उत्तर प्रदेशराज्य

आधुनिकता के दौर में भी कायम मिट्टी के दीयों की चमक, त्योहार से कुम्हारों को रोजगार की उम्मीद

लखनऊ
 दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही कुम्हार परिवारों में मिट्टी के दीये बनाने की रफ्तार तेज हो जाती है। आधुनिकता के दौर में भी मिट्टी के दीयों का महत्व कम नहीं हुआ है।

आज भी लोग दीपावली पर घरों को रोशन करने के लिए मिट्टी के दीये खरीदते हैं। वहीं, कुम्हार परिवारों के लिए दीपावली का त्योहार सालभर की मेहनत की कमाई का खास अवसर लेकर आता है। मिट्टी के दीये बेचकर मिलने वाली रकम से ही कई परिवार दीपावली का त्योहार मनाते हैं।

मंझी गांव निवासी सुमेर प्रजापति ने बताया कि उनके परिवार की कई पीढ़ियां मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने का काम करती चली आ रही हैं। इसी परंपरा को वह भी अपने परिवार के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। दीपावली का पर्व नजदीक आते ही परिवार के सभी सदस्य दीये बनाने में जुट जाते हैं।

कोई मिट्टी तैयार करता है तो कोई चाक पर दीये बनाता है। इसके बाद उन्हें सुखाकर पकाने और बिक्री के लिए तैयार किया जाता है

सुमेर ने बताया कि दीपावली के अवसर पर वह करीब 40 से 50 हजार मिट्टी के दीये बनाकर बाजार में बेचते हैं। मिट्टी के दीये बनाना उनके परिवार का पुश्तैनी काम है। इसी काम से परिवार की आजीविका चलती है।

 

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