Category: छत्तीसगढ़

  • कवर्धा-बेमेतरा रोड पर पशुओं का जमावड़ा देख विजय शर्मा सख्त, अधिकारियों की लगाई क्लास

    कवर्धा-बेमेतरा रोड पर पशुओं का जमावड़ा देख विजय शर्मा सख्त, अधिकारियों की लगाई क्लास

    कवर्धा-बेमेतरा मार्ग पर पशुओं को देख उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अधिकारियों को लगाई फटकार

    देर रात हाइवे पेट्रोलिंग वाहन बुलाकर मौके पर ही ली रेस्क्यू और नियमित निरीक्षण की जानकारी

    सड़क पर गौवंश की सुरक्षा और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए नियमित पेट्रोलिंग के सख्त निर्देश

    रायपुर,
    कवर्धा-बेमेतरा मार्ग पर सड़क के बीच पशुओं को बैठे देखकर  उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने गंभीर नाराजगी जताई। कवर्धा जाते समय सड़क पर पशुओं को देखकर उन्होंने बेमेतरा टोल प्लाजा के पास मंगलवार को देर रात अपना वाहन रुकवाया और तत्काल विभागीय अधिकारियों से मोबाइल पर बात कर हाइवे पेट्रोलिंग व्यवस्था की जानकारी ली।

          उप मुख्यमंत्री शर्मा ने अधिकारियों से सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुरूप पेट्रोलिंग वाहन द्वारा किए जा रहे नियमित निरीक्षण के संबंध में पूछा। अधिकारियों ने बताया कि हाइवे पेट्रोलिंग वाहन द्वारा लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। इस पर शर्मा ने पेट्रोलिंग वाहन को मौके पर बुलवाया और अब तक किए गए पशु रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ ही प्रतिदिन किए जा रहे निरीक्षण एवं अन्य कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कवर्धा से बेमेतरा तक पड़ने वाले ग्रामों के स्थानीय लोगों के माध्यम से पेट्रोलिंग वाहन की गतिविधियों की नियमित जानकारी ली जाए।

          सड़क पर पशुओं की मौजूदगी को लेकर उप मुख्यमंत्री शर्मा ने विभागीय अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि हाइवे पर नियमित पेट्रोलिंग सुनिश्चित की जाए और सड़क पर बैठे अथवा विचरण कर रहे पशुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की कार्रवाई तत्परता से की जाए। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

         शर्मा ने कहा कि सड़क पर पशुओं के रहने से न केवल गौवंश की जान को खतरा रहता है, बल्कि वाहन चालकों और यात्रियों के लिए भी गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। विशेषकर रात्रि के समय दृश्यता कम होने के कारण दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। इसलिए पेट्रोलिंग दल लगातार मार्ग का निरीक्षण करे और पशुओं के दिखाई देते ही उन्हें सुरक्षित तरीके से सड़क से हटाया जाए।

         उप मुख्यमंत्री शर्मा ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा और गौवंश की रक्षा के कार्य में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पेट्रोलिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाने और इसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

  • छत्तीसगढ़ में आएगा ₹43,600 करोड़ का विदेशी निवेश! सिंगापुर से लौटे CM साय ने बताई पूरी योजना

    छत्तीसगढ़ में आएगा ₹43,600 करोड़ का विदेशी निवेश! सिंगापुर से लौटे CM साय ने बताई पूरी योजना

    रायपुर.

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सिंगापुर के तीन दिवसीय दौरे के बाद छत्तीसगढ़ लौट आए हैं. मुख्यमंत्री 3 से 6 अक्टूबर तक सिंगापुर प्रवास पर थे. रायपुर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद उन्होंने मीडिया से चर्चा के दौरान अपने दौरे की जानकारी साझा की.

    उन्होंने बताया कि सिंगापुर में आयोजित इंडिया ग्रोथ फोरम 2026 कार्यक्रम में शामिल होकर छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं को उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के सामने रखा गया. इस दौरान प्रदेश में निवेश के लिए 43 हजार 600 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मिले हैं. मुख्यमंत्री साय ने बताया कि सिंगापुर के उद्योग जगत से जुड़े कई प्रतिनिधियों के साथ चर्चा हुई और उन्हें छत्तीसगढ़ आने के लिए आमंत्रित किया गया. उन्होंने कहा कि इन निवेश प्रस्तावों से प्रदेश में रोजगार और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

    एनर्जी सेक्टर में सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव
    मीडिया से चर्चा में सीएम साय ने कहा कि सिंगापुर दौरे के दौरान एनर्जी कैपिटल ग्लोबल की ओर से 41 हजार 750 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव मिला है. वहीं एग्री बिजनेस वैल्यू इंटरनेशनल कंपनी ने करीब 350 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है. इसके अलावा सन स्ट्रीम ग्रीन एनर्जी की ओर से सोलर सेक्टर में करीब 1,500 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव मिला है. कंपनी बैटरी स्टोरेज और उससे जुड़े कंपोनेंट के क्षेत्र में काम करेगी.

    IT एजुकेशन सर्विस से भी हुआ MOU
    मुख्यमंत्री साय ने बताया कि IT एजुकेशन सर्विस के साथ भी MOU हुआ है. उन्होंने संस्था के IT परिसर का भ्रमण किया, जो विश्व प्रसिद्ध कौशल विकास मॉडल है. निवेश प्रस्तावों के प्रदेश में धरातल पर उतरने को लेकर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार जो भी MOU कर रही है, उसे पूरी जांच-परख के बाद कर रही है. उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को आश्वस्त करना चाहते हैं कि इन समझौतों और प्रस्तावों को धरातल पर उतारा जाएगा और इसका लाभ प्रदेश की जनता को मिलेगा.

    सेवा ज्योति कार्यक्रम को लेकर भी बोले CM साय
    मुख्यमंत्री साय ने बीजेपी के सेवा ज्योति कार्यक्रम को लेकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाली थी. इसी अवसर को लेकर देशभर में 13 तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इनमें से एक सेवा ज्योति कार्यक्रम भी है. प्रधानमंत्री आज देशवासियों को संबोधित करेंगे, जिसे सभी जिला मुख्यालयों में सुनेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 सितंबर को देशवासियों ने दीप जलाकर प्रधानमंत्री को आशीर्वाद दिया था. प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के तहत सेवा के क्षेत्र में जो ज्योति जलाई है, उसे आगे बढ़ाने का काम किया जाएगा.

  • हर वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचाना लक्ष्य, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने जताई प्रतिबद्धता

    हर वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचाना लक्ष्य, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने जताई प्रतिबद्धता

    अंतिम व्यक्ति का उत्थान और सर्वसमावेशी विकास ही हमारी प्रतिबद्धता: राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा

    सुशासन और सर्वव्यापी विकास का नया दौर

    योजनाओं का मिला लाभ, तो संवर गया जीवन

     मोहला-मानपुर में मंत्री टंक राम वर्मा ने जाना योजनाओं का जमीनी असर

    ​रायपुर,

            ​मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियां प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों तक पहुँचकर आम जनता के जीवन में अभूतपूर्व सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। सुशासन और पारदर्शी प्रशासन की इसी कड़ी में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा ने आज सुबह जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों के बीच पहुँचकर जमीनी स्तर पर शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और हितग्राहियों से सीधा संवाद कर उनके जीवन में आए बदलावों की जानकारी ली।

           ​मंत्री वर्मा ने भ्रमण के दौरान ग्राम पंचायत माड़िंग पिड़िंग भूर्सा जनपद पंचायत मोहला में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वीकृत निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने योजना के लाभार्थी इन्द्र कुमार पिता मदन लाल के निर्माणाधीन घर का अवलोकन किया, वर्ष 2025-26 के तहत स्वीकृत इस पक्के आवास हेतु 1 लाख 20 हजार रुपये की राशि प्रदान की जा रही है, साथ ही परिवार को 90 दिनों का मनरेगा रोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है।  

    ​बहुआयामी विकास का केंद्र बनीं सरकारी योजनाएं

           लाभार्थी परिवार की श्रीमती हेमेश्वरी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार की विकासपरक नीतियों के प्रति गहरा आभार जताया। उन्होंने बताया कि सरकार की एकीकृत कल्याणकारी सोच से उनके परिवार की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
         ​श्रीमती हेमेश्वरी ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना से हमें न केवल सुरक्षित और पक्का घर मिला है, बल्कि इसके साथ उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस कनेक्शन मिलने से धुएँ से मुक्ति मिली है। जल जीवन मिशन (नल-जल योजना) के माध्यम से अब हमारे घर के भीतर ही स्वच्छ पेयजल आसानी से उपलब्ध हो रहा है। इसके अलावा, राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'महतारी वंदन योजना' से हर महीने मिलने वाली वित्तीय सहायता महिलाओं के स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का बड़ा आधार बन चुकी है। इस राशि का उपयोग हम घर की आवश्यक दैनिक जरूरतों और बच्चों की देखभाल में सहूलियत के साथ कर पा रहे हैं।

              ​हितग्राहियों के सुखद अनुभवों को सुनकर राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' के मूलमंत्र पर कार्य कर रही है।
    ​        हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का प्रकाश पहुँचाना है। जब एक ग्रामीण परिवार को अपना पक्का मकान मिलता है, बहन-बेटियों को रसोई गैस और घर पर ही शुद्ध जल की सुविधा मिलती है, तथा महतारी वंदन योजना के माध्यम से मातृशक्ति का आर्थिक सशक्तिकरण होता है, तब सही मायनों में रामराज्य और सुशासन की संकल्पना साकार होती है। राज्य सरकार हर पात्र नागरिक को उसका हक और सम्मान दिलाने के लिए पूर्ण पारदर्शिता तथा संवेदनशीलता के साथ निरंतर प्रयासरत है।
            ​इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारी तथा ग्रामीणों की मौजूदगी रही।

  • पंकज शर्मा की पत्रकारिता को नमन, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रतिमा का किया अनावरण

    पंकज शर्मा की पत्रकारिता को नमन, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रतिमा का किया अनावरण

    पत्रकार स्व. पंकज शर्मा की प्रतिमा का उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया अनावरण, पत्रकारिता में योगदान को किया गया याद

    रायपुर, 
    रायपुर ने पत्रकारिता के क्षेत्र में देश और प्रदेश को कई मूर्धन्य पत्रकार दिए हैं, इन्हीं में से एक नाम वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय पंकज शर्मा का है। उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से पंकज गार्डन, खो-खो पारा में उनकी प्रतिमा का अनावरण उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा किया गया। समारोह में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक सुनील सोनी, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक अनुज शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु द्विवेदी, रायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी तथा अखंड ब्राह्मण समाज से ज्ञानेश शर्मा सहित पत्रकारिता, सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

           समारोह के दौरान स्वर्गीय पंकज शर्मा के जीवन और उनकी पत्रकारिता यात्रा पर आधारित करीब एक घंटे की विशेष डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया। डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से उनके पत्रकारिता जीवन, देश-विदेश में किए गए कार्यों, उनकी लेखन शैली, संवाद क्षमता और पत्रकारिता के प्रति समर्पण को स्मरण किया गया। डॉक्यूमेंट्री ने उपस्थित लोगों को पंकज शर्मा के व्यक्तित्व और कृतित्व से भावनात्मक रूप से जोड़ा।

    पंकज शर्मा पत्रकारिता की एक पूरी पीढ़ी के प्रेरणास्रोत – उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

          उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि स्व. पंकज शर्मा ने पत्रकारिता को केवल पेशे के रूप में नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और मिशन के रूप में जिया। उन्होंने सीमित जीवनकाल में अपनी प्रतिभा और लेखनी से ऐसी पहचान बनाई, जो आज भी पत्रकारिता जगत के लिए प्रेरणा है। शर्मा ने कहा कि पंकज शर्मा की स्मृति को स्थायी रूप देना केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि रायपुर की पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा का सम्मान है।

    पंकज शर्मा ने रायपुर की पत्रकारिता को राष्ट्रीय पहचान दी : सांसद बृजमोहन अग्रवाल

           कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि पंकज शर्मा रायपुर की उस पत्रकारिता परंपरा के प्रतिनिधि थे, जिसने अपनी प्रतिभा और लेखनी के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि पंकज शर्मा ने पत्रकारिता में जिस ऊंचाई को हासिल किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी है। उनकी स्मृति में प्रतिमा का अनावरण आने वाली पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

        विधायक सुनील सोनी और विधायक मोतीलाल साहू ने भी स्वर्गीय पंकज शर्मा को याद करते हुए पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को रेखांकित किया। वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु द्विवेदी ने पंकज शर्मा की पत्रकारिता शैली, उनके लेखन और उस दौर की पत्रकारिता में उनके प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला।

    पंकज शर्मा के नाम पर संस्थानों और सम्मान की पहल का प्रस्ताव
            इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा ने स्वर्गीय पंकज शर्मा की स्मृति को और व्यापक स्वरूप देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे। उन्होंने पंकज उद्यान का नाम विस्तारित कर “पत्रकार पंकज शर्मा उद्यान” करने, खो-खो पारा स्थित स्कूल का नाम “पत्रकार पंकज शर्मा” के नाम पर करने, तथा युवा पत्रकार राज्य अलंकरण की शुरुआत स्वर्गीय पंकज शर्मा के नाम से किए जाने का प्रस्ताव रखा।

         उन्होंने पत्रकारिता विश्वविद्यालय की किसी प्रमुख बिल्डिंग का नाम भी “पंकज शर्मा” के नाम पर किए जाने का सुझाव दिया। मंच पर मौजूद सभी अतिथियों ने इन प्रस्तावों का समर्थन किया और पंकज शर्मा की स्मृति को संस्थागत रूप से संरक्षित करने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।

           कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय पंकज शर्मा ने अपने अल्प जीवनकाल में पत्रकारिता के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा दी और देश-विदेश में अपनी प्रतिभा से भारतीय पत्रकारिता का गौरव बढ़ाया। उनकी स्मृति में आयोजित यह समारोह केवल प्रतिमा अनावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि पत्रकारिता के मूल्यों, परंपरा और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा को आगे बढ़ाने का संकल्प भी है। कार्यक्रम का आयोजन रायपुर प्रेस क्लब, अखंड ब्राह्मण समाज छत्तीसगढ़ एवं विप्र सांस्कृतिक भवन प्रबंधन समिति के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

  • रजिस्ट्री हुई और नामांतरण भी, मोहम्मद जावेद को नहीं लगाने पड़े तहसील के चक्कर

    रजिस्ट्री हुई और नामांतरण भी, मोहम्मद जावेद को नहीं लगाने पड़े तहसील के चक्कर

    रायपुर

    जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर और लंबे इंतजार की परेशानी से अब नागरिकों को राहत मिल रही है। बिलासपुर के नवापारा, सिरगिट्टी निवासी मोहम्मद जावेद ने इस बदलाव को स्वयं महसूस किया। इस बार संपत्ति की रजिस्ट्री के साथ ही ऑटोम्यूटेशन के माध्यम से उनका नामांतरण भी हो गया। इससे उन्हें नामांतरण के लिए अलग से तहसील कार्यालय नहीं जाना पड़ा। वहीं व्यापार विहार में शुरू हुए नए सर्वसुविधायुक्त पंजीयन कार्यालय ने उनके लिए रजिस्ट्री की प्रक्रिया को और सुविधाजनक बना दिया। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने इन बदलावों से मिले अपने अनुभव साझा किए।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार सुधार किए जा रहे हैं। तकनीक के माध्यम से रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रियाओं को आपस में जोड़ने के साथ नए पंजीयन कार्यालयों के माध्यम से सेवाओं की पहुंच का भी विस्तार किया जा रहा है।

    पहले तहसील के चक्कर, अब रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण

    श्री मोहम्मद जावेद ने बताया कि पहले संपत्ति का पंजीयन कराने के बाद नामांतरण के लिए अलग से तहसील कार्यालय जाना पड़ता था। प्रक्रिया पूरी कराने के लिए कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे और नामांतरण होने का इंतजार भी करना पड़ता था। इस बार रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण होने से उन्हें इस पूरी दौड़भाग से राहत मिली और समय भी बचा।

    ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और कार्यालयीन प्रक्रिया पूरी करने की आवश्यकता कम हो रही है। जावेद के लिए इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ यही रहा कि रजिस्ट्री के बाद उन्हें अलग से तहसील कार्यालय नहीं जाना पड़ा।

    व्यापार विहार में नया कार्यालय, पंजीयन कराना हुआ और सुविधाजनक

    श्री जावेद ने पंजीयन कार्यालयों के विस्तार से मिली सुविधा का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि पहले पंजीयन संबंधी कार्य के लिए नेहरू चौक स्थित कार्यालय जाना पड़ता था। व्यापार विहार में नया सर्वसुविधायुक्त पंजीयन कार्यालय शुरू होने के बाद उनके लिए पंजीयन संबंधी काम कराना अधिक सुविधाजनक हुआ है।

    उन्होंने नए कार्यालय में उपलब्ध व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए बताया कि बेहतर सुविधाओं के कारण पंजीयन का पूरा अनुभव पहले की तुलना में सहज हुआ है।

    ढाई वर्षों में 34 नए पंजीयन कार्यालय स्वीकृत, सेवाओं का हो रहा विस्तार

    पंजीयन सेवाओं को नागरिकों के और नजदीक पहुंचाने के लिए प्रदेश में कार्यालयीन अधोसंरचना और मानव संसाधन का भी विस्तार किया जा रहा है। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 34 नए पंजीयन कार्यालय स्वीकृत किए गए हैं। इसके साथ ही पंजीयन अधिकारियों के 78 नए पद सृजित किए गए हैं।

    रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे बड़े जिलों में सब-रजिस्ट्रारों की संख्या में तीन गुना वृद्धि की गई है। नए कार्यालयों और अधिकारियों की संख्या बढ़ने से नागरिकों को अपने क्षेत्र के नजदीक पंजीयन सेवाएं उपलब्ध कराने और कार्यालयों में कार्यभार को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने में मदद मिल रही है।

    मोहम्मद जावेद की कहानी में दिखा पंजीयन व्यवस्था का बदलता स्वरूप

    श्री मोहम्मद जावेद का अनुभव बताता है कि पंजीयन व्यवस्था में सुधार केवल रजिस्ट्री की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। ऑटोम्यूटेशन से रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया आसान हुई है, वहीं नए कार्यालयों के विस्तार से नागरिकों के लिए पंजीयन सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर हो रही है।

    ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर इन सुधारों के जमीनी प्रभाव और सुझावों को सामने ला रहा है। मोहम्मद जावेद के लिए इस बदलाव का सीधा अर्थ है—रजिस्ट्री के बाद तहसील के चक्कर से राहत, समय की बचत और नए पंजीयन कार्यालय में बेहतर सुविधा।

     

  • गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण करने के दिए निर्देश

    गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण करने के दिए निर्देश

    रायपुर

     नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने आज बिलासपुर नगर निगम में संचालित योजनाओं, विकास कार्यों एवं निर्माण कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने बिलासपुर कलेक्टोरेट में आयोजित बैठक में अरपा नदी को प्रदूषण से बचाने शहर के 70 छोटे-बड़े नालों के पानी के उपचार की समग्र कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए विस्तृत डीपीआर तैयार कर सभी तकनीकी पहलुओं का सूक्ष्म परीक्षण करने को कहा। कलेक्टर  संजय अग्रवाल, एसएसपी  रजनेश सिंह, नगर निगम के आयुक्त  प्रकाश कुमार सर्वे और सूडा के सीईओ  सुमित अग्रवाल भी बैठक में मौजूद थे।
        
    प्रमुख सचिव  बोरा ने अरपा नदी में नालों के जरिए पहुंच रहे दूषित पानी को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों की विस्तार से जानकारी ली। निगम के अधिकारियों ने बताया कि कुल 70 छोटे-बड़े नाले अरपा नदी में मिलते हैं। प्रमुख सचिव ने बैठक में कहा कि इन नालों के जरिए दूषित पानी सीधे नदी में न पहुंचे, इसके लिए प्रभावी और दीर्घकालीन समाधान जरूरी है। नालों के पानी का समुचित उपचार कर ही नदी में प्रवाहित करने की व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने डीपीआर तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक नाले की स्थिति और पानी की मात्रा का आकलन कर उपचार एवं आवश्यकतानुसार ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। योजना तैयार करते समय तकनीकी व्यवहार्यता, भविष्य की जरूरतों और इसके दीर्घकालीन प्रभावों सहित सभी पहलुओं का परीक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि आने वाला समय पानी का है, इसलिए सतही जल स्रोतों की स्वच्छता और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए।

    शहर की स्वच्छता और यातायात व्यवस्था में लगातार दिखे सुधार

    प्रमुख सचिव ने शहर की साफ-सफाई और यातायात व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के लिए किए जा रहे प्रयासों को निरंतर बनाए रखना जरूरी है। नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे शहर की साफ-सफाई का स्तर लगातार बेहतर हो। यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें।
        
    उन्होंने नगरीय निकायों में संचालित केंद्र एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं की प्रगति की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए और सभी स्वीकृत कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएं। नगरीय सेवाओं से जुड़ी परियोजनाओं को लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखने पर जोर देते हुए उन्होंने आवश्यकतानुसार सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं की संभावनाओं पर भी काम करने को कहा। 

    बैठक में प्रमुख सचिव ने निर्माणाधीन एजुकेशन हब नालंदा परिसर की प्रगति की भी जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि 500 लोगों की बैठक क्षमता वाले नालंदा परिसर को आधुनिक शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रथम तल के स्लैब का कार्य पूरा हो गया है तथा द्वितीय तल के स्लैब का कार्य लगभग 50 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। प्रमुख सचिव ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए इसे निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
        
     बोरा ने मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना और नगरीय अधोसंरचना से जुड़े कार्यों की भी समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि बिलासपुर में अधोसंरचना मद के अंतर्गत कुल 542 कार्य स्वीकृत हैं। इनमें 334 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, 182 प्रगतिरत हैं तथा 26 कार्य अप्रारंभ हैं। प्रमुख सचिव ने प्रगतिरत कार्यों में तेजी लाते हुए गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए। 

    कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण

    समीक्षा बैठक के बाद प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने कलेक्टर  संजय अग्रवाल, एसएसपी  रजनेश सिंह और निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे के साथ तारबाहर स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण किया। उन्होंने इस दौरान आईटीएमएस की पूरी कार्यप्रणाली व संचालन को देखा। कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को उपयोगी बताते हुए  बोरा ने शहर के यातायात और सुरक्षा को और भी चाक-चौबंद करने व्यवस्था को और बेहतर बनाने कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

  • छत्तीसगढ़ में लक्ष्य शत्-प्रतिशत बोनी पूर्ण अब तक किसानों को 13.40 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण

    छत्तीसगढ़ में लक्ष्य शत्-प्रतिशत बोनी पूर्ण अब तक किसानों को 13.40 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण

    रायपुर

    प्रदेश में खेतों में बोनी का कार्य लगभग अंतिम चरण पर है। 6 अक्टूबर की स्थिति में राज्य के 48.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य का शत्-प्रतिशत बोनी पूर्ण हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश किसानों को सुगमता से मिले खाद-बीज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों निर्देशित किए गए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को कहा हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा गया है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। 

    किसानों को 13.40 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.62 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित

    कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के किसानों को अब तक 13.40 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.62 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। खेती का प्रारंभिक कार्य लगभग अंतिम चरण में है। राज्य में अब तक 48.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों जैसे धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल आदि की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का शत्-प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है। 

    प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 18.02 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। जो चालू खरीफ सीजन के लिए निर्धारित लक्ष्य से अधिक है। उक्त भंडारण के विरूद्ध राज्य के किसानों को 13.40 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है।   

    इसी प्रकार खरीफ सीजन 2026 के लिए बीज निगम द्वारा प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरूद्ध 4.80 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 4.62 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है। 

    प्रदेश में अब तक 1155.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्जः राज्य की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मि.मी.

    अधिकारियों ने बताया कि 06 अक्टूबर सुबह तक की स्थिति में प्रदेश में अब तक 1155.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है। गौरतलब है कि औसत दर्ज वर्षा आज तक की औसत वर्षा पिछले 10 वर्षाे के आधार पर 1139.9 मि.मी. से 15.3 मिली मीटर अधिक है। 

    जरूरतमंद किसानों को 8178.54 करोड़ रूपये का निःशुल्क अल्पकालीन कृषि ऋण

    कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी में सहूलियत हो इस उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्प कालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रहे है। चालू खरीफ सीजन 2026 के लिए 5 अक्टूबर की स्थिति में 8178.54 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 6938.10 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष किसानों को 8800 करोड़ रूपए ऋण वितरण किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।

  • एक गाय से शुरू हुआ सफर, आज 10 पशुओं का समृद्ध पशुधन

    एक गाय से शुरू हुआ सफर, आज 10 पशुओं का समृद्ध पशुधन

    रायपुर

    एक गाय से शुरू हुआ पशुपालन का छोटा-सा प्रयास आज 10 पशुओं के समृद्ध पशुधन में बदल चुका है। सरगुजा जिले के ग्राम चटीरमा निवासी अगस्तु खाखा ने मेहनत, लगन और पशुपालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से पशुपालन को परिवार की स्थायी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। दूध की नियमित बिक्री से उन्हें हर महीने आय हो रही है, वहीं कृत्रिम गर्भाधान से तैयार उन्नत नस्ल के पशुओं की बिक्री भी अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनी है।

    अगस्तु बताते हैं कि उन्होंने पशुपालन की शुरुआत केवल एक गाय से की थी। पशुपालन विभाग के अधिकारियों से उन्हें पशुओं की बेहतर देखभाल और नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान की जानकारी मिली। उन्होंने विभाग की सलाह को अपनाया और कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा का लाभ लेना शुरू किया। इससे धीरे-धीरे उनके पशुधन की संख्या बढ़ती गई और पशुपालन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का रास्ता खुला।

    आज अगस्तु के पास कुल 10 पशु हैं। इनमें चार गायें दुग्ध उत्पादन कर रही हैं, जिनसे प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध प्राप्त हो रहा है। दूध की नियमित बिक्री से परिवार को स्थायी आमदनी मिल रही है। पशुओं के चारे, देखभाल और अन्य जरूरी खर्च निकालने के बाद अगस्तु को पशुपालन से लगभग 15 हजार रुपये प्रतिमाह की शुद्ध आय हो रही है।

    उन्नत नस्ल के पशुओं से मिला अतिरिक्त आर्थिक लाभ

    कृत्रिम गर्भाधान ने अगस्तु के पशुधन की संख्या बढ़ाने के साथ उनकी आय में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कृत्रिम गर्भाधान से प्राप्त पशुओं में से चार गायों और दो बछड़ों की बिक्री कर वे लगभग 1 लाख 60 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर चुके हैं। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली और पशुपालन को आगे बढ़ाने के लिए उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा।

    वर्तमान में उनके पशुधन में दो बछियां गर्भित हैं, जिनसे आने वाले महीनों में नए बछड़ों के जन्म की उम्मीद है। वहीं तीन छोटी बछियां भी भविष्य में पशुधन और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का आधार बनेंगी। इस तरह एक गाय से शुरू हुआ उनका प्रयास लगातार विस्तार ले रहा है।

    तकनीकी मार्गदर्शन ने पशुपालन को बनाया लाभकारी

    अगस्तु का कहना है कि पशुपालन विभाग से मिली तकनीकी सलाह, कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा और पशुओं की देखभाल संबंधी मार्गदर्शन ने उन्हें पशुपालन को बेहतर और लाभकारी तरीके से आगे बढ़ाने में काफी मदद की है। वे अपने अनुभव से उत्साहित हैं और आने वाले समय में पशुधन की संख्या और बढ़ाकर परिवार की आय को अधिक मजबूत करना चाहते हैं।

    अगस्तु खाखा की यह कहानी बताती है कि विभागीय तकनीकी सहयोग और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाकर छोटे स्तर से शुरू किया गया पशुपालन भी ग्रामीण परिवारों के लिए नियमित आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन सकता है।

  • फसल विविधीकरण, किसान पंजीयन और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हुए ग्रामीण

    फसल विविधीकरण, किसान पंजीयन और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हुए ग्रामीण

    रायपुर

    राज्य सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने के लिए चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सूरजपुर जिले में एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन और स्वास्थ्य विभाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने ग्रामीणों को जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी और उनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। अधिकारियों ने योजनाओं की पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी साझा की।

    कृषि एवं संबंधित विभागों की प्रमुख जानकारियां

    कृषक विविधीकरण एवं आदान सहायता के तहत कृषि विभाग ने बताया कि कृषक उन्नति योजना के तहत धान के स्थान पर अन्य पात्र फसलें लेने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता राशि देने का प्रावधान है। इसके लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी में फसल की सही प्रविष्टि होना अनिवार्य है।

    सिंचाई, ऋण एवं पंजीयन

    शिविर में श्प्रधानमंत्री आशा योजनाश् के तहत दलहन-तिलहन खरीदी, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अनुदान, कृषि यंत्रीकरण पर सब्सिडी और किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए ब्याजमुक्त ऋण की जानकारी दी गई। साथ ही, आगामी धान खरीदी में असुविधा से बचने के लिए किसानों से समय पर एग्रीस्टैक पंजीयन कराने की अपील की गई।

    उद्यानिकी व मत्स्य पालन

    उद्यानिकी विभाग ने मौसमी फसलों की खेती को अपनाने के लिए प्रेरित किया, वहीं मत्स्य विभाग ने मछली बीज वितरण पर मिलने वाले अनुदान और मत्स्य पालन के अवसरों की जानकारी दी।

    स्वास्थ्य विभाग और जनहितैषी योजनाएं

    शिविर में स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष जोर देते हुए आयुष्मान कार्ड बनवाने और मुफ्त उपचार का लाभ लेने की जानकारी दी गई। गर्भवती महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव कराने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, सर्पदंश की स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचकर चिकित्सकीय उपचार लेने व एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता के बारे में बताया गया। इसके अलावा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और जन औषधि केंद्रों की किफायती दवाइयों की भी जानकारी दी गई।

  • समूह से मिला साथ, प्रशिक्षण से निखरा हुनर और आर्थिक सहयोग से खुली स्वरोजगार की राह

    समूह से मिला साथ, प्रशिक्षण से निखरा हुनर और आर्थिक सहयोग से खुली स्वरोजगार की राह

    रायपुर

     कभी रोजगार के साधनों की कमी और आर्थिक निर्भरता ग्रामीण महिलाओं के आगे बढ़ने की राह में बड़ी चुनौती थी। आज वही महिलाएं अपने हुनर, मेहनत और हौसले से स्वरोजगार की नई राह बना रही हैं। कोई अपने हाथों के हुनर से खस की आकर्षक कलाकृतियां तैयार कर रही है, तो कोई ऑटो रिक्शा चलाने के साथ किराना दुकान संभालकर परिवार की आर्थिक ताकत बन रही है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी सरगुजा की महिलाओं की ये कहानियां आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते ग्रामीण छत्तीसगढ़ की तस्वीर पेश करती हैं।

    सेवा संकल्प अभियान के बीच सामने आई लखनपुर विकासखंड के ग्राम लटोरी की स्व-सहायता समूह की महिलाओं और बतौली विकासखंड के ग्राम तारागी की मती सूरजपति की सफलता की कहानी बताती है कि जब महिलाओं के हुनर को प्रशिक्षण, आर्थिक सहयोग और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है, तो वे अपनी मेहनत से परिवार की परिस्थितियां बदलने के साथ समाज में अपनी अलग पहचान भी बना सकती हैं।

    एक ओर लटोरी की 20 महिलाएं हस्तशिल्प के अपने हुनर को बाजार से जोड़कर आजीविका की नई राह पर आगे बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर सूरजपति ने समूह से मिले 60 हजार रुपये के ऋण को अपनी मेहनत से दो व्यवसायों में बदल दिया। आज ऑटो रिक्शा और किराना दुकान से होने वाली आय ने उन्हें ‘लखपति दीदी’ की पहचान दिलाई है।

    हुनर को मिला प्रशिक्षण, हाथों को मिला रोजगार

    लखनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत लटोरी की महामाया और रेखा स्व-सहायता समूह से जुड़ी 20 महिलाओं ने दिखाया है कि हाथों के हुनर को सही प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वही हुनर आजीविका का मजबूत आधार बन सकता है।

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत इन महिलाओं को हस्तशिल्प बोर्ड के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने खस से आकर्षक और पर्यावरण अनुकूल उत्पाद तैयार करना शुरू किया। उनके हाथों से कलात्मक डलिया, टोकरी, सजावटी गुलदस्ते, पूजा की ट्रे और फ्रूट बास्केट जैसे विभिन्न उत्पाद आकार ले रहे हैं।

    स्थानीय स्तर पर तैयार ये उत्पाद पर्यावरण अनुकूल होने के साथ महिलाओं की रचनात्मकता और कौशल की पहचान भी बन रहे हैं। बाजार में इन उत्पादों की मांग ने महिलाओं को अपने हुनर को आजीविका में बदलने का अवसर दिया है। अब उनके हाथों से तैयार उत्पाद घर की चौखट से निकलकर बाजार तक पहुंच रहे हैं और परिवार की आय में योगदान दे रहे हैं।

    ‘पहले रोजगार नहीं था, अब अपना काम है’

    रेखा महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य मती कौशल्या राजवाड़े के लिए यह बदलाव विशेष मायने रखता है। उनके अनुसार पहले उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं था। बिहान से जुड़ने और हस्तशिल्प का प्रशिक्षण मिलने के बाद आज उनके पास अपना काम और आय अर्जित करने का अवसर है।

    कौशल्या और समूह की अन्य महिलाओं की आकांक्षाएं अब केवल उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं हैं। वे अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाना चाहती हैं। उनका सपना है कि उनके हाथों से तैयार उत्पादों की पहचान गांव से निकलकर बड़े बाजारों तक पहुंचे और उनके गांव का नाम भी रोशन हो।

    उनकी यह आकांक्षा बताती है कि स्व-सहायता समूह महिलाओं को केवल आर्थिक गतिविधियों से नहीं जोड़ते, बल्कि उन्हें बड़े सपने देखने और उन सपनों को अपनी मेहनत से पूरा करने का आत्मविश्वास भी देते हैं।

    सूरजपति ने 60 हजार रुपये के ऋण को बनाया आत्मनिर्भरता की पूंजी

    बतौली विकासखंड के ग्राम तारागी की मती सूरजपति की कहानी बिहान से मिले अवसर को मेहनत के बल पर सफलता में बदलने का उदाहरण है। कभी आर्थिक तंगी और आय के स्थायी साधन के अभाव से जूझ रहीं सूरजपति वर्ष 2020 में बिहान के स्व-सहायता समूह से जुड़ीं।

    समूह से उन्हें मार्गदर्शन के साथ आर्थिक सहयोग का रास्ता मिला। उन्होंने 60 हजार रुपये का ऋण लिया और इसे केवल घरेलू खर्च में उपयोग करने के बजाय अपने भविष्य की पूंजी बनाया।

    सूरजपति ने ऑटो रिक्शा संचालन शुरू किया और साथ ही किराना दुकान भी स्थापित की। एक ही आय स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने दो अलग-अलग आजीविका गतिविधियों को अपनाया। धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई और दोनों व्यवसाय उनके परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन गए।

    500 रुपये प्रतिदिन की आय, बनीं ‘लखपति दीदी’

    आज सूरजपति को किराना दुकान से लगभग 200 रुपये प्रतिदिन और ऑटो रिक्शा संचालन से लगभग 300 रुपये प्रतिदिन की आय हो रही है। दोनों व्यवसायों से उनकी कुल दैनिक आय लगभग 500 रुपये है और वार्षिक आय लगभग 1.80 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

    कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली सूरजपति आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी नई पहचान बना चुकी हैं। यह उपलब्धि उनके लिए केवल आय का आंकड़ा नहीं है। आज वे परिवार के पालन-पोषण में आर्थिक रूप से मजबूत भागीदारी निभा रही हैं और अपने भविष्य के संबंध में स्वयं निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी हासिल कर चुकी हैं।

    60 हजार रुपये के ऋण से शुरू हुआ उनका सफर बताता है कि आर्थिक सहयोग को जब सही योजना, मेहनत और निरंतर प्रयास से जोड़ा जाता है तो छोटी शुरुआत भी आत्मनिर्भरता की बड़ी कहानी बन सकती है।

    एक ओर हस्तशिल्प, दूसरी ओर ऑटो और किराना—मंजिल एक, आत्मनिर्भरता

    लटोरी की 20 महिलाओं और सूरजपति की आजीविका के रास्ते अलग-अलग हैं, लेकिन मंजिल एक है—आर्थिक आत्मनिर्भरता।

    लटोरी की महिलाओं ने प्रशिक्षण लेकर हस्तशिल्प को रोजगार से जोड़ा। स्थानीय संसाधनों और अपने हुनर का उपयोग कर उन्होंने पर्यावरण अनुकूल उत्पाद तैयार किए और बाजार तक पहुंचने की दिशा में कदम बढ़ाए। दूसरी ओर सूरजपति ने समूह से मिले ऋण को पूंजी बनाकर ऑटो रिक्शा और किराना दुकान के रूप में आय के दो स्रोत विकसित किए।

    इन दोनों कहानियों में बिहान की भूमिका केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। संगठन, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग के माध्यम से महिलाओं को अपनी क्षमता पहचानने और उसे आजीविका में बदलने का अवसर मिला है।

    महिला की कमाई से मजबूत हो रहा परिवार, बढ़ रहा आत्मविश्वास

    जब कोई महिला स्वयं आय अर्जित करती है तो इसका प्रभाव केवल उसकी आर्थिक स्थिति पर नहीं पड़ता, बल्कि पूरे परिवार के जीवन में दिखाई देता है। परिवार की जरूरतों को पूरा करने, बच्चों के भविष्य की योजना बनाने और आर्थिक निर्णयों में भागीदारी करने का उसका आत्मविश्वास बढ़ता है।

    लटोरी की महिलाओं के लिए हस्तशिल्प आय का नया माध्यम बना है, जबकि सूरजपति के लिए ऑटो और किराना व्यवसाय आर्थिक स्थिरता का आधार बन गए हैं। दोनों उदाहरण बताते हैं कि रोजगार और स्वरोजगार के अवसर महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के साथ उनमें अपने फैसले स्वयं लेने का भरोसा भी पैदा करते हैं।

    बिहान—समूह से स्वरोजगार और स्वरोजगार से सम्मान तक

    स्व-सहायता समूहों की सबसे बड़ी ताकत उनकी सामूहिकता है। महिलाएं एक साथ जुड़ती हैं, बचत करती हैं, एक-दूसरे से सीखती हैं, प्रशिक्षण प्राप्त करती हैं और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर अपनी आजीविका को आगे बढ़ाती हैं। यह सामूहिकता कठिन परिस्थितियों में भी उन्हें आगे बढ़ने का भरोसा देती है।

    बिहान के माध्यम से सरगुजा की महिलाएं इसी सामूहिक शक्ति को आर्थिक आत्मनिर्भरता में बदल रही हैं। उनके हाथों में केवल रोजगार नहीं आया है, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने और अपनी अलग पहचान बनाने का आत्मविश्वास भी आया है।

    सेवा से स्वावलंबन तक, महिलाएं लिख रहीं बदलाव की नई कहानी

    सेवा संकल्प अभियान के बीच लटोरी की महिलाओं और सूरजपति की कहानी जनकल्याण से स्वावलंबन तक पहुंचते बदलाव की तस्वीर है। एक तरफ 20 महिलाओं के हाथों का हुनर आज उनके लिए आजीविका की नई संभावना बना है, तो दूसरी तरफ सूरजपति ने 60 हजार रुपये के ऋण को मेहनत से व्यवसाय में बदलकर लगभग 1.80 लाख रुपये की वार्षिक आय तक का सफर तय किया है।

    ये कहानियां बताती हैं कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि महिलाओं को ऐसा अवसर देना है जिससे वे अपने हुनर और मेहनत के बल पर स्वयं की आजीविका खड़ी कर सकें।

    बिहान से सरगुजा की ग्रामीण महिलाओं के जीवन में यही नई सुबह दिखाई दे रही है—जहां समूह से साथ मिल रहा है, प्रशिक्षण से हुनर निखर रहा है, आर्थिक सहयोग से स्वरोजगार खड़ा हो रहा है और मेहनत से महिलाएं आत्मनिर्भरता तथा सम्मान की नई पहचान बना रही हैं।