Author: NewseDay

  • West Indies Cricket: ₹ करोड़ों के घाटे के बीच खर्च में कटौती, खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट में बड़ा बदलाव

    West Indies Cricket: ₹ करोड़ों के घाटे के बीच खर्च में कटौती, खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट में बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली
    वेस्टइंडीज की क्रिकेट टीम समय तीन ओडीआई और 5 टी20I मुकाबले के लिए भारत दौरे पर है. भारत दौरे के बीच ही टीम के खिलाड़ियों को बड़ा झटका लगा है. क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने खिलाड़ियों की सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट रिटेनर फीस में 25 फीसदी कटौती करने का फैसला किया है. यह बदलाव अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027 तक लागू रहेगा.

    इसके साथ घरेलू खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट की अवधि भी घटा दी गई है. नई व्यवस्था में घरेलू पुरुष खिलाड़ियों को 12 महीने की जगह अक्टूबर 2026 से अप्रैल 2027 तक सात महीने का रिटेनर कॉन्ट्रैक्ट मिलेगा. बोर्ड ने यह फैसला अपनी खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए किया है. क्रिकेट वेस्टइंडीज इस समय आर्थिक दबाव के दौर से गुजर रहा है.

    क्रिकेट वेस्टइंडीज को सितंबर 2025 में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में 28 मिलियन अमेरिकी डॉलर का नेट घाटा हुआ. बोर्ड ने सितंबर 2026 तक के वित्तीय चक्र में भी करीब 26 मिलियन डॉलर के नुकसान का अनुमान लगाया है. खराब आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जुलाई में क्रिकेट वेस्टइंडीज को ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल( से 12.82 मिलियन डॉलर का आपातकालीन ऋण लेना पड़ा था. बोर्ड के CEO क्रिस डेहरिंग ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पुनर्गठन को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों और वेस्टइंडीज प्लेयर्स एसोसिएशन के सहयोग से यह कदम उठाया गया है, साथ ही वित्तीय स्थिरता हासिल करने के लिए फिलहाल यह जरूरी है.

    ये दो टूर्नामेंट हुए स्थगित
    खर्च कम करने के लिए क्रिकेट वेस्टइंडीज ने इस साल मेन्स सुपर 50 और विमेंस T20 Blaze को भी स्थगित कर दिया है. सुपर 50 का आयोजन नवंबर में होना था. बोर्ड के मुताबिक घरेलू क्रिकेट का मौजूदा मॉडल काफी महंगा है. खिलाड़ियों और स्टाफ की सैलरी, मैच फीस, हवाई यात्रा, होटल और आयोजन संबंधी खर्च का बड़ा हिस्सा क्रिकेट वेस्टइंडीज को ही उठाना पड़ता है. डेहरिंग ने कहा कि मौजूदा ढांचे में घरेलू प्रतियोगिताओं का पूरा खर्च उठाना लंबे समय तक जारी रखना संभव नहीं है.

    सुपर 50 का ना होना वेस्टइंडीज की वनडे तैयारियों के लिहाज से भी अहम है. टीम 2023 वनडे वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी थी और अब 2027 वर्ल्ड कप में जगह बनाने के लिए फरवरी-मार्च 2027 में क्वालिफायर खेलेगी. क्रिकेट वेस्टइंडीज ने इसके लिए नवंबर में इंग्लैंड-ए के खिलाफ व्हाइट बॉल मुकाबले कराने की योजना बनाई है. इसके बाद वनडे टीम का कैम्प भी आयोजित किया जाएगा.

    क्रिकेट वेस्टइंडीज ने लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 की तैयारियों के लिए एक अलग मॉडल तैयार किया है. पुरुष और महिला टीमों के लिए क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट आयोजित किए जाएंगे, लेकिन इन प्रतियोगिताओं का खर्च क्रिकेट वेस्टइंडीज नहीं बल्कि संबंधित देशों के क्रिकेट बोर्ड और ओलंपिक संस्थाएं उठाएंगी. वेस्टइंडीज क्रिकेट की संरचना बाकी देशों से अलग है.

    क्रिकेट वेस्टइंडीज के तहत आने वाले अलग-अलग कैरेबियाई देश भविष्य में पैन अमेरिकन गेम्स और ओलंपिक जैसे आयोजनों में अपनी अलग टीमों के साथ उतर सकते हैं. बोर्ड के मुताबिक ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिए पात्र 10 देशों को आमंत्रण देकर वैकल्पिक टूर्नामेंट आयोजित किए जाएंगे. इनका खर्च संबंधित राष्ट्रीय क्रिकेट संघों, ओलंपिक समितियों, सरकारों और निजी क्षेत्र से जुटाया जाएगा.

  • महासमुंद में बड़ा एक्शन, मानव तस्करी सिंडिकेट के 5 आरोपी गिरफ्तार

    महासमुंद में बड़ा एक्शन, मानव तस्करी सिंडिकेट के 5 आरोपी गिरफ्तार

    महासमुंद.

    छत्तीसगढ़ की महासमुंद पुलिस ने मानव तस्करी के एक बड़े और संगठित नेटवर्क का खुलासा किया है। यह सिंडिकेट छत्तीसगढ़ और पड़ोसी ओडिशा समेत अन्य राज्यों में सक्रिय था।

    पुलिस टीम ने नेटवर्क से जुड़े 10 ठिकानों पर एक साथ दबिश देकर करीब 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये नगद बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआत एक नाबालिग से जुड़े प्रकरण की जांच से हुई। 21 सितंबर को अस्पताल से मिले मेमो के आधार पर जांच शुरू की गई, जिसमें नाबालिग के शारीरिक शोषण और गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। प्रारंभिक जांच में पुलिस को मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से जुड़े संगठित नेटवर्क के सुराग मिले।

    लुभावने वादे कर मजदूरों को ले जाने का आरोप
    पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और मजदूरों को एडवांस रकम देकर अपने जाल में फंसाते थे। इसके बाद उन्हें दूसरे राज्यों में ईंट भट्ठों और अन्य स्थानों पर मजदूरी के लिए भेजा जाता था। पुलिस ने दावा किया है कि कुछ मामलों में डर, दबाव और धमकी का इस्तेमाल भी किया गया। जांच में मिले दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने दावा किया है कि गिरोह से जुड़े लोगों से बड़ी संख्या में मजदूरों को अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता था। पुलिस के मुताबिक प्रत्येक आरोपी के नेटवर्क में हजारों मजदूरों के रिकॉर्ड मिले हैं और इनमें बंधुआ मजदूरी के भी दस्तावेजी साक्ष्य मिले हैं।

    मोबाइल, बैंक दस्तावेज और रजिस्टर जब्त
    छापेमारी के दौरान पुलिस ने मजदूर पलायन से संबंधित रजिस्टर और डायरी, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्गेज से जुड़े दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन समेत कई महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की है। पुलिस इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है।

    पांच मुख्य आरोपी गिरफ्तार
    पुलिस ने इस मामले में मुकेश चंद्राकर, लता सवर, नंदू मोहंती, पीयूष अग्रवाल और मनीष गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक मुकेश चंद्राकर को इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि मजदूरों को एडवांस रकम देकर दूसरे राज्यों में भेजा जाता था। पुलिस ने आरोप लगाया है कि मजदूरों से कठिन परिस्थितियों में काम कराया जाता था और उनकी आवाजाही पर भी नियंत्रण रखा जाता था।

    नाबालिगों और महिलाओं की तस्करी की भी जांच
    पुलिस का कहना है कि गिरोह पर मानव तस्करी, नाबालिगों की तस्करी, बाल मजदूरी और महिलाओं एवं नाबालिग बालिकाओं के शोषण से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। बरामद मोबाइल और बैंक खातों की जांच के बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है।

    BNS की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज –
    इस मामले में थाना खल्लारी में अपराध क्रमांक 104/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने BNS की धारा 143(2), 143(3), 143(4), 3(5) तथा संगठित अपराध से संबंधित धारा 111 के तहत कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

    जब्त सामग्री –
    1,48,54,750 नकद
    मजदूर पलायन से संबंधित रजिस्टर और डायरी
    कई मोबाइल फोन
    बैंक पासबुक और चेकबुक
    एटीएम कार्ड
    मॉर्गेज संबंधी दस्तावेज

    नोट गिनने की मशीन
    पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग जुड़े हैं और अलग-अलग राज्यों में कितने मजदूरों को इसके जरिए भेजा गया।

  • भोपाल-जबलपुर रोड पर राहत, शहपुरा टोल एक-दो दिन में होगा बंद

    भोपाल-जबलपुर रोड पर राहत, शहपुरा टोल एक-दो दिन में होगा बंद

    जबलपुर
    जबलपुर-भोपाल रोड पर शहपुरा रेलवे ब्रिज क्षतिग्रस्त होने के बाद डायवर्ट किए गए यातायात को देखते हुए शहपुरा टोल नाका अब एक-दो दिन में बंद किया जाएगा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि जब तक शहपुरा का पुल दोबारा बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक टोल कलेक्शन बंद रहेगा। इससे डायवर्ट रूट से गुजरने वाले वाहन चालकों को टोल शुल्क नहीं देना होगा। मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि शहपुरा रेलवे ब्रिज के क्षतिग्रस्त होने के बाद यातायात को वैकल्पिक मार्ग से निकाला जा रहा है। ऐसे में टोल वसूली को लेकर लोगों में नाराजगी थी। उन्होंने कहा कि अब टोल बंद करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है और एक-दो दिन में वसूली बंद हो जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि केंद्रीय मंत्री ने इसको लेकर फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।  

    पहले दिए थे निर्देश, फिर भी जारी थी वसूली
    इससे पहले भी लोक निर्माण मंत्री ने शहपुरा टोल को अस्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद टोल नाके पर वाहनों से शुल्क वसूली जारी रहने का मामला सामने आया था। स्थानीय लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया था और पुलिस से भी शिकायत की थी। उस समय टोल नाके के मैनेजर ने कहा था कि उन्हें टोल बंद करने का लिखित आदेश नहीं मिला है। लिखित निर्देश मिलने के बाद वसूली बंद करने की बात कही गई थी। अब मंत्री ने स्पष्ट किया है कि पुल बनने तक टोल बंद रहेगा। 

    लोकपथ एप पर बसों की टाइमिंग भी मिलेगी
    राकेश सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत चलने वाली बसों की समय सारणी भी आने वाले समय में लोकपथ एप पर उपलब्ध कराई जाएगी। यात्री एप पर देख सकेंगे कि कौन सी बस किस समय और किस स्थान से चलेगी और उसे कहां से लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अभी लोकपथ एप पर सड़क और मार्ग की जानकारी के साथ पर्यटन स्थल, टोल नाके, अस्पताल और पुलिस थानों की जानकारी उपलब्ध है। बसों की टाइमिंग जुड़ने के बाद यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकेगी। 

  • पेंशनर्स की बड़ी मांग, 8वें वेतन आयोग में पुरानी पेंशन बहाली पर जोर

    पेंशनर्स की बड़ी मांग, 8वें वेतन आयोग में पुरानी पेंशन बहाली पर जोर

    नई दिल्‍ली
    8वें वेतन आयोग के तहत तेजी से काम चल रहा है. आए दिन किसी ना किसी शहर में आयोग बैठकें कर रहा है और सैलरी-पेंशन को लेकर कर्मचारियों से बातचीत कर रहा है. इस बीच, कर्मचारियों में फिटमेंट फैक्‍टर, भत्तों और पेंशन को लेकर चर्चा तेज है। 

    आयोग की बैठकों में बड़े मुद्दे फिटमेंट फैक्टर, सैलरी रिवीजन और भत्तों के अलावा, पुरानी पेंशन योजना (OPS) बनाम नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) है. साल 2004 के बाद सेवा में आए केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठन अब 'गारंटीड पेंशन' की मांग पर अड़े हुए हैं. आइए जानते हैं रिटायर्ड कर्मचारियों की क्‍या-क्‍या मांगे हैं… 

    पुरानी पेंशन योजना की मांग 
    साल 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए शुरू की गई नई पेंशन योजना से देशभर के कर्मचारी संतुष्‍ठ नजर नहीं आ रहे हैं. 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए नोट में कर्मचारी यूनियनों ने साफ तौर पर कहा है कि मौजूदा बाजार बेस्‍ड रिटर्न वाली योजनाएं उनके और उनके फैमिली के फ्यूचर को आर्थिक सुरक्षा देने में पूरी तरह से नाकाम है. कर्मचारियों की मांग है कि उन्‍हें फिर से पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ दिया जाए. सर्वे ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूरी तरह बहाली की मांग की है। 

    45,000 रुपये न्‍यूनतम पेंशन 
    भारत पेंशनर्स समाज (BPS) के तहत पेंशनर्स ने न्‍यूनतम पेंशन की मांग उठाई है. BPS ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹45,000 प्रति माह करने, अंतिम वेतन का 67% पेंशन देने और फैमिली पेंशन को अंतिम वेतन का 50% करने की सिफारिश की है।  

    कब लागू हो सकती है सिफारिशें? 
    वेतन आयोग देशभर के अलग-अलग जोनों में जाकर सभी प्रतिनिधियों की बातें सुन रहा है. इन बैठकों में फिटमेंट फैक्‍टर बढ़ाने, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने और पेंशन बराबरी जैसे गंभीर मुद्दे पर ज्ञापन पेश किया गया है. आयोग अपनी रिपोर्ट मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को दे सकता है। 

    रिपोर्ट पेश करने के बाद सरकार द्वारा सिफारिशें मंजूर होने पर इसे लागू किया जाएगा. इसके बाद यह तय होगा कि क्‍या सरकार पेंशन में तीन गुना बढ़ोतरी करेगी और ओपीएस की मांग मानेगी. 2027 में आने वाली फाइनल रिपोर्ट यह तय करेगी कि 2004 के बाद भर्ती हुए लाखों कर्मचारियों को OPS का लाभ मिलेगा या नहीं। 

    क्यों केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बना 'OPS vs NPS'?
    वर्ष 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए शुरू की गई अंशदायी पेंशन व्यवस्था से देश भर के कर्मचारी संगठन असंतुष्ट हैं। 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए ज्ञापनों में कर्मचारी यूनियनों ने साफ कहा है कि मौजूदा बाजार-आधारित रिटर्न वाली योजनाएं उनके और उनके परिवार के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं।

    कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें अनिश्चितता के माहौल से निकालकर पुरानी 'परिभाषित लाभ' वाली व्यवस्था के तहत लाया जाए।

    प्रमुख कर्मचारी संगठनों की क्या हैं 4 बड़ी मांगें?
    अलग-अलग केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष अपनी विस्तृत मांगें रखी हैं:

    A. मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (सर्वे ऑफ इंडिया): सर्वे ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूरी तरह बहाली की मांग की है। उनकी मांग है कि सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी के अंतिम प्राप्त मूल वेतन का कम से कम 50% हिस्सा गारंटीड पेंशन के रूप में तय किया जाए।

    B. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO): डाक विभाग के इस प्रमुख संगठन ने तर्क दिया है कि NPS और हाल ही में घोषित यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) जैसी योजनाएं कर्मचारियों की आशंकाओं को दूर नहीं कर पा रही हैं। इसलिए NPS और UPS के दायरे में आने वाले सभी कर्मचारियों को वापस पुरानी परिभाषित-लाभ पेंशन व्यवस्था (OPS) में शामिल किया जाए।

    C. रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS): रेलवे पेंशनभोगियों के इस संगठन ने पूर्व कर्मचारियों के वित्तीय और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। संघ ने सरकार से एक गारंटीड न्यूनतम पेंशन का प्रावधान करने और पेंशन सुरक्षा को और मजबूत करने का आग्रह किया है।

    D. भारत पेंशनर्स समाज (BPS): पेंशनभोगियों के इस सबसे बड़े मंच ने आयोग के सामने आंकड़ों के साथ बड़ी मांग रखी है। BPS ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹45,000 प्रति माह करने, अंतिम वेतन का 67% पेंशन देने और फैमिली पेंशन को अंतिम वेतन का 50% करने की सिफारिश की है।

    आगे क्या होगा? जानिए कब लागू हो सकती हैं सिफारिशें
    वेतन आयोग देश भर के अलग-अलग जोनों में जाकर सभी हितधारकों की बातें सुन रहा है। इन बैठकों में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने और पेंशन बराबरी जैसे गंभीर मुद्दों पर भी ज्ञापन प्राप्त हुए हैं।

    आयोग अपनी रिपोर्ट मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को सौंपेगा। इसके बाद सरकार द्वारा सिफारिशें मंजूर होने पर इसे लागू किया जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या केंद्र सरकार मौजूदा NPS/UPS जैसे अंशदायी ढांचे को ही मजबूत करेगी या फिर कर्मचारी संगठनों के भारी दबाव में पेंशन संरचना में कोई क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगी।

    8वें वेतन आयोग के तहत पेंशन सुधारों को लेकर जिस तरह से केंद्रीय कर्मचारी एकजुट होकर 'गारंटीड पेंशन' और अंतिम वेतन के 50% के फिक्स फॉर्मूले की मांग कर रहे हैं, उससे सरकार पर नैतिक दबाव बढ़ गया है। 2027 में आने वाली फाइनल रिपोर्ट यह तय करेगी कि 2004 के बाद भर्ती हुए लाखों कर्मचारियों का रिटायरमेंट सुरक्षित हो पाएगा या नहीं।

  • धान खरीदी 2026-27 की तैयारी शुरू, 360 नए केंद्रों पर व्यवस्थाएं होंगी दुरुस्त

    धान खरीदी 2026-27 की तैयारी शुरू, 360 नए केंद्रों पर व्यवस्थाएं होंगी दुरुस्त

    खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी व्यवस्था समय पर हो पूरा: खाद्य मंत्री बघेल

    मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी एवं कस्टम मिलिंग की तैयारियों की हुई विस्तृत समीक्षा

    किसानों की सुविधा के लिए प्रदेश में 360 नवीन धान खरीदी केंद्र, सभी केंद्रों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश

    बारदानों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर

     3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था कर रहा विपणन संघ

    अब तक 1.14 लाख गठान नए जूट बारदाने प्राप्त, शेष बारदानों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश

    कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने में तेजी लाने के निर्देश

    रायपुर, 
    आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए राज्य शासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल दास बघेल की अध्यक्षता में गुरूवार 24 सितंबर को आयोजित मंत्रिमंडलीय उप समिति की बैठक में धान खरीदी एवं कस्टम मिलिंग से जुड़ी तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में किसानों की सुविधा, धान उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था, जूट बारदानों की उपलब्धता तथा कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने की प्रगति पर की गई।

    बैठक में कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल तथा वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी शामिल हुए। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि धान खरीदी प्रारंभ होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूरी कर ली जाएं, ताकि किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    360 नए धान खरीदी केंद्रों से किसानों को मिलेगी सुविधा
    बैठक में बताया गया कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 360 नवीन धान खरीदी केंद्र खोले गए हैं। इन नए केंद्रों में धान खरीदी से संबंधित सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

    मंत्रिमंडलीय उप समिति ने नवीन खरीदी केंद्रों में धान उपार्जन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी जरूरी संसाधनों एवं व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप समिति ने कहा कि धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया किसान-केंद्रित हो तथा खरीदी केंद्रों पर किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था
    धान उपार्जन के लिए बारदानों की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए मंत्रिमंडलीय उप समिति ने आवश्यक नए एवं पुराने जूट बारदानों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि विपणन संघ द्वारा जूट कमिश्नर, कोलकाता के माध्यम से 3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था की जा रही है।

    अब तक विपणन संघ को 1.14 लाख गठान नए जूट बारदाने प्राप्त हो चुके हैं। उप समिति ने शेष आवश्यक बारदानों की उपलब्धता भी समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि धान खरीदी के दौरान बारदानों की कमी के कारण उपार्जन व्यवस्था प्रभावित न हो।

    कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने की गति बढ़ाने के निर्देश
    बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत कस्टम मिलिंग की स्थिति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कस्टम मिलिंग के अंतर्गत कुल 89 लाख टन चावल जमा करने का लक्ष्य है। इसमें से अब तक 37.50 लाख टन चावल जमा किया जा चुका है, जबकि मिलरों द्वारा 51.50 लाख टन चावल जमा किया जाना शेष है।

    कस्टम मिलिंग का चावल जमा करने के लिए 31 मार्च 2027 तक की समय-सीमा निर्धारित है। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने शेष चावल की मात्रा को देखते हुए कस्टम मिलिंग एवं चावल जमा करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। संबंधित अधिकारियों से इसकी नियमित समीक्षा करने तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर चावल जमा कराना सुनिश्चित करने को कहा गया।

    बैठक में खाद्य विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक जितेन्द्र शुक्ला, नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक विलास भोसकर, वित्त विभाग के विशेष सचिव चंदन कुमार एवं सहकारी संस्थाओं के पंजीयक रमेश कुमार शर्मा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • छत पर सोलर प्लांट लगने से घर में आई खुशियों की रोशनी

    छत पर सोलर प्लांट लगने से घर में आई खुशियों की रोशनी

    छत पर सोलर प्लांट लगने से घर में आई खुशियों की रोशनी

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की सोच से बदली त्रिलोक मिश्रा के घर की तस्वीर

     पीएम सूर्यघर योजना का दिख रहा जमीनी असर

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में बढ़ रहा सौर ऊर्जा का उपयोग

    रायपुर, 
    कभी हर महीने आने वाला 3 से 3.5 हजार रुपये का बिजली बिल घरेलू बजट पर बोझ बनता था। बिजली की खपत बढ़ने पर बिल बढ़ने की चिंता रहती थी। आज गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के गुरुकुल परिसर पेंड्रारोड निवासी त्रिलोक मिश्रा के घर की छत ही बिजली उत्पादन का माध्यम बन गई है। 3 किलोवाट का सोलर प्लांट लगने के बाद उनके घर में केवल बिजली की बचत नहीं हुई, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की एक नई शुरुआत हुई है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और आम परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ त्रिलोक मिश्रा को भी मिला है। योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिली, जो सीधे उनके बैंक खाते में जमा हुई। मिश्रा इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और उपभोक्ता हितैषी बताते हैं।

    छत बनी बिजली का स्रोत, घटा घरेलू खर्च

    सोलर प्लांट लगने से पहले त्रिलोक मिश्रा के घर का मासिक बिजली बिल लगभग 3 हजार से 3 हजार 500 रुपये तक आता था। हर महीने बिजली बिल के लिए अलग से राशि की व्यवस्था करनी पड़ती थी। सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित होने के बाद उनके घरेलू बिजली खर्च की तस्वीर बदल गई।

    मिश्रा बताते हैं कि अब उनके घर की जरूरत की बिजली का एक बड़ा हिस्सा उनकी अपनी छत से ही तैयार हो रहा है। सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन शुरू होने के बाद उन्हें माइनस बिल भी प्राप्त हुए। अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दिए जाने पर उसकी राशि बिजली बिल में समायोजित होती रही। इससे उन्हें बिजली खर्च में राहत के साथ-साथ अपनी छत पर उत्पादित ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिला।

    मिश्रा कहते हैं कि अब हमें बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। हमारी जरूरत की बिजली हमारी अपनी छत से बन रही है।

    यह अनुभव उनके लिए केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है। उनके घर की छत अब स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बन गई है। इससे उन्हें यह भरोसा भी मिला है कि घर-परिवार की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सौर ऊर्जा एक उपयोगी और स्थायी विकल्प बन सकती है।

    78 हजार रुपये की सब्सिडी ने आसान किया सौर ऊर्जा का सफर

    त्रिलोक मिश्रा के लिए सोलर प्लांट लगाने का निर्णय इसलिए भी आसान हुआ क्योंकि योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचने से प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बना रहा।

    मिश्रा बताते हैं कि सोलर प्लांट लगाने की प्रक्रिया उनके लिए सहज रही। उनके अनुसार, योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने सौर ऊर्जा को अपनाने के निर्णय को और आसान बनाया।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता का विजन

    पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सौर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से अब आम परिवार भी अपनी छत को ऊर्जा उत्पादन के माध्यम के रूप में देख रहे हैं।

    त्रिलोक मिश्रा का अनुभव इसी बदलाव की एक स्थानीय तस्वीर है। जहां पहले उनकी छत केवल घर का हिस्सा थी, वहीं अब वही छत बिजली पैदा कर रही है। इससे एक ओर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर परिवार के बिजली खर्च में भी राहत महसूस हो रही है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बढ़ रहा सौर ऊर्जा का उपयोग

    छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम सूर्यघर योजना के माध्यम से जिले के परिवारों को अपने घरों की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का अवसर मिल रहा है।

    त्रिलोक मिश्रा की कहानी बताती है कि जब किसी जनकल्याणकारी योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचता है, तो उसका प्रभाव सीधे परिवार के जीवन में दिखाई देता है। सौर ऊर्जा के माध्यम से उन्हें बिजली खर्च में राहत मिली है और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिला है।

    पर्यावरण के साथ घरेलू बजट के लिए भी राहत

    सौर ऊर्जा का लाभ केवल बिजली बिल में कमी तक सीमित नहीं है। यह स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा का माध्यम भी है। मिश्रा के घर में सौर ऊर्जा का उपयोग शुरू होने से उन्हें आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने का संतोष भी मिल रहा है।

    वे मानते हैं कि यदि अधिक से अधिक परिवार अपनी छतों पर सोलर प्लांट लगाएं, तो इससे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।

    त्रिलोक मिश्रा की छत बनी दूसरों के लिए प्रेरणा

    त्रिलोक मिश्रा की कहानी अब आसपास के लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। उनका अनुभव बताता है कि सौर ऊर्जा केवल बड़े संस्थानों या उद्योगों तक सीमित नहीं है। सामान्य परिवार भी अपनी जरूरत के अनुसार सोलर प्लांट लगाकर बिजली की जरूरत पूरी करने और घरेलू खर्च को कम करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

    एक समय बिजली के बढ़ते बिल की चिंता करने वाले त्रिलोक मिश्रा आज अपनी छत पर बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता के विजन से जुड़ते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जनकल्याणकारी योजनाओं के जमीनी प्रभाव की एक सकारात्मक मिसाल प्रस्तुत करती है।
    उनके घर की छत से निकल रही सौर ऊर्जा केवल बिजली नहीं बना रही, बल्कि आत्मनिर्भरता, बचत और स्वच्छ भविष्य की नई उम्मीद भी रोशन कर रही है।

  • हर जिले में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के साथ खेल-करियर पर फोकस

    हर जिले में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के साथ खेल-करियर पर फोकस

     पटना
    बिहार के सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देंगे। सम्राट सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया है कि हर जिले में बच्चों को अब अत्याधुनिक और उन्नत शैक्षणिक परिवेश उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए सभी 38 जिले में कम से कम एक स्कूल को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा। ऐसे स्कूलों में छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिलेंगी। शिक्षा विभाग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है, जिसमें पुराने और प्रतिष्ठित विद्यालयों को आधुनिक बुनियादी ढांचे, डिजिटल क्लासरूम, उन्नत प्रयोगशालाओं और खेल-कूद की बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाएगा।

    विभाग की और से तैयार की गई कार्य योजना के अनुसार राज्य के चुनिंदा उच्च और उच्च माध्यमिक स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इसमें पुराने, प्रतिष्ठित और बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन विद्यालयों में कॅरियर ओरिएंटेड सारे विकल्प मौजूद होंगे। यहां छात्रों को कॅरियर की सभी संभावनाओं के लिए तैयार किया जाएगा। विज्ञान व तकनीक आधारित शिक्षा पर फोकस होगा, जिसके तहत रोबोटिक्स, कोडिंग, एआई की जानकारी दी जाएगी। बच्चों के खेल कॅरियर पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा कला और संस्कृति को भी समान रूप से महत्व दिया जाएगा। इसी तरह बच्चों का व्यावसायिक कौशल विकसित करने की ‌विशेष योजना है। उन्हें डिजिटल स्किल, कम्युनिकेशन और लीडरशिप ट्रेनिंग मिलेगी।

    सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ये होगा खास
    ● बुनियादी ढांचा: स्कूल भवन, कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, शौचालय, पेयजल और खेल मैदान को बेहतर बनाया जाएगा

    ● डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: आईसीटी लैब, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, इंटरनेट और स्मार्ट क्लासरूम की व्यवस्था की जाएगी

    ● शिक्षण सामग्री: डिजिटल शिक्षण सामग्री के जरिए पढ़ाई को अधिक रोचक और व्यावहारिक बनाया जाएगा

    ● क्विज और प्रतियोगिताएं: इन स्कूलों में छात्रों के बीच क्विज, स्पोर्ट्स और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं नियमित आयोजित कराई जाएंगी

    पुराने स्कूल को एक्सीलेंस चुनने पर अनेक चुनौतियां
    यह योजना काफी महत्वाकांक्षी है। हालांकि पुराने स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बदलने में चुनौतियां कम नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या बुनियादी ढांचे की कमी है। कई पुराने विद्यालयों में पर्याप्त जगह नहीं है। इससे नई लैब या स्मार्ट क्लासरूम बनाना मुश्किल होगा। बिहार के स्कूलों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी कमजोर है। सिर्फ 24 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर और 85 फीसदी विद्यालयों में इंटरनेट है।

    इसी प्रकार तकनीकी और मानव संसाधन को लेकर भी बड़ी परेशानी है। प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी सबसे बड़ी बाधा है। खासकर आईसीटी और रोबोटिक्स जैसे विषयों में विशेषज्ञ शिक्षकों को भारी कमी है। उधर, पुराने शिक्षकों को नई तकनीक से जोड़ने के लिए निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता है, जो बेहद कठिन कार्य है। इसके अलावा पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था भी एक समस्या है। सेंटर ऑफ एक्सलेंस के लिए सामाजिक और भौगोलिक चुनौतियां तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाना भी बड़ी चुनौती होगी। छात्रावास की व्यवस्था भी एक प्रमुख समस्या हो सकती है।

    डिजिटल, तकनीकी सुविधाएं
    ● स्मार्ट क्लासरूम: इंटरएक्टिव पैनल और स्मार्ट बोर्ड से लैस कक्षाएं

    ● आईसीटी लैब: इस स्कूलों में आईसीटी लैब की स्थापना का अलग से प्रावधान किया गया है

    ● कंप्यूटर लैब: आधुनिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से सुसज्जित कंप्यूटर
    प्रयोगशाला

    ● इनोवेशन लैब: अटल टिंकरिंग लैब या इनोवेशन लैब की स्थापना की योजना

    ● रोबोटिक्स लैब: इन स्कूलों को रोबोटिक्स लैब और एस्ट्रोनॉमी किट से लैस करने की योजना है

    ● हाई-स्पीड इंटरनेट: वाई-फाई कनेक्टिविटी और डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था होगी

    शैक्षणिक सुविधाएं
    उन्नत प्रयोगशालाएं: भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान, गणित और कंप्यूटर विज्ञान की सुसज्जित लैब

    पुस्तकालय: विस्तृत संग्रह वाली लाइब्रेरी, डिजिटल संसाधन और शांत अध्ययन कक्ष

    ऑडियो-विजुअल सुविधाएं: प्रोजेक्टर, स्कैनर और मल्टीमीडिया सिस्टम।

    अन्य सुविधाएं
    लड़कियों के लिए विशेष सुविधाएं: उचित शौचालय, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था।

    पोषण कार्यक्रम: कुछ स्कूलों में प्रयोग के तौर पर शेफ-क्यूरेटेड न्यूट्रिशन प्रोग्राम होंगे।

    हाइजेनिक कैंपस: स्वच्छ और आधुनिक परिसर

    खेल मैदान: फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, बैडमिंटन और टेनिस की सुविधा।

    इंडोर स्पोर्ट्स हॉल: टेबल टेनिस और अन्य इनडोर गेम्स।

    स्विमिंग पूल: कुछ प्रमुख केंद्रों में तापमान नियंत्रित स्विमिंग पूल।

    योग और फिटनेस सेंटर: जिम और योग रूम

  • फ्रिज के ऊपर कपूर रखना शुभ माना जाता है? जानें वास्तु की मान्यता और सही तरीका

    फ्रिज के ऊपर कपूर रखना शुभ माना जाता है? जानें वास्तु की मान्यता और सही तरीका

     घर में फ्रिज ऐसी जगह रखा जाता है, जहां उसका इस्तेमाल रोज होता है. वास्तु में घर की चीजों को किस जगह रखना चाहिए, इसे लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं. इसी तरह फ्रिज के ऊपर कपूर रखने का उपाय भी काफी लोगों के बीच प्रचलित है. वास्तु विशेषज्ञ बाबा बिमलेश के अनुसार, कपूर का इस्तेमाल पूजा-पाठ और घर के माहौल से जुड़ी मान्यताओं में लंबे समय से किया जाता रहा है. वास्तु में इसे घर के माहौल को बेहतर रखने और नकारात्मकता कम करने से जोड़ा जाता है. इसी वजह से कुछ लोग फ्रिज के ऊपर कपूर रखना भी शुभ मानते हैं.

    फ्रिज के ऊपर कपूर रखने की क्या मान्यता है?
    घर में फ्रिज ऐसी जगह रखा जाता है जहां रोज इसका इस्तेमाल होता है. वास्तु में घर की चीजों की जगह को लेकर कई तरह की मान्यताएं बताई गई हैं. इसी तरह फ्रिज के ऊपर कपूर रखने का उपाय भी कुछ लोगों के बीच प्रचलित है. कपूर का इस्तेमाल पूजा और आरती में काफी समय से किया जाता रहा है. वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में इसे घर के माहौल को साफ और बेहतर रखने से जोड़ा जाता है. कुछ लोग फ्रिज के ऊपर कपूर रखने को घर में अच्छी ऊर्जा बनाए रखने का एक तरीका मानते हैं.

    धन-समृद्धि से भी जोड़ा जाता है कपूर
    कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार कपूर को घर की आर्थिक परेशानियों से भी जोड़कर देखा जाता है. माना जाता है कि कपूर से घर में मौजूद नकारात्मकता कम होती है और माहौल बेहतर रहता है. इसी वजह से इसे सुख-समृद्धि और धन से जुड़े कुछ वास्तु उपायों में भी शामिल किया जाता है. फ्रिज के ऊपर भारी सामान न रखें

    फ्रिज के ऊपर जगह देखकर वहां कई लोग डिब्बे या दूसरी चीजें रख देते हैं. लेकिन ऐसा करने से बचना बेहतर है. खासकर भारी सामान, इलेक्ट्रॉनिक चीजें या ऐसी वस्तुएं फ्रिज के ऊपर नहीं रखनी चाहिए, जिनसे उसकी गर्मी बाहर निकलने में परेशानी हो. फ्रिज के आसपास थोड़ी जगह खुली रखना और उसकी सफाई करते रहना ज्यादा जरूरी है. इससे फ्रिज के आसपास हवा आने-जाने में भी आसानी रहती है.

    फ्रिज किस दिशा में रखना चाहिए?
    फ्रिज की दिशा को लेकर वास्तु में एक जैसी राय नहीं मिलती. अलग-अलग वास्तु मान्यताओं में पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम जैसी दिशाओं को उपयुक्त बताया गया है. कुछ जगहों पर उत्तर दिशा का भी जिक्र मिलता है. वहीं, कई वास्तु मान्यताओं में ईशान कोण में भारी इलेक्ट्रॉनिक सामान रखने से बचने की बात कही जाती है. हालांकि, ये सभी वास्तु से जुड़ी मान्यताएं हैं और हर घर की बनावट अलग होती है.

    फ्रिज के ऊपर कपूर जलाने की गलती न करें
    अगर आप कपूर का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो उसे फ्रिज के ऊपर रखकर जलाने से बचें. कपूर जलने पर आग और गर्मी पैदा होती है. इलेक्ट्रॉनिक सामान के ऊपर खुली लौ रखना सुरक्षित नहीं है. कपूर जलाना हो तो पूजा की जगह पर किसी सुरक्षित पात्र में जलाएं. इसे पर्दे, कागज, प्लास्टिक और दूसरी आसानी से आग पकड़ने वाली चीजों से दूर रखें.

    फ्रिज के आसपास सफाई भी रखें
    वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में साफ और व्यवस्थित घर को अच्छा माना जाता है. इसलिए फ्रिज के ऊपर धूल जमा न होने दें और उसके आसपास बेकार सामान न रखें. फ्रिज के अंदर भी समय-समय पर सफाई करें. खराब या एक्सपायर हो चुका खाना बाहर निकाल दें. इससे फ्रिज साफ रहेगा और रोजमर्रा में उसका इस्तेमाल करना भी आसान होगा.

    कपूर रखते समय इन बातों का रखें ध्यान
    कपूर को ऐसी जगह रखें जहां छोटे बच्चे या पालतू जानवर आसानी से न पहुंच सकें. कपूर को निगलना नुकसान पहुंचा सकता है. अगर कपूर जलाते हैं, तो उसे जलता हुआ अकेला न छोड़ें. काम पूरा होने के बाद यह जरूर देख लें कि कपूर पूरी तरह बुझ गया है. सुरक्षा का ध्यान रखते हुए ही इसका इस्तेमाल करें.

  • जौनपुर लूटकांड: फरार थानेदार के WhatsApp Status से मची खलबली, ₹25 हजार इनाम घोषित

    जौनपुर लूटकांड: फरार थानेदार के WhatsApp Status से मची खलबली, ₹25 हजार इनाम घोषित

    जौनपुर
    यूपी के जौनपुर में दो कारोबारियों को अगवा कर लूटने वाले सुरेरी थाने पर तैनात रहे थानेदार दिव्य प्रकाश सिंह पर 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया गया है। सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाले दो सिपाहियों समेत तीन लोगों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। वारदात में सहयोग करने वाले थानेदार के दो सगे भाइयों विकास सिंह और संकीत सिंह ने अदालत में सरेंडर कर दिया है। थानेदार और सिपाहियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। अब थानेदार व्हाट्स स्टेटस के जरिए धमकी दे रहा है। उसने यहां तक लिखा कि जल्द वापसी करूंगा। सभी की पोल खुलेगी। अपने पर्सनल फोन का स्टेटस लगातार बदल रहा है और ऐसी बातें लिख रहा है जिसे अधिकारियों को धमकी माना जा रहा है।

    क्या है पूरा मामला
    जौनपुर के जलालपुर थाना इलाके में 15 सितंबर को कारोबारी विजय राजभर को अगवाकर लूटपाट की गई थी। दो लोग उसे पुलिस की धमकी देकर अपने साथ ले गए। एक गाड़ी में पहले से मौजूद चार लोगों ने उसे अगवा कर लिया। उसे सुरेरी थाना ले जाकर मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी देकर रुपए मांगे गए। उसका मोबाइल छीनकर यूपीआई के जरिए कई खातों से दो लाख से ज्यादा ट्रांसफर कर लिए गए। उसने 17 सितंबर को इसकी शिकायत अधिकारियों से की। मामला दर्ज कर जांच शुरू हुई। जांच शुरू होते ही एक अन्य कारोबारी सुशील कुमार पांडेय भी सामने आया। उसके साथ भी इसी तरह की घटना हुई थी। उसे भी इसी तरह से सुरेरी थाने में ले जाकर लूटा गया था। एक ही तरह की दो घटनाओं और थाने लाकर लूट की खबर से खलबली मच गई। मामला डीआईजी तक पहुंच गया।

    22 सितंबर को एसआईटी गठित हुई थी
    वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईडी वैभव कृष्ण ने 22 सितंबर को पांच सदस्यीय एसआईटी का गठन कर दिया। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण आतिश कुमार सिंह की टीम मामले के खुलासे में लगी। सुरेरी थाने में पुलिस वालों की परेड हुई तो लूट को अंजाम देने वाले सिपाहियों की पहचान हो गई। पता चला कि थानेदार ही लूट सिपाहियों और अपने सगे भाइयों के जरिए वारदातों को अंजाम दिला रहा हैं। कारोबारी को बुलाकर ले जाने वाले कोई और नहीं थानेदार के भाई संकीत सिंह और विकास सिंह थे। एसआईटी ने रिपोर्ट दर्ज कर धरपकड़ शुरू की तो थानेदार फरार हो गया।

    थाने में असलहे के साथ फोटो भी खिंचवाया
    कारोबारियों ने अधिकारियों को बताया कि चार पहिया वाहन से अपहरण करने और सुरेरी थाने में ले जाकर धमकाने के साथ ही असलहा के साथ फोटो और वीडियो बनाया गया। सादे कागज पर हस्ताक्षर कराया गया था। सुशील पांडेय ने बताया कि पहले पांच लाख की मांग की गई। फिर एक लाख पांच हजार रुपये नगद और साठ हजार दो सौ 99 रुपये ऑनलाइन वंशनारायण गिरी के खाते में ट्रांसफर करा लिए।

    थानेदार का व्हाट्स स्टेटस लगातार हो रहा अपडेट
    पुलिस फरार थानेदार को खोज रही है और उसके फोन में व्हाट्स स्टेटस लगातार अपडेट हो रहा है। इसमें एक तरह से धमकी दी जा रही है। उसने एक स्टेटस में लिखा है कि आज आपने इज्ज़त ली हो मैं जल्द ही वापसी करूंगा, अपने तरीक़े से सभी की पोल खुलेंगी, आप को जो कराना था करा दिए। सम्मान के साथ जिया हूं, सम्मान के साथ जिएंगे। जिसने भी ऐसा किया है, वो बस अपना सोचे, सभी कहानी और खुलासे के साथ जल्द ही सामने आएंगे।

    एक अन्य स्टेटस में मरने की धमकी भी दी। लिखा कि इसकी कीमत मेरी जान है जो मुझे अब दिल से अनुभव हो गया है, जल्द वीडियो बनाने के साथ मर जाऊंगा, लेकिन आज मुझे जो बताया जा रहा है वो आप भी हैं। यह भी लिखा कि जिस स्थान पर मैं जाऊंगा, वहां पर आप भी रहेंगे। CBI जांच के साथ सभी EVIDENCES मेरे पास हैं। इन स्टेटस से माना जा रहा है कि वह अपने ही अधिकारियों को धमका रहा है।

  • सेवा की कहानी : उन्नत नस्ल की गाय ने खोली अतिरिक्त आय की राह, आत्मनिर्भर बने सन्ना के ओम प्रकाश

    सेवा की कहानी : उन्नत नस्ल की गाय ने खोली अतिरिक्त आय की राह, आत्मनिर्भर बने सन्ना के ओम प्रकाश

    सेवा संकल्प अभियान 2026

    सेवा की कहानी : उन्नत नस्ल की गाय ने खोली अतिरिक्त आय की राह, आत्मनिर्भर बने सन्ना के ओम प्रकाश

    प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 से मिली 56 हजार रुपये की सहायता, दूध बेचकर अब तक कमाए 40 हजार रुपये से अधिक

    प्रतिदिन हो रहा 6 से 8 लीटर दूध उत्पादन, गोबर से जैविक खाद मिलने से खेती की लागत भी हुई कम

    रायपुर,
    प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत आजीविका गतिविधियों से जुड़ी सहायता ग्रामीण किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन रही है। जशपुर जिले के बगीचा विकासखण्ड के ग्राम सन्ना निवासी श्री ओम प्रकाश यादव ने योजना से मिली सहायता से उन्नत नस्ल की गाय खरीदकर अपने पारंपरिक पशुपालन को आय के साधन में बदल दिया है। दूध के विक्रय से उन्हें अब तक 40 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय हो चुकी है।

    ओम प्रकाश यादव पहले से गाय पालन करते थे, लेकिन उन्नत नस्ल की गाय नहीं होने के कारण दूध का उत्पादन सीमित था। दूध का अधिकांश उपयोग परिवार की जरूरतों के लिए ही हो जाता था। ऐसे में पशुपालन से नियमित अतिरिक्त आय नहीं हो पाती थी।

    56 हजार रुपये की सहायता से खरीदी उन्नत नस्ल की गाय

    कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत उत्पादन प्रणाली मद में ओम प्रकाश यादव को गाय पालन के लिए 56 हजार रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई। इस राशि से उन्होंने उन्नत नस्ल की गाय खरीदी और पशुपालन को व्यवस्थित आजीविका गतिविधि के रूप में आगे बढ़ाया।

    उन्नत नस्ल की गाय आने के बाद अब उन्हें प्रतिदिन 6 से 8 लीटर दूध मिल रहा है। परिवार की आवश्यकता पूरी होने के बाद अतिरिक्त दूध का विक्रय किया जा रहा है। इससे उन्हें अब तक 40 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो चुकी है।

    दूध से आमदनी, जैविक खाद से खेती में बचत

    पशुपालन से ओम प्रकाश को दोहरा लाभ मिल रहा है। दूध की बिक्री से नियमित अतिरिक्त आय हो रही है, वहीं गाय के गोबर से मिलने वाली जैविक खाद का उपयोग खेती में किया जा रहा है। इससे खेती में बाहरी खाद पर होने वाले खर्च में भी कमी आई है। अतिरिक्त आमदनी और खेती की लागत में बचत से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है।

    “अब हर महीने हो रही अतिरिक्त कमाई”

    ओम प्रकाश यादव बताते हैं, “पहले देशी गाय से मिलने वाला दूध केवल घर के उपयोग में ही आ जाता था। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 से 56 हजार रुपये की सहायता मिलने पर मैंने उन्नत नस्ल की गाय खरीदी। अब प्रतिदिन 6 से 8 लीटर दूध मिल रहा है और हर महीने अतिरिक्त कमाई हो रही है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं।”

    पारंपरिक पशुपालन बना स्थायी आय का माध्यम

    प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के माध्यम से कृषि के साथ पशुपालन जैसी आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर तैयार हो रहे हैं। ओम प्रकाश यादव की सफलता बताती है कि योजनाबद्ध सहायता और सही संसाधनों के उपयोग से पारंपरिक पशुपालन को नियमित आय के साधन में बदला जा सकता है।