Author: NewseDay

  • धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण : अवैध धर्मांतरण पर लगेगी रोक –  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

    धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण : अवैध धर्मांतरण पर लगेगी रोक – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज रायगढ़ में पत्रकारों के सवालों के जवाब में धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को महत्वपूर्ण बताया है। रायगढ़ में मीडिया से चर्चा के दौरान इस संबंध में पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं मिलने को लेकर यह निर्णय दूरगामी महत्व रखता है  और इससे निश्चित रूप से अवैध धर्मांतरण पर भी रोक लगेगी।

    मुख्यमंत्री  साय आज रायगढ़ में कोलता समाज द्वारा आयोजित नुआखाई भेंटघाट एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने आमंत्रण के लिए समाज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी समाजजनों को नुआखाई और शारदीय नवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलता समाज शिक्षित, संगठित और प्रगतिशील समाज है। समाज के लोग शिक्षा, कृषि और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी कोलता समाज की महत्वपूर्ण भागीदारी है।

    मुख्यमंत्री  साय ने समाज की गतिविधियों को और सुदृढ़ करने के लिए नगर पंचायत पुसौर में कोलता समाज के भवन हेतु 50 लाख रुपए तथा ग्राम कोतरलिया चंडी डोंगरी में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 30 लाख रुपए देने की घोषणा की।

    मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच के आयोजन पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के स्टेडियम में भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच होने वाले मुकाबलों से प्रदेश में महिला क्रिकेट को प्रोत्साहन मिलेगा और हमारी बेटियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से इन मुकाबलों में पहुंचकर महिला खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने का आह्वान किया।

  • जंगलों के बीच बसे 228 घरों को मिला साफ पानी, दंतेवाड़ा-सुकमा सीमा पर पहुंची नल जल सुविधा

    जंगलों के बीच बसे 228 घरों को मिला साफ पानी, दंतेवाड़ा-सुकमा सीमा पर पहुंची नल जल सुविधा

    सेवा संकल्प की कहानी

    घने जंगलों के बीच दंतेवाड़ा-सुकमा सीमा पर बसे 228 घरों तक पहुंचा नल से जल

    एडपाल और डोडपाल बने ‘हर घर जल ग्राम’, परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी हुई आसान

    रायपुर, 
    दंतेवाड़ा और सुकमा जिले की सीमा पर घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे एडपाल और डोडपाल गांवों के 228 परिवारों को अब घर पर ही नल से पेयजल मिल रहा है। जल जीवन मिशन से इन दूरस्थ गांवों में वर्षों से चली आ रही पानी की समस्या दूर हुई है। पहले ग्रामीणों को पेयजल के लिए हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ता था। अब घर-घर नल कनेक्शन मिलने से विशेष रूप से महिलाओं की दिनचर्या आसान हुई है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण जीवन में आए बदलाव की यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

     एडपाल के 137 और आश्रित ग्राम डोडपाल के 91 घरों में नल से  शुद्ध पेयजल उपलब्ध

             दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर कटेकल्याण विकासखंड की ग्राम पंचायत एडपाल के 137 और उसके आश्रित ग्राम डोडपाल के 91 घरों में जल जीवन मिशन के तहत नल से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। दोनों गांवों को ‘हर घर जल ग्राम’ का दर्जा भी मिल चुका है।

    पानी लाने की मशक्कत से मिली मुक्ति

           घर तक पानी पहुंचने का सबसे अधिक लाभ महिलाओं को मिला है। पहले गर्मी और बरसात के दिनों में भी उन्हें पानी के लिए घर से दूर जाना पड़ता था। इसमें सुबह का काफी समय बीत जाता था। अब पानी लाने की मशक्कत से राहत मिलने के साथ घरेलू कामकाज, बच्चों की देखभाल और आजीविका संबंधी गतिविधियों के लिए अधिक समय मिल रहा है।

    पानी की चिंता हुई दूर 

            एडपाल की वार्ड पंच बुदरी मंडावी और ग्रामीण महिला जोगी मरकाम बताती हैं कि घर में नल लगने से पानी की चिंता दूर हुई है। महिलाएं अब सब्जी बाड़ी, वनोपज संग्रहण और खेती-किसानी के कामों में अधिक समय दे पा रही हैं। बच्चों को भी पानी लाने में समय लगाने के बजाय पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय मिल रहा है।

    पानी की शुद्धता भी जांच रही गांव की महिलाएं

           इन गांवों में पेयजल की गुणवत्ता बनाए रखने की जिम्मेदारी भी महिलाओं ने संभाली है। इसके लिए गठित ‘जल वाहिनी’ समूह की प्रशिक्षित महिलाएं फील्ड टेस्ट किट से पानी की नियमित जांच कर रही हैं। इससे ग्रामीणों में स्वच्छ पेयजल के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ जलजनित बीमारियों से बचाव के प्रयासों को भी बल मिल रहा है।

    पूरे परिवार की रोजमर्रा जिंदगी हुई आसान

            डोडपाल में आयोजित ‘ग्राम जल उत्सव’ में ग्रामीणों ने घर-घर पेयजल सुविधा मिलने पर खुशी जताई। जल जीवन मिशन से दूरस्थ वनांचल के गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचने से महिलाओं और बच्चों सहित पूरे परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो रही है।

  • प्रदूषण के खिलाफ हरियाणा सरकार सख्त, दिल्ली-NCR में लाखों वाहनों पर लगेगी रोक

    प्रदूषण के खिलाफ हरियाणा सरकार सख्त, दिल्ली-NCR में लाखों वाहनों पर लगेगी रोक

    चंडीगढ़.

    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए हरियाणा सरकार ने पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने की पहल की है। सरकार ने वाहन मालिकों से 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा है।

    पुराने वाहनों से होने वाला प्रदूषण पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इनके रखरखाव का खर्च अधिक होने के साथ सड़क सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं हैं। सरकार ने वाहन मालिकों से पुराने वाहन अधिकृत पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा केंद्रों (आरवीएसएफ) पर ही स्क्रैप कराने की अपील की है। यहां निर्धारित प्रक्रिया के तहत वाहनों को नष्ट कर उपयोगी धातुओं और अन्य सामग्रियों का पुनर्चक्रण किया जाता है। इससे अनधिकृत तरीके से वाहन काटने और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलती है।

    एनसीआर में शामिल हैं हरियाणा के 14 जिले
    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड के अनुसार, हरियाणा के 14 जिले एनसीआर में शामिल हैं। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, रोहतक, सोनीपत, रेवाड़ी, झज्जर, पानीपत, पलवल, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, जींद और करनाल हैं। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की राष्ट्रीय हरित अधिकरण में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, जनवरी 2025 तक एनसीआर में 10 साल से पुराने 6,11,097 डीजल और 15 साल से पुराने 11,45,645 पेट्रोल वाहन दर्ज थे। इनकी कुल संख्या 17,56,742 थी। इनमें से जनवरी 2025 तक 4,160 डीजल और 2,377 पेट्रोल वाहनों का पंजीकरण रद किया गया था।

    एनसीआर में नहीं चलाए जा सकते ऐसे वाहन
    एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत आयु सीमा पार कर चुके डीजल और पेट्रोल वाहन एनसीआर में नहीं चलाए जा सकते। नियम तोड़ने पर चालान और वाहन जब्त करने जैसी कार्रवाई हो सकती है। दिसंबर 2025 में संसद में पेश संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में 21 वाहन स्क्रैपिंग केंद्र संचालित हैं। वाहन स्क्रैपिंग का कोई एक समान सरकारी शुल्क निर्धारित नहीं है। भुगतान वाहन की स्थिति, वजन और कबाड़ सामग्री के मूल्य के आधार पर तय हो सकता है। वाहन मालिक को स्क्रैप की कीमत मिल सकती है और प्रक्रिया पूरी होने पर प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। पात्रता के अनुसार, इसके आधार पर नए वाहन की खरीद पर प्रोत्साहन मिल सकता है।

    नए वाहन लेने पर मिल सकती है छूट
    हरियाणा ने 2022 में वाहन स्क्रैपिंग नीति अधिसूचित की थी। स्क्रैपिंग उद्योग को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग एवं रीसाइक्लिंग सुविधा प्रोत्साहन नीति-2024 में भी प्रावधान हैं। केंद्र सरकार की व्यवस्था के तहत नए वाहन पर मोटर वाहन कर में छूट मिल सकती है। गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए यह अधिकतम 25 प्रतिशत और व्यावसायिक वाहनों के लिए अधिकतम 15 प्रतिशत तक हो सकती है।

  • CJP को तिरंगा फहराने की इजाजत पर फैसला जल्द? दिल्ली पुलिस की शर्त पूरी करना जरूरी

    CJP को तिरंगा फहराने की इजाजत पर फैसला जल्द? दिल्ली पुलिस की शर्त पूरी करना जरूरी

    नई दिल्ली

    कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में शुक्रवार को संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और एनडीएमसी ने सुरक्षा कड़े प्रबंध कर दिए हैं।

    वहीं डीसीपी नेहा यादव ने आज शाम की गई प्रेसवार्ता में सीजेपी के लिए एक राहत वाली बात भी कही है। उनके अनुसार, सीजेपी को सीपी में तिरंगा लहराने की अनुमति मिल सकती है, लेकिन इसके लिए दिल्ली पुलिस की कुछ शर्तें हैं। 
    क्या बोलीं डीसीपी नेहा यादव?

    डीसीपी नेहा यादव ने कहा, दिल्ली पुलिस राष्ट्रीय ध्वज लेकर आने और राष्ट्रगान गाने के लिए 11 चुनिंदा लोगों के एक समूह को किसी उपयुक्त स्थान पर इसकी अनुमति देने की व्यवस्था कर सकती है। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि राष्ट्रीय ध्वज को वैधानिक या साथ लेकर चलने और राष्ट्रगान गाने के दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया जाए, तथा तिरंगे और राष्ट्रगान के प्रति पूरा सम्मान, गरिमा और मर्यादा बनाई रखी जाए।

    सीजेपी ने क्या की है लोगों से अपील?

    सीजेपी ने इंटरनेट मीडिया और पत्रकारवार्ता के जरिए आम जनता से शुक्रवार शाम पांच बजे हाथों में तिरंगा लेकर सेंट्रल पार्क में जुटने की अपील की है। आम आदमी पार्टी ने भी इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कार्यकर्ताओं और समर्थकों से बड़ी संख्या में पहुंचने का आह्वान किया है।

    मौजूदा सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में शांति बनाए रखने, जनता की सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू है।

    डीसीपी ने बोलीं- सुरक्षा के हैं कड़े इंतजाम

    डीसीपी नेहा यादव ने शुक्रवार शाम पत्रकारवार्ता कर बताया कि नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर सूचित किया है कि प्रशासनिक कारणों से सेंट्रल पार्क 16 और 17 अक्टूबर को बंद रहेगा।

    एनडीएमसी ने पुलिस से अनुरोध किया है कि इस संवेदनशील सार्वजनिक पार्क की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं और किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति को प्रवेश न करने दिया जाए। त्योहारों के इस मौसम में व्यावसायिक गतिविधियों के प्रभावित होने की आशंका से कनॉट प्लेस के विभिन्न व्यापारी संगठनों और मार्केट एसोसिएशनों ने पुलिस में आवेदन दिया है।

    व्यापारियों का भी दिया हवाला

    व्यापारियों का कहना है कि उपद्रवी तत्वों और गैर-कानूनी जमावड़े से उनके कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है। इस मुद्दे से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी व्यापारी गतिविधियों में बाधा की आशंका पर गौर किया है, जिसके जवाब में दिल्ली पुलिस ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि याचिकाकर्ता की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएंगे।

    पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे धारा 163 के आदेश का उल्लंघन करने वाली किसी भी सभा में शामिल न हों। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से क्षेत्र की शांति भंग न करने और दुकानदारों के कारोबार में बाधा न डालने का अनुरोध किया है।

     

  • नगर निगम चुनाव से पहले विकास कार्यों के उद्घाटन पर सवाल, चंडीगढ़ में SIA ने की कार्रवाई रोकने की अपील

    नगर निगम चुनाव से पहले विकास कार्यों के उद्घाटन पर सवाल, चंडीगढ़ में SIA ने की कार्रवाई रोकने की अपील

    चंडीगढ़.

    नगर निगम चुनाव नजदीक आते ही शहर में विकास कार्यों के धड़ाधड़ उद्घाटन और शिलान्यास हो रहे हैं। इस बीच सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन (एसआईए) ने सार्वजनिक धन से करवाए जा रहे विकास कार्यों के उद्घाटन के नाम पर राजनीतिक प्रचार किए जाने पर चिंता जताई है।

    एसआईए ने चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम से मांग की है कि चुनाव से पहले अनधिकृत उद्घाटनों और राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से आयोजित प्रचार कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। एसआईए के प्रतिनिधियों का कहना है कि पार्षदों और संभावित उम्मीदवारों को अपने काम और उपलब्धियों को जनता के सामने रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन सरकारी धन से होने वाले विकास कार्यों को किसी व्यक्ति, परिवार या राजनीतिक दल की निजी उपलब्धि के रूप में पेश करना उचित नहीं है।

    प्रशासनिक निष्पक्षता पर उठते हैं सवाल
    ये परियोजनाएं जनता के पैसे से तैयार होती हैं और इनका लाभ भी जनता को ही मिलता है। उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि या संभावित उम्मीदवार नगर निगम की अनुमति के बिना किसी सार्वजनिक परियोजना का उद्घाटन करता है या निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करता है तो यह प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। चुनाव से ठीक पहले ऐसे कार्यक्रमों के जरिये राजनीतिक लाभ लेने की संभावना पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। एसोसिएशन ने मांग की कि सार्वजनिक परियोजनाओं का उद्घाटन केवल सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी और नियमों के अनुसार ही किया जाए। पार्षदों, उनके परिवार के सदस्यों और संभावित उम्मीदवारों को सरकारी कार्यक्रमों या सार्वजनिक विकास कार्यों का इस्तेमाल व्यक्तिगत प्रचार और चुनावी लाभ के लिए करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।

    विकास कार्यों को चुनावी उपलब्धि प्रस्तुत न करें
    एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि एसोसिएशन की मांग किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक धन के सम्मान, प्रशासनिक निष्पक्षता और चुनाव से पहले सभी उम्मीदवारों को समान अवसर सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य जनता के हैं और उन्हें किसी की व्यक्तिगत या चुनावी उपलब्धि के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

  • छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: कमीशनखोरी का बड़ा मामला उजागर, हर महीने 80 लाख रुपये के लेनदेन की जांच

    छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: कमीशनखोरी का बड़ा मामला उजागर, हर महीने 80 लाख रुपये के लेनदेन की जांच

    रायपुर

    पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) मैनपावर भुगतान घोटाले में कमीशन वसूली के नेटवर्क को लेकर जांच में नए तथ्य सामने आए हैं।

    ईओडब्ल्यू के पूरक आरोपपत्र के अनुसार, शासकीय शराब दुकानों के कर्मचारियों के ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के भुगतान के नाम पर मैनपावर एजेंसियों को अतिरिक्त राशि दी गई।

    इसके बाद एजेंसियों से नकद कमीशन वसूला जाता था। सभी एजेंसियों से हर महीने करीब 70 से 80 लाख रुपये कमीशन आता था।

    शराब सिंडिकेट प्रमुख अनवर ढेबर तक पहुंचाने के साक्ष्य मिले

    तत्कालीन सीएसएमसीएल प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपये नकद कमीशन लेकर शराब सिंडिकेट प्रमुख अनवर ढेबर तक पहुंचाने के साक्ष्य मिले हैं। कमीशन की रकम एकत्र कर त्रिपाठी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सिद्धार्थ सिंघानिया निभाता था।

    एक एजेंसी से 15.65 करोड़ रुपये देने का दावा

    आरोपपत्र में सिद्धार्थ सिंघानिया के कथन का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि अक्टूबर 2019 से मार्च 2023 के बीच अकेले सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड की ओर से लगभग 15.65 करोड़ रुपये दिए गए। जांच में यह भी सामने आया कि त्रिपाठी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नवीन प्रताप सिंह तोमर के माध्यम से कथित कमीशन वसूली जारी रही।

    इस दौरान सेवा शुल्क और ओवरटाइम की राशि पर कमीशन की दर बढ़ाकर एक-तिहाई किए जाने का विवरण भी मिला है।

    दो कंपनियों को 48 करोड़ से अधिक का भुगतान

    ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड को मिलाकर 48.08 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान हुआ। ईगल हंटर को 33.45 करोड़ और अलर्ट कमांडोज को 14.63 करोड़ रुपये मिले। इनमें से 38.31 करोड़ रुपये अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में भुगतान किए गए।

    जांच एजेंसी के अनुसार, ईगल हंटर के संस्थापक बीआर लोहिया दोनों कंपनियों के प्रमुख निर्णय लेते थे। उनके निर्देश पर कर्मचारियों के ओवरटाइम और अतिरिक्त दिनों के बिल तैयार कराए गए, जबकि संबंधित कर्मचारियों को रकम नहीं मिलने की बात सामने आई।

    बिल पास कराने के लिए 28.80 लाख रुपये

    29 नवंबर 2023 को लंबित बिल पारित कराने के बदले तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर को कथित तौर पर 28.80 लाख रुपये दिए जाने थे। इसके लिए दिल्ली से 29.40 लाख रुपये का चेक भेजा गया। बैंक से रकम निकालने के बाद 60 हजार रुपये कार्यालयीन खर्च के लिए रखे गए और शेष राशि कमीशन के लिए अलग की गई।

    रकम पहुंचाने से पहले ईडी की कार्रवाई में यह राशि बरामद हुई। जांच एजेंसी ने इसे मैनपावर भुगतान से जुड़ी कथित कमीशन वसूली के नेटवर्क का हिस्सा बताया है।

  • वोटर लिस्ट पर चुनाव आयोग का बड़ा अपडेट, 17 राज्यों में शुरू होगी संशोधन की प्रक्रिया

    वोटर लिस्ट पर चुनाव आयोग का बड़ा अपडेट, 17 राज्यों में शुरू होगी संशोधन की प्रक्रिया

     नई दिल्ली

    SIR विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की बीच चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) कराएगा। चुनाव आयोग ने इसके लिए राज्यों को सूचित किया है।

    इन 17 राज्यों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा भी शामिल हैं, जहां चुनाव होने वाले हैं।

    उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा सहित संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखे एक पत्र में, चुनाव आयोग ने कहा कि इस प्रक्रिया के लिए 1 जनवरी 2027 निर्धारित कट-ऑफ तारीख होगी।

    403 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल अगले साल 22 मई को समाप्त हो रहा है। मणिपुर, गोवा, पंजाब और उत्तराखंड की विधानसभाओं, जिनमें क्रमशः 60, 40, 117 और 70 सीटें हैं, का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा।

    'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' के तहत, चुनाव आयोग को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले चुनाव कराने की अनुमति होती है।
    SIR और SSR में क्या है अंतर?

    संक्षिप्त पुनरीक्षण का मुख्य ध्यान नए पात्र लोगों को जोड़ने और सामान्य सुधारों पर होता है, जबकि 'SIR' कहीं अधिक व्यापक प्रक्रिया है। इसमें पूरे राज्य में घर-घर जाकर सत्यापन करना, प्रविष्टियों की बारीकी से जांच करना और बड़े पैमाने पर डेटा का ऑडिट करना शामिल है।

     

  • राव हॉस्पिटल में फायर सेफ्टी ऑडिट को लेकर विवाद, कथित फर्जीवाड़े में संचालक के खिलाफ FIR दर्ज

    राव हॉस्पिटल में फायर सेफ्टी ऑडिट को लेकर विवाद, कथित फर्जीवाड़े में संचालक के खिलाफ FIR दर्ज

    CG राव हॉस्पिटल के संचालक के खिलाफ FIR, फायर सेफ्टी ऑडिट में खुला फर्जीवाड़े का खेल
    आरंग.

    आरंग स्थित राव हॉस्पिटल का हैरान करने वाला कारनामा सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन ने अग्निशमन विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए फायर सेफ्टी एनओसी (NOC) का नवीनीकरण कराने के बजाय कंप्यूटर ग्राफिक्स के जरिए खुद ही फर्जी एनओसी तैयार कर ली।

    जिले में अपनी तरह की इस पहली जालसाजी का भंडाफोड़ होने के बाद आरंग पुलिस ने अस्पताल संचालक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है।

    डिजिटल पड़ताल में ऐसे खुली पोल
    अग्निशमन विभाग और एसडीआरएफ की संयुक्त टीम जब नियमित सुरक्षा ऑडिट के तहत राव हॉस्पिटल पहुंची, तो अस्पताल प्रबंधन ने अधिकारियों को एनओसी की फोटोकॉपी थमा दी। लेकिन दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच के दौरान अधिकारियों को गड़बड़ी की आशंका हुई। कागजात पर एनओसी जारी होने की तारीख 16 अप्रैल 2026 दर्ज थी, लेकिन जब अधिकारियों ने उस पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन किया तो सिस्टम में असली तारीख 16 अप्रैल 2025 दिखाई दी। एनओसी में जांच अधिकारी के तौर पर ‘पुरुषोत्तम सिंह’ का नाम दर्ज था, जबकि अग्निशमन विभाग में इस नाम का कोई अधिकारी कार्यरत ही नहीं है। यही नहीं, जिस तिथि पर हस्ताक्षर अंकित थे, उस दौरान संबंधित पद पर कोई अधिकारी पदस्थ ही नहीं था। शासकीय पोर्टल पर मिलान करने के बाद पूरी तरह साफ हो गया कि अस्पताल संचालक ने अपने फायदे के लिए कंप्यूटर ग्राफिक्स के माध्यम से एक नकली (कूटरचित) प्रमाण पत्र तैयार किया था।

    धोखाधड़ी का मामला दर्ज, ग्राफिक्स डिजाइनर पर भी कसेगा शिकंजा
    न्यू रायपुर फायर ब्रिगेड के निरीक्षक पुष्पराज विनायक की शिकायत पर आरंग थाना पुलिस ने राव हॉस्पिटल के संचालक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (4) के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस फर्जी दस्तावेज को बनाने में किस कंप्यूटर सेंटर या ग्राफिक्स डिजाइनर की मदद ली गई थी। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि जालसाजी करने वाले और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले, दोनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इस मामले में पुष्पराज सिंह (जिला सेनानी एवं फायर ऑफिसर, रायपुर) ने बताया, “व्यावसायिक व चिकित्सकीय संस्थानों में सुरक्षा के लिहाज से हर साल फायर एनओसी लेना अनिवार्य है। इससे पहले बिलासपुर और अंबिकापुर में ऐसे मामले आए थे जहां गिरफ्तारियां हुई थी, लेकिन रायपुर जिले में फर्जी एनओसी का यह पहला मामला है। अधिकारियों के मुताबिक, राव हॉस्पिटल प्रबंधन का यह कृत्य अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों की जिंदगी को सीधे तौर पर जोखिम में डालने वाला है। अस्पताल में आगजनी से निपटने के वास्तविक पुख्ता इंतजाम किए बिना ही फर्जी कागजात के सहारे अस्पताल का संचालन किया जा रहा था।

  • छत्तीसगढ़ में गन्ना मूल्य की नई दर लागू, किसानों को अब ₹425 प्रति क्विंटल मिलेंगे

    छत्तीसगढ़ में गन्ना मूल्य की नई दर लागू, किसानों को अब ₹425 प्रति क्विंटल मिलेंगे

    विशेष लेख

    गन्ना मूल्य में छत्तीसगढ़ देश में नंबर वन

    किसानों को अब 425 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगा भुगतान 

    नई दर 2025-26 सत्र से ही लागू

                

    रायपुर, 
     मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अन्नदाता की खुशहाली ही छत्तीसगढ़ का आधार है। किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिले, खेती लाभकारी बने और किसान परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हों, इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।  मुख्यमंत्री साय ने किसानों के हितों को ध्यान में रखकर शक्कर कारखानों के लिए गन्ने की खरीदी 425 रुपए प्रति क्विंटल की दर से करने का निर्णय लिया है। पेराई सत्र 2025- 26 में की गई खरीदी का भुगतान भी बढ़े हुए दर पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत को कम करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी किसानों के हितों को अपनी नीतियों और निर्णयों के केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है। किसानों की आवश्यकताओं और समस्याओं के प्रति सरकार संवेदनशील है। किसान हित से जुड़े विषयों पर प्राथमिकता से निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समृद्धि में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। खेती-किसानी मजबूत होगी तो गांव मजबूत होंगे। गांवों की समृद्धि से ही छत्तीसगढ़ की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।

                        छत्तीसगढ़ सरकार ने गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और गन्ने की खेती को लाभकारी बनाने के लिए गन्ने के खरीदी मूल्य में बड़ी बढ़ोतरी की है। छत्तीसगढ़ सरकार ने गन्ने का खरीदी मूल्य 355 रूपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 425 रूपए प्रति क्विंटल कर दिया है। इस बढ़े हुए मूल्य का लाभ पेराई सत्र 2025-26 के गन्ने पर भी मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य की चार सहकारी चीनी मिलों से जुड़े 31 हजार से अधिक किसानों को लगभग 51.09 करोड़ का बोनस वितरित किया जाएगा।

    राज्य सरकार ने गन्ना खरीदी दर बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दी

                       देश के कुल गन्ना उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान भले ही कम है लेकिन गन्ना किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में राज्य अब नंबर वन हो गया है। राज्य सरकार ने गन्ना खरीदी दर बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले से छत्तीसगढ़ में गन्ने की खरीदी दर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों की तुलना में अधिक हो गई है। खास बात यह है कि बढ़ी हुई दर पेराई सत्र 2025-26 से ही लागू होगी। इस सत्र में पहले ही गन्ना बेच चुके किसानों को भी बढ़ी हुई दर के अनुसार भुगतान किया जाएगा। 

    किसानों को प्रति क्विंटल 70 रुपये अधिक मिलेंगे

                    सरकार के इस फैसले का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी बनाना है।राज्य में पहले गन्ने की खरीदी 355 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होती थी। नई दर से किसानों को प्रति क्विंटल 70 रुपये अधिक मिलेंगे। गन्ना मूल्य में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है, जब खेती की लागत और किसानों की आमदनी के बीच संतुलन बनाना कृषि नीति की प्रमुख चुनौती है। 
     
                   देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में अगैती प्रजाति के गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 400 रुपये प्रति क्विंटल, हरियाणा में 415 रुपये और पंजाब में 416 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने का भुगतान केंद्र सरकार के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी), चीनी की रिकवरी और संबंधित मिलों की व्यवस्था के आधार पर निर्धारित होता है। केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। 

    किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

                     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित और बेहतर मूल्य दिलाना तथा खेती को सम्मानजनक और लाभकारी आजीविका बनाना है। गन्ना खरीदी दर में वृद्धि इसी दिशा में उठाया गया कदम है। प्रति क्विंटल 70 रुपये की बढ़ोतरी से किसानों को उनकी कुल बिक्री के अनुपात में अतिरिक्त आमदनी मिलेगी। 

                  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिले, खेती लाभकारी बने और हमारे अन्नदाता निरंतर समृद्ध हों-इसी संकल्प के साथ हमारी सरकार आगे बढ़ रही है। नई दर का लाभ कीमतों में बढ़ोतरी से पहले बेचे गए गन्ने पर भी लागू होगी। इससे चालू पेराई सत्र में अपनी उपज की आपूर्ति कर चुके किसानों को भी राहत मिलेगी। यह व्यवस्था मूल्य वृद्धि के लाभ को व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।गन्ने की खरीदी दर में वृद्धि का असर केवल किसानों की आमदनी तक सीमित नहीं है। बेहतर मूल्य मिलने से आने वाले समय में किसान गन्ने की खेती के रकबे, उत्पादन लागत और संभावित लाभ का नए सिरे से आकलन कर सकते हैं। 

    छत्तीसगढ़ में हर साल लगभग 18.6 लाख से 20.4 लाख टन गन्ने का उत्पादन

              गन्ना उत्पादन में छत्तीसगढ़ का देश में 14 वां स्थान है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 4 प्रमुख सहकारी शक्कर कारखाने संचालित हैं, भोरमदेव सहकारी चीनी मिल (कवर्धा), महामाया सहकारी चीनी मिल (सूरजपुर), सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी चीनी मिल (पंडरिया, कबीरधाम) और मां दंतेश्वरी मैय्या सहकारी चीनी मिल (बालोद) है। छत्तीसगढ़ में हर साल लगभग 18.6 लाख से 20.4 लाख टन गन्ने का उत्पादन होता है। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम, सूरजपुर, जगदलपुर, सरगुजा, दुर्ग, बिलासपुर व रायपुर जिलो में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है । सर्वाधिक उत्पादन देने वाले  जिलो  में कबीरधाम, जगदलपुर एवं सरगुजा जिले  आते है।

           धनंजय राठौर
              सयुक्त संचालक जनसंपर्क, रायपुर

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  • देश के सबसे बड़े IPO पर निवेशकों की नजर, Jio Platforms के इश्यू में कर्मचारियों और शेयरधारकों के लिए भी रिजर्व कोटा

    देश के सबसे बड़े IPO पर निवेशकों की नजर, Jio Platforms के इश्यू में कर्मचारियों और शेयरधारकों के लिए भी रिजर्व कोटा

    मुंबई 

    रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ निवेशकों के बीच चर्चा में है. कंपनी ने आईपीओ से जुड़ा रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है. इसके साथ ही इश्यू का प्राइस बैंड, शेयरों की डीटेल और आईपीओ से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है. कंपनी इस इश्यू के जरिए करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ माना जा रहा है। 

    जियो प्लेटफॉर्म्स का कारोबार सिर्फ मोबाइल इंटरनेट तक सीमित नहीं है. कंपनी के तहत रिलायंस जियो का टेलीकॉम बिजनेस और कई डिजिटल सर्विसेस आती हैं. ऐसे में निवेशकों की नजर आईपीओ पर रहेगी. हालांकि, निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार और आईपीओ की शर्तों को समझना जरूरी है। 

    क्या है जियो आईपीओ का प्राइस बैंड?
    जियो प्लेटफॉर्म्स ने आईपीओ के लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. यानी निवेशकों को इसी दायरे में शेयरों के लिए बोली लगानी होगी. अंतिम कीमत तय होने के बाद शेयरों का अलॉट किया जाएगा। 

    कितने शेयर जारी करेगी कंपनी?
    इस आईपीओ में कुल 27 करोड़ शेयरों का इश्यू है. अपर प्राइस बैंड 1,119 रुपये के हिसाब से कंपनी करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटा सकती है. वहीं, 1,065 रुपये के निचले प्राइस बैंड पर यह रकम करीब 28,755 करोड़ रुपये होगी। 

    देश के बड़े आईपीओ के बीच कहां होगी जियो की जगह?
    जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ अपर प्राइस बैंड पर करीब 30,213 करोड़ रुपये का होगा. इसके साथ यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है. इससे पहले हुंडई मोटर इंडिया ने 27,870 करोड़ रुपये, एनएसई के प्रस्तावित आईपीओ का साइज करीब 22,569 करोड़ रुपये, एलआईसी ने 20,557 करोड़ रुपये और पेटीएम ने 18,300 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था। 

    कब खुलेगा और कब बंद होगा आईपीओ?
    जियो आईपीओ टाइमलाइन के मुताबिक, 19 अक्टूबर को एंकर निवेशकों के लिए अलॉट होगा. आम निवेशकों के लिए आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. निवेश करने से पहले कंपनी के डॉक्यूमेंट्स में दी गई तारीखों को जरूर चेक कर लें। 

    कर्मचारियों को कितना मिलेगा फायदा?
    कंपनी ने एलिजिबल कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे हैं. इन कर्मचारियों को प्रति शेयर 54 रुपये की छूट भी मिलेगी. हालांकि, इसका फायदा उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो कंपनी की तय पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। 

    रिलायंस के शेयरधारकों के लिए क्या है खास?
    रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र मौजूदा शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे गए हैं. इसमें वे पात्र व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) शामिल हैं, जिनके पास 14 अक्टूबर को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर थे. यह तारीख आरएचपी दाखिल करने की तारीख है. इस कैटेगरी में आवेदन करने के लिए संबंधित नियमों और पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी है। 

    जियो प्लेटफॉर्म्स का कारोबार क्या है?
    जियो प्लेटफॉर्म्स के तहत रिलायंस जियो का टेलीकॉम कारोबार और डिजिटल सर्विसेस देती आती हैं. कंपनी मोबाइल कनेक्टिविटी और इंटरनेट के अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा अन्य तकनीकी सेवाओं के क्षेत्र में भी काम करती है. यह रिलायंस इंडस्ट्रीज की उपभोक्ता कारोबार से जुड़ी स्ट्रैटजी का अहम हिस्सा है। 

    आईपीओ से जुटाई रकम क्यों अहम है?
    आईपीओ से जुटाई जाने वाली रकम कंपनी के साइज और बाजार में उसकी स्थिति को लेकर निवेशकों का ध्यान खींच रही है. हालांकि, रकम का इस्तेमाल किस तरह होगा, इसकी सही जानकारी के लिए आरएचपी में दिए गए प्रस्ताव को जानना जरूरी है। 

    निवेश से पहले किन बातों को समझें?
    किसी भी आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी की कमाई, कर्ज, कारोबार की वृद्धि, कॉम्टिटेविटी और भविष्य के प्लान को समझना चाहिए. जियो प्लेटफॉर्म्स के मामले में भी निवेशकों को आरएचपी में दिए गए वित्तीय आंकड़ों और कारोबार से जुड़ी जानकारियों का एनालिसिस करना चाहिए। 

    2008 के बाद रिलायंस ग्रुप का पहला IPO
    जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग रिलायंस ग्रुप के लिए भी खास होगी, क्योंकि 2008 के बाद यह ग्रुप का पहला आईपीओ होगा. साथ ही, किसी कंज्यूमर-फोकस्ड कारोबार की यह पहली बड़ी पब्लिक पेशकश होगी. जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस के डिजिटल कारोबार का प्रमुख हिस्सा है. कंपनी क्लाउड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एंटरप्राइज नेटवर्क सर्विसेज जैसे सेक्टर्स में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है।