Author: NewseDay

  • शनिवार 19 सितंबर को बदल सकती है किस्मत, इन राशियों को मिल सकता है धन लाभ

    शनिवार 19 सितंबर को बदल सकती है किस्मत, इन राशियों को मिल सकता है धन लाभ

    मेष राशि- आपका मन रचनात्मक कामों में लगा रहेगा। करियर में नई संभावनाएं बन सकती हैं। पैसों की स्थिति संतुलित बनी रहेगी। परिवार और रिश्तों में मिठास रहेगी। सेहत ठीक रहेगी और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी।

    वृषभ राशि- किस्मत आपका पूरा साथ देती नजर आएगी। करियर और पढ़ाई के क्षेत्र में सफलता मिलने के योग हैं। यात्रा या किसी नए काम की शुरुआत संभव है। पैसों का लाभ होगा। मन खुश रहेगा और दिन भर ऊर्जा बनी रहेगी।

    मिथुन राशि- मेहनत ज्यादा करनी पड़ सकती है, लेकिन उसका नतीजा सकारात्मक रहेगा। करियर में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं। पैसों को लेकर कोई भी फैसला सोच-समझकर लें। प्रेम संबंधों में भरोसा बनाए रखना ज़रूरी होगा। सेहत सामान्य रहेगी।

    कर्क राशि- रिश्तों और काम के बीच संतुलन बनाकर चलना जरूरी होगा। साझेदारी से जुड़े कामों में फायदा हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई ज़िम्मेदारी मिल सकती है। पैसों की स्थिति सामान्य से बेहतर रहेगी। मानसिक शांति के लिए खुद को थोड़ा समय देना फायदेमंद रहेगा।

    सिंह राशि- नए विचार और योजनाएं आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं। नौकरी और व्यापार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। दोस्तों और सहयोगियों का साथ मिलेगा। प्रेम जीवन में समझ और तालमेल बना रहेगा। मानसिक रूप से आज खुद को हल्का और शांत महसूस करेंगे।

    कन्या राशि- आपको अपनी योजनाओं पर पूरा ध्यान बनाए रखना होगा। कामकाज में की गई मेहनत का पूरा लाभ मिलने की संभावना है। पैसों से जुड़े मामलों में सोच-समझकर फैसला लें। घर का माहौल सुखद रहेगा। सेहत में धीरे-धीरे सुधार महसूस होगा।

    तुला राशि- जिम्मेदारियों का बोझ थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन आप सब कुछ अच्छे से संभाल लेंगे। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और नतीजे आपके पक्ष में रहेंगे। पैसों की स्थिति मज़बूत रहेगी। परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा। सेहत को लेकर थोड़ी सावधानी जरूरी है।

    वृश्चिक राशि- दिन आपके लिए अच्छे संकेत लेकर आया है। करियर से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी और लोग आपकी बातों को गंभीरता से लेंगे। पैसों की स्थिति मज़बूत होने के योग हैं। प्रेम जीवन में उत्साह और नयापन बना रहेगा। सेहत भी अच्छी रहेगी।

    धनु राशि- आप भावनात्मक रूप से थोड़े संवेदनशील रह सकते हैं। कामकाज में धैर्य रखना ज़रूरी होगा। परिवार में किसी बात को लेकर चिंता हो सकती है, लेकिन बातचीत से समाधान निकल आएगा। पैसों की स्थिति संतुलित रहेगी। सेहत के लिहाज से आराम जरूरी है, खुद को ज्यादा थकाने से बचें।

    मकर राशि- आपकी बात करने की कला आपको फायदा दिला सकती है। नए लोगों से संपर्क बनेंगे, जो आने वाले समय में काम आ सकते हैं। करियर से जुड़े रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं। धन लाभ के योग भी बन रहे हैं। दोस्तों का सहयोग मिलेगा। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन ज्यादा काम करने से थकान महसूस हो सकती है।

    कुंभ राशि- दिन धैर्य और समझदारी से आगे बढ़ने का है। नौकरी और व्यापार में काम धीरे-धीरे सही दिशा में बढ़ेगा। खर्च थोड़े बढ़ सकते हैं, इसलिए फालतू खर्च से बचना बेहतर रहेगा। परिवार के साथ समय बिताने से मन को सुकून मिलेगा। प्रेम संबंधों में स्थिरता बनी रहेगी। सेहत को लेकर लापरवाही न करें।

    मीन राशि- आप खुद को पहले से ज्यादा ऊर्जावान और आत्मविश्वास से भरा हुआ महसूस करेंगे। कामकाज में आपकी मेहनत साफ नजर आएगी और अधिकारी आपके काम से खुश हो सकते हैं। पैसों के मामले में सुधार के संकेत हैं, लेकिन जल्दबाज़ी में कोई बड़ा खर्च करने से बचें। घर का माहौल सामान्य रहेगा। सेहत ठीक रहेगी, बस गुस्से और तनाव को खुद पर हावी न होने दें।

  • आशीर्वाद का दीया’ बना विश्व रिकॉर्ड का साक्षी

    आशीर्वाद का दीया’ बना विश्व रिकॉर्ड का साक्षी

    रायपुर, 

     प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम ने जनभागीदारी और सेवा भावना का नया अध्याय रचा है। रायपुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में 25 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित किए गए, वहीं प्रदेशभर में 1.50 करोड़ से अधिक दीयों की रोशनी से सेवा, सुशासन और जनभागीदारी का संदेश दिया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए ‘आशीर्वाद का दीया’ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।

    वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ की जनता की व्यापक सहभागिता और सामूहिक संकल्प का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की सेवा यात्रा पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ में प्रदेशवासियों ने जिस उत्साह और आत्मीयता के साथ भागीदारी की, वह अभूतपूर्व है।

     चौधरी ने कहा कि रायपुर में 25 लाख से अधिक दीपों का प्रज्वलन और प्रदेशभर में 1.50 करोड़ से अधिक दीयों का जलना छत्तीसगढ़ की जनता के उत्साह और जनभागीदारी की व्यापकता को दर्शाता है। यह केवल दीप प्रज्वलन का आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना के प्रति जनसहभागिता का सामूहिक उत्सव बना।

    ‘आशीर्वाद का दीया’ के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों में गांवों से लेकर शहरों तक नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों ने सहभागिता की। दीपों की रोशनी के माध्यम से प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा के प्रति आभार और विकसित भारत के संकल्प के साथ विकसित छत्तीसगढ़ की भावना को अभिव्यक्ति मिली।

    इस व्यापक जनभागीदारी ने ‘आशीर्वाद का दीया’ को विशेष पहचान दिलाई और आयोजन का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़वासियों की सामूहिक सहभागिता और उत्साह का प्रमाण है।

  • 9 लाख 77 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को मिली 10.53 करोड़ रुपये की छूट

    9 लाख 77 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को मिली 10.53 करोड़ रुपये की छूट

    भोपाल 

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग अंतर्गत आने वाले 16 जिलों के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए अगस्त माह लाभदायक रहा। कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ व्यवस्था के तहत सोलर आवर्स (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) में बिजली की खपत पर 20 प्रतिशत तक की विशेष छूट का लाभ दिया जा रहा है।

    इसी के तहत अगस्त -2026 में कंपनी कार्यक्षेत्र के कुल 9 लाख 77 हजार 400 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनके बिजली बिलों में कुल ₹10.53 करोड़ रुपये की ToD छूट का सीधा लाभ मिला। इनमें भोपाल रीजन के 7 लाख 94 हजार 972 उपभोक्ताओं को 7 करोड़ 80 लाख 50 हजार रुपये तथा ग्वालियर रीजन के 1 लाख 82 हजार 428 उपभोक्ताओं को 2 करोड़ 72 लाख 82 हजार रुपये की छूट प्रदान की गई।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री ऋषि गर्ग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे आधुनिक तकनीक का लाभ उठाते हुए अपने परिसरों में स्मार्ट मीटर लगवाएं। स्मार्ट मीटर न केवल ऊर्जा प्रबंधन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत पर नियंत्रण रखने और आर्थिक बचत करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ के तहत स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को सोलर आवर्स (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) बिजली उपयोग करने पर ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर में 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड/अनुबंध मांग वाले उपभोक्ताओं को 20 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। स्मार्ट मीटर से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए उपभोक्ता 1912 पर संपर्क कर सकते हैं अथवा श्री कैलाश कुमार चौधरी, प्रबंधक (स्मार्ट मीटरिंग सेल) से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही Smartmeteringcellbhopal@gmail.com पर ई-मेल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

    उपभोक्ताओं को घरेलू स्मार्ट मीटर से मिलने वाले फायदे

    •     ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद करता है।
    •     बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती।
    •     ऐप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित कर सकते हैं।
    •     ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, ताकि ऊर्जा की खपत को बेहतर बना सकते हैं।
    •     ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन ट्रैक करने और नियंत्रित करने की सुविधा मिलती है।
    •     ऊर्जा की खपत को कम करने से पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव कम होता है।
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  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सौर ऊर्जा और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के विकास के विजन से जुड़ रही जमीनी पहल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में दूरस्थ अंचलों में सुविधाओं का हो रहा विस्तार

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सौर ऊर्जा और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के विकास के विजन से जुड़ रही जमीनी पहल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में दूरस्थ अंचलों में सुविधाओं का हो रहा विस्तार

    रायपुर

    सुकमा जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा अब केवल बिजली का विकल्प नहीं, बल्कि रोशनी, पेयजल, सिंचाई और रोजमर्रा की सुविधाओं को मजबूत करने का माध्यम बन रही है। गांवों में सोलर हाईमास्ट से रात रोशन हो रही है, सोलर पम्पों से पेयजल की उपलब्धता आसान हुई है और किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने में सौर ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकास विजन में गांवों में आधुनिक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने, स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर रहा है। ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना में ग्रामीण भारत को मजबूत आधार देना इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रधानमंत्री  मोदी ने छत्तीसगढ़ के ‘विकसित भारत विकसित छत्तीसगढ़’ कार्यक्रम में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने, छत्तीसगढ़ को सौर ऊर्जा का केंद्र बनाने और किसानों को ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ बनाने की दिशा में सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया था। इसी व्यापक सोच के अनुरूप सुकमा जैसे दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव ला रहा है।

    अंधेरे से रोशनी तक, 71 सोलर हाईमास्ट से बदल रही गांवों की रात

    कभी शाम ढलते ही अंधेरे में सिमट जाने वाले सुकमा के कई गांवों में अब सौर ऊर्जा से संचालित हाईमास्ट रोशनी का माध्यम बन रहे हैं। नियद नेल्लानार योजना के जरिए सिलगेर, सालातोंग, टेकलगुडियम, पूवर्ती, बगडेगुड़ा, सुरपनगुड़ा, दुलेड़, मोरपल्ली, मंडीमरका, बेदरे, केरलापेन्दा और तोकनपल्ली सहित विभिन्न ग्रामों एवं नगरीय निकाय क्षेत्रों में 71 सोलर हाईमास्ट संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं 8 अन्य संयंत्रों की स्थापना प्रगतिरत है।

    इन हाईमास्ट की रोशनी का लाभ केवल सड़कों और चौक-चौराहों तक सीमित नहीं है। शाम के बाद जरूरी काम से आने-जाने वाले ग्रामीणों, बाजार जाने वाले परिवारों, बच्चों और युवाओं तथा सार्वजनिक आयोजनों में शामिल होने वाले लोगों के लिए यह रोशनी सुविधा का नया आधार बनी है। महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए भी गांवों में आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हुआ है।

    सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं के रखरखाव में भी प्रशासन की तत्परता दिखाई दे रही है। सुशासन तिहार में प्राप्त शिकायतों पर क्रेडा जिला कार्यालय द्वारा कार्रवाई करते हुए खराब सोलर हाईमास्ट संयंत्रों की एलईडी लाइट और बैटरियों को बदला गया। इससे बंद पड़ी रोशनी फिर से शुरू हुई और ग्रामीणों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सुविधा मिल सकी।

    672 सोलर पम्पों से पेयजल की राह हुई आसान

    सौर ऊर्जा का दूसरा महत्वपूर्ण प्रभाव ग्रामीण पेयजल व्यवस्था में दिखाई दे रहा है। जल जीवन मिशन के तहत जिले के विभिन्न गांवों में 672 सोलर पम्प स्थापित किए गए हैं। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का उपयोग पेयजल व्यवस्था को सुगम बनाने में किया जा रहा है। केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल की सुविधा पहुंचाना है। वर्ष 2026 में केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक जारी रखने तथा इसे केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण से आगे बढ़ाकर नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण पर अधिक केंद्रित करने का निर्णय लिया है।

    सुकमा के ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर पम्पों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को ऊर्जा की उपलब्धता से जोड़ा जाना दूरस्थ गांवों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। जिन परिवारों को पहले पानी के लिए नदी, झिरिया या कुओं तक जाना पड़ता था, उनके लिए गांव में ही सौर ऊर्जा से संचालित पम्प के माध्यम से पानी उपलब्ध होने से समय और श्रम की बचत हो रही है। इसका लाभ विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को मिल रहा है, जिन्हें पानी लाने में अतिरिक्त समय और मेहनत नहीं करनी पड़ती।

    4,300 सोलर पम्पों से किसानों को सिंचाई का सहारा

    सौर ऊर्जा का सबसे सीधा प्रभाव सुकमा के किसानों के खेतों में भी दिखाई दे रहा है। सौर सुजला योजना के तहत पिछले आठ वर्षों में जिले में 4,300 सोलर पम्प किसानों के खेतों तक पहुंच चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में निर्धारित 200 सोलर पम्पों का लक्ष्य भी पूरा किया गया है। सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा आधारित पम्प किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने में सहारा दे रहे हैं। इससे कृषि कार्यों को समय पर करने और उपलब्ध जल स्रोतों का उपयोग करने में सुविधा मिल रही है। 

    दूरस्थ अंचलों में सौर ऊर्जा बन रही विकास की साथी

    सुकमा में सौर ऊर्जा का विस्तार केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। कोन्टा विकासखंड के जगरगुंडा में सोलर स्ट्रीट लाइट स्थापित की गई है। वहीं पोलमपल्ली, चिंतागुफा, चिंतलनार और भेज्जी में 4.8 किलोवाट क्षमता के सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्रों की स्थापना स्वीकृत है। नगरीय निकाय क्षेत्रों में खराब स्ट्रीट लाइटों के सुधार का कार्य भी जारी है।

    इस तरह एक ओर गांवों की गलियां और चौक-चौराहे रोशन हो रहे हैं, तो दूसरी ओर घरों तक पेयजल और खेतों तक सिंचाई पहुंचाने में सौर ऊर्जा मददगार बन रही है। इससे ग्रामीणों के समय और श्रम की बचत के साथ उनकी दैनिक गतिविधियों में सुविधा बढ़ रही है।

    प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का विजन, गांवों के जीवन में दिख रहा बदलाव

    प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने ग्रामीण भारत के विकास के संदर्भ में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने को सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़ा है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी उनका जोर स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और आम नागरिकों को ऊर्जा उत्पादन में भागीदार बनाने पर रहा है। पीएम सूर्य घर जैसी पहल के माध्यम से घरों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार की नीतियां इसी व्यापक ऊर्जा आत्मनिर्भरता की सोच को आगे बढ़ाती हैं।

    सौर ऊर्जा से जुड़े इस राष्ट्रीय विजन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि ऊर्जा का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचे। सुकमा में सौर हाईमास्ट, सोलर पम्प और सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं का विस्तार इसी आवश्यकता के अनुरूप स्थानीय स्तर पर हो रहे प्रयासों को दर्शाता है।

    आज सुकमा में सौर ऊर्जा रात की रोशनी, घरों के पेयजल और खेतों की सिंचाई इन तीनों जरूरतों को पूरा करने में सहयोगी बन रही है। 71 सोलर हाईमास्ट, 672 सोलर पम्प और सौर सुजला योजना के तहत 4,300 सोलर पम्पों का लाभ इस बदलाव की तस्वीर को स्पष्ट करता है।

    दूरस्थ अंचलों में सुविधाओं का यह विस्तार सेवा, सुशासन और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों को रेखांकित करता है। यही बदलाव विकसित भारत के उस विजन से जुड़ता है, जिसमें गांवों को आधुनिक सुविधाओं से सशक्त, किसानों को अधिक सक्षम और नागरिकों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया है।

  • विकास की नई रफ्तार से बदल रहा छत्तीसगढ़, अधोसंरचना को मिल रही मजबूती :  अरुण साव

    विकास की नई रफ्तार से बदल रहा छत्तीसगढ़, अधोसंरचना को मिल रही मजबूती : अरुण साव

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में विकास का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। राज्य की अधोसंरचना को नई मजबूती दी जा रही है। सड़क, परिवहन और कनेक्टिविटी से लेकर आवास, जलापूर्ति और सार्वजनिक परिवहन तक के लिए आने वाले समय की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकास की आधारभूत संरचना तैयार की जा रही है। मजबूत अधोसंरचना आर्थिक विकास की बुनियाद है और राज्य सरकार इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। अधोसंरचना विकास पर अब तक 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव ने आज 'विकसित छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव-2026' में ये बातें कहीं।

    उप मुख्यमंत्री  साव ने नवा रायपुर में इकोनॉमिक टाइम्स ग्रुप द्वारा आयोजित 'छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव-2026' के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से आगे बढ़ रहा है। विकास की इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए राज्य में अधोसंरचना के विस्तार पर लगातार काम किए जा रहे हैं। बेहतर सड़कें, सुगम परिवहन और मजबूत कनेक्टिविटी न केवल लोगों की आवाजाही को आसान बनाती हैं, बल्कि उद्योग, व्यापार और निवेश के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार उन राज्यों और क्षेत्रों की विकास संबंधी जरूरतों पर भी विशेष ध्यान दे रही है, जो लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा में अपेक्षाकृत पीछे रहे हैं।  साव ने विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कनेक्टिविटी, अधोसंरचना और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों के बीच विकास का संतुलन मजबूत हो रहा है और दूरस्थ क्षेत्रों को भी व्यापक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के अवसर बढ़ रहे हैं।

     साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास का लाभ अधिक से अधिक क्षेत्रों और लोगों तक पहुंचाने के लिए अधोसंरचना को लगातार मजबूत किया जा रहा है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और शहरों की बढ़ती आबादी के साथ लोगों की जरूरतें भी बदल रही हैं। ऐसे में केवल वर्तमान जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर शहरी सुविधाओं और अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति के लिए मजबूत अधोसंरचना जरूरी है। सड़कों और परिवहन सुविधाओं के विस्तार से कनेक्टिविटी बेहतर होती है और इसका सीधा लाभ आर्थिक गतिविधियों को मिलता है। छत्तीसगढ़ में इसी दृष्टि से अधोसंरचना विकास को विकास की गति से जोड़ते हुए काम किया जा रहा है।

    कॉन्क्लेव में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक  नीलेश महादेव क्षीरसागर ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ शहरों की जरूरतों का स्वरूप भी बदल रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक शहरी अधोसंरचना तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0, बेहतर जलापूर्ति और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार प्रभावी ढंग से काम कर रही है।

    कॉन्क्लेव में छत्तीसगढ़ के विकास, अधोसंरचना, शहरीकरण और निवेश से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में इकोनॉमिक टाइम्स के सीनियर एसोसिएट एडीटर  अर्पित गुप्ता, टीपीआरईसी (TPREC) के सीईओ एवं मैनेजिंग डायरेक्टर  संजय बांगा तथा अनिएक्स (Anniex) के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर  नीरव शाह भी मौजूद थे।

  • मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से पूजा के डॉक्टर बनने के सपने को मिला संबल

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से पूजा के डॉक्टर बनने के सपने को मिला संबल

    रायपुर

    प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के सामने आर्थिक अभाव और विपरीत परिस्थितियां भी बाधा नहीं बन सकतीं। सरगुजा जिले की आदिवासी बेटी कुमारी पूजा सिंह ने अपने संघर्ष और लगन से इसे साबित कर दिखाया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली और 66 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद पूजा ने नीट-2026 में सफलता हासिल कर मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में प्रवेश प्राप्त किया है। उनके डॉक्टर बनने के सपने को आर्थिक परिस्थितियों के कारण रुकने न देने के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर कलेक्टर  अजीत वसंत ने जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से शिक्षण शुल्क के लिए 2 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से अब पूजा के लिए मेडिकल शिक्षा की राह आसान हुई है। राज्य शासन की मंशा है कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभावान विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा आर्थिक अभाव के कारण बाधित न हो। पूजा की पारिवारिक परिस्थितियों और उनकी उपलब्धि को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा उन्हें आवश्यक आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया गया है।

    कलेक्टर  अजीत वसंत ने पूजा की सफलता की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद पूजा ने जिस लगन, आत्मविश्वास और मेहनत के साथ नीट में सफलता हासिल की है, वह अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायी है।

    मजदूर मां की मेहनत और बेटी के हौसले ने दिखाई सफलता की राह

    कुमारी पूजा सिंह विकासखंड सीतापुर के ग्राम राधापुर की निवासी हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। पूजा के पिता  चक्रधर सिंह दूसरी शादी के बाद अपनी दूसरी पत्नी के साथ निवास करते हैं। ऐसे में परिवार के भरण-पोषण और बेटी की पढ़ाई की जिम्मेदारी उनकी मां के कंधों पर रही।

    पूजा की मां के पास स्वयं की कृषि भूमि नहीं है। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए वे गांव में दूसरे लोगों के खेतों में मजदूरी करती हैं। सीमित आय और संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई जारी रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मां की मेहनत और बेटी के दृढ़ संकल्प ने मिलकर पूजा के सपने को आगे बढ़ाया।

    शासकीय स्कूल से पढ़ाई, घर पर रहकर चार साल की नीट तैयारी

    पूजा ने अपनी प्रारंभिक एवं पूर्व माध्यमिक शिक्षा ग्राम राधापुर में पूरी की। इसके बाद उन्होंने शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सीतापुर से हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2022 में उन्होंने कक्षा 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की।

    परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए बड़े शहर जाकर महंगी कोचिंग ले सकें। इसके बावजूद पूजा ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। उन्होंने वर्ष 2022 से 2026 तक लगातार चार वर्षों तक घर पर रहकर नीट परीक्षा की तैयारी की। 66 प्रतिशत दिव्यांगता और आर्थिक चुनौतियों के बीच भी उन्होंने डॉक्टर बनने के अपने संकल्प को कमजोर नहीं पड़ने दिया।

    चार साल की मेहनत लाई रंग, मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में मिला प्रवेश

    पूजा की निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास का परिणाम वर्ष 2026 में सामने आया। उन्होंने नीट परीक्षा में सफलता हासिल की और काउंसलिंग के माध्यम से मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में प्रवेश प्राप्त किया। सीमित संसाधनों के बीच एक मजदूर मां की बेटी का मेडिकल कॉलेज तक पहुंचना उनके परिवार के साथ-साथ पूरे सरगुजा जिले के लिए गौरव की उपलब्धि है।

    पूजा की सफलता यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियां लक्ष्य की राह में स्थायी बाधा नहीं होतीं। यदि संकल्प मजबूत हो और मेहनत निरंतर जारी रहे तो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से मिली आर्थिक सहायता ने अब यह सुनिश्चित किया है कि पूजा की मेडिकल शिक्षा आर्थिक तंगी के कारण बाधित न हो।

    मां की मेहनत, बेटी का संघर्ष और शासन का सहयोग—इन तीनों के समन्वय ने पूजा के डॉक्टर बनने के सपने को नई उड़ान दी है। पूजा की यह सफलता सरगुजा सहित प्रदेश के उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

  • 200 ग्राम से अधिक सोना-चांदी, 1 लाख रुपये से अधिक नगद राशि, हथियार एवं मोटरसाइकिल बरामद

    200 ग्राम से अधिक सोना-चांदी, 1 लाख रुपये से अधिक नगद राशि, हथियार एवं मोटरसाइकिल बरामद

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा गंभीर एवं संगठित अपराधों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई, तकनीकी साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग तथा पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ बेहतर अंतर्राज्यीय समन्वय के माध्यम से अपराधों के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में सिंगरौली पुलिस ने जयंत स्थित कंचन ज्वेलर्स में हुई डकैती की सनसनीखेज घटना का महज 06 घंटे में पर्दाफाश करते हुए अंतर्राज्यीय गिरोह के 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कार्रवाई में डकैती में लूटे गए 200.7 ग्राम सोने के आभूषण, 205.410 ग्राम चांदी के आभूषण, 1 लाख 04 हजार 200 रुपये नगद, 02 मोटरसाइकिल, 01 पिस्टल, 02 कट्टे एवं 01 मोबाइल फोन बरामद किया  है।

    हथियारों के बल पर ज्वेलर्स में डकैती

    जयंत स्थित कंचन ज्वेलर्स में आरोपियों द्वारा पिस्टल एवं कट्टे लहराकर दुकान के कर्मचारियों को धमकाते हुए डकैती की वारदात को अंजाम दिया गया। विरोध करने पर आरोपियों द्वारा दो व्यक्तियों पर हथियारों से हमला किया गया तथा घटना के दौरान फायरिंग भी की गई। घटना की सूचना मिलते ही सिंगरौली पुलिस ने बिना समय गंवाए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में आरोपियों की धरपकड़ एवं लूटी गई संपत्ति की बरामदगी के लिए विशेष पुलिस टीमें गठित कीं।

    नगर पुलिस अधीक्षक विंध्यनगर, एसडीओपी मोरवा एवं एसडीओपी चितरंगी के नेतृत्व में गठित पुलिस टीमों द्वारा घटनास्थल एवं आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया गया। साथ ही संदिग्धों के आवागमन एवं संभावित भागने के मार्गों की जानकारी एकत्र कर तत्काल कार्रवाई प्रारंभ की गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए सोनभद्र (उत्तरप्रदेश), बलरामपुर (छत्तीसगढ़), गढ़वा एवं पलामू (झारखंड) पुलिस को तत्काल सूचना देकर अंतर्राज्यीय सीमाओं एवं संभावित मार्गों पर अलर्ट जारी कराया गया। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन तथा अन्य संभावित मार्गों पर पुलिस टीमों द्वारा सघन चेकिंग एवं संदिग्धों की तलाश की गई।

    इसी दौरान प्राप्त मुखबिर सूचना के आधार पर संदिग्ध मोटरसाइकिलों का पीछा करते हुए पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ा। पीछा किए जाने के दौरान आरोपियों की मोटरसाइकिल दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें दोनों घायल हो गए। पुलिस ने उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। अंतर्राज्यीय पुलिस समन्वय के तहत उत्तरप्रदेश पुलिस के सहयोग से गिरोह के एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया। आरोपी जवाबी फायरिंग में घायल हुआ था। उसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त दूसरी मोटरसाइकिल तथा उसके हिस्से में आए लूट के आभूषण एवं नगदी जब्त की गई।

    पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर घटना में शामिल अन्य आरोपियों एवं वारदात से जुड़े नेटवर्क के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। गिरोह के शेष आरोपियों की गिरफ्तारी तथा शेष लूटे गए मशरूका की बरामदगी के लिए पुलिस की विशेष टीमें विभिन्न राज्यों में भेजी गई हैं। प्रकरण में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

     

  • TMC और LJP के विवाद में नाम-चिह्न का फैसला कैसे होता है? जानें शिंदे-शिवसेना मामले का नियम

    TMC और LJP के विवाद में नाम-चिह्न का फैसला कैसे होता है? जानें शिंदे-शिवसेना मामले का नियम

    नई दिल्ली

    ममता बनर्जी ने मई में पश्चिम बंगाल गंवाया और सितंबर में तृणमूल कांग्रेस नाम और दो फूल जोड़ा चुनाव चिह्न भी छोड़ना पड़ा। हालांकि, इनका इस्तेमाल अरूप रॉय गुट भी नहीं कर सकेगा। अंतरिम आदेश के जरिए मुख्य नाम और चिह्न को फ्रीज कर दिया गया है। आगे जाकर स्थिति बदल भी सकती है। सवाल है कि जब साल 2022 में शिवसेना टूटने के मामले में महाराष्ट्र के मौजूदा उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाले गुट को चुनाव आयोग ने नाम और निशान कैसे दे दिया था।

    पहले समझते हैं कि अगर एक ही पार्टी में दो गुट बन जाते हैं और दोनों ही मुख्य दल होने का दावा करते हैं, तो चुनाव आयोग फैसला किस तरह से लेता है। चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968, यह वही आदेश है जिसका इस्तेमाल करके चुनाव आयोग एक पूरी प्रक्रिया से गुजरता और पता लगाता है कि किसे पार्टी का चुनाव चिह्न, झंडा और नाम मिलेगा। इसमें भी धारा 15 बेहद अहम है।
    कानून समझ लेते हैं

    इस कानून की धारा 15 के अनुसार, 'जब आयोग को अपने पास मौजूद जानकारी से यह पता चलता है कि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के विरोधी गुट या समूह हैं और हर कोई खुद को ही वह असली दल बताता है। ऐसे में आयोग मामले से जुड़े सभी उपलब्ध तथ्यों और हालात पर विचार करने और उन गुटों या समूहों के नेताओं और अन्य लोगों की बात सुनने के बाद यह तय कर सकता है कि उन विरोधी गुटों या समूहों में से कोई एक ही वह मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है या उनमें से कोई भी नहीं है। आयोग का यह फैसला उन सभी विरोधी गुटों या समूहों पर लागू होगा।'

    आसान भाषा में एक जानकार बताते हैं कि चुनाव आयोग इस बात पर फोकस करेगा कि दोनों गुटों में संगठन स्तर पर कितने सदस्य हैं। साथ ही विधायकों और सांसदों की गिनती भी अहम भूमिका निभाएगी। दोनों पक्ष इसकी जानकारी एक हलफनामे के जरिए देंगे। पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी बताते हैं कि आयोग 'रूल ऑफ मेजॉरिटी' के आधार पर फैसला करता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जांच करेगा कि किस गुट के पास सांसद, विधायक और संगठन पर ज्यादा समर्थन है।

    पार्टी किसके साथ, यह पता करने का भी एक तरीका है

    पूर्व चुनाव आयुक्त बताते हैं कि संगठन में ज्यादा समर्थन किसके साथ है, यह पता करने के लिए सभी पार्टी पदाधिकारी और उन लोगों को गिना जाता है, जो पार्टी के अध्यक्ष चुनने का अधिकार रखते हैं। पार्टी को इस संबंध में अपना हलफनामा दाखिल करना होता है। इसके बाद आयोग हस्ताक्षरों को मिलाता है। पूरी प्रक्रिया के बाद तय किया जाता है कि किस पार्टी को चिह्न मिलेगा।

    एकनाथ शिंदे को क्यों मिल गया चुनाव चिह्न

    हालांकि, शिवसेना में टूट मामले में भी चुनाव आयोग ने पहली ही बार में शिंदे गुट को मुख्य दल नहीं माना था। पहले शिवसेना नाम और तीर कमान चिह्न को फ्रीज कर दिया गया और दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चिह्न चुनने के लिए कहा गया था। 2023 में इसका अधिकार शिंदे समूह को मिला।

    आयोग ने कहा था कि उनका बहुमत के परीक्षण पर आधारित है, क्योंकि शिंदे गुट का समर्थन कर रहे विधायकों को 2019 विधानसभा चुनाव में करीब 76 फीसदी वोट मिले। जबकि, उद्धव ठाकरे गुट के मामले में यह आंकड़ा 23.5 प्रतिशत पर था। उस चुनाव में अविभाजित शिवसेना के कुल 55 उम्मीदवार जीते थे। 78 पेज लंबे आदेश में आयोग ने कहा था, 'शिव सेना पार्टी का नाम और पार्टी का चुनाव चिह्न तीर कमान याचिकाकर्ता गुट के पास ही रहेगा।' याचिकाकर्ता शिंदे गुट था। चुनाव आयोग के सामने शिंदे गुट ने साबित किया था कि उसके पास 40 विधायकों और 18 में से 13 सांसदों का समर्थन है। साथ ही गुटों ने संगठन स्तर पर भी हस्ताक्षरों से जुड़ा एक हलफनामा आयोग में दाखिल किया था।

    TMC के मामले में क्या बोला चुनाव आयोग

    खास बात है कि टीएमसी के मामले में अभी अंतरिम आदेश ही जारी हुआ है। संभावनाएं हैं कि आगे चलकर किसी गुट को मुख्य नाम और चिह्न मिल भी सकता है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। अंतरिम आदेश में कहा गया है, 'रिकॉर्ड पर मौजूद सभी जानकारियों पर ठीक से विचार करने के बाद… आयोग का मानना ​​है कि तृणमूल कांग्रेस में दो विरोधी गुट हैं, जिनमें से एक का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं और दूसरे की कमान अरूप रॉय संभाल रहे हैं।'

    अंतरिम आदेश के अनुसार, 'अब हर गुट खुद के असली तृणमूल कांग्रेस होने का दावा कर रहा है, इसलिए चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैराग्राम 15 के तहत आयोग को इस मामले पर ठोस फैसला लेना होगा।' आयोग ने साफ कर दिया है कि मौजूदा उपचुनाव की स्थिति को देखते हुए ऐसा किया गया है और मौजूदा अंतरिम आदेश मामला खत्म होने तक जारी रहेगा।

    खास बात है कि 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं। दोनों ही गुटों ने सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है।

    चिराग पासवान मामले में किसी को नहीं मिले

    यह टूट साल 2021 की है। तब रामविलास पासवान के निधन के कुछ समय बाद झोपड़ी के चिह्न वाले लोक जनशक्ति पार्टी में खटपट की खबरें तेज हो गईं थीं। दरअसल, यहां पसवान के बेटे और मौजूदा सांसद चिराग और भाई पशुपति कुमार पारस में दल को लेकर विवाद था। दोनों ही असली दल की अगुवाई का दावा कर रहे थे।

    2 अक्टूबर 2021 को चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसके बाद नाम और चिह्न को फ्रीज कर दिया गया था और किसी को भी इसके इस्तेमाल की अनुमति नहीं थी। दो दिन बाद यानी 5 अक्टूबर को नए नाम और चिह्न आवंटित किए गए। खास बात है कि इसके 28 दिन बाद ही 30 अक्टूबर 2021 में बिहार में दो सीटों पर उपचुनाव होने थे। ठीक वैसा ही जैसा बंगाल में दो सीटों पर उपचुनाव होने हैं।

    चुनाव आयोग ने चिराग और पशुपति गुट को अपने नाम में लोक जनशक्ति पार्टी नाम का जुड़ाव रखने की अनुमति दे दी थी और नए चिह्न बांटे थे। चिराग के खाते में हेलीकॉप्टर आया और नाम लोक जनशक्ति दल (राम विलास) और चाचा पारस को सिलाई मशीन चिह्न के साथ नाम राष्ट्रीय लोक जनशक्ति दल मिला था। फिलहाल, दोनों ही गुट अपने नए नाम और पहचान को बरकरार रखे हुए हैं। साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में चिराग ने हेलीकॉप्टर चिह्न और नए नाम के साथ हाजीपुर सीट से जीत हासिल की थी और NDA में शामिल होकर मंत्री बने।

  • यूपी में दिव्यांगजनों को मिलेंगी सुविधाएं, हर विधानसभा क्षेत्र में लगेंगे विशेष कल्याण शिविर

    यूपी में दिव्यांगजनों को मिलेंगी सुविधाएं, हर विधानसभा क्षेत्र में लगेंगे विशेष कल्याण शिविर

    योगी सरकार का दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने पर जोर, हर विधानसभा क्षेत्र में लगेंगे कल्याण शिविर

    दिव्यांगजनों को घर के नजदीक मिलेंगी सुविधाएं, 10 अक्टूबर तक शिविर पूरा करने का लक्ष्य

    सहायक उपकरण योजना के तहत पात्र दिव्यांगजनों को मिलेंगे कृत्रिम अंग और आवश्यक उपकरण

    एक ही स्थान पर पंजीकरण, पात्रता सत्यापन और विभिन्न सरकारी योजनाओं की मिलेगी जानकारी

    जिलाधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारियों को विभागों के बीच समन्वय के निर्देश

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में सहायक उपकरण योजना के तहत पात्र दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सेवा सेतु अभियान के अंतर्गत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में दिव्यांग कल्याण शिविर लगाए जाएंगे, जिन्हें 10 अक्टूबर 2026 तक पूरा कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिव्यांगजनों तक उनके निकटतम क्षेत्र में पहुंचाना है, ताकि उन्हें आवश्यक सुविधाओं के लिए सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। शिविरों के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को एक ही स्थान पर विभिन्न योजनाओं की जानकारी, आवेदन, पात्रता सत्यापन और लाभ उपलब्ध कराने की सुविधा मिलेगी।

    एक ही स्थान पर मिलेंगी कई योजनाओं की सुविधाएं

    दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से आयोजित होने वाले इन शिविरों में पात्र दिव्यांगजनों का चिन्हांकन और पंजीकरण किया जाएगा। सहायक उपकरणों के लिए आवेदन लेने के साथ आवश्यक अभिलेखों एवं पात्रता का सत्यापन भी होगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पात्र लाभार्थियों को कृत्रिम अंग और उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की कार्यवाही की जाएगी।

    इसके अलावा विभिन्न विभागों की दिव्यांगजन हितैषी योजनाओं की जानकारी भी एक ही स्थान पर दी जाएगी। जरूरत के अनुसार लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ आवेदन प्रक्रिया के संबंध में मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा।

    अधिकारियों को समन्वय के निर्देश

    शासनादेश के अनुसार शिविरों के प्रभावी आयोजन के लिए जिला स्तर पर जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से अधिकारियों को अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों तक शिविरों की सूचना पहुंचाने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    योगी सरकार की यह पहल दिव्यांगजनों की गतिशीलता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता बढ़ाने में सहायक होगी। लाभार्थियों को उनके नजदीकी क्षेत्र में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने से सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच आसान होगी। यह अभियान ‘सरकार की योजनाओं का लाभ लाभार्थी के द्वार तक’ पहुंचाने के संकल्प को आगे बढ़ाने के साथ दिव्यांगजनों के सम्मानजनक और सुगम जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

  • नई गाड़ी और विदेशी यात्रा पर रोक से शादी के मेन्यू तक बदलाव, पाकिस्तान में क्यों बढ़ी सख्ती?

    नई गाड़ी और विदेशी यात्रा पर रोक से शादी के मेन्यू तक बदलाव, पाकिस्तान में क्यों बढ़ी सख्ती?

    इस्लामाबाद

    भारत का पड़ोसी पाकिस्तान अक्सर अपनी उलझनों, कंफ्यूजिंग फैसले और डांवाडोल आर्थिक स्थिति के चलते दुनिया भर की मीडिया के बीच चर्चा में बना रहता है। अब अपनी ईंधन समस्याओं को लेकर वो पस्त हो चुका है। ऊर्जा संकट से जूझ रहे पाक ने शादियों से लेकर, दुकान, बाजार और शॉपिंग मॉल के लिए नए रूल बना दिए हैं।

    पाक सरकार ने इस्लामाबाद में दुकानों, बाजारों और मॉल को रात 9 बजे तक बंद करने का आदेश दिया है। वहीं बैंक्वेट हॉल, मैरिज गार्डन और मैरक्वी को रात 10 बजे तक बंद करना जरूरी होगा। इसके अलावा शादियों और दूसरे समारोहों में सिर्फ एक डिश परोसने की इजाजत होगी। रेस्टोरेंट और कैफे रात 11 बजे तक खुले रहेंगे।

    सिर्फ 1 डिश परोसने का फैसला क्यों?
    सरकार ने मैरिज हॉल और अन्य समारोह स्थलों को रात 10 बजे तक बंद करने का फैसला किया है, इससे रात में बिजली की खपत कम करने में मदद मिलेगी। वहीं शादी के कार्यक्रमों में सिर्फ एक डिश परोसने की इजाजत दी गई है, इसका मकसद भी खर्च और संसाधनों की बचत करना है, इससे पैसे के साथ ऊर्जा की खपत कम होगी।

    सरकारी खर्च पर भी भारी कटौती
    पाकिस्तान सरकार ने सिर्फ आम लोगों और कारोबारियों के लिए ही सख्त फैसले नहीं लिए हैं, बल्कि सरकारी गाड़ियों के लिए अगले तीन महीने तक ईंधन का कोटा 50 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है। तीन महीने के लिए सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्रा पर भी रोक लगाई गई है, इन सबके अलावा सरकारी विभागों में नए वाहन और टिकाऊ सामान खरीदने पर भी रोक लगा दी गई है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक IT से जुड़ी खरीद और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को इस फैसले से बाहर रखा गया है। सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में गैर-कर्मचारी से जुड़े नियमित खर्च में हर महीने 5 प्रतिशत कटौती का भी आदेश दिया है।

    सरकारी वाहनों के ईंधन में 50 फीसदी कटौती
    कैबिनेट डिवीजन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, सरकारी और प्रशासनिक वाहनों के लिए ईंधन आवंटन आधा कर दिया गया है। यह व्यवस्था तीन महीने तक लागू रहेगी। हालांकि सशस्त्र बलों, सिविल आर्म्ड फोर्सेज, कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों और जरूरी सेवाओं से जुड़े ऑपरेशनल वाहनों को इससे छूट दी गई है।

    सरकार ने सभी तरह के नए वाहनों की खरीद पर भी रोक लगा दी है। इसके साथ ही आईटी से जुड़ी खरीद को छोड़कर टिकाऊ सामान की सरकारी खरीद पर प्रतिबंध लगाया गया है। विकास परियोजनाओं को इन दोनों प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है।

    शादी में अब सिर्फ एक डिश
    पाकिस्तान सरकार के नए निर्देशों का असर शादी और अन्य समारोहों पर भी पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, मैरिज फंक्शन और शादी से जुड़े आयोजनों में अब केवल एक डिश परोसने की अनुमति होगी। यह कदम गैर-जरूरी खर्च और संसाधनों की खपत कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    इसके अलावा मैरिज हॉल और अन्य समारोह स्थल रात 10 बजे तक बंद करने होंगे। रेस्टोरेंट, कैफे और अन्य खाने-पीने के आउटलेट्स को रात 11 बजे तक बंद करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि टेकअवे और होम डिलीवरी सेवाओं को इस समय सीमा से छूट दी गई है।

    रात 9 बजे बंद होंगे बाजार
    नई व्यवस्था के तहत दुकानें, बाजार, शॉपिंग मॉल, बाजार परिसर, डिपार्टमेंटल स्टोर और किराना स्टोर रात 9 बजे तक बंद करने होंगे। वहीं फार्मेसी, अस्पताल, क्लीनिक, मेडिकल लैब, पेट्रोल और सीएनजी स्टेशन, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, जिम, खेल सुविधाएं, आईटी कंपनियां और कॉल सेंटर जैसी जरूरी सेवाओं को इन समय सीमाओं से छूट दी गई है।

    तीन महीने विदेश यात्रा पर रोक
    सरकार ने संघीय मंत्रियों, सलाहकारों, सांसदों और सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर तीन महीने की रोक लगाई है। कुछ निर्धारित अपवादों को छोड़कर विदेश यात्रा की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी अधिकारी के लिए विदेश जाना बेहद जरूरी हो, तो उसे इकोनॉमी क्लास में यात्रा करने का निर्देश दिया गया है।

    अंतरराष्ट्रीय विकास साझेदारों की ओर से मिलने वाली छात्रवृत्ति तथा कुछ प्रशिक्षण और कोर्स इस प्रतिबंध से बाहर रखे गए हैं। ऐसे मामलों में जहां विदेश में प्रतिनिधित्व जरूरी माना जाएगा, पाकिस्तान का संबंधित राजदूत या हाई कमिश्नर प्रतिनिधित्व कर सकता है।

    सरकारी डिनर और सेमिनारों पर भी रोक
    सरकारी विभागों को आमने-सामने बैठकों के बजाय टेलीकॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया है। सरकारी खर्च से होने वाले सेमिनार, प्रशिक्षण कार्यक्रम और कॉन्फ्रेंस पर भी रोक लगाई गई है। अगर किसी कार्यक्रम का आयोजन जरूरी हो, तो सरकारी ऑडिटोरियम या कमेटी रूम जैसी अपनी सुविधाओं का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है।

    सरकारी आधिकारिक डिनर पर भी रोक लगाई गई है। हालांकि विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से जुड़े आयोजनों को इससे छूट दी गई है।

    सरकारी खर्च में भी कटौती
    कैबिनेट डिवीजन की अधिसूचना के अनुसार, मौजूदा वित्तीय वर्ष में कर्मचारियों से जुड़े खर्च को छोड़कर अन्य खर्च में हर महीने 5 फीसदी की कटौती की जाएगी। यह व्यवस्था विदेशों में स्थित पाकिस्तान के मिशनों और वहां तैनात अधिकारियों के खर्च पर भी लागू होगी। हालांकि किराया, शिक्षा शुल्क और चिकित्सा संबंधी खर्च जारी रहेंगे। विकास परियोजनाओं को इस कटौती से बाहर रखा गया है।

    पहले भी लागू हुए थे ऐसे उपाय
    पाकिस्तान सरकार ने इस साल मार्च में भी ईंधन बचाने और सरकारी खर्च कम करने के लिए कई मितव्ययिता उपाय लागू किए थे। इनमें सरकारी वाहनों के ईंधन आवंटन में कटौती, सरकारी कर्मचारियों के लिए आंशिक वर्क फ्रॉम होम और अन्य खर्चों में कमी जैसे कदम शामिल थे। बाद में जून में कई उपाय वापस ले लिए गए थे, जबकि बाजारों के बंद होने का समय जारी रखा गया था।

    पाकिस्तान को क्यों लेने पड़े सख्त फैसले?
    पाकिस्तान में दुकान-बाजार से लेकर शादियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों तक के लिए नए टाइमिंग और मेन्यू को लेकर सख्ती लागू की गई है, इसका कारण मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और बाब अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री रास्तों में हूतियों की ओर से लगाई गई रोक के कारण तेल की सप्लाई को बताया जा रहा है।

    इस संकट के चलते पाकिस्तान में तेल और गैस की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल और गैस का इंपोर्ट करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से सरकार पर विदेशी मुद्रा खर्च करने का दबाव बढ़ जाता है। पाकिस्तान में फिलहाल पेट्रोल का दाम 391.22 रुपये प्रति लीटर हो गया है, वहीं हाई-स्पीड डीजल की कीमत 421.45 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

    अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग के असर से हजारों-लाखों मील दूर बैठे लोगों के रोजमर्रा के जीवन पर ही नहीं उनके त्योहारों और खुशियों पर भी पड़ रहा है। इस जंग के असर से पाकिस्तान का आम जनजीवन इस कदर प्रभावित हुआ है कि यहां सरकार ने शादियों में सिर्फ एक डिश परोसने का फरमान जारी कर डाला है। पाकिस्तान ने गुरुवार को सरकारी गाड़ियों के फ्यूल में कटौती, सरकार द्वारा गाड़ी खरीदने, अधिकारियों के विदेश दौरों और सरकारी डिनर पर रोक लगाने का ऐलान किया। खाड़ी युद्ध की वजह से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए ऊर्जा बचाने के लिए उठाए गए कई कड़े कदमों का हिस्सा है।

    खाड़ी संकट की वजह से देश में एलएनजी सप्लाई में रुकावट और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से पाकिस्तान को गैस और बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस साल दूसरी बार खर्चों में कटौती के लागू किए जा रहे कड़े कदमों में आईटी खरीद को छोड़कर सभी टिकाऊ सामान की सरकारी खरीद पर रोक और मीटिंग के लिए टेलीकॉन्फ्रेंसिंग पर स्विच करना भी शामिल है। सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि देश भर में शादी से जुड़े सभी फंक्शन और आयोजनों में सिर्फ एक ही डिश परोसी जाए।

    पाकिस्तान पीएमओ से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “तीन महीने के लिए सरकारी गाड़ियों के लिए ईंधन प्रावधान में 50% की कमी, पूरे वित्तवर्ष 2026-27 के लिए गैर कर्मचारी संबंधित खर्च बजट में 5% की कमी, आईटी खरीद को छोड़कर सभी टिकाऊ सामान की खरीद पर पूरी रोक और तीन महीने के लिए विदेश यात्राओं पर पूरी रोक, यहां तक कि जरूरी यात्राओं के मामले में भी, स्कॉलरशिप के मामले को छोड़कर।”

    पाकिस्तान ने मार्च में भी ऐसे ही कदम उठाए थे। देश में दो हफ्तों के लिए स्कूल बंद करने का निर्देश दिया गया था। सभी सरकारी मामलों में ईंधन का इस्तेमाल कम करना, ईंधन बचाने और सरकारी खर्च में कटौती करने के लिए ऑफिस कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम के लिए कहा गया था। भारत के इस पड़ोसी देश ने बुधवार से 100 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी देने की एक नई योजना लागू की है। यह राहत मोटरसाइकिल, रिक्शा और छोटी कार मालिकों को बढ़ती कीमतों के असर को कम करने के लिए एक तय महीने के कोटे पर दी जाएगी।

    छह महीने पहले ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों की वजह से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल और गैस निर्यात में रुकावट आई है। अब, सऊदी अरब और ईरान के समर्थन वाले हूतियों के बीच लड़ाई से भी लाल सागर के जरिए होने वाले व्यापार पर खतरा आ गया है।