Author: NewseDay

  • भोपाल में मतदाताओं को देने होंगे दस्तावेज, SIR में 2.96 लाख पत्रकों में मिली तार्किक विसंगतियां

    भोपाल में मतदाताओं को देने होंगे दस्तावेज, SIR में 2.96 लाख पत्रकों में मिली तार्किक विसंगतियां

    भोपाल.

    जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण में दो लाख 96 हजार पत्रकों में तार्किक विसंगतियां मिली हैं। ऐसे में अब इन मतदाताओं को नाम, पता व उम्र से संबंधित एक दस्तावेज पेश करना होगा। हालांकि इनमें से 79 हजार पत्रकों की विसंगतियां बीएलओ ने अपने स्तर पर ही दूर कर ली हैं, जबकि दो लाख 17 हजार को अब नोटिस जारी किए जाएंगे। इनकी सुनवाई नो मैपिंग मतदाताओं के साथ-साथ 85 हेल्प डेस्क पर की जाएंगी, जिसके लिए 91 अतिरिक्त एईआरओ पदस्थ कर दिए गए हैं।

    सात विधानसभा का SIR के दौरान सत्यापन किया गया था
    बता दें कि डिजिटाइज किए गए पत्रकों की तकनीकी रूप से जांच की जा रही है। इस दौरान तर्किक विसंगतियां मिलने के बाद सुनवाई वाले मतदाताओं की संख्या बढ़ गई हैं। जिले के सात विधानसभा क्षेत्र बैरसिया, उत्तर, नरेला, दक्षिण-पश्चिम, मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर में कुल 21 लाख 25 हजार 908 मतदाताओं का एसआइआर के दौरान सत्यापन किया गया था।

    स्वजनों का 2003 की सूची में रिकॉर्ड नहीं मिला था
    जिनमें से कुल 16 लाख 87 हजार 33 मतदाताओं के पत्रक डिजिटाइज किए गए थे, जबकि चार लाख 38 हजार 317 मतदाताओं को एएसडीआर (अनुपस्थित, शिफ्टिंग, मृत्यु और दोहरी प्रवृष्टि) श्रेणी में रखते हुए विलोपित किया गया है। जिन मतदाताओं और उनके स्वजनों का 2003 की सूची में रिकॉर्ड नहीं मिला था, ऐसे एक लाख 16 हजार 925 मतदाता नो मैपिंग श्रेणी में रखे गए हैं। इनकी सुनवाई 85 हेल्प डेस्क पर 90 एईआरओ द्वारा की जा रही है। इनमें से अब तक 49 हजार 965 की सुनवाई हो चुकी है।

    दो लाख 17 हजार 317 को नोटिस जारी किए गए
    इसी बीच तकनीकी परीक्षण के दौरान दो लाख 96 हजार 317 पत्रकों में तार्किक विसंगतियां मिली हैं। यानी किसी के नाम, उपनाम, पिता के नाम, माता के नाम आदि में अंतर होना शामिल हैं। इनमें से 79 हजार मतदाताओं के पत्रकों का बीएलओ ने अपने स्तर पर सुधार कर लिया है, जबकि दो लाख 17 हजार 317 को नोटिस जारी किए गए हैं। इन सभी मतदाताओं को सुनवाई के दौरान विसंगतियों को दूर करने संबंधी दस्तावेज पेश करना होगा।

    181 एईआरओ 14 फरवरी तक पूरी करेंगे सुनवाई
    एक लाख 16 हजार 925 नो मैपिंग मतदाताओं की सुनवाई के लिए 85 हेल्पडेस्क बनाई गई हैं, जिन पर 90 एईआरओ सुनवाई के लिए नियुक्त किए गए थे। अब दो लाख 17 हजार तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं की सुनवाई भी की जानी है, जिसके लिए अतिरिक्त 91 एईआरओ नियुक्त कर दिए गए हैं। इस तरह कुल 181 एईआरओ नो मैपिंग और विसंगति वाले मतदाताओं की 14 फरवरी तक सुनवाई पूरी करेंगे, जिससे कि अंतिम मतदाता सूची में किसका नाम रखना है और किसका विलोपित करना है, यह तय किया जा सके।

    ऐसे समझें तार्किक विसंगति
    उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि तकनीकी परीक्षण के दौरान तार्किक विसंगति वाले कुल दो लाख 96 हजार 317 मतदाताओं के पत्रक चिह्नित किए गए थे। तार्किक विसंगति का मतलब यह है कि किसी मतदाता का नाम मोहनलाल एक साथ लिखा था मतदाता सूची में, लेकिन पत्रक में उसका नाम मोहन और लाल अलग-अलग लिखा गया है। इसलिए अब इस अशुद्धि को दूर करने के लिए मतदाता को एक दस्तावेज सुनवाई के दौरान पेश करना होगा।

  • सुपरजेट की जगह Su-57? भारत में आने वाला दुनिया का सबसे चर्चित फाइटर जेट, तैयारियों की खबर

    सुपरजेट की जगह Su-57? भारत में आने वाला दुनिया का सबसे चर्चित फाइटर जेट, तैयारियों की खबर

    नई दिल्ली

    हाल ही में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) और रूस की UAC (यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन) के बीच SJ-100 (सुखोई सुपरजेट 100) विमानों के भारत में उत्पादन को लेकर हुए समझौते ने रक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नागरिक विमानों के बाद अब 'खतरनाक' सुखोई Su-57 लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना (IAF) के बेड़े का हिस्सा बनेंगे?

    SJ-100 समझौता: एक नया मोड़

    भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन के क्षेत्र में हुआ यह समझौता 'मेक इन इंडिया' की दिशा में एक बड़ा कदम है। SJ-100 एक क्षेत्रीय जेट है, और इसके स्थानीय उत्पादन से भारत में एयरोस्पेस ईकोसिस्टम मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य के सैन्य समझौतों के लिए एक 'टेस्ट केस' साबित हो सकती है।
    क्या बोले रूसी अधिकारी?

    खुद रूसी एरोस्पेस कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह दावा किया कि भारत और रूस पांचवीं पीढ़ी के सुखोई एसयू-57ई लड़ाकू विमान के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावना तलाशने के लिए तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, भारत की ओर से अधिकारी के दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। रूस के यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (यूएसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वादिम बदेखा ने हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे पर विंग्स इंडिया एयर शो से इतर रूसी संवाददाताओं से कहा- हम इस कॉन्ट्रैक्ट पर तकनीकी बातचीत के उन्नत चरण में हैं। हमारे अनुभव को देखते हुए, ऐसे कॉन्ट्रैक्ट होने वाले हैं जो कई दशकों तक हमारे सहयोग की दिशा तय करेंगे हैं।’ रूस ने इस प्रदर्शनी के दौरान अपने नवीनतम क्षेत्रीय परिवहन विमान – इल्यूशिन आईएल-114-300 और सुखोई एसजे-100 – को प्रदर्शित किया था। बदेखा ने दावा किया कि दोनों पक्ष वर्तमान में भारत में एसयू-30 विमानों के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली सुविधाओं में एसयू-57 लड़ाकू विमानों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन और इसके लिए भारतीय उद्योग और भारतीय प्रणालियों के अधिकतम उपयोग पर भी चर्चा कर रहे हैं।
    Su-57 'Felon': रूस का सबसे घातक योद्धा

    Su-57 रूस का पहला 5वीं पीढ़ी का सटील्थ लड़ाकू विमान है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे खास बनाती हैं। जैसे-

    स्टेल्थ तकनीक: यह रडार की नजरों से बचने में सक्षम है।

    सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति से तेज उड़ने की क्षमता।

    हथियार: इसके इंटरनल वेपन बे में आधुनिक मिसाइलें छिपी होती हैं, जो इसके स्टेल्थ को बरकरार रखती हैं।
    भारत और Su-57 का इतिहास (FGFA प्रोग्राम)

    आपको याद होगा कि भारत पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोग्राम का हिस्सा था, जो Su-57 पर ही आधारित था। लेकिन 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से पीछे हट गया था। इसके मुख्य कारण थे:

        इंजन की तकनीक में कमी।
        स्टेल्थ फीचर्स पर असंतोष।
        लागत और तकनीक हस्तांतरण (ToT) के मुद्दे।

    क्या अब पासा पलट रहा है?

    SJ-100 समझौते के बाद Su-57 की चर्चा फिर से शुरू होने के तीन मुख्य कारण हैं-

        नया इंजन (AL-51F1)- रूस ने अब Su-57 के लिए नया 'स्टेज 2' इंजन विकसित कर लिया है, जो भारत की पुरानी शिकायतों को दूर कर सकता है।
        युद्ध का अनुभव- यूक्रेन युद्ध में रूस ने Su-57 का सीमित उपयोग किया है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता के वास्तविक आंकड़े सामने आए हैं।
        चीन की चुनौती- चीन के पास J-20 जैसे 5वीं पीढ़ी के विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भारतीय वायुसेना को जल्द ही एक सटील्थ फाइटर की जरूरत है।

    चुनौतियां और 'आत्मनिर्भर भारत'

    भले ही रूस भारत को Su-57 ऑफर कर रहा हो, लेकिन भारत के सामने कुछ कठिन विकल्प हैं। दरअसल भारत अपना स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का विमान AMCA विकसित कर रहा है। Su-57 खरीदने से इस स्वदेशी प्रोजेक्ट के बजट और प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, रूस से बड़े रक्षा सौदे करने पर अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों का खतरा हमेशा बना रहता है। भारत अब केवल 'खरीदने' में नहीं, बल्कि 'भारत में बनाने' और 'पूर्ण तकनीक' प्राप्त करने में रुचि रखता है।

    रूस की सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक इससे पहले, सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के सीईओ अलेक्जेंडर मिखीव ने घोषणा की थी कि कंपनी नई दिल्ली को नवीनतम पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57ई लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के साथ-साथ भारत में उनके उत्पादन और स्वदेशी एएमसीए स्टील्थ लड़ाकू विमान के विकास में सहायता की पेशकश कर रही है।

    कुल मिलाकर SJ-100 समझौता यह दर्शाता है कि भारत और रूस के बीच औद्योगिक संबंध अभी भी गहरे हैं। यदि रूस Su-57 के लिए पूर्ण तकनीक हस्तांतरण (ToT) और स्वदेशी AMCA में सहयोग का प्रस्ताव देता है, तो 'Felon' भारत के आकाश की सुरक्षा करते हुए दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, अभी वायु सेना का मुख्य ध्यान राफेल के अगले बैच और स्वदेशी विमानों पर है।

  • 5 घंटे का सफर घटकर 2 घंटे में होगा पूरा, दौसा से कोटा के बीच होली से होगा आवागमन

    5 घंटे का सफर घटकर 2 घंटे में होगा पूरा, दौसा से कोटा के बीच होली से होगा आवागमन

    दौसा.

    जिलेवासियों के लिए खुश खबर है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर दौसा से कोटा बीच होली तक वाहनों का आवागमन शुरू हो जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने लक्ष्य तय किया है कि फरवरी तक शेष बचे कार्यों को पूरा कर लिया जाएगा।
    कोशिश रहेगी कि फरवरी या होली से पहले शेष कार्य को पूरा कर लिया जाए।

    दौसा जिले के छात्र-छात्रा बड़ी संख्या में कोटा पढाई करते हैं। दौसा से कोटा के लिए सीधी ट्रेन नहीं है। ऐसे अधितकतर युवा सड़क मार्ग से ही सफर करते हैं।

    अभी पांच घंटे से ज्यादा लग रहे
    अभी दौसा से कोटा के लिए सड़क सही नहीं है। बीच में कई जगह काम चल रहा है। ऐसे में करीब पांच घंटे का समय लग रहा है। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यह सफर कार से करीब दो घंटे में पूरा हो सकेगा। इससे समय व धन दोनों की बचत होगी। एक्सप्रेस-वे पर आवागमन शुरू होने से कोटा संभाग के लोगों को भी फायदा होगा। वर्तमान में कोटा से दिल्ली पहुंचने में करीब 9 घंटे का समय लगता है। लेकिन, एक्सप्रेस-वे के चालू होने के बाद यह सफर करीब 5 में पूरा होगा।

    यहां चल रहा कार्य
    वर्तमान में लाखेरी (बूंदी) और सवाई माधोपुर के बीच चल रहा निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। दावा किया गया है कि जल्द ही इस हिस्से का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। वर्तमान में इस छोटे से टुकड़े के अधूरे होने के कारण ट्रैफिक को डाइवर्ट करना पड़ता है, लेकिन फरवरी से वाहन चालक बिना किसी बाधा के सीधे दिल्ली की ओर बढ़ सकेंगे।

    विकास की नई राह खुलेगी
    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का यह हिस्सा दौसा व कोटा संभाग के लिए विकास की नई राह खोलेगा। इससे व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा और पर्यटन के क्षेत्र में भी नए अवसर खुलने की उम्मीद है। सुगम परिवहन व्यवस्था से न केवल लोगों को फायदा होगा, बल्कि औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी। दौसा वालों के लिए रणथम्भौर जाना आसान होगा।

    दरा टनल का काम मार्च तक होगा पूरा
    एक्सप्रेस-वे के दूसरे छोर यानी झालावाड़ की तरफ भी काम तेजी से चल रहा है। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से गुजरने वाली दरा टनल का कार्य भी मार्च तक पूरा होने की संभावना है। यह टनल परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है, क्योंकि इसके पूरा होने से झालावाड़ और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और बेहतर हो जाएगी।

    इनका कहना है
    दौसा से कोटा के बीच अभी काम चल रहा है। हमारा प्रयास रहेगा कि फरवरी तक यातायात शुरू कर देंगे। इससे सफर सुगम हो जाएगा। दौसा से कोटा कार से करीब दो से सवा दो घंटे में पहुंच सकेंगे।
    -भरत सिंह जोइया, पीडी, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण दौसा

  • निराश्रितों को शीतलहरी से बचाने के लिए रैन बसेरों, कंबल वितरण और अलाव की व्यवस्था से दी गई राहत

    निराश्रितों को शीतलहरी से बचाने के लिए रैन बसेरों, कंबल वितरण और अलाव की व्यवस्था से दी गई राहत

    आपदा राहत प्रबंधन के लिए प्रतिबद्ध है प्रदेश सरकार, वर्ष 2025-26 में जारी किए 710.12 करोड़ रुपये

    सर्वाधिक धनराशि बाढ़ से नुकसान की क्षतिपूर्ति और पुनर्वास के लिए की गई आवंटित 

    निराश्रितों को शीतलहरी से बचाने के लिए रैन बसेरों, कंबल वितरण और अलाव की व्यवस्था से दी गई राहत

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश सरकार बाढ़, भूकंप, सूखा, अग्निकांड, शीतलहर एवं मानव-जीव संघर्ष जैसी आपादाओं से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध और संवेदनशील है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश का राहत आयुक्त कार्यालय आपादा प्रभाव को कम करने तथा पीड़ितों को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए सभी संभव प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2025-26 में आपदा राहत निधि के तहत 710.12 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। इस धनराशि से विभिन्न प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदा पीड़ितों को सहायता प्रदान की गई। इसके साथ ही राज्य में आपदा राहत तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास किये गए हैं, जिससे वर्तमान में उत्तर प्रदेश आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल राज्य के रूप में उभर रहा है।

    त्वरित राहत, पुनर्वास एवं बचाव कार्यों को मिली रफ्तार
      
    प्रदेश में आपदा न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, प्रभावी राहत वितरण एवं पीड़ितों के पुनर्वास के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में जारी 710.12 करोड़ रुपये में सर्वाधिक 365.73 करोड़ रुपये बाढ़ प्रभावितों के बचाव के लिए जारी किए गए। इसे विशेष रूप से सरयू, गंगा और घाघरा के बाढ़ प्रभावितों के पुनर्वास पर खर्च किया गया। चक्रवात व आंधी-तूफान से होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति के लिए 14.13 करोड़, ओलावृष्टि से नुकसान की भरपाई के लिए 0.13 करोड़, अग्निकांड में क्षतिपूर्ति के लिए 14.63 करोड़ रुपये और शीतलहरी से बचाव के लिए 50.72 करोड़ रुपये जारी किये गये।

    इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा अन्य आपदाओं के लिए लगभग 246.63 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। सामान्य मद के लिए 0.44 करोड़ व अन्य राहत कार्यों के लिए 17.71 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। इस राशि को प्रदेश में आपदा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत, पुनर्वास एवं बचाव कार्यों को गति प्रदान करने एवं आपदा राहत तंत्र को प्रभावी बनाने में खर्च किया गया। 

    बांटे गये 5 लाख 89 हजार से अधिक कंबल 

    राहत आयुक्त कार्यालय ने ठंड के मौसम में बचाव के लिए व्यापक प्रबंध किए, जिससे इस वर्ष शीतलहर से होने वाली जनहानि में विशेष रूप से कमी आई। इस क्रम में प्रदेश सरकार की ओर से निराश्रित एवं असहाय व्यक्तियों को कंबल वितरण हेतु 45.51 करोड़ व अलाव जलाने के लिए 3.51 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई। जिसके माध्यम से प्रदेश के सभी जनपदों में 27,027 स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। जहां अब तक 1,69,834 अलाव जलाए जा चुके हैं, जरूरत के हिसाब से ये कार्य अभी भी जारी है। वहीं जिला प्रशासन द्वारा गरीबों और निराश्रितों को 5,89,689 कंबल वितरित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही प्रदेश भर में 1,242 रैन बसेरे स्थापित किए गए हैं, जहां अब तक 64 हजार से अधिक व्यक्तियों को रैन बसेरों ने राहत प्रदान की। ये व्यवस्थाएं शीतलहरी के दौरान निराश्रित और असहाय लोगों की जान बचाने में उल्लेखनीय प्रयास साबित हुईं। प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि हर आपदा प्रभावित व्यक्ति को त्वरित सहायता मिले और जीवन-रक्षा के साथ आर्थिक स्थिरता भी सुनिश्चित हो। इसके लिए राहत आयुक्त कार्यलय की ओर से आपदा प्रहरी एप और 1070 टोल फ्री नंबर का संचालन भी किया जाता है। जो आपदा प्रभावितों को त्वरित सहायता और प्रभावी समन्वय को सुनिश्चित करता है।

  • दुनिया में तहलका: फिल्म ‘धुरंधर’ का गाना गिनीज रिकॉर्ड बना, फैन्स में उत्साह

    दुनिया में तहलका: फिल्म ‘धुरंधर’ का गाना गिनीज रिकॉर्ड बना, फैन्स में उत्साह

    मुंबई 

    बहरीन के फेमस रैपर फ्लिपराची ने म्यूजिक की दुनिया में एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जिसका सपना हर कलाकार देखता है. दरअसल फिल्म 'धुरंधर' के सुपरहिट गाने 'फासला' (Fa9la) ने आधिकारिक तौर पर 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में अपनी जगह बना ली है.

    बॉलीवुड स्टार रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'धुरंधर' में सुनाई दिए इस गाने ने बिलबोर्ड अरबिया चार्ट्स में सबसे लंबे समय तक टॉप पर रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. अब इस उपलब्धि ने फ्लिपराची को रातोरात भारत में एक बड़ा नाम बना दिया है. रैपर ने अपनी इस खुशी को एक वीडियो के जरिए शेयर किया है.

    रैपर फ्लिपराची ने क्या कहा?
    'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में नाम आने के बाद अपनी इस बड़ी जीत पर रिएक्शन देते हुए फ्लिपराची ने कहा, 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, हबीबी! यह एहसास बहुत ही शानदार है.' उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि यह गाना उस भाषा (हिंदी) में लोकप्रिय हुआ, जिसमें इसे गाया ही नहीं गया था. उन्होंने बताया कि जब वे एक फोटोशूट में व्यस्त थे, तब उन्हें यह खबर मिली कि उनका गाना एक साथ चार अलग-अलग चार्ट्स में टॉप पर है. एक दूसरी भाषा और संस्कृति में गाने को इतना प्यार मिलना उनके लिए किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं है.

    'धुरंधर' की जान बना यह गाना
    फिल्म 'धुरंधर' में 'फासला' गाना एक बेहद अहम मोड़ पर आता है. जब अक्षय खन्ना का किरदार हथियारों की डील के लिए बलूच पहुंचता है. गाने की जबरदस्त एनर्जी और कमाल की बीट ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया. जैसे ही फिल्म रिलीज हुई, यह गाना थिएटर से निकलकर सीधे लोगों के फोन तक पहुंच गया. आज इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉट्स और मीम्स की दुनिया में इस गाने का ही बोलबाला है. फिल्म की कमाई में भी इस गाने ही सबसे बड़ा योगदान है.

    वहीं भारत से मिल रहे प्यार को देखकर फ्लिपराची काफी इमोशनल हैं. उन्होंने बताया कि उनके सोशल मीडिया इनबॉक्स (DMs) हर दिन हजारों मैसेज से भरे रहते हैं. लोग उन्हें गानों पर बने वीडियो में टैग कर रहे हैं और अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं.

    बता दें कि Fa9la गाना चार बड़े चार्ट्स — टॉप 100 आर्टिस्ट, हॉट 100 गाने, टॉप 50 खलीजी, और टॉप 50 अरेबिक हिप हॉप — सभी बिलबोर्ड अरबिया द्वारा बनाए गए चार्ट्स में टॉप पर पहुंच गया है.

    जल्द भारत टूर पर फ्लिपराची
    सिंगर, रैपर फ्लिपराची के इंडिया टूर की शुरुआत 14 मार्च 2026 से होगी. अपने ऑफिशियल इंस्टा हैंडल से फ्लिपराची ने इसकी जानकारी दी है. म्यूजिक टूर की बाकी तारीखों और शहर की की घोषणा भी जल्द ही की जाएगी. इसके लिए उन्होंने इंडियन फैंस से सजेशन मांगे हैं.  

  • महाशिवरात्रि कब है? 15 या 16 फरवरी, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा के खास मंत्र

    महाशिवरात्रि कब है? 15 या 16 फरवरी, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा के खास मंत्र

     इस साल महाशिवरात्रि का त्योहार सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाया जाएगा. फाल्गुन माह की शिवरात्रि व्रत का यह दुर्लभ संयोग आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सनातन धर्म की शाश्वत परंपरा में महाशिवरात्रि को एक ऐसा दिव्य पर्व माना गया है जिसमें अज्ञान का अंधकार विलीन हो सकता है. साधक के भीतर ज्ञान का दीप प्रज्वलित होता है और जीवन शिव तत्व की अनुभूति से आलोकित हो उठता है. महाशिवरात्रि की तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में ज्योतिषाचार्य डॉ. श्रीपति त्रिपाठी ने विस्तार से जानकारी दी है.

    महाशिवरात्रि की तिथि
    फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी को दोपहर 05:04 बजे होगा और इसका समापन 16 फरवरी को दोपहर 05:34 बजे होगा.  ऐसे में महाशिवरात्रि का त्योहार 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा और व्रत का पारण 16 फरवरी को किया जाएगा.

    श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि का संयोग
    इस बार महाशिवरात्रि का पर्व श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि के दुर्लभ संयोग में आ रहा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कोई महापर्व सिद्ध योग में पड़ता है तो उसमें किए गए जप, तप, दान और पूजा असाधारण फल प्रदान करती है. सर्वार्थ सिद्धि योग का अर्थ ही है सभी कार्यों की सिद्धि कराने वाला योग. ऐसे में महाशिवरात्रि का यह दुर्लभ संयोग साधकों के लिए सांसारिक सुख ही नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और मोक्ष की दिशा में अग्रसर होने का स्वर्णिम अवसर लेकर आई है.

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पावन विवाह संपन्न हुआ था. कठोर तपस्या के पश्चात माता पार्वती ने शिव को पति के रूप में प्राप्त किया और वैराग्य में लीन शिव ने गृहस्थ जीवन स्वीकार कर लोक कल्याण का मार्ग अपनाया. यह प्रसंग केवल विवाह कथा नहीं बल्कि प्रेम त्याग और समर्पण की पराकाष्ठा का प्रतीक है. इसी कारण महा शिवरात्रि को दांपत्य सुख-सौभाग्य और पारिवारिक स्थिरता का महापर्व भी माना जाता है.

    1. ओम नमः शिवाय

    2. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।

    3. ॐ हौं जुं स: मृत्युंजयाय नम:॥

    4. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ 

  • बिहार में 15 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन करवाने के निर्देश, नए गन्ना किसानों को फ्री में मिलेगा बीज

    बिहार में 15 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन करवाने के निर्देश, नए गन्ना किसानों को फ्री में मिलेगा बीज

    पटना.

    सरकार नई चीनी मिल लगाने से पहले गन्ने की खेती का रकबा बढ़ाने के लिए हर जतन कर रही है। प्रयास है कि अधिक से अधिक गन्ना की खेती को बढ़ाया जाए, ताकि मिलों को गन्ना की कमी नहीं रहे। इसके लिए जिन इलाकों में गन्ना की खेती नहीं होती है, वहां के किसानों को पांच एकड़ तक गन्ना की खेती करने के लिए निशुल्क गन्ना बीज दिया जाएगा।

    गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव के सेंथिल कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र में गन्ने की खेती नहीं है, उसे डेवलप किया जाए। गन्ना की खेती करने के लिए किसानों के बीच प्रचार-प्रसार कराया जाए, ताकि वह गन्ना की खेती करने के लिए जागरूक हो सकें।

    15 दिन कें अंदर रजिस्ट्रेशन करने के निर्देश
    उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों के बकाये मूल्य का 15 दिनों के अंदर भुगतान किया जाए। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने राज्य के सभी गन्ना किसानों का 15 दिनों के अंदर रजिस्ट्रेशन कराने का सख्त निर्देश दिया।
    इसके पहले उन्होंने ईख मूल्य भुगतान, मुख्यमंत्री गन्ना विकास योजना, यांत्रिकरण योजना, गुड़ प्रोत्साहन योजना, चीनी मिलों की समस्या, नई चीनी मिलों की स्थापना और अन्य योजनाओं की समीक्षा की।

    सरकारी योजनाओं को किसानों तक पहुंचाने पर फोकस
    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित के लिए कई योजनाएं चला रही है। इसका लाभ उन किसानों को कैसे मिले, इसके बारे सोंचना होगा। वहीं, गन्ना आयुक्त अनिल कुमार झा ने कहा कि प्रमाणित बीज उत्पादन प्रोत्साहन कार्यक्रम मद का जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उसे हर हालत में प्राप्त करना है। बेहतर करने वालों को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित भी किया जाएगा। बैठक में संयुक्त गन्ना आयुक्त जेपीएन सिंह, सभी चीनी मिलों के महाप्रबंधक, सभी उपनिदेशक, सहायक निदेशक सभी पदाधिकारी मौजूद थे।

    गन्ना क्षेत्र को जलजमाव से मुक्त करने के लिए 72 योजनाएं चिह्नित
    गन्ना कृषि क्षेत्रों में जल-जमाव की समस्या के निराकरण हेतु संबंधित अभियंताओं को सर्वेक्षण कर प्राथमिकता के आधार पर योजनाएं तैयार करने का निर्देश पिछले वर्ष 30 दिसंबर को दिया गया था। शुक्रवार को जल संसाधन विभाग और गन्ना उद्योग विभाग ने निर्देश के अनुपालन की संयुक्त रूप से समीक्षा की। गन्ना कृषि क्षेत्रों से संबंधित नहरों, नहर संरचनाओं तथा स्लुइस गेट, पुलिया निर्माण, नाला उड़ाही (सफाई) एवं अतिक्रमण मुक्ति के लिए जिलों में सर्वेक्षण हो रहा है।

    अब तक 72 योजनाएं चिह्नित
    पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और समस्तीपुर में अब तक कुल 72 योजनाएं चिह्नित हुई हैं, जिनके क्रियान्वयन से 61,590 एकड़ क्षेत्र को जल-जमाव से मुक्ति मिलेगी। बैठक की अध्यक्षता कर रहे जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव एसके मल्ल ने सर्वेक्षण कार्य शीघ्र पूर्ण कर विभाग को रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि प्राथमिकता के आधार पर योजनाएं बनाई जा सकें।

  • कलियासोत–भोज वेटलैंड मामला: एनजीटी ने प्रशासन को किया फटकार, अवैध कब्जे पर तत्काल कदम उठाने के निर्देश

    कलियासोत–भोज वेटलैंड मामला: एनजीटी ने प्रशासन को किया फटकार, अवैध कब्जे पर तत्काल कदम उठाने के निर्देश

     भोपाल
     कलियासोत जलाशय क्षेत्र में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामलों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा कार्रवाई नहीं की गई, जो चिंताजनक है।

    एनजीटी के समक्ष यह मामला कलियासोत जलाशय, केरवा जलाशय और आसपास के ग्रीन बेल्ट, बाटनिकल गार्डन व रीजनल गार्डन की जमीन पर हुए अतिक्रमण से जुड़ा है। ट्रिब्यूनल ने माना कि इन अवैध गतिविधियों से न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं जैसे जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास भी खतरे में है।

    97 अतिक्रमण चिह्नित किए

    बीते कुछ वर्षों में इन जीवों का रिहायशी इलाकों में दिखना मानव जीवन के लिए भी जोखिम बनता जा रहा है। एनजीटी ने अपने आदेश में खुलासा किया कि कलियासोत जलाशय क्षेत्र में कुल 97 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश सरकारी भूमि पर हैं।

    इसके अलावा लगभग 150 हेक्टेयर भूमि, जो बाटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित है, उसकी न तो समुचित सीमांकन हुआ और न ही सुरक्षा। वहीं, बिना उपचारित सीवेज जलाशयों प्रवाह अब भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। कई एसटीपी वर्षों से अधूरे या ट्रायल रन की स्थिति में हैं।
    दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के आदेश

    ट्रिब्यूनल ने कलेक्टर भोपाल और नगर निगम आयुक्त को व्यक्तिगत निगरानी में अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आदेश दिया गया है कि दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट पेश की जाए। एनजीटी ने यह भी कहा कि लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
    समय सीमा बीतने के बाद भी शुरू नहीं हुए एसपीटी

    एनजीटी ने यह भी चिंता जताई कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बाद भी पूरी तरह चालू नहीं हो पाए हैं, जिसके कारण बिना उपचारित गंदा पानी जलाशयों में छोड़ा जा रहा है । अधिकरण ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक भूमि की रक्षा करना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है और अधिकारियों की निष्क्रियता किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
    मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को

    याचिकाकर्ता डॉ. सुभाष सी. पांडेय और राशिद नूर खान की ओर से प्रस्तुत तर्कों पर सुनवाई के बाद एनजीटी ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिए कि यह आदेश मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव तक पहुंचाया जाए, ताकि तत्काल और ठोस कार्रवाई हो सके।

    अधिकरण ने स्पष्ट किया कि वह स्वामित्व विवाद तय नहीं करेगा, बल्कि उसका उद्देश्य केवल जलाशयों से अतिक्रमण हटाकर भोज वेटलैंड की रक्षा करना है। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को होगी।

  • कांग्रेस संगठन अपडेट: जिला महासचिव और महामंत्री नियुक्त, सागर और मऊगंज की DCC भी हुई घोषणा

    कांग्रेस संगठन अपडेट: जिला महासचिव और महामंत्री नियुक्त, सागर और मऊगंज की DCC भी हुई घोषणा

    भोपाल 

    कांग्रेस हाईकमान के साथ हाल ही में हुई बैठक के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस (Madhya Pradesh Congress) संगठन में लंबे समय से लंबित संगठनात्मक नियुक्तियों को तेजी से आगे बढ़ाया गया है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार उठ रही नाराजगी और संगठनात्मक ढिलाई पर असंतोष जताए जाने के बाद प्रदेश में ताबड़तोड़ नियुक्तियों का दौर शुरू हो गया है. इसी क्रम में पार्टी ने 18 जिलों में संगठन महासचिवों की नियुक्ति और 14 प्रकोष्ठों के अध्यक्षों एवं संयोजकों की घोषणा कर दी है. सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में हुई बैठक में संगठनात्मक देरी पर नाराजगी जताए जाने के बाद प्रदेश नेतृत्व ने प्राथमिकता के आधार पर जिला इकाइयों का पुनर्गठन शुरू किया.
    कहां किसे मिली नियुक्ति

    सागर, छिंदवाड़ा और मऊगंज जिलों की जिला कार्यकारिणी घोषित की गई. पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कई असंतुष्ट नेताओं को भी संगठन में एडजस्ट किया गया है ताकि स्थानीय स्तर पर मनमुटाव कम किया जा सके.
    सागर जिले में पूर्व जिलाध्यक्ष राजकुमार पचौरी को जिला संगठन महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है. पचौरी पहले भी जिला अध्यक्ष रह चुके हैं और दोबारा उसी पद के लिए प्रयासरत थे. उन्हें कमलनाथ समर्थक माना जाता है. इसी तरह सिंगरौली ग्रामीण में संकठा सिंह और सिंगरौली शहर में सुरेश कुमार दुबे को संगठन महासचिव बनाया गया है. पार्टी सूत्र बताते हैं कि इन नियुक्तियों में क्षेत्रीय संतुलन, स्थानीय प्रभाव और वरिष्ठ नेताओं को साधने की रणनीति प्रमुख रही.

    14 प्रकोष्ठों के प्रमुखों की नियुक्ति कांग्रेस ने 14 प्रकोष्ठों के अध्यक्ष, संयोजक और समन्वयकों की नियुक्ति की है। अलग-अलग जातियों को साधने के लिए बंगाली समाज, बंजारा समाज, तैलिक साहू राठौर समाज, सर्व विश्वकर्मा समाज, स्वर्णकला, कोली/कोरी समाज, रजक समाज के नेताओं को समन्वयक संयोजक बनाया है।

    छिंदवाड़ा में ज्यादा फोकस

    पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा की जिला कांग्रेस कमेटी में पदाधिकारियों और सदस्यों को मिलाकर 258 पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है। छिंदवाड़ा में कमलनाथ और नकुलनाथ को जिला कांग्रेस कमेटी में संरक्षक बनाया गया है।

    छिंदवाड़ा की जिला कार्यकारिणी में 73 महामंत्री बनाए पूर्व सीएम कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा की जिला कांग्रेस कमेटी(DCC) में पदाधिकारियों और सदस्यों को मिलाकर 258 पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है। छिंदवाड़ा में कमलनाथ और नकुलनाथ को जिला कांग्रेस कमेटी में संरक्षक बनाया गया है।

    छिंदवाड़ा की जिला कांग्रेस कमेटी में कुल 258 नेताओं की नियुक्ति

    कार्यवाहक अध्यक्ष- 2 कोषाध्यक्ष-1 कार्यालय मंत्री- 2 प्रवक्ता- 1 मीडिया प्रभारी- 1 सोशल मीडिया प्रभारी उपाध्यक्ष- 33 महामंत्री-73 सचिव- 70 सहसचिव- 3 आमंत्रित सदस्य- 62 विशेष आमंत्रित- 9 कुल पदाधिकारी – 258

    छिंदवाड़ा में 258 की नियुक्ति

    कार्यवाहक अध्यक्ष- 2, कोषाध्यक्ष-1, कार्यालय मंत्री- 2, प्रवक्ता- 1, मीडिया प्रभारी- 1, सोशल मीडिया प्रभारी, उपाध्यक्ष- 33, महामंत्री-73, सचिव- 70, सहसचिव- 3, आमंत्रित सदस्य- 62, विशेष आमंत्रित- 9, कुल पदाधिकारी – 258 की नियुक्ति की गई है।

    सागर में 23 जिला महामंत्री  

    उपाध्यक्ष-8, महामंत्री- 23, सचिव- 21, कार्यकारिणी सदस्य- 8, संरक्षक सदस्य- 11, विशेष आमंत्रित सदस्य- 42, प्रवक्ता-2, स्थाई आमंत्रित सदस्य- 23, स्थाई कार्यालय मंत्री-1, सोशल मीडिया अध्यक्ष-1 और निर्वाचन प्रभारी -1 की नियुक्ति की गई है।

    सागर में 23 जिला महामंत्री बनाए उपाध्यक्ष-8 महामंत्री- 23 सचिव- 21 कार्यकारिणी सदस्य- 8 संरक्षक सदस्य- 11 विशेष आमंत्रित सदस्य- 42 प्रवक्ता-2 स्थाई आमंत्रित सदस्य- 23 स्थाई कार्यालय मंत्री-1 सोशल मीडिया अध्यक्ष-1 निर्वाचन प्रभारी -1

    मऊगंज में 23 महामंत्री

    विंध्य की मऊंगज विधानसभा सीट में कांग्रेस ने उपाध्यक्ष-7, महामंत्री- 23, सचिव- 28 और कोषाध्यक्ष- 1 की नियुक्ति की है। हालांकि इस नियुक्ति से स्थानीय कार्यकर्ता नाराज बताए जा रहे हैं। दरअसल, जिन्हें उम्मीद थी कि पद मिलेगा उन्हें कुछ नहीं मिला। नेताओं की परिक्रमा करने वालों को प्राथमिकता दी गई है।

    प्रदेश कांग्रेस संगठन महासचिव संजय कामले ने कहा कि शेष जिला कार्यकारिणियों की घोषणा भी जल्द की जाएगी. उनका कहना है कि वर्तमान चरण में प्राथमिकता उन जिलों को दी गई जहां संगठनात्मक गतिविधियाँ लंबे समय से रुकी हुई थीं या स्थानीय स्तर पर असंतोष की स्थिति थी. पार्टी अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर प्रदेश में यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है. संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले के नेतृत्व में जिला इकाइयों का पुनर्गठन और नियुक्तियों की श्रृंखला जारी है. पार्टी की रणनीति आगामी चुनावी तैयारियों के लिए जिलों में अधिक सक्रिय और मजबूत संगठनात्मक ढांचा खड़ा करने पर केंद्रित बताई जा रही है.

     

  • 200 करोड़ के विकास कार्यों की देंगे सौगात, CM साय होंगे सिरपुर महोत्सव में शामिल

    200 करोड़ के विकास कार्यों की देंगे सौगात, CM साय होंगे सिरपुर महोत्सव में शामिल

    रायपुर.

    ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी सिरपुर में आयोजित होने वाले सिरपुर महोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय जिले को विकास की बड़ी सौगात देंगे. वे जिले में कुल 199 करोड़ 28 लाख 59 हजार रुपए की लागत की 99 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे.

    इनमें 40 करोड़ 88 लाख 2 हजार रुपए की लागत के 64 विकास कार्यों का लोकार्पण और 158 करोड़ 40 लाख 57 हजार रुपए की लागत के 35 विकास कार्यों का भूमिपूजन शामिल है. कार्यक्रम अंतर्गत लोकार्पण किए जाने वाले कार्यों में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के 98 लाख 80 हजार रुपए की लागत के 4 विकास कार्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 6 करोड़ 64 लाख 20 हजार रुपए की लागत के 19 विकास कार्य, आदिवासी विकास विभाग के 1 करोड़ 52 लाख 97 हजार रुपए की लागत का 1 विकास कार्य, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के 17 करोड़ 95 लाख 86 हजार रुपए की लागत के 26 विकास कार्य और विद्युत विभाग के 13 करोड़ 76 लाख 19 हजार रुपए की लागत के 14 विकास कार्य शामिल हैं.

    इसी प्रकार भूमिपूजन के अंतर्गत लोक निर्माण विभाग द्वारा 141 करोड़ 19 लाख 19 हजार रुपए की लागत से 22 विकास कार्य, जल संसाधन विभाग के 10 करोड़ 32 लाख 72 हजार रुपए की लागत से 3 विकास कार्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 2 करोड़ 18 लाख 93 हजार रुपए की लागत से 8 विकास कार्य और परिवहन विभाग के 4 करोड़ 69 लाख 73 हजार रुपए की लागत से 2 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया जाएगा.