Author: NewseDay

  • शिवराज चौहान ने लिया बिहार बाढ़ का जायजा, केंद्र को भेजी जाएगी नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट

    शिवराज चौहान ने लिया बिहार बाढ़ का जायजा, केंद्र को भेजी जाएगी नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट

    पटना
    बिहार ने बाढ़ से दस हजार करोड़ नुकसान का प्रारंभिक आकलन किया है। पानी उतरने के बाद फसल, सड़क और अन्य संरचना में हुई क्षति का सही आकलन होगा। इसलिए 15 अक्तूबर के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार होगी। ऐसे में इस राशि के और बढ़ने की संभावना है। उसके बाद ही केंद्र सरकार के समक्ष ज्ञापन रखा जाएगा। बुधवार को बाढ़ से हुई क्षति का जायजा लेने आए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष राज्य सरकार के विभिन्न विभागों ने क्षति की प्रारंभिक रिपोर्ट बताई। जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग, डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन आदि विभागों ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए केंद्रीय मंत्री के समक्ष बिहार में हुए नुकसान को विस्तार से बताया।

    शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, पथ निर्माण, ग्रामीण कार्य आदि विभागों की ओर से क्षति की रिपोर्ट पानी उतरने के बाद तैयार होगी। अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने पानी कम होने पर अंतर मंत्रालयी टीम बिहार भेजने की बात कही। इससे पहले बिहार सरकार की ओर से केंद्र को एक ज्ञापन भेजा जाएगा, जिसमें बिहार में हुए नुकसान की पूरी विवरणी भेजी जाएगी। इसके लिए सभी जिलों में टीम भेजी जाएगी जो स्थानीय स्तर पर हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार करेगी। लोक सेवक आवास में हुई बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी एवं बिजेंद्र यादव, मंत्री विजय सिन्हा, रत्नेश सादा, सुनील कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार आदि थे।

    प्रधानमंत्री के निर्देश पर मैं बिहार आया : शिवराज
    केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बिहार में बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए सम्राट चौधरी की सरकार को केंद्र से पूरा सहयोग मिलेगा। संकट से निकालने में राज्य सरकार के साथ केंद्र खड़ा है। शिवराज ने वैशाली के राघोपुर के समीप पत्रकारों से कहा कि संकट से निकालने में राज्य सरकार के साथ केंद्र सरकार खड़ी है। बाढ़ से महाविनाश को देखते हुए प्रधानमंत्री के निर्देश पर मैं आया हूं। कृषि मंत्री ने मुंगेर में नौवागढ़ी के उच्च विद्यालय सीताकुंड और भागलपुर में पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में संचालित बाढ़ राहत शिविरों में रह रहे लोगों और बच्चों से संवाद भी किया।

    जल संसाधन विभाग की ओर से बताया गया कि भागलपुर के राघोपुर में मार्जिनल बांध का नए सिरे से निर्माण होगा। गंडक नदी के वाल्मीकिनगर बराज के समीप बिहार प्रक्षेत्र में बांध कमजोर है। इसके टूटने का खतरा है। इसकी मरम्मत की आवश्यकता है। इस बार पुनपुन नदी में अधिक पानी आने के कारण कई स्थानों पर छोटे-छोटे बांध टूट गए तो कई स्थानों पर बांध के ऊपर से पानी बहने लगा। विभाग ने तय किया है कि अगले साल मानसून के पहले पुनपुन बांध सहित राज्य के जिस किसी स्थान पर बांध के ऊपर से पानी प्रवाहित हुआ है, वहां उसकी ऊंचाई बढ़ाई जाएगी। आबादी के समीप से गुजरने वाले अन्य बांधों की भी विशेष मरम्मत की जाएगी।

    डेढ़ लाख हेक्टेयर में फसल नुकसान की प्रारंभिक रिपोर्ट
    कृषि विभाग ने लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर में फसल नुकसान की रिपोर्ट दी है। सबसे अधिक धान-मक्का के साथ ही सब्जी व केले की खेती को नुकसान पहुंचा है। पानी उतरने पर आकलन के बाद इनपुट अनुदान आवेदन मांगा जाएगा। इसके आधार पर असिंचित क्षेत्र में फसल नुकसान पर 8500 रुपए प्रति हेक्टेयर तो सिंचित क्षेत्र में 17 हजार इनपुट अनुदान मिलता है। बहुवर्षीय फसल गन्ना के लिए 22500 रुपए प्रति हेक्टेयर अनुदान मिलेगा। एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर के लिए सहायता दी जाती है। इधर विभाग की तैयारी है कि प्रभावित क्षेत्र में वैकल्पिक फसल के रूप में मटर, सरसों सहित अन्य फसलों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।

    दुर्गापूजा के पूर्व नुकसान की रिपोर्ट केंद्र को भेजेंगे: सम्राट
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रथमदृष्टया केंद्रीय मंत्री एवं उनकी टीम ने जो स्थिति देखी, उससे प्रधानमंत्री जी को भी अवगत करायेंगे। दुर्गा पूजा से पहले नुकसान का पूरा आकलन कर इसकी विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। केंद्र की ओर से बिहार को हमेशा सहयोग मिलता रहा है और इस बार भी अधिकतम सहायता की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नुकसान का विस्तृत एवं सटीक आकलन पूरा होने के बाद किसानों एवं अन्य प्रभावितों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाएगा। आने वाले दिनों में अन्य टीमें भी बिहार आकर नुकसान की पूरी समीक्षा करेगी। बाढ़ से बिहार हर साल प्रभावित रहता है, इसके स्थायी समाधान के लिये काम करना है।

  • PM मोदी पर CM मोहन यादव का बड़ा बयान, बोले- भगवान विश्वकर्मा के आदर्शों पर आगे बढ़ रहे

    PM मोदी पर CM मोहन यादव का बड़ा बयान, बोले- भगवान विश्वकर्मा के आदर्शों पर आगे बढ़ रहे

    भगवान विश्वकर्मा के सच्चे अनुयायी हैं प्रधानमंत्री  मोदी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    तपोनिष्ठ प्रधानमंत्री  मोदी की राष्ट्र निर्माण के प्रति कमर्ठता और सृजनशीलता सभी के लिए प्रेरणादायी
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दी विश्वकर्मा जयंती पर दी बधाई

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को विश्वकर्मा जयंती की बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर भगवान महाकाल और भगवान विश्वकर्मा से उनके दीर्घायु होने की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वकर्मा जयंती पर प्रदेशवासियों को मीडिया के माध्यम से बधाई देते हुए यह भाव व्यक्त किए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा ने अपनी सृजनशीलता और कौशल से सृष्टि के निर्माण को सुंदर स्वरूप प्रदान किया। आज का दिन इसलिए भी विशेष है कि क्योंकि प्रधानमंत्री श्री मोदी का जन्मदिन भी है। भारत जिस सामर्थ्य और गौरव के साथ विश्व पटल पर खड़ा है, उसमें प्रधानमंत्री श्री मोदी का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रधानमंत्री के रूप में अपनी यात्रा में उन्होंने भारत की प्रतिभा, सामर्थ्य और शक्ति को हर क्षेत्र में विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया है। हम सबकी आस्था और श्रद्धा, सृजन के देवता भगवान विश्वकर्मा में है। सच्चे अर्थों में प्रधानमंत्री श्री मोदी भगवान विश्वकर्मा के अनुयायी हैं। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति की जरूरतों का ध्यान रखते हुए गरीबों को आवास से लेकर उनके भोजन तक की व्यवस्था सुनिश्चित की है। विश्व भारत की ओर उम्मीद और विश्वास से देख रहा है। राष्ट्र निर्माण के प्रति तपोनिष्ठ प्रधानमंत्री श्री मोदी की कर्मठता और सृजनशीलता सभी के लिए प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर प्रदेश के हर घर में दीप प्रज्ज्वलित करने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम सभी के लिए आज का दिन विशेष है। आज राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन प्रदेश में पधार रहे हैं। उज्जैन में आज व्यापक स्तर पर दीप प्रज्जवलन का भव्य और दिव्य कार्यक्रम होगा। इसके साथ ही इंदौर से प्रदेश के 50 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों के लिए आवासों की निःशुल्क रजिस्ट्री कराने के स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना का शुभारंभ भी किया जाएगा।

  • PM मोदी के जन्मदिन पर राजस्थान में जलेगा आशीर्वाद का दीपक, CM भजनलाल ने की जनभागीदारी की अपील

    PM मोदी के जन्मदिन पर राजस्थान में जलेगा आशीर्वाद का दीपक, CM भजनलाल ने की जनभागीदारी की अपील

    जयपुर
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का सम्पूर्ण जीवन कर्मयोगी के रूप में जनसेवा और राष्ट्रसेवा के संकल्प के लिए समर्पित रहा है। उनके परिश्रम, दूरदृष्टि और राष्ट्रनिष्ठा ने भारत के सामर्थ्य को नई पहचान दी है। उनका जीवन यह प्रेरणा देता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और देशहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ बड़े से बड़ा लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सकता है।

    प्रधानमंत्री का नेतृत्व, भारत के नव निर्माण की आधारशिला-
     मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भरता, सुशासन और विकसित भारत की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रहा है। विकास की गति गांव से शहर और समाज के अंतिम पायदान तक पहुंची है तथा जनकल्याणकारी योजनाओं से करोड़ों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के साहसिक नेतृत्व में देश की आंतरिक सुरक्षा सुदृढ़ हुई है, रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी सामर्थ्य बढ़ रहा है तथा विश्व में भारत की साख और छवि मजबूत हुई है।

    प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राजस्थान विकास की नई राह पर-
      मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राजस्थान के प्रति विशेष स्नेह और आत्मीय लगाव रहा है। उनके मार्गदर्शन में राम जल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौता, राजस्थान रिफाइनरी और जयपुर मेट्रो फेज-2 जैसे महत्वपूर्ण निर्णय प्रदेश के विकास को नई गति दे रहे हैं। जल, ऊर्जा, परिवहन और औद्योगिक विकास से जुड़े प्रयासों में भी प्रधानमंत्री का निरंतर मार्गदर्शन मिल रहा है।

    युवाओं के हित में डबल इंजन सरकार ने मजबूत कदम उठाएं-
     मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की डबल इंजन सरकार ने युवाओं के हित में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ढाई वर्ष में 1 लाख 90 हजार पदों पर नियुक्तियां दी हैं तथा 1 लाख 20 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रियाधीन है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में सवा लाख पदों के लिए भर्ती कैलेंडर जारी किया गया है। इससे युवाओं का भरोसा राज्य सरकार पर और अधिक मजबूत हुआ है।

    हर घर, हर गांव और हर शहर में आशीर्वाद का दीपक जलाएं-
     मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के जन्मदिवस को पूरा राष्ट्र ‘सेवा संकल्प अभियान-जन सेवा ही प्रभु सेवा’ के रूप में मना रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और आत्मीयता को जनभागीदारी के माध्यम से अभिव्यक्त करें। साथ ही, 17 सितम्बर को शाम 7 बजे राजस्थान के हर घर, हर गांव और हर शहर में आशीर्वाद का दीपक जलाएं। जिससे राजस्थान की धरती पर प्रज्वलित होने वाला प्रत्येक दीप विकसित भारत-विकसित राजस्थान के संकल्प का प्रतीक बने।

  • चाणक्य नीति: ये 4 आदतें इंसान को बना सकती हैं कंगाल, आज ही इनसे बना लें दूरी

    चाणक्य नीति: ये 4 आदतें इंसान को बना सकती हैं कंगाल, आज ही इनसे बना लें दूरी

    आचार्य चाणक्य को महान कूटनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री और नीतिार माना जाता है. उनकी नीतियां आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी उस काल में थीं. चाणक्य नीति में धन के संचय, उसके सदुपयोग और उन कारणों का विस्तार से जिक्र किया गया है जो इंसान को फर्श से अर्श या इसके विपरीत ला सकते हैं.  कई बार व्यक्ति की लाख कोशिशों के बावजूद उसके पास पैसे टिक नहीं पाते और अचानक जेब खाली होने लगती है.  इसके पीछे कई बार हमारे अपने कुछ गलत व्यवहार और आदतें होती हैं.

    चाणक्य नीति के अनुसार, आइए जानते हैं वे 4 प्रमुख बातें या आदतें जो व्यक्ति को आर्थिक तंगी और कंगाली की ओर धकेल सकती हैं.

    1. फिजूलखर्च और धन का अनादर
    आचार्य चाणक्य का मानना था कि जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे पानी की तरह पैसा बहाता है, उसके पास मां लक्ष्मी कभी नहीं टिकतीं. पैसों का अपमान करना, जरूरत से ज्यादा दिखावा करना या बिना किसी वजह के विलासिता पर धन लुटाना बहुत जल्दी तिजोरी खाली कर देता है.  धन वही सुरक्षित रहता है जहां उसका सदुपयोग और उचित प्रबंधन किया जाता है.

    2. अनुचित कार्यों से धन कमाना
    गलत तरीकों, भ्रष्टाचार, झूठ या दूसरों का हक मारकर कमाया गया धन कभी भी स्थायी नहीं होता.  चाणक्य के अनुसार, अधर्म के मार्ग से आया हुआ पैसा बहुत जल्दी और उतनी ही तेजी से वापस चला जाता है.  ऐसा धन व्यक्ति को आर्थिक रूप से तो बर्बाद करता ही है, साथ ही उसके जीवन में मानसिक अशांति और बड़े संकट भी लेकर आता है.

    3. धन संचय और बचत की कमी
    भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटने के लिए धन की बचत करना बेहद जरूरी है.  जो लोग आज की कमाई आज ही खर्च कर देते हैं और बुरे वक्त या आपातकाल के लिए कुछ भी नहीं बचाते, वे बहुत जल्द बड़े संकट में फंस जाते हैं.  चाणक्य कहते हैं कि संकट के समय ही सच्चे मित्र और धन की असली पहचान होती है, इसलिए समझदारी इसी में है कि आय का कुछ हिस्सा हमेशा बचाकर रखा जाए.

    4. अहंकार और दान-धर्म से दूरी
    पैसा आने पर इंसान को कभी घमंड नहीं करना चाहिए. जो लोग धन के नशे में चूर होकर दूसरों का अनादर करते हैं.  अपनी कमाई में से जरूरतमंदों की मदद (दान) करना बंद कर देते हैं, उनका वैभव लंबे समय तक नहीं टिकता. समाज और जरूरतमंदों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भूल जाना भी कंगाली का एक बड़ा कारण बनता है.
     

  • T20I के बाद ODI से भी बाहर ऋषभ पंत, ईरानी कप में कप्तानी से वापसी की उम्मीद

    T20I के बाद ODI से भी बाहर ऋषभ पंत, ईरानी कप में कप्तानी से वापसी की उम्मीद

    नई दिल्ली
    स्टार विकेटकीपर ऋषभ पंत सिर्फ टेस्ट क्रिकेटर बनकर रह गए हैं? टीम इंडिया के इस स्टार विकेटकीपर-बैटर को वेस्टइंडीज के खिलाफ 3 मैचों की ODI सीरीज के लिए नहीं चुना गया है. खास बात ये है कि पंत को इस सीरीज में मौका उस वक्त भी नहीं मिला, जब टीम के कुछ बड़े नाम एशियन गेम्स की वजह से उपलब्ध नहीं हैं.

    पंत को अब ईरानी कप के लिए रेस्ट ऑफ इंडिया की कप्तानी सौंपी गई है. इस मुकाबले में रेस्ट ऑफ इंडिया का सामना रणजी ट्रॉफी चैंपियन जम्मू-कश्मीर से होगा. लेकिन टीम इंडिया की ODI टीम से बाहर रहने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पंत के लिमिटेड ओवर्स करियर की दिशा आखिर क्या है?

    T20I के बाद ODI में भी नहीं मिली जगह
    पिछले करीब दो साल से पंत टीम इंडिया की T20I टीम का हिस्सा नहीं हैं. वहीं ODI क्रिकेट में भी उनकी स्थिति लगातार बदलती रही है. नवंबर 2025 तक वह साउथ अफ्रीका के खिलाफ ODI स्क्वॉड में शामिल थे, लेकिन प्लेइंग XI में मौका नहीं मिला.

    2024 के श्रीलंका दौरे के बाद से पंत को T20I में भी जगह नहीं मिली. ODI में भी उनका आखिरी मैच अगस्त 2024 में श्रीलंका के खिलाफ आया था. इसके बाद से वह इस फॉर्मेट में टीम इंडिया की योजनाओं से बाहर ही दिखे हैं.

    अब 16 सितंबर को वेस्टइंडीज के खिलाफ ODI सीरीज के लिए टीम का ऐलान हुआ तो पंत का नाम एक बार फिर गायब था. यहां एक और बात गौर करने वाली है. उसी समय भारतीय टीम को एशियन गेम्स में भी हिस्सा लेना है. ऐसे कई खिलाड़ी हैं, जो T20I और ODI दोनों टीमों का हिस्सा होते हैं और इस वजह से चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे.

    इसके बावजूद पंत बतौर बैकअप विकेटकीपर भी टीम में जगह नहीं बना सके. यानी टेस्ट क्रिकेट में भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल विकेटकीपर-बैटर में शामिल पंत फिलहाल सिर्फ एक फॉर्मेट के खिलाड़ी बनते नजर आ रहे हैं.

    ये सीरीज पंत के लिए क्यों थी बड़ा मौका?
    वेस्टइंडीज के खिलाफ ये सीरीज पंत के कमबैक के लिए एक अच्छा मौका मानी जा रही थी. लेकिन सेलेक्शन में ध्रुव जुरेल को बतौर बैकअप विकेटकीपर चुना गया. ईशान किशन इस सीरीज के लिए उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में विकेटकीपर-बैटर के तौर पर पंत के लिए जगह बन सकती थी. इतना ही नहीं, श्रेयस अय्यर भी टीम में नहीं हैं. यानी मिडिल ऑर्डर में भी एक जगह खाली थी.अक्षर पटेल भी इस सीरीज का हिस्सा नहीं हैं. इसका मतलब टीम के टॉप ऑर्डर और मिडिल ऑर्डर में एक लेफ्ट हैंडर की कमी भी नजर आती है.इसके बावजूद पंत को मौका नहीं मिला.

    रोहित शर्मा इस सीरीज में टीम इंडिया के लिए ओपन करते दिखेंगे. वहीं रवींद्र जडेजा की वापसी का मतलब है कि वह नंबर-7 पर बल्लेबाजी कर सकते हैं. ऐसे में टॉप-6 में पंत के लिए जगह बनाई जा सकती थी.

    पंत की अटैकिंग बैटिंग भी इस भूमिका में टीम के काम आ सकती थी. मिडिल ओवर्स में वह स्पिनर्स पर हमला करने, तेजी से बाउंड्री निकालने और अपनी अलग तरह की बल्लेबाजी से विपक्षी टीम की प्लानिंग बिगाड़ने की क्षमता रखते हैं.

    ODI क्रिकेट में उनके पास पारी को समय देने का भी विकल्प होता है. उन्हें पहली गेंद से ही हमला करने की जरूरत नहीं होती. वह पारी को आगे बढ़ाते हुए बाद के ओवर्स में गेंदबाजों पर दबाव बना सकते हैं.

    ODI में पंत का रिकॉर्ड कैसा है?
    ODI में पंत का करियर अभी बहुत लंबा नहीं रहा है. उन्होंने कुल 31 मुकाबले खेले हैं और 33.50 के औसत से 871 रन बनाए हैं. उनके ODI करियर की सबसे बड़ी पारी 2022 में मैनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ आई थी. नंबर-4 पर बल्लेबाजी करते हुए पंत ने 113 गेंदों पर 125 रन बनाए थे. इस पारी में उन्होंने 16 चौके और 2 छक्के लगाए. पंत की इसी पारी के दम पर भारत ने मुकाबला जीता था और ODI सीरीज भी अपने नाम की थी. यह इस फॉर्मेट में पंत का इकलौता शतक भी है. हालांकि दिसंबर 2022 के बाद से पंत ने सिर्फ एक ODI खेला है.

    दिसंबर 2022 में हुए कार एक्सीडेंट के बाद वह करीब एक साल तक क्रिकेट से दूर रहे. 2024 IPL में उन्होंने वापसी की और इसके बाद पूरी तरह फिट होने के बावजूद ODI में उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले.

    अब वापसी कितनी मुश्किल?
    पंत ने आखिरी ODI अगस्त 2024 में श्रीलंका के खिलाफ खेला था. इसके बाद से वह टीम से बाहर हैं. ऐसे में वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज को उनके लिए खुद को साबित करने का एक मौका माना जा रहा था. पर ध्रुव जुरेल को बैकअप विकेटकीपर की जिम्मेदारी दी गई. यही बात पंत के लिए टेंशन बढ़ाने वाली है. क्योंकि जब टीम के कुछ नियमित खिलाड़ी वापस आएंगे, तब कंपटीशन और बढ़ सकता. ऐसे में पंत के लिए टीम में वापसी की जगह निकालना आसान नहीं होगा.
    हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पंत का ODI करियर खत्म हो चुका है.

    वह अभी सिर्फ 28 साल के हैं. उनके सामने वापसी का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है. इंजरी से जुड़ी दिक्कतें, फॉर्म और वर्कलोड मैनेजमेंट जैसे फैक्टर आगे उनकी स्थिति बदल सकते हैं.सबसे अहम बात उनकी क्षमता है, जिस पर सवाल नहीं है. लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में सिर्फ क्षमता काफी नहीं होती, मौके भी चाहिए होते हैं.

    पंत के लिए मौका आएगा कहां से?
    वेस्टइंडीज के खिलाफ ODI सीरीज में टीम में जगह न मिलना निश्चित तौर पर उनके लिमिटेड ओवर्स फ्यूचर के लिए एक अहम संकेत है. अब पंत की नजर ईरानी कप पर होगी, जहां वह रेस्ट ऑफ इंडिया की कप्तानी करते नजर आएंगे.

    वेस्टइंडीज सीरीज के लिए भारत की ODI टीम: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, ऋतुराज गायकवाड़, केएल राहुल (उपकप्तान), ध्रुव जुरेल, नीतीश कुमार रेड्डी, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बरार , मोहम्मद सिराज, आकिब नबी, यशस्वी जायसवाल, नमन धीर.

    वेस्टइंडीज सीरीज के लिए भारत की T20I टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (व‍िकेटकीपर), संजू सैमसन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा (उपकप्तान), शिवम दुबे, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, नीतीश कुमार रेड्डी, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव, मयंक यादव.

    रेस्ट ऑफ इंड‍िया टीम: ऋषभ पंत (कप्तान, विकेटकीपर), सनत सांगवान, शिखर मोहन, सुदीप घरामी, सरफराज खान (उपकप्तान), स्मरण रविचंद्रन, मानव सुथार, सारांश जैन, आकाश दीप*, मुकेश कुमार, मुकेश चौधरी, आर्यन जुयाल (विकेटकीपर), आर्यन पांडे, अनुकूल रॉय, आयुष दोसेजा.

     

  • आधुनिक तकनीक से शिल्प को नई पहचान, मुख्यमंत्री बोले- PM मोदी ने खोले नए बाजार

    आधुनिक तकनीक से शिल्प को नई पहचान, मुख्यमंत्री बोले- PM मोदी ने खोले नए बाजार

    शिल्प को आधुनिक तकनीक व नए बाजार से जोड़ा पीएम मोदी ने: मुख्यमंत्री

    विश्वकर्मा पंचायत मंदिर में सीएम योगी ने की सृष्टि के आदिशिल्पी की आराधना

    यूपी में तीन करोड़ से अधिक लोग कारीगरी व शिल्प से जुड़कर स्वावलंबन की राह पर: सीएम योगी

    भगवान विश्वकर्मा सृष्टि और पीएम मोदी नए भारत के शिल्पी: सीएम योगी

    गोरखपुर
    भगवान विश्वकर्मा की पावन जयंती पर शिल्पकारों-कारीगरों सहित समस्त प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो देश शिल्पकारों व कारीगरों को सम्मान देता है, वही आगे बढ़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इसी भावना को अपनाकर पीएम विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का प्लेटफार्म दिया है। उन्होंने शिल्प व कारीगरी को आधुनिक तकनीक और नए बाजार से जोड़कर शिल्पकारों-कारीगरों को समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ाया है। 

    सीएम योगी गुरुवार सुबह जटाशंकर स्थित विश्वकर्मा पंचायत मंदिर में आयोजित विश्वकर्मा पूजनोत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंदिर में भगवान विश्वकर्मा की विधि विधान से आराधना करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राजमिस्त्री, बढ़ई, हलवाई, सोनार का काम करने वालों सहित कारीगरी के तमाम पेशे से जुड़े लोगों के लिए उनकी शिल्प कला ही स्वावलंबन का आधार थी। पर, यह हुनर, शिल्प-कारीगरी आजादी के बाद दशकों तक उपेक्षा का शिकार रही। पीएम मोदी जी के मार्गदर्शन में पहली बार डबल इंजन सरकार ने शिल्पकारों-कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट और रोजगार के विभिन्न आयामों के साथ जोड़कर उन्हें आगे बढ़ाया है। डबल इंजन सरकार के प्रोत्साहन से यूपी में आज तीन करोड़ से अधिक लोग कारीगरी, शिल्प से जुड़कर रोजगार और स्वावलंबन की राह पर सफलतापूर्वक आगे बढ़े हैं। 
     
    सीएम योगी ने कहा कि आज का दिन अत्यंत पवित्र है। आज सृष्टि के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती है तो साथ ही आज नए भारत के शिल्पी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिन भी है। आज हर कारीगर, शिल्पी जिसके पास कोई विशिष्ट शिल्प है, वह पूजन के जरिये सृष्टि के शिल्पी प्रभु विश्वकर्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहा है। मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी के सुदीर्घ स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए कहा, ‘गुरु गोरखनाथ की पावन धरा से भगवान विश्वकर्मा के मंदिर में सृष्टि के शिल्पी के श्रीचरणों में नमन करते हुए मैं यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन पर प्रदेशवासियों की तरफ से हृदय से बधाई देता हूं। यह प्रार्थना है कि लंबे समय तक उनका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहे और उनकी विकसित भारत की परिकल्पना साकार हो।’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विश्वकर्मा पूजनोत्सव पुस्तक का विमोचन भी किया। 

    मुख्यमंत्री का स्वागत विश्वकर्मा पंचायत मंदिर समिति के अध्यक्ष दयानंद शर्मा ने किया। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, प्रदेश महामंत्री अभिजात मिश्रा, क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, स्थानीय पार्षद छट्ठीलाल गुप्ता, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, विश्वकर्मा पंचायत मंदिर समिति से जुड़े जयप्रकाश शर्मा, अनूप शर्मा, अजय विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता रही।

  • पंजाब के पूर्व AIG राजजीत सिंह का सरेंडर का प्रस्ताव, साढ़े 3 साल से चल रहे थे फरार

    पंजाब के पूर्व AIG राजजीत सिंह का सरेंडर का प्रस्ताव, साढ़े 3 साल से चल रहे थे फरार

     चंडीगढ़
     पंजाब पुलिस के बर्खास्त सहायक पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी) राजजीत सिंह हुंदल ने करीब साढ़े तीन साल से फरार रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट में सरेंडर करने की पेशकश की है।

    राजजीत अप्रैल 2023 से फरार चल रहे हैं और उनके खिलाफ मामला पुलिस-ड्रग तस्कर गठजोड़ के आरोपों से जुड़ा है। उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के 20 जुलाई के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

    साथ ही मामले की जांच पंजाब पुलिस से किसी दूसरी जांच एजेंसी को सौंपने की मांग की है। उनका तर्क है कि राज्य पुलिस के रहते उन्हें निष्पक्ष जांच नहीं मिल सकेगी।

    10 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान राजजीत की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित रावल ने पीठ को बताया कि उनका मुवक्किल सरेंडर करने के लिए तैयार है।

    न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मामले को आगे के लिए स्थगित करते हुए राजजीत को इस बीच सरेंडर करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सरेंडर के बाद वह उचित आवेदन दाखिल कर सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई अब एक अक्टूबर को होगी।

    2018 की एफआइआर से शुरू हुआ मामला
    राजजीत सिंह हुंदल का नाम बर्खास्त पुलिस इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह से जुड़े मामले में सामने आया था। विशेष कार्यबल (एसटीएफ) ने 12 जून 2018 को इंदरजीत सिंह के खिलाफ एफआइआर दर्ज की थी।

    इसमें भारतीय दंड संहिता की धाराएं 120-बी, 218 और 384 तथा एनडीपीएस एक्ट की धाराएं 59 और 39 लगाई गई थीं। जांच आगे बढ़ने पर राजजीत को भी इस मामले में सह-आरोपित बनाया गया।

    मामला इंदरजीत सिंह की ओर से ड्रग से जुड़े मामलों की जांच और पुलिस सेवा के दौरान उसकी भूमिका से संबंधित आरोपों से जुड़ा था। राजजीत पर आरोप लगाया गया कि तरनतारन के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रहते उन्होंने इंदरजीत को संरक्षण दिया। उस समय इंदरजीत सीआइए प्रभारी के रूप में तैनात था।

    तीन SITकी रिपोर्ट के आधार पर हुई बर्खास्तगी
    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में मामले की जांच के लिए तीन विशेष जांच टीमों (एसआइटी) का गठन किया गया था।

    पंजाब सरकार ने इन एसआइटी की रिपोर्ट के आधार पर अप्रैल 2023 में राजजीत को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया। बर्खास्तगी आदेश में राजजीत और इंदरजीत के बीच कथित मिलीभगत तथा ड्रग तस्करों को संरक्षण देने के आरोपों का उल्लेख किया गया।

    सरकारी आदेश के अनुसार, राजजीत के तरनतारन एसएसपी रहने और इंदरजीत के सीआइए प्रभारी के रूप में तैनात रहने के दौरान एनडीपीएस के मामलों में 50 से अधिक सैंपल फेल हुए थे।

    आदेश में एसआइटी की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया कि दोनों ने कथित तौर पर अपने हितों के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया और इंदरजीत के खिलाफ दर्ज एफआइआर की जांच को प्रभावित किया।

    निर्दोषों को फंसाने और तस्करों को बचाने के आरोप
    बर्खास्तगी आदेश में राजजीत पर अपने पद का दुरुपयोग कर ड्रग
    तस्करों को कानून की पकड़ से बचाने और निर्दोष लोगों को झूठे ड्रग मामलों में फंसाने के आरोप भी लगाए गए थे।

    सरकार के आदेश में कहा गया था कि पुलिस विभाग न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और ऐसे अधिकारी को विभाग में बनाए रखना उचित नहीं होगा।

    अब राजजीत की सुप्रीम कोर्ट में सरेंडर की पेशकश के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया फिर महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई के लिए एक अक्टूबर की तारीख तय की है।

     

  • मुख्यमंत्री ने श्रमवीरों, शिल्पकारों, कारीगरों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को दी विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं

    मुख्यमंत्री ने श्रमवीरों, शिल्पकारों, कारीगरों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को दी विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं

    सृजन, कौशल और श्रम के सम्मान का संदेश देती है भगवान विश्वकर्मा की आराधना : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    मुख्यमंत्री निवास में भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

    मुख्यमंत्री ने श्रमवीरों, शिल्पकारों, कारीगरों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को दी विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं

    रायपुर 
     मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में सृजन, शिल्प और निर्माण के अधिष्ठाता भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने भगवान विश्वकर्मा से प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह सहित मुख्यमंत्री निवास के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री साय ने भगवान विश्वकर्मा को नमन करते हुए प्रदेशवासियों, विशेषकर श्रमवीरों, शिल्पकारों, कारीगरों, अभियंताओं, तकनीशियनों तथा उद्योग और निर्माण क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को विश्वकर्मा जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजनशीलता, कौशल, कर्मनिष्ठा और उत्कृष्टता के प्रतीक हैं। उनकी आराधना हमें अपने ज्ञान, हुनर और परिश्रम से समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देती है। विश्वकर्मा जयंती केवल हमारी आस्था और परंपरा से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि यह श्रम की प्रतिष्ठा, कौशल के सम्मान और सृजन की शक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी अवसर है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी प्रदेश और राष्ट्र की प्रगति के पीछे उसके श्रमवीरों, कारीगरों, शिल्पकारों, तकनीशियनों और निर्माणकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान होता है। खेत-खलिहानों से लेकर कारखानों तक, छोटे-छोटे प्रतिष्ठानों से लेकर बड़े उद्योगों तक और पारंपरिक शिल्प से लेकर आधुनिक तकनीक तक, हमारे कुशल हाथ अपने परिश्रम और प्रतिभा से विकास को आकार देते हैं।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान सदैव मेहनतकश लोगों और समृद्ध शिल्प परंपरा की रही है। हमारे शिल्पकारों और कारीगरों ने पीढ़ियों से अपने हुनर के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजा है। वहीं आज के श्रमिक, अभियंता और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े युवा आधुनिक छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। परंपरागत कौशल और आधुनिक तकनीक का यह समन्वय प्रदेश के विकास को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रम केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि सृजन और राष्ट्र निर्माण की शक्ति है। प्रत्येक श्रमिक के परिश्रम और प्रत्येक कारीगर के हुनर का सम्मान करना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। छत्तीसगढ़ के श्रमिक, कारीगर और निर्माण से जुड़े लाखों हाथ अपने परिश्रम से प्रदेश की प्रगति को निरंतर गति दे रहे हैं। उनका श्रम और कौशल समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत नींव है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वकर्मा जयंती हमें यह संदेश भी देती है कि हम अपने प्रत्येक कार्य को पूरी निष्ठा, अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्टता के साथ करें। बदलते समय के अनुरूप कौशल को निरंतर निखारना और नई तकनीक को अपनाना आज की आवश्यकता है। कौशलयुक्त और परिश्रमी मानव संसाधन के बल पर ही हम आत्मनिर्भर, आधुनिक और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार कर सकते हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने भगवान विश्वकर्मा से प्रार्थना की कि वे प्रदेश के सभी श्रमवीरों, कारीगरों, शिल्पकारों, तकनीशियनों, अभियंताओं और उद्यमियों को अपने कार्य में निरंतर सफलता प्रदान करें तथा उनके कौशल और परिश्रम से छत्तीसगढ़ प्रगति, समृद्धि और खुशहाली के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।

  • आनंदपुर साहिब में CM मान का विपक्ष पर हमला, सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं

    आनंदपुर साहिब में CM मान का विपक्ष पर हमला, सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं

    अमृतसर  

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक बार फिर साफ किया कि आम आदमी पार्टी सरकार की प्राथमिकता पंजाब और इसके लोग हैं, जबकि कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल कुर्सी की लड़ाई में उलझे हुए हैं. जिंदवड़ी गांव में आयोजित लोक मिलनी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि आप सरकार से पहले केवल 22 फीसदी के मुकाबले अब पंजाब के 80 फीसदी खेतों तक नहरी पानी पहुंच चुका है और इसे 100 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य है। 

    मुख्यमंत्री ने यह भी ऐलान किया कि पंजाब को अपने पानी, चंडीगढ़ और पंजाब विश्वविद्यालय की रक्षा के लिए भाजपा और अकाली दल से दूर रहने की जरूरत है, उन्होंने सरकार के 14,000 किलोमीटर नहरी पानी की पाइपलाइन नेटवर्क, मुफ्त बिजली, मैरिट आधारित नौकरियों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार एक खुशहाल और रंगला पंजाब बनाने के लिए काम कर रही है। 

    इस लोक मिलनी के कुछ अंश साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक्स पर लिखा, “श्री आनंदपुर साहिब के गांव जिंदवड़ी में लोगों के साथ दिल की बातें साझा कीं. पारंपरिक पार्टियों ने हमेशा कुर्सी और परिवारवाद की राजनीति की है, लेकिन हमारी सरकार आम लोगों के लिए काम कर रही है. हमने युवाओं को मैरिट पर नौकरियां, बेहतरीन शिक्षा, खेतों तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन और मुफ्त बिजली दी है. गांवों के विकास को तेज करने के लिए हमने छह पंचायतों को 20-20 लाख रुपये के चेक भी सौंपे. हमारा एकमात्र उद्देश्य खुशहाल और प्रगतिशील ‘रंगला पंजाब’ बनाना है। इंकलाब जिंदाबाद। 

    विपक्षी पार्टियों पर बरसे मान
    लोक मिलनी के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "हमारी सरकार के पिछले साढ़े चार साल से अधिक के कार्यकाल के दौरान हमने राज्य के लोगों की भलाई और पंजाब की तरक्की के लिए पूरी लगन से काम किया है. दूसरी ओर विपक्षी पार्टियों ने हमेशा राज्य को बेरहमी से लूटा है और लोगों के संसाधनों की लूट कर उनका शोषण किया है. ये लोग किसी रहम के हकदार नहीं हैं और उन्हें उनके पापों का सबक सिखाया जाना चाहिए। 

    उन्होंने कहा, "कुछ दिन पहले तक अकाली नेता सुखबीर बादल भाजपा के खिलाफ झंडा उठाए घूम रहे थे, लेकिन अब वह राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा के साथ गठबंधन करने के लिए पबों के बल आ गए हैं. उनका एकमात्र उद्देश्य बिना किसी वैचारिक समानता के सत्ता हासिल करके राज्य को तबाह करना है, जो पंजाब के लिए बेहद घातक होगा. ये लोग अवसरवादी हैं, जिनका राज्य से कोई सरोकार नहीं है. मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे इन पार्टियों के गुमराह करने वाले हथकंडों में कभी न आएं, जिन्हें पंजाब की कोई चिंता नहीं है। 

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आगे कहा, "इन पार्टियों का राज्य और इसके लोगों के खिलाफ काम करने का रिकॉर्ड दागी रहा है और इन्हें कभी माफ नहीं किया जा सकता, भाजपा पंजाब विरोधी मानसिकता की शिकार है और इसने हमेशा पंजाब के साथ अन्याय किया है, चाहे वह पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़, भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बी.बी.एम.बी.), सतलुज यमुना लिंक (एस.वाई.एल.) नहर, हरिके नहर, गणतंत्र दिवस की झांकियां, ग्रामीण विकास फंड (आर.डी.एफ.) या सीमावर्ती क्षेत्र के फंडों का मुद्दा हो। 

    बीजेपी पर हमला बोलते हुए मान ने कहा- "काले कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान शहीद हुए पंजाब के 700 से अधिक किसानों की हत्या से भाजपा के हाथ रंगे हुए हैं। 

    मुख्यमंत्री ने कहा, "आप अपनी जनहितैषी और विकासोन्मुखी नीतियों के कारण देशभर में अपने पंख फैला रही है. राजस्थान में स्थानीय निकायों के चुनावों में पार्टी की जीत इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है. पारंपरिक पार्टियों ने अपने बेबुनियाद और विभाजनकारी हथकंडों से हमेशा आम आदमी को मूर्ख बनाया है। 

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "वास्तव में इन पार्टियों ने अपने सत्ता के दिनों में एक-दूसरे के हितों की रक्षा की, जिसके कारण इनके कुकर्म कभी सामने नहीं आए. आज लोग ‘आप’ को चुन रहे हैं और इस पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘झाड़ू’ राज्य और देश की राजनीतिक व्यवस्था की सफाई कर रहा है, इसलिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी। 

    अकाली दल को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "अपने लंबे कुशासन के दौरान अकालियों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी का पाप किया, इस घिनौने अपराध के दोषियों को संरक्षण दिया और निर्दोष लोगों पर गोलीबारी की अनुमति दी. अकालियों ने पंजाबियों की मानसिकता को भावनात्मक ठेस पहुंचाने और राज्य में कई तरह के माफिया को संरक्षण देने के अलावा राज्य को बेरहमी से लूटा, अकालियों को दिया गया हर वोट बेअदबी के पक्ष में होगा। 

    उन्होंने कहा, "अकाली नेतृत्व को कभी माफ नहीं किया जा सकता क्योंकि वह राज्य की कई पीढ़ियों की नस्लकुशी के लिए जिम्मेदार था, क्योंकि उनके लंबे कुशासन के दौरान नशे के कारोबार को संरक्षण दिया गया और यह फलता-फूलता रहा. लोग इन पार्टियों के गुमराह करने वाले प्रचार में नहीं आएंगे और आने वाले दिनों में इन्हें उचित सबक सिखाएंगे। 

    अकाली नेता सुखबीर बादल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "सुखबीर बादल जमीनी हकीकतों से अनजान हैं क्योंकि उन्होंने पूरी जिंदगी सुख-सुविधाओं और आलीशान माहौल में बिताई है. सुखबीर बादल कॉन्वेंट के पढ़े हुए हैं, जिन्हें राज्य की बुनियादी भौगोलिक स्थिति का भी ज्ञान नहीं है, लेकिन वह पंजाब में सत्ता हासिल करना चाहते हैं. बाकी सब छोड़िए, पूर्व उपमुख्यमंत्री राज्य की बुनियादी फसलों में भी अंतर नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें बुनियादी मुद्दों के बारे में बहुत कम ज्ञान है। 

    मुख्यमंत्री ने दावा करते हुए कहा, "मैं राज्य का बेमिसाल विकास सुनिश्चित करने के लिए अपना खून-पसीना बहा रहा हूं और हर गुजरते दिन के साथ हम लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए कई नई जनहितैषी पहल कर रहे हैं. पुराने नेताओं के विपरीत मैंने सरकारी खजाने से एक पैसा भी नहीं मांगा, बल्कि यह सुनिश्चित किया है कि करदाताओं का एक-एक रुपया जनकल्याण के लिए समझदारी से खर्च किया जाए। 

    उन्होंने कहा, "लोगों का बेटा और भाई होने के नाते मैंने पुराने नेताओं की तरह आलीशान जिंदगी जीने के बजाय लोगों के दुख-दर्द और मुश्किलों को साझा करने पर ध्यान केंद्रित किया है, पहले किसी भी शासक ने लोगों की मुश्किलों के बारे में विस्तारपूर्वक बातचीत करने और मिशनरी भावना से उन्हें हल करने के लिए इस तरह लोगों के बीच आकर काम नहीं किया। 

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "उन अहंकारी राजनेताओं ने लोगों से मिलने की बजाय हमेशा खुद को अपनी बड़ी कोठियों की ऊंची दीवारों तक सीमित रखा और अब वे राज्य सरकार के हर कदम से घबराए हुए हैं. इसके विपरीत मैं विकासोन्मुखी और नागरिक-केंद्रित नीतियां बनाने के लिए लोगों से फीडबैक लेने हेतु हमेशा फील्ड में रहा हूं, जिससे राज्य के विकास को बड़ा प्रोत्साहन मिला है। 

    मुख्यमंत्री ने कहा, "आप सरकार राज्य के खजाने के एक-एक पैसे का इस्तेमाल राज्य के लोगों की भलाई के लिए कर रही है. राज्य के 90 फीसदी से अधिक परिवारों को मुफ्त बिजली मिल रही है. यहां तक कि किसानों को भी आज दिन के समय बिजली मिल रही है, जो पहले कभी नहीं हुआ था. लोगों के टैक्स का पैसा राज्य का है और हम इसे लोगों की भलाई पर समझदारी से खर्च कर रहे हैं। लोगों का पैसा विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के माध्यम से लोगों के पास वापस आ रहा है। 

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपनी सरकार की सराहना करते हुए कहा, "पंजाब सरकार लोगों के लिए काम कर रही है और इसने घरों को मुफ्त बिजली, 70,000 से अधिक युवाओं को बिना भ्रष्टाचार के नौकरियां, बेहतर सड़कें, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं, बुनियादी ढांचे का निर्माण करने के अलावा कई अन्य प्रमुख पहल की हैं, जिन्हें पुराने नेताओं द्वारा नजरअंदाज किया गया था। 

    उन्होंने कहा, "युवाओं को नशे की बीमारी से दूर करने के लिए राज्य में 3,100 खेल स्टेडियम बनाए जा रहे हैं, हमने शिक्षा को प्राथमिकता दी है और लोगों के जीवन को बदलने के लिए शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी पहल की हैं। 

    मुख्यमंत्री ने कहा, "कोई भी मुफ्त की चीजें या रियायती कार्ड राज्य से गरीबी या अन्य सामाजिक बुराइयों को खत्म नहीं कर सकते, लेकिन शिक्षा ही एक ऐसी चाबी है, जो लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाकर उन्हें इस चक्र से बाहर निकाल सकती है. इस कारण हमारी सरकार आम आदमी को सशक्त बनाने के लिए शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए निरंतर प्रयास कर रही है."

    उन्होंने कहा, "राज्यवासियों की सुविधा के लिए 45,000 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत और अपग्रेडेशन की जा रही है। 

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "मेरे पद संभालने के बाद नहरी सिंचाई के अधीन क्षेत्र बढ़कर 80 फीसदी हो गया है, जिससे किसानों को बहुत लाभ हुआ है. लोगों को व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ शुरू की है, जो देश में अपनी तरह की पहली योजना है, जो पंजाब के प्रत्येक निवासी परिवार के लिए 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज प्रदान करती है. यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि पंजाब ऐसा व्यापक स्वास्थ्य कवरेज देने वाला पहला भारतीय राज्य है, जिसने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करते हुए आम जनता पर वित्तीय बोझ को काफी कम किया है। 

    मुख्यमंत्री ने बताया कि "‘मावां धीयां सत्कार योजना’ के तहत 1 जुलाई से 18 वर्ष से अधिक उम्र की प्रत्येक महिला लाभार्थी को 1,000 रुपये और एस.सी. महिलाओं के मामले में 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता के बारे में उनके मोबाइल पर नोटिफिकेशन मिल रहे हैं, ये फंड सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाएंगे और पहले से सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाएं भी इसकी पात्र होंगी. पंजाब की 97 फीसदी महिलाओं को इस योजना का लाभ मिला है और राज्य सरकार ने बजट में 9,300 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस, लोकसभा सदस्य मालविंदर सिंह कंग और अन्य उपस्थित थे। 

  • रांची के कई इलाकों में सुधरेगी बिजली सप्लाई, हटिया ग्रिड में नया ट्रांसफार्मर पहुंचा

    रांची के कई इलाकों में सुधरेगी बिजली सप्लाई, हटिया ग्रिड में नया ट्रांसफार्मर पहुंचा

     रांची
    राजधानी के हटिया ग्रिड की क्षमता बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। ग्रिड में जल्द ही नया 80 एमवीए का पावर ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। इससे ग्रिड की बिजली आपूर्ति क्षमता में बढ़ोतरी होगी और शहर के कई इलाकों में चल रही बिजली समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।

    हटिया ग्रिड में फिलहाल 50 एमवीए क्षमता के चार पावर ट्रांसफार्मर लगे हैं। इनमें से एक ट्रांसफार्मर पिछले एक-दो महीने से खराब है। इसके कारण ग्रिड की उपलब्ध क्षमता प्रभावित हुई है।

    ट्रांसफार्मर खराब होने से पहले हटिया ग्रिड से शहर को करीब 125 से 130 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराई जा रही थी। वर्तमान में यह घटकर करीब 85 से 90 मेगावाट रह गई है। इसका असर राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति पर पड़ रहा है। वहीं जबतक हटिया ग्रिड-1 में नया ट्रांसफार्मर इंस्टाल नहीं होता है, तबतक शहर के कई क्षेत्रों में परेशानी बनी रहेगी।

    नया ट्रांसफार्मर पहुंचा रांची
    ट्रांसमिशन जोन के महाप्रबंधक के अनुसार, नया 80 एमवीए का पावर ट्रांसफार्मर रांची पहुंच चुका है। अब इसे जल्द ही हटिया ग्रिड में इंस्टाल करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इंस्टालेशन और आवश्यक तकनीकी कार्य पूरा होने के बाद इससे बिजली आपूर्ति शुरू की जाएगी।

    140-145 मेगावाट तक मिलेगी बिजली
    नया 80 एमवीए का ट्रांसफार्मर लगने के बाद हटिया ग्रिड की आपूर्ति क्षमता बढ़ जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में मिलने वाली 85-90 मेगावाट बिजली की तुलना में आपूर्ति क्षमता बढ़कर करीब 140 से 145 मेगावाट तक पहुंच सकती है।

    कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित
    हटिया ग्रिड की क्षमता प्रभावित होने का असर रातू रोड, पिस्का मोड़, आईटीआई, कांके, बेड़ो, नगड़ी, रिंग रोड, लापुंग, दलादली, अरगोड़ा और धुर्वा समेत कई क्षेत्रों में देखा जा रहा है। इन इलाकों में बिजली आपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    नए ट्रांसफार्मर के चालू होने के बाद इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। विभाग का कहना है कि ट्रांसफार्मर की स्थापना का काम जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।