महाधिवक्ता पितांबर आचार्य ने दी है। इसी बीच विधानसभा का मौजूदा सत्र समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के रायपुर आने और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात करने की भी संभावना है।

    मुख्यमंत्री साय ने CM माझी से की थी मुलाकात
    बता दें कि इससे पहले 20 सितंबर को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भुवनेश्वर में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से उनके निवास पर शिष्टाचार भेंट की थी। इस दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच छत्तीसगढ़ और ओडिशा के आपसी सहयोग, विकास, जनकल्याण सहित दोनों राज्यों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सौहार्दपूर्ण और सार्थक चर्चा हुई थी। सीएम साय ने महानदी जल विवाद के संबंध में कहा कि लंबे समय से चले आ रहे इस विषय के समाधान की दिशा में अब सकारात्मक वातावरण बना है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा, दोनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार है। केंद्र सरकार के सहयोग और दोनों राज्यों की सकारात्मक पहल से इस विषय का बहुत जल्द समाधान निकलने की उम्मीद है।

  • राज्य प्रशासनिक सेवा के 125 अफसरों का ट्रांसफर, कई जिलों में बदले अपर कलेक्टर

    राज्य प्रशासनिक सेवा के 125 अफसरों का ट्रांसफर, कई जिलों में बदले अपर कलेक्टर

    रायपुर
    राज्य शासन ने मंगलवार को राज्य प्रशासनिक सेवा के 125 अधिकारियों के तबादले किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में अधिकारियों को प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित करते हुए नई पदस्थापना दी गई है। आदेश में अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर समेत मंत्रालय और विभिन्न विभागों में पदस्थ अधिकारियों के नाम शामिल हैं।

    कई जिलों के अपर कलेक्टर भी बदले
    तबादला सूची में कई जिलों के अपर कलेक्टर भी बदले गए हैं। सुरेंद्र प्रसाद वैद्य को कोरिया के अपर कलेक्टर से बालोद का अपर कलेक्टर बनाया गया है। चंद्रकांत कौशिक को बालोद से सारंगढ़-बिलाईगढ़, सुनील कुमार नायक को सरगुजा से जशपुर और राजेश कुमार पात्रे को दंतेवाड़ा के अपर कलेक्टर पद से हटाकर नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण में प्रबंधक की जिम्मेदारी दी गई है।

    ट्रांसफर लिस्ट में कई महत्वपूर्ण जिलों के अपर कलेक्टर और संयुक्त कलेक्टर लेवेल के अधिकारी के पद प्रभावित हुए हैं:

    • सुरेन्द्र प्रसाद वैद्य (अपर कलेक्टर, कोरिया) को बालोद का नया अपर कलेक्टर बनाया गया है। 
    • चन्द्रकांत कौशिक (अपर कलेक्टर, बालोद) को सारंगढ़-बिलाईगढ़ स्थानांतरित किया गया है। 
    • सुनील कुमार नायक (अपर कलेक्टर, सरगुजा) अब जशपुर के अपर कलेक्टर का पदभार संभालेंगे। 
    • राजीव कुमार पाण्डेय (अपर संचालक, उच्च शिक्षा) को जशपुर का अपर कलेक्टर नियुक्त किया गया है। 
    • सुश्री योगिता देवांगन (अपर कलेक्टर, दुर्ग) को कोरबा का नया अपर कलेक्टर बनाया गया है। 
    • चन्द्रिका प्रसाद बघेल (अपर कलेक्टर, बस्तर) को सुकमा भेजा गया है। 

    कई अन्य को भी मिली बड़ी जिम्मेदारी
    इसी तरह राजीव कुमार पांडेय को उच्च शिक्षा संचालनालय में अपर संचालक से जशपुर का अपर कलेक्टर बनाया गया है। अरविंद कुमार पांडेय को रायपुर विकास प्राधिकरण से छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी, निमोरा रायपुर में संयुक्त संचालक की जिम्मेदारी दी गई है। निष्ठा पांडेय तिवारी को मुंगेली से बेमेतरा और प्रदीप कुमार साहू को जशपुर से बेमेतरा का अपर कलेक्टर बनाया गया है।

    रायपुर से जुड़े अधिकारियों की भी बदली जिम्मेदारी
    आदेश में रायपुर से जुड़े कई अधिकारियों की पदस्थापना में भी बदलाव किया गया है। रवि राही को रायगढ़ के अपर कलेक्टर पद से रायपुर नगर निगम में अपर आयुक्त बनाया गया है। अतुल विश्वकर्मा को नवा रायपुर में संयुक्त आयुक्त, भू-अभिलेख से रायपुर नगर निगम में अपर आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। ऋचा शर्मा को पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अवर सचिव पद से रायपुर नगर निगम में उपायुक्त बनाया गया है।

    इसके अलावा नितिन तिवारी को बिलासपुर के डिप्टी कलेक्टर से नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण में प्रबंधक बनाया गया है। गोविंद कुमार सिन्हा को नारायणपुर के डिप्टी कलेक्टर पद से हटाकर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड, रायपुर में मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण कर पालन प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

  • कचरा प्रबंधन में रायपुर-बिलासपुर आगे, ‘प्रगति-50’ में मिली जगह

    कचरा प्रबंधन में रायपुर-बिलासपुर आगे, ‘प्रगति-50’ में मिली जगह

    रायपुर.

    भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय की महत्वाकांक्षी ‘प्रगति-50’ (PRAGATI-50) योजना में छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर को शामिल किया गया है। केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से योजना का शुभारंभ किया।

    देश के चुनिंदा 50 शहरों में राज्य के दो शहरों के शामिल होने से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के नगरीय विकास एवं स्वच्छता प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। शुभारंभ कार्यक्रम में चयनित राज्यों के नगरीय विकास विभागों, शहरी स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सहभागिता की। केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू नई दिल्ली से कार्यक्रम में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री अरुण साव राजनांदगांव से कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़े। मुख्यमंत्री साय और उप मुख्यमंत्री साव ने ‘प्रगति-50’ में शामिल होने पर रायपुर और बिलासपुर नगर निगमों, दोनों शहरों के स्वच्छता मित्रों और शहरवासियों को बधाई दी है। रायपुर की महापौर मीनल चौबे और बिलासपुर की महापौर पूजा विधानी के साथ दोनों नगर निगमों के आयुक्त भी कार्यक्रम में ऑनलाइन सम्मिलित हुए।

    प्रधानमंत्री द्वारा ‘प्रगति’ की बैठक में दिए गए निर्देशों पर शुरू हुई पहल
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित 51वीं ‘प्रगति’ बैठक के निर्देशों पर शुरू की गई यह पहल स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत चयनित शहरों में स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं को तेज गति से सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। योजना में देश के 50 शहरों को शामिल किया गया है। इन शहरों को केंद्र सरकार की ओर से विशेष तकनीकी सहयोग, सतत मार्गदर्शन और गहन निगरानी मिलेगी। साथ ही श्रेष्ठ कार्य-पद्धतियों को अपनाने के लिए भी सहयोग दिया जाएगा। ‘प्रगति-50’ के तहत घर-घर कचरा संग्रहण, कचरे का वैज्ञानिक पृथक्करण एवं प्रसंस्करण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाने तथा सार्वजनिक स्वच्छता सुविधाओं व शहरों की साफ-सफाई में सुधार लाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। भारत सरकार की इस महत्वाकांक्षी पहल के अंतर्गत उपयोग किए गए जल के उपचार, पुन: उपयोग और समुचित प्रबंधन को बढ़ावा देने तथा स्वच्छता अभियानों में नागरिकों, संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता बढ़ाने के साथ ही निर्धारित संकेतकों के आधार पर शहरों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा एवं मॉनिटरिंग भी की जाएगी।

    राज्य की कोशिशों का परिणाम
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में राज्य सरकार नगरीय निकायों में स्वच्छता, जनसुविधाओं के विस्तार, प्रभावी कचरा प्रबंधन और बेहतर सेवा-प्रदाय के लिए प्राथमिकता से काम कर रही है। ‘प्रगति-50’ के लिए रायपुर और बिलासपुर का चयन राज्य सरकार की इन कोशिशों का परिणाम है। इसमें दोनों नगर निगमों की सक्रिय भूमिका, स्वच्छता मित्रों की मेहनत और नागरिकों का सहयोग भी शामिल है।

    राज्य के अन्य नगरीय निकायों के लिए बनेगा मॉडल
    ‘प्रगति-50’ के माध्यम से रायपुर और बिलासपुर को राष्ट्रीय स्तर की श्रेष्ठ कार्य-पद्धतियां अपनाने का अवसर मिलेगा। दोनों शहरों में स्वच्छता व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, प्रयुक्त जल प्रबंधन तथा नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में और सुधार किया जाएगा। इन शहरों के अनुभव और नवाचार छत्तीसगढ़ के अन्य नगरीय निकायों के लिए भी उपयोगी मॉडल बन सकेंगे। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के लिए रायपुर और बिलासपुर के चयन पर नगरीय प्रशासन विभाग तथा दोनों निकायों के अधिकारियों एवं स्वच्छता मित्रों को बधाई देते हुए कहा कि दोनों शहरों का चयन पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। यह हमारे स्वच्छता मित्रों के परिश्रम और नागरिकों की भागीदारी का सम्मान है। केंद्र सरकार के सहयोग से दोनों शहर स्वच्छता के क्षेत्र में देश के अग्रणी शहरों में अपनी जगह बनाएंगे।

  • रायपुर ई-बस सेवा की तैयारी तेज, स्कूल-कॉलेज और अस्पतालों से जुड़ेंगे रूट

    रायपुर ई-बस सेवा की तैयारी तेज, स्कूल-कॉलेज और अस्पतालों से जुड़ेंगे रूट

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर में ई-बस सेवा शुरू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार ने ई-बसों के संचालन के लिए मार्च तक की डेडलाइन तय की है। इससे पहले दिसंबर तक जरूरी अधोसंरचना, चार्जिंग स्टेशन, डिपो निर्माण और बसों के रूट निर्धारण का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत रायपुर को भारत सरकार से 100 ई-बसें मिलेंगी। इनके संचालन से शहरवासियों को किफायती, आरामदायक और पर्यावरण हितैषी सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    Raipur E-Bus: स्कूल-कॉलेज और अस्पतालों को जोड़कर बन रहे रूट
    नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग शहरवासियों के साथ रोजाना रायपुर आने वाली फ्लोटिंग पॉपुलेशन की जरूरतों को ध्यान में रखकर ई-बसों के रूट तैयार कर रहा है। रूट निर्धारण में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, प्रमुख बाजार, महत्वपूर्ण संस्थानों और अन्य जनोपयोगी स्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है। उद्देश्य यह है कि ई-बस सेवा शहर के प्रमुख हिस्सों को बेहतर तरीके से जोड़ सके।

    दिसंबर तक पूरा करना है इंफ्रास्ट्रक्चर का काम
    अधिकारियों के अनुसार छत्तीसगढ़ में ई-बस संचालन का यह पहला बड़ा प्रयास है। इसलिए बसों के संचालन से पहले डिपो, चार्जिंग स्टेशन, बस स्टॉप और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। डिपो और सिविल वर्क समेत अन्य निर्माण कार्यों के लिए एनएचएआई, रेलवे और संबंधित विभागों से समन्वय कर आवश्यक स्वीकृतियां और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।

    रियल टाइम होगी ई-बसों की मॉनिटरिंग
    ई-बस सेवा शुरू होने के बाद संचालन की रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी तैयार की जा रही है। इसके तहत रूट प्लानिंग, बस संचालन, डिपो, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बस स्टॉप और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम को एकीकृत किया जाएगा। शहर की परिवहन जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर ई-बस संचालन की प्राथमिकता तय की जा रही है।

    एचटी लाइन को लेकर लंबित प्रक्रिया का हुआ निराकरण
    रायपुर में ई-बसों के संचालन के लिए सीएसपीडीसीएल की ओर से एचटी लाइन बिछाने का काम भी जरूरी है। इसके लिए एनएचएआई के पोर्टल पर अनापत्ति से संबंधित आवेदन लंबित था, जिसका अब निराकरण किया जा चुका है। इसके बाद ई-बस संचालन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।

    चार शहरों में तय हो रहे परिवहन जरूरत के अनुसार रूट
    ई-बस सेवा के लिए रायपुर के अलावा बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा में भी रूट निर्धारित किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन शहरों में रूट तय करते समय स्थानीय परिवहन जरूरतों और नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखा गया है। सरकार का लक्ष्य निर्धारित समय-सीमा में सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ई-बस सेवा शुरू करना है।

  • पीएमश्री योजना से चनाट स्कूल की बदली तस्वीर, बच्चों को मिल रहा बेहतर शैक्षणिक माहौल

    पीएमश्री योजना से चनाट स्कूल की बदली तस्वीर, बच्चों को मिल रहा बेहतर शैक्षणिक माहौल

    पीएमश्री स्कूल के उन्नयन से महासमुंद के शासकीय प्राथमिक शाला चनाट का हुआ कायाकल्प

    आधुनिक सुविधाओं और गतिविधि आधारित शिक्षा से बच्चों में बढ़ी पढ़ाई के प्रति रुचि

    आकर्षक प्रिंट रिच कक्षाएं, हर्बल गार्डन, स्वच्छ पेयजल और खेल-सांस्कृतिक गतिविधियों से बदली विद्यालय की तस्वीर

    रायपुर, 
     सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पीएमश्री योजना से दूरस्थ वनांचल में स्थित शासकीय प्राथमिक शाला चनाट की तस्वीर बदल गई है। आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं, आकर्षक वातावरण और गतिविधि आधारित शिक्षण व्यवस्था के कारण विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी है। विद्यालय में आए सकारात्मक बदलाव से आसपास के गांवों के अभिभावक भी अपने बच्चों को यहां पढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।

    स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा राज्य सरकार का प्रयास है कि शहरों के साथ-साथ दूरस्थ ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिले। पीएमश्री विद्यालय इसी संकल्प को धरातल पर साकार कर रहे हैं। विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान न होकर बच्चों के सर्वांगीण विकास का केंद्र बने, इस दिशा में अधोसंरचना के साथ खेल, योग, संगीत, रचनात्मक गतिविधियों और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    महासमुंद जिले के विकासखंड बसना के ग्राम चनाट स्थित शासकीय प्राथमिक शाला का वर्ष 2023 को पीएमश्री स्कूल के रूप में उन्नयन किया गया। इसके बाद विद्यालय में आवश्यक अधोसंरचना एवं शैक्षणिक सुविधाओं का लगातार विस्तार किया गया। बालवाड़ी संचालन के लिए अतिरिक्त कक्ष का निर्माण किया गया है। वहीं बैगलेस-डे गतिविधियों के लिए अलग कक्ष बनाया गया है, जहां बच्चों के लिए समूह गतिविधियां, संगीत, योग सहित विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां संचालित की जाती हैं।विद्यालय में सुसज्जित अध्यापन कक्ष, आकर्षक प्रिंट रिच वातावरण, शुद्ध पेयजल, स्वच्छता की बेहतर व्यवस्था, सुंदर गार्डन तथा खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की सुविधाएं विकसित की गई हैं। मुख्य प्रवेश द्वार, शौचालय और वाटर हार्वेस्टिंग संरचना का निर्माण भी किया गया है। शाला प्रांगण में पेवर ब्लॉक लगाए जाने से परिसर कीचड़ मुक्त और व्यवस्थित हुआ है।

    विद्यालय परिसर को हरा-भरा एवं आकर्षक बनाने के लिए छह क्यारियों वाला सुसज्जित उद्यान विकसित किया गया है। इसके साथ ही हर्बल गार्डन में आंवला, तुलसी, कढ़ी पत्ता, तेजपत्ता, एलोवेरा, लौंग और पीपली सहित विभिन्न उपयोगी पौधे लगाए गए हैं। इससे बच्चों को पौधों एवं उनके उपयोग की व्यावहारिक जानकारी भी मिल रही है।शाला के सभी कक्षों में बच्चों के अनुकूल प्रिंट रिच वातावरण तैयार किया गया है। दीवारों और शिक्षण सामग्री के माध्यम से सप्ताह के दिन, हिन्दी वर्णमाला, वर्ष के महीने, ज्यामितीय आकृतियां, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सौरमंडल तथा राष्ट्रीय प्रतीक—मोर, कमल, तिरंगा, अशोक स्तंभ और बरगद आदि की जानकारी रोचक तरीके से प्रदर्शित की गई है। इससे बच्चों को कक्षा में सहज और गतिविधि आधारित तरीके से सीखने का अवसर मिल रहा है।विद्यालय में हैंडवॉश कॉर्नर भी विकसित किया गया है। बच्चे शौचालय के उपयोग के बाद और भोजन से पहले नियमित रूप से हाथ धोने की आदत अपना रहे हैं, जिससे उनमें व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी है।पीएमश्री विद्यालयों के माध्यम से बच्चों को आधुनिक, आनंददायी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने के साथ उनके व्यक्तित्व एवं रचनात्मक क्षमता के विकास पर जोर दिया जा रहा है। शासकीय प्राथमिक शाला चनाट में हुआ बदलाव इस बात का उदाहरण है कि बेहतर अधोसंरचना और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण से दूरस्थ क्षेत्र के विद्यालय भी बच्चों और अभिभावकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।

  • छत्तीसगढ़ में जापानी निवेश की राह खुली, JETRO नेटवर्क से कंपनियों तक पहुंचेगी जानकारी

    छत्तीसगढ़ में जापानी निवेश की राह खुली, JETRO नेटवर्क से कंपनियों तक पहुंचेगी जानकारी

    जापानी निवेशकों के रडार पर छत्तीसगढ़, JETRO ने अपनी वेबसाइट पर राज्य की निवेश संभावनाओं को दी जगह

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जापान यात्रा के बाद आर्थिक साझेदारी की दिशा में बढ़े कदम

    JETRO के नेटवर्क से जुड़ी जापानी कंपनियों तक पहुंचेगी छत्तीसगढ़ के औद्योगिक अवसरों की जानकारी

    रायपुर, 
    जापान के साथ छत्तीसगढ़ की आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JETRO) ने अपनी वेबसाइट पर छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं और औद्योगिक अवसरों से संबंधित जानकारी को स्थान दिया है। इससे भारत में निवेश की संभावनाएं तलाश रही जापानी कंपनियों के बीच छत्तीसगढ़ की पहुंच बढ़ेगी और उन्हें राज्य में उपलब्ध औद्योगिक अधोसंरचना, भूमि तथा निवेश प्रोत्साहनों की जानकारी मिल सकेगी।

    यह प्रगति मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अगस्त 2025 में जापान और दक्षिण कोरिया की निवेश यात्रा के दौरान स्थापित हुए संपर्कों और उसके बाद राज्य सरकार द्वारा किए गए निरंतर प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री की यात्रा के दौरान राज्य सरकार ने JETRO के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने और जापानी कंपनियों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों से जोड़ने पर चर्चा की थी।

    इसी क्रम में JETRO के प्रतिनिधिमंडल ने 28 एवं 29 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ का दौरा कर राज्य के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र और निवेश संभावनाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। प्रतिनिधिमंडल ने नवा रायपुर में विकसित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों और वहां उपलब्ध आधुनिक अधोसंरचना की जानकारी ली।

    नवा रायपुर की औद्योगिक अधोसंरचना से रूबरू हुआ प्रतिनिधिमंडल

    JETRO प्रतिनिधिमंडल ने सेक्टर-22 स्थित 120 एकड़ में विकसित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर का भ्रमण किया। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) से अनुमोदित इस क्लस्टर में प्लग-एंड-प्ले फ्लैटेड फैक्ट्री जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रतिनिधिमंडल ने यहां संचालित Rezute Electronics, Arham Technologies, Amrit Meditech और Paripath Technologies जैसी इकाइयों के प्रतिनिधियों से भी चर्चा की।

    प्रतिनिधिमंडल ने सेक्टर-22 स्थित फार्मास्युटिकल पार्क का भी भ्रमण किया, जिसे मध्य भारत के सबसे बड़े फार्मा पार्क के रूप में विकसित किया गया है। इसके अलावा सेक्टर-5 के रेडीमेड गारमेंट पार्क एवं मिक्स्ड-यूज इंडस्ट्रियल पार्क का अवलोकन किया गया। यहां प्रतिनिधिमंडल ने Aspire Pharma के प्रतिनिधियों से संवाद किया। सेक्टर-22 स्थित टेक्सटाइल पार्क में वस्त्र एवं परिधान निर्माण के लिए विकसित सुविधाओं की जानकारी भी ली गई।

    औद्योगिक सुविधाओं के साथ प्रतिनिधिमंडल ने नवा रायपुर में टाउनशिप विकास के लिए उपलब्ध आवासीय क्षेत्रों तथा स्वास्थ्य, रिटेल और सामाजिक अधोसंरचना का भी जायजा लिया। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और उनके कर्मचारियों के लिए उपलब्ध ये सुविधाएं निवेश संबंधी निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    जापानी निवेश की संभावनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा

    JETRO प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार से मुलाकात की। बैठक में राज्य की औद्योगिक नीति, विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं तथा जापानी कंपनियों के निवेश को सुगम बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।

    प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII), छत्तीसगढ़ चैप्टर के प्रतिनिधियों से भी संवाद कर राज्य के औद्योगिक परिदृश्य और स्थानीय उद्योग जगत के दृष्टिकोण को समझा।

    दौरे के बाद भी जारी रहा निरंतर संवाद

    JETRO प्रतिनिधिमंडल के दौरे के बाद वाणिज्य एवं उद्योग विभाग ने इस पहल को आगे बढ़ाते हुए वर्चुअल बैठकों और पत्राचार के माध्यम से लगातार संपर्क बनाए रखा। इस दौरान राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों, निवेश के लिए उपलब्ध भूमि और नीतिगत प्रोत्साहनों से संबंधित विस्तृत जानकारी JETRO के साथ साझा की गई।

    इसी निरंतर संवाद के परिणामस्वरूप JETRO ने अपनी वेबसाइट पर छत्तीसगढ़ की निवेश प्रोफाइल और औद्योगिक अवसरों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई है। इससे JETRO के नेटवर्क से जुड़ी जापानी कंपनियों को छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं की जानकारी सीधे मिल सकेगी।

    राज्य सरकार अब JETRO के सहयोग से छत्तीसगढ़ में निवेश में रुचि रखने वाली जापानी कंपनियों को राज्य में उपलब्ध अवसरों से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

    जापान के साथ बढ़ता यह आर्थिक संवाद छत्तीसगढ़ की वैश्विक निवेश पहुंच के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार वैश्विक स्तर पर स्थापित संपर्कों को निरंतर संवाद, निवेश सुविधा और प्रभावी फॉलो-अप के माध्यम से दीर्घकालीन औद्योगिक साझेदारी में बदलने की दिशा में कार्य कर रही है।

  • जशपुर की प्राकृतिक खूबसूरती को मिली पहचान, ट्रिप्पी हिल्स बना बेस्ट एडवेंचर टूरिज्म

    जशपुर की प्राकृतिक खूबसूरती को मिली पहचान, ट्रिप्पी हिल्स बना बेस्ट एडवेंचर टूरिज्म

    पर्यटन के नक्शे पर जशपुर की नई पहचान, ‘ट्रिप्पी हिल्स’ को सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्ड 2026

    विश्व पर्यटन दिवस पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया सम्मानित

    जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता, एडवेंचर गतिविधियों और सामुदायिक पर्यटन को मिली राज्यस्तरीय पहचान

    रायपुर
    विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर जशपुर जिले के पर्यटन क्षेत्र को महत्वपूर्ण राज्यस्तरीय पहचान मिली है। जशपुर की संस्था ‘ट्रिप्पी हिल्स’ को वर्ष 2026 का ‘सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्ड’ प्रदान किया गया। 27 सितंबर को रायपुर में आयोजित विश्व पर्यटन दिवस समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने ट्रिप्पी हिल्स को यह सम्मान प्रदान किया।

    छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड एवं छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन (सीजीटीटीए) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में पर्यटन क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले संस्थानों एवं पर्यटन हितधारकों को सम्मानित किया गया। राज्य पर्यटन पुरस्कारों में एडवेंचर टूरिज्म सहित पर्यटन क्षेत्र की विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्यों को मान्यता दी गई।

    ट्रिप्पी हिल्स द्वारा वर्ष 2019 से जशपुर की प्राकृतिक एवं साहसिक पर्यटन संभावनाओं को पर्यटकों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य किया जा रहा है। संस्था ने जिले के प्राकृतिक स्थलों, जलप्रपातों, गुफाओं, जंगलों और पर्वतीय क्षेत्रों को एडवेंचर पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में पहल की है। ट्रेकिंग, रॉक क्लाइंबिंग, केव एक्सप्लोरेशन, वाटर एक्टिविटीज और कैंपिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से पर्यटकों को जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता से परिचित कराने का प्रयास किया गया है।

    स्थानीय युवाओं और समुदायों की भागीदारी को भी संस्था की गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को गाइड के रूप में प्रशिक्षण देने तथा स्थानीय होमस्टे एवं पारंपरिक खान-पान को पर्यटन से जोड़ने से स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिला है। पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन को ध्यान में रखते हुए पर्यटन गतिविधियों को विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    जिला प्रशासन के सहयोग से ‘जशपुर जंबूरी’ जैसे एडवेंचर आधारित आयोजनों ने भी जिले की पर्यटन संभावनाओं को व्यापक मंच प्रदान किया है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से जशपुर की प्राकृतिक और साहसिक पर्यटन क्षमता को प्रदेश के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। 

    यह सम्मान जशपुर जिले में पर्यटन के क्षेत्र में कार्य कर रहे स्थानीय युवाओं, पर्यटन उद्यमियों, गाइड्स, होमस्टे संचालकों और स्थानीय समुदायों के प्रयासों को भी प्रोत्साहन प्रदान करता है। इससे जिले की एडवेंचर, इको और सामुदायिक पर्यटन संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।

    यह सम्मान जशपुर की माटी और हमारे लोगों का है

    अवॉर्ड प्राप्त करने के बाद ट्रिप्पी हिल्स के फाउंडर एवं डायरेक्टर सौरभ सिंह ने कहा कि संस्था की शुरुआत जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता को देश-दुनिया के सामने लाने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान संस्था की जमीनी स्तर पर की गई मेहनत के साथ-साथ जशपुर के स्थानीय युवाओं, गाइड्स, होमस्टे संचालकों और जिले के लोगों के प्रयासों की पहचान है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा जिला प्रशासन के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया।

    वहीं ट्रिप्पी हिल्स के को-फाउंडर एवं मैनेजिंग डायरेक्टर प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि विश्व पर्यटन दिवस पर मिला यह राज्यस्तरीय सम्मान संस्था के वर्षों के प्रयासों को नई दिशा और प्रोत्साहन देता है। उन्होंने कहा कि संस्था का प्रयास जशपुर की प्राकृतिक संपदा, स्थानीय संस्कृति और समुदाय आधारित पर्यटन को आगे बढ़ाना है। उन्होंने स्थानीय युवाओं, गाइड्स और होमस्टे संचालकों के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।

    विश्व पर्यटन दिवस 2026 पर मिला यह सम्मान जशपुर की प्राकृतिक एवं साहसिक पर्यटन संभावनाओं को मिली महत्वपूर्ण पहचान है। इससे जिले में एडवेंचर टूरिज्म के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी वाले पर्यटन को बढ़ावा देने और जशपुर को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।