Author: NewseDay

  • 106 CDR और 100 CCTV फुटेज ने खोला राज, 18 दिन बाद सामने आई साध्वी की मौत की सच्चाई

    106 CDR और 100 CCTV फुटेज ने खोला राज, 18 दिन बाद सामने आई साध्वी की मौत की सच्चाई

     जोधपुर

    राजस्थान की चर्चित युवा साध्वी प्रेम बाईसा का मौत को लेकर सवालों का सैलाब उमड़ पड़ा था. क्या उनकी मौत के पीछे कोई साजिश थी? क्या उन्हें जहर दिया गया? या फिर कोई मेडिकल लापरवाही? 18 दिनों तक चली लंबी और पेचीदा जांच, 44 गवाहों के बयान, 106 लोगों की कॉल डिटेल, 100 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज और 37 से अधिक विसरा नमूनों की पड़ताल के बाद आखिरकार जोधपुर पुलिस ने इस राज से पर्दा उठा दिया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. क्योंकि मौत की वजह भले सामने आ गई हो, इंजेक्शन का सच सामने आना अभी बाकी है.

    एक लंबी और चुनौतीपूर्ण तफ्तीश के बाद राजस्थान की मशहूर साध्वी प्रेम बाईसा के मौत के रहस्य से आखिरकार पर्दा हट ही गया. इस मामले में फाइनल ओपिनियन के लिए जोधपुर पुलिस को फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी यानी एफएसएल की रिपोर्ट का इंतजार था. उस रिपोर्ट के बाद पुलिस ने इसे लेकर फिर से मेडिकल एक्सपर्ट्स से चर्चा की और आखिरकार प्रेम बाईसा की मौत के सच का खुलासा कर दिया. 

    28 जनवरी को हुई प्रेम बाईसा की मौत के बाद से ही इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म था. प्रेम बाईसा के अनुयायी तो खैर इस मामले में इंसाफ की मांग कर ही रहे थे, खुद प्रेम बाईसा के पिता वीरमनाथ भी बार-बार इस मामले में साजिश की आशंका जताते हुए अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे थे, ऐसे में पुलिस ने पहले डॉक्टरों के बोर्ड से उनके शव का पोस्टमार्टम करवाया और फिर हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए उनके विसरा के नमूनो को स्टेट फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी जयपुर भेजा, जिसकी रिपोर्ट 16वें दिन सामने आ गई और 18वें दिन जोधपुर पुलिस ने इस केस को एक तरह से कनक्लूड कर दिया.

    पुलिस की मानें तो साध्वी प्रेम बाईसा के साथ ना तो कोई साजिश हुई, ना उनके साथ मौत से पहले कोई सेक्सुअल ऑफेंस हुआ और ना ही उन्होंने खुदकुशी की, बल्कि उनकी मौत की वजह कार्डिएक और पल्मॉनरी अरेस्ट बनी. कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट से मौत बोले तो दिल की धड़कनों का और सांस लेने की क्रिया रुकने के चलते हुई मौत. पुलिस ने साफ किया कि उन्हें पहले से फेफड़े से संबंधित बीमारी थी, ऐसे में कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट जानलेवा बन गई. 

    वैसे तो इस मामले में कई पेच थे, लेकिन सबसे बड़ा पेच साध्वी को मौत से ऐन पहले लगाए गए इंजेक्शन का ही था. क्योंकि सामने आई खबरों के मुताबिक इंजेक्शन लगाए जाने के बाद ही उनकी तबीयत एकाएक बिगड़ी और जब तक उनके पिता और आश्रम के लोग उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक उनकी जान चली गई. ऐसे में इंजेक्शन में दी गई दवाओं की जांच के साथ-साथ पुलिस के लिए उस कंपाउंडर की भूमिका की पड़ताल भी जरूरी थी. पुलिस ने इस दिशा में जांच की भी और शुरुआती तफ्तीश में उसे कंपाउंडर की लापरवाही का पता चला.

    आपको याद होगा कि 28 जनवरी को साध्वी की तबीयत बिगड़ने पर जोधपुर के एक कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित को आश्रम की ओर से साध्वी के इलाज के लिए बुलाया गया था और तब देवी सिंह दो दवाओं के साथ साध्वी के पास पहुंचा था. साध्वी को ये दवाएं पहले भी दी जाती रही हैं. इन दवाओं में डेक्सोना और डायनापार शामिल हैं, लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि से शेड्यूल एच की दवाएं हैं, जिन्हें बिना किसी मेडिकल प्रैक्टिशनर यानी डॉक्टर की इजाजत या देख-रेख के बगैर दिए जाने की मनाही है. इसके बावजूद देवी सिंह राजपुरोहित ने ना सिर्फ साध्वी को इन दो दवाओं का इंजेक्शन दिया, बल्कि वो बगैर किसी प्रैस्क्रिप्शन यानी डॉक्टर की पर्ची के खुद ही ये दवाएं लेकर साध्वी के पास पहुंचा था, जो की एक गैरकानूनी हरकत है.

    जोधपुर पुलिस ने साफ किया कि कंपाउंडर की लापरवाही को लेकर पुलिस ने नए सिरे से मेडिकल बोर्ड से उनकी राय मांगी है, ताकि ये साफ हो सके कि क्या कपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित की ओर से दिया गया इंजेक्शन ही उनकी मौत की वजह बनी या नहीं? पुलिस ने कहा कि इस मामले में मेडिकल बोर्ड की राय आने के बाद ही देवी सिंह राजपुरोहित के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी.

    साध्वी को 28 जनवरी को 2 इंजेक्शन लगाए गए थे. डायनापार और डेक्सोना. डायनापार यानी डाइक्लोफिनैक और डेक्सोना यानी डेक्सामेथासोन. तेज दर्द, सूजन, चोट और सर्जरी के बाद होने वाले दर्द से निजात दिलाने वाली ये दवाएं आम तौर पर एक साथ दी जाती हैं. लेकिन इसकी शर्त है कि इन्हें डॉक्टर की निगरानी में ही दिया जाना जरूरी है. क्योंकि इन्हें दी जाने में बरती गई मामूली लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि कभी-कभार एक ही सीरींज से डाइक्लोफिनैक और डेक्सामेथासोन का इंजेक्शन मरीज के लिए खतरनाक कार्डियोवैस्कुलर इवेंट यानी हार्टफेल की वजह बन जाती है. कई बार इन दवाओं से पेट से संबंधी समस्याएं, सिर चकराने, सिर दर्द या इनफेक्शन यानी संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. यही वजह है कि ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की निगरानी में ही दी जाने की बात कही जाती है.

    लेकिन साध्वी प्रेम बाईसा के मामले में डॉक्टर की निगरानी वाली बात की अनदेखी की गई. अब सवाल यही है कि क्या साध्वी के शरीर में इन दो दवाओं का रिएक्शन हो गया, जिसके चलती उनकी जान चली गई? पुलिस फिलहाल ये पता लगाने में जुटी है. फिलहाल इंजेक्शन लगाने वाला कपाउंडर बेशक डॉक्टर की पर्ची के मुताबिक ही इंजेक्शन लगाने की बात कह रहा है, लेकिन ये भी सच है कि वो पर्ची पुरानी थी. साध्वी ने 28 जनवरी को किसी डॉक्टर से कोई सलाह नहीं ली थी. अजमेर से प्रोग्राम कर लौटने के बाद जब साध्वी की तबीयत बिगड़ी, तो उन्होंने अपने पिता से ट्रिटमेंट करवा देने की बात कही थी. हालांकि अस्पताल जाने के पिता की पेशकश को उन्होंने ठुकरा दिया था.

    एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट के सामने आने के बाद साध्वी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बनी असमंजस की स्थिति भी काफी हद तक साफ हो गई है. क्योंकि इन रिपोर्ट में बताया गया है कि साध्वी के शरीर में ना तो अंदरुनी या बाहरी चोट के निशान थे और ना ही उनके शरीर में कोई ज़हरीली चीज ही पाई गई. यानी उनकी मौत की वजह कुदरती थी. ये और बात है कि कुदरती वजह उन्हें इंजेक्शन में दी गई दवाओं की वजह से बनी या नहीं, इसकी अलग से जांच चल रही है. चूंकि ये मामला एक जानी-मानी युवा साध्वी की रहस्यमयी मौत से जुड़ा था, इसे लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे थे. ऐसे में जोधपुर पुलिस की ओर से बनाई गई एसआईटी ने हर उस पहलू को खंगालने की कोशिश की, जिसका कनेक्शन उनकी मौत के मामले से जुड़ता था.

    मसलन पुलिस ने 28 जनवरी की पूरी टाइमलाइन को रीविजिट करने की कोशिश की, जब उनकी तबीयत बिगड़ने से लेकर, उन्हें इंजेक्शन लगाया गया और फिर बाद में तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें जोधपुर के ही प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया. इसके अलावा पुलिस ने प्रेम बाईसा की मेडिकल हिस्ट्री की भी अलग से एनालिसिस की. पुलिस ने ये पता लगाया कि वो कब से बीमार थी? तबीयत बिगड़ने पर वो कौन-कौन सी दवाएं लेती थीं? उनको लगाए गए इंजेक्शन के मद्देनजर पुलिस ने ड्रग कंट्रोलर से लेकर सीएमएचओ, राजस्थान नर्सिंग काउंसिल समेत कई इकाइयों से बात की. यहां तक कि पुलिस ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से लेकर प्राइवेट अस्पताल तक की अलग से जांच की. यानी हर उस एंगल को एक्सप्लोर करने की कोशिश की, जहां से उनकी मौत में साजिश का कोई भी एंगल जुड़ सकता था. इसके अलावा उनके गांव से लेकर जोधपुर के आश्रम तक उनकी किन-किन से दोस्ती और दुश्मनी थी, पुलिस ने सब चेक किया.

    वैसे तो इस मामले के उलझने की कई वजहें थीं, लेकिन इन वजहों में एक वजह इनकनक्लूसिव पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी थी. यानी एक ऐसी रिपोर्ट जिसने मौत की वजह से पर्दा हटाने की जगह उसे लेकर और ज्यादा संशय पैदा कर दिया था, यही वजह है कि पुलिस को इस केस का आखिरी सच जाने के लिए एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट की जरूरत पड़ी. 

    सूत्रों की मानें तो साध्वी के शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने बताया था कि मौत से पहले उनकी आंतें और पेट के कई अंदरुनी अंग सिकुड़ गए थे. अब सवाल था कि ऐसा किस सूरत में हो सकता है? तो फॉरेंसिक मेडिसीन के एक्सपर्ट्स से इसका जवाब पूछा गया. एक्सपर्ट की माने तो कि ऐसा आम तौर पर किसी बीमारी की सूरत में ही मुमकिन है. जाहिर है साध्वी भी बीमार थीं, लेकिन क्या वो बीमारी इतनी खतरनाक स्टेज पर थी कि उससे उनके अंदरुनी अंग सिकुड़ गए? या फिर रही-सही कसर इंजेक्शन के हेवी डोज ने पूरी कर दी? पुलिस ने मौत की वजह का तो पता लगा लिया है, लेकिन उसे इंजेक्शन के एफेक्ट का सच अब भी जानना बाकी है.

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही शरीर के कुछ अंदरुनी अंगों के लाल पाए जाने की बात भी सामने आई थी. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऐसा इनफेक्शन के साथ-साथ प्वाइजनिंग के मामलों में भी हो सकता है. कई जहरीले पदार्थ ऐसे होते हैं, जो पेट में ऐसा असर दिखाते हैं. ऐसे में पुलिस को उनके शरीर में जहर होने या ना होने का सच जानना था, जो विसरा रिपोर्ट के सामने आने के बाद साफ हो गया. जहर की बात नहीं मिली. पोस्टमार्टम में डॉक्टरों ने पाया था कि साध्वी के हाथ और पांव के नाखुन उनकी मौत के दौरान बिल्कुल नीले पड़ गए थे. कई लोग इसे प्वाइजनिंग की निशानी बता रहे थे. लेकिन फॉरेंसिक मेडिसीन और टॉक्सिकोलॉजी के एक्सपर्ट की माने तो शरीर में ऑक्सीजन की कमी से कई बार ऐसा होता है. इसीलिए अक्सर ये देखा गया है कि हैंगिंग या ड्राउनिंग के केसेज़ में जब किसी की जान जाती है, तो उसके शरीर में भी नाखून नीले पड़ जाते हैं. अब हिस्टोपैथोलॉजिकल एग्जामिनेशन यानी विसरा रिपोर्ट के सामने आने के बाद ये साफ हो गया है कि बीमारी की हालत में उनकी सांस रुक गई, जिसके चलते उनके नाखुनों का रंग बदला था.

    ये तो रही साध्वी को जहर दिए जाने या फिर उनके खिलाफ किसी साजिश की आशंका के मद्देनजर की गई पुलिस की जांच का सच, लेकिन जिस एक मामले ने साध्वी की मौत के केस को सबसे ज्यादा उलझा दिया था, वो था उनकी मौत के बाद उनके इंस्टा हैंडल से पोस्ट किया गया उनका कथित सुसाइड नोट। तो पुलिस ने इस मामले की भी पड़ताल की और इसका सच ढूंढ निकाला.

    छानबीन में सामने आया था कि 28 जनवरी को साध्वी की मौत के बाद खुद उनके पिता वीरमनाथ ने उनके मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर उनके इंस्टा हैंडल से साध्वी के नाम से एक सुसाइड नोट पोस्ट किया था और इस पोस्ट उन्होंने अपने ड्राइवर भोमाराम से लिखवाया था. इस पोस्ट में साध्वी के हवाले से लिखा गया था, 'मैंने हर एक क्षण सनातन प्रचार के लिए जीया. दुनिया में सनातन धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है. आज अंतिम श्वास तक मेरे दिल में सनातन ही है. मेरा सौभाग्य है कि मैंने सनातन धर्म में जन्म लिया और अंतिम श्वास भी सनातन के लिए ली, मेरे जीवन में आदि जगतगुरु शंकराचार्य भगवान, विश्व योग गुरुओं व पूज्य संत महात्माओं का हर पल आशीर्वाद रहा. मैंने आदि गुरु शंकराचार्य और देश के कई महान संत महात्माओं को लिखित पत्र लिखा. अग्निपरीक्षा के लिए निवेदन किया लेकिन प्रकृति को क्या मंजूर था? मैं इस दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा लेकिन ईश्वर और पूज्य संत महात्माओं पर पूर्ण भरोसा है. मेरे जीते जी नहीं तो जाने के बाद तो न्याय मिलेगा.' 

    जाहिर है, इस सुसाइड नोट में वो अपनी मौत की बात भी लिखती हुई दिख रही थी और साथ ही अग्निपरीक्षा देने की पेशकश करने का भी जिक्र कर रही थी, ये पेशकश. जो वो पहले भी वायरल वीडियो के सामने आने के बाद कर चुकी थी. यानी उनकी मौत का कनेक्शन उस वायरल वीडियो से भी जुड़ता है, जिसने उनकी और उनके पिता और गुरु की जिंदगी में भूचाल ला दिया था. ऐसे में पुलिस को सुसाइड नोट और वीडियो वाले मामले की भी जांच करनी थी. पुलिस ने इस मामले की जांच की और ये साफ हुआ कि साध्वी के पिता वीरमनाथ ने बेटी की मौत के बाद जज्बात में आकर उनकी इंस्टा आईडी से वो नोट पोस्ट करवाया था, इसके पीछे कोई साजिश जैसी बात नहीं थी.

    अब ये भी जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर वायरल वीडियो का वो मामला क्या था? 13 जुलाई 2025 यही वो तारीख थी, जब साध्वी प्रेम बाईसा का एक प्राइवेट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इस वीडियो को लेकर तरह-तरह के सवाल उठाए जाने लगे. ये वीडियो जोधपुर के उसी कुटीर आश्रम का बताया जाता है, जहां साध्वी प्रेम बाईसा की रिहायश थी. वीडियो की तारीख के मुताबिक ये तस्वीरें 8 जनवरी 2021 की रात दस बज कर 22 मिनट की हैं. वीडियो में साध्वी एक कमरे में बिस्तर पर लेटी नजर आ रही हैं, जबकि कमरे में आती-जाती एक महिला उनसे बातचीत कर रही है. इसी बीच भगवा वस्त्र पहने,सिर पर पगड़ी लगाए एक शख़्स सीधे साध्वी के कमरे में पहुंचता है और साध्वी के गालों को छू कर उन्हें पुचकारने लगता है. इसके बाद साध्वी बिस्तर से उठती है और उस आदमी के गले लग जाती हैं. वो शख्स भी साध्वी को आलिंगन करते हुए थोड़ी देर के लिए उन्हें गोद में उठा लेता है.

    बस, इसी वीडियो के बहाने सोशल मीडिया पर लोग साध्वी और उनके साथ नजर आ रहे शख्स को जज करने लगते हैं और उनके आचरण पर सवाल उठाए जाने लगते हैं. लेकिन पिता के साथ साध्वी की इन निजी तस्वीरों ने साध्वी और उनके गुरु के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए थे, ये और बात है कि तब साध्वी ने इस वीडियो के लीक होने पर ना सिर्फ आश्रम के ही कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी, बल्कि इसे लेकर अपनी सफाई भी दी थी. साध्वी ने तब बताया था कि ये तस्वीरें तब की हैं, जब वो गहरे अवसाद में थीं और उनके पिता उनसे गले लग कर उन्हें ढांढस बंधा 

  • कांग्रेस का बड़ा कदम! बीजेपी के बागी नारायण चौधरी बने भिवंडी के नए मेयर

    कांग्रेस का बड़ा कदम! बीजेपी के बागी नारायण चौधरी बने भिवंडी के नए मेयर

    भिवंडी

    महाराष्ट्र के भिवंडी में एक नाटकीय राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिली, जहां भाजपा को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके बागी नेता नारायण चौधरी कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी  (एसपी) के समर्थन से मेयर बनकर उभरे. इस साल जनवरी में हुए 23 वार्डों और 90 सीटों वाले भिवंडी-निजामपुर नगर निगम (BNMC) चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. इसने इस नगर निगम में नए सियासी समीकरणों और गठबंधनों को जन्म दिया. पार्षदों की खरीद-फरोख्त और राजनीतिक झड़पों के आरोप लगे.

    विलासराव देशमुख ऑडिटोरियम में शुक्रवार दोपहर 12 बजे हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया हुई, जिसमें नारायण चौधरी को स्पष्ट बहुमत मिला. नारायण चौधरी मेयर चुने गए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार मोमिन तारिक बारी डिप्टी मेयर चुने गए. नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने 30, भाजपा ने 22, शिवसेना ने 12, समाजवादी पार्टी ने 6, कोणार्क विकास अघाड़ी ने 5 और भिवंडी विकास अघाड़ी ने 3 सीटें जीतीं थीं.

    नारायण चौधरी ने 46 के जादुई आंकड़े से दो अधिक यानी 48 वोट हासिल करके मेयर पद हासिल किया. भाजपा की स्नेहा पाटिल को 16 वोट मिले, जबकि कोणार्क विकास अघाड़ी के विलास पाटिल (शिंदे की शिवसेना के समर्थन से)  को 25 वोट प्राप्त हुए. कांग्रेस के मोमिन तारिक बारी 43 वोट पाकर डिप्टी मेयर निर्वाचित हुए. कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) ने भिवंडी में सेक्युलर फ्रंट बनाकर मेयर चुनाव लड़ा. राज्य भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने कहा, 'नारायण चौधरी ने पार्टी की नीति का उल्लंघन किया है. उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.'

    बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस का सेक्युलर फ्रंट

    एनसीपी (एसपी) के लोकसभा सांसद सुरेश म्हात्रे, जिन्हें बलिया मामा के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने इस जीत को भिवंडी की जनता की जीत बताया. उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के चलते कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) का सेक्युलर फ्रंट बनाना जरूरी था. सपा विधायक रईस शेख ने कहा, 'हमने भिवंडी में सेक्युलर फ्रंट बनाया है.' राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा, 'कांग्रेस ने भाजपा या एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन न करने का फैसला किया और अपने वैचारिक रुख से कोई समझौता नहीं किया. कुछ भाजपा पार्षदों ने पार्टी और उसकी विचारधारा छोड़कर सेक्युलर फ्रंट में शामिल होने का फैसला किया, जिससे हमें मेयर और डिप्टी मेयर चुनने में सफलता मिली.'
     
    नारायण चौधरी ने बीजेपी से बगावत की और कुछ बीजेपी पार्षदों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र समूह बनाया. उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन देने का फैसला किया. उन्होंने मेयर चुनाव जीतने के बाद कहा, 'स्थानीय राजनीति आप जानते हैं, मैं सिर्फ विकास पर काम करूंगा.' यह राजनीतिक घटनाक्रम भाजपा के उस अंतिम समय में लिए गए फैसले के बाद हुआ, जिसमें पार्टी ने नारायण चौधरी को मेयर पद के उम्मीदवार के रूप में हटाकर उनकी जगह स्नेहा पाटिल को मैदान में उतारा था. बता दें कि भाजपा में शामिल होने से पहले नारायण चौधरी कांग्रेस में थे.

  • मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम, हेमंत कटारे ने इस्तीफा दिया — जानें वजह

    मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम, हेमंत कटारे ने इस्तीफा दिया — जानें वजह

    भोपाल:
     Madhya Pradesh की राजनीति में हेमंत कटारे के इस्तीफे के बाद अब एक और बयान चर्चा में आ गया है। बताया जा रहा है कि  विधानसभा से निकलते समय अटेर से कांग्रेस विधायक Hemant Katare ने भाजपा विधायक Bhagwandas Sabnani से मजाकिया अंदाज में कहा था ‘भाईसाहब, मुझे भी साथ ले चलिए।’  इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं कि क्या कटारे भाजपा में शामिल होने वाले हैं।

    हालांकि भगवानदास सबनानी ने इन कयासों को खारिज करते हुए कहा कि यह बात केवल मजाक में कही गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे उस समय रुके भी थे और पूछा था कि कटारे को कहां जाना है। उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि कटारे बाद में कहां गए।

    मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल पर कि क्या कटारे भाजपा में शामिल हो सकते हैं, सबनानी ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी भी संभावना की जानकारी नहीं है। 

    क्यों दिया इस्तीफा?

    इस संबंध में संगठन महासचिव डॉ संजय कामले ने जानकारी देते हुए कहा कि हेमंत कटारे ने अपने इस्तीफे में पारिवारिक दायित्वों एवं समय की कमी का उल्लेख किया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में वे अपने विधानसभा क्षेत्र को अपेक्षित समय और ध्यान नहीं दे पा रहे थे, इसी कारण उन्होंने उप नेता प्रतिपक्ष के पद से त्यागपत्र दिया है.
    वे कांग्रेस के साथ थे, हैं और रहेंगे- कामले

    कामले ने यह भी स्पष्ट किया कि हेमंत कटारे का यह इस्तीफा केवल पद से संबंधित है, न कि पार्टी की सदस्यता से. वे कांग्रेस पार्टी के साथ थे, हैं और आगे भी पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के साथ रहेंगे.
    अंतिम फैसला नेतृत्व पर निर्भर- कामले

    इसके साथ ही, उन्होंने बताया कि हेमंत कटारे के उपनेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा स्वीकार किया जाए या नहीं, इसका अंतिम निर्णय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तू पटवारी एवं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के विवेकाधिकार पर निर्भर है.
    आज कटारे की शादी की सालगिरह

    हेमंत कटारे की आज शादी की सालगिरह भी है. उन्होंने आज ही इस्तीफा दे दिया. उनके समर्थक सालगिरह की बधाई दे रहे हैं. 2018 में हेमंत कटारे पर रेप के आरोप लग चुके हैं. बाद में पीड़िता ने अपना बयान बदल लिया. 2019 में छात्रा ने सुसाइड कर लिया. दिसंबर 2024 में हाई कोर्ट ने हेमंत कटारे का राहत दी. हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश की सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. 
    कांग्रेस विधायक बोले- सब ठीक हो जाएगा

    वहीं जौरा से कांग्रेस विधायक Pankaj Upadhyay ने कहा कि कटारे के इस्तीफे की जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली। उन्होंने बताया कि हेमंत कटारे की मैरिज एनिवर्सरी थी और परिवार में कार्यक्रम भी था। वे दिन में उनके साथ थे और काफी खुश नजर आ रहे थे।

    उपाध्याय ने कहा कि कोई गंभीर बात नहीं है। जो भी मामला है, वह पारिवारिक है और जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।

  • गृह ग्राम बगिया में करेंगे अनुष्ठान, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जन्मदिन आज

    गृह ग्राम बगिया में करेंगे अनुष्ठान, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जन्मदिन आज

    रायपुर.

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आज 62वां जन्मदिन है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री आज जशपुर जिले के दौरे पर रहेंगे और अपना जन्मदिन अपने गृह ग्राम बगिया में धार्मिक अनुष्ठान के साथ मनाएंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री साय सुबह मुख्यमंत्री निवास सिविल लाइन रायपुर से रवाना होकर पुलिस ग्राउंड हेलीपैड से हेलीकॉप्टर द्वारा बगिया के लिए प्रस्थान करेंगे।

    बगिया हेलीपैड पर आगमन के बाद वे अपने निज निवास पहुंचेंगे, जहां जन्मदिन के अवसर पर सत्यनारायण व्रत कथा का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम पूर्ण होने के बाद मुख्यमंत्री साय अपराह्न 3.40 बजे बगिया से प्रस्थान कर हेलीकॉप्टर से रायपुर लौटेंगे और शाम करीब 5.20 बजे मुख्यमंत्री निवास पहुंचेंगे।

    निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन
    नहर पारा विकास समिति द्वारा गुरुनानक चौक स्थित लाइंस क्लब परिसर में एक निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया है। यह शिविर सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक आयोजित रहेगा।

    नाट्य मंचन ‘जाणता राजा’ तीसरा
    नाट्य मंचन ‘जाणता राजा’ का तीसरा प्रदर्शन नाट्य मंडली पुणे एवं स्थानीय कलाकारों द्वारा किया जाएगा। यह भव्य मंचन साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित होगा। कार्यक्रम शाम 6.30 बजे से प्रारंभ होगा।

  • अमेरिका का 10% ग्लोबल टैरिफ लागू: भारत समेत किन देशों को होगा फायदा या नुकसान?

    अमेरिका का 10% ग्लोबल टैरिफ लागू: भारत समेत किन देशों को होगा फायदा या नुकसान?

    नई दिल्ली

    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ पर ट्रंप की जोरदार हार हुई है. US Supreme Court ने बड़ा फैसला सुनाते हुए Donald Trump को बड़ा झटका देते हुए उनके द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है. इस हार के बाद ट्रंप ने 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ (10% Global Tariff) लगाने का ऐलान कर दिया है. आइए समझते हैं इसका भारत समेत दुनिया के तमाम देशों पर क्या असर होने वाला है और क्या अब पहले से लागू टैरिफ के बजाय सिर्फ 10% टैरिफ ही देना होगा?

    कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने फोड़ा टैरिफ बम
    सबसे पहले बता दें कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की ओर से US Reciprocal Tariff को अवैध करार दिए जाने के बाद ट्रंप के तेवर गर्म हो गए हैं. कोर्ट के फैसले के कुछ घंटों के बाद ही राष्ट्रपति ने एक कार्यकारी आदेश पर साइन कर दिए और दुनिया के सभी देशों से आयात पर 10 फीसदी का ग्लोबल टैरिफ जड़ दिया. इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपने अकाउंट से एक पोस्ट शेयर कर भी दी है. 

    क्या भारत और दूसरे देशों पर सिर्फ 10% टैरिफ? 
    Donald Trump के टैरिफ को गैरकानूनी बताए जाने और इसके बाद ट्रंप द्वारा नए ग्लोबल टैरिफ (Global Tariff) का ऐलान करने के बाद बड़ा सवाल ये है कि भारत समेत तभी देशों को अब सिर्फ 10% ही टैरिफ देना होगा. तो एएनआई की रिपोर्ट में इसे लेकर व्हाइट हाउस के अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि हां, जब तक कोई अन्य प्राधिकरण लागू नहीं किया जाता, तब तक 10% टैरिफ ही लागू रहेगा. इसका मतलब 18% नहीं, अब भारतीय सामानों के आयात पर अमेरिका में 10 फीसदी टैरिफ रह सकता है. हालांकि, यहां ट्रंप के बयान पर गौर करें, तो उन्होंने कहा था कि 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत 10% वैश्विक टैरिफ मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा. 

    IEEPA की जगह लेगा नया टैरिफ? 
    ट्रंप ने बीते साल 2025 के अप्रैल महीने में अमेरिका के लिए लिब्रेशन डे करार देते हुए टैरिफ का ऐलान किया था, जो 10 फीसदी से 50 फीसदी तक था. ये रेसिप्रोकल टैरिफ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाया था और कोर्ट ने इस संबंध में साफ किया है कि ऐसा करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं है और ये सिर्फ इमरजेंसी के हालात में यूज होता है. ऐसे में अधिकारी ने साफ किया कि हां, ये IEEPA के तहत लागू किए गए टैरिफ की जगह लेगा, जब तक कोई नया सिस्टम लागू नहीं किया जाता. 

    कितने दिन तक लागू रहेगा नया टैरिफ? 
    Donald Trump ने सुप्रीम कोर्ट में मिली टैरिफ पर हार के बाद आनन-फानन में 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत 10% वैश्विक टैरिफ लगाने का आदेश दे दिया. इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया है कि करीब पांच महीने या 150 दिनों के लिए लागू रहेगा.

    क्या ट्रंप लगा सकते हैं अधिक टैरिफ?  
    इस सवाल का जबाव भी खुद डोनाल्ड ट्रंप ने दिया है और प्रेस कॉन्फ्रेंस में 10% ग्लोबल टैरिफ पर बात करते हुए संकेत दिया है कि उचित टैरिफ तय करने के लिए जरूरी जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर Tariff Hike किया जा सकता है. 

    ट्रंप ने क्यों लगाया नया ग्लोबल टैरिफ? 
    White House के अधिकारी ने बताया है कि अमेरिका का नया 10% ग्लोबल टैरिफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संरक्षणवादी व्यापार एजेंडे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भुगतान संतुलन संबंधी समस्याओं और अनुचित व्यापार प्रथाओं का समाधान करना है. इसके साथ ही उन्होंने सभी ट्रेड पार्टनर्स को Trade Deals का पालन करने की सलाह भी दी है. 

  • ‘डबल’ लाभ का ऐलान: केंद्र सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को दी बड़ी राहत

    ‘डबल’ लाभ का ऐलान: केंद्र सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को दी बड़ी राहत

    नई दिल्ली

    केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बड़ी राहत भरी खबर दी है। अब गंभीर बीमारी के इलाज के बाद भारी-भरकम बिलों के रीम्बर्समेंट के लिए सरकारी दफ्तरों की लंबी फाइलों और 'साहब' की मंजूरी का महीनों इंतजार नहीं करना होगा। सरकार ने क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए वित्तीय शक्तियों का विकेंद्रीकरण कर दिया है।

    क्या है नया नियम? (10 लाख तक की सीधी मंजूरी)
    16 फरवरी, 2026 को जारी नए ऑफिस मेमोरेंडम (OM) के अनुसार, अब मंत्रालयों के विभाग प्रमुख (HOD) बिना किसी बाहरी वित्तीय सलाह (IFD) के 10 लाख रुपये तक के मेडिकल क्लेम को सीधे मंजूरी दे सकेंगे।

    पहले की सीमा: केवल 5 लाख रुपये।
    अब: 10 लाख रुपये तक के बिलों का निपटारा स्थानीय स्तर पर ही हो जाएगा।

    तेजी से पैसा पाने के लिए 2 जरूरी शर्तें
    अगर आप चाहते हैं कि आपका क्लेम बिना किसी देरी के पास हो, तो इन दो बातों का ध्यान रखना होगा:

    नियमों का पालन: क्लेम में CGHS या CS(MA) के मौजूदा नियमों में किसी भी प्रकार की छूट (Relaxation) न मांगी गई हो।

    निर्धारित दरें: अस्पताल का बिल पूरी तरह से सरकार द्वारा तय (CGHS Rates) दरों के अनुसार होना चाहिए।

    नोट: यदि बिल सरकारी रेट से अधिक है और आप अतिरिक्त भुगतान के लिए छूट चाहते हैं, तो फाइल अभी भी पुरानी लंबी प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ेगी।

    सेटेलमेंट लिमिट में भी भारी इजाफा
    सरकार ने क्लेम सेटलमेंट की लिमिट को भी 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिलेगा जिनके बिल पूरी तरह सरकारी दरों पर आधारित हैं। इससे भुगतान में होने वाली तकनीकी देरी को लगभग खत्म कर दिया गया है।

    आवेदन प्रक्रिया: पेंशनभोगी ध्यान दें
    इलाज के बाद पैसा वापस पाने की प्रक्रिया अब बेहद सरल है।

    समय सीमा: अस्पताल से डिस्चार्ज होने के 6 महीने के भीतर आवेदन करना अनिवार्य है।

    कहां करें आवेदन: पेंशनभोगी अपने संबंधित वेलनेस सेंटर के CMO (Chief Medical Officer) को फाइल जमा करें।

    जरूरी दस्तावेज की चेकलिस्ट:
        भरा हुआ क्लेम फॉर्म।
        डिस्चार्ज समरी और रेफरल स्लिप।
        अस्पताल के ओरिजिनल बिल और रसीदें।
        इमरजेंसी की स्थिति में 'इमरजेंसी सर्टिफिकेट'।
        CGHS कार्ड की कॉपी और कैंसिल चेक।

    एंबुलेंस का खर्च भी होगा वापस
    क्या आपको पता है कि अस्पताल ले जाने वाली एंबुलेंस का किराया भी सरकार देती है? नियम के मुताबिक, शहर के भीतर एंबुलेंस का खर्च तब मिलता है जब डॉक्टर यह प्रमाणित कर दे कि मरीज की हालत ऐसी थी कि उसे किसी दूसरे वाहन से ले जाना जानलेवा हो सकता था।

     

  • पर्सनैलिटी राइट प्रोटेक्शन : बिना इजाजत काजोल की फोटो-वीडियो इस्तेमाल करना अपराध

    पर्सनैलिटी राइट प्रोटेक्शन : बिना इजाजत काजोल की फोटो-वीडियो इस्तेमाल करना अपराध

     

    मुंबई,

    साल 2025 में बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने पर्सनैलिटी राइट्स के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था, लेकिन अब उनकी पत्नी काजोल के लिए भी कोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट का प्रोटेक्शन दिया है।

    पर्सनैलिटी राइट्स को सुरक्षा देते हुए कोर्ट ने साफ किया है कि अब बिना अनुमति के अभिनेत्री के नाम, फोटो और वीडियो का इस्तेमाल करना अपराध होगा।

    दिल्ली हाई कोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट के प्रोटेक्शन का आदेश देते हुए अभिनेत्री के विरुद्ध प्रकाशित अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने एआई और डीपफेक जैसी तकनीकों के माध्यम से काजोल के नाम, छवि अथवा व्यक्तित्व के किसी भी प्रकार के दुरुपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। उच्च न्यायालय ने विभिन्न प्रतिवादी संस्थाओं को यह भी निर्देश दिया कि वे काजोल की तस्वीर या पहचान का प्रयोग कर किसी भी प्रकार के व्यावसायिक उत्पादों की बिक्री न करें। साथ ही अश्लील सामग्री को हटाने का आदेश दिया है।

    एआई और डीपफेक के जरिए इन दिनों सोशल मीडिया पर अवैध तरीके से उत्पादों के प्रचार और अश्लील साइटों पर अभिनेता और अभिनेत्रियों की तस्वीरों का इस्तेमाल बढ़ गया है। कुछ साइट बिना इजाजत के धड़ल्ले से एआई की आड़ में सेलिब्रिटीज की वीडियो का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए डीपफेक फोटो और वीडियो का भी चलन बढ़ गया है। ऐसे में इसे किसी भी अभिनेता या अभिनेत्री की छवि पर सीधा हमला माना गया है। अभिनेता विवेक ओबरॉय के मामले में कोर्ट ने साफ कहा था कि तकनीक का इस्तेमाल कर किसी की छवि को नुकसान पहुंचाना भी अपराध है।

    काजोल के अलावा, अजय देवगन ने भी बीते साल पर्सनैलिटी राइट्स के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने अभिनेता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सभी अवैध साइट और एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो को हटाने का आदेश दिया था और आगे भी इस्तेमाल पर रोक लगाई थी।

    पर्सनैलिटी राइट्स के मामले में हिंदी सिनेमा से लेकर दक्षिण भारतीय सिनेमा के सेलेब्स कोर्ट का रुख कर चुके हैं। दक्षिण भारतीय सिनेमा से आंध्र प्रदेश के डिप्टी चीफ मिनिस्टर पवन कल्याण, नागार्जुन और जूनियर एनटीआर को कोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट्स सुरक्षा प्रदान की है और हिंदी सिनेमा से आर माधवन, विवेक ओबरॉय, सलमान खान, अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन भी पर्सनैलिटी राइट्स मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं।

     

  • PM विरोध में यूथ कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शन, AI समिट में शर्टलेस प्रोटेस्ट से मचा हड़कंप, कई गिरफ्तार

    PM विरोध में यूथ कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शन, AI समिट में शर्टलेस प्रोटेस्ट से मचा हड़कंप, कई गिरफ्तार

    नई दिल्ली
    नई दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इंपैक्ट समिट के दौरान शुक्रवार को यूथ कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदर्शन के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। जानकारी के मुताबिक प्रदर्शनकारी शर्टलेस होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। दिल्ली पुलिस ने जुड़े सूत्रों ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से बताया कि यूथ कांग्रेस के सदस्य होने का दावा करने वाले करीब 10 लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "चार से पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है।" जानकारी के मुताबिक प्रदर्शन में शामिल लोग QR-कोड वाले पास का इस्तेमाल कर इवेंट में घुसे थे।

    फिलहाल हिरासत में लिए गए सभी लोगों को पूछताछ के लिए तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सभी जरूरी कानूनी कदम उठाएंगे।"

    भड़की बीजेपी
    भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी का नाम लेकर इस घटना पर नाराजगी जताई है। भाजपा के IT सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित मालवीय ने इसे पूरे देश देश के लिए शर्मिंदगी का विषय बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “ऐसे समय में जब भारत एक मशहूर ग्लोबल AI समिट होस्ट कर रहा है, जिसमें टेक्नोलॉजी में अपने इनोवेशन और लीडरशिप को दिखाया जा रहा है, कांग्रेस पार्टी ने इज्जत देने के बजाय हंगामे को चुना।”

    उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए लिखा,
    राहुल गांधी की लीडरशिप में, कांग्रेस वर्कर्स ने टॉपलेस होकर समारोह में हंगामा किया, यह काम साफ तौर पर दुनिया के मंच पर भारत को शर्मिंदा करने के लिए किया गया था। जब देश खुद को ग्लोबल टेक्नोलॉजी पावरहाउस के तौर पर बनाने की कोशिश कर रहा है, तो ऐसा बर्ताव सिर्फ उन लोगों के फायदे में है जो भारत को गिरते हुए देखना चाहते हैं। राजनैतिक विरोध एक लोकतांत्रिक हक है, लेकिन भारत की ग्लोबल इमेज को नुकसान पहुंचाना नहीं। भारत इससे बेहतर का हकदार है।”

     

  • दलित युवा की नियुक्ति से साधा जातीय समीकरण?, विनोद जाखड़ बने NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष

    दलित युवा की नियुक्ति से साधा जातीय समीकरण?, विनोद जाखड़ बने NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष

    जयपुर.

    अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने राजस्थान की छात्र राजनीति के कद्दावर चेहरे विनोद जाखड़ को NSUI का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह न केवल विनोद जाखड़ के लिए, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए गौरव का विषय है क्योंकि NSUI के 55 साल के इतिहास में पहली बार है जब कमान राजस्थान के किसी नेता को सौंपी है। विनोद जाखड़ वर्तमान में राजस्थान NSUI के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

    प्रदेश अध्यक्ष से राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर
    जनवरी 2024 में विनोद जाखड़ को राजस्थान NSUI का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान:
    छात्र हितों का संघर्ष: उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी में आरएसएस (RSS) के कार्यक्रमों के विरोध से लेकर छात्रसंघ चुनाव बहाली तक कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया।
    जेल और संघर्ष: छात्र हितों की लड़ाई में उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा।
    शीर्ष नेतृत्व का भरोसा: राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के 'यूथ विजन' में फिट बैठने के कारण उन्हें अब राष्ट्रीय स्तर पर यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    राजस्थान की राजनीति पर क्या होगा असर?
    विनोद जाखड़ की इस नियुक्ति के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं:
    जातीय समीकरण: कांग्रेस ने एक दलित युवा को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर राजस्थान और देश के अन्य राज्यों में दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।
    युवा नेतृत्व: राजस्थान से पहली बार किसी का इस पद पर पहुँचना, प्रदेश के अन्य युवा छात्र नेताओं के लिए दिल्ली के दरवाजे खोलने जैसा है।

    संघर्ष की कहानी
    विनोद जाखड़ की कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। जयपुर के पास एक साधारण परिवार में जन्मे विनोद के पिता पेशे से मिस्त्री (प्लास्टर का काम करने वाले) हैं।
    बचपन का संघर्ष: जब विनोद 7 साल के थे, उनका परिवार काम की तलाश में जयपुर शिफ्ट हो गया।
    शिक्षा: उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा उसी स्कूल में प्राप्त की जहाँ उनके पिता मजदूरी करते थे। बाद में राजस्थान यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त करते हुए वे छात्र राजनीति में सक्रिय हुए।
    दलित चेहरा: विनोद जाखड़ एससी (SC) वर्ग से आते हैं और वे राजस्थान कॉलेज के पहले दलित अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

    2018 की वो 'ऐतिहासिक' जीत
    विनोद जाखड़ की असली पहचान साल 2018 के राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव से हुई। उस समय NSUI ने विनोद को टिकट नहीं दिया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे। उन्होंने न केवल चुनाव जीता बल्कि पूरे प्रदेश की छात्र राजनीति में अपनी साख जमा ली। जीत के बाद वे पुनः कांग्रेस और NSUI के साथ जुड़ गए।

     

  • सर्दियों में गाजर क्यों है सुपरफूड? जानिए इसके चौंकाने वाले फायदे

    सर्दियों में गाजर क्यों है सुपरफूड? जानिए इसके चौंकाने वाले फायदे

    गाजर में कई तरह के पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। खासतौर से इसमें बीटा कैरोटीन, विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी 1, कई तरह के खनिज लवण व एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं।

    सर्दी का मौसम आते ही बाजार में लाल-लाल गाजर बेहद सस्ते दाम में मिलने लगती हैं। इतना ही नहीं, इस मौसम में लोग गाजर की सब्जी से लेकर उसका जूस तक पीना पसंद करते हैं। यूं तो गाजर को कई तहर से खाया जाता है लेकिन क्या आप इससे मिलने वाले फायदों से वाकिफ हैं। नहीं न, तो चलिए जानते हैं गाजर से होने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में-
     
    प्रचुर होते हैं पोषक तत्व
    गाजर में कई तरह के पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। खासतौर से इसमें बीटा कैरोटीन, विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी 1, कई तरह के खनिज लवण व एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं।

    आंखों को रखेगा तंदुरूस्त
    गाजर का सेवन आंखों के लिए विशेष रूप से लाभदायी माना गया है। ऐसा इसमें मौजूद बीटा कैरोटीन व विटामिन ए की वजह से होता है। इसलिए जो लोग गाजर का सेवन पर्याप्त मात्रा में करते हैं, उनकी आंखों की रोशनी लंबे समय तक दुरूस्त तो रहती है ही, साथ ही रतौंधी व मोतियाबिंद जैसी बीमारियां होने की आशंका भी कम हो जाती है।
     
    सदा रखे जवां
    समय के पहिए को रोक पाना भले ही किसी के लिए संभव न हो लेकिन लंबे समय तक जवां बने रहने के लिए कुछ उपाय तो किए ही जा सकते हैं। इन्हीं में से एक है गाजर का सेवन करना। दरअसल, इसमें बीटा-कैरोटीन और एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। जो विभिन्न कोशिकाओं की मरम्मत करते हैं और एजिंग के साइन्स को लंबे समय तक आने से रोकते हैं। इतना ही नहीं, गाजर का सेवन रूखी त्वचा, पिंपल्स, पिगमेंटेशन आदि समस्या से भी निजात दिलाते हैं।
     
    हृदय के लिए लाभदायक
    गाजर हृदय के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है। दरअसल, इसमें कैरोटीनॉयड्स पाए जाते हैं जो किसी भी तरह के हृदय रोग की आशंका को कम करते हैं। इसके अतिरिक्त इसमें बीटा-कैरोटीन के साथ-साथ अल्फा कैरोटीन और ल्यूटिन भी पाया जाता है। गाजर का नियमित सेवन कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी नियंत्रित करने में मदद करता है।

    दांतों की सफाई
    गाजर प्लैक और खाद्य कणों को मुंह से निकालकर दांतों व पूरे मुंहे की सफाई करने का काम करता है। ठीक उसी तरह, जिस प्रकार एक टूथब्रश व टूथपेस्ट अपना काम करता है। गाजर में पाए जाने वाले मिनरल्स दांतों को किसी भी तरह की क्षति से बखूबी बचाते हैं। इसके अतिरिक्त गाजर मसूड़ों को उत्तेजित करके अधिक लार उत्पन्न करने में मदद करता है और यह लार क्षारीय होने के कारण कैविटी बनाने वाले बैक्टीरिया को संतुलित करके दांतों की रक्षा करता है।