Author: NewseDay

  • जनता दर्शन में CM योगी का बड़ा निर्देश, गरीबों की जमीन कब्जाने वालों पर होगी कार्रवाई

    जनता दर्शन में CM योगी का बड़ा निर्देश, गरीबों की जमीन कब्जाने वालों पर होगी कार्रवाई

    लखनऊ
    जनसेवा को सदैव सर्वोपरि रखने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और पीड़ितों को समाधान का भरोसा दिया।

    रायबरेली से आए एक बुजुर्ग अपनी पीड़ा कहते भावुक हो गए, इस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल दोषियों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कहा कि शांति, खुशहाली व सुदृढ़ कानून व्यवस्था ही नए उत्तर प्रदेश की पहचान है, इसमें बाधा डालने वालों को कानूनी ढंग से सबक सिखाएं। कब्जे की शिकायतों पर भी उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमीन कब्जामुक्त कराने के साथ दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

    हर पीड़ित से मिले मुख्यमंत्री
    मुख्यमंत्री ने कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक पहुंचकर उनकी पीड़ा जानी। उन्होंने हर पीड़ित को आश्वस्त किया कि सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। ‘जनता दर्शन’ में मुख्यमंत्री ने मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और तत्परता से उसका समयबद्ध-पारदर्शी निस्तारण कराएं।

    मुख्यमंत्री ने बुजुर्ग का सुना प्रकरण, आरोपियों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश
    रायबरेली से एक बुजुर्ग भी जनता दर्शन में पहुंचे। शरीर पर लगी चोट मुख्यमंत्री को दिखाते हुए उनका गला रुंध गया। इस पर मुख्यमंत्री ने उनसे पूरे प्रकरण की जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने उन पर अकारण हमला कर दिया है। आरोपियों को लगता है कि वह कहीं बाहर रहते हैं। ऐसे में घात लगाए बदमाशों ने उन्हें पीटा और रुपये छीन लिए। इस पर मुख्यमंत्री ने मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि सख्त से सख्त कार्रवाई कर इस प्रकरण में तत्काल कार्रवाई करें।

    राजस्व से जुड़े प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण पर जोर
    कुछ पीड़ितों ने जमीन जबरन कब्जा किए जाने की भी शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी दबंग ने किसी गरीब की जमीन हड़पी है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। जमीन अवैध या जबरन कब्जे से मुक्त होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने राजस्व से जुड़े प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण पर जोर दिया।

     

  • रेलवे भर्ती में चारों ने की अदला-बदली, AI कैमरों ने फिजिकल टेस्ट में पकड़ लिया फर्जीवाड़ा

    रेलवे भर्ती में चारों ने की अदला-बदली, AI कैमरों ने फिजिकल टेस्ट में पकड़ लिया फर्जीवाड़ा

    अंबाला
     रेलवे भर्ती में चयन हासिल करने के लिए चार परीक्षार्थियों ने ऐसा फर्जीवाड़ा किया कि एक-दूसरे की जगह कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) तक दे डाली। सीबीटी में तो उनकी यह चालाकी पकड़ में नहीं आई, लेकिन जब भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में शारीरिक दक्षता परीक्षा देने अंबाला कैंट रेलवे स्टेडियम पहुंचे तो एआइ कैमरों ने उनकी पोल खोल दी।

    चेहरे और अभ्यर्थी के उपलब्ध डाटा का मिलान नहीं होने पर चारों संदिग्ध पकड़ में आ गए। प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें परीक्षा से अलग कर दिया गया। रेलवे की शिकायत पर पड़ाव थाना पुलिस ने चारों के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार आरोपितों की पहचान प्रह्लाद कुमार निवासी ग्राम संधा, पोस्ट नोमाजिला, जिला लखीसराय, बिहार, अनंत कुमार निवासी ग्राम यशवंतपुर, पोस्ट रूखई, थाना चंडी, जिला नालंदा, बिहार, उज्जवल कुमार निवासी ग्राम मंडिल, पोस्ट मंडिल, थाना पारसबिघा, जिला जहानाबाद, बिहार और गोलू निवासी ग्राम उसरी, थाना कोको, जिला जहानाबाद, बिहार के रूप में हुई है।

    भर्ती प्रक्रिया में लगाए गए थे एआइ कैमरे
    रेलवे स्टेडियम अंबाला कैंट में रेलवे भर्ती प्रक्रिया के तहत अभ्यर्थियों की शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की जा रही थी। भर्ती प्रक्रिया में निजी एजेंसियों टीसीएस और टीटीआइपीएल का सहयोग लिया जा रहा था। फर्जीवाड़ा रोकने और अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा स्थल पर एआइ आधारित कैमरे लगाए गए थे।

    जैसे ही अभ्यर्थी फिजिकल फिटनेस टेस्ट के लिए पहुंचे, कैमरों ने उनकी पहचान से संबंधित डाटा का मिलान शुरू किया। इसी दौरान चार अभ्यर्थियों के मामले में पहचान का मिलान नहीं हुआ। तकनीकी प्रणाली से मिले संकेत के बाद संबंधित अभ्यर्थियों की जांच की गई। प्रारंभिक स्तर पर ही मामला संदिग्ध पाए जाने पर चारों को अलग कर दिया गया।

    सीबीटी में एक-दूसरे की जगह बैठे थे
    जांच के दौरान जब चारों से पूछताछ की गई तो कथित तौर पर सीबीटी में किए गए फर्जीवाड़े का भी खुलासा हुआ। पूछताछ में प्रह्लाद कुमार ने बताया कि अनंत कुमार की सीबीटी परीक्षा उसने दी थी, जबकि उसकी जगह अनंत कुमार ने परीक्षा दी थी। इसी तरह उज्जवल कुमार की सीबीटी परीक्षा गोलू ने दी और गोलू की जगह उज्जवल कुमार परीक्षा में बैठा था।

    इस तरह चारों ने आपस में एक-दूसरे की जगह सीबीटी देकर भर्ती प्रक्रिया के पहले चरण को पार करने का प्रयास किया। सीबीटी के दौरान उनकी यह अदला-बदली पकड़ में नहीं आ सकी। इसके बाद जब भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में उन्हें वास्तविक अभ्यर्थी के तौर पर शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया गया तो एआइ आधारित पहचान प्रणाली ने उनके फर्जीवाड़े को पकड़ लिया।

    तकनीक के सामने नहीं चली चालाकी
    चारों अभ्यर्थियों ने सीबीटी में पहचान छिपाकर भर्ती प्रक्रिया में आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन फिजिकल फिटनेस टेस्ट के दौरान लगाए गए एआइ कैमरों ने उनकी चालाकी पर पानी फेर दिया। परीक्षा स्थल पर अभ्यर्थी की पहचान और उपलब्ध डाटा के मिलान की व्यवस्था होने के कारण एक-दूसरे की जगह परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी तकनीक की नजर से बच नहीं सके।

    रेलवे की ओर से मामले की शिकायत पुलिस को दी गई। शिकायत के आधार पर पड़ाव थाना पुलिस ने चारों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सीबीटी परीक्षा में पहचान बदलकर परीक्षा देने की पूरी योजना कैसे तैयार की गई और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। भर्ती प्रक्रिया में इस तरह के फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

  • कांकेर में ₹20 लाख गायब होने से हड़कंप, दो DSP पर रकम बांटने का आरोप

    कांकेर में ₹20 लाख गायब होने से हड़कंप, दो DSP पर रकम बांटने का आरोप

    कांकेर
     जिले में माओवादी डंप से बरामद 20 लाख रुपये गायब होने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार मार्च-अप्रैल 2026 में मुरगांव क्षेत्र के जंगलों में माओवादी डंप की तलाश के दौरान करीब 20 लाख रुपये की नकदी बरामद हुई थी।

    आरोप है कि बरामद रकम को सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय तत्कालीन दो डीएसपी ने आपस में बांट लिया। मामले की जानकारी एसपी तक पहुंचने के बाद जांच कराई गई, लेकिन जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

    टोडेमरका और मरकाकोनारी के जंगलों में हुई थी बरामदगी
    बताया गया कि तत्कालीन डीएसपी अपनी टीम के साथ मुरगांव के आश्रित ग्राम टोडेमरका और मरकाकोनारी के जंगलों में डंप की तलाश के लिए निकले थे। सर्च ऑपरेशन के दौरान टोडेमरका जंगल से करीब 15 लाख और मरकाकोनारी से करीब पांच लाख रुपये बरामद हुए थे। कुल मिलाकर करीब 20 लाख रुपये की नकदी मिलने की बात सामने आई है।

    जांच के बाद भी रिपोर्ट नहीं आई सामने
    बरामद रकम के बंटवारे को लेकर अब तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि नियमानुसार रकम को सरकारी खाते में जमा किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इधर मामले में एसपी के संज्ञान में आने के बाद आंतरिक जांच कराई गई, मगर उसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। इससे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है।

    22 करोड़ की अफवाह से हड़कंप
    इधर डंप से 20 लाख की जगह 22 करोड़ रुपये मिलने की अफवाह भी फैली हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह चर्चा जोरों पर है कि बरामद रकम 20 लाख से कहीं ज्यादा थी। वहीं स्थानांतरण के बाद विभाग में मामले की फिर से चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर विभाग ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है।

  • पंजाब-हरियाणा में VIP फाइलों पर नजर, सांसद-विधायकों के पेंडिंग मामलों की होगी कलर कोडिंग

    पंजाब-हरियाणा में VIP फाइलों पर नजर, सांसद-विधायकों के पेंडिंग मामलों की होगी कलर कोडिंग

    चंडीगढ़.

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की निगरानी को और प्रभावी बनाने के मामले में सुनवाई स्थगित कर दी। कोर्ट ने कहा कि मामले से संबंधित कुछ हलफनामे अभी दाखिल होना बाकी हैं। इसके चलते मामले को अब सात अक्टूबर 2026 को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है।

    इस मामले में पंजाब सरकार की ओर से यह बताए जाने पर कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) और आयकर विभाग की ओर से चलाए जा रहे कई मामलों का पूरा ब्योरा तत्काल उपलब्ध नहीं है, हाई कोर्ट ने केंद्रीय एजेंसियों से इसकी जानकारी जुटाकर अदालत में पेश करने को कहा हुआ है। साथ ही, लंबे समय से लंबित मामलों को तुरंत पहचानने के लिए मामलों के रंग-कोड की व्यवस्था को और स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। पिछली सुनवाई पर चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के वकील ने बताया कि सांसदों और विधायकों से संबंधित कई मामलों में ईडी, सीबीआइ और आयकर विभाग की ओर से अभियोजन चल रहा है, लेकिन इनका पूरा विवरण राज्य सरकार के पास तत्काल उपलब्ध नहीं है।

    जांच एजेंसियों को पहले रिकॉर्ड रखने के आदेश
    इस पर हाई कोर्ट ने केंद्रीय संबंधित विभागों और एजेंसियों से जानकारी एकत्र कर अगली सुनवाई से पहले रिकॉर्ड पर रखने को कहा था । अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के आंकड़ों में कोई अंतर सामने आता है तो संबंधित अधिकारी उसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं। हाई कोर्ट के स्वत संज्ञान लेकर इस मामले की सुनवाई शुरू की है। अदालत पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के मौजूदा और पूर्व सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की प्रगति की निगरानी कर रही है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही सभी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के लंबित आपराधिक मामलों को तत्काल सूचीबद्ध करने का निर्देश दे चुका है। विशेष रूप से उन मामलों पर ध्यान देने को कहा गया है, जिनमें सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की ओर से कार्यवाही पर रोक लगी हुई है।

    अब रंग बताएगा केस कितना पुराना
    खंडपीठ ने रजिस्ट्री की ओर से तैयार सांसद-विधायकों से जुड़े लंबित मामलों की रंग-कोड वाली सूची भी देखी। इसमें उन मामलों की अलग श्रेणी बनाई गई है, जिनकी कार्यवाही हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के आदेश से रुकी हुई है। अदालत ने कहा कि जो मामले लंबे समय से लंबित हैं, उन्हें अधिक स्पष्ट और उभरते हुए रंग में प्रदर्शित किया जाना चाहिए, ताकि पहली नजर में ही पता चल सके कि इन मामलों पर प्राथमिकता से ध्यान देने की जरूरत है।

  • बृजभूषण सिंह की बरी पर फिर कोर्ट में सुनवाई, महिला पहलवानों की अपील पर नोटिस जारी

    बृजभूषण सिंह की बरी पर फिर कोर्ट में सुनवाई, महिला पहलवानों की अपील पर नोटिस जारी

    नई दिल्ली
     दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट के सेशंस कोर्ट ने यौन शोषण के मामले में भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह और भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व सचिव विनोद तोमर को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली चार महिला पहलवानों की याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को नोटिस जारी किया है. स्पेशल जज दिग्विजय सिंह ने मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को करने का आदेश दिया है। 

    चार महिला पहलवानों ने राऊज एवेन्यू कोर्ट के मजिस्ट्रेट कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश को सेशंस कोर्ट में चुनौती दी है. महिला पहलवानों ने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश गलत है और यह फैसला चुनिंदा साक्ष्यों के आधार पर दिया गया है. याचिका में कहा गया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी की है. बता दें कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 3 अगस्त को अपने आदेश में पीड़ित महिला पहलवानों की ओर से लंबे समय तक चुप करने और आरोपियों से सामान्य संबंध जारी रहने के आधार पर बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी करने का आदेश दिया था. इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354डी, 354ए और 506 (1) के तहत आरोप लगाए गए थे। 

    सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह की ओर से कहा गया था कि 7 सितंबर 2022 को घटना वाले दिन वह भारत में नहीं था. बृजभूषण के वकील राजीव मोहन ने कहा था कि ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट दिल्ली पुलिस कमिश्नर को केंद्र सरकार ने भेजी थी. राजीव मोहन ने कहा था कि महिला पहलवानों का पहला विरोध प्रदर्शन 18 जनवरी 2023 को जंतर-मंतर पर था. 19 जनवरी 2023 को एक पहलवान ने सरकार से मुलाकात की और कहा कि मैं अपना मामला सरकार के सामने रखना चाहता हूं. सुनवाई के दौरान महिला पहलवानों की ओर से वकील रेबेका जॉन ने कहा था कि ओवर साइट कमेटी नियमों के हिसाब से नहीं बनाई गई थी. उन्होंने कहा था कि जिन आरोपों के तहत चार्जशीट दाखिल हुई उसी के तहत आरोपी के खिलाफ आरोप तय होने चाहिए। 

  • बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे CM साय, राहत शिविरों का निरीक्षण कर ली जानकारी

    बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे CM साय, राहत शिविरों का निरीक्षण कर ली जानकारी

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में बीते दिनों हुई भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। सुकमा और बस्तर के कई गांवों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित है। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।

    स्थिति का जायजा लेने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सुकमा पहुंचे। मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और राहत केंद्रों में व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और जिला प्रशासन से बाढ़ की स्थिति व राहत-बचाव कार्यों की जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित लोगों की सुरक्षा के साथ भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

  • छत्तीसगढ़ में निवेश बढ़ाने की तैयारी, सिंगापुर में उद्योगपतियों से मिलेंगे CM साय

    छत्तीसगढ़ में निवेश बढ़ाने की तैयारी, सिंगापुर में उद्योगपतियों से मिलेंगे CM साय

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 2 से 7 अक्टूबर तक सिंगापुर प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे वहां होने वाले भारत-सिंगापुर विकास एवं कारोबार सम्मेलन में शामिल होंगे। यह सम्मेलन भारत और सिंगापुर के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक साझेदारी बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। हालांकि अभी इस कार्यक्रम का आधिकारिक ब्योरा जारी नहीं किया गया है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री की इस विदेश यात्रा के कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 

    बताया गया है कि,  सम्मेलन में श्री साय 4 से 6 अक्टूबर के बीच शामिल होंगे। उनके साथ सीएम सचिवालय के अधिकारियों के साथ उद्योग विभाग के वरिष्ट अधिकारी भी शामिल होंगे। सिंगापुर व्यापार महासंघ की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में भारत के विभिन्न राज्यों की आर्थिक और औद्योगिक संभावनाओं को अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के सामने रख जाएगा। सम्मेलन में निवेश के अवसर, नए कारोबार बाजार तक पहुंच, औद्योगिक साझेदारी और दोन देशों की कंपनियों के बीच सहयोग पर चर्चा होगी।

    उद्योग, परिवहन और नई तकनीक पर रहेगा जोर

    मुख्यमंत्री के सिंगापुर कार्यक्रम में उद्योग, परिवहन और नई तकनीक से जुड़े क्षेत्रों पर विशेष जोर रहेगा।संभावित निवेशकों के साथ नई परियोजनाओं की स्थापना, तकनीकी सहयोग और उद्योगों के विस्तार से संबंधित मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है। तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों और निवेशकों के प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद होने की संभावना है।

    निवेशकों के सामने रखेंगे छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता

    सिंगापुर प्रवास के दौरान होने वाली बैठकों में छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध परियोजना संभावनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।सरकार का उद्देश्य प्रदेश में नए निवेश को आकर्षित करने के साथ औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। इसके लिए निवेशकों को राज्य में उपलब्ध संसाधनों और उद्योगों के विस्तार की संभावनाओं की जानकारी दी जाएगी।

    विदेशी निवेश आकर्षित करने पर फोकस

    मुख्यमंत्री के इस प्रस्तावित दौरे में निवेशकों के साथ सीधे संवाद को प्रमुखता दी गई है। बैठकों में उद्योग स्थापना, नई परियोजनाओं, तकनीकी सहयोग और निवेश के उपलब्ध अवसरों पर बातचीत होगी।दौरे के दौरान छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता, नई तकनीक और विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाओं की संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय कारोबारी प्रतिनिधियों के सामने रखने की योजना है।

    हरियाणा-सिंगापुर बिजनेस फोरम और निवेश सम्मेलन
    हरियाणा के मुख्यमंत्री भी होंगे शामिल सूत्रों के अनुसार, इसी सम्मेलन में हरियाणा के मुख्यमंत्र नायब सिंह सैनी भी शामिल होंगे। सिंगापुर की ओर से वहां के मंत्री स्तर के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे सम्मेलन में भारत और सिंगापुर के कारोबारी प्रतिनिधियों के बीच निवेश और औद्योगिक साझेदार की संभावनाओं पर चर्चा होगी।

    छत्तीसगढ़ पर रहेगी नजर
    मुख्यमंत्री श्री साय के लिए यह दौरा छत्तीसगढ़ को अंतर्राष्ट्रीय निवेश के नए केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर होगा। राज्य सरकार की ओर से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता, प्राकृतिक संसाधन, खनिज संपदा, बिजली उपलब्धता, अधोसंरचना और निवेश के लिए बनाई गई नीतियों की जानकारी निवेशकों को दी जा सकती है। राज्य की कोशिश केवल कच्चे खनिज के दोहन तक सीमित न रहकर खनिज आधारित उद्योगों में अधिक से अधिक मूल्य संवर्धन, विनिर्माण, परिवहन एवं भंडारण, निर्यात और नई तकनीक आधारित उद्योगों को आकर्षित करने की है। सिंगापुर जैसे अंतर्राष्ट्रीय कारोबारी केंद्र में मुख्यमंत्री की मौजूदगी इस दिशा में महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।

    सम्मेलन में छत्तीसगढ़ की संभावनाएं रखेंगे

    भारत-सिंगापुर विकास और कारोबार सम्मेलन में व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री यहां छत्तीसगढ़ में निवेश के अवसरों और उद्योगों के लिए उपलब्ध संभावनाओं की जानकारी देंगे। सरकार का उद्देश्य नए निवेश के साथ प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है।

    सिंगापुर प्रवास के दौरान निवेशकों के साथ होने वाली बैठकों में छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता, नई तकनीक और विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाओं की संभावनाओं को प्रमुखता से रखा जाएगा। दौरे के जरिए प्रदेश में विदेशी निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने और निवेशकों को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित करने पर जोर रहेगा।

    सीधे संवाद का अवसर
    बताया गया है कि,  सम्मेलन में निवेशकों, उद्योगपतियों और विभिन्न कारोबारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ संवाद होगा। इसके जरिए छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं और राज्य में उद्योग लगाने के लिए उपलब्ध सुविधाओं को सीधे अंतर्राष्ट्रीय कारोबार समुदाय तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

  • नजूल भूमि विवाद पर बड़ी सफलता, लगातार समीक्षा और प्रभावी पैरवी से 30 साल पुराना मामला सुलझा

    नजूल भूमि विवाद पर बड़ी सफलता, लगातार समीक्षा और प्रभावी पैरवी से 30 साल पुराना मामला सुलझा

    योगी सरकार की प्रशासनिक दक्षता से 30 साल पुराना नजूल भूमि विवाद सुलझा

    -मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की लगातार समीक्षा, निगरानी और प्रभावी पैरवी से मामले में आया बड़ा मोड़

    -वादी ने न्यायालय में आगे पैरवी न करने का दिया शपथ-पत्र, मौके से भी हटाया 30 साल पुराना कब्जा

    -आयुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित चार नजूल भूखंड अब सुरक्षित रखने की दिशा में कार्रवाई तेज

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशील प्रशासनिक सोच और शासकीय भूमि के संरक्षण को लेकर स्पष्ट नीति का असर अब पुराने लंबित मामलों में भी दिखाई दे रहा है। देवीपाटन मंडल में करीब 30 वर्ष से लंबित नजूल भूमि का एक प्रकरण प्रशासन की सक्रियता और प्रभावी निगरानी से नए मोड़ पर पहुंचा है। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की लगातार समीक्षा, निगरानी और प्रभावी पैरवी के बीच मामले के वादी ने न्यायालय में शपथ-पत्र देकर आगे पैरवी न करने और कार्यवाही समाप्त किए जाने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही संबंधित पक्ष ने सरकारी भूमि से अपना करीब 30 वर्ष पुराना कब्जा भी स्वयं हटा लिया है।
     यह मामला गोंडा में मंडलायुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित नजूल भूखंड संख्या 514, 515, 524 और 525 से जुड़ा है। प्रकरण वर्ष 1997 से न्यायालय में लंबित था। वर्ष 2008 में स्थगन आदेश पारित होने के बाद भी मामले में विधिक पैरवी जारी रही। सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के अभियान के दौरान यह पुराना प्रकरण प्रशासन के संज्ञान में आया, जिसके बाद देवीपाटन मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने दोबारा समीक्षा शुरू की।

    अवैध संचालित विद्यालय में नहीं मिला कोई विद्यार्थी और शिक्षक 
    पुराने नजूल भूमि प्रकरण की जानकारी सामने आने के बाद मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने मामले की लगातार समीक्षा की। अभिलेखों और न्यायालयीन स्थिति की पड़ताल कराई गई। साथ ही संबंधित अधिकारियों को सरकारी पक्ष मजबूती से रखने और शासकीय हितों की रक्षा के लिए प्रभावी विधिक पैरवी के निर्देश दिए गए। जांच के दौरान भूमि पर अवैध विद्यालय संचालित होने की बात भी सामने आई। प्रशासन ने मौके की स्थिति की पड़ताल कराई तो वहां वर्तमान में कोई विद्यार्थी या शिक्षक नहीं मिला। इसके बाद जमीन की वास्तविक स्थिति की निगरानी भी की गई।

    वादी/अतिक्रमणकारी कोर्ट में पीछे हटे, मौके से भी कब्जा हटाया
    प्रकरण में वादी/अतिक्रमणकारी दयानन्द मिश्र की ओर से न्यायालय में शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें उन्होंने वाद में आगे पैरवी न करने और कार्यवाही समाप्त किए जाने का अनुरोध किया है। मामले की अहम बात यह है कि संबंधित पक्ष ने न्यायालय में कानूनी पैरवी से पीछे हटने के साथ ही मौके से अपना कब्जा भी हटा लिया। इस तरह करीब तीन दशक से लंबित विवाद में एक ओर न्यायिक प्रक्रिया के स्तर पर बदलाव आया, वहीं दूसरी ओर जमीन की भौतिक स्थिति भी बदल गई।

    1997 में शुरू हुआ मामला, अब कब्जामुक्त हुई जमीन
    वर्ष 1997 में शुरू हुए विवाद को न्यायिक प्रक्रिया में करीब तीन दशक हो चुके थे। वर्ष 2008 के स्थगन आदेश के बाद भी मामला लंबित रहा। अब वर्ष 2026 में वादी के शपथ-पत्र और मौके से कब्जा हटने के बाद प्रशासन के सामने इन भूखंडों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि देवीपाटन आयुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित इन भूखंडों को सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि योगी सरकार की प्रशासनिक दक्षता और शासकीय संपत्तियों के संरक्षण की प्राथमिकता के तहत पुराने और लंबित मामलों की भी समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में तीन दशक पुराने इस नजूल भूमि प्रकरण की फाइल दोबारा खुली और न्यायिक स्थिति के साथ मौके की वास्तविक स्थिति भी परखी गई। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की निगरानी में हुई कार्रवाई के बाद अब प्रशासन का फोकस इन भूखंडों की सुरक्षा और निर्धारित शासकीय उपयोग सुनिश्चित करने पर है। यह प्रकरण बताता है कि लंबे समय से लंबित मामलों की नियमित समीक्षा, मजबूत पैरवी और प्रशासनिक निगरानी के जरिए शासकीय हितों की रक्षा की जा सकती है।

    वर्जन
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप शासकीय भूमि का संरक्षण और जनहित में उसका उपयोग सर्वोच्च प्राथमिकता है। करीब 30 वर्षों से लंबित इस प्रकरण में संबंधित पक्ष ने न्यायालय में आगे पैरवी न करने का अनुरोध किया है और मौके से भी कब्जा हटा लिया है। अब भूमि को सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
    दुर्गा शक्ति नागपाल, मंडलायुक्त, देवीपाटन

  • यूपी में मिठाइयों की एक्सपायरी बताना जरूरी, दूध प्रसंस्करण में खतरनाक केमिकल पर भी रोक

    यूपी में मिठाइयों की एक्सपायरी बताना जरूरी, दूध प्रसंस्करण में खतरनाक केमिकल पर भी रोक

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में मिठाई खरीदने वाले उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और हितों को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने नई व्यवस्था लागू किया है।

    अब राज्य में 15 अक्टूबर से विक्रय के लिए प्रदर्शित एवं भंडारित मिठाइयों पर ‘यूज बाई डेट’ यानी उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था विशेष रूप से खुली मिठाइयों को लेकर महत्वपूर्ण है, जिनके संबंध में अब तक उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित करने का कोई अनिवार्य प्रविधान नहीं था।

    खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त रोशन जैकब द्वारा जारी आदेश के अनुसार अलग-अलग मिठाइयों की उपयोग अवधि एक दिन से लेकर 30 दिन तक हो सकती है। विभाग का मानना है कि मिठाई की यूज बाई डेट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होने से उपभोक्ता को यह जानकारी मिल सकेगी कि संबंधित खाद्य पदार्थ का सेवन किस अवधि तक किया जाना उचित है।

    इससे खाद्य पदार्थ की ताजगी और गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ता अधिक जागरूक निर्णय ले सकेगा। वर्तमान व्यवस्था के तहत पैक्ड मिठाइयों पर अवसान तिथि अथवा ‘यूज बाई डेट’ अंकित किया जाना अनिवार्य है। हालांकि, खुली मिठाइयों के संबंध में इस प्रकार की जानकारी प्रदर्शित करने का कोई स्पष्ट अनिवार्य प्रविधान नहीं था।

    दूध प्रसंस्करण में एथिलीन ग्लाइकोल के इस्तेमाल पर रोक
    उत्तर प्रदेश में दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों की प्रसंस्करण इकाइयों में एथिलीन ग्लाइकोल और डाई एथिलीन ग्लाइकोल के प्रयोग पर रोक लगा दी गई है। निरीक्षण में पता चला कि कुछ दुग्ध प्रसंस्करण प्रतिष्ठानों में पाश्च्युरीकरण, प्रशीतन आदि प्रक्रियाओं में एथिलीन ग्लाइकोल अथवा डाई एथिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल कूलेंट के रूप में किया जा रहा है।

    ये रसायन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। प्रसंस्करण उपकरणों में लीकेज होने पर इनके दूध में मिल जाने की आशंका को देखते हुए इनके इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। इसके स्थान पर प्रोपिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसका उपयोग कई दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों द्वारा पहले से किया जा रहा है।

  • सड़क दुर्घटनाओं में झारखंड की स्थिति चिंताजनक, 2024 में 79.2% हादसे गंभीर

    सड़क दुर्घटनाओं में झारखंड की स्थिति चिंताजनक, 2024 में 79.2% हादसे गंभीर

    रांची
    सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता के मामले में झारखंड लगातार दूसरे वर्ष देश में तीसरे स्थान पर रहा है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट 'Road Accidents in India 2023-24' के अनुसार वर्ष 2023 में झारखंड में 78.5 प्रतिशत सड़क हादसे गंभीर श्रेणी के रहे. वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 79.2 प्रतिशत रहा.

    मिजोरम पहले स्थान पर और बिहार दूसरे स्थान पर
    रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में 90.6 प्रतिशत गंभीर सड़क हादसों के साथ मिजोरम पहले स्थान पर और 80.6 प्रतिशत के साथ बिहार दूसरे स्थान पर रहा. वर्ष 2024 में मिजोरम 93.2 प्रतिशत के साथ पहले, बिहार 80.5 प्रतिशत के साथ दूसरे और झारखंड 79.2 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा.

    2024 में देश में 1.77 लाख से अधिक मौतें
    रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में देशभर में सड़क हादसों में 1,72,890 लोगों की मौत हुई थी. वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,77,175 हो गया. झारखंड में वर्ष 2023 में सड़क हादसों में 4,173 लोगों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2024 में 4,114 लोगों की जान गयी.

    सबसे अधिक युवा हादसों की चपेट में
    आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में सड़क हादसों में मरने वालों में 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 5.7 प्रतिशत रही. 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 19.3 प्रतिशत, 25 से 35 वर्ष की 23.2 प्रतिशत, 35 से 45 वर्ष की 21.6 प्रतिशत और 45 से 60 वर्ष की 17.2 प्रतिशत रही.

    सड़क सुरक्षा संगठनों ने परिवहन सचिव को लिखा पत्र
    राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता पर चिंता जताते हुए सड़क सुरक्षा से जुड़े संगठनों 'राइजअप' और 'लाइफ सेवर्स, रांची' ने परिवहन विभाग के सचिव राजीव रंजन को पत्र लिखा है. पत्र पर राइजअप के सदस्य ऋषभ आनंद तथा लाइफ सेवर्स, रांची के सदस्य विशाल एच शाह, मोहित चोपड़ा, पराग श्रीवास्तव और अतुल गेरा के हस्ताक्षर हैं.

    सड़क सुरक्षा समिति बनाने का निर्देश
    पत्र में मार्च 2022 में गठित सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के निर्देशों का उल्लेख किया गया है. संगठनों के अनुसार प्रत्येक जिले में जिला सड़क सुरक्षा समिति बनाने का निर्देश दिया गया था. सीमित समीक्षा में राज्य के कई जिलों में इन निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं होने की बात कही गयी है. पत्र में यह भी बताया गया है कि 26 मार्च 2017 की अधिसूचना के तहत सड़क सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन के लिए परिवहन विभाग में लीड एजेंसी का गठन किया गया था. संगठनों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग की है.