Author: NewseDay

  • यूसीसी से मजबूत होंगे महिलाओं के अधिकार, भूपेंद्र चौधरी का बड़ा दावा

    यूसीसी से मजबूत होंगे महिलाओं के अधिकार, भूपेंद्र चौधरी का बड़ा दावा

    'मोदी की गारंटी पर देश को भरोसा', यूसीसी पर अमित शाह के बयान का भूपेंद्र चौधरी ने किया स्वागत

    महिलाओं के अधिकारों की ढाल बनेगा यूसीसी, भूपेंद्र चौधरी ने किया बड़ा दावा

    यूसीसी से मजबूत होंगे महिलाओं के अधिकार, भूपेंद्र चौधरी का बड़ा दावा

    लखनऊ
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पहले ही अपने संकल्प पत्र में समान नागरिक संहिता को प्रमुखता से शामिल किया था और इसे लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की थी।

    भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा का संकल्प पत्र 14 अप्रैल 2024 को जारी किया गया था। पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में स्पष्ट रूप से समान नागरिक संहिता को शामिल किया था और संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुरूप इसे राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के तहत लागू करने की बात कही थी।

    महिलाओं की समानता की दिशा में मजबूत कदम 'यूसीसी'

    उन्होंने कहा कि भाजपा का मानना है कि जब तक समान नागरिक संहिता लागू नहीं होती, तब तक महिलाओं को उनके अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। समान नागरिक संहिता महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने और समाज में समानता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र सरकार देश में एक आधुनिक, प्रभावी और सभी नागरिकों को समान सुरक्षा प्रदान करने वाला कानून लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह का हालिया बयान इसी दिशा में सरकार की मंशा और संकल्प को दर्शाता है।

    पीएम मोदी की गांरटी पर देश को विश्वास

    भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि वह गृह मंत्री अमित शाह के इस वक्तव्य का स्वागत करते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो गारंटी है, उस पर देश को विश्वास है और केंद्र सरकार अपने संकल्पों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने जो वादे देश की जनता से किए हैं, उन्हें पूरा करने का काम लगातार किया जा रहा है और समान नागरिक संहिता भी उसी संकल्प का हिस्सा है।

    गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा और एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। उनके इस बयान के बाद यूसीसी को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने भी पार्टी के रुख को दोहराते हुए इसे महिलाओं के अधिकारों और समान न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया है।

  • रसोइयों और आंगनवाड़ी कर्मियों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ, मानदेय के साथ परिवार की सेहत पर जोर

    रसोइयों और आंगनवाड़ी कर्मियों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ, मानदेय के साथ परिवार की सेहत पर जोर

    जो प्रदेश की सेवा में जुटे, योगी सरकार ने उनके परिवारों को दिया स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच

    31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज

    रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ

    मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने समाज के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले पीआरडी स्वयंसेवकों, विद्यालयों की रसोइयों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के कल्याण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन सेवा वर्गों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ उनके और उनके परिवारों के लिए पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया है। इससे बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ने से रोकने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि सरकार ने कर्मचारी के साथ उसके आश्रित परिवार को भी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में रखा है।

    31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज

    प्रदेश की सुरक्षा, यातायात, आपदा और प्रशासनिक कार्यों में सहयोग करने वाले 31 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने की घोषणा की गई है। सरकारी और सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार का लाभ मिलेगा। इससे पीआरडी स्वयंसेवकों के परिवारों को गंभीर बीमारी की स्थिति में बड़ी रकम जुटाने की चिंता से राहत मिलेगी।

    रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा

    परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों के लिए भी सरकार ने आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को एक साथ जोड़ा है। उनके मानदेय में प्रतिमाह एक हजार रुपये की वृद्धि के साथ परिवार सहित पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का निर्णय लिया गया है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह सुविधा बीमारी के समय बड़ा आर्थिक सहारा साबित हो सकती है।

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ

    बाल विकास, पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए भी सरकार ने मानदेय बढ़ाया है। कार्यकर्ताओं का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये किया गया है। साथ ही दोनों के परिवारों को पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया गया है।

    मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर

    इन फैसलों में योगी सरकार की नीति का एक स्पष्ट पक्ष दिखाई देता है, सेवा करने वाले व्यक्ति के साथ उसके परिवार की भी चिंता। बीमारी में इलाज के लिए बड़ी रकम की व्यवस्था करना निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा सीधे परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ती है। पीआरडी जवानों से लेकर रसोइयों और आंगनवाड़ी कर्मियों तक, सरकार ने मानदेय बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा जोड़कर इन सेवा वर्गों के लिए आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा का दोहरा कवच तैयार किया है।

  • आईआईटी और आईआईएम से पढ़ाई करने वाली पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल के मिर्जापुर से चुनाव लड़ने की लगाई जा रही हैं अटकलें

    आईआईटी और आईआईएम से पढ़ाई करने वाली पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल के मिर्जापुर से चुनाव लड़ने की लगाई जा रही हैं अटकलें

    लखनऊ
    यूपी कैडर की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल आज से प्रशासनिक कार्यों से पूरी तरह मुक्त हो गई हैं। उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। वर्ष 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या का इस्तीफा केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने स्वीकार्य करते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। उनका इस्तीफा आज 15 सितंबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा। दिव्या ने 30 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत कारणों, पारिवारिक प्राथमिकताओं और जीवन के नए लक्ष्यों का हवाला देते हुए स्वेच्छा से प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दिया था। अब उनके अगले कदम पर अटकलें लगाई जा रही हैं।

    राज्य सरकार ने इसे केंद्र सरकार को भेजा था। इसके बाद केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के पास पहुंचा था। दिव्या के पति गगनदीप सिंह ढिल्लों ने भी चार साल पहले 2022 में सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया था। गगनदीप सिंह 2011 बैच के भारतीय व्यापार सेवा (आईटीएस) अधिकारी थे।

    यूपी कॉडर की वर्ष 2013 बैच की आईएएस दिव्या मित्तल ने इस्तीफा दिए जाने की जानकारी अपने फेसबुक और एक्स एकाउंट के माध्यम से दी थी। दिव्या को मई 2026 में देवरिया के डीएम के पद से हटाकर राजस्व विभाग में अपेक्षाकृत कम महत्व के विशेष सचिव के पद पर तैनात किया गया था। वे तभी से असहज बताई जा रही थीं।

    मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर पहली तैनाती
    आईएएस बनने के बाद मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर पहली तैनाती मिली थी। इसके बाद गौतमबुद्ध नगर में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) और कानपुर नगर में यूपीसीडा की संयुक्त प्रबंध निदेशक के पद पर तैनात रहीं। बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष भी रहीं। संतकबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया में जिलाधिकारी के रूप में काम किया। बीच में उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी में मुख्य कार्यपालक अधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाली।

    आईआईटी और आईआईएम की पढ़ाई, लाखों की नौकरी छोड़ी
    दिव्या मित्तल का जन्म हरियाणा के रेवाड़ी में 23 नवंबर 1983 को हुआ था। शुरुआती पढ़ाई के बाद आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की। इसके बाद आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की डिग्री हासिल की। गगनदीप के साथ शादी के बाद दोनों लंदन चले गए। जहां एक कंपनी की जॉब की। बाद में लाखों की सैलरी वाली नौकरी छोड़ देश सेवा के लिए दोनों भारत आ गए और यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। 2021 में पति गगनदीप और 2013 में दिव्या मित्तल ने सिविल सर्विस की परीक्षा पास की।

    मिर्जापुर से लड़ेंगी चुनाव?
    दिव्या को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। एक चर्चा उनके मिर्जापुर से विधानसभा चुनाव लड़ने की भी है। इस्तीफा देते समय भी उन्होंने मिर्जापुर को ही याद किया था। यहां की एक बुजुर्ग मां को याद किया था। उन्होंने अपनी पोस्ट लिखा था कि आज आभार से आंखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध मां, जो अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचता देख कुछ नहीं बोलीं, बस कांपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।?

  • श्रीलंका के खेल मंत्री ने नुकसान का पूरा खर्च उठाने और एथलीट के सपनों का समर्थन करने की घोषणा की

    श्रीलंका के खेल मंत्री ने नुकसान का पूरा खर्च उठाने और एथलीट के सपनों का समर्थन करने की घोषणा की

    नई दिल्ली
    श्रीलंकाई भाला फेंक एथलीट रुमेश थरंगा के साथ हाल ही में एक ऐसी घटना घटी जिसने खेल जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपने देश लौट रहे 23 वर्षीय थरंगा के भाले एयरलाइन की लापरवाही के चलते टूट गए। इस घटना के सामने आने के बाद खेल प्रेमियों और उनके फैंस में काफी नाराजगी देखने को मिली, क्योंकि ये भाले किसी भी एथलीट की सफलता का सबसे अहम हिस्सा होते हैं।

    थरंगा को हुआ भारी नुकसान
    हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में आयोजित वर्ल्ड अल्टीमेट चैंपियनशिप में 91.09 मीटर थ्रो के साथ गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद जब वह वापस श्रीलंका लौट रहे थे तब ट्रांजिट के दौरान टर्किश एयरलाइंस के विमान में उनके भालों को भारी नुकसान पहुंचा। थरंगा ने इंस्टाग्राम पर टूटे हुए भालों की तस्वीर शेयर करते हुए एयरलाइन के प्रति अपना असंतोष जताया। उन्होंने इस स्थिति पर तंज कसते हुए फोटो पर बैड लक और फिर थैंक यू टर्किश एयरलाइंस लिखा।

    श्रीलंका के खेल मंत्री का बयान
    श्रीलंका के खेल मंत्री सुनील कुमारा गमागे ने भी इस मामले की पुष्टि की है। उन्होंने जानकारी दी कि यात्रा के दौरान थरंगा के कुल पांच भालों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आगे कहा, 'हमारी सरकार अपने एथलेटिक्स स्टार और उनके ओलंपिक के सपने के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।' खेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि एथलीट को नए और बेहतर उपकरण उपलब्ध कराने के लिए सरकार भालों के नुकसान का पूरा खर्च खुद उठाएगी।

    शानदार रहा थरंगा के लिए 2026
    रुमेश थरंगा इस समय शानदार फॉर्म में चल रहे हैं और साल 2026 में लगातार बड़ी सफलताएं हासिल कर रहे हैं। जून 2026 में रोम में आयोजित गोल्डन गाला के दौरान 92.62 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड थ्रो करके वह दुनिया में पहले नंबर पर पहुंचे थे। इसके अलावा उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स और डायमंड लीग जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भी भारत और अन्य देशों के मजबूत दावेदारों को पछाड़कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया है।

    इस घटना के बावजूद थरंगा का अगला लक्ष्य आगामी एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करना है। उनका सबसे बड़ा सपना 2028 में होने वाले लॉस एंजिल्स ओलंपिक में श्रीलंका के लिए पहला ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतना है

  • अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में मेंटल कैलकुलेशन का शानदार प्रदर्शन कर आईआईटी पटना के छात्र ने जीता कांस्य पदक

    अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में मेंटल कैलकुलेशन का शानदार प्रदर्शन कर आईआईटी पटना के छात्र ने जीता कांस्य पदक

     पटना
    भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) पटना के भौतिकी विभाग के बीटेक छात्र दीपक नागर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

    जर्मनी में आयोजित जूनियर मेंटल कैलकुलेशन वर्ल्ड चैंपियनशिप (Jr. MCWC) में उन्होंने सीनियर प्लस श्रेणी में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया है।

    प्रतियोगिता में 24 से अधिक देशों के करीब 100 शीर्ष मेंटल कैलकुलेटर्स ने हिस्सा लिया था। इस वैश्विक प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दीपक ने अपनी असाधारण मानसिक गणना क्षमता का प्रदर्शन किया।

    कठिन से कठिन गणनाओं को बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की मदद के तेजी और सटीकता से हल करने की उनकी क्षमता ने उन्हें प्रतियोगिता में अलग पहचान दिलाई। शानदार प्रदर्शन के आधार पर उन्होंने सीनियर प्लस श्रेणी में कांस्य पदक अपने नाम किया

    प्रतियोगी ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय ट्रेनर भी बने दीपक
    दीपक की उपलब्धि सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं रही। उनकी पिछली उपलब्धियों और मानसिक गणना के क्षेत्र में प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें चैंपियनशिप के लिए आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय ट्रेनर के रूप में भी चुना गया था।

    इस भूमिका में उन्होंने दुनिया के विभिन्न देशों से आए युवा प्रतिभागियों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की। इस दौरान दीपक ने मानसिक गणना से जुड़ी तकनीकों और तरीकों को प्रतिभागियों के साथ साझा किया।

    खास बात यह रही कि उन्होंने विश्व स्तर के रिकॉर्डधारकों और विशेषज्ञों के साथ मंच साझा करते हुए प्रशिक्षण दिया। इनमें 'किंग ऑफ प्राइम्स' के नाम से प्रसिद्ध विलेम बोमन, जॉर्ज लेन और डैनियल टिम्स जैसे विशेषज्ञ शामिल थे।

    24 से अधिक देशों के प्रतिभागियों के बीच दिखाई प्रतिभा
    जर्मनी में आयोजित इस चैंपियनशिप में दुनिया के अलग-अलग देशों से करीब 100 प्रतिभाशाली मेंटल कैलकुलेटर्स पहुंचे थे।

    ऐसे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी मंच पर भारत की ओर से हिस्सा लेते हुए पदक जीतना दीपक के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी सफलता से आईआईटी पटना के साथ-साथ बिहार और देश को भी गौरव मिला है।

    विभाग ने उपलब्धि पर जताया गर्व
    दीपक की सफलता पर आईआईटी पटना के भौतिकी विभाग ने प्रसन्नता व्यक्त की है। विभाग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दीपक ने एक प्रतियोगी के साथ-साथ शिक्षक के रूप में भी अपनी बहुआयामी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

    चैंपियनशिप में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संस्थान की ओर से वित्तीय सहायता सहित आवश्यक सहयोग भी प्रदान किया गया।

    आईआईटी पटना ने दीपक नागर को इस शानदार उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

    संस्थान को उम्मीद है कि दीपक भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाते रहेंगे।

     

  • इंफोसिस के नए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट ब्लॉक से इंदौर में बढ़ेगा IT इंफ्रास्ट्रक्चर, CM डॉ. यादव करेंगे शुभारंभ

    इंफोसिस के नए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट ब्लॉक से इंदौर में बढ़ेगा IT इंफ्रास्ट्रक्चर, CM डॉ. यादव करेंगे शुभारंभ

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को इंदौर में इंफोसिस के नए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट ब्लॉक का करेंगे शुभारंभ

    प्रदेश में उन्नत तकनीकी क्षमताओं और टैलेंट इको सिस्टम को मिलेगा बढ़ावा

    इंदौर

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 16 सितंबर को इंदौर के सुपर कॉरिडोर स्थित इंफोसिस परिसर में नए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट ब्लॉक-2 (SDB-2) का शुभारंभ करेंगे। यह ब्लॉक 3 लाख 30 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल में विकसित किया गया है जो प्रदेश में उन्नत तकनीकी क्षमताओं तथा रोजगारपरक टैलेंट इको सिस्टम को और सशक्त करेगा।

    इंफोसिस मध्यप्रदेश के बढ़ते टैलेंट पूल का लाभ लेने के साथ प्रदेश के शैक्षणिक एवं तकनीकी इको सिस्टम के साथ अपना जुड़ाव भी मजबूत करेगी। इसके अंतर्गत स्किलिंग कार्यक्रमों एवं संस्थागत साझेदारियों के माध्यम से आईआईटी इंदौर, आईआईएम इंदौर और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के साथ सहभागिता को विस्तार दिया जाएगा।

    इंफोसिस इंदौर में वर्तमान में 3 हजार 300 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, जो बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा, हेल्थकेयर, रिटेल, फार्मा एवं लाइफ साइंसेज तथा मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक ग्राहकों को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। विस्तारित केंद्र से क्लाउड, एप्लीकेशन डेवलपमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग तथा साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कंपनी की क्षमताओं का विस्तार होगा। इससे प्रदेश में उन्नत तकनीकी सेवाओं और कौशल विकास के अवसरों को गति मिलेगी।

    इंफोसिस इंदौर में नया भवन पर्यावरण अनुकूल एवं ऊर्जा दक्ष बनाया गया है और ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है। इसमें कम ऊर्जा वाली कूलिंग, स्मार्ट बिल्डिंग ऑटोमेशन, वर्षा जल संचयन और अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण जैसी सुविधाओं के साथ प्रशिक्षण एवं वेलनेस सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

     

  • पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा बक्सर-भागलपुर रूट, 4-5 घंटे में पूरा होगा सफर

    पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा बक्सर-भागलपुर रूट, 4-5 घंटे में पूरा होगा सफर

    पटना 

     बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को लेकर बड़ा प्रोजेक्ट सामने आया है. राज्य सरकार ने 336 किलोमीटर लंबे बक्सर-भागलपुर सिक्स लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को मंजूरी दी है. यह प्रोजेक्ट दक्षिण बिहार के 13 जिलों को नई कनेक्टिविटी देगा. साथ ही उद्योग, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के लिए भी नए रास्ते खुलेंगे.बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे बक्सर से शुरू होकर भागलपुर तक जाएगा. इसके रास्ते में दक्षिण बिहार के 13 जिले आएंगे.इनमें बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, नवादा, जमुई, बांका और भागलपुर शामिल हैं.एक्सप्रेस-वे बनने के बाद बक्सर से भागलपुर का सफर काफी कम समय में पूरा हो सकेगा. अभी जहां इस यात्रा में करीब 10 से 12 घंटे लगते हैं, वहीं इसके घटकर 4 से 5 घंटे होने की उम्मीद है.

    पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा रूट

    इस प्रोजेक्ट की अहमियत सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं होगी. बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा. इससे दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश से बिहार होते हुए बंगाल की तरफ जाने वाला कनेक्शन आसान होगा. इससे माल ढुलाई और लंबी दूरी के परिवहन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है.

    सिर्फ सड़क नहीं, बनेगा 'यूटिलिटी कॉरिडोर'

    इस एक्सप्रेस-वे की खासियत इसकी कनेक्टिविटी के साथ-साथ इसका यूटिलिटी कॉरिडोर के रूप में विकसित होना है. प्रोजेक्ट के तहत एक्सप्रेस-वे के समानांतर GAIL की नेचुरल गैस पाइपलाइन और पावर ग्रिड की हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों का नेटवर्क विकसित होने की योजना है.

    किसी भी बड़े उद्योग के लिए परिवहन, बिजली और ऊर्जा की अहम भूमिका होती है. ऐसे में इस कॉरिडोर से उद्योगों को इन सुविधाओं तक आसान पहुंच मिल सकेगी.

    उद्योगों को क्या होगा फायदा?

    गैस और बिजली ग्रिड के नजदीक होने से निवेशकों को अलग से भारी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की जरूरत कम होगी. इससे उद्योग स्थापित करने की लागत घट सकती है.

    बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी BIADA भी इस नेटवर्क का फायदा उठाने की तैयारी में है. एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर बड़े लैंड बैंक विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है.

    एग्रो प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

    यूटिलिटी नेटवर्क की आसान उपलब्धता से एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा सकेंगे.यहां एग्रो-प्रोसेसिंग, फूड पार्क और मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों के लिए विशेष क्षेत्र विकसित करने की संभावना है. इससे दक्षिण बिहार में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं.लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग को भी फायदा

    पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से कनेक्टिविटी मिलने के बाद यह पूरा रूट बड़े लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का हिस्सा बन सकता है.
    एक्सप्रेस-वे के आसपास वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन से जुड़े प्रोजेक्ट विकसित होने की संभावना है. इससे बिहार के कारोबारियों के लिए दूसरे राज्यों तक सामान पहुंचाना आसान होगा.

    दक्षिण बिहार के युवाओं के लिए रोजगार के मौके

    सड़क के साथ औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं.
    मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग जैसे सेक्टर में स्थानीय स्तर पर नौकरियां बढ़ने की उम्मीद है. इससे दक्षिण बिहार के युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के विकल्प मिल सकते हैं.

    3700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत
    336 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे की अनुमानित लागत करीब 3,700 करोड़ रुपये बताई गई है. इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर विकसित किया जाएगा.
    यह पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे होगा. यानी निर्धारित स्थानों से ही वाहनों को प्रवेश और निकास की सुविधा मिलेगी.

    एक्सप्रेस-वे पर देना होगा टोल

    बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे को DBFOT-Toll मॉडल पर विकसित किया जाएगा. ऐसे में इसके चालू होने के बाद एक्सप्रेस-वे का इस्तेमाल करने वाले वाहनों से टोल शुल्क लिया जाएगा.

    कुल मिलाकर यह प्रोजेक्ट दक्षिण बिहार में सड़क कनेक्टिविटी के साथ उद्योग, लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा के नेटवर्क को एक साथ जोड़ने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है. 

  • यूपी में इस बार सामान्य से तीन फीसदी कम रही मानसूनी बारिश, पश्चिमी हिस्से में हुई छह फीसदी अधिक वर्षा

    यूपी में इस बार सामान्य से तीन फीसदी कम रही मानसूनी बारिश, पश्चिमी हिस्से में हुई छह फीसदी अधिक वर्षा

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में इस सीजन मानसून की झमाझम बारिश के बाद अब इसकी विदाई की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। लखनऊ के अमौसी स्थित यूपी-उत्तराखंड के मौसम मुख्यालय के अनुसार 19 सितंबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क हो जाने की संभावना है। इससे पहले पश्चिमी यूपी में 17 सितंबर को एक बार फिर झमाझमा बारिशकी हो सकती है। अब पश्चिमी राजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक वापसी शुरू होने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं।

    48 घंटे आंशिक तेजी के बाद थमेगी बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक वर्तमान में प्रदेश में कोई बहुत बड़ा सक्रिय मौसम तंत्र मौजूद नहीं है। हालांकि अरब सागर से आ रही नमी के असर से आगामी 48 घंटों के दौरान राज्य में बारिश की गतिविधियों में हल्की आंशिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसके बाद मानसूनी बारिश में उत्तरोत्तर कमी आएगी और 19 सितंबर से पश्चिमी यूपी का मौसम शुष्क होने लगेगा।

    मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र पिछले 72 घंटों में मध्य भारत से गुजरते हुए वर्तमान में दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और उससे सटे गुजरात के ऊपर केंद्रित है। मानसून की ट्रफलाइन अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसकी हुई है लेकिन इसका पूर्वी छोर सामान्य स्थिति के निकट है। कोई बड़ा सिस्टम न होने के बावजूद केवल नमी के प्रभाव से सीमित और छिटपुट बारिश की गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं।

    सामान्य से तीन फीसदी का अंतर रहा इस बार
    मौसम विभाग के अनुसार इस सीजन के दौरान यूपी में अब तक 666 मिलीमीटर वर्षा हुई है। यह सामान्य (685.7 मिमी) से केवल 3 प्रतिशत कम है। वेस्ट यूपी में छह फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। वेस्ट यूपी में इस सीजन मानसून ने खूब भिगोया है। यहां सामान्य 628 मिमी की तुलना में 663.9 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। यानी सामान्य से 6 फीसदी अधिक वर्षा हुई। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 667.5 मिलीमीटर वर्षा हुई जो सामान्य (726.9 मिमी) के मुकाबले 8 प्रतिशत कम दर्ज की गई है।

    विदाई से पहले वेस्ट यूपी को भिगो सकता है मानसून
    मेरठ सहित वेस्ट यूपी में विदाई से पहले मानसून एक बार फिर से भिगो सकता है। 17 सितंबर तक पूरे क्षेत्र में अच्छी बारिश के आसार बन रहे हैं। आज देर रात से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसे पहले भी वेस्ट यूपी में कुछ हिस्सों में बौछारें और हल्की बारिश का दौर जारी रहने के आसार हैं। 19 सितंबर के बाद राजस्थान से मानसून वापसी की प्रक्रिया भी शुरू होने के आसार हैं। मौसम विभाग ने सोमवार को इसकी घोषणा कर दी।

    मौसम विभाग के अनुसार सोमवार केा मेरठ में दिन-रात का तापमान क्रमश: 34.1 एवं 24.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। रविवार के सापेक्ष दिन में 0.9 और रात में 0.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हुई। बावजूद इसके दिन-रात के तापमान सामान्य से 0.2 एवं 1.1 डिग्री सेल्सियस अधिक रिकॉर्ड हुए। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक सामान्य के आसपास ही तापमान बने रहने के आसार हैं। सोमवार को मेरठ का एक्यूआई 61 दर्ज हुआ जो संतोषजनक श्रेणी में है।

  • खाली कराई गई निगम की जमीनों पर वेंडिंग जोन, लाइब्रेरी और आश्रय गृह विकसित करने की योजना

    खाली कराई गई निगम की जमीनों पर वेंडिंग जोन, लाइब्रेरी और आश्रय गृह विकसित करने की योजना

     रांची
    वर्षों से अतिक्रमण की चपेट में रही नगर निगम की जमीन अब शहर के विकास में उपयोगी साबित होगी। रांची नगर निगम ने पिछले एक वर्ष के दौरान कई महत्वपूर्ण निगम संपत्तियों और भूमियों को अतिक्रमणमुक्त कराने के बाद उनके सीमांकन, अभिलेखीकरण और संरक्षण की कार्रवाई शुरू की है।

    निगम के अनुसार, अब तक जिन प्रमुख भूखंडों का क्षेत्रफल स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराया गया है, उनका कुल रकबा करीब 27 एकड़ है। हालांकि, कुछ अन्य स्थानों पर की गई कार्रवाई का क्षेत्रफल अलग से नहीं बताया गया है, इसलिए वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक हो सकता है।

    इन इलाकों में मुक्त कराई गई भूमि
    निगम के अनुसार, एदलहातू में लगभग 4.8 एकड़, कुसुम बिहार में 78.65 डिसमिल, करमटोली तालाब में 51 डिसमिल, ग्वाला टोली, डोरंडा में लगभग 1.20 एकड़ और उर्दू स्कूल, थड़पखना में 31.5 डिसमिल भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया गया है।

    सीमांकन के बाद इन स्थलों पर बाउंड्री निर्माण की कार्रवाई चल रही है। इसके अलावा बड़ा घाघरा में लगभग 2.80 एकड़, डोरंडा मानिटोला में पांच एकड़, पिंजरा पोखर-गौशाला चौक में 11 डिसमिल, डोरंडा बाजार में लगभग एक एकड़ और बूटी मोड़ चौक में करीब 0.44 एकड़ भूमि को भी अतिक्रमणमुक्त कर संरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।

    इन सभी भूखंडों का कुल रकबा लगभग 26.96 एकड़, यानी करीब 27 एकड़ है। तुपुदाना में एनआइएफटी के समीप, कांटाटोली बस स्टैंड, बड़गाई और बाधगाड़ी समेत अन्य क्षेत्रों में भी सरकारी एवं निगम से संबंधित भूमियों को अतिक्रमणमुक्त कराने की कार्रवाई की गई है।

    निगम की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा
    नगर निगम की ओर से मोरहाबादी इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन, मोरहाबादी रजिस्ट्री कार्यालय, नागा बाबा खटाल एमआरएफ सेंटर, ट्रेकर स्टैंड एमआरएफ सेंटर और बकरी बाजार स्टोर की परिसंपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए बाउंड्री निर्माण कराया जा रहा है। धुर्वा, जगन्नाथपुर और खादगढ़ा आश्रय गृहों की परिसंपत्तियों के संरक्षण की दिशा में भी काम जारी है।

    मोरहाबादी, बूटी मोड़ और डोरंडा में प्रस्तावित वेंडिंग जोन
    नगर निगम के अनुसार, अतिक्रमणमुक्त भूमि का उद्देश्य केवल उसे खाली रखना नहीं है। मोरहाबादी इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन, मोरहाबादी रजिस्ट्री कार्यालय, बूटी मोड़ और डोरंडा बाजार क्षेत्र में व्यवस्थित वेंडिंग जोन विकसित करने का प्रस्ताव है।

    इससे फुटपाथ और सड़क किनारे लगने वाली दुकानों को व्यवस्थित स्थान मिल सकेगा। दैनिक मजदूरों के लिए डोरंडा बाजार और लोआडीह में लेबर चौक विकसित किया गया है। निगम की अन्य भूमियों पर लाइब्रेरी, आश्रय गृह, सार्वजनिक सुविधाएं तथा स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी आधारभूत संरचनाएं विकसित करने की भी योजना है।

  • CGPSC घोटाले में ED का खुलासा, 66.64 लाख के लेन-देन का दावा; मैरिज पैलेस में प्रश्नपत्र बांटने का आरोप

    CGPSC घोटाले में ED का खुलासा, 66.64 लाख के लेन-देन का दावा; मैरिज पैलेस में प्रश्नपत्र बांटने का आरोप

    रायपुर 
    छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) पेपर लीक मामले में पूर्व CM भूपेश बघेल के तत्कालीन OSD चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया गया था। ED ने चेतन बोरघारिया से पूछताछ की है। ED के अनुसार चेतन के बैंक खाते में 170 ट्रांजेक्शन के जरिए 66.64 लाख कैश जमा हुए। चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कई वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं।

    ED के मुताबिक, CGPSC परीक्षा 2021 में कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। प्रिलिम्स एग्जाम से पहले रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र बांटा गया। इसके बाद बरनवापारा अभयारण्य के एक रिसॉर्ट में ठहराकर मुख्य परीक्षा के लीक प्रश्नपत्र के आधार पर कथित तौर पर कोचिंग दी गई।

    3 करोड़ से ज्यादा की अवैध रकम लेने का आरोप
    ED की जांच के मुताबिक, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 के अलग-अलग अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपए से ज्यादा की कथित अवैध रकम जुटाई।

    आरोप है कि अभ्यर्थियों को पहले ही प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और उनका चयन कराने का भरोसा दिया गया था। इसके लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में अपने कथित संपर्क और प्रभाव का इस्तेमाल करने की बात कही गई।

    जांच में यह भी सामने आया कि ऐसे आश्वासनों के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD रहे चेतन बोरघरिया के नाम और उनके आधिकारिक पद का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया।

    मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में बातचीत सामने आई
    ED के मुताबिक, जब्त डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच में चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच हुई बातचीत सामने आई। इनमें वित्तीय लेन-देन और रकम वापस करने या भुगतान की मांग से संबंधित बातचीत भी शामिल थी।

    जांच में M/s Figurecave E-Com (OPC) Private Limited से जुड़े कई वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं। ED को संदेह है कि इस कंपनी का इस्तेमाल रकम को अलग-अलग स्तर पर घुमाने और फंड की लेयरिंग के लिए किया गया।

    11 सितंबर को हुई थी गिरफ्तारी
    ED ने कहा कि जांच के दौरान जुटाए गए डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग लेन-देन और PMLA के तहत दर्ज बयानों से चेतन बोरघरिया की अपराध से अर्जित रकम से जुड़े कामों में कथित संलिप्तता सामने आई है। इनमें रकम हासिल करना, अपने कब्जे में रखना, छिपाना और उसका इस्तेमाल करना शामिल है।

    इसके आधार पर चेतन बोरघरिया को PMLA की धारा 19 के तहत 11 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। ED के अनुसार, चेतन बोरघरिया वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज में अतिरिक्त कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं।

    जानिए क्या है CGPSC घोटाला
    यह मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया।

    इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का खेल हुआ। प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए हैं।

    वसूली गई रकम कहां से आई, जांच जारी
    इस घोटाले में सीबीआई ने तत्कालीन सीजीपीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उप परीक्षा नियंत्रक, चार चयनित अभ्यर्थियों और एक निजी व्यक्ति को पहले ही गिरफ्तार किया था। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले की जांच में जुटी है।

    एजेंसी ने कथित कैश सिंडिकेट की पड़ताल के लिए करीब 30 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था। इनमें विवादित अभ्यर्थियों के साथ एनजीओ, एक बड़ी कंपनी और रिसार्ट संचालकों से जुड़े लोग भी शामिल हैं। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों से वसूली गई रकम कहां से आई और किन लोगों तक पहुंचाई गई।