राजस्थानराज्य

PM किसान योजना के तहत किसानों को मिला दिवाली से पहले तोहफा, 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक ट्रांसफर

जयपुर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज शुक्रवार 30 अक्टूबर को गुजरात के बनासकांठा से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 24वीं किस्त जारी की। इस किस्त के तहत राजस्थान समेत देशभर के 9 करोड़ से भी ज़्यादा किसानों के बैंक खातों में 18 हज़ार 690 करोड़ रुपए से भी अधिक की राशि सीधे जमा हो गई। सरकार के अनुसार ये राशि किसानों के कल्याण और आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

केंद्र सरकार की ओर से जानकारी देते हुए बताया गया है कि प्रधानमंत्री ने कृषि भंडारण, प्रसंस्करण और संबंधित अवसंरचना को मजबूत करने के लिए कृषि अवसंरचना कोष के तहत स्थापित 521 इकाइयों को भी राष्ट्र को समर्पित की। साथ ही उच्च-मूल्य वाली बागवानी फसलों को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए 12 बागवानी क्लस्टरों का उद्घाटन किया।

प्रधानमंत्री के गुजरात में हुए कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में किसान शामिल रहे। यह आयोजन किसानों के कल्याण, समृद्धि और सशक्तिकरण के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराने के साथ-साथ पीएम-किसान और विभाग की अन्य प्रमुख पहल के महत्व को एक महत्वपूर्ण मंच देना रहा।

बता दें कि पीएम-किसान की इससे पहले अब तक 23 किस्तें जारो हो चुकीं थीं, जिसके माध्यम से पात्र किसानों को 447 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहले ही वितरित की जा चुकी है। यह योजना प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से पात्र किसान परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिससे उन्हें कृषि और घरेलू खर्चों को पूरा करने में मदद मिलती है तथा उनकी आजीविका सुरक्षा को संबल मिलता है।

विकसित भारत के सबसे मजबूत स्तंभ हैं किसान : पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधन में कहा कि देश के करोड़ों छोटे किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि की नई किस्त भी पहुंची है। हमारे किसान विकसित भारत के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक हैं और हमारी सरकार ने हमेशा किसानों के कल्याण को, किसानों को सशक्त करने को प्राथमिकता दी है। 2013-14 की तुलना में देश का कृषि बजट अब 5 गुना से अधिक हो गया है। पीएम किसान सम्मान निधि अब करोड़ों छोटे किसानों के जीवन का हिस्सा बन गई है। आज करीब 10 करोड़ किसानों के खातों में 18,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि भेजी गई है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'पिछले कुछ सालों में वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच खाद की कीमतों में बहुत उछाल आया लेकिन किसानों को समर्पित हमारी सरकार ने इसका बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया। इसपर सरकार ने करीब 16 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। हमारा निरंतर प्रयास है कि सिंचाई पर किसान की लागत भी कम हो, इसमें पीएम-कुसुम योजना की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसके तहत अभी तक करीब 12 लाख सोलर पंप दिए जा चुके हैं।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध
सरकार का मानना है कि कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो करोड़ों किसानों की आजीविका का आधार है और देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सरकार ने पिछले 12 वर्षों के दौरान किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहल की हैं।

प्रमुख पहल में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), और 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ शामिल हैं। इन उपायों का उद्देश्य वित्तीय सहायता प्रदान करना, जोखिम सुरक्षा को मजबूत करना, कृषि ऋण तक पहुंच में सुधार करना और किसानों के समग्र सशक्तिकरण के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित कृषि शासन को बढ़ावा देना है।

टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहन
सरकार खाद्य तेलों पर राष्ट्रीय मिशन और दालों में आत्मनिर्भरता मिशन जैसी पहल के माध्यम से कृषि में आत्मनिर्भरता को भी आगे बढ़ा रही है। इसके अलावा, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन देशभर में क्लस्टरों के विकास के माध्यम से किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में कटाई-उपरांत प्रबंधन (पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट) और कृषि अवसंरचना के महत्व को पहचानते हुए, कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) गोदामों, कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं, प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्रों और अन्य आवश्यक कृषि अवसंरचना में निवेश को बढ़ावा देता है। एआईएफ के तहत 2.28 लाख से अधिक परियोजनाओं में लगभग 1.75 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिसने देशभर में महत्वपूर्ण कृषि अवसंरचना के विकास को समर्थन दिया है। इन निवेशों से भंडारण और प्रसंस्करण क्षमताओं के मजबूत होने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आने, बाजार तक पहुंच में सुधार होने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर प्रतिफल मिलने की उम्मीद है।

सरकार उच्च-मूल्य वाली कृषि गतिविधियों, विशेष रूप से बागवानी, की ओर विविधीकरण को भी बढ़ावा दे रही है ताकि आय के अवसर बढ़ें और खेती अधिक लाभकारी बने। बागवानी क्लस्टरों का विकास बागवानी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और उच्च-मूल्य वाली फसलों के उत्पादन और विपणन को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ये पहल किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने, कृषि अवसंरचना का आधुनिकीकरण करने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप एक समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर कृषि क्षेत्र के निर्माण के सरकारी प्रयासों को और गति प्रदान करेंगी।

Related Articles

Back to top button